मुख्य सुर्खियां
धारा 377 : इस क़ानूनी लड़ाई की अब तक की यात्रा इस तरह से रही है
आईपीसी की धारा 377 को लेकर क़ानूनी लड़ाई काफी लम्बी रही है। एलजीबीटीक्यू समुदाय के अधिकारों की इस लड़ाई की यात्रा के मुख्य पड़ाव इस तरह से रहे हैं : 1991: इनके लिए लड़ाई की शुरुआत एड्स भेदभाव विरोधी आंदोलन ने 1991 में शुरू किया। इस संस्था ने अपने प्रकाशन,लेस दैन गे : अ सिटीजन्स रिपोर्ट ने धारा 377 के साथ मुश्किलों के बारे में लिखा और कहा कि इसे समाप्त किया जाना चाहिए। इकोनोमिक एंड पोलिटिकल वीकली में विमल बालासुब्रमन्यम ने “गे राइट्स इन इंडिया” नामक अपने आलेख में इसके शुरुआती इतिहास के बारे में...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 34 साल पहले अनिवासी भारतीयों को दिल्ली में जमीन दिलाने से वंचित किये जाने के बदले मुआवजे को सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को उन 26 अनिवासी भारतीयों को मुआवजा देने का आदेश दिया है जिनको अपने देश से जुड़ने के लिए दिल्ली में एक जमीन को खरीदने से रोक दिया गया था।न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने सरकार को उन याचिकाकर्ताओं को 11.20 लाख रुपए मुआवजा देने को कहा है जिन्होंने 1978 में सरकार की एक योजना में आवेदन किया था जिसे पांच साल बाद जनहित में छोड़ दिया गया।“…सरकार ने करार तोड़ा था जो उसने आवेदकों से किया था। याचिकाकर्ताओं ने यह सोचकर आवेदन किया था कि उन्हें अपने देश में, दिल्ली में जमीन मिलेगी पर...
अगर राज्य सरकार ने किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मुकदमे में फंसाया है तो उसे मुआवजा मिलना चाहिए : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
“किसी निर्दोष को झूठे मामले में फंसाने के एक वाकये से क़ानून के शासन को एक व्यक्ति का समर्थन खोना पड़ता है और वह एक विद्रोही पैदा करता है जो क़ानून खिलाफ जाने को तैयार रहता है। ख़राब जांच और गलत अभियोजन अंततः इसके कारण बनते हैं”।अगवा करने के मामले में एक व्यक्ति को झूठा फंसाने के लिए राज्य को मुआवजे का निर्देश देते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर खराब जांच और अभियोजन के कारण निर्दोष आरोपी को परेशानी झेलनी पड़ती है तो जीवन के अधिकार के तहत उसे राज्य से मुआवजा पाने का हक़ है।न्यायमूर्ति एसए धर्माधिकारी और...
सिर्फ इसलिए कि कुछ निगम कार्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा किए जाते हैं, इसे 'नगर पालिका' के रूप में नहीं माना जा सकता: SC ने IT छूट का नोएडा का दावा खारिज किया [निर्णय पढ़ें]
अनुच्छेद 243 ( Q) के प्रावधान नगर निगम के रूप में एक औद्योगिक प्रतिष्ठान के संविधान पर विचार नहीं करते बल्कि एक अपवाद को स्पष्ट करते हैं जहां अनुच्छेद 243Q की धारा 22 (1) के तहत नगर पालिका शहरी क्षेत्र में गठित नहीं की जा सकती।सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) को आयकर के भुगतान से मुक्त करने के लिए 'नगर पालिका' के रूप में नहीं माना जा सकता।न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की एक पीठ इस मुद्दे पर विचार कर रही थी कि क्या 2003/04/01 से नोएडा वित्त...
सुप्रीम कोर्ट ने दुहराया, बलात्कार के मामले में पीड़िता का पहचान जाहिर नहीं हो इस बारे में हर अदालत को हर संभव प्रयास करना चाहिए [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर अदालत को इस बारे में पूरी कोशिश करनी चाहिए कि बलात्कार पीड़िता की पहचान जाहिर नहीं हो।न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने बलात्कार के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एक अपील को निरस्त करते हुए यह बात कही।पीठ ने कहा कि निचली अदालत और हाईकोर्ट के फैसले में इस मामले की पीड़िता के नाम का उल्लेख किया गया है।“आईपीसी की धारा 228 के अनुरूप यह नहीं है हालांकि कि ऊपरी अदालत को इस फैसले में अपवाद बताया गया है। इसके बावजूद, अदालत को इस बात का...
