मुख्य सुर्खियां

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा, राज्य बार काउंसिल बार एसोसिएशन के चुनावों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता [आर्डर पढ़े]
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा, राज्य बार काउंसिल बार एसोसिएशन के चुनावों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता [आर्डर पढ़े]

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि राज्य बार काउंसिल के पास बार एसोसिएशन के चुनावों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और विजय कुमार शुक्ला की पीठ ने अपने फैसले में कहा, “एडवोकेट्स एक्ट, 1961 को सिर्फ पढने से ही यह स्पष्ट पता चलता है कि न तो अधिनियम और न ही एडवोकेट वेलफेयर फंड एक्ट, 1982 बार एसोसिएशन द्वारा कराए गए चुनावों में हस्तक्षेप कर सकता है। एडवोकेट वेलफेयर फंड एक्ट, 1982 को बार एसोसिएशन मान्यता देता है ताकि वह बार एसोसिएशन के सदस्य को वेलफेयर...

शादी की समाप्ति की घोषणा के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एक दूसरे का फोटो सोशल मीडिया सहित कहीं भी नहीं डालें [आर्डर पढ़े]
शादी की समाप्ति की घोषणा के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एक दूसरे का फोटो सोशल मीडिया सहित कहीं भी नहीं डालें [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने शादी को विघटित करते हुए एक बहुत ही दिलचस्प निर्देश दिया : न तो पति और न ही पत्नी सोशल मीडिया या ऑनलाइन सहित एक दूसरे का फोटो किसी भी जगह किसी भी रूप में नहीं डालेंगे।”सुप्रीम कोर्ट ने पति और पत्नी दोनों को एक शिकायत की सुनवाई के दौरान कोर्ट में बुलाया था। कोर्ट में यह शिकायत पत्नी ने की थी।इन लोगों ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा, “वे विवाद को ख़त्म करना चाहते हैं और इसलिए उनकी शादी को समाप्त कर दिया जाए और याचिकाकर्ता पति को अंतिम फैसले के रूप में गुजारा भत्ता...

जनहित याचिका पर जवाब देरी से दाखिल करने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पीएमओ और क़ानून मंत्रालय पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाया [आर्डर पढ़े]
जनहित याचिका पर जवाब देरी से दाखिल करने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पीएमओ और क़ानून मंत्रालय पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाया [आर्डर पढ़े]

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर देरी से जवाब दाखिल करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और क़ानून मंत्रालय पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाया है।न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की पीठ ने सुनील कंडू की याचिका पर यह आदेश सुनाया जिन्होंने कहा था कि नियंत्रक और महालेखाकार द्वारा हर साल 5000 रिपोर्ट पेश की जाती है पर केंद्र सरकार उनमें से सिर्फ 10 रिपोर्टों पर ही गौर करती है। कुंडू ने पिछले 10 सालों में सीएजी ऑडिट में उठाई गई आपत्तियों पर सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं...

दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा, मेरिटल रेप आईपीसी की धारा 498A के तहत क्रूरता के रूप में पहले ही अपराध घोषित
दिल्ली सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा, मेरिटल रेप आईपीसी की धारा 498A के तहत क्रूरता के रूप में पहले ही अपराध घोषित

दिल्ली सरकार ने वृहस्पतिवार को दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि मेरिटल रेप को आईपीसी की धारा 498A के तहत पहले ही क्रूरता घोषित किया जा चुका है और इसलिए इसको दंडित करने के लिए किसी नए प्रावधान की जरूरत नहीं है।धारा 498A उस समय लागू होता है जब किसी विवाहित महिला के साथ उसका पति या रिश्तेदार क्रूरता से पेश आता है। क्रूरता को जानबूझकर किया गया ऐसा व्यवहार माना गया है जो किसी महिला को आत्महत्या करने पर मजबूर कर दे या उस महिला की जान, शरीय या स्वास्थ्य को गंभीर ख़तरा (मानसिक या शारीरिक) उत्पन्न हो जाए।दिल्ली...

