मुख्य सुर्खियां
सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट परिसर में क्रैच सुविधा के कार्यान्वयन के लिए समय सीमा बढ़ाकर 30 अप्रैल की [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने परिसर में क्रैच सुविधा को कार्यान्वित करने का समय 1 मार्च से बढाकर30 अप्रैल कर दिया है।न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर बानुमति की पीठ ने 2015 में अन्नंदिता पुजारी द्वारा दाखिल की गई याचिका पर अपने सेकेट्री जनरल द्वारा दाखिल अर्जी पर ये वक्त बढाया। ये याचिका सर्वोच्च न्यायालय में बाल देखभाल केंद्र के शुभारंभ के दो दिन बाद दायर की गई थी और उसमें इसके लिए विभिन्न कमियों को इंगित किया था।इसके बाद पिछले साल नवंबर में इसका निपटारा किया गया और यह निर्देश दिया...
मुआवजा देना कानूनी खैरात नहीं, कानून के तहत अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने कहा [निर्णय पढ़ें]
हमारा मुआवजा मानदंड ऐसा नहीं होना कि कोई ये सवाल उठाए कि क्या कानून मानव जीवन का सम्मान करता है।एक दुर्घटना में दोनों हाथ गंवाने वाले एक व्यक्ति का मुआवजा बढ़ाने के साथ साथ सर्वोच्च न्यायालय ने जगदीश बनाम मोहन मामले में कहा कि मुआवजे के उपाय द्वारा व्यक्ति के सम्मान को बहाल करने में कानून का एक वास्तविक प्रयास झलकना चाहिए।तीन न्यायाधीशों की पीठ के लिए न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड ने कहा: "हमारा मुआवजा मानदंड ऐसा नहीं होना कि कोई ये सवाल उठाए कि क्या कानून मानव जीवन का सम्मान करता है। यदि ऐसा...
मेडिकल कॉलेज घूस कांड : उड़ीसा हाई कोर्ट के पूर्व जज आईएम कुदुस्सी ने मीडिया पर रोक लगाने के लिए दिल्ली कोर्ट में दिया आवेदन [याचिका पढ़े]
उड़ीसा हाई कोर्ट के पूर्व जज आईएम कुदुस्सी ने द वायर, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और एबीपी न्यूज़ पर कोर्ट के आदेश के अलावा मेडिकल कॉलेज घूस कांड से जुड़ी किसी भी तरह की खबर को प्रकाशित करने से रोकने के लिए दिल्ली के पटियाला हाउस अदालत में आवेदन दिया है।जब मंगलवार को इस मामले की सुनवाई शुरू हुई तो कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 11 मार्च तक के लिए टाल दी क्योंकि एबीपी न्यूज़ को यह नोटिस जारी नहीं किया जा सकता था।कुदुस्सी ने द वायर में 15 जनवरी को प्रकाशित खबर “Medical College Bribery Scam: CBI Tapes Talk of...
हाई कोर्ट अधिकार पृच्छा तब तक जारी नहीं कर सकता जब तक कि अयोग्यता के बारे में वह असंदिग्ध रूप से आश्वस्त नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने भारती रेड्डी बनाम कर्नाटक राज्य मामले में कहा है कि जब तक रिट न्यायालय यह असंदिग्ध तौर पर सुनिश्चित नहीं हो जाता कि पद पर बैठा व्यक्ति कानूनी प्रावधानों के तहत किसी सार्वजनिक पद पर बैठने के योग्य या चुनाव के योग्य नहीं है, तब तक उसे अधिकार पृच्छा जारी नहीं करनी चाहिए।कर्नाटक हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई कि पंचायत की एक सदस्य भारती रेड्डी ने चोरी छिपे फर्जी दस्तावेज पेश किया था कि वह पिछड़ी जाति समुदाय-बी श्रेणी की है।हाई कोर्ट ने पाया कि आवेदक को प्रमाणपत्र काफी...
सिर्फ पत्नी को उसके माता-पिता के पास ना भेजना क्रूरता नहीं है: कर्नाटक उच्च न्यायालय [निर्णय पढ़ें]
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा है कि सिर्फ पत्नी को उसके माता-पिता के पास ना भेजना ही क्रूरता के समान नहीं है।पेश मामले में पति और सास पर पत्नी को आत्महत्या करने के लिए उकसाने का आरोप था। आरोप लगाया गया किउन्होंने मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया जिसके चलते पत्नी ने आत्महत्या की। पति और उसकी मां के खिलाफ आरोपों की वजह यह थी कि वे पत्नी को अपने माता-पिता के घर जाने की अनुमति नहीं दे रहे थे। हालांकि मुकदमा चलाने वाली अदालत ने सास को बरी कर दिया, लेकिन पति को धारा 498 ए आईपीसी के तहत दोषी ठहराया...