क्या एक स्थिर वाहन दुर्घटना का कारण बन सकता है? सुप्रीम कोर्ट का जवाब, ‘हां’ [निर्णय पढ़ें]
शब्द" उपयोग "की अवधि उस अवधि को कवर करने के लिए व्यापक अर्थ है जब वाहन नहीं चल रहा है और स्थिर है" सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 165 के तहत दावा करने के लिए एक स्थिर वाहन भी दुर्घटना का कारण बन सकता है।इस मामले में एक व्यक्ति की उस वक्त मृत्यु हो गई जब उसके आस-पास के इलाके से चट्टान का एक टुकड़ा गिर गया जहां कुआं खोदने के लिए विस्फोट करने का अभियान चल रहा था। विस्फोट करने वाली मशीन को ट्रैक्टर की बैटरी का उपयोग करके संचालित किया गया था। न्यायालय के समक्ष यह मुद्दा था कि...
विधि आयोग का विनियमित सट्टेबाजी और जुआ को वैध बनाने का सुझाव, कहा – पूर्ण प्रतिबंध प्रभावी नहीं
विधि आयोग ने अपनी 276वें रिपोर्ट में सट्टेबाजी और जुए को वैध बनाए जाने का सुझाव दिया है और कहा है कि इन पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने का वांछित परिणाम नहीं मिल रहा है। इस रिपोर्ट का शीर्षक है “Legal Framework: Gambling and Sports Betting including in Cricket in India”. रिपोर्ट में कहा गया है, “विनियमित सट्टेबाजी और जुए को वैध बनाने के विभिन्न पक्षों पर गौर करने पर इसको वैध बनाने के फायदे इनकी नैतिकता के खिलाफ होने के बारे में दिए गए दलील से ज्यादा दमदार हैं... …चूंकि इन गतिविधियों को पूरी तरह रोकना...
कुष्ठ रोग 1980 से उपचार योग्य, कुष्ठ रोग से निकलकर आए लोगों को दिव्यांग ना समझें : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार और राज्यों को सिफारिश की कि वो कानून के ऐसे प्रावधानों को निरस्त करने के लिए कदम उठाएं जो कुष्ठ रोग को गैर-इलाज योग्य और संक्रामक मानते हैं।दो जनहित याचिकाओं जिनमें प्रार्थना की गई है कि जो कानून कुष्ठ रोग को कलंक को जोड़ते हैं जिससे अंतक: विकलांगता होती है, उन्हें 14, 1 9 (1) (बी) और 21 का उल्लंघन करने के रूप में घोषित किया जाना चाहिए, पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कई...
मेडिकल कॉलेजों में तदर्थ प्रवेश की अनुमति के छात्रों के लिए बहुत ही विपरीत परिणाम हो सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने एक मेडिकल कॉलेज को प्रथम एमबीबीएस कोर्ट में छात्रों को तदर्थ प्रवेश देने के हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि इस तरह के आदेश और प्रवेश को याचिका के अंतिम फैसले पर निर्भर कर देने से छात्रों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और छात्रों के प्रति दुर्भावनाएं बढेंगी।पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में एक मेडिकल कॉलेज को अपने प्रथम एमबीबीएस कोर्ट में छात्रों को 2018-19 अकादमिक सत्र में छात्रों का प्रवेश लेने की इजाजत दे दी। मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने इस आदेश की...
क्राइम सीन से प्राप्त नमूने से ब्लड ग्रुप का निर्धारण ना करना अभियुक्त को बरी करने के लिए पर्याप्त नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को जोर देकर कहा कि सिर्फ क्राइम सीन से प्राप्त नमूने से ब्लड ग्रुप का मिलान ना कराना ही अभियुक्त को बरी करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति मोहन एम शांतनागौदर की पीठ ने राजस्थान राज्य बनाम तेजा राम के मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित फैसले पर भरोसा किया जिसमें यह माना गया था कि खून की उत्पत्ति का निर्धारण नहीं करना अभियोजन पक्ष के मामले में घातक साबित नहीं होता। अदालत प्रभु दयाल द्वारा दायर अपील की सुनवाई कर रही थी...
मोटर वाहन दुर्घटना दावा : मुआवाजा निर्धारण में मृतक का वेतन प्रमाणपत्र आय के आकलन का एकमात्र आधार नहीं [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम इन्दिरो देवी मामले में कहा कि वेतन का प्रमाणपत्र मृतक की आय के निर्धारण का एकमात्र आधार नहीं हो सकता।न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें मृतक के आयकर आकलन को आधार बनाकर अधिकरण द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे को बढ़ा दिया।अधिकरण में दावेदार ने अपने वेतन का प्रमाणपत्र और आयकर आकलन पेश किया था। अधिकरण ने नियोक्ता द्वारा जारी किये गए वेतन के प्रमाणपत्र पर...
