मुख्य सुर्खियां

वैधानिक निर्णय के लिए प्रभावित गलत निर्णय रेस जुडिकाटा के रूप में संचालित नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
वैधानिक निर्णय के लिए प्रभावित गलत निर्णय रेस जुडिकाटा के रूप में संचालित नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

अन्य वैधानिक प्रतिबंधों में निहित सार्वजनिक नीति, जो जरूरी नहीं है कि अदालत के क्षेत्राधिकार में जाए , को समान रूप से प्रभाव दिया जाना चाहिए, अन्यथा पक्षों पर कानून के विशेष सिद्धांतों को मजबूत किया जाना चाहिए जब सार्वजनिक नीति से संबंधित विशेष विचारों पर ये जनादेश दिया जाता है कि यह नहीं किया जा सकता, अदालत ने कहा। केनरा बैंक बनाम एनजी सुब्बाराया शेट्टी केस  में सुप्रीम कोर्ट ने पाया है कि बाद के सूट या कार्यवाही में एक ही पक्ष के बीच उत्पन्न कानून का मुद्दा न्यायिक नहीं है, अगर पूर्व के सूट...

इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन : अदालत ने अरविंद केजरीवाल व 9 अन्य को आरोपमुक्त किया [आदेश पढें]
इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन : अदालत ने अरविंद केजरीवाल व 9 अन्य को आरोपमुक्त किया [आदेश पढें]

दिल्ली कोर्ट ने बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और नौ अन्य लोगों को 2012 में अपने विरोध प्रदर्शन के दौरान गैरकानूनी जमावड़े  और अन्य अपराधों के आरोपों से मुक्त कर दिया।इस मामले में निर्वासित अन्य लोग बनवारी लाल शर्मा, दलबीर सिंह, मुकेश कुमार, मोहन सिंह, बलबीर सिंह, जगमोहन गुप्ता, आज़ाद कसाना, हरीश सिंह रावत और आनंद सिंह बिष्ट हैं।मामला प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह के घर के बाहर कोयला घोटाले के खिलाफ इंडिया अगेन्स्ट करप्शन (आईएसी) के स्वयंसेवकों द्वारा आयोजित एक प्रदर्शन से संबंधित है। जब...

किसी महिला को सिर्फ अगवा करने से ही आईपीसी की धारा 366 के तहत मामला नहीं बनता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
किसी महिला को सिर्फ अगवा करने से ही आईपीसी की धारा 366 के तहत मामला नहीं बनता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ किसी महिला को अगवा भर करने और और इस बात का कोई सबूत नहीं होने से कि ऐसा किसी व्यक्ति के साथ जबरन शादी करने या उसके साथ संभोग के लिए बाध्य करने के लिए किया जा रहा है, आईपीसी की धारा 366 के तहत मामला नहीं बनता।शुरू में जो एफआईआर दायर किया गया था उसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी जबरदस्ती उसको अपने घर ले गया। पांच दिन बाद, एक पूरक बयान दिया गया जिसमें शिकायतकर्ता ने कपड़े उतरवाने और गलत तरीके से छूने और छेड़खानी का आरोप भी शामिल कर दिया। शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में...

बेचने लायक खाद्य सामग्री बनाने के लिए मिलावट खाद्य सामग्री को बचाकर रखना अपराध : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
बेचने लायक खाद्य सामग्री बनाने के लिए मिलावट खाद्य सामग्री को बचाकर रखना अपराध : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली प्रशासन बनाम विद्या गुप्ता मामले में कहा है कि बेची जाने वाली खाद्य सामग्री बनाने के लिए मिलावटयुक्त खाद्य सामग्री को बचाकर रखना अपराध है।न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा कि कोर्ट को खाद्य अपमिश्रण अधिनियम के तहत निदेशक के प्रमाणपत्र में जो बातें कही गई हैं सिर्फ उस पर गौर करना चाहिए। उसे सार्वजनिक विश्लेषक या निदेशक के बीच किसी अंतर पर गौर करने की ज़रूरत नहीं है।दिल्ली प्रशासन द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह बात कही।...

