मुख्य सुर्खियां
मामले की जाँच अगर ठीक से नहीं की गई है तो संदेह का लाभ अवश्य ही आरोपी को मिलना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में आरोपी को बरी किए जाने को सही ठहराते हुए कहा कि अगर मामले की जाँच ठीक से नहीं हुई है तो इसकी वजह से संदेह का लाभ अवश्य ही आरोपी को मिलना चाहिए।एक साम्प्रदायिक दंगे में एक व्यक्ति की हत्या के लिए निचली अदालत ने चार लोगों को सज़ा सुनाई। इन लोगों की अपील पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन का पक्ष मामले की कमज़ोर जाँच के कारण कई सारी ख़ामियों से भरी है। इसमें कहा गया है कि आरोपियों की जो पहचान की गई है वह काफ़ी संदेहास्पद है और टीआईपी इतनी...
सिम कार्ड के स्थान बदलने का मतलब यह नहीं है कि सिम कार्ड के साथ-साथ आरोपी भी इधर उधर घूम रहा है : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
जाँच एजेंसियों को धक्का पहुँचाने वाले इस फ़ैसले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि सिम कार्ड के स्थान बदलने का मतलब यह नहीं है कि इसके आठ आरोपी भी अपना स्थान बदल रहा है इस आधार पर यह निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं होगा।न्यायमूर्ति एबी चौधरी और न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह की पीठ ने कहा, “अभियोजन पक्ष यह दावा नहीं कर सकता कि सिम कार्ड अगर एक जगह से दूसरी जगह चला जाता है तो इसका अर्थ यह हुआ कि इस सिम कार्ड का प्रयोग करने वाला कथित व्यक्ति भी अपना स्थान बदल रहा है और इस बारे में कॉल डिटेल पेश...
ट्रेन के समय/कनेक्टिविटी के बारे में जनहित याचिका पर फ़ैसला नहीं दिया जा सकता; सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फ़ैसले को निरस्त किया [आर्डर पढ़े]
उत्तराखंड हाईकोर्ट के फ़ैसले को निरस्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा की ट्रेन के समय और इसकी कनेक्टिविटी के बारे में जनहित याचिका पर कोई फ़ैसला नहीं दिया जा सकता।केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ अपील की थी। हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में हाईकोर्ट बार असोसीएशन की एक याचिका को बंद कर दिया था। इसमें हाईकोर्ट के समक्ष रेलवे की ओर से दायर एक हलफ़नामे में कहा गया था कि संबंधित ट्रेन के समय के बारे में आवश्यक आदेश पास किए जाएँगे और नई सेवाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी।इस...
अगर क़ानून में प्रावधान हो तो सरकारी अथॉरिटी निजी एककों से सूचना प्राप्त करने और उसे आरटीआई आवेदनकर्ता के साथ साझा करने के लिए दायित्वों से बँधे हैं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर किसी सरकारी अथॉरिटी को अधिकार है और अगर वह किसी क़ानून के तहत किसी निजी एकक से क़ानूनन सूचना प्राप्त कर सकता है तो उसे आरटीआई अधिनियम की धारा 2 (f) के तहत सूचना माना जाएगा और वह इसे आरटीआई आवेदनकर्ता के साथ इसको साझा कर सकता है।न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत के सामने प्रश्न यह था कि अगर कोई सेवा प्रदाता यह कहते हुए सूचना देने से इंकार कर दे कि वह सार्वजनिक अथॉरिटी नहीं है और इसलिए वह सूचना का अधिकार अधिनिय, 2005 के तहत नहीं आता तो क्या उस स्थिति में टीआरएआई (ट्राई -...
संवैधानिक अदालत होने के कारण हाइकोर्टों को अपने ही आदेश को वापस लेने का अधिकार है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट के ‘court of record’ होने के कारण उसे अपने ही आदेश को वापस लेने का अधिकार ख़ुद ब ख़ुद मिला हुआ है।म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ ग्रेटर मुंबई बनाम प्रतिभा इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश को वापस लेने के हाइकोर्ट के अधिकार पर विचार किया।बॉम्बे हाईकोर्ट की एकल पीठ ने शुरू में एक मध्यस्थ की नियुक्ति का आदेश दिया था। बाद में जज को इस बात का भान हुआ कि समझौते में मध्यस्थता का प्रावधान नहीं है और उसने इस आदेश को वापस ले लिया। अन्य पक्ष ने इस...
