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MBBS: क्या नामांकन फॉर्म जमा किए बिना फीस का आंशिक भुगतान मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की पुष्टि और कॉलेज से जुड़ने के समान है? सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक रिट याचिका दायर की गई है जिसमें कानूनन सवाल उठाया गया है कि क्या काउंसलिंग वेबसाइट से डाउनलोड किया गया प्रोविजनल एडमिशन लेटर मेडिकल कॉलेज (Medical College) में एडमिशन की पुष्टि है या नामांकन फॉर्म जमा किए बिना पाठ्यक्रम के लिए फीस का आंशिक भुगतान, मूल दस्तावेज और विभिन्न अन्य अंडरटेकिंग और शपथ पत्र की शपथ लेना मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के समान है।याचिका एक उम्मीदवार द्वारा दायर की गई है, जिसने मेडिकल काउंसलिंग कमेटी द्वारा आयोजित एनईईटी यूजी काउंसलिंग में आवेदन...
आईपीसी 121 ए के तहत अपराध के लिए हत्या या शारीरिक चोट का खतरा आवश्यक नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने आईआईएससी आतंकी हमले में आजीवन कारावास बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिसंबर, 2005 में बेंगलुरु में भारतीय विज्ञान संस्थान पर आतंकी हमले के लिए चार लोगों की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एस रवींद्र भट की तीन जजों की बेंच ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 121 ए के तहत [भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए दंडनीय अपराध करने की साजिश], अभिव्यक्ति "आतंकित" करना है और ये "एक आशंका या अलार्म की स्थिति का गठन होगा और यह आवश्यक नहीं होगा कि खतरा हत्या या शारीरिक चोट का होना चाहिए।इस...
बीमा कंपनी को सिर्फ दावा खारिज करने में देरी के लिए सेवा में कमी का दोषी नहीं ठहराया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बीमाकर्ता (insurer) को केवल दावे के प्रोसेसिंग में देरी और अस्वीकृति में देरी के लिए सेवा में कमी का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस वी. रामसुब्रमण्यम की पीठ ने कहा," वे (प्रोसेसिंग में देरी और अस्वीकृति में देरी) बीमाकर्ता को सेवा में कमी का दोषी ठहराने के लिए कई कारकों में से एक हो सकते हैं। लेकिन यह एकमात्र कारक नहीं हो सकता।"अदालत ने इस प्रकार देखा कि न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के खिलाफ...
सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट स्टाफ के वेतन में वृद्धि के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ यूपी सरकार की चुनौती पर सुनवाई करने के लिए सहमति जताई
सुप्रीम कोर्ट, मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया, जिसने संक्षेप में सरकार को आवश्यक कदम उठाने के लिए एकल न्यायाधीश के निर्देश की पुष्टि की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिकारियों और कर्मचारियों (सेवा और आचरण की शर्तें) (संशोधन) नियम, 2005 को संविधान के अनुच्छेद 229 (2) के तहत हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा हाईकोर्ट में उनके समकक्षों के गुण-दोष के आधार पर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के वेतन-मान...
ईडी निदेशक के 5 साल के कार्यकाल की अनुमति देने वाले सीवीसी संशोधन अधिनियम को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) अधिनियम 2021 को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई है। उक्त संशोधन प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के डायरेक्टर के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने की अनुमति देता है।भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नेता डॉ. जया ठाकुर द्वारा दायर याचिका में केंद्र सरकार द्वारा 17 नवंबर, 2021 को ईडी निदेशक संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल एक और वर्ष बढ़ाने के आदेश को भी चुनौती दी गई है।याचिकाकर्ता ने कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने कॉमन कॉज द्वारा दायर मामले में...
'रिहाई की तारीख बे बाद हिरासत अनुच्छेद 21 का उल्लंघन' : सुप्रीम कोर्ट ने सजा की अवधि के बाद जेल में रखने पर दोषी को 7.5 लाख का मुआवजा दिया
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य को बलात्कार के एक दोषी को मुआवजे के रूप में 7.5 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है, जिसे सजा की अवधि के बाद जेल में रखा गया था।जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने मई 2022 में दिए गए एक फैसले में कहा ( जो हाल ही में अपलोड किया गया), " जब एक सक्षम अदालत, दोषसिद्धि पर, एक आरोपी को सजा सुनाती है और अपील में, सजा की पुष्टि के बाद सजा को संशोधित किया गया था और फिर अपीलीय निर्णय अंतिम हो गया था, दोषी को केवल उस अवधि तक हिरासत में रखा जा सकता...
