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पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित बंगलों को 1 महीने के भीतर खाली किया जाना चाहिए: MP हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा [आर्डर पढ़े]
पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित बंगलों को 1 महीने के भीतर खाली किया जाना चाहिए: MP हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा [आर्डर पढ़े]

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को एक महीने के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री को आवंटित बंगले खाली करने  का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति ए के श्रीवास्तव की बेंच ने मध्य प्रदेश मंत्री (वेतन एवं भत्ता) संशोधन अधिनियम , 2017 को धारा 5 (1) को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। इस प्रावधान ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को किसी भी किराए के भुगतान के बिना अपने पूरे जीवन सरकारी बंगलों का उपयोग करने की अनुमति दी थी। आदेश के साथ पूर्व मुख्य मंत्री कैलाश जोशी, दिग्विजय...

किसी निजी व्यक्ति के खिलाफ गठित मामले को सीपीसी की धारा 80 को नहीं माने जाने के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता : केरल हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
किसी निजी व्यक्ति के खिलाफ गठित मामले को सीपीसी की धारा 80 को नहीं माने जाने के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता : केरल हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

केरल हाईकोर्ट ने थॉमस चेरियन बनाम कुरियन मैथ्यू मामले में कहा कि किसी निजी व्यक्ति के खिलाफ गठित मामले में अगर नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 80 का पालन नहीं होता है तो इस आधार पर इस मामले को निरस्त नहीं किया जा सकता।वर्तमान मामले में  निचली अदालत ने धारा 80 का पालन नहीं किये जाने के कारण इसके बावजूद कि इसका पहला प्रतिवादी एक निजी व्यक्ति था, सभी प्रतिवादियों के खिलाफ मामले को पूरी तरह खारिज कर दिया।न्यायमूर्ति पी सोमराजन ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई...

बेईमानी एकमात्र नीति है : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कब्जे वाली नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड कानर के सरकार के सर्कुलर को निरस्त किया
बेईमानी एकमात्र नीति है : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कब्जे वाली नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड कानर के सरकार के सर्कुलर को निरस्त किया

राज्य पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया; राज्य में एनएलयू की स्थापना के लिए फंड में दी जाएगी यह राशिउत्तराखंड हाईकोर्ट ने कब्जाए गए नजूल जमीन को फ्रीहोल्ड करने के सरकार के निर्णय की आलोचना की। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोक पाल सिंह की पीठ की नाराजगी इतनी थी कि न केवल उसने सरकार की इस नीति को रद्द कर दिया बल्कि राज्य पर पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने लोगों के अवैध कब्जे से छुड़ाए गए नजूल जमीन को फ्रीहोल्ड करने की सरकार के सर्कुलर को निरस्त करने का आदेश दिया।पीठ की...

तमिलनाडु अयोग्य विधायक मामला : SC ने मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एम सत्यनारायणन को तीसरा जज नियुक्त किया
तमिलनाडु अयोग्य विधायक मामला : SC ने मद्रास हाईकोर्ट के जस्टिस एम सत्यनारायणन को तीसरा जज नियुक्त किया

तमिलनाडु में 18 विधायकों की अयोग्यता के मामले की सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने से इनकार करते हुए मामले का फैसला करने के लिए तीसरे न्यायाधीश के रूप में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायमूर्ति एम सत्यानारायण को नियुक्त किया है।17 अयोग्य विधायकों की ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की वेकेशन बेंच ने  ने मामला तय करने के लिए समय सीमा के की मांग को खारिज कर दिया और कहा कि यह मद्रास हाईकोर्ट को तय करना है।गौरतलब है कि मद्रास हाईकोर्ट ने...