व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, शुरू से अंत तक एनक्रिप्शन के कारण कंटेंट हटाना सम्भव नहीं
व्हाट्सएप ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उसके लिए कंटेंट को हटाना सम्भव नहीं है क्योंकि इसमें शुरू से अंत तक एनक्रिप्शन की तकनीक का पालन होता है।वरिष्ठ वक़ील कपिल सिबल ने यह दलील उस समय दी जब अश्लील बाल साहित्य, बलात्कार और सामूहिक बलात्कार से संबंधित विडीओ पर प्रतिबंध लगाने पर भारत सरकार के सुझाव पर चर्चा हो रही थी।केंद्र ने गूगल, व्हाट्सएप और फ़ेसबुक को कार्रवाई के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए थे - artificial intelligence पर आधारित टूलस के द्वारा ऑडीओ को ग़ैरक़ानूनी कंटेंट को हटाने और इनकी निगरानी...
अदालत में फ़र्ज़ी ऑडीओ क्लिप चलाकर जज को बदनाम करने वाले वक़ील को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लताड़ [आर्डर पढ़े]
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को एक वक़ील रंजना अग्निहोत्री को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि वक़ील मामले की सुनवाई कर रही पीठ के जजों का मज़ाक़ उड़ा रही हैं और उनका अपमान कर रही हैं।वक़ील ने उस समय एक ऑडीओ क्लिप चलाया जब पीठ ने इस वक़ील के पिता द्वारा दायर याचिका को निरस्त कर दिया। इस ऑडीओ क्लिप में पीठ के एक जज विक्रम नाथ पर भ्रष्ट होने का आरोप लगाया गया था।न्यायमूर्ति नाथ और न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की पीठ ने कहा, “वह एक वक़ील हैं और इस वजह से न्यायिक प्रणाली का हिस्सा भी। इसके बावजूद वह...
मध्याह्न भोजन को गम्भीरता से नहीं लेने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने पाँच राज्यों पर ₹1-1 लाख और दिल्ली सरकार पर ₹2 लाख का दंड लगाया [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्कूलों में मध्याह्न भोजन से संबंधित मामलों को लागू नहीं करने के लिए पाँच राज्यों - आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और जम्मू-कश्मीर पर ₹1-1 और दिल्ली सरकार पर ₹2 लाख का दंड लगाया।इन राज्यों ने सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के बारे में एक ऑनलाइन लिंक स्थापित करने और मध्याहन भोजन योजना में स्वच्छता की निगरानी के लिए चार्ट बनाने के कार्यक्रम को लागू नहीं किया।दंड लगाने का यह निर्णय न्यायमूर्ति एमबी लोकुर,न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता...
सुप्रीम कोर्ट ने गवाह सुरक्षा योजना, 2018 को स्वीकृति दी; केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों से एक साल के अंदर सभी जिलों में वलनेरबल विट्नेस डिपोज़िशन कॉम्प्लेक्स तैयार करने को कहा [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गवाहों की सुरक्षा के लिए गवाह सुरक्षा योजना, 2018 को मंज़ूरी दे दी है। यह योजना केंद्र सरकार ने तैयार की है। कोर्ट ने अब केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों से इसे पूरी तरह लागू करने को कहा है।न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर की पीठ ने कहा कि यह योजना अनुच्छेद 141/142 के तहत तब तक क़ानून होगा जब तक कि संसद इस मुद्दे पर कोई क़ानून नहीं पास करती। पीठ ने देश के सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे वर्ष 2019 के अंत तक कमज़ोर गवाहों की सुरक्षा के लिए...
फ़ैसले में अपनी राय व्यक्त करते हुए संक्षिप्त होने का ख़याल हमेशा ही रखा जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
संक्षिप्त होना एक गुण है और जितना भी संभव है, अपनी राय का इज़हार करते हुए इसका पालन किया जाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के 60 पृष्ठ के रिमांड आदेश के सिलसिले में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह बात कही।हाईकोर्ट ने अपने आदेश में तथ्यों का तफ़सील से ख़ुलासा किया था और कई मामलों में दिए गए फ़ैसलों का भी दुबारा उल्लेख किया गया और अंततः इस मामले को निचली अदालत को भेज दिया। उसने प्रथम अपीली अदालत को निर्देश दिया कि वह प्रथम अपील पर ग़ौर करे और कानून के आधार पर इसका निर्णय...
