मुख्य सुर्खियां
देशी माल अगर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों के शुल्क-मुक्त दुकानों में आपूर्ति की जाती है तो उस पर जीएसटी लगेगा : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
मध्य पदेश हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों पर देश में बनी हुई वस्तुओं की आपूर्ति होती है तो उस पर जीएसटी देय होगा। न्यायमूर्ति सतीश चंद्रा शर्मा और वीरेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं कहा जा सकता कि अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मौजूद शुल्क-मुक्त दुकाने देश के बाहर हैं। भारत में गारमेंट बनाने और इसका निर्यातक जो अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मौजूद शुल्क-मुक्त दुकानों को इसकी आपूर्ति करते हैं, ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें जीएसटी चुकाने से छूट मिलनी...
पटना हाईकोर्ट ने 1980 में दायर पुनरीक्षण याचिका का निपटारा किया; कहा -सिर्फ़ मामले का इंचार्ज लोक अभियोजक ही मामले को वापस लने का आवेदन दे सकता है
वर्ष 1990 में दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई पर ग़ौर करते हुए पटना हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि सिर्फ़ ऐसा लोक अभियोजक जो किसी मामले का इंचार्ज है, अभियोजन वापस लेने की अपील दायर कर सकता है। पृष्ठभूमि इस मामले में एक प्राथमिकी 1970 में दर्ज कराई गई थी। 1974 में या मामला सत्र अदालत में सुनवाई के लिए आया। इस बीच, नया आपराधिक दंड संहिता 1973 में लागू हो गया। एक अतिरिक्त लोक अभियोजक जिनका नाम राम खेलावन सिंह था, इस मामले की सुनवाई कर रहे थे और गवाहों की जाँच की जा रही थी। वर्ष 1978 में...
मृतक के मां-बाप दहेज के मामले में सबसे वास्तविक गवाह होते हैं, उनके झूठ बोलने का भला क्या कारण हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति को उसकी मृत पत्नी के मां-बाप और रिश्तेदारों की गवाही के आधार पर दहेज-हत्या का दोषी क़रार दिया है। इस मामले (Mahadevappa vs. State of Karnataka) में, अभियोजन पक्ष ने कहा की आरोपी ने अपनी पत्नी रुक्मिनी बाई के शरीर पर उस समय केरोसीन तेल डालकर आग लगा दी, जब वह रसोईघर में खाना बना रही थी। निचली अदालत ने आरोपी को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि अभियोजन पक्ष, उसके ख़िलाफ़ दहेज की मांग के आरोप को साबित नहीं कर पाया था। अदालत ने यह भी कहा था कि मृतका को जानबूझकर नहीं मारा...
जेल का दौरा करने वाले पैनल में शामिल होने वाले एडवोकेट को चुने जाने के लिए 3 साल का अनुभव आवश्यक नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
दिल्ली हाइकोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि ऐसे क़ानूनी प्रैक्टिस करने वाले लोग जिनके पास बार में तीन साल से काम का अनुभव है, उन्हें भी दिल्ली हाईकोर्ट की विधिक सेवा समिति में जेलों का दौरा करने वाले दस्ते में शामिल किया जा सकता है। न्यायमूर्ति विभू बखरू ने यह फ़ैसला सुनाते हुए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (मुफ़्त एवं सक्षम) विनियमन के विनियम 8(3) का हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि कोई भी क़ानूनी प्रैक्टिस करने वाला व्यक्ति जिसे बार में तीन साल से काम का अनुभव है उसे इस दस्ते में शामिल...
अवमानना का क्षेत्राधिकार एक आवश्यक क्षेत्राधिकार है; विकल्प होने के बावजूद इस याचिका को ख़ारिज नहीं किया जा सकता : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि अवमानना का क्षेत्राधिकार एक आवश्यक क्षेत्राधिकार है और अवमानना की याचिका को आधार पर ख़ारिज नहीं किया जा सकता कि इसके लिए और विकल्प उपलब्ध हैं। न्यायमूर्ति संजय के अग्रवाल ने एक अवमानना याचिका पर उठाई गई आपत्ति पर ग़ौर करते हुए यह बात कही। इस आपत्ति में कहा गया था कि चूँकि अमल सम्बंधी आवेदन पर मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 36 के तहत ग़ौर किया जा सकता है ताकि मध्यस्थता अधिकरण के फ़ैसले को लागू किया जा सके, इसलिए अवमानना की याचिका को स्वीकार नहीं किया जा सकता।...
