मुख्य सुर्खियां

सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल आधार पर मरणासन्न रूप से बीमार विचाराधीन कैदी को जमानत दी  [आदेश पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल आधार पर मरणासन्न रूप से बीमार विचाराधीन कैदी को जमानत दी [आदेश पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक बीमार विचाराधीन कैदी को जमानत दी है जिसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 420, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया था।न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर बानुमति की पीठ के सामने 77 वर्षीय  व्यक्ति का केस था जो प्राकृतिक दिनचर्या करने में  भी  असमर्थ है और विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है। याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील अंजना प्रकाश और वकील नमित सक्सेना ने किया था। याचिकाकर्ता की तरफ से यह तर्क दिया गया कि अदालत की एक संविधान पीठ...

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह को फॉर्च्यून ने विश्व के 50 महानतम नेताओं की सूची में शामिल किया
वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह को फॉर्च्यून ने विश्व के 50 महानतम नेताओं की सूची में शामिल किया

जिस दिन सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया मामले में उनकी दलीलों के खिलाफ कुछ कठोर टिप्पणियां की, तभी भारत की पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह  को फॉर्च्यून पत्रिका ने 2018 के विश्व के 50 महानतम नेताओं में से एक के रूप में नामित किया है। जयसिंह ने बैंगलोर विश्वविद्यालय से 1962 में अपनी बैचलर ऑफ आर्ट की डिग्री पूरी की और बॉम्बे विश्वविद्यालय से एलएलएम पूरा करने के लिए चली गईं। उन्होंने 1960 के दशक में अभ्यास करना शुरू किया और तब से वो कई मामलों में पहला क्रेडिट पा चुकी हैं।उन्हें...

दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : माँ-बाप से कहा, पसंद के अधिकार के हनन और उसको जबरन मानसिक अस्पताल भेजने के एवज में बेटी को मुआवजा दें [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : माँ-बाप से कहा, पसंद के अधिकार के हनन और उसको जबरन मानसिक अस्पताल भेजने के एवज में बेटी को मुआवजा दें [निर्णय पढ़ें]

हादिया मामले में फैसले के बाद एक और बहुत ही अहम फैसला आया है। यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया है कि लोगों के पसंद के अधिकार और इसलिए जीवन, स्वतंत्रता, निजता और गरिमा को ख़तरा उस व्यक्ति के अपने माँ-बाप से आता है। कोर्ट ने एक लड़की के माँ-बाप से कहा है कि वह अपनी बेटी को तीन लाख रुपए का मुआवजा दे जिसको उसने संगीत के शिक्षक के घर से उठाया था और उसको एक दिन और एक रात मानसिक अस्पताल में गुजारने के लिए बाध्य किया जो कि एमएचए की धारा 19 और अनुच्छेद 21 का साफ़...

लोक अदालत के फैसले के खिलाफ अपील नहीं; बहुत सीमित मामलों में ही रिट याचिका दायर करने की अनुमति : इलाहाबाद हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
लोक अदालत के फैसले के खिलाफ अपील नहीं; बहुत सीमित मामलों में ही रिट याचिका दायर करने की अनुमति : इलाहाबाद हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा है कि लोक अदालत के फैसले के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती और संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत रिट याचिका दायर करने का अवसर भी सीमित है।वर्तमान मामले में एक महिला ने लोक अदालत द्वारा तलाक के एक फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। महिला ने कहा कि यह फैसला देते हुए फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 और विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।न्यायमूर्ति अजय लाम्बा और न्यायमूर्ति अनंत कुमार की पीठ ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम,...

