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बेईमानी एकमात्र नीति है : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कब्जे वाली नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड कानर के सरकार के सर्कुलर को निरस्त किया

LiveLaw News Network
29 Jun 2018 4:16 AM GMT
बेईमानी एकमात्र नीति है : उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कब्जे वाली नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड कानर के सरकार के सर्कुलर को निरस्त किया
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राज्य पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया; राज्य में एनएलयू की स्थापना के लिए फंड में दी जाएगी यह राशि

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कब्जाए गए नजूल जमीन को फ्रीहोल्ड करने के सरकार के निर्णय की आलोचना की। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोक पाल सिंह की पीठ की नाराजगी इतनी थी कि न केवल उसने सरकार की इस नीति को रद्द कर दिया बल्कि राज्य पर पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने लोगों के अवैध कब्जे से छुड़ाए गए नजूल जमीन को फ्रीहोल्ड करने की सरकार के सर्कुलर को निरस्त करने का आदेश दिया।

पीठ की नाराजगी इस बात से भी थी कि जब राज्य में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर जब वह याचिका की सुनवाई कर रही थी तब राज्य के महाधिवक्ता ने कहा था कि उधम सिंह नगर और नैनीताल में राज्य को 10 एकड़ जमीन भी उपलब्ध नहीं है।

“इतनी जमीन इसलिए उपलब्ध नहीं है क्योंकि राज्य सरकार अपनी जमीन अपने पास रखने के बदले उसे कुछ बेईमान लोगों को दे देने की अनुमति दे दी है। राज्य सरकार को राज्य में विश्वविद्यालय की स्थापना की कोई चिंता नहीं है पर नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड करने के सर्कुलर को बहुत जोरदार ढंग से सही ठहराया है। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार पर लगाए गए जुर्माने की राशि राज्य में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के लिए बनाए जाने वाले कोष में दी जाएगी ।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा –




  1. एक मार्च 2009 को जारी नजूल नीति के क्लॉज़4(f)(g)(h) को और इसके संदर्भ में इसके बाद जारी किए गए सभी आदेशों को निरस्त किया जाता है। सरकार को नजूल जमीन को अपने कब्जे में लेने का आदेश दिया जाता है जिसे सरकार ने एक नोटिस जारी कर फ्रीहोल्ड कर दिया था।

  2. इस तरह गैर क़ानूनी कब्जे से छुड़ाई गई जमीन राज्य सरकार की जमीन मानी जाएगी।

  3. इस जमीन से कब्जा हटाने के लिए अलग से नोटिस की जरूरत नहीं है पर अभी भी जमीन को इन लोगों के कब्जे से लिए जाने की जरूरत है।

  4. राज्य सरकार को अनधिकृत कब्जे वाली जमीन को भविष्य में नियमित करने के लिए सामान्य नीति या नजूल नीति घोषित करने की अनुमति नहीं है और अगर इस तरह की कोई नीति 1 मार्च 2009 के बाद लागू भी की गई है तो वह निष्प्रभावी होगी।

  5. सरकार पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाता है और यह राशि उत्तराखंड में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए बनाई जाने वाले कोष में जमा की जाएगी।


 कोर्ट ने 1 मार्च 2009 को जारी सरकार के सर्कुलर को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। याचिका में कहा गया था कि सरकार ने इस भूमि पर कब्जा करने वालों को भूमि के पट्टे की अवधि के समाप्ति होने के बाद भी उसको फ्रीहोल्ड करने का नोटिस जारी कर दिया है।

सरकार ने अपने इस निर्णय को सही ठहराया और कहा कि जिस क्षेत्र को फ्रीहोल्ड किया जा रहा है वह बहुत ही छोटा है और अधिकाँश मामलों में यह 100 वर्ग मीटर से भी कम है और नजूल नीति के लाभार्थियों में शहरी लोग शामिल हैं।

कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, “राज्य सरकार उत्तर प्रदेश सार्वजिनक परिसर (गैरकानूनी कब्जा बेदखली) अधिनियम, 1972 के तहत कैसे गैरकानूनी कब्जे के नियमितीकरण का आदेश दे सकते है?

“नजूल जमीन राज्य सरकार की है। इसका नागरिकों के हित में प्रयोग किया जाना चाहिए। यह कदम इस तरह मनमाना है कि इससे अराजकता पैदा होगी। राज्य सरकार को क़ानून के शासन को प्रोत्साहित करना चाहिए। गैर क़ानूनी रूप से इस भूमि पर कब्जा करने वालों के कब्जे को नियमित करके सरकार क़ानून नहीं तोड़ सकती है।”

कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की प्रस्तावित नीति संविधान के खिलाफ है। ऐसा करके सरकार ने बेईमान लोगों को जमीन पर कब्जा बनाए रखने की छूट दे दी है। राज्य बेईमान लोगों को जमीन पर कब्जा जमाए रखने को  प्रोत्साहित कर रही है। कैसे राज्य सरकार को इस तरह के निर्णय का पता चला?

… यह नीति एससी/एसटी समुदाय सहित गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले लोगों में इस जमीन को बांटने के लिए होना चाहिए जबकि इसे ऐसे लोगों को दे दिया गया है जो पहले से ही इस पर गैरकानूनी कब्जा जमाए हुए हैं।

हाईकोर्ट ने अपने इस आदेश के दौरान सभ्य समाज के सिद्धांतों के बारे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरियाणा राज्य बनाम मुकेश कुमार के फैसले में अमरीकी संविधान में पांचवें संशोधन के सन्दर्भ के उल्लेख का जिक्र भी किया जिसमें सार्वजनिक परिसंपत्ति की सुरक्षा की बात कही गई है।

कोर्ट ने कहा कि जिस सर्कुलर को राज्य मंत्रिमंडल ने अपनी सहमति नहीं दी है उसके द्वारा राज्य की परिसंपत्ति से हाथ नहीं धोया जा सकता।

“राज्य सरकार को धर्म का पालन करना चाहिए,” पीठ ने कहा।

राज्य ने दावा किया कि जो जमीन फ्रीहोल्ड की जा रही है वह बहुत छोटी है पर याचिकाकर्ता ने पीठ को बताया है कि रुद्रपुर तहसील के रुद्रपुर (यूएस नगर) में जिस जमीन को फ्रीहोल्ड किया जा रहा है वह 1900 एकड़ से अधिक का है।

 कोर्ट ने कहा, “अगर अकेले रुद्रपुर तहसील में ही 1900 एकड़ जमीन को फ्रीहोल्ड किया जा रहा है तो पूरे राज्य में ऐसे जमीन का क्षेत्रफल 20 हजार एकड़ से कम नहीं होगी”।


 
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