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ऑपरेशनल ऋणदाता की ओर से उसका वकील बकाया ऋण के लिए डिमांड नोटिस जारी कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
18 Dec 2017 10:47 AM GMT
ऑपरेशनल ऋणदाता की ओर से उसका वकील बकाया ऋण के लिए डिमांड नोटिस जारी कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट
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इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के दो महत्त्वपूर्ण मुद्दों के बारे में मैक्वारी बैंक लिमिटेड बनाम शिल्पी केबल टेक्नोलोजी लिमिटेड मामले की  सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऑपरेशनल ऋणदाता की ओर से उसका वकील बकाये ऋण के लिए डिमांड नोटिस जारी कर सकता है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि कोड की धारा 9(3)(c) के प्रावधान इंसोल्वेंसी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जरूरी है।

न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेश को स्थगित कर दिया जिसमें उसने धारा 9(3)(c) के तहत इंसोल्वेंसी की प्रक्रिया शुरू करने के आवेदन को खारिज कर दिया था। एनसीएलएटी ने कहा था कि एडवोकेट/वकील धारा 8 के तहत ऑपरेशनल ऋणदाता की ओर से नोटिस नहीं जारी कर सकता।

कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि जब संसद यह चाहती है कि मुकदमा लड़ने के लिए या मुकदमे की स्थिति बनने से पहले की स्थिति से निपटने के लिए एक वकील को शामिल किया जाए तो इसका अर्थ यह निकालना चाहिए कि जब धारा 8 के तहत नोटिस जारी करने की बात उठती है तो वकील को इससे अलग रखा जाना चाहिए। बेंच ने कहा, “कोड की धारा 8 के तहत इस वाक्य को कि ‘एक ऑपरेशनल ऋणदाता ऋण नहीं चुकाए जाने की स्थिति में डिमांड नोटिस भेजता है...’ को ऑपरेशनल ऋणदाता के अधिकृत एजेंट और वकील सहित’ पढ़ा जाना चाहिए।”

इस संदर्भ में बेंच ने बयराम पेस्तनजी गाड़ीवाला बनाम यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया था कि मामले में सुलह (आदेश XXIII नियम 3 के तहत) लिखित में होना चाहिए और इस पर सभी पक्षों का हस्ताक्षर होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अपने मुवक्किल की ओर से वकील द्वारा तैयार सुलह को क़ानून में मान्यता होगी।

धारा 9(3)(c) आवश्यक नहीं

एनसीएलएटी ने भी आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि आवेदन में ऑपरेशनल ऋणदाता के खाते का संचालन करने वाले वित्तीय संस्थानों की ओर से जारी सर्टिफिकेट संलग्न नहीं है। इसका अर्थ यह हुआ कि कॉर्पोरेट ऋण लेने वाले ने बकाया ऑपरेशनल ऋण का भुगतान नहीं किया है जैसा कि कोड की धारा 9(3) (c ) में कहा गया है।

धारा 9(3) के उप-उपबंध (c) का जिक्र करते हुए बेंच ने कहा कि यह स्पष्ट है कि ऑपरेशनल ऋणदाता के खाते का संचालन करने वाले वित्तीय संस्थानों की ओर से इस बात का प्रमाणपत्र कि बकाया ऑपरेशनल ऋण चुकाया नहीं गया है यह कोड के तहत इंसोल्वेंसी की प्रक्रिया को शुरू करने के लिए जिम्मेदार नहीं है।


 
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