बैंक के लिए क्रेडिट कार्ड का बकाया वसूलना कोई भड़काऊ काम नहीं : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
बैंक के लिए क्रेडिट कार्ड का बकाया वसूलना कोई भड़काऊ काम नहीं : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि बैंकों की ओर से क्रेडिट कार्ड का बकाया वसूलना कोई भड़काऊ कार्य नहीं है।न्यायमूर्ति पीडी नाइक ने रायगड के सत्र न्यायाधीश के इस बारे में आदेश को ख़ारिज कर दिया। सत्र न्यायाधीश ने आरोपी द्वारा दिए गए आवेदन को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने आरोपी बैंक कर्मचारी एआर सतीश की अपील को स्वीकार कर लिया।मामले की पृष्ठभूमिएफआईआर भारत पेट्रोलियम में कार्य करने वाले शंकर देवर ने दर्ज कराया था। उसके पास तीन अलग अलग बैंकों का क्रेडिट कार्ड था जिसका प्रयोग वह सामान खरीदने के लिए करता...

आरोपी का दूसरी शादी करने की बात सिर्फ मान लेना बहुविवाह मामले को साबित करने का साक्ष्य नहीं हो सकता : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
आरोपी का दूसरी शादी करने की बात सिर्फ मान लेना बहुविवाह मामले को साबित करने का साक्ष्य नहीं हो सकता : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि आरोपी द्वारा दूसरे विवाह की बात सिर्फ मान लेना से ये साबित नहीं होता कि उसने बहुविवाह का अपराध किया है।द्विविवाह (आईपीसी की धारा 494 ) के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की अपील को अनुमति देते हुए न्यायमूर्ति एएस गडकरी ने कहा कि रिकॉर्ड के आधार पर कोई सबूत नहीं है कि आरोपी ने कानून के जनादेश के अनुसार आवश्यक और आवश्यक समारोहों के अनुसरण में दूसरा विवाह किया।इस मामले में आदमी ने अपनी पहली पत्नी को छोड़ दिया और फिर दूसरी महिला से शादी की  जिसने बाद में आत्महत्या कर ली। उस...

प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 6(2) के तहत पिछले प्रभाव से नोटिस का प्रावधान नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 6(2) के तहत पिछले प्रभाव से नोटिस का प्रावधान नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने एससीएम सोलिफर्ट लिमिटेड बनाम भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग मामले में कहा कि प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 6(2) के तहत पिछली प्रभाव से कोई सूचना नहीं दी जा सकती और ऐसा किया जाता है तो तो यह इस अधिनियम का उल्लंघन होगा।वर्तमान मामले में शेयरों की पहली और दूसरी खरीद के बारे में नियमतः नहीं बताने पर कंपनी को दंडित किया। कंपनी ने कहा कि प्रस्तावित संयोजन की अनुमति मिलने के बाद उस पर दंड नहीं लगाया जाना चाहिए था और अगर नियमों का कोई उल्लंघन हुआ है तो वह तकनीकी था और ऐसा जानबूझकर नहीं किया...

सामुदायिक सेवा के नाम पर बलात्कार के आरोपी को जमानत देना गैर जरूरी : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सामुदायिक सेवा के नाम पर बलात्कार के आरोपी को जमानत देना गैर जरूरी : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाई कोर्ट ने बलात्कार के आरोपी 26 साल के एक युवक को निचली अदालत से मिली जमानत को निरस्त कर दिया। इस युवक ने वंचित तबके के बच्चों को पढ़ाने जैसे सामुदायिक सेवा का प्रस्ताव दिया था और कोर्ट ने इस आधार पर उसे जमानत दे दी थी।न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने निचली अदालत के जमानत देने के आदेश को खारिज कर दिया और कहा कि सत्र न्यायाधीश ने खुद ही कहा था कि इस स्थिति में उसको जमानत नहीं दिया जा सकता।न्यायमूर्ति सचदेवा ने 5 फरवरी 2018 को अपने आदेश में कहा था कि इस समय आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती पर बाद...