बच्चों के खिलाफ यौन अपराध नैतिक कठोरता और अपराध को शामिल करते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी की अर्जी नामंजूर की [निर्णय पढ़ें]
बच्चों के खिलाफ यौन अपराध नैतिक कठोरता और अपराध को शामिल करते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने आरोपी की अर्जी नामंजूर की [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 ए और प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल क्राइम अगेंस्ट चिल्ड्रन  (POCSO) अधिनियम की धारा 8 के तहत आरोपी द्वारा दायर अर्जी को खारिज कर दिया है।अभियुक्त ने विशेष POCSO कोर्ट के सामने प्रोबेशन ऑफ ऑफेंड्रस एक्ट, 1958 की धारा 4 (1) (2) के तहत आरोपी के परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के लिए आवेदन दायर किया था। ये आवेदन 2 अप्रैल , 2018 के आदेश से खारिज कर दिया गया था।न्यायमूर्ति पीडी नायक विशेष अदालत के आवेदन को अस्वीकार करने को चुनौती देने वाले आरोपी द्वारा दायर आवेदन...

बाल बलात्कार अक्षम्य; अपराधी के प्रति कोई उदारता या रहम नहीं : दिल्ली उच्च न्यायालय [निर्णय पढ़ें]
बाल बलात्कार अक्षम्य; अपराधी के प्रति कोई उदारता या रहम नहीं : दिल्ली उच्च न्यायालय [निर्णय पढ़ें]

 दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक बच्ची से बलात्कार करने वाले की सजा को बरकरार रखते हुए कहा  कि "बच्चों से  बलात्कार अक्षम्य है" और दोषी के प्रति कोई उदारता या रहम नहीं दिखाया जा सकता। न्यायमूर्ति एसपी गर्ग और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की बेंच ने कहा, "उपशास्त्रीय रूप से और अस्थायी रूप से बाल बलात्कार अक्षम्य है। छोटी उम्र के बच्चे के शरीर का उल्लंघन करने वाले के लिए  कोई उदारता या दया नहीं दिखाई जा सकती, जिसने किशोरावस्था की पहली सुगंध का स्वाद नहीं लिया है। यही कारण है कि इस कानून ने आईपीसी...

छात्र के आत्महत्या करने पर सज़ा देने वाला शिक्षक उकसावे का जिम्मेदार नहीं,MP हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
छात्र के आत्महत्या करने पर सज़ा देने वाला शिक्षक उकसावे का जिम्मेदार नहीं,MP हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]

एक माता-पिता की तरह, बच्चे को सही करने के इरादे से बच्चे को सलाह देने और बच्चे को दंडित करने की उम्मीद है, इसलिए स्कूल के एक प्रिंसिपल और शिक्षकों को स्कूल के अनुशासन का उल्लंघन करने पर छात्रों को सलाह देने और दंडित करने की उम्मीद है उच्च न्यायालय ने कहा।मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि एक छात्र ने दंड से अपमानित महसूस करने पर आत्महत्या की है तो आत्महत्या के उत्पीड़न के लिए आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती है। ये निर्णय देते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने मृत छात्र के चाचा द्वारा...

बार और बेंच दोनों ही गलतियां करते हैं; गलत क़ानूनी सलाह लिखित बयान दाखिल करने में देरी होने का सही आधार है : कलकत्ता हाईकोर्ट
बार और बेंच दोनों ही गलतियां करते हैं; गलत क़ानूनी सलाह लिखित बयान दाखिल करने में देरी होने का सही आधार है : कलकत्ता हाईकोर्ट

‘वास्तविक जीवन में हम अमूमन पाते हैं कि बेंच और बार दोनों ही गलती करते हैं। हम ऐसी आदर्श स्थिति की कल्पना नहीं कर सकते और क़ानूनी सलाह की पवित्रता को उस ऊंचाई तक नहीं पहुंचा सकते कि मुकदमादार घुटा हुआ महसूस करे’।कलकत्ता हाईकोर्ट ने गौर किया है कि अगर कोई वकील गलत सलाह देता है तो लिखित बयान दाखिल करने में होने वाली देरी को उसका सही आधार माना जाएगा।न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य ने यह बात निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए कही। जज ने इस दलील के आधार पर दायर की गई याचिका को भी खारिज कर दिया कि...

