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अभियुक्त के खिलाफ बलात्कार का मामला सिर्फ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि पीड़ित ने सह-आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया: उड़ीसा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
यह न्यायालय किसी चीज को मानकर नहीं चल सकता और याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को इस आधार पर रद्द नहीं कर सकता कि सह आरोपियों को बरी कर दिया गया क्योंकि पीड़ित ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया, बेंच ने कहा उड़ीसा उच्च न्यायालय ने कहा है कि ट्रायल के दौरान सह-आरोपी के मामले में पीड़ित द्वारा अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं करना आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने का आधार नहीं हो सकता। इस मामले में सीआरपीसी की धारा 161 और 164 के तहत पीड़िता के बयान दर्ज करने के बाद...
साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 केवल तभी लागू हो सकती है यदि इकबालिया बयानों से कुछ नया तथ्य सामने आए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
पुलिस का ये दावा कि आरोपी से ये चीजें बरामद की गई हैं, हो सकता है कि इन्हें पुलिस ने ही प्लांट किया हो, बेंच ने कहा। सुप्रीम कोर्ट ने नवनीतकृष्णन बनाम पुलिस निरीक्षक द्वारा राज्य मामले में तय कानूनी बिंदू को दोहराया है कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 केवल तभी लागू होती है जब इकबालिया बयान के चलते कोई नया तथ्य सामने आता है। इसकी के साथ कोर्ट ने हत्या के मामले में सजा को रद्द कर दिया।दरअसल तीन लोगों को जॉन बोस्को और माधन का अपहरण करने का आरोप लगाया गया और कहा गया कि तीनों ने एक रस्सी का उपयोग करके...
आठ साल पुराने संबंध के दौरान हुए सहवास को बलात्कार कहना मुश्किल है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
महिला ने आरोप लगाया था कि वे पति-पत्नी की तरह रह रहे थे“शादी का झांसा देकर बलात्कार करने” के मामले को निरस्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आठ साल तक चले संबंधों के दौरान हुए सहवास को “बलात्कार” बताना मुश्किल है।वर्तमान मामले में शिकायतकर्ता ने खुद ही कहा था कि वे पिछले आठ वर्षों से पति-पत्नी की तरह रह रहे थे और यह आदमी अब उससे दूर भागना चाहता है और उसको धोखा देना चाहता है। उसने इस व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार और धोखाधडी का आरोप लगाते हुए शिकायत की।इस पुरुष ने कर्नाटक हाई कोर्ट में अपील की पर...
वादी एक ही मामले में समझौते के विशेष प्रदर्शन और रोक लगाने के आदेश दोनों की मांग नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वादी एक ही मामले में विशेष प्रदर्शन और फिर रोक लगाने के आदेश, दोनों की मांग नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह फैसला सुचा सिंह सोढ़ी बनाम बलदेव राज वालिया के मामले में सुनाया।इस मामले में प्रतिवादी के खिलाफ आदेश के बारे में याचिका कोर्ट के कहने पर वापस ले लिया गया। बाद में जब एक विशेष प्रदर्शन को लेकर याचिका दायर की गई, तो प्रतिवादी ने इस पर आपत्ति की और आदेश 2 और नियम 2 का हवाला दिया। इसमें कहा गया कि विशेष प्रदर्शन जैसे राहत का दावा रोक लगाने के आदेश की मांग के साथ पूर्व याचिका...
इस तरह ब्रह्मानंद शर्मा ने राजस्थान के पहले दृष्टिहीन जज बनने के लिए सारी बाधाओं को हराया
अजमेर जिले के सरवर शहर के सिविल न्यायाधीश और न्यायिक मजिस्ट्रेट ब्रह्मानंद शर्मा 22 वर्ष की आयु में ग्लेकोमा के कारण अपनी दृष्टि खो चुके हैं। हालांकि इसके बावजूद न्यायाधीश बनने के अपने सपने का पीछा करना बंद नहीं किया। जब उन्हें कोचिंग सेंटरों से हटा दिया गया, उनकी पत्नी ने प्रभार संभाला और किताबें पढ़ीं और इस पढाई को रिकॉर्ड किया। उन्होंने यह रिकॉर्डिंग अक्सर सुनने के लिए एक आदत बना ली। उनकी कड़ी मेहनत का फल मिला और उन्होंने 2013 की राजस्थान ज्यूडिशियल सर्विसेज परीक्षा के पहले प्रयास में 83...