राज्य और सहायक सरकारी वकील के बीच संबंध वकील और उसके मुवक्किल जैसा है न कि मालिक और नौकर का : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
राज्य चुनाव आयुक्त, बिहार, पटना बनाम जनकधारी प्रसाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि किसी एडवोकेट को सहायक सरकारी वकील के रूप में नियुक्ति एक पेशेवर करार है और दोनों के बीच संबंध एक वकील और उसके मुवक्किल जैसा है न कि मालिक और नौकर का।पंचायत सदस्य जनकधारी प्रसाद को राज्य चुनाव आयोग ने इसलिए योग्य घोषित कर दिया क्योंकि वह राज्य सरकार के अधीन सहायक वकील के रूप में नियुक्ति थे और जिन मामलों में वे सरकार की पैरवी करते हैं उसके लिए उनको पैसे मिलते हैं और इसलिए...
राज्य सरकार मेडिकल कॉलेज को मिला जरूरी प्रमाणपत्र इसलिए वापस नहीं ले सकता क्योंकि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने चिंतपूर्णी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल बनाम पंजाब राज्य के मामले में कहा कि मेडिकल कॉलेज को मिले जरूरी प्रमाणपत्र को राज्य सरकार वापस नहीं ले सकती बशर्ते कि ये प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से न प्राप्त किए गए हों।न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने चिंतपूर्णी मेडिकल कॉलेज की याचिका पर गौर करते हुए उक्त बात कही। इस मेडिकल कॉलेज ने पंजाब सरकार द्वारा दिए गए जरूरी प्रमाणपत्र को वापस लेने को चुनौती दी है।वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कॉलेज की पैरवी करते हुए कहा कि...
गलती करना मानवीय स्वभाव है : छात्रवृत्ति के दस्तावेजों में फर्जीवाड़े के लिए निकाले गए छात्र के बचाव में आया दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को इस बात जोर दिया कि छात्रों को अपराधी माने बिना कॉलेजों में अनुशासन बनाए रखने की जरूरत है। कोर्ट ने उस मेडिकल छात्र का बचाव किया जिसे छात्रवृत्ति के दस्तावेजों में फर्जीवाड़े के लिए छह साल पहले कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया था।न्यायमूर्ति विपिन संघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा, “हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि गलती करना मानवीय स्वभाव है। किशोर वय और युवावस्था किसी भी व्यक्ति के जीवन में एक ऐसी अवस्था होती है जब क्या सही और क्या गलत है इसकी परवाह किये बिना वे गलतियां...
महिला और उसके बलात्कारी के बीच लंबी अवधि से यौन संबंध के कारण क्या ‘सहमतिपूर्ण संबंध’ को वैध शादी माना जा सकता है?, सुप्रीम कोर्ट करेगा इसकी जांच [आर्डर पढ़े]
बलात्कार के कुछ मामलों में आरोपी और महिला के बीच लंबे समय से शारीरिक संबंध होने और यह सब सहमति से होने के कारण आरोपी को इस अपराध का दोषी नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में इस बात पर गौर करना चाहती है कि क्या लम्बे सहवास के कारण क्या उसको दीवानी उत्तरदायित्व से बांधा जा सकता है या नहीं।न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोएल और न्यायमूर्ति एस अब्द्दुल नजीर की पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर गौर करते हुए कहा ‘वैध विवाह’ की इस तरह की व्याख्या...
आरोपी की उँगलियों के निशान का नमूना प्राप्त करने के लिए जांच अधिकारी को मजिस्ट्रेट से आदेश लेने की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने सोनवीर@सोमवीर बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली मामले में कहा कि पुलिस अधिकारी को किसी आरोपी की उँगलियों के निशान का नमूना प्राप्त करने के लिए मजिस्ट्रेट से आदेश प्राप्त करने की जरूरत नहीं है। यह कहा गया कि कैदियों की पहचान अधिनियम की धारा 8 के तहत राज्य सरकार द्वारा कोई नियम नहीं बनाया जाना इसके तहत उपलब्ध अधिकारों के प्रयोग पर पाबंदी नहीं लगाता है। संदर्भन्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की पीठ ने कैदियों की पहचान अधिनियम की धारा 4 और 5 के महत्त्वपूर्ण...