जज लोया मामले की सुनवाई : सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकीलों के बीच एक बार फिर हुई गरमागरम बहस
जज लोया की मौत के बारे में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई शुरू हुई और वरिष्ठ एडवोकेट दुष्यंत दवे ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, डीवाई चंद्रचूड़ और एएम खानविलकर के समक्ष अपनी दलील पेश की।दवे ने कहा, “शशि थरूर के मामले में 23 फरवरी का एक आदेश (सुनंदा पुष्कर की मौत की जांच के मामले में दिल्ली पुलिस का पक्ष जानने को लेकर) है...केरल का भी एक मामला है जिसमें इस अदालत ने एनआईए जांच का आदेश दिया ...मैं उम्मीद करता हूँ कि इस मामले में भी कुछ ऐसा ही किया जाएगा”।दवे ने दलील दी, “तथ्यों...
जज लोया मामला : सीपीआईएल ने दायर की हस्तक्षेप याचिका, उच्चाधिकारप्राप्त टीम से कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की माँग की [याचिका पढ़े]
सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका दायर कर सीबीआई के विशेष जज बृजगोपाल हरकिशन लोया की मौत की जांच कोर्ट की देखरेख में एक उच्च अधिकार प्राप्त समिति से कराने की मांग की।यह आवेदन सीपीआईएल की सचिव एडवोकेट इंदिरा जयसिंह की ओर से दायर किया गया। आवेदन में कुछ दिन पहले अंग्रेजी पत्रिका कारवाँ में प्रकाशित रिपोर्ट का हवाला दिया गया जिसमें देश के एक बहुत ही बड़े फोरेंसिक विशेषज्ञों में से एक डॉ. आरके शर्मा की राय छापी गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार...
कोर्ट के आदेशों को नहीं मानने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रतिदिन 1000 रुपए की दर से मामले के पक्षकार पर लगाया कुल 4.5 लाख का जुर्माना [निर्णय पढ़ें]
अपने आदेशों को नहीं माने जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने गत सप्ताह एक चैरिटेबल ट्रस्ट पर 4.5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया।जुर्माना लगाते हुए न्यायमूर्ति जीएस पटेल ने स्पष्ट किया कि अब विलंब और न्यायालय का आदेश नहीं मानने पर इसी तरह से निपटा जाएगा। उन्होंने कहा, “काफी लंबे समय से हम दिशानिर्देश जारी करते आ रहे हैं और ...विलंब को यह कहते हुए माफ़ कर देते रहे हैं कि यह ‘अंतिम मौक़ा’ है, और यह समझते रहे कि यह पर्याप्त होगा। पर जैसा कि स्पष्ट है, ऐसा नहीं है। आज हम जिस तरह का आदेश पास किए...
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) विनियमन 2017 को चुनौती के मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने दिया विभाजित फैसला [आर्डर पढ़े]
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा 2017 में शुक्लों की वैधता और उनके अंतर्संबंधों के बारे में मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और एम सुन्दर की पीठ बहुमत से फैसला नहीं दे सकी। न्यायमूर्ति बनर्जी ने जहाँ विनियमन और शुल्क के आदेश को वैध माना वहीं न्यायूर्ति सुंदर ने इससे भिन्न मत प्रकट किया।दूरसंचार (प्रसारण और केबल) सेवा अंतर्संबंध (एड्रेसेबल सिस्टम) विनियमन, 2017 और दूरसंचार (प्रसारण और केबल) सेवा (आठवाँ) (एड्रेसेबल सिस्टम) टैरिफ आदेश, 2017 को स्टार...
ऑटो-रिक्शा चालक की बेटी उत्तराखंड न्यायिक सेवा परीक्षा में अव्वल
उत्तराखंड न्यायिक सेवा सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) परीक्षा, 2016 के अंतिम परिणामों की घोषणा बुधवार को देहरादून की पूनम टोडी के लिए अच्छी खबर लेकर आई।पूनम इस परीक्षा में शीर्ष स्थान पर रही।पिता के ऑटो रिक्शा चालक होने के साथ साथ सुश्री टोडी की उपलब्धि को पूरे देश में सराहा जा रहा रहा है जिसमें उन्हें कड़ी मेहनत के लिए बधाई देने वाले संदेश निरंतर भेजे जा रहे हैं।सुश्री टोडी ने देहरादून में डीएवी (पीजी) कॉलेज से एम कॉम पूरा किया। इस परीक्षा में उनका तीसरा प्रयास था। पूनम ने अपनी सफलता का...