कलकत्ता HC  ने राज्य चुनाव आयोग को व्हाट्सएप पर भेजे गए वैध नामांकन पत्रों को मंजूर करने के निर्देश दिए [आर्डर पढ़े]
कलकत्ता HC ने राज्य चुनाव आयोग को व्हाट्सएप पर भेजे गए वैध नामांकन पत्रों को मंजूर करने के निर्देश दिए [आर्डर पढ़े]

एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राज्य निर्वाचन आयोग से भंगूर के उन नौ उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों के सत्यापन के लिए कहा है, जिन्होंने इसे व्हाट्सएप के माध्यम से ब्लॉक विकास अधिकारी को भेजा था।आदेश पारित करने से पहले न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार ने आयुक्त द्वारा दक्षिण 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट और जिला पंचायत चुनाव अधिकारी को संबोधित 23 अप्रैल, 2018 के दस्तावेज पर ध्यान दिया और इसे अंटाजुल खान और 10 अन्य के नामांकन पत्र प्राप्त करने और  आवश्यक शुल्क के साथ उन्हें पर्याप्त...

जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से  कहा, एडवोकेट दीपिका राजावत को न ही धमकाया और न ही चार्ज शीट को रोकने की कोशिश की [शपथ पत्र पढ़ें]
जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा, एडवोकेट दीपिका राजावत को न ही धमकाया और न ही चार्ज शीट को रोकने की कोशिश की [शपथ पत्र पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट में अपने हलफनामे में जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन ने कहा है कि उन्होंने एडवोकेट दीपिका सिंह राजावत को धमकी नहीं दी और कठुआ बलात्कार कांड की पीड़ित परिवार की पैरवी करने से नहीं रोका है।हलफनामे में राजावत को धमकी देने की बात से इनकार किया गया है। राजावत ने जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रामालिंगम सुधाकर से 9 अप्रैल 2018 को शिकायत कर कहा था कि एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएस सलाथिया एवं अन्य अधिकारियों ने उनको धमकाया और पीड़ित के परिवार की पैरवी नहीं करने को...

सीआईसी ने कहा, देश में असहिष्णुता की घटनाओं को देखते हुए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के रिकॉर्ड को जाहिर करना बुद्धिमानी नहीं है [आर्डर पढ़े]
सीआईसी ने कहा, देश में असहिष्णुता की घटनाओं को देखते हुए ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ के रिकॉर्ड को जाहिर करना बुद्धिमानी नहीं है [आर्डर पढ़े]

केंद्रीय सूचना आयोग ने ‘ब्लू स्टार’ ऑपरेशन के बारे में सभी फाइलों और रिकार्ड्स की जानकारी नहीं देने को सही ठहराया और कहा कि इस रिकॉर्ड को अभी जाहिर करना बुद्धिमानी नहीं होगी जब देश में समुदायों के बीच पहले ही इस तरह की असहिष्णुता फ़ैली हुई है.आवेदक नवदीप गुप्ता ने आरटीआई आवेदन पीएमओ में दायर कर भारतीय सेना के ऑपरेशन ब्लू स्टार के बारे में सभी फाइलों की जानकारी माँगी थी। बाद में इस आवेदन को सेना को भेज दिया गया जिसने इस बारे में सूचना इस आधार पर देने से मना कर दिया कि यह देश की सुरक्षा और खुफिया...

