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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने NRI पक्षकार को व्हाट्सएप या स्काइप जैसे ऐप्स पर वीडियो चैट के माध्यम से पेश होने की अनुमति दी [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
29 Jun 2018 6:44 AM GMT
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने NRI पक्षकार को व्हाट्सएप या स्काइप जैसे ऐप्स पर वीडियो चैट के माध्यम से पेश होने की अनुमति दी [आर्डर पढ़े]
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 एक अभूतपूर्व कदम में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने अमेरिकी एनआरआई को व्हाट्सएप या स्काइप जैसे ऐप्स वीडियो चैट फीचर के माध्यम से पंजाब की अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।ये आदेश न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह की एकल न्यायाधीश पीठ द्वारा पारित किया गया। दरअसल लुधियाना जिले के समराला कोर्ट में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) द्वारा सुना जा रहा मामला याचिकाकर्ता सुच्चा सिंह और पूर्व वर्का अध्यक्ष अजमेर सिंह के बीच कुछ संपत्ति के स्वामित्व पर विवाद से संबंधित है  जो पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री सरंजीत सिंह ढिल्लों के भाई हैं।

अदालत ने अक्टूबर 2015 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की अनुमति दी थी और सिंह को स्थानीय प्राधिकरण का पता लगाने का निर्देश दिया था जहां ऐसी सुविधा उपलब्ध हो या वो इसके लिए भारतीय वाणिज्य दूतावास से संपर्क करें। उन्हें आगे भारत में कामकाजी घंटों के दौरान खुद को उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया था और उस तारीख को तय करने को कहा गया जो न्यायालय और वाणिज्य दूतावास या लोक कार्यालय के लिए पारस्परिक रूप से सुविधाजनक हो।

 हालांकि  न्यायमूर्ति सिंह ने अब ध्यान दिया कि समय के अंतर के कारण सार्वजनिक प्राधिकरण  असुविधाजनक होगा। इसके बाद उन्होंने फैसला दिया कि वीडियो चैट ऐप्स का इस्तेमाल इस उद्देश्य के लिए उपयोग किया जा सकता है, "मेरा मानना ​​है कि इस मामले में पक्षकार सुच्चा सिंह के साक्ष्य बहुत ही बड़ी सामग्री हैं। इसलिए उनके सबूत दर्ज करने की आवश्यकता है। वह संयुक्त राज्य अमेरिका में रह रहे हैं। चूंकि समय में 12 घंटे का अंतर होता है इसलिए, जब यह भारत में एक दिन का समय है तो अमेरिका में रात का समय होता है। इसलिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा की अनुमति देने के लिए रात के समय सार्वजनिक प्राधिकरण को कठिनाई होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग अब कंप्यूटर और मोबाइल पर उपलब्ध है और फेसटाइम, व्हाट्सएप, स्काइप और अन्य समान अनुप्रयोगों जैसे कई एप्लिकेशन उपलब्ध हैं। " इसलिए उन्होंने कहा कि सिंह के लिए  वाणिज्य दूतावास पहुंचना जरूरी नहीं है और उन्होंने इन ऐप्स में से किसी एक के माध्यम से वीडियो चैट के लिए अपनी उपलब्धता के बारे में ट्रायल कोर्ट  को सूचित करने का निर्देश दिया। उसी ऐप को न्यायालय द्वारा किसी भी डिवाइस में स्थापित किया जाएगा। संशोधन याचिका को अनुमति देते हुए आगे यह निर्देशित किया गया, "याचिकाकर्ता समय और तारीख को सूचित करेगा जब वह इस तरह के आवेदन पर अदालत में आज और उसके बाद से दो हफ्तों के भीतर उपलब्ध होगा, अदालत जांच और क्रास परीक्षा के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुचा सिंह के सुविधाजनक तिथि तय करेगी । ये गवाह विपरीत पार्टी या उनके द्वारा मनोनीत किसी अन्य व्यक्ति द्वारा पहचाना जाएगा। "


 
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