रजिस्ट्रेशन के लिए जमा किए गए दस्तावेज को उचित मुहर नहीं होने के कारण पंजीकरण प्राधिकरण जब्त नहीं कर सकता : केरल हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
रजिस्ट्रेशन के लिए जमा किए गए दस्तावेज को उचित मुहर नहीं होने के कारण पंजीकरण प्राधिकरण जब्त नहीं कर सकता : केरल हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

केरल हाईकोर्ट ने डॉ. अब्दुल रशीद बनाम केरल राज्य मामले में कहा है कि पंजीकरण प्राधिकरण पंजीकरण के लिए जमा किए गए दस्तावेजों को सिर्फ इसलिए जब्त नहीं कर सकता क्योंकि उन पर पर्याप्त मुहर नहीं लगी है।पृष्ठभूमिएक कंपनी ने अपने प्रबंध निदेशक के तीन बच्चों के पक्ष में एक सेटलमेंट करार किया था। उप पंजीयक ने इस करार को अपने कब्जे में ले लिया क्योंकि उस पर पर्याप्त मुहर नहीं लगी थी। जिला पंजीयक और भूमि राजस्व आयुक्त ने इस जब्ती को सही ठहराया। हाईकोर्ट के एकल जज की पीठ ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से...

स्वच्छ भारत अभियान : उत्तराखंड हाईकोर्ट का निर्देश– उन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करें जो शौचालय फंड को हड़प रहे हैं [आर्डर पढ़े]
स्वच्छ भारत अभियान : उत्तराखंड हाईकोर्ट का निर्देश– उन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करें जो शौचालय फंड को हड़प रहे हैं [आर्डर पढ़े]

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया है कि राज्य में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बीपीएल परिवारों को शौचालय बनवाने के लिए दी जाने वाली राशि को जो हड़प रहे हैं उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाए।न्यायमूर्ति लोक पाल सिंह और राजीव शर्मा की पीठ ने कहा, “स्वच्छ भारत मिशन 2014 केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई सबसे प्रशंसनीय परियोजना है जो कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में  स्वच्छता और सफाई बना रखने के लिए शुरू किया गया है। राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा इस योजना के उद्देश्यों को विफल...

लोकतंत्र और स्वतंत्रता से प्यार करने वाले और संवैधानिक मूल्यों को अपनाने का प्रयास करने वाले व्यक्ति के रूप में याद किया जाना चाहिए : न्यायमूर्ति चेलामेश्वर
लोकतंत्र और स्वतंत्रता से प्यार करने वाले और संवैधानिक मूल्यों को अपनाने का प्रयास करने वाले व्यक्ति के रूप में याद किया जाना चाहिए : न्यायमूर्ति चेलामेश्वर

भारत के सुप्रीम कोर्ट के प्रख्यात विद्रोही न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में लगभग सात साल के कार्यकाल के बाद आधिकारिक तौर पर सेवानिवृत्त हुए। कार्यालय छोड़ने के बाद विभिन्न मीडिया हाउसों  को दिए गए कई साक्षात्कारों में न्यायमूर्ति चेलामेश्वर ने बिना किसी हिचक के लेकिन स्पष्ट रूप से देश के न्यायिक तंत्र को लेकर विभिन्न मुद्दों के बारे में स्पष्ट रूप से बात की।विशेष रूप से इंडिया टुडे के परामर्श संपादक राजदीप सरदेसाई के साथ साक्षात्कार में उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें "कोई...

