Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

SC ने कर्नाटक हाईकोर्ट के तंबाकू उत्पादों पर 85% चेतावनी को रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से किया इंकार [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
24 Dec 2017 5:42 AM GMT
SC ने कर्नाटक हाईकोर्ट के तंबाकू उत्पादों पर 85% चेतावनी को रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से किया इंकार [आर्डर पढ़े]
x

सुप्रीम  कोर्ट ने शुक्रवार को कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील  पर अंतरिम आदेश पारित करने से इंकार कर दिया जिसके तहत तंबाकू उत्पादों के दोनों तरफ 85 प्रतिशत सचित्र चेतावनी के अनिवार्य नियमों को रद्द कर दिया गया था।

सर्दियों की छुट्टियों के दौरान मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की बेंच ने कहा क्योंकि हाईकोर्ट के फैसले की प्रति अभी तक उपलब्ध नहीं हुई है इसलिए बेंच कोई अंतरिम आदेश नहीं दे सकती।

उमेश नारायण और अन्य याचिकाकर्ताओं के लिए पेश वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर, आर.एस.

सूरी और ऐश्वर्या भाटी ने अंतरिम रोक की मांग  की थी लेकिन बेंच ने इस मामले की आगे की सुनवाई के लिए 8 जनवरी, 2018 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट  ने हाईकोर्ट से 15 दिसंबर के फैसले को अपलोड करने का अनुरोध किया। कोर्ट  ने स्पष्ट किया कि निर्माता इस आधार  पर किसी भी इक्विटी का दावा नहीं कर सकते कि कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया गया है। बेंच ने तंबाकू संस्थान, केंद्र सरकार और अन्य निर्माताओं को इस मामले में अपने जवाब दाखिल  के लिए कहा है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार हाईकोर्ट  ने सिगरेट और अन्य तम्बाकू उत्पाद (व्यापार और वाणिज्य के विज्ञापन और विनियमन का निषेध) के तहत तैयार किए गए सिगरेट्स और अन्य तंबाकू उत्पाद (पैकेजिंग और लेबलिंग) संशोधन नियमों, 2014 के संचालन, कार्यान्वयन और प्रभाव को रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा कि तंबाकू उत्पादों के दोनों किनारों पर 85% सचित्र चेतावनी के नियमों का कार्यान्वयन उन सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं  द्वारा शक्तिशाली तंबाकू उद्योग के खिलाफ बहुत ही लंबी, बोझिल और कष्टदायक लड़ाई का परिणाम था, जिनके जीवन और परिवार को तंबाकू द्वारा तबाह कर दिया गया । सुप्रीम कोर्ट ने इस अत्यंत  यात्रा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसने तम्बाकू उत्पादों के विज्ञापन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया था। खासतौर पर उस समय जब तंबाकू उद्योग युवाओं को आकर्षित करने के लिए सभी चमकदार विज्ञापन और मेगा आयोजनों के प्रायोजन में सबसे आगे होता था। उन्होंने कहा कि तम्बाकू उद्योग हमेशा तम्बाकू उत्पादों को 'शांत', 'मर्द', 'उत्तम दर्जे', 'विद्रोही', 'अमीर', 'आधुनिक' आदि के रूप में प्रोजेक्ट करने का प्रयास करता है। स्टाइलिश और फैशनेबल तंबाकू केवल एकमात्र उद्योग है, जो हर साल अपने उपभोक्ताओं को मृत्यु या विकलांगता के कारण खो देता है। उन्होंने कहा कि ग्राफिक सचित्र चेतावनियां जो दोनों पक्षों के पैकेज का 85% हिस्सा हैं, न केवल तंबाकू उत्पादों के मौजूदा उपभोक्ताओं को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को समझने में सहायता करेंगे, बल्कि युवा पीढ़ी को तम्बाकू नशाओं से मुक्त करने में भी मदद मिलेगी। यह यह भी सुनिश्चित करता है कि तम्बाकू उत्पाद स्वयं सरकारी स्वास्थ्य संदेश प्रसारित करने और सरकार को बिना किसी खर्च के  उपभोग के प्रभावी उपकरण बनते हैं, क्योंकि सरकार आज सार्वजनिक स्वास्थ्य संदेशों को प्रिंट, ऑडियो विजुअल और मीडिया के अन्य रूपों में फैलाने के लिए भारी मात्रा में खर्च करती है । उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से तंबाकू के खिलाफ भारत की लड़ाई पर गंभीर और असर पड़ने वाला प्रभाव होगा, जो देश की अगली पीढ़ी पर विपरीत असर डालेगा।


 
Next Story