मुक़दमे का समय कम करने, अनावश्यक स्थगन रोकने और लंबित मामलों की संख्या में कमी के लिए नया दिल्ली हाई कोर्ट (ओरिजिनल साइड) रूल्स अधिसूचित [नियम पढ़ें]
मुक़दमे का समय कम करने, अनावश्यक स्थगन रोकने और लंबित मामलों की संख्या में कमी के लिए नया दिल्ली हाई कोर्ट (ओरिजिनल साइड) रूल्स अधिसूचित [नियम पढ़ें]

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट (ओरिजिनल साइड) रूल्स, 2018 को अधिसूचित कर दिया है। इसमें मुक़दमे के समय में कमी करने, बेतुके मुकदमों को समाप्त करने, जरूरत से अधिक स्थगन पर पाबंदी लगाने और जहाँ भी देरी गैर जरूरी लगता है वहाँ पर लागत वसूलने जैसे प्रावधान किए गए हैं।इस नए नियम को नियम 1967 के स्थान पर लाया गया है।सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न हाई कोर्टों में मुक़दमे में लगने वाले समय को कम करने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली थी और न्यायपालिका से लंबे समय से चले आ रहे दीवानी मामलों को जल्दी...

सुप्रीम कोर्ट ने दो दशक से जेल में बंद कैदियों को अस्थायी तौर पर रिहा करने के आदेश दिए [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने दो दशक से जेल में बंद कैदियों को अस्थायी तौर पर रिहा करने के आदेश दिए [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने दो दशक तक जेल में बंद दो दोषियों को अस्थायी तौर पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।जस्टिस कूरियन जोसेफ और जस्टिस अमिताव रॉय की बेंच  ने मुन्ना और चिड्ढा सिंह द्वारा दायर दो अलग-अलग रिट याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा कि रिट याचिका में लंबित आदेश के तहत याचिकाकर्ता जेल के अधीक्षक को संतुष्ट करने के लिए निजी मुचलका देकर रिहा हो सकते हैं।  बेंच ने कहा: "इस तथ्य के संबंध में हम ये मानते हैं कि याचिकाकर्ता पहले से ही 21 (18) वास्तविक वर्षों की जेल और लगभग 28 (24) साल की छूट के साथ जेल काट...

रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क को उसके पंजीकृत मालिक को बताए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क को उसके पंजीकृत मालिक को बताए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में “क्लीटोलिन’ ट्रेडमार्क को रिकॉर्ड रजिस्टर से हटाने के खिलाफ एक याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह किसी ट्रेडमार्क को तभी हटाया जा सकता है जब ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999 की धारा 25(3)के तहत इसकी पूर्व सूचना दी जाए।न्यायमूर्ति आर एम बोर्डे और न्यायमूर्ति आरजी केतकर की पीठ ने क्लीनेज प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर गौर किया। यह कंपनी वाशिंग और क्लीनिंग में प्रयुक्त होने वाले सामान बनाती है।मामले की पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता ने...

राष्ट्रीय महत्त्व के मामलों की सुनवाई को लाइव दिखाने और उनकी वीडिओ रिकॉर्डिंग के लिए वरिष्ठ एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका [याचिका पढ़े]
राष्ट्रीय महत्त्व के मामलों की सुनवाई को लाइव दिखाने और उनकी वीडिओ रिकॉर्डिंग के लिए वरिष्ठ एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका [याचिका पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर राष्ट्रीय महत्त्व के मामलों को लाइव दिखाने और उसकी विडियो रिकॉर्डिंग करने की मांग की है।अपनी याचिका में जयसिंह ने कहा है कि इस तरह के मामलों को लाइव दिखाने से कोर्ट तक लोगों की पहुँच बढ़ेगी और मामले के बारे में गलत रिपोर्टिंग की आशंका कम हो जाएगी। याचिका में हालांकि कहा गया है कि कोर्ट चाहे तो इस तरह के वीडियोग्राफी पर प्रतिबन्ध लगा सकता है अगर पारिवारिक क़ानून और आपराधिक क़ानून को देखते हुए निजता के प्रतिकारी हित की बात...