जालसाजी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी विधायक जयकुमार गोर को ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने और जमानत के लिए आवेदन करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक जयकुमार गोरे को निर्देश दिया कि वह ट्रायल कोर्ट में आत्मसर्पण करे और जमानत के लिए आवेदन करे। विधायक गोरे पर मृत व्यक्ति के नाम पर कथित रूप से जाली दस्तावेज बनाने का आरोप लगाया गया है।सीजेआई एनवी रमाना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने यह निर्देश राज्य के वकील द्वारा सूचित किए जाने के बाद जारी किया कि मामले में चार्जशीट पहले ही दायर की जा चुकी है।सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत से यह भी कहा कि वह इस न्यायालय...
क्या बुलडोजर की कार्रवाई के खिलाफ सर्वव्यापी आदेश पारित किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर की कार्रवाई को चुनौती देने वाली जमीयत की याचिका पर कहा
जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulema-i-Hind) द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि यूपी और एमपी जैसे राज्यों में अधिकारियों ने दंगों जैसे मामलों में आरोपी व्यक्तियों के घरों को तोड़ने के लिए बुलडोजर (Bulldozer) की कार्रवाई का सहारा लिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को मौखिक रूप से पूछा कि क्या अनाधिकृत निर्माणों को गिराने पर रोक लगाने के लिए सर्वव्यापी आदेश पारित किया जा सकता है?जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने मौखिक रूप से कहा, "कानून के शासन का...
सीपीसी आदेश XXII नियम 4 - अपील महज इसलिए पूरी तरह से समाप्त नहीं होती क्योंकि कुछ मृत प्रतिवादियों के कानूनी प्रतिनिधियों को रिकॉर्ड में नहीं लाया गया था: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अपील के लंबित रहने के दौरान मर चुके कुछ प्रतिवादियों के कानूनी प्रतिनिधि को प्रतिस्थापित करने में महज विफलता के लिए एक अपील को समग्र रूप से समाप्त नहीं माना जा सकता है।यह विचार करते हुए कि क्या वादी/प्रतिवादियों के कानूनी प्रतिनिधियों को सामने नहीं लाने के कारण मुकदमा/अपील समाप्त हो गई है या नहीं, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि कोर्ट को यह जांचना होगा कि क्या जीवित प्रतिवादियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का अधिकार जीवित है?इस मामले में, दो वादी,...
सुप्रीम कोर्ट हिजाब मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने के लिए सहमत
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सूचीबद्ध करने के लिए सहमत हो गया, जिसने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब (Hijab) पर प्रतिबंध को बरकरार रखा था।एडवोकेट प्रशांत भूषण ने तत्काल सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश के समक्ष मामले का उल्लेख किया।भूषण ने कहा, "ये कर्नाटक के हिजाब मामले हैं। सूचीबद्ध नहीं है। मार्च में दायर किया गया था। छात्रों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।"CJI रमना ने कहा,"दो बेंच काम नहीं कर रही हैं। इसलिए...
सुप्रीम कोर्ट ने राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा देने की मांग वाली भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर 26 जुलाई को सुनवाई के लिए सहमति जताई
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राम सेतु (Ram Setu) को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा देने की मांग वाली भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) की याचिका पर 26 जुलाई ,2022 जुलाई को सुनवाई के लिए सहमति जताई।सीजेआई रमना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की तीन-जजों की खंडपीठ ने यह निर्देश तब जारी किया जब राज्यसभा सांसद डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने के लिए केंद्र को निर्देश देने के लिए उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की।सुब्रमण्यम स्वामी...
मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 34 या 37 के तहत, न्यायालय मध्यस्थ द्वारा पारित निर्णय को संशोधित नहीं कर सकता, सिर्फ रिमांड कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 34 या 37 के तहत, कोई न्यायालय मध्यस्थ द्वारा पारित निर्णय को संशोधित नहीं कर सकता है।जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि विकल्प यह होगा कि अवार्ड को रद्द कर दिया जाए और मामले को रिमांड किया जाए।अदालत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ('एनएचएआई') द्वारा दायर अपीलों पर विचार कर रही थी, जिसमें कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें उपायुक्त और मध्यस्थ, राष्ट्रीय राजमार्ग - 275 (भूमि अधिग्रहण) और...
अगर वाद की प्रकृति में बदलाव की संभावना है तो वादी को संशोधन की अनुमति नहीं दी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर वाद की प्रकृति में बदलाव की संभावना है तो वादी को संशोधन की अनुमति देने में अदालत उचित नहीं होगी।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने यह भी कहा कि वादी को प्रतिवादी के रूप में किसी भी पक्ष में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जा सकती है, जो आवश्यक नहीं हो सकता है और / या इस आधार पर उचित पक्ष हो सकता है कि वादी डोमिनिस लिटिस यानी वाद का मास्टर है। इस मामले में, दिल्ली हाईकोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 1 नियम 10 और आदेश 6 नियम 17 के तहत...