न्यायाधीन होने का सिद्धांत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नकार नहीं सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जैसे ही प्रहार किया जाता है, इससे न केवल वह अधिकार बल्कि वह व्यक्ति भी अचेतन अवस्था में चला जाता है जो उस अधिकार का हकदार है : सुप्रीम कोर्टफिल्म ‘अय्यारी’ की रिलीज़ पर रोक लगाने के खिलाफ आदर्श कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। अपील में कहा गया था कि इस फिल्म में इस सोसाइटी को कथित तौर पर गलत तरीके से दिखाया गया है और कोर्ट में इस बारे में चल रहे मुकदमे पर इसका असर हो सकता है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन...
आधार लिंकेज नहीं होने की वजह से पेंशन रोकने पर सीआईसी ने माँगी जानकारी [आर्डर पढ़े]
पोस्टल विभाग द्वारा पेंशन के बारे में जानकारी नहीं देने पर कड़ी प्रतिक्रया व्यक्त करते हुए केंद्रीय सूचना आयुक्त (सीआईसी) ने पोस्टल अथॉरिटीज से यह पूछा है कि किस कानूनी अधिकार के तहत उन्होंने पोस्ट ऑफिस के कर्मचारियों के पेंशन को आधार से लिंक करने का आदेश दिया है। यह आदेश सीआईसी श्रीधर अचार्यलु ने एनएन धुमने बनाम पीआईओ, पोस्टल विभाग मामले में दिया।इस मामले में आवेदन करने वाली महिला को स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने के बाद हर माह की पहली तारीख को पेंशन मिलती रही थी। पर मार्च 2017 को उसका पेंशन यह कहते...
केरल हाईकोर्ट में धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने वालों के लिए शरीयत कानून के नियम लागू करने की अर्जी दाखिल [याचिका पढ़े]
केरल उच्च न्यायालय ने अपना धर्म परिवर्तन करइस्लाम धर्म अपनाने वालों के लिए शरीयत कानून के नियमों के गठन को लेकर दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है।ये याचिका मुवाट्टूपुजहा के थैडेवॉस अबू थालिब ने याचिका दायर की है, जो एक ईसाई के रूप में पैदा हुए लेकिन तीन साल पहले उन्होंने धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपना लिया। वह अब मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 की धारा 3 के कार्यान्वयन के लिए शरियत कानून के तहत आना चाहते हैं।उन्होंने तर्क दिया, " याचिकाकर्ता के पास इस्लाम में अपना...
एक लोकतंत्र की पहचान है कि नागरिकों को सरकार से उसकी कार्रवाई पर सवाल करने का अधिकार हो : न्यायमूर्ति एपी शाह
" लोकतंत्र की पहचान यह है कि नागरिकों को सरकार से उसकी कार्रवाई पर सवाल करने का अधिकार है। इसके लिए अनिवार्य है कि सरकारी नीतियों और फैसले के बारे में पर्याप्त जानकारी जनता के लिए सुलभ हो। दावे करने और नीतिगत निर्णय लेने की प्रवृत्ति बिना पर्याप्त जानकारी बहुत खतरनाक है। हमने देखा है कि सरकार के कई हालिया दावों की आरटीआई और मीडिया के जरिए तथ्य जांच और छानबीन नहीं हुई है, " पुणे में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एपी शाह।पुणे में मनीलाइफ फाउंडेशन के आरटीआई सेंटर द्वारा आयोजित आरटीआई...
अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति "निहित अधिकार" नहीं जिसे किसी भी वक्त इस्तेमाल किया जा सके : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति एक "निहित अधिकार" नहीं है जिसका उपयोग कर्मचारी की मृत्यु को लंबा समय हो जाने के बावजूद भी किया जा सकता है। भारत संचार निगम लिमिटेड के मृत कर्मचारी केबेटे को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति को नकारते हुए न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने कहा, "पिता की मृत्यु के 13 साल बाद, याचिकाकर्ता, जो अब शादीशुदा है, कोअनुकंपा के आधार पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती क्योंकि यह निहित अधिकार नहीं है जो कि किसी भी समय उपयोग किया जा सकता है। ऐसी नियुक्ति के पीछे...
न्यायिक नियुक्ति: न्यायमूर्ति के एम जोसफ और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की वरिष्ठता का केंद्र का दावा वैध हैं?