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की नियुक्ति रद्द की [आर्डर पढ़े]
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की नियुक्ति रद्द की [आर्डर पढ़े]

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बुधवार को पंजाब के मुख्मंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह के मुख्य प्रधान सचिव (सीपीएस) सुरेश कुमार की नियुक्ति को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह नियुक्ति पूरी तरह अवैध और संवैधानिक नियमों का उल्लंघन है।न्यायमूर्ति रंजन गुप्ता ने एडवोकेट रमनदीप सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि सीपीएस से उम्मीद थी कि वह मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में उनके प्रधान सचिव में निहित अधिकारों का प्रयोग करेगा। उन्होंने कहा कि यह असंवैधानिक है क्योंकि ये सार्वभौमिक कार्य हैं जो किसी और को...

मेडिकल कॉलेज घोटाले में मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ सीजेएआर की शिकायत कोर्ट की अवमानना : वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने लिखा पत्र [पत्र पढ़ें]
मेडिकल कॉलेज घोटाले में मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ सीजेएआर की शिकायत कोर्ट की अवमानना : वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने लिखा पत्र [पत्र पढ़ें]

कैंपेन फॉर जुडिशल एकाउंटिबिलिटी एंड रिफॉर्म्स (सीजेएआर) ने मेडिकल कॉलेज घोटाले में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ आतंरिक जांच की मांग की है लेकिन वरिष्ठ एडवोकेट विकास सिंह का कहना है कि सीजेएआर की शिकायत में अनेक खामियां हैं और इसलिए सीजेएआर के खिलाफ अवमानना का मामला चलाने की बात कही है.यह शिकायत सीजेएआर की कार्यपालक समिति ने सुप्रीम कोर्ट के पांच वरिष्ठतम जजों, न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति आर गोगोई, न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति के जोसफ और न्यायमूर्ति एके सिकरी से की।...

हड़ताल करने वाली राजनीतिक पार्टियों को नियंत्रित नहीं कर पाना राज्य की आपराधिक विफलता : केरल हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
हड़ताल करने वाली राजनीतिक पार्टियों को नियंत्रित नहीं कर पाना राज्य की आपराधिक विफलता : केरल हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

केरल हाई कोर्ट ने हड़ताल को बढ़ावा देने के लिए राजनीतिक पार्टियों की आलोचना की है। कोर्ट ने एक ड्राईवर को 7 लाख रुपए का मुआवजा दिए जाने को सही ठहराते हुए उक्त बातें कही। एक राजनीतिक पार्टी द्वारा आयोजित हड़ताल के दौरान उग्र भीड़ द्वारा पथराव किए जाने के कारण इस ड्राईवर की एक आँख चली गई।कोर्ट ने इस घटना के लिए राज्य और हिंसा भड़काने वालों को जिम्मेदार ठहराया था। राज्य ने मुआवजे की 25 फीसदी राशि देने के आदेश को कोर्ट में चुनौती दी है।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अंटोनी डोमिनिक और डामा सेशाद्री...

अमीर खुसरो पार्क के रख रखाव और उसमें अतिक्रमण रोकने के लिए दिल्ली वक्फ़ बोर्ड ने दिल्ली हाई कोर्ट में पॉलिसी ड्राफ्ट पेश किया
अमीर खुसरो पार्क के रख रखाव और उसमें अतिक्रमण रोकने के लिए दिल्ली वक्फ़ बोर्ड ने दिल्ली हाई कोर्ट में पॉलिसी ड्राफ्ट पेश किया

दिल्ली का अमीर खुसरो पार्क, जो कि तिकोना कब्रगाह के नाम से भी प्रसिद्ध है, के रखरखाव और उसमें अतिक्रमण को रोकने के लिए दिल्ली वक्फ़ बोर्ड ने दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को एक नीतिगत खाका पेश किया। एक “मॉडल हरित कब्रगाह” के रूप में इसका प्रबंधन किया जाना है।वक्फ़ बोर्ड ने कहा है कि इस ड्राफ्ट नीति को एक प्रबंध समिति द्वारा लागू करने की जरूरत है ताकि यहाँ दफ़न को विनियमित किया जा सके। ड्राफ्ट में स्थाई कब्र का भी विरोध किया गया है।इस ड्राफ्ट नीति में इस जगह की सुरक्षा, इसमें होने वाले दफ़न, इसके...