रिट याचिका की बहाली से क्या अंतरिम आदेश पुनर्जीवित हो जाएगा?, सुप्रीम कोर्ट करेगा पड़ताल [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट इस बात की पड़ताल करेगा कि अगर मुख्य रिट याचिका की बहाली की जाती है तो क्या इसके तहत दिए गए अंतरिम आदेश भी पुनर्जीवित हो जाएँगे। उत्तर प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड ने 1995 में एक रिट याचिका दायर की थी जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था। बाद में बोर्ड के आवेदन पर इसे फ़ाइल में दुबारा बहाल किया गया। हालाँकि, इससे पहलेश्रम अदालत के आदेश का पालन करने के लिए आदेश को स्थगित कर दिया गया था, पर हाईकोर्ट ने इसे मानने से इंकार कर दिया कि यह अंतरिम आदेश भी रिट याचिका की बहाली के साथ बहाल...
प्राचीन समाज स्वतंत्रता और समानता को तवज्जो देता था, अब लोग रूढ़िवादी विचारों से प्रभावित हो रहे हैं : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
हमारे प्राचीन समाज ने स्वतंत्रता और समानता जैसे आदर्शों का प्रतिपादन किया था, जबकि हज़ारों सालों से चली आ रही दासप्रथा के कारण बाद में इस देश में जातिवाद जैसी कुरीतियाँ पैदा हुईं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राज शेखर अत्री ने पुलिस का संरक्षण प्राप्त करने सम्बंधी याचिका को निपटाते हुए यह बात कही। इस तरह के एक मामले में, एक युवती ने हाईकोर्ट में आवेदन कर अपने रिश्तेदारों से स्वयं के बचाव हेतु पुलिस सुरक्षा की मांग करी थी। दरअसल उस युवती ने एक दूसरी जाति के युवक से शादी की है। "इस...
मुक़दमादार कोर्ट के आदेश के आधार जो राय बनाता है उसको आधार पर अवमानना की कार्रवाई नहीं शुरू की जा सकती : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की एक कार्रवाई को निरस्त करते हुए कहा कि मुक़दमादार किसी कोर्ट आदेश के आधार पर जो राय बनाता है उसको आधार बनाकर ख़िलाफ़ अवमानना की कार्रवाई नहीं की जा सकती। अवमानना की कार्रवाई तभी की जा सकती है जब यह लगे कि मामला जानबूझकर कोर्ट के अपमान का है। उत्तर प्रदेश जल निगम के तहत कुछ कर्मचारियों ने Badri Vishal Pandey vs. Rajesh Mittal मामले के तहत निगम के ख़िलाफ़ अवमानना की याचिका दायर की थी। इन लोगों ने आरोप लगाया था कि ख़ाली पदों पर उनको नियुक्ति नहीं दी गई या उन्हें दुबारा...
पक्षों के बीच सुलह होने की वजह से आईपीसी की धारा 307 के तहत मामले को निरस्त नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आईपीसी के धारा 307 के तहत हुए अपराधों को इसलिए समाप्त नहीं किया जा सकता क्योंकि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच सुलह हो गई है क्योंकि यह एक ग़ैर-प्रशम्य (non-compoundable) अपराध है। कोर्ट ने State of Madhya Pradesh v. Kalyan Singh, मामले में न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की पीठ ने हाइकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। हाईकोर्ट ने वर्तमान आरोपी के ख़िलाफ़ आइपीसी की धारा 307, 294 और 34 के ख़िलाफ़ लंबित मामले को निरस्त कर...
