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रजिस्ट्रेशन के लिए जमा किए गए दस्तावेज को उचित मुहर नहीं होने के कारण पंजीकरण प्राधिकरण जब्त नहीं कर सकता : केरल हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
28 Jun 2018 8:47 AM GMT
रजिस्ट्रेशन के लिए जमा किए गए दस्तावेज को उचित मुहर नहीं होने के कारण पंजीकरण प्राधिकरण जब्त नहीं कर सकता : केरल हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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केरल हाईकोर्ट ने डॉ. अब्दुल रशीद बनाम केरल राज्य मामले में कहा है कि पंजीकरण प्राधिकरण पंजीकरण के लिए जमा किए गए दस्तावेजों को सिर्फ इसलिए जब्त नहीं कर सकता क्योंकि उन पर पर्याप्त मुहर नहीं लगी है।

पृष्ठभूमि

एक कंपनी ने अपने प्रबंध निदेशक के तीन बच्चों के पक्ष में एक सेटलमेंट करार किया था। उप पंजीयक ने इस करार को अपने कब्जे में ले लिया क्योंकि उस पर पर्याप्त मुहर नहीं लगी थी। जिला पंजीयक और भूमि राजस्व आयुक्त ने इस जब्ती को सही ठहराया। हाईकोर्ट के एकल जज की पीठ ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।

इस मामले में रिट याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश अंटोनी डोमिनिक और न्यायमूर्ति डामा शेषाद्री नायडू ने किया जिसमें निम्नलिखित मुद्दे उठाए गए हैं :




  • क्या कोई कंपनी कोई सेटलमेंट करार कर सकती है?

  • क्या करार करने वाले पंजीकरण करने वाले अधिकारियों को पंजीकरण के दस्तावेज वापस करने को कह सकते हैं अगर वह इस पंजीकरण को पूरा नहीं करना चाहते हैं? या अगर कोई अपूर्ण दस्तावेज पंजीकरण के लिए सौंपा जाता है तो क्या पंजीकरण कराने वाले को पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए बाध्य किया जा सकता है वरना उसका दस्तावेज जब्त किया जा सकता है?


निगमित निकाय करार कर सकती है

पंजीकरण विभाग ने कहा कि कोई कंपनी उपहार के लिए कोई करार कर सकती है और यह किसी परिवार के सदस्यों के लिए होना चाहिए।

पंजीकरण प्राधिकरण दस्तावेजों को जब्त नहीं कर सकता

पीठ ने कहा, “डॉ. राशीद ने किसी अपर्याप्त रूप से मुहर लगे दस्तावेज का किसी कार्य के लिए प्रयोग नहीं किया है। वह दस्तावेजों के बल पर किसी कारोबार के होने की बात को साबित नहीं करना चाहता है न ही वह इन दस्तावेजों का कोई फ़ायदा उठाना चाहता है। वह इस दस्तावेज को पूरा करना चाहता है ताकि वह इसका लाभ उठा सके ...”

इसके बाद कोर्ट ने कहा, “किसी जघन्य अपराध में भी, अपराध के लिए तैयारी को अपराध नहीं माना जाता। दीवानी कारोबार इससे ज्यादा बुरा नहीं हो सकता...करार को संपन्न करने के बाद कोई व्यक्ति इस दस्तावेज को पंजीकरण के लिए प्रस्तुत करता है।”

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पंजीकरण प्राधिकारियों ने इन दस्तावेजों के प्रयोग करने के वक्त ऐसा कोई दस्तावेज नहीं देखा है जिस पर मुहर नहीं लगी हो। पीठ ने कहा, “अगर हम यह कहते हैं कि पंजीकरण के लिए पेश किए गए दस्तावेजों को वापस नहीं लिया जा सकता और कारोबार को इससे अलग नहीं किया जा सकता है तो यह व्यक्ति के करार संबंधी स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है...कोई व्यक्ति करार पूरा होने से पहले किसी करार से जब चाहे निकल सकता है और ऐसा वह अपने लाभ के लिए करता है।”

इसके बाद कोर्ट ने निष्कर्षतः कहा कि पंजीकरण के लिए दस्तावेज को देने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति अपर्याप्त रूप से मुहर लगे दस्तावेज का प्रयोग कर रहा है जो कि बिना पर्याप्त मुहर वाले दस्तावेज के प्राप्त नहीं किया जा सकता।


 
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