ताज़ा खबरें

बीसीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान में संशोधन की अनुमति की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया
बीसीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान में संशोधन की अनुमति की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने का अनुरोध किया

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से अपने संविधान में संशोधन की अनुमति की मांग वाली याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया है।इस मामले का उल्लेख सीनियर एडवोकेट पीएस पटवालिया ने शुक्रवार को भारत के चीफ जस्टिस के समक्ष किया।मामले को सूचीबद्ध करने के लिए पीठ से आग्रह करते हुए पटवालिया ने कहा,"आवेदन 2 साल पहले दायर किया गया था और यह अप्रैल में दाखिल किया था। निर्देश इसे 2 सप्ताह के बाद सूचीबद्ध करने के लिए थे, लेकिन फिर COVID आ गया। फैसले के बाद संशोधन लंबित...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
'जब महिला सालों से पुरुष के साथ रह रही है तो रिश्ता टूटने पर बार- बार बलात्कार की एफआईआर का कोई आधार नहीं ' : सुप्रीम कोर्ट

यह टिप्पणी करते हुए कि जहां एक महिला स्वेच्छा से एक पुरुष के साथ रह रही है और उसके साथ संबंध रखती है, और यदि संबंध अभी नहीं चल रहा है, तो वह एक ही महिला पर बार-बार बलात्कार करने (धारा 376 (2) (एन)) के अपराध के लिए प्राथमिकी दर्ज करने का आधार नहीं हो सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बलात्कार के आरोपी व्यक्ति को शादी करने का वादा पूरा करने में विफल रहने पर पूर्व-गिरफ्तारी जमानत दे दी, जिस रिश्ते में एक बच्चा भी पैदा हुआ था।कोर्ट ने आदेश दर्ज किया, ...शिकायतकर्ता स्वेच्छा से अपीलकर्ता के साथ...

दोषसिद्धि के खिलाफ पहले से ही स्वीकृत आपराधिक अपील को इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि आरोपी फरार है: सुप्रीम कोर्ट
दोषसिद्धि के खिलाफ पहले से ही स्वीकृत आपराधिक अपील को इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि आरोपी फरार है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दोषसिद्धि के खिलाफ पहले से स्वीकृत अपील को इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है कि आरोपी फरार है।इस मामले में, आरोपी को ट्रायल कोर्ट द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 और 120बी और आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 27(1) के तहत दोषी ठहराया गया था। उसने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 374 की उप-धारा (2) के तहत हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने 29 अक्टूबर 2009 को सुनवाई के लिए अपील स्वीकार की। जब आरोपी-अपीलकर्ता द्वारा दायर सजा के निलंबन अर्जी...

[गुजरात स्लम-निवासी बेदखली] प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भुगतान समय-सीमा को पूरा करने में असमर्थ आबंटित संबंधित अधिकारियों से अनुरोध कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
[गुजरात स्लम-निवासी बेदखली] प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भुगतान समय-सीमा को पूरा करने में असमर्थ आबंटित संबंधित अधिकारियों से अनुरोध कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट के आदेश का विरोध करने वाली याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पुनर्वास के पात्र हैं। लेकिन भुगतान समय-सीमा को पूरा करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, इसके लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।गुजरात हाईकोर्ट ने अपने उक्त आदेश में सितंबर 2020 में गांधीनगर रेलवे स्टेशन क्षेत्र से सरकारी अधिकारियों द्वारा बेदखल किए गए झुग्गीवासियों को राहत देने से इनकार कर दिया था।जस्टिस ए.एम. खानविलकर और जस्टिस...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
रजिस्ट्रर्ड लाइफ के खत्म होने तक वाहनों को चलाने की अनुमति की मांग वाली याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने दो वकीलों पर लगाए गए 50 हजार रुपए का जुर्माना के आदेश को वापस लिया

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को दो वकीलों पर लगाए गए 50,000 रुपये का जुर्माना के आदेश को वापस लिया, जबकि उनके द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें वाहनों को उनके रजिस्ट्रर्ड लाइफ के खत्म होने तक डीजल और पेट्रोल दोनों संस्करणों में चलाने की अनुमति देने की मांग की गई थी।राहत देते हुए जस्टिस बीआर गवई और पीएस नरसिम्हा की बेंच ने अपने आदेश में कहा,"हर वकील अदालत का अधिकारी होता है और जब वह पेश होता है तो उसे उसी को ध्यान में रखते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होता है।...

