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मुक़दमे का समय कम करने, अनावश्यक स्थगन रोकने और लंबित मामलों की संख्या में कमी के लिए नया दिल्ली हाई कोर्ट (ओरिजिनल साइड) रूल्स अधिसूचित [नियम पढ़ें]

LiveLaw News Network
19 Jan 2018 2:33 PM GMT
मुक़दमे का समय कम करने, अनावश्यक स्थगन रोकने और लंबित मामलों की संख्या में कमी के लिए नया दिल्ली हाई कोर्ट (ओरिजिनल साइड) रूल्स अधिसूचित [नियम पढ़ें]
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दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट (ओरिजिनल साइड) रूल्स, 2018 को अधिसूचित कर दिया है। इसमें मुक़दमे के समय में कमी करने, बेतुके मुकदमों को समाप्त करने, जरूरत से अधिक स्थगन पर पाबंदी लगाने और जहाँ भी देरी गैर जरूरी लगता है वहाँ पर लागत वसूलने जैसे प्रावधान किए गए हैं।

इस नए नियम को नियम 1967 के स्थान पर लाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने देश के विभिन्न हाई कोर्टों में मुक़दमे में लगने वाले समय को कम करने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली थी और न्यायपालिका से लंबे समय से चले आ रहे दीवानी मामलों को जल्दी निपटाने के लिए तरीके सुझाने का आह्वान किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट से इस मामले में आगे आने और नए प्रोसीज़रल नियम बनाने को कहा था जिसे दूसरे हाई कोर्ट भी अपना सकें।

नए नियमों के अनुसार, जहाँ सुनवाई की वास्तविक तिथि अभी निर्धारित नहीं हुई है, रजिस्ट्रार ऐसे मामले को कोर्ट के समक्ष शॉर्ट मैटर्स के रूप में सुनवाई की वास्तविक तारीख के लिए पेश करेगा। ऐसे मामले जिनमें साक्ष्य रिकॉर्ड किए जाने हैं, उनको “लॉन्ग कॉज” और जो मामले साक्ष्य की रिकॉर्डिंग के बाद सुनवाई के लिए आ रहे हैं उनको “फाइनल” की श्रेणी में सूचीबद्ध किया जाएगा।

अगर कोर्ट को लगता है कि कोई पक्ष कोर्ट की प्रक्रिया का दुरूपयोग कर रहा है तो ऐसे में कोर्ट ऐसे पक्ष को पहले एक ऐसी राशि जो वो उचित समझता है, के भुगतान का आदेश दे सकता है।

अगर गवाही से पूछताछ के लिए स्थगन जरूरी है तो इस स्थगन को कोर्ट/रजिस्ट्रार/आयुक्त रिकॉर्ड करेगा। उस स्थिति में गवाह को यात्रा, रहने, आय की हानि आदि पर होने वाले खर्च का वाजिब अनुमान लगाया जाएगा और उसे आर्डर शीट में रिकॉर्ड किया जाएगा। जिस पक्ष के कारण मामले को स्थगित किया गया है उसको स्थगन के एक सप्ताह या कोर्ट द्वारा निर्धारित समय के भीतर यह राशि जमा करानी होगी भले ही स्थगन का कारण कुछ भी क्यों न हो।


 
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