सरकारी क्षेत्र की कंपनियों में विधि अधिकारी के लिए अनुभव आवश्यक होना मनमाना नहीं : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
सरकारी क्षेत्र की कंपनियों में विधि अधिकारी के लिए अनुभव आवश्यक होना मनमाना नहीं : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाई कोर्ट ने गत सप्ताह अपने फैसले में कहा कि सरकारी/अर्ध सरकारी/सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों/राष्ट्रीयकृत बैंकों/बीएसई या एनएसई में अधिसूचित कंपनी में विधि अधिकारी की नौकरी के लिए एक साल के अनुभव की आवश्यक शर्त मनमाना नहीं है और यह अवसरों की समानता के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है।न्यायमूर्ति सुनील गौड़ ने कहा, कहा, “...अनुभव से उपरोक्त कंपनियों और संस्थाओं में विधि अधिकारी के रूप में उसके कार्य को आसान बनाता है। ऐसा नहीं है कि वकील इससे पूरी तरह अलग हैं। विज्ञापन के अनुसार, एक वकील के रूप...

उड़ान में सुरक्षा संबंधी विनियमनों की अनदेखी करने पर जेट एयरवेज के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका; नोटिस जारी
उड़ान में सुरक्षा संबंधी विनियमनों की अनदेखी करने पर जेट एयरवेज के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका; नोटिस जारी

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को एक पत्रकार की जनहित याचिका पर केंद्र, नागर विमानन निदेशालय (डीजीसीए) और जेट एयरवेज को नोटिस जारी किया। याचिका में कहा गया है कि जेट एयरवेज अनधिकृत लोगों विमान चालक दल के सदस्य के रूप में एक “सामान्य घोषणा” (जीडी) के तहत विमान में जाने की इजाजत देकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय उड़ान सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर रहा है।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और सी हरि शंकर की पीठ ने दिल्ली के इस पत्रकार रजनीश कपूर की याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।याचिका में...

दशकों तक मुकदमेबाजी करने वाले ‘चिरकालीन’ वादी की ‘ सहनशक्ति’ की ‘ सराहना’ करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने लगाया 50000 का जुर्माना [निर्णय पढ़ें]
दशकों तक मुकदमेबाजी करने वाले ‘चिरकालीन’ वादी की ‘ सहनशक्ति’ की ‘ सराहना’ करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने लगाया 50000 का जुर्माना [निर्णय पढ़ें]

हम यह उल्लेख कर सकते हैं कि हमारे सामने अपील का रिकॉर्ड बताता है कि अपीलकर्ताओं द्वारा पुरानी याचिकाओं रूप में उनकी स्थिति की पुष्टि करने वाली कुछ अन्य कार्यवाही भी शुरू की गईं, पीठ ने कहा। जिस दृढता और सहनशक्ति के साथअपीलकर्ता दशकों से मुकदमेबाजी कर रहे हैं, उनकी प्रशंसा  की जानी चाहिए, लेकिन न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने ये कहते हुए कई अदालतों को घुमाने वाली याचिका को खारिज करते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया।ये मुकदमेबाजी 1967 से शुरू हुई जिसमें...

कलकत्ता हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति शीघ्र करने और हड़ताल ख़त्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी [याचिका पढ़े]
कलकत्ता हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति शीघ्र करने और हड़ताल ख़त्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी [याचिका पढ़े]

यूथ बार एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया नामक एक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कलकत्ता हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति में तेजी लाने और कोर्ट में इस समय चल रहे हड़ताल को ख़त्म कराने की मांग की है।याचिका में देश भर में बार एसोसिएशन द्वारा किए जा रहे हड़ताल को विनियमित किये जाने के बारे में निर्देश दिए जाने की मांग भी की गई है।एडवोकेट मंजू जेटली के माध्यम से दायर इस याचिका की सुनवाई संभवतः 20 अप्रैल को होगी।याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट केंद्र को कलकत्ता हाई कोर्ट व अन्य हाई कोर्टों में जजों के...