सच्चाई का घेरा : सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामले में आंखों देखे साक्ष्य की सराहना के लिए सिद्धांत निर्धारित किए
"सच्चाई का घेरा" : सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामले में आंखों देखे साक्ष्य की सराहना के लिए सिद्धांत निर्धारित किए

सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक अपील में दिए गए फैसले में, किसी आपराधिक मामले में आंखों देखे साक्ष्य की सराहना के लिए सिद्धांत निर्धारित किए।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा, "चश्मदीद गवाहों के साक्ष्य के मूल्य का आकलन करने में, दो प्रमुख विचार हैं (1) क्या, मामले की परिस्थितियों में, घटना स्थल पर उनकी उपस्थिति पर विश्वास करना संभव है या ऐसी स्थितियों में जो उनके द्वारा तथ्यों पेश करना संभव हो सके और (2) क्या उनके साक्ष्य में स्वाभाविक रूप से कुछ भी असंभव या अविश्वसनीय है।"अदालत...

धारा 211 आईपीसी प्रारंभिक आरोप को संदर्भित करती है, आपराधिक ट्रायल  के दौरान जोड़े गए झूठे सबूत या झूठे बयान को नहीं : सुप्रीम कोर्ट
धारा 211 आईपीसी प्रारंभिक आरोप को संदर्भित करती है, आपराधिक ट्रायल के दौरान जोड़े गए झूठे सबूत या झूठे बयान को नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 211 में 'झूठे आरोप' की अभिव्यक्ति प्रारंभिक आरोप को संदर्भित करती है जो आपराधिक जांच को गति प्रदान करती है, न कि आपराधिक ट्रायल के दौरान जोड़े गए झूठे सबूत या झूठे बयानों को। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि आपराधिक कानून को गति देने के इरादे और उद्देश्य से दिया गया बयान प्रावधान के तहत 'आरोप' का गठन करेगा ।आईपीसी की धारा 211 इस प्रकार है -" धारा 211। चोट पहुंचाने के इरादे से किए गए अपराध का झूठा आरोप। - जो कोई भी, किसी भी...

किशोर पर बालिग की तरह ट्रायल चलाने के लिए प्रारंभिक मूल्यांकन : जेजेबी को मनोवैज्ञानिकों/ मनोसामाजिक कार्यकर्ताओं की सहायता लेना अनिवार्य : सुप्रीम कोर्ट
किशोर पर बालिग की तरह ट्रायल चलाने के लिए प्रारंभिक मूल्यांकन : जेजेबी को मनोवैज्ञानिकों/ मनोसामाजिक कार्यकर्ताओं की सहायता लेना अनिवार्य : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि जब किशोर न्याय बोर्ड में बाल मनोविज्ञान या बाल मनोरोग में डिग्री के साथ अभ्यास करने वाले पेशेवर शामिल नहीं होते हैं, तो यह किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (अधिनियम) की धारा 15 (1) के प्रावधान के तहत अनुभवी मनोवैज्ञानिकों या मनोसामाजिक कार्यकर्ताओं या अन्य विशेषज्ञों की सहायता लेने के लिए बाध्य होगा। प्रारंभ में 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को किशोर माना जाना था और बोर्ड द्वारा उन पर ट्रायल चलाया जाना था। 2015 के अधिनियम के लागू होने...

सलाह है कि बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट जल्द से जल्द फैसला सुनाएं: सुप्रीम कोर्ट
सलाह है कि बहस पूरी होने के बाद हाईकोर्ट जल्द से जल्द फैसला सुनाएं: सुप्रीम कोर्ट

क आपराधिक अपील पर विचार करते हुए जहां हाईकोर्ट ने छह महीने तक इसे सुरक्षित रखने के बाद फैसला सुनाया था, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह हमेशा सलाह दी जाती है कि हाईकोर्ट दलीलों के समापन के बाद और फैसला सुरक्षित रखने के बाद जल्द से जल्द फैसला सुनाए। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने धोखाधड़ी के मामले में पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए यह बात कही। कोर्ट ने कहा, "शुरुआत में, यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि हाईकोर्ट ने मामले को...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के चुनाव कब अधिसूचित होंगे? सुप्रीम कोर्ट ने नागालैंड राज्य चुनाव आयोग से पूछा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नागालैंड राज्य चुनाव आयोग को अदालत को ये सूचित करने के लिए कहा कि वो नगर पालिकाओं और नगर परिषदों के चुनावों को कब अधिसूचित करेगा। जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम एम सुंदरेश की पीठ ने आगे के विवरण के बारे में अदालत को अवगत कराने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। बेंच पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) और महिला अधिकार कार्यकर्ता रोज़मेरी ड्यूचु द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें भारत के संविधान के भाग IXA के संचालन को छूट देने वाले नागालैंड...

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय के खिलाफ पटना हाईकोर्ट द्वारा एक अन्य पार्टी की जमानत याचिका में दिए गए निर्देशों को खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय के खिलाफ पटना हाईकोर्ट द्वारा एक अन्य पार्टी की जमानत याचिका में