आपराधिक मामलों में बरी होना जज बनने के लिए उम्मीदवार के अच्छे चरित्र का प्रमाणपत्र नहीं हो सकता : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाईकोर्ट जाँच समिति के निर्णय में दख़ल देने से इंकार कर दिया है। समिति ने एक उम्मीदवार के जज बनने की उम्मीदवारी को उसके आपराधिक मामले में बरी किए जाने के बावजूद मानने सेइंकार कर दिया था। इस उम्मीदवार के ख़िलाफ़ दो आपराधिक मामले चल चुके हैं। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसके सेठ और विजय कुमार शुक्ला की पीठ ने दीप नारायण तिवारी और नंद किशोर साहू की याचिका पर यह फ़ैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने अपने आवेदन में कहा था कि वर्ष 2017 के न्यायिक सेवा परीक्षा के लिए अंतिम चयन सूची...
प्रश्नों का ग़लत अनुवाद : कलकत्ता हाईकोर्ट ने एनईईटी के उम्मीदवार को 20 अतिरिक्त अंक देने के आदेश दिए [निर्णय पढ़ें]
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एनईईटी की परीक्षा में बैठने वाले छात्र को 20 अतिरिक्त अंक देने का निर्देश दिया है। इस छात्र का प्रश्नोत्तर ग़लत इसलिए हो गया क्योंकि प्रश्न का ग़लत अनुवाद किया गया था। वसीम अक़रम हुसैन ने बांग्ला में यह परीक्षा दी थी और उसने हाईकोर्ट में यह कहते हुए अपील की कि सात प्रश्नों का ग़लत अनुवाद होने के कारण उसके प्रश्नोत्तर ग़लत हो गए और उसको इन प्रश्नों को अंग्रेज़ी से तुलना करने में काफ़ी वक़्त लग गया। उसने हाईकोर्ट में अपील कर अतिरिक्त अंक दिए जाने की माँग कि। सीबीएसई ने इस...
राफेल फैसले में "पेटेंट तथ्यात्मक और कानूनी त्रुटियां" हैं : यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की
वर्ष 2015 के राफेल सौदे की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिकाओं के खारिज होने के बाद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा के साथ-साथ जाने-माने वकील, प्रशांत भूषण ने एक बार फिर से उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। उनके द्वारा 14 दिसंबर के उच्चतम न्यायालय के फैसले के पुनर्विचार की मांग की गई है। इस याचिका के अनुसार उक्त फैसले में निम्नलिखित त्रुटियां हैं, जिन्हें इस प्रकार से इंगित किया गया है: यह दावा किया गया है कि अदालत द्वारा याचिकाकर्ताओं की प्रार्थना (सीबीआई द्वारा एफआईआर और...
बलात्कार की शिकार लड़की के शरीर पर अगर कोई चोट के निशान नहीं हैं तो इसका मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि पीड़िता की सहमति से सब कुछ हुआ : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 21 साल पुराने फ़ैसले को बदल दिया है और 41 साल के एक व्यक्ति को 1996 में एक लड़की से बलात्कार का दोषी माना है। न्यायमूर्ति इंद्रजीत महंती और वीके जाधव ने चोट के निशान और इसे सहमति बताने के बारे में कहा, "पीड़िता के शरीर पर किसी तरह का चोट का निशान नहीं होने का निष्कर्ष यह नहीं निकाला जा सकता कि पीड़िता ने अपनी सहमति दी है और इसका यह अर्थ भी नहीं निकाला जाना चाहिए कि उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया।प्रतिरोध नहीं होना या शरीर पर किसी तरह का चोट का निशान नहीं होने का सहमति देने...
आरटीआई अधिनियम के तहत सूचना प्राप्त करना कर्मचारी की ईमानदारी पर प्रश्न चिह्न नहीं लगाता : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ प्रशासन की इस बात को लेकर आलोचना की है कि खाद्य और आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के विभाग ने अपने एक कर्मचारी के पीछे इसलिए पड़ गई है क्योंकि उसने आरटीआई के तहत सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है। कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सूचना प्राप्त करने का पूरा अधिकार है और ऐसा करना उसकी ईमानदारी पर प्रश्न चिह्न नहीं लगाता। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति हरिंडेर सिंह संधू की पीठ ने खाद्य और आपूर्ति एवं...