पत्नी के नाम पर ऋण लेना और उसकी किश्त नहीं भरना क्रूरता है : उत्तराखंड हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
पत्नी के नाम पर ऋण लेना और उसकी किश्त नहीं भरना क्रूरता है : उत्तराखंड हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल में एक पत्नी की इस दलील को स्वीकार कर लिया जिसमें उसने अपने पति से इस आधार पर तलाक की मांग की थी कि पति ने उसके नाम पर यह जानते हुए ऋण लिया कि उसके पास आय का कोई स्रोत नहीं है पर उसने इसकी किश्त नहीं भरी और उसको मुश्किल में डाल दिया।न्यायमूर्ति वीके बिष्ट और आलोक सिंह ने देहरादून के फैमिली कोर्ट के प्रमुख जज के फैसले को निरस्त करते हुए कहा, “जज साक्ष्य को सही संदर्भ में देखने में विफल रहे। जज ने पक्षकारों की स्थिति को ऐसा माना जैसे वो भयंकर गरीबी में जी रहे हों जबकि...

मोबाइल फोन का उपयोग करने वाले ड्राइवरों के लाइसेंस रद्द करें; ISI हेलमेट अनिवार्य : उत्तराखंड हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
मोबाइल फोन का उपयोग करने वाले ड्राइवरों के लाइसेंस रद्द करें; ISI हेलमेट अनिवार्य : उत्तराखंड हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जारी कई दिशा निर्देशों में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को राज्य को ड्राइविंग करते समय मोबाइल फोन का उपयोग करते पाए गए ड्राइवरों के लाइसेंस रद्द करने के निर्देशों को जारी करने के निर्देश दिए।न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह के बेंच में अद्वित नोलियाल द्वारा दायर याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें राज्य अधिकारियों को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 128 (ड्राइवरों और पिछले सवारों के लिए सुरक्षा उपायों) और 129 (सुरक्षात्मक हेडगियर पहनने) और...

खरीद का प्रमाणपत्र संयुक्त परिवार संपत्ति के मामले में टाइटल का निर्णायक सबूत नहीं हो सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
खरीद का प्रमाणपत्र संयुक्त परिवार संपत्ति के मामले में टाइटल का निर्णायक सबूत नहीं हो सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि खरीद का प्रमाण पत्र भूमि के संयुक्त किरायेदारों के साथ टाइटल का निर्णायक सबूत नहीं हो सकता।न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई ने कहा कि संयुक्त परिवार की संपत्ति के मामले में, कर्ता या परिवार के एक बड़े व्यक्ति के नाम पर जारी खरीद का प्रमाणपत्र वास्तव में संयुक्त परिवार की ओर से या उसके लिए है।केस की पृष्ठभूमि अदालत 24 जनवरी, 1990 के संयुक्त जिला न्यायाधीश ठाणे के फैसले के खिलाफ अपील सुन रही थी जिसमें ठाणे में एक भूमि की बिक्री के लिए मुआवजे को सह-किरायेदारों विथु और गजानन...

वकीलों के क्लर्कों के कल्याण के लिए कानून तैयार करने पर विचार करें: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य को कहा [निर्णय पढ़ें]
वकीलों के क्लर्कों के कल्याण के लिए कानून तैयार करने पर विचार करें: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य को कहा [निर्णय पढ़ें]

यह नोट करते हुए कि  सेवा शर्तों के लिए कोई कानून नहीं है,  उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हाल ही में सुझाव दिया है कि राज्य सरकार वकीलों के क्लर्कों के कल्याण के लिए उपयुक्त कानून तैयार कर सकती है।न्यायमूर्ति लोक पाल सिंह और न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की बेंच ने आगे कहा कि राज्य को असामयिक मौत या घातक शारीरिक चोट के मामले में वकालत करने वाले क्लर्क के परिवार के सदस्यों को मुआवजा भुगतान प्रदान करने के लिए एक आकस्मिक निधि बनानी चाहिए, "वकीलों के क्लर्क न्याय वितरण प्रणाली का अभिन्न हिस्सा हैं। अधिकांश...