मामले के तथ्य कहाँ हैं? सुप्रीम कोर्ट ने धारा 482 के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त किया [निर्णय पढ़ें]
“हमें तथ्य चाहिए”, चार्ल्स डिकेंस का नॉवल ‘हार्ड टाइम्ज़’ इसी तरह शुरू होता है।सुप्रीम कोर्ट का भी इस मामले में कहना कुछ। ऐसा ही था। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के जज एएम सप्रे ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गये आदेश को ख़ारिज कर दिया क्योंकि उसमें मामले के तथ्यों का उल्लेख नहीं था।न्यायमूर्ति सप्रे और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की पीठ ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने इस फ़ैसले में इस मामले से संबंधित तथ्यों का भी उल्लेख नहीं किया है और उसने सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का ज़िक्र किया...
शराब पीकर पत्नी से नियमित झगड़ा करना क्रूरता है : बॉम्बे हाईकोर्ट ने पति को दिया संदेह का लाभ [निर्णय पढ़ें]
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में आईपीसी की धारा 498-A और 306 के तहत दंडित व्यक्ति को संदेह का लाभ देते हुए उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से बरी कर दिया। यह फ़ैसला 29, 2017 को दिया गया।न्यायमूर्ति एएम बादर ने कहा कि अपने 17 साल के वैवाहिक जीवन में शराब पीकर पत्नी के साथ रोज़ाना झगड़ा क्रूरता हो सकती है क्योंकि इस तरह का आचरण कठोर है पर यह नहीं कहा जा सकता है कि इसने आत्महत्या के लिए उकसाया होगा।पृष्ठभूमिअभियोजन के अनुसार, मोहन केसाडे जिसकी 17 साल पहले शुशीला से शादी हुई थी, 16 अप्रैल 2015 को...
घर से दूर नौकरी लेने का मतलब ‘पति को छोड़ना’ नहीं है : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर पत्नी अपने ससुराल से दूर नौकरी करने का निर्णय करती है तो उसे अपना ससुराल छोड़ने का दोषी नहीं माना जाएगा।न्यायमूर्ति गौतम भादुड़ी ने कहा की अगर पत्नी किसी अन्य सठान पर नौकरी करने का निर्णय करती है, तो उसे उसका पति या उसके पति के परिवार वाले ससुराल में अकेले रहने का दबाव नहीं डाल सकते।वर्तमान मामले में एक व्यक्ति ने इस आधार पर तलाक़ की माँग की थी कि उसकी पत्नी नौकरी के कारण अपने घर से दूर रहती है। चूँकि फ़ैमिली अदालत ने उसकी याचिका ख़ारिज कर दी, वह यह मामला लेकर...
अनुशासनात्मक कार्रवाई में दंड लगाना पूर्णतया नियोक्ता पर निर्भर करता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई में कितना दंड लगाया जाए यह पूरी तरह नियोक्ता पर निर्भर करता है और कोर्ट तबतक इसमें दखलंदाजी नहीं दे सकता जब तक कि उसको ये ना लगे की जो दंड सुनाया गया है वह अत्यंत ही कठोर है।तमिलनाडु बनाम एम मंगायारकरासी मामले में हाईकोर्ट ने दो कर्मचारियों को दी गई सज़ा में दख़ल दिया था यह कहते हुए की इनकी ग़लती की तुलना में सज़ा ग़ैर आनुपातिक है। हालाँकि, राज्य ने कहा कि इन दोनों कर्मचारियों की फ़र्ज़ी बिलों के कारण जो घाटे हुए वह दूसरे कर्मचारियों की तुलना...
विचाराधीन क़ैदियों के मामलों की शीघ्र सुनवाई का मुद्दा : सुप्रीम कोर्ट ने सहयोग नहीं करने के लिए कुछ राज्यों पर 50 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों उन कुछ राज्य सरकारों पर 50 हज़ार का जुर्माना लगाया जो अपने यहाँ फ़ोरेंसिक लैब में रिक्तियों को भरने के बारे में केंद्र को जानकारी देने में सहयोग नहीं कर रहे हैं।न्यायमूर्ति एमबी लोकुर, एस अब्दुल नज़ीर और दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि उसे राजस्थान (50 % रिक्तियाँ), गोवा (60% रिक्तियाँ), असम (40 % रिक्तियाँ), कर्नाटक (50 % से अधिक रिक्तियाँ), महाराष्ट्र (50 % से अधिक रिक्तियाँ), उड़ीसा (लगभग 33 % रिक्तियाँ) और उत्तर प्रदेश (लगभग 80 % रिक्तियाँ) जैसे बड़े राज्यों से कोई...
बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर हिस्सेदारी देने के बारे में हुआ संशोधन पिछले प्रभाव से लागू होगा या नहीं यह सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ करेगा तय
सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की पीठ हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 में हुए संशोधन एन इस बात पर ग़ौर करेगा की इन संशोधनों को पिछले प्रभाव से लागू किया जा सकता है या नहीं।दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बारे में एक अपील का यह कहते हुए निस्तारन कर दिया कि और कहा कि इस अधिनियम में विरोधाभासी बातें कही गई हैं और इसलिए इसके ख़िलाफ़ अनुच्छेद 133(1)(a) और 134A के तहतअपील की जा सकती है।प्रकाश बनाम पूलवती (2015) मामले में न्यायमूर्ति एआर दवे और एके गोयल की पीठ ने कहा था कि 9-9-2005 को इस संशोधन के तहत यह...
एनडीपीएस मामले में एक ही व्यक्ति जाँच अधिकारी और शिकायतकर्ता दोनों नहीं हो सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांस एक्ट, 1985 के तहत अगर एक ही व्यक्ति को जाँच अधिकारी और शिकयतकर्ता होने की छूट दी जाती है तो इससे इस अधिनियम को नुक़सान पहुँचेगा।यह फ़ैसला न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने दिया।कोर्ट गुरतेज सिंह बट्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फ़ैसला दिया। इस याचिका में अगस्त 2014 में दिए गये फ़ैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें इस व्यक्ति को एनडीपीएस के तहत 10 साल की सश्रम कारावास की सज़ा दी गई थी।बट्ट ने अब दावा किया है कि वह निर्दोष है...
सुप्रीम कोर्ट ने 25 साल और इससे ऊपर के छात्रों को NEET-UG 2019 में बैठने की इजाज़त दी [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने एक फ़ैसले में कहा है कि 25 साल और इससे ऊपर के छात्रों को NEET-UG 2019 परीक्षा में बैठने के लिए आवेदन कर सकते हैं और परीक्षा दे सकते हैं।न्यायमूर्ति एसए बोबडे,न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले के खिलाफ दायर एक विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश दिया।याचिकाकर्ता/उम्मीदवार जो 25 साल के या इससे अधिक उम्र के हैं, NEET-UG 2019 में आवेदन करने और इस परीक्षा में बैठने के योग्य हैं। अगर उन्हें...

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![सिम कार्ड के स्थान बदलने का मतलब यह नहीं है कि सिम कार्ड के साथ-साथ आरोपी भी इधर उधर घूम रहा है : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े] सिम कार्ड के स्थान बदलने का मतलब यह नहीं है कि सिम कार्ड के साथ-साथ आरोपी भी इधर उधर घूम रहा है : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/12/sim.jpg)
![ट्रेन के समय/कनेक्टिविटी के बारे में जनहित याचिका पर फ़ैसला नहीं दिया जा सकता; सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फ़ैसले को निरस्त किया [आर्डर पढ़े] ट्रेन के समय/कनेक्टिविटी के बारे में जनहित याचिका पर फ़ैसला नहीं दिया जा सकता; सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के फ़ैसले को निरस्त किया [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/05/indian-railways.jpg)
![अगर क़ानून में प्रावधान हो तो सरकारी अथॉरिटी निजी एककों से सूचना प्राप्त करने और उसे आरटीआई आवेदनकर्ता के साथ साझा करने के लिए दायित्वों से बँधे हैं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें] अगर क़ानून में प्रावधान हो तो सरकारी अथॉरिटी निजी एककों से सूचना प्राप्त करने और उसे आरटीआई आवेदनकर्ता के साथ साझा करने के लिए दायित्वों से बँधे हैं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/05/Delhi-High-Court.jpg)
![संवैधानिक अदालत होने के कारण हाइकोर्टों को अपने ही आदेश को वापस लेने का अधिकार है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] संवैधानिक अदालत होने के कारण हाइकोर्टों को अपने ही आदेश को वापस लेने का अधिकार है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/12/Justice-RF-Nariman-and-MR-Shah.jpg)

![अदालत में फ़र्ज़ी ऑडीओ क्लिप चलाकर जज को बदनाम करने वाले वक़ील को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लताड़ [आर्डर पढ़े] अदालत में फ़र्ज़ी ऑडीओ क्लिप चलाकर जज को बदनाम करने वाले वक़ील को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लताड़ [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/12/Justice-Vikram-Nath-Justice-Rajesh-Singh-Chauhan.jpg)