बेंगलुरु कोर्ट ने सोशल मीडिया को जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस परदीवाला के खिलाफ मानहानि पोस्ट हटाने का निर्देश दिया
बेंगलुरु में अतिरिक्त सिटी सिविल एंड सेशन कोर्ट ने मंगलवार को एक "जॉन डो" आदेश पारित किया, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर, फेसबुक, लिंक्डइन, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप को व्यापक रूप से प्रसारित एक तस्वीर को हटाने का निर्देश दिया गया, जिसका इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्य कांत (Justice Surya Kant) और जस्टिस परदीवाला (Justice Pardiwala) के खिलाफ झूठे और मानहानिकारक दावे करने के लिए किया गया जा रहा है।जस्टिस परदीवाला द्वारा बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के खिलाफ...
अपील के माध्यम से वैधानिक वैकल्पिक उपाय उपलब्ध होने पर संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत एक रिट याचिका/पुनरीक्षण याचिका पर तब विचार नहीं किया जाना चाहिए, जब अपील के माध्यम से एक वैधानिक वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हो।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति देते हुए इस प्रकार देखा, जिसने भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित एकपक्षीय निर्णय और डिक्री को रद्द कर दिया था।सुप्रीम कोर्ट के समक्ष, अपीलकर्ता-वादी ने तर्क...
एनडीपीएस अधिनियम धारा 27 ए की प्रयोज्यता गंभीर रूप से संदिग्ध: सुप्रीम कोर्ट ने एनडीपीएस आरोपी की जमानत बरकरार रखी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 37 एनडीपीएस अधिनियम की कठोरता उस मामले में लागू नहीं होगी जहां धारा 27 ए एनडीपीएस अधिनियम की प्रयोज्यता गंभीर रूप से संदिग्ध है और आरोपी से कोई ज़ब्ती नहीं हुई थी और विचाराधीन मात्रा मध्यवर्ती मात्रा थी।इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 21(बी)/29/27ए के तहत आरोपी व्यक्ति को जमानत दे दी।सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील में, राज्य ने तर्क दिया कि (ए) आरोप अनिवार्य रूप से प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी के लिए...
एकपक्षीय डिक्री रद्द करने पर, प्रतिवादी को मुकदमे की कार्यवाही में भाग लेने और गवाहों से क्रॉस एग्जामिन करने की अनुमति दी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि एकपक्षीय डिक्री को रद्द करने पर, प्रतिवादियों को मुकदमे की कार्यवाही में भाग लेने और गवाहों से क्रॉस एग्जामिन करने की अनुमति दी जा सकती है।इस मामले में, प्रतिवादी को ट्रायल कोर्ट द्वारा एकपक्षीय आदेश दिया गया था। आदेश IX नियम 13 के तहत उनका आवेदन भी निचली अदालत ने खारिज कर दिया था।प्रथम अपीलीय कोर्ट ने प्रतिवादियों द्वारा दायर अपील की अनुमति दी और एकपक्षीय निर्णय और डिक्री को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि मुकदमे की बहाली पर पक्षों को उनके संबंधित साक्ष्य और...
क्या जॉइन्ट सीएसआईआर-यूजीसी नेट एग्जाम 2019 का परिणाम एनटीए ए स्कोर कार्ड या फाइनल रिजल्ट द्वारा घोषित किया गया है? सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
जॉइन्ट सीएसआईआर-यूजीसी नेट एग्जाम-2019 की नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा 15 जनवरी, 2020 को घोषित रिजल्ट को फाइनल रिजल्ट घोषित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।याचिका में यह मुद्दा उठाया गया कि क्या एनटीए द्वारा 15 जनवरी 2020 को घोषित जॉइन्ट सीएसआईआर-यूजीसी नेट एग्जाम- 2019 केवल स्कोर कार्ड है, इसके फाइनल रिजल्ट की घोषणा के बराबर नहीं है।विनय पीसी द्वारा विशेष अनुमति याचिका को प्राथमिकता दी गई है, जिनकी गणित में सहायक प्रोफेसर के लिए उम्मीदवारी को केरल लोक सेवा आयोग ने इस...
जब आरोपी धारा 88, 170, 204 और 209 सीआरपीसी के तहत मजिस्ट्रेट के सामने है तो अलग जमानत आवेदन पर जोर देने की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 88, 170, 204 और 209 के तहत आवेदन पर विचार करते समय एक अलग जमानत आवेदन पर जोर देने की जरूरत नहीं है।जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने आदेश दिया, "संहिता की धारा 88, 170, 204 और 209 के तहत आवेदन पर विचार करते समय जमानत आवेदन पर जोर देने की जरूरत नहीं है।"धारा 88 पेशी के लिए बांड लेने की शक्ति से संबंधित है: जब कोई व्यक्ति, जिसकी उपस्थिति या गिरफ्तारी के लिए किसी न्यायालय की अध्यक्षता करने वाले अधिकारी को समन या वारंट जारी...


