बिना राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी के राष्ट्रीय उद्यान से 10 किलोमीटर के भीतर कोई खनन नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
बिना राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी के राष्ट्रीय उद्यान से 10 किलोमीटर के भीतर कोई खनन नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी के बिना राज्य में राष्ट्रीय वन्यजीव उद्यानों की सीमाओं से 10 किमी के भीतर कोई खनन ना किया जाए।"नेशनल पार्क के नजदीकी इलाके में खनन गतिविधि वन्यजीवन को परेशान करती है। ठेकेदार भारी मशीनरी तैनात करते हैं जिससे क्षेत्र में शोर प्रदूषण होता है और भारी वाहनों का उपयोग निकाले गए खनिजों के परिवहन के लिए किया जाता है," न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह ने कहा।अदालत...

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने युवाओं के बीच ड्रग्स को लेकर दिखाई सख्ती ; राज्य में ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी [निर्णय पढ़ें]
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने युवाओं के बीच ड्रग्स को लेकर दिखाई सख्ती ; राज्य में ड्रग्स तस्करी रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी [निर्णय पढ़ें]

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को राज्य में नशीली दवाओं की तस्करी और इसके इस्तेमाल  की जांच के लिए कई दिशा निर्देश जारी किए। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोक पाल सिंह की बेंच ने विशेष रूप से शैक्षिक संस्थानों में नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर ध्यान दिया और राज्य को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिया कि प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान के आसपास सादे कपड़े में एक पुलिसकर्मी 8 बजे से शाम 6 बजे तक तैनात हो।बेंच ने राज्य में सभी शैक्षिक संस्थानों को आदेश दिया कि वे हर शुक्रवार को नशीली दवा  के...

किसी विधायक को अयोग्य घोषित करने के लिए कोई भी इच्छुक व्यक्ति सदन के अध्यक्ष को अर्जी दे सकता है : सिक्किम हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
किसी विधायक को अयोग्य घोषित करने के लिए कोई भी इच्छुक व्यक्ति सदन के अध्यक्ष को अर्जी दे सकता है : सिक्किम हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

“यह स्पष्ट होना चाहिए कि न सिर्फ सदन का सदस्य बल्कि कोई भी व्यक्ति सदन के अध्यक्ष को किसी सदस्य को योग्य घोषित करने के लिए उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के लिए अर्जी दे सकता है...”।सिक्किम हाईकोर्ट ने सिक्किम लेजिस्लेटिव असेंबली (दलबदल के आधार पर अयोग्य ठहराने) के नियम 6 को पढ़ते हुए कहा कि न केवल सदन के सदस्य बल्कि कोई भी इच्छुक व्यक्ति सदन के अध्यक्ष को अर्जी देकर सदन के किसी सदस्य को अयोग्य ठहराने के लिए उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की मांग कर सकता है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने निचली अदालत से मौत की सजा पाए ऑटोरिक्शा चालक को बरी किया [निर्णय पढ़ें]
कर्नाटक हाईकोर्ट ने निचली अदालत से मौत की सजा पाए ऑटोरिक्शा चालक को बरी किया [निर्णय पढ़ें]

“अगर धारा 25 कहती है कि किसी पुलिस वाले के समक्ष कबूले गए अपराध को किसी अपराधी के खिलाफ साबित नहीं किया जा सकता, फिर धारा 26 किसी के भी समक्ष कबूले गए जुर्म के बारे में  सबूत पेश करने पर पाबंदी लगाता है बशर्ते कि इस तरह का बयान देने के समय आरोपी पुलिस हिरासत में है और इस मामले में एक ही अपवाद है मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया उसका बयान.”कर्नाटक हाईकोर्ट ने निचली अदालत से मौत की सजा पाए एक ऑटोरिक्शा चालक को बरी कर दिया।ऑटोरिक्शा चालक को एक अधेड़ उम्र की महिला के साथ बलात्कार करने और फिर उसकी हत्या...