हाई कोर्ट इस इस वजह से कार्यवाही को रद्द करने से मना नहीं कर सकता क्योंकि मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
हाई कोर्ट इस इस वजह से कार्यवाही को रद्द करने से मना नहीं कर सकता क्योंकि मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें उसने एक चार्ज शीट को इस आधार पर रद्द करने से मना कर दिया था क्योंकि इस मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी थी और अभियोजन पक्ष के गवाहों की पेशी हो चुकी है।एक महिला ने अपने पति और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ दहेज़ की मांग का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने इस शिकायत में अपनी ननद और उसके पति पर भी आरोप लगाए थे। उसकी ननद और उसके पति के खिलाफ दायर चार्ज शीट को निरस्त करने की मांग इस आधार पर की गई कि शिकायत करने वाली...

SC वेबसाइट हैक होने से एक दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने अफसरों को कहा था, कोर्ट वेबसाइटों को लेकर रहें सतर्क [निर्णय पढ़ें]
SC वेबसाइट हैक होने से एक दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने अफसरों को कहा था, कोर्ट वेबसाइटों को लेकर रहें सतर्क [निर्णय पढ़ें]

 दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा कि  निचली अदालतों की वेबसाइटों को लेकर अधिकारियों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। ये टिप्पणी वेबसाइटों  की कई खामियों को इंगित करने वाली  याचिका का निपटारा करते हुए की गई थी।दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट हैक होने से एक दिन पहले कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की एक बेंच द्वारा ये कहा गया था।न्यायालय शैलेंद्र भटनागर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें कहा गया था कि दिल्ली जिला न्यायालय की वेबसाइट...

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के तहत मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए पीएचडी की आवश्यकता नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के तहत मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए पीएचडी की आवश्यकता नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के तहत एक मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए पीएचडी की आवश्यकता नहीं है।दरअसल इलाहाबाद उच्च न्यायालय विश्वविद्यालय द्वारा संशोधित अध्यादेश (कार्यकारी) के खंड 12 (19) की व्याख्या करते हुए, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) द्वारा जो दवा के संकाय के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित करता है,  कहा गया कि इसकी पूर्ति अध्यादेश (कार्यकारी) में निर्धारित 'अन्य स्थितियों' में क्लॉज 12 (5) शामिल होगा जिसमें प्रोफेसर पद पर...

पक्षकार को उसके वकील द्वारा गलत सलाह के लिए पीड़ित होना पडे़गा, उसके लिए कोई उदारता नहीं बरती जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
पक्षकार को उसके वकील द्वारा गलत सलाह के लिए पीड़ित होना पडे़गा, उसके लिए कोई उदारता नहीं बरती जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

एक पक्षकार ये आवेदन दाखिल नहीं कर सकता कि उसके वकील ने उसे सही कानूनी सलाह नहीं दी  इसलिए उसे पीड़ित नहीं होना चाहिए, अदालत ने कहा। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक वादी ये नहीं कह सकता कि वो मुकदमा दाखिल ना कर पाया क्योंकि उसके वकील ने उसे सही कानूनी सलाह नहीं दी थी इसलिए उसे प्रतिकूल आदेशों से पीड़ित नहीं किया जाना चाहिए।उच्च न्यायालय के सामने एक ट्रायल कोर्ट  के फैसले के खिलाफ एक अपील में, जिसमें टाइटल की घोषणा और अनुबंध के विशिष्ट प्रदर्शन की डिक्री दी गई थी, अपीलार्थी द्वारा अंतरिम...

कार्यपालक अधिकारियों से तदर्थ जज बने लोग न्यायपालिका में स्वतः नहीं लिए जा सकते : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
कार्यपालक अधिकारियों से तदर्थ जज बने लोग न्यायपालिका में स्वतः नहीं लिए जा सकते : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

एक महत्त्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कार्यपालक अधिकारियों (एग्जीक्यूटिव ऑफिसर) को स्वतः ही न्यायिक सेवाओं में सिर्फ इसलिए नहीं लिया जाएगा कि वे तदर्थ जज के रूप में कार्य कर रहे हैं।न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने गौहाटी हाई कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए यह फैसला दिया।वर्तमान मामले में अतिरिक्त उप आयुक्तों को अतरिक्त सत्र जजों का अधिकार देकर फास्ट ट्रैक अदालतों में जजों के रूप में तदर्थ नियुक्ति की गई थी। कुछ वर्षों के बाद इन लोगों ने अतिरिक्त सत्र...