मणिपुर फर्जी मुठभेड़ में एफआईआर दायर करने में देरी पर सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
मणिपुर फर्जी मुठभेड़ में एफआईआर दायर करने में देरी पर सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मदन बी लोकुर और यूयू ललित की विशेष पीठ ने मणिपुर में हुए फर्जी मुठभेड़ों में अब तक एफआईआर नहीं दायर कर पाने के कारण मंगलवार को सीबीआई को फटकार लगाई।सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई 2017 को अपने फैसले में कहा था, “यह उचित होगा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) इन फर्जी मुठभेड़ों और सुरक्षा बालों की ओर से बदले की कार्रवाई की जांच करे। इसके अनुरूप, सीबीआई के निदेशक को निर्देश दिया जाता है कि वह पांच अधिकारियों का एक समूह बनाए और तीन टेबल्स में जो रिकॉर्ड दिए गए हैं उनकी जांच करे और...

सिर्फ आपराधिक मामलों में बरी हो जाने का मतलब यह नहीं कि उस व्यक्ति का चरित्र अच्छा है और वह न्यायिक अधिकारी के पद के लायक है: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सिर्फ आपराधिक मामलों में बरी हो जाने का मतलब यह नहीं कि उस व्यक्ति का चरित्र अच्छा है और वह न्यायिक अधिकारी के पद के लायक है: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आशुतोष पवार बनाम हाई कोर्ट ऑफ़ मध्य प्रदेश मामले में कहा कि समझौता के आधार पर या अन्य कारणों से आपराधिक अदालत द्वारा बरी किये जाने का मतलब यह नहीं है कि उस व्यक्ति का चरित्र अच्छा है और वह न्यायिक अधिकारी के पद पर नियुक्ति के लिए लायक है।मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता, रविशंकर झा और नंदिता दूबे की पूर्ण पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारी से आम नागरिकों की तुलना में बहुत ही उच्च दर्जे के आचरण की उम्मीद की जाती है और यहाँ तक कि क़ानून के पेशे में शामिल पेशेवर लोगों से भी ज्यादा...

प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति के साथ, भ्रष्टाचार के तरीके भी तरक्की पर : इलाहाबाद हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति के साथ, भ्रष्टाचार के तरीके भी तरक्की पर : इलाहाबाद हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को भ्रष्टाचार में बड़े पैमाने पर वृद्धि को उजागर करते हुए कहा कि आजकल ईमानदार लोगों को मिलना मुश्किल हो गया है।जस्टिस  सुधीर अग्रवाल और जस्टिस अजित कुमार की बेंच  ने कहा, "आज एक ईमानदार व्यक्ति की खोज एक दुर्लभ काम है। बेईमानी और भ्रष्टाचार नियमित कार्य हैं। ईमानदारी कम और वास्तव में एक लुप्तप्राय:  प्रजाति बन गई है व हमें ईमानदार और निष्पक्ष लोगों की रक्षा करने के लिए कोई योजना लानी होगी( जैसाकि दुर्लभ जानवरों के संबंध में किया जा रहा है) । सच है कि ऐसे व्यक्तियों...

जरूरी नहीं कि सिर्फ पूर्व मुख्य सचिव ही राज्य मुख्य सूचना आयुक्त बनें : उत्तराखंड हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
जरूरी नहीं कि सिर्फ पूर्व मुख्य सचिव ही राज्य मुख्य सूचना आयुक्त बनें : उत्तराखंड हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि ये कोई जरूरी नहीं है कि सिर्फ पूर्व मुख्य सचिव को ही राज्य का मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने पाया था कि पहले जो सभी मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किए गए थे वो पूर्व मुख्य सचिव थे।राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के खिलाफ एक चुनौती को खारिज करते हुए जस्टिस यू.सी. ध्यानी और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने ये टिप्पणी की।  याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने दलील दी थी कि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त का पद रिटायर नौकरशाहों के लिए...