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की उन सिफारिशों को रोक दिया है जिसमें न्यायमूर्ति के.एम. जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट और पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सूर्यकांत क हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया गया है।यद्यपि इस रिपोर्ट की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है और केंद्र ने अभी तक इसके पुनर्विचार के लिए कॉलेजियम को सिफारिश वापस नहीं भेजी हैं, लेकिन मीडिया में आने वाली रिपोर्टों बताती हैं कि इन सिफारिशों के बारे में केन्द्र की कुछ निश्चित...
विदेशी कोर्ट में भारतीय को मिली सजा पर गौर हो सकता है, पर भारतीय अदालतों के लिए लिए यह बाध्यकारी नहीं : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
बॉम्बे हाई कोर्ट ने वृहस्पतिवार को कहा कि किसी भारतीय को किसी विदेशी अदालत में दोषी ठहराए जाने के मामले पर भारत के अथॉरिटीज और उसकी अदालतें इस पर गौर कर सकती हैं पर इस तरह के फैसले ऐसे अथॉरिटीज के लिए किसी भी तरह बाध्यकारी नहीं होंगे।न्यायमूर्ति बीआर गवई, केआर श्रीराम और बीपी कोलाबावाला की पीठ ने कहा, “हमारा मानना है कि भारत में हुए अपराध के लिए अगर किसी व्यक्ति को किसी विदेशी अदालत ने दोषी ठहराया है तो भारत के न्यायिक और अर्ध न्यायिक अथॉरिटीज इस पर चाहें तो गौर कर सकते हैं पर यह नहीं कहा जा...
अगर अपीलीय कोर्ट निर्दोष होने के फैसले को पलटकर दोषी करार देती है तो सजा के सवाल पर आरोपी की सुनवाई की जरूरत नहीं : कर्नाटक हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने माना है कि अपीलीय अदालत द्वारा निचली अदालत के निर्दोष ठहराए जाने को पलटते हुए दोषी ठहराए जाने के फैसले के दौरान सजा पर आरोपी की सुनवाई की जरूरत नहीं है।न्यायमूर्ति एस सुजाता और न्यायमूर्ति जॉन माइकल चुन्हा की पीठ ने अपनी पत्नी की हत्या के आरोपी व्यक्ति को निर्दोष ठहराने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को उलट दिया।निचली अदालत ने निष्कर्ष निकाला था कि एक मोटर वाहन दुर्घटना में ये मृत्यु हो गई थी और अभियोजन यह साबित करने में नाकाम रहा कि कि वैवाहिक घर में पत्नी के साथ क्रूरता बरती...
किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला दायर भर होना उसको अनिवार्यतः रिटायर करने का आधार नहीं हो सकता : जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अपने एक फैसले में कहा कि सिर्फ किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला दायर भर होना उसको अनिवार्य रूप से रिटायर करा देने का आधार नहीं हो सकता।कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नौकरी पर फिर बहाल करने का निर्देश दिया। वह राज्य के पीडब्ल्यूडी में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्य कर रहा था और कश्मीर की निगरानी विभाग ने उसके खिलाफ रणबीर दंड संहिता की धारा 420, 467 और 468 के तहत एक एफआईआर दर्ज किया था। उसके पास ज्ञात आय के स्रोत से अधिक की संपत्ति रखने का मामला भी दर्ज...
कवर पेज पर स्तनपान की तस्वीर : मलयालम मैगजीन के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज
अपने नवीनतम संस्करण के आवरण पृष्ठ में स्तनपान कराने वाली एक महिला की तस्वीर को प्रकाशित करने के लिए 'गृहलक्ष्मी ' पत्रिका के खिलाफ महिला अधिनियम के अश्लील प्रतिनिधित्व के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।मलयालम पत्रिका के आवरण पृष्ठ में एक महिला को एक बच्चा स्तनपान कराते हुए शीर्षक के साथ छपा है, "माओं केरल को बताओ": "सावधान मत करो, हम स्तनपान कराना चाहती हैं।”आवरण पृष्ठ से यह प्रतीत होता है कि पत्रिका संस्करण में बिना शर्मिंदगी और अवांछित पुरुष के ध्यान के बिना सार्वजनिक रूप से स्तनपान...

![सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट परिसर में क्रैच सुविधा के कार्यान्वयन के लिए समय सीमा बढ़ाकर 30 अप्रैल की [आर्डर पढ़े] सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट परिसर में क्रैच सुविधा के कार्यान्वयन के लिए समय सीमा बढ़ाकर 30 अप्रैल की [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/03/Missing-children.jpg)
![मुआवजा देना कानूनी खैरात नहीं, कानून के तहत अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने कहा [निर्णय पढ़ें] मुआवजा देना कानूनी खैरात नहीं, कानून के तहत अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने कहा [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/01/Supreme-Court-of-India.jpg)
![मेडिकल कॉलेज घूस कांड : उड़ीसा हाई कोर्ट के पूर्व जज आईएम कुदुस्सी ने मीडिया पर रोक लगाने के लिए दिल्ली कोर्ट में दिया आवेदन [याचिका पढ़े] मेडिकल कॉलेज घूस कांड : उड़ीसा हाई कोर्ट के पूर्व जज आईएम कुदुस्सी ने मीडिया पर रोक लगाने के लिए दिल्ली कोर्ट में दिया आवेदन [याचिका पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/09/justice-quddisi-1.jpg)
![हाई कोर्ट अधिकार पृच्छा तब तक जारी नहीं कर सकता जब तक कि अयोग्यता के बारे में वह असंदिग्ध रूप से आश्वस्त नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] हाई कोर्ट अधिकार पृच्छा तब तक जारी नहीं कर सकता जब तक कि अयोग्यता के बारे में वह असंदिग्ध रूप से आश्वस्त नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/12/Dipak-misra-khanwilkar-chandrachud-1.jpg)
![सिर्फ पत्नी को उसके माता-पिता के पास ना भेजना क्रूरता नहीं है: कर्नाटक उच्च न्यायालय [निर्णय पढ़ें] सिर्फ पत्नी को उसके माता-पिता के पास ना भेजना क्रूरता नहीं है: कर्नाटक उच्च न्यायालय [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/10/Karnataka-HC.jpg)

![जज लोया मामला : सीपीआईएल ने दायर की हस्तक्षेप याचिका, उच्चाधिकारप्राप्त टीम से कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की माँग की [याचिका पढ़े] जज लोया मामला : सीपीआईएल ने दायर की हस्तक्षेप याचिका, उच्चाधिकारप्राप्त टीम से कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की माँग की [याचिका पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/03/Justice-loya-prashant-bhushan.jpg)
![कोर्ट के आदेशों को नहीं मानने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रतिदिन 1000 रुपए की दर से मामले के पक्षकार पर लगाया कुल 4.5 लाख का जुर्माना [निर्णय पढ़ें] कोर्ट के आदेशों को नहीं मानने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रतिदिन 1000 रुपए की दर से मामले के पक्षकार पर लगाया कुल 4.5 लाख का जुर्माना [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/02/Justice-Gautam-Patel.jpg)
![भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) विनियमन 2017 को चुनौती के मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने दिया विभाजित फैसला [आर्डर पढ़े] भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) विनियमन 2017 को चुनौती के मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने दिया विभाजित फैसला [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/03/28535080_10210526742794290_290205068_n.jpg)

![न्यायाधीन होने का सिद्धांत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नकार नहीं सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] न्यायाधीन होने का सिद्धांत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नकार नहीं सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/03/dipak-misra-sanjay-kaul.jpg)
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![केरल हाईकोर्ट में धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने वालों के लिए शरीयत कानून के नियम लागू करने की अर्जी दाखिल [याचिका पढ़े] केरल हाईकोर्ट में धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने वालों के लिए शरीयत कानून के नियम लागू करने की अर्जी दाखिल [याचिका पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/03/21584916_10210518885557864_1759524826_n.jpg)

![अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति निहित अधिकार नहीं जिसे किसी भी वक्त इस्तेमाल किया जा सके : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें] अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति निहित अधिकार नहीं जिसे किसी भी वक्त इस्तेमाल किया जा सके : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]](/images/placeholder.jpg)

![विदेशी कोर्ट में भारतीय को मिली सजा पर गौर हो सकता है, पर भारतीय अदालतों के लिए लिए यह बाध्यकारी नहीं : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें] विदेशी कोर्ट में भारतीय को मिली सजा पर गौर हो सकता है, पर भारतीय अदालतों के लिए लिए यह बाध्यकारी नहीं : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/08/Bombay-Hc-6.jpg)
![किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला दायर भर होना उसको अनिवार्यतः रिटायर करने का आधार नहीं हो सकता : जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े] किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला दायर भर होना उसको अनिवार्यतः रिटायर करने का आधार नहीं हो सकता : जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/12/Jammu-Kashimir-High-Court-min.jpg)