मंत्रियों की मदद के लिए 11 संदादीय सचिवों की नियुक्ति को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य विधानसभा द्वारा 11 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त करने को सही ठहराया है। ये संसदीय सचिव विभिन्न मंत्रियों की मदद करेंगे। यद्यपि यह स्पष्ट किया गया है कि ये मंत्री के रूप में कार्य नहीं करेंगे।इन नियुक्तियों के खिलाफ दायर याचिका में यह कहा गया कि नियुक्ति संविधान की धारा 164(1A) के खिलाफ है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति थोत्ताथिल बी राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति शरद कुमार गुप्ता की पीठ ने कहा कि संसदीय सचिव का प्रावधान कोई नई परिकल्पना नहीं है और ऐसी व्यवस्था रही...
केरल हाईकोर्ट में राजनीतिक दलों के विदेशी चंदे के प्रावधान को चुनौती दी गई [याचिका पढ़े]
केरल उच्च न्यायालय में देश में चुनाव में राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चंदा देने के लिए कंपनियों और विदेशी संस्थानों को अनुमति देने वाले प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती एक याचिका दाखिल की गई है।विक्टर टी थॉमस द्वारा दायर की गई याचिका में कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 182, जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 की धारा 29 बी और विदेशी अंशदान में चुनौती देती है। (विनियमन) अधिनियम, 2010 की धारा 2 (1) (जे) (vi) के प्रावधानों को चुनौती दी गई है। हालांकि 2017 से पहले कंपनी अधिनियम की धारा 182 एक कंपनी...
परोपकारी दानकर्ताओं को मुआवजा देने के प्रावधान वाले अंग प्रत्यारोपण दिशानिर्देश को केरल हाई कोर्ट ने सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]
केरल हाई कोर्ट ने अंग प्रत्यारोपण के दिशानिर्देशों को सही ठहराया है जिसमें परोपकारी अंग दानकर्ताओं को मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। इन दिशानिर्देशों को केरल सरकार ने मानव अंग प्रत्यारोपण और ऊतक अधिनियम, 1994 के तहत तैयार किया है। इन दिशानिर्देशों को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि ये मानव अंगों को व्यावसायिक स्तर पर जमा करने की प्रक्रिया को बढ़ावा देगा जिसकी अधिनियम की धारा 19 में मनाही है।ये दिशानिर्देश निम्न तरीके से परोपकारी अंग दानकर्ताओं को मुआवजे का प्रावधान करता है :(1) दानकर्ता के...
दिल्ली की अदालत ने राजपाल यादव और पत्नी को लोन ना चुकाने पर दोषी करार दिया, 23 अप्रैल को सजा का ऐलान
दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव, उनकी पत्नी और कंपनी को पांच करोड़ रुपये के लोन से जुड़े मामले में दोषी करार दिया है। सजा का ऐलान 23 अप्रैल को होगा।अडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट (ईस्ट) अमित अरोड़ा ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि सबूत संदेह से परे जाकर आरोपियों को दोषी साबित कर रहे हैं। एक बार जब आरोपी ने यह मान लिया कि संबंधित चेक उसके बैंक खाते से जुड़े हैं और उन पर साइन भी उसी के हैं तो फिर शिकायतकर्ता को चेक बाउंस का केस दायर करने का हक मिल...
केरल हाईकोर्ट ने 9 साल की लड़की के बलात्कार और हत्या के आरोपी की मौत की सजा बरकरार रखी [निर्णय पढ़ें]
उसे उम्मीद थी कि वह अपने पिता की तरह व्यवहार करेगा। उन्होंने उसका गला घोंट दिया, उसे रोने से रोका, उससे बलात्कार किया और इस प्रक्रिया में उसकी हत्या कर दी, पीठ ने कहा। केरल उच्च न्यायालय ने हाल ही में 9 वर्षीय लड़की से बलात्कार और हत्या के आरोपी व्यक्ति की मौत की सजा बरकरार रखी। पीड़िता उसकी उसकी बेटी की दोस्त थी।दरअसल मदरसा जाने के लिए रास्ते में लड़की अपने दोस्त के घर गई ताकि उसे भी अपने साथ ले जाए।अभियोजन पक्ष का मामला यह है कि उसकी दोस्त का पिता उस समय घर पर अकेला था और उसने उसके साथ...