बॉम्बे हाईकोर्ट कोख किराए पर देने वाली महिला को उसके बच्चे के होने वाले माँ-बाप की अनुमति से 24 सप्ताह के गर्भ को नष्ट करने की अनुमति दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में कोख किराए पर देने वाली एक माँ को 24 सप्ताह के गर्भ को नष्ट करने की अनुमति दे दी। इस महिला ने जिस जोड़े को किराए पर यह कोख दिया था, उसने भी उसे ऐसा करने की अनुमति दे दी थी। इस गर्भ को नष्ट करने की ज़रूरत इसलिए पड़ी क्योंकि गर्भ में पल रहे बच्चे के हृदय में कई सारी गड़बड़ियाँ पाई गईं और जन्म के बाद इसके कई सारे ऑपरेशन करने पड़ते। याचिकाकर्ता महिला ने पुणे में रहने वाले एक जोड़े को अपना कोख किराए पर दिया था पर समय-समय पर होने वाले परीक्षणों के बाद इस महिला ने कोर्ट...
बीते वर्ष 2018 के अहम फ़ैसले
अब जबकि साल 2018 ख़त्म हो चुका है हम इस बात पर ग़ौर करने जा रहे हैं कि बीता साल कैसे-कैसे क़ानूनी फ़ैसलों का साल रहा है।सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा इस साल अपने पद से सेवानिवृत्त हुए जबकि न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने उनकी जगह ली। दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने बहुत सारे अहम फ़ैसले दिए जो ऐतिहासिक रहे और विवादित भी, मसलन सबरीमाला मंदिर का फ़ैसला, आधार, समलैंगिकों का मामला, व्यभिचार जैसे फ़ैसले इसी श्रेणी मेंआते हैं। रफ़ाल पर नए मुख्य न्यायाधीश के वर्ष अंत के फ़ैसले...
रैगिंग एक बर्बर प्रथा, इसे जल्द से जल्द कानून बनाकर खत्म किया जाना चाहिए : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
"यह [ रैगिंग] सभी शैक्षणिक संस्थानों और व्यावसायिक कॉलेजों और हॉस्टलों में व्यापक रूप से फैलने वाली एक विरल बीमारी बन गई है। यह गहरे दुःख और पीड़ा का कारण बना है कि ये बहुत दुख और पीड़ा की बात है कि जिस देश के वेदों में विश्वविद्यालय के बारे में उत्तम आदर्श बताए जा चुके हैं वहां के शैक्षिक संस्थानों में रैगिंग जैसी बुराई घर कर चुकी है जो दरिंदगी की हद तक गिर जाती है। ऐसे संस्थानों में जिनका उद्देश्य देश के भावी शासकों को ज्ञान देना है।" गुजरात उच्च न्यायालय ने रैगिंग को एक 'बर्बर प्रथा' करार...
सोहराबुद्दीन शेख कथित मुठभेड़ : विशेष सीबीआई जज ने कहा, सीबीआई की जांच राजनीतिक नेताओं को फंसाने के लिए ' पूर्व निर्धारित' कहानी पर आधारित
मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने कहा है कि गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसी प्रजापति के कथित झूठी मुठभेड़ में हत्या में सीबीआई की जांच राजनीतिक नेताओं को फंसाने के लिए ' पूर्व निर्धारित' कहानी पर आधारित थी और इसे गढ़ा गया था। यह टिप्पणी विशेष सीबीआई अदालत के जज एसजे शर्मा ने इस मामले में 21 दिसंबर को दिए अपने 350 पेज के फैसले में की है। हालांकि ये पूरा फैसला अभी उपलब्ध नहीं हुआ है। 21 दिसंबर को राजनीतिक रूप से संवेदनशील सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति की...