यूपी में मुठभेड़ का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, कोर्ट ने दो हफ्ते में सरकार को पक्ष रखने को कहा
उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही पुलिस मुठभेड़ का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज ( PUCL) की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार से दो हफ्ते में जवाब मांगा है।सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय पारिख ने कहा कि अभी तक की जानकारी के मुताबिक एक साल में करीब 15 सौ पुलिस मुठभेड़ हो चुकी हैं जिनमें 58 लोगों की मौत हो गई है। इन मुठभेड़ की कोर्ट की निगरानी या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज की...
तमिलनाडु मेडिकल प्रवेश : मद्रास हाईकोर्ट ने काउंसेलिंग के समय छात्रों से आधार कार्ड मांगने का निर्देश दिया [आर्डर पढ़े]
मद्रास हाईकोर्ट ने गत सप्ताह मेडिकल में प्रवेश लेने वालों को काउंसेलिंग के समय आधार कार्ड और उसकी फोटोकॉपी दिखाने का निर्देश दिया है ताकि पैदाइश के बारे में फर्जीवाड़े से निपटा जा सके। न्यायमूर्ति एन किरुबाकरण ने कहा कि छात्र अपनी पैदाइश के बारे में फर्जी प्रमाणपत्र देते पाए गए हैं। कोर्ट ने कहा, “कई छात्रों ने तमिलनाडु और अन्य राज्यों में मेडिकल में प्रवेश के लिए आवेदन किया है और दोनों राज्यों को अपनी पैदाइश की जगह बता रहे हैं। लेकिन किसी का जन्मस्थान तो एक ही हो सकता है।” इसके बावजूद कि दो या...
सीआईसी ने कहा, खुद के बचाव के लिए सूचना प्राप्त करना यौन उत्पीड़न के आरोपी का मानवाधिकार है, सीपीआईओ पर लगाया जुर्माना [आर्डर पढ़े]
केंदीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा कि यौन उत्पीड़न के दोषी व्यक्ति अगर अपने बचाव के लिए कोई सूचना प्राप्त करना चाहता है तो यह उसका मानवाधिकार है। एक नागरिक और एक आरोपी के रूप में उसको आरटीआई अधिनियम के तहत ऐसा करने का अधिकार है। इसके साथ ही सीआईसी ने सूचना देने से इनकार करने पर पीआईओ पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया।सीआईसी एम श्रीधर आचार्युलू ने सीपीआई की इसलिए आलोचना की क्योंकि उसने याचिकाकर्ता को लिखे गए पत्र के लिए छह रुपए मांगे। उन्होंने...
कलकत्ता हाईकोर्ट ने तस्करी की शिकार को मुआवजा देने का आदेश दिया, कहा जांच या ट्रायल पर निर्भर नहीं है पुनर्वास [आर्डर पढ़े]
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को राज्य को तस्करी से बचाए गए बच्चे को मुआवजे का भुगतान करने का निर्देश दिया और राज्य की इस दलील को खारिज कर दिया गया कि वह इसकी हकदार नहीं है क्योंकि अभियुक्त की जुड़वां स्थितियों की पहचान नहीं की जा रही है और मामले में मुकदमा शुरू नहीं हुआ है। मूल रूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली याचिकाकर्ता को पुणे में तस्करी कर दी गई लेकिन बाद में उसकी पहचान की गई, पता लगाया गया और वापस लाया गया।इस संबंध में कार्यवाही शुरू हो गई है, जिसमें दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया...