व्यावसायिक योग्यता के बिना कोई डॉक्टरी प्रैक्टिस नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने 'परम्परा वैद्य' की याचिका रद्द की [निर्णय पढ़ें]
आजादी के 70 साल बाद भी जिनके पास कोई ज्ञान नहीं है या मान्यता प्राप्त योग्यता नहीं है, वे दवाओं का अभ्यास कर रहे हैं और हजारों और लाखों लोगों के जीवन के साथ खेल रहे हैं, बेंच ने कहा। सुप्रीम कोर्ट ने 2003 केरल हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है कि जिसमें यह तय किया गया है कि जो लोग निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते और प्रासंगिक कानून के तहत विधिवत पंजीकृत नहीं हैं, उन्हें परम्परा वैद्य के रूप में अभ्यास करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और न्यायमूर्ति मोहन एम शांतनागौदर...
स्नातकोत्तर मेडिकल प्रवेश में डॉक्टरों के लिए प्रोत्साहन अंक की वैधता की जांच अब पांच जजों की संविधान पीठ करेगी
सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ अब यह जांच करेगी कि क्या राज्य में स्नातकोत्तर मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दूरस्थ / पहाड़ी क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों के लिए प्रोत्साहन अंक प्रदान किए जा सकते हैं। जस्टिस कुरियन जोसेफ,जस्टिस एम एम शांतनागौदर और जस्टिस नवीन सिन्हा की तीन जजों की पीठ ने शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को तमिलनाडु मेडिकल डॉक्टर एसोसिएशन और अन्य लोगों द्वारा दाखिल याचिकाओं के लिए बड़ी पीठ के फैसले के लिए भेज दिया।याचिकाओं में पोस्ट ग्रेजुएट...
थैलिसीमिया मेजर से ग्रस्त होने के 5 महीने बाद डॉक्टर पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, MCI ने PG कोर्स को दिव्यांग अधिनियम, 2016 के अनुरूप बनाया
नए विनियमन में 21 दिव्यांगता के लिए 5% आरक्षण का प्रावधानथैलिसीमिया मेजर से पीड़ित होने के पांच महीने बाद एक डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। डॉक्टर को दिव्यांगता प्रमाणपत्र चाहिए था ताकि वह स्नातकोत्तर में दिव्यांगता कोटे के तहत प्रवेश ले सके। मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (एमसीआई) ने पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन्स, 2000 को संशोधित किया है ताकि वह दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप हो सके और 21 तरह की दिव्यांगता के लिए आरक्षण दिया जा सके।इस संशोधित विनियमन को 5 अप्रैल को गजट...
हत्या के आरोपी को अपर्याप्त कानूनी मदद : पटना हाई कोर्ट ने मौत की सजा निरस्त की, मामले की दुबारा सुनवाई करने को कहा [निर्णय पढ़ें]
पटना हाई कोर्ट हत्या के एक मामले में दुबारा सुनवाई का आदेश दिया है। आरोपी की मौत की सजा को निरस्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी को पर्याप्त कानूनी मदद उपलब्ध नहीं कराई गई।यह मामला दो नाबालिग बच्चों की हत्या का है। सुनवाई अदालत ने अभियोजन पक्ष के छह गवाहों की गवाही के आधार पर आरोपी को मौत की सजा सुनाई थी।अपील के दौरान हाई कोर्ट में कहा गया कि गरीबी के कारण आरोपी नियमित रूप से अपना वकील नहीं रख सका और यही कारण है कि छह में से पांच गवाहों से कोई वकील पूछताछ नहीं कर पाया। यह भी कहा गया कि ज्ञापक,...