भ्रष्टाचार के कारण शासन आज एक मजाक बनकर रह गया है : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
गुजरात उच्च न्यायालय ने हमारे समाज और जीवन पर भ्रष्टाचार के प्रभाव पर प्रहार करते हुए कहा है कि इसके चलते शासन एक ' मजाक' बनकर रह गया है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला ने कहा, "यदि शासन आज मजाक का विषय बन गया है और इसे हंसी का पात्र बनाकर दयनीय स्थिति में छोड़ दिया गया है तो इसका पूरा दोष शायद भ्रष्टाचार पर जाना चाहिए । विकास शायद भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा शिकार है और इसके दुष्प्रभाव के कारण प्रतिकूल रूप से विकास पर बुरा असर पड़ा है... ""... भारत जैसे विकासशील देश में भ्रष्टाचार की...
न्यायमूर्ति एसआर सेन ने जताया क्षोभ, कहा - कोई भी अथॉरिटी अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह को नहीं रोक सकता है [निर्णय पढ़ें]
अपने विवादास्पद बयान के लिए सूरखियों में आए मेघालय हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुदीप रंजन सेन ने हाल ही में एक शिक्षक को इसलिए हटाए जाने पर ग़ुस्से का इज़हार किया क्योंकि उसने अपने जाति से बाहर किसी अन्य जाति की महिला से शादी की थी।"पहले तो यह कि मैं इस पूरे मामले पर अपना ग़ुस्सा और नाराज़गी ज़ाहिर करता हूँ। किसी भी अथॉरिटी को अंतरजातीय या अंतरधार्मिक विवाह करने को रोकने का अधिकार नहीं है। यह निर्णय करने का अधिकार, उस वर या वधू को है जो शादी कर रहे हैं और उनकी शादी किसी भी तरह उनकी सेवा या नौकरी से...

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![मृतक के मां-बाप दहेज के मामले में सबसे वास्तविक गवाह होते हैं, उनके झूठ बोलने का भला क्या कारण हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] मृतक के मां-बाप दहेज के मामले में सबसे वास्तविक गवाह होते हैं, उनके झूठ बोलने का भला क्या कारण हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356985-am-sapre-indu-malhotra.jpg)
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![रिट याचिका की बहाली से क्या अंतरिम आदेश पुनर्जीवित हो जाएगा?, सुप्रीम कोर्ट करेगा पड़ताल [आर्डर पढ़े] रिट याचिका की बहाली से क्या अंतरिम आदेश पुनर्जीवित हो जाएगा?, सुप्रीम कोर्ट करेगा पड़ताल [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356963-justice-bhanumati-and-justice-indira-banerjee.jpg)
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![मुक़दमादार कोर्ट के आदेश के आधार जो राय बनाता है उसको आधार पर अवमानना की कार्रवाई नहीं शुरू की जा सकती : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] मुक़दमादार कोर्ट के आदेश के आधार जो राय बनाता है उसको आधार पर अवमानना की कार्रवाई नहीं शुरू की जा सकती : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/07/500x300_357120-khanwilkar-hemantgupta.jpg)
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![प्रश्नों का ग़लत अनुवाद : कलकत्ता हाईकोर्ट ने एनईईटी के उम्मीदवार को 20 अतिरिक्त अंक देने के आदेश दिए [निर्णय पढ़ें] प्रश्नों का ग़लत अनुवाद : कलकत्ता हाईकोर्ट ने एनईईटी के उम्मीदवार को 20 अतिरिक्त अंक देने के आदेश दिए [निर्णय पढ़ें]](https://hindi.livelaw.in//356708-calcutta-high-court.jpg)

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![रैगिंग एक बर्बर प्रथा, इसे जल्द से जल्द कानून बनाकर खत्म किया जाना चाहिए : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें] रैगिंग एक बर्बर प्रथा, इसे जल्द से जल्द कानून बनाकर खत्म किया जाना चाहिए : गुजरात हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2018/12/30/500x300_355718-gujarat-high-court-min.jpg)

![न्यायमूर्ति एसआर सेन ने जताया क्षोभ, कहा - कोई भी अथॉरिटी अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह को नहीं रोक सकता है [निर्णय पढ़ें] न्यायमूर्ति एसआर सेन ने जताया क्षोभ, कहा - कोई भी अथॉरिटी अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह को नहीं रोक सकता है [निर्णय पढ़ें]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2018/12/30/500x300_355722-justice-sr-sen-2.jpg)