स्कूलों की खिड़कियों में शीशे नहीं, शौचालय एक किलोमीटर दूर; हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर रजिस्टर किया पीआइएल [आर्डर पढ़े]
स्कूलों की खिड़कियों में शीशे नहीं, शौचालय एक किलोमीटर दूर; हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर रजिस्टर किया पीआइएल [आर्डर पढ़े]

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अखबार में शिमला कुपवी स्थित एक स्कूल की स्थिति के बारे में छपी खबर पर खुद संज्ञान लिया है।अमर उजाला में एक खबर छपी थी कि सरकारी मध्य विद्यालय जुरु-शिलाल, कुपवी, शिमला के एक परिसर में स्थित है। इसमें न तो खुली खिड़की है और न ही इनमें पल्ला लगा है। ये खिड़कियाँ जूट की बोड़ियों से ढके हैं। बच्चों को शौचालय की सुविधा एक किलोमीटर दूर उपलब्ध है। इस स्कूल में 20 लड़कियों सहित कुल 34 बच्चे पढ़ते हैं।न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने इसे जनहित याचिका के रूप में पेश करने को कहा...

बिजली की आपूर्ति को मानवाधिकार माना जाना चाहिए : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
बिजली की आपूर्ति को मानवाधिकार माना जाना चाहिए : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हाल में कहा कि बिजली आपूर्ति को मानवाधिकार का हिस्सा माना जाना चाहिए।न्यायमूर्ति संजय के अग्रवाल ने कहा, “ बिजली तक पहुँच होने को मानवाधिकार माना जाना चाहिए और बिजली क़ानून के तहत इनकी जरूरतें संतोषप्रद स्थिति तक पूरी की जानी चाहिए। अगर इसकी उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की जाती है तो इसे मानवाधिकार का उल्लंघन माना जाएगा।”न्यायमूर्ति अग्रवाल ने रायगढ़ के रहने वाले एनआर शर्मा, छोटेलाल यादव और देवेन्द्र बोहरा की याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त बातें कही। ये तीनों ही लोग मे. इंड...

राजनीतिक शरण माँगना भारत की संप्रभुता के खिलाफ नहीं;पासपोर्ट नहीं देने का यह आधार नहीं हो सकता: दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
राजनीतिक शरण माँगना भारत की संप्रभुता के खिलाफ नहीं;पासपोर्ट नहीं देने का यह आधार नहीं हो सकता: दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि भारतीय पासपोर्ट पर किसी देश की यात्रा पर जाना और फिर बाद में उस देश में राजनीतिक शरण मांगना “भारत की संप्रभुता और अखंडता के प्रतिकूल” नहीं है। इसलिए पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6(1)(a) के अधीन उस व्यक्ति को पासपोर्ट नहीं देना उचित नहीं है।न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने इस मामले के बारे में कहा, “...किसी देश की संप्रभुता और अखंडता एक मजबूत परिकल्पना है और यहाँ-वहाँ किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत कार्रवाई जैसे किसी दूसरे देश में...

किसी अवयस्क की ओर से मुकदमा कोई भी दायर कर सकता है, इसके लिए कोर्ट की अनुमति की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
किसी अवयस्क की ओर से मुकदमा कोई भी दायर कर सकता है, इसके लिए कोर्ट की अनुमति की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

किसी अवयस्क की ओर से याचिका दायर करने की प्रक्रिया के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस बारे में कोर्ट द्वारा मित्र की नियुक्ति के बारे में न तो कि प्रावधान है और न ही इस तरह की किसी नियुक्ति के लिए कोर्ट की अनुमति की जरूरत है। कोर्ट ने नागैयाह बनाम चोवदम्मा  मामले का हवाला देते हुए उक्त बातें कही।न्यायमूर्ति अरुण मिश्र और न्यायमूर्ति मोहन एम शंतानागौदर की पीठ ने इस बारे में कर्नाटक हाई कोर्ट के एक फैसले को रद्द कर दिया जिसमें कोर्ट ने एक अवयस्क की उस याचिका को खारिज कर दिया जो उसने अपने...