राज्य बिजली नियामक आयोग के अध्यक्ष का हाई कोर्ट का जज होना आवश्यक नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने वृहस्पतिवार को कहा कि यह जरूरी नहीं है कि राज्य बिजली नियामक आयोग (एसईआरसी) का अध्यक्ष हाई कोर्ट का कोई जज ही हो। आयोग राज्य में बिजली शुल्कों का निर्धारण करता है।न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने गौर किया कि बिजली अधिनियम, 2003 के अनुसार, राज्य आयोग का अध्यक्ष हाई कोर्ट का कोई जज “हो सकता” है जबकि केंद्रीय आयोग का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट का कोई जज या हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश हो सकता है।इसके बाद पीठ ने कहा कि अधिनियम राज्य को आयोग के अध्यक्ष के...
केरल सरकार ने SC/ST एक्ट के कठोर प्रावधानों को कमजोर करने संबंधी SC के फैसले पर पुनर्विचार/ वापस लेने की याचिका दाखिल की [याचिका पढ़े]
केंद्र सरकार के बाद सर्वोच्च न्यायालय के एससी / एसटी अधिनियम के कड़े प्रावधानों पर सुरक्षा उपाय के दिशानिर्देश देने और तत्काल गिरफ्तारी पर रोक के फैसले के लगभग एक महीने बाद केरल सरकार ने मार्च 20 के फैसले के पुनर्विचार/ वापस लेने के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।वकील जी प्रकाश द्वारा दायर अपनी याचिका में केरल सरकार ने कहा कि "अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लोगों की रक्षा के लिए पेश किए गए अत्याचार अधिनियम के प्रावधानों को उपरोक्त निर्देशों ने निरस्त कर दिया है।”यह कहा गया है कि 20...
CrPC की धारा 199 (2) लागू करने के लिए कथित मानहानि वक्तव्य का CM के सार्वजनिक कर्तव्यों के निर्वहन के साथ उचित संबंध होना चाहिए : SC [निर्णय पढ़ें]
धारा 199 (2) और 199 (4) (सीआरपीसी) एक आंतरिक सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिसके लिए लोक अभियोजक को स्कैन करने और सामग्री के साथ संतुष्ट होने की आवश्यकता होती है क्यो कि मानहानि के लिए शिकायत लोक अभियोजक के रूप में करनी है, अदालत ने कहा। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों को इस्तेमाल करते हुए मध्य प्रदेश में कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही बंद कर दी, जिसमें एक प्रेस कांफ्रेंस में राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि वाला बयान देने का...
कठुआ रेप व हत्या केस : सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के रुकावट पैदा करने पर संज्ञान लिया, बार काउंसिल और जम्मू बार एसोसिएशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा [याचिका पढ़े]
"कानून की प्रक्रिया में रुकावट और न्याय देने , से रोकन और वह भी वकीलों द्वारा, उसे कभी माफ नहीं किया जा सकता और ये अनैतिक है। वकील किसी को न्याय तक पहुंचने से नहीं रोक सकते “ "कानून और नैतिकता के तहत आरोप पत्र दाखिल करने या वकील द्वारा शिकार के परिवार के प्रतिनिधित्व के विरोध को अनुमति नहीं दी जा सकती। किसी भी अदालत के सामने हर पक्षकार वकील को संलग्न करने का हकदार है और अगर अधिवक्ताओं ने इस सिद्धांत का विरोध किया है, तो यह न्याय व्यवस्था प्रणाली के विनाशकारी होगा।“कठुआ में 8 वर्षीय लड़की से...
मास्टर ऑफ रोस्टर का CJI का अधिकार इसी शर्त पर कि अधिकार का इस्तेमाल सही तरीके से होगा: दवे और सिब्बल ने शांति भूषण की याचिका पर दी दलील
जस्टिस ए के सीकरी और अशोक भूषण की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और वरिष्ठ वकील शांति भूषण द्वारा दायर याचिका के संबंध में अटॉर्नी जनरल की सहायता के लिए अनुरोध किया है जिसमें ‘ मास्टर ऑफ रोस्टर’ के तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक प्राधिकरण का स्पष्टीकरण मांगा गया है। "आप प्रार्थना कर रहे हैं कि 'भारत के मुख्य न्यायाधीश' के लिए कोई भी संदर्भ सर्वोच्च न्यायालय के 5 वरिष्ठ न्यायाधीशों के एक महाविद्यालय (मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा प्रशासनिक शक्तियों के...
