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जरूरी नहीं कि सिर्फ पूर्व मुख्य सचिव ही राज्य मुख्य सूचना आयुक्त बनें : उत्तराखंड हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
16 Jan 2018 3:05 PM GMT
जरूरी नहीं कि सिर्फ पूर्व मुख्य सचिव ही राज्य मुख्य सूचना आयुक्त बनें : उत्तराखंड हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि ये कोई जरूरी नहीं है कि सिर्फ पूर्व मुख्य सचिव को ही राज्य का मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने पाया था कि पहले जो सभी मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त किए गए थे वो पूर्व मुख्य सचिव थे।

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के खिलाफ एक चुनौती को खारिज करते हुए जस्टिस यू.सी. ध्यानी और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने ये टिप्पणी की।  याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने दलील दी थी कि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त का पद रिटायर नौकरशाहों

 के लिए 'डंपिंग ग्राउंड' बन गया है, जिन्हें राज्य सरकार के प्रति उनकी वफादारी के लिए पुरस्कृत किया जाता है। जब नियुक्ति खुद वफादारी के लिए एक इनाम है, तो इस तरह के नियुक्त व्यक्ति की निष्पक्षता और विश्वसनीयता खुद संदिग्ध हो जाती है।

 उन्होंने कहा कि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए अर्हता आरटीआई अधिनियम की धारा 15 (5) के तहत प्रदान की गई है, जिसे तहत किसी सेवानिवृत्त नौकरशाह की ही नियुक्ति की आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह निर्धारित करती है कि सार्वजनिक जीवन में कानून, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, मास मीडिया या प्रशासन में व्यापक ज्ञान और अनुभव वाला व्यक्ति श्रेष्ठ होगा।

इस दलील पर  सहमति जताते हुए बेंच ने कहा कि उच्च पदों पर नियुक्तियों के मामले में  निष्पक्षता चयन का पैमाना होना चाहिए और पहले पूर्व मुख्य सचिवों को मुख्य सूचना आयुक्त बनाया गया।  "असंख्य कानून हैं जहां यह निर्दिष्ट किया जाता है कि केवल एक पदयुक्त अधिकारी ही एक शीर्ष पद के लिए नियुक्त किया जा सकता है।लेकिन  सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 में ऐसी कोई आवश्यकता नहीं है कि पूर्व मुख्य सचिव को ही राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। सार्वजनिक जीवन में कानून, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता या जन मीडिया में व्यापक ज्ञान और अनुभव के साथ सार्वजनिक जीवन में कोई भी व्यक्ति राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है। हम आशा करते हैं कि भविष्य में जीवन के इन क्षेत्रों में श्रेष्ठ लोगों को इस ओर खींचा जाएगा।”

 हालांकि बेंच ने सरकार द्वारा  राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त पूर्व मुख्य सचिव के खिलाफ चुनौती को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वो किसी व्यक्ति के चुनाव के लिए सरकार की बुद्धिमत्ता पर फैसला नहीं ले सकता कि वो नियुक्ति के योग्य है या नहीं।

बेंच ने कहा,  "हालांकि  उम्मीदवारों की तुलनात्मक योग्यता के मूल्यांकन को जनहित याचिका में शामिल नहीं किया जाएगा, फिर भी उम्मीदवारों की योग्यता और गुणों को देखते हुए हम राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए प्रतिवादी नंबर चार की नियुक्ति में कुछ गलत नहीं पाते।”


 
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