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![सिर्फ इसलिए कि कुछ निगम कार्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा किए जाते हैं, इसे नगर पालिका के रूप में नहीं माना जा सकता: SC ने IT छूट का नोएडा का दावा खारिज किया [निर्णय पढ़ें] सिर्फ इसलिए कि कुछ निगम कार्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा किए जाते हैं, इसे नगर पालिका के रूप में नहीं माना जा सकता: SC ने IT छूट का नोएडा का दावा खारिज किया [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/03/justice-sikri-and-ashok-bhushan.jpg)
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![क्या एक स्थिर वाहन दुर्घटना का कारण बन सकता है? सुप्रीम कोर्ट का जवाब, ‘हां’ [निर्णय पढ़ें] क्या एक स्थिर वाहन दुर्घटना का कारण बन सकता है? सुप्रीम कोर्ट का जवाब, ‘हां’ [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/07/traffic-jams.jpg)


![मेडिकल कॉलेजों में तदर्थ प्रवेश की अनुमति के छात्रों के लिए बहुत ही विपरीत परिणाम हो सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] मेडिकल कॉलेजों में तदर्थ प्रवेश की अनुमति के छात्रों के लिए बहुत ही विपरीत परिणाम हो सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/07/UU-Lalit-and-Dipak-Gupta.jpg)
![क्राइम सीन से प्राप्त नमूने से ब्लड ग्रुप का निर्धारण ना करना अभियुक्त को बरी करने के लिए पर्याप्त नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] क्राइम सीन से प्राप्त नमूने से ब्लड ग्रुप का निर्धारण ना करना अभियुक्त को बरी करने के लिए पर्याप्त नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/01/Supreme-Court-of-India.jpg)
![मोटर वाहन दुर्घटना दावा : मुआवाजा निर्धारण में मृतक का वेतन प्रमाणपत्र आय के आकलन का एकमात्र आधार नहीं [निर्णय पढ़ें] मोटर वाहन दुर्घटना दावा : मुआवाजा निर्धारण में मृतक का वेतन प्रमाणपत्र आय के आकलन का एकमात्र आधार नहीं [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/07/S-A-Bobde-L-Nageswara-Rao.jpg)
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![राज्य सरकार मेडिकल कॉलेज को मिला जरूरी प्रमाणपत्र इसलिए वापस नहीं ले सकता क्योंकि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] राज्य सरकार मेडिकल कॉलेज को मिला जरूरी प्रमाणपत्र इसलिए वापस नहीं ले सकता क्योंकि वह ठीक से काम नहीं कर रहा है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/02/S-A-Bobde-L-Nageswara-Rao.jpg)
![गलती करना मानवीय स्वभाव है : छात्रवृत्ति के दस्तावेजों में फर्जीवाड़े के लिए निकाले गए छात्र के बचाव में आया दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें] गलती करना मानवीय स्वभाव है : छात्रवृत्ति के दस्तावेजों में फर्जीवाड़े के लिए निकाले गए छात्र के बचाव में आया दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/05/Delhi-High-Court-2.jpg)
![महिला और उसके बलात्कारी के बीच लंबी अवधि से यौन संबंध के कारण क्या ‘सहमतिपूर्ण संबंध’ को वैध शादी माना जा सकता है?, सुप्रीम कोर्ट करेगा इसकी जांच [आर्डर पढ़े] महिला और उसके बलात्कारी के बीच लंबी अवधि से यौन संबंध के कारण क्या ‘सहमतिपूर्ण संबंध’ को वैध शादी माना जा सकता है?, सुप्रीम कोर्ट करेगा इसकी जांच [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/07/AK-Goel-Abdul-nazeer-Abhishek-manu-singhvi.jpg)
![आरोपी की उँगलियों के निशान का नमूना प्राप्त करने के लिए जांच अधिकारी को मजिस्ट्रेट से आदेश लेने की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] आरोपी की उँगलियों के निशान का नमूना प्राप्त करने के लिए जांच अधिकारी को मजिस्ट्रेट से आदेश लेने की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/07/Justice-Ashok-Bhushan-and-Justice-Indu-Malhotra.jpg)

![तमिलनाडु मेडिकल प्रवेश : मद्रास हाईकोर्ट ने काउंसेलिंग के समय छात्रों से आधार कार्ड मांगने का निर्देश दिया [आर्डर पढ़े] तमिलनाडु मेडिकल प्रवेश : मद्रास हाईकोर्ट ने काउंसेलिंग के समय छात्रों से आधार कार्ड मांगने का निर्देश दिया [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/07/Aadhar-logo.jpg)
![सीआईसी ने कहा, खुद के बचाव के लिए सूचना प्राप्त करना यौन उत्पीड़न के आरोपी का मानवाधिकार है, सीपीआईओ पर लगाया जुर्माना [आर्डर पढ़े] सीआईसी ने कहा, खुद के बचाव के लिए सूचना प्राप्त करना यौन उत्पीड़न के आरोपी का मानवाधिकार है, सीपीआईओ पर लगाया जुर्माना [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/07/RTI-min.jpg)
![कलकत्ता हाईकोर्ट ने तस्करी की शिकार को मुआवजा देने का आदेश दिया, कहा जांच या ट्रायल पर निर्भर नहीं है पुनर्वास [आर्डर पढ़े] कलकत्ता हाईकोर्ट ने तस्करी की शिकार को मुआवजा देने का आदेश दिया, कहा जांच या ट्रायल पर निर्भर नहीं है पुनर्वास [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/06/Calcutta-High-Court.jpg)