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के कहा, फांसी पर लटकाना प्राणघातक सुई देकर मारने या गोली मारने से ज्यादा सुरक्षित तरीका [प्रति-शपथपत्र पढ़ें]
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के कहा, फांसी पर लटकाना प्राणघातक सुई देकर मारने या गोली मारने से ज्यादा सुरक्षित तरीका [प्रति-शपथपत्र पढ़ें]

प्राणघातक सूई देकर मौत की नींद सुलाना ज्यादा वहशियाना केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि मौत की सजा पाए अभियुक्तों को फांसी पर लटकाना किसी अन्य तरीके से ज्यादा बेहतर है। केंद्र ने कहा कि प्राणघातक सुई देकर या फायरिंग स्क्वाड द्वारा गोली से उड़ाना ज्यादा पाशविक है।केंद्र ने यह भी कहा है कि मौत की सजा विरलों में विरल मामले में दिया जाता है और अगर उसको सजा पर अमल की प्रक्रिया को अगर सरल किया गया तो अपराधियों में डर पैदा करने का इसका महत्त्व समाप्त हो जाएगा।सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऋषि मल्होत्रा...

केंद्र ने कॉलेजियम की अनुशंसा को बदला, अतरिक्त जज को स्थाई करने के बजाय उनके कार्यकाल की अवधि बढ़ा दी
केंद्र ने कॉलेजियम की अनुशंसा को बदला, अतरिक्त जज को स्थाई करने के बजाय उनके कार्यकाल की अवधि बढ़ा दी

केंद्र और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के बीच चल रही खींचतान थोड़ी और बढ़ गई है। अब केंद्र ने एक पक्षीय रूप से कॉलेजियम की अनुशंसा को बदल दिया है। केंद्र ने अतरिक्त जज को स्थाई बनाने के सुझाव की जगह उनके कार्यकाल को बढ़ा दिया है।19 अप्रैल को जारी एक अधिसूचना में केंद्र ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अतरिक्त जज न्यायमूर्ति रामेन्द्र जैन की कार्य अवधि को छह महीने के लिए बढ़ा दिया।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की कॉलेजियम ने इस वर्ष मार्च में न्यायमूर्ति जैन को स्थाई...

दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के सामने पेश होने के बारे में जारी होने वाले नोटिस को लेकर दिशानिर्देश जारी किया [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के सामने पेश होने के बारे में जारी होने वाले नोटिस को लेकर दिशानिर्देश जारी किया [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में ऐसे दिशानिर्देश जारी किए हैं जो सीआरपीसी की धारा 41A के तहत पुलिस अधिकारियों के समक्ष पेशी की सूचना के बारे में है।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ये दिशानिर्देश पुलिस महकमे के कार्यकलाप में पारदर्शिता लाने और संदिग्ध आरोपी व्यक्ति और उन लोगों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए जारी किए जा रहे हैं जिन्हें पुलिस के समक्ष पेश होना है।पीठ ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का सीआरपीसी की धारा 91, 160 और 175 पर अमल के दौरान आवश्यक रूप से...

भगोड़े आर्थिक अपराधियों से संबंधित अध्यादेश, 2018 और इसकी मुख्य बातें [अध्यादेश पढ़ें]
भगोड़े आर्थिक अपराधियों से संबंधित अध्यादेश, 2018 और इसकी मुख्य बातें [अध्यादेश पढ़ें]

एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने भगोड़े आर्थिक अपराधी अद्यादेश 2018  जारी कर दिया है। यह अध्यादेश आर्थिक अपराधियों को क़ानून से बच निकलने का मौक़ा नही देने के लिए लाया गया है। शनिवार को राष्ट्रपति की स्वीकृतिक के बाद इसको लागू कर दिया गया।मुख्य विशेषताएं “भगोड़े आर्थिक अपराधी” का मतलब ऐसे व्यक्ति से है जिसके खिलाफ भारत के किसी भी कोर्ट द्वारा अनुसूचित अपराधों के तहत नोटिस जारी किया गया है जिसने— (i) आपराधिक दंड से बचने के लिए भारत छोड़ दिया है; या(ii) विदेश में बैठा है और भारत आकर अपने...

