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किसी विधायक को अयोग्य घोषित करने के लिए कोई भी इच्छुक व्यक्ति सदन के अध्यक्ष को अर्जी दे सकता है : सिक्किम हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
27 Jun 2018 5:25 AM GMT
किसी विधायक को अयोग्य घोषित करने के लिए कोई भी इच्छुक व्यक्ति सदन के अध्यक्ष को अर्जी दे सकता है : सिक्किम हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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यह स्पष्ट होना चाहिए कि सिर्फ सदन का सदस्य बल्कि कोई भी व्यक्ति सदन के अध्यक्ष को किसी सदस्य को योग्य घोषित करने के लिए उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के लिए अर्जी दे सकता है...”

सिक्किम हाईकोर्ट ने सिक्किम लेजिस्लेटिव असेंबली (दलबदल के आधार पर अयोग्य ठहराने) के नियम 6 को पढ़ते हुए कहा कि न केवल सदन के सदस्य बल्कि कोई भी इच्छुक व्यक्ति सदन के अध्यक्ष को अर्जी देकर सदन के किसी सदस्य को अयोग्य ठहराने के लिए उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की मांग कर सकता है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश के अग्निहोत्री और न्यायमूर्ति मिनाक्षी मदन राय ने पूर्व सांसद पहलमान सुब्बा और दो सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही।  इन लोगों ने याचिका दायर कर सिक्किम विधानमंडल (दलबदल के आधार पर अयोग्य ठहराने) नियम 1985 के नियम 6 और 7 को अनुच्छेद 191(2) संविधान की दसवीं अनुसूचि के आलोक में पढ़े जाने की मांग की थी।

पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर गौर किया जिसने उड़ीसा विधानमंडल नियम (दलबदल के कारण अयोग्य ठहराने) 1987 के नियम छह के उपनियम 1 और 2 के बारे में कहा कि न केवल सदन का कोई सदस्य बल्कि कोई भी इच्छुक व्यक्ति सदन के अध्यक्ष के समक्ष यह अर्जी दे सकता है कि सदन के किसी सदस्य को योग्य ठहराया जा सकता है।

पीठ ने विभिन्न प्रावधानों का सन्दर्भ देते हुए कहा, “गौर करने के बाद हमारा यह मत है कि नियम 6(2) दसवीं अनुसूची के लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सकता जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न मामलों में कहा है और इसलिए यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि न केवल सदन का कोई सदस्य बल्कि कोई भी इच्छुक व्यक्ति सदन के अध्यक्ष को किसी सदस्य को अयोग्य घोषित करने के लिए कार्रवाई शुरू करने के लिए अर्जी दे सकता है जो दसवीं अनुसूची के तहत आता है। इस तरह इसको आगे और स्पष्ट करने की जरूरत नहीं है।”


 
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