![मध्याह्न भोजन को गम्भीरता से नहीं लेने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने पाँच राज्यों पर ₹1-1 लाख और दिल्ली सरकार पर ₹2 लाख का दंड लगाया [आर्डर पढ़े] मध्याह्न भोजन को गम्भीरता से नहीं लेने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने पाँच राज्यों पर ₹1-1 लाख और दिल्ली सरकार पर ₹2 लाख का दंड लगाया [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/12/Madan-Lokur-and-Deepak-Gupta-and-Hemant-Gupt.jpg)
![बरी किए जाने के आदेश में इस आधार पर दख़ल नहीं कि इस बारे में अलग तरह के विचार भी हो सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] बरी किए जाने के आदेश में इस आधार पर दख़ल नहीं कि इस बारे में अलग तरह के विचार भी हो सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/12/Justice-Nageswara-Rao-Justice-Subhash-Reddy.jpg)

![सुप्रीम कोर्ट ने गवाह सुरक्षा योजना, 2018 को स्वीकृति दी; केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों से एक साल के अंदर सभी जिलों में वलनेरबल विट्नेस डिपोज़िशन कॉम्प्लेक्स तैयार करने को कहा [निर्णय पढ़ें] सुप्रीम कोर्ट ने गवाह सुरक्षा योजना, 2018 को स्वीकृति दी; केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों से एक साल के अंदर सभी जिलों में वलनेरबल विट्नेस डिपोज़िशन कॉम्प्लेक्स तैयार करने को कहा [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/12/AK-Sikri-and-Abdul-Nazeer.jpg)
![फ़ैसले में अपनी राय व्यक्त करते हुए संक्षिप्त होने का ख़याल हमेशा ही रखा जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] फ़ैसले में अपनी राय व्यक्त करते हुए संक्षिप्त होने का ख़याल हमेशा ही रखा जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/12/AM-SAPRE-indu-malhotra.jpg)
![मामले के तथ्य कहाँ हैं? सुप्रीम कोर्ट ने धारा 482 के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त किया [निर्णय पढ़ें] मामले के तथ्य कहाँ हैं? सुप्रीम कोर्ट ने धारा 482 के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त किया [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/03/supreme-court-of-india.jpg)
![शराब पीकर पत्नी से नियमित झगड़ा करना क्रूरता है : बॉम्बे हाईकोर्ट ने पति को दिया संदेह का लाभ [निर्णय पढ़ें] शराब पीकर पत्नी से नियमित झगड़ा करना क्रूरता है : बॉम्बे हाईकोर्ट ने पति को दिया संदेह का लाभ [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/08/Bombay-Hc-6.jpg)
![घर से दूर नौकरी लेने का मतलब ‘पति को छोड़ना’ नहीं है : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े] घर से दूर नौकरी लेने का मतलब ‘पति को छोड़ना’ नहीं है : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/11/Chhattisgarh-HC-2.jpg)
![अनुशासनात्मक कार्रवाई में दंड लगाना पूर्णतया नियोक्ता पर निर्भर करता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] अनुशासनात्मक कार्रवाई में दंड लगाना पूर्णतया नियोक्ता पर निर्भर करता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/09/Supreme-Court-of-India-1.jpg)
![विचाराधीन क़ैदियों के मामलों की शीघ्र सुनवाई का मुद्दा : सुप्रीम कोर्ट ने सहयोग नहीं करने के लिए कुछ राज्यों पर 50 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया [आर्डर पढ़े] विचाराधीन क़ैदियों के मामलों की शीघ्र सुनवाई का मुद्दा : सुप्रीम कोर्ट ने सहयोग नहीं करने के लिए कुछ राज्यों पर 50 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/12/Justice-Madan-B-Lokur.jpg)

![एनडीपीएस मामले में एक ही व्यक्ति जाँच अधिकारी और शिकायतकर्ता दोनों नहीं हो सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें] एनडीपीएस मामले में एक ही व्यक्ति जाँच अधिकारी और शिकायतकर्ता दोनों नहीं हो सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/12/Justice-Harishankar-and-Delhi-High-Court.jpg)
![सुप्रीम कोर्ट ने 25 साल और इससे ऊपर के छात्रों को NEET-UG 2019 में बैठने की इजाज़त दी [आर्डर पढ़े] सुप्रीम कोर्ट ने 25 साल और इससे ऊपर के छात्रों को NEET-UG 2019 में बैठने की इजाज़त दी [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/12/Justice-SA-Bobde-Justice-L-Nageswara-Rao-and-Justice-R-Subhash-Reddy.jpg)