पत्नी को फ्लोरिडा कोर्ट में दाखिल तलाक केस में कार्रवाई से रोकने की मांग लेकर पहुंचे पति की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की [निर्णय पढ़ें]
पत्नी को फ्लोरिडा कोर्ट में दाखिल तलाक केस में कार्रवाई से रोकने की मांग लेकर पहुंचे पति की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने एक पति की उस याचिका को खारिज कर दिया कि जिसमें उसने अपनी पत्नी को फ्लोरिडा (अमेरिका) अदालत में दायर की गई याचिका का पालन करने से रोकने के लिए मुकदमा विरोधी निषेधाज्ञा की मांग की थी। पत्नी ने फ्लोरिडा की अदालत में विवाह के अपरिहार्य टूटने के आधार पर तलाक की अर्जी दाखिल की है। पति ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में अर्जी दी थी, जिसमें  जिला अदालत के आदेश के खिलाफ उसकी चुनौती को खारिज कर दिया था। जिला अदालत ने पत्नी के खिलाफ अंतरिम...

सुप्रीम कोर्ट ने GIDC की कानूनी सलाहकार के आवेदन पर BCI को पुनर्विचार करने को कहा [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने GIDC की कानूनी सलाहकार के आवेदन पर BCI को पुनर्विचार करने को कहा [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को जलपा प्रदीपभाई देसाई के नामांकन पर पुनर्विचार करने के लिए कहा है, जिन्हें गुजरात औद्योगिक विकास निगम के कानूनी परामर्शदाता के तौर पर काम करने की वजह से एडवोकेट के रूप में नामांकन करने की अनुमति नहीं दी गई थी। " किसी भी अंतिम राय को व्यक्त किए बिना, प्रथम दृष्टया, हमें प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता के नामांकन के मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा पुनर्विचार की आवश्यकता है क्योंकि याचिकाकर्ता गुजरात औद्योगिक विकास निगम (जीआईडीसी) का पूर्णकालिक...

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, फैमिली कोर्ट अनिवासी भारतीय महिला को स्काइप के माध्यम से तलाक की शर्तों पर अपनी सहमति देने की अनुमति दे [निर्णय पढ़ें]
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा, फैमिली कोर्ट अनिवासी भारतीय महिला को स्काइप के माध्यम से तलाक की शर्तों पर अपनी सहमति देने की अनुमति दे [निर्णय पढ़ें]

एक महत्त्वपूर्ण फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि सहमति से तलाक के लिए अर्जी एक पंजीकृत वकील के माध्यम से दायर किया जा सकता है। कोर्ट ने बांद्रा के फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया कि वह स्काइप या किसी अन्य तकनीक के माध्यम से सहमति की शर्तों की रिकॉर्डिंग की अनुमति दे।न्यायमूर्ति भारती डांगरे ने हर्षदा देशमुख द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में उन्होंने तलाक की उनकी अर्जी को फैमिली कोर्ट द्वारा खारिज करने के आदेश को निरस्त करने की मांग की है।पृष्ठभूमिहर्षदा और उसके पति...

एफआईआर निरस्त हो जाने के बाद रोजगार चाहने वाले किसी उम्मीदवार के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकला जा सकता : त्रिपुरा हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
एफआईआर निरस्त हो जाने के बाद रोजगार चाहने वाले किसी उम्मीदवार के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकला जा सकता : त्रिपुरा हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]

त्रिपुरा हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई उम्मीदवार अपने खिलाफ दायर एफआईआर को हाई कोर्ट द्वारा निरस्त किये जाने के बाद रोजगार चाहता है तो इसका गलत निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए।एक उम्मीदवार जो कि हाई कोर्ट में ग्रुप-D के लिए चुना गया था, की दावेदारी हाई कोर्ट ने इसलिए रद्द कर दी क्योंकि एक समय उसके खिलाफ इम्मोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट, 1956 के तहत एफआईआर दायर किया गया था। हालांकि उसके आग्रह पर हाई कोर्ट ने अथॉरिटीज को निर्देश दिया था कि वे इस पर विचार करें। पर इसको दुबारा इस आधार पर रद्द कर...

सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएस में भर्ती के लिए सीमित प्रतिस्पर्धी परीक्षा को समाप्त करने के केंद्र के निर्णय को सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएस में भर्ती के लिए सीमित प्रतिस्पर्धी परीक्षा को समाप्त करने के केंद्र के निर्णय को सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने आईपीएस की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार द्वारा आयोजित सीमित प्रतिस्पर्धी परीक्षा (एलसीई) को समाप्त करने के निर्णय को सही ठहराया है। सरकार ने कहा है कि ऐसा आम लोगों के हित में किया गया है।चुनौतीवर्ष 2012 में यूपीएससी ने एलसीई के माध्यम से आईपीएस में भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे और लिखित परीक्षा और साक्षात्कार आयोजित किए गए थे पर आज तक इस परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं किया गया। इस परीक्षा के लिए भारतीय पुलिस सेवा (भर्ती) संशोधित नियम, 2011 के द्वारा एलसीई शुरू की जो कि इस सेवा में...

अभियुक्त के खिलाफ बलात्कार का मामला सिर्फ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि पीड़ित ने सह-आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया: उड़ीसा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अभियुक्त के खिलाफ बलात्कार का मामला सिर्फ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि पीड़ित ने सह-आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया: उड़ीसा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

यह न्यायालय किसी चीज को मानकर नहीं चल सकता और याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को इस आधार पर रद्द नहीं कर सकता कि सह आरोपियों को बरी कर दिया गया क्योंकि पीड़ित ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया, बेंच ने कहा उड़ीसा उच्च न्यायालय ने कहा  है कि ट्रायल के  दौरान सह-आरोपी के मामले में पीड़ित द्वारा अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं करना  आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का आधार नहीं हो सकता। इस मामले में सीआरपीसी की धारा 161 और 164  के तहत पीड़िता के बयान दर्ज करने के बाद...

साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 केवल तभी लागू हो सकती है यदि इकबालिया बयानों से कुछ नया तथ्य सामने आए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 केवल तभी लागू हो सकती है यदि इकबालिया बयानों से कुछ नया तथ्य सामने आए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

पुलिस का ये दावा कि आरोपी से ये चीजें बरामद की गई हैं, हो सकता है कि इन्हें पुलिस ने ही प्लांट किया हो,  बेंच ने कहा। सुप्रीम कोर्ट ने नवनीतकृष्णन बनाम पुलिस निरीक्षक द्वारा राज्य मामले में तय कानूनी बिंदू  को दोहराया है कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 केवल तभी लागू होती है जब इकबालिया बयान के चलते कोई नया तथ्य सामने आता है। इसकी के साथ कोर्ट ने हत्या के मामले में सजा को रद्द कर दिया।दरअसल तीन लोगों को जॉन बोस्को और माधन का अपहरण करने का आरोप लगाया गया और कहा गया कि तीनों ने एक रस्सी का उपयोग करके...

आठ साल पुराने संबंध के दौरान हुए सहवास को बलात्कार कहना मुश्किल है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
आठ साल पुराने संबंध के दौरान हुए सहवास को बलात्कार कहना मुश्किल है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

महिला ने आरोप लगाया था कि वे पति-पत्नी की तरह रह रहे थे“शादी का झांसा देकर बलात्कार करने” के मामले को निरस्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आठ साल तक चले संबंधों के दौरान हुए सहवास को “बलात्कार” बताना मुश्किल है।वर्तमान मामले में शिकायतकर्ता ने खुद ही कहा था कि वे पिछले आठ वर्षों से पति-पत्नी की तरह रह रहे थे और यह आदमी अब उससे दूर भागना चाहता है और उसको धोखा देना चाहता है। उसने इस व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार और धोखाधडी का आरोप लगाते हुए शिकायत की।इस पुरुष ने कर्नाटक हाई कोर्ट में अपील की पर...