सुप्रीम कोर्ट ने दस राज्यों व एक UT को लोकायुक्त की नियुक्ति में तेजी लाने को कहा था, राज्यों ने देरी के लिए हलफनामे दाखिल किए  (आदेश पढ़ें)
सुप्रीम कोर्ट ने दस राज्यों व एक UT को लोकायुक्त की नियुक्ति में तेजी लाने को कहा था, राज्यों ने देरी के लिए हलफनामे दाखिल किए (आदेश पढ़ें)

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पीठ द्वारा 23 मार्च को लोकायुक्त की नियुक्ति में देरी के बारे में पूछे जाने सवाल कि लोकायुक्त के नियुक्ति में देरी क्यों हुई, इस पर दस राज्यों व एक केंद्रशासित प्रदेश ने हलफनामे के जरिए प्रगति के बारे में जानकारी दी है।मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, उड़ीसा, मणिपुर, तेलंगाना और अरुणाचल प्रदेश से पीठ ने प्रक्रिया को तेज करने के लिए कहा था क्योंकि उनके वकीलों ने कहा था, "प्रक्रिया चालू है।”वहीं जम्मू-कश्मीर ने कहा कि वह नियुक्ति पर विचार कर रहा...

प्रो.शमनाद बशीर ने सुप्रीम कोर्ट से कहा : सीएलएटी को बार काउंसिल को सौंपना हजारों छात्रों को तवे से निकालकर आग में झोंकना होगा
प्रो.शमनाद बशीर ने सुप्रीम कोर्ट से कहा : सीएलएटी को बार काउंसिल को सौंपना हजारों छात्रों को तवे से निकालकर आग में झोंकना होगा

बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के यह कहने पर कि वह कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (सीएलएटी) आयोजित कर सकता है, इस मामले में याचिकाकर्ता प्रो. शमनाद बशीर ने कहा कि ऐसा करना छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करना होगा। उन्होंने कहा कि यह वैसे ही होगा जैसे किसी को तवे से निकालकर आग में झोंक दिया जाए।सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान बीसीआई के वकील अर्धेन्दुमौली कुमार प्रसाद ने कहा कि सीएलएटी के आयोजन के लिए बीसीआई बेहतर संसथान है। उन्होंने कहा कि बीसीआई की हमेशा आलोचना की जाती है पर उसे कभी भी मौक़ा नहीं दिया...

सेवानिवृत्ति की उम्र में अस्थाई वृद्धि को एकपक्षीय रूप से वापस लेना गैरकानूनी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सेवानिवृत्ति की उम्र में अस्थाई वृद्धि को एकपक्षीय रूप से वापस लेना गैरकानूनी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने पारादीप फॉस्फेट्स लिमिटेड बनाम उड़ीसा राज्य मामले में कहा कि कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में बढ़ोतरी के निर्णय को एकपक्षीय रूप से वापस लेना अधिनियम की धारा 9A का उल्लंघन है। यह वृद्धि अस्थाई प्रकृति का था।मामलासरकार ने 19 मई 1998 को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र को 58 से बढ़ाकर 60 करने का निर्णय लिया था और यह दलील दी गई थी कि इससे कंपनियों को अपना घाटा कम करने में मदद मिलेगी।बाद में, सरकार ने 22 अगस्त 2001 को इस निर्णय को वापस लेने का निर्णय...