सिर्फ इसलिए कि हिरासत की अवधि का जिक्र नहीं है, हिरासत के आदेश को खारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि सिर्फ इसलिए कि किसी हिरासत संबंधी आदेश पर अगर हिरासत की अवधि का जिक्र नहीं है तो उस आदेश को खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसने सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले पर भरोसा किया था जिसे अब तीन जजों की पीठ ने पलट दिया है।मद्रास हाई कोर्ट ने पुलिस आयुक्त एवं अन्य बनाम गुरबक्स आनंदराम भिरयानी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाते हुए और हाई कोर्ट के एक अन्य फैसले ने हिरासत से संबंधित एक...

![अभियुक्त के खिलाफ बलात्कार का मामला सिर्फ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि पीड़ित ने सह-आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया: उड़ीसा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें] अभियुक्त के खिलाफ बलात्कार का मामला सिर्फ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता क्योंकि पीड़ित ने सह-आरोपियों के खिलाफ अभियोजन पक्ष का समर्थन नहीं किया: उड़ीसा हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/04/Orissa-High-Court-1.jpg)
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![वादी एक ही मामले में समझौते के विशेष प्रदर्शन और रोक लगाने के आदेश दोनों की मांग नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] वादी एक ही मामले में समझौते के विशेष प्रदर्शन और रोक लगाने के आदेश दोनों की मांग नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/01/Supreme-Court-of-India.jpg)

![मंत्रियों की मदद के लिए 11 संदादीय सचिवों की नियुक्ति को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सही ठहराया [निर्णय पढ़ें] मंत्रियों की मदद के लिए 11 संदादीय सचिवों की नियुक्ति को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/11/Chhattisgarh-HC-2.jpg)
![केरल हाईकोर्ट में राजनीतिक दलों के विदेशी चंदे के प्रावधान को चुनौती दी गई [याचिका पढ़े] केरल हाईकोर्ट में राजनीतिक दलों के विदेशी चंदे के प्रावधान को चुनौती दी गई [याचिका पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/04/Political-Parties.jpg)
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![हत्या के आरोपी को अपर्याप्त कानूनी मदद : पटना हाई कोर्ट ने मौत की सजा निरस्त की, मामले की दुबारा सुनवाई करने को कहा [निर्णय पढ़ें] हत्या के आरोपी को अपर्याप्त कानूनी मदद : पटना हाई कोर्ट ने मौत की सजा निरस्त की, मामले की दुबारा सुनवाई करने को कहा [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/01/Death-Penalty-1.jpg)
![राज्य बिजली नियामक आयोग के अध्यक्ष का हाई कोर्ट का जज होना आवश्यक नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] राज्य बिजली नियामक आयोग के अध्यक्ष का हाई कोर्ट का जज होना आवश्यक नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/02/Chelameswar-SK-Kaul-1.jpg)
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![CrPC की धारा 199 (2) लागू करने के लिए कथित मानहानि वक्तव्य का CM के सार्वजनिक कर्तव्यों के निर्वहन के साथ उचित संबंध होना चाहिए : SC [निर्णय पढ़ें] CrPC की धारा 199 (2) लागू करने के लिए कथित मानहानि वक्तव्य का CM के सार्वजनिक कर्तव्यों के निर्वहन के साथ उचित संबंध होना चाहिए : SC [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/03/Justice-Ranjan-Gogoi-Justice-R-Banumathi-and-Justice-Mohan-M-Shantanagoudar.jpg)
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![सिर्फ इसलिए कि हिरासत की अवधि का जिक्र नहीं है, हिरासत के आदेश को खारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] सिर्फ इसलिए कि हिरासत की अवधि का जिक्र नहीं है, हिरासत के आदेश को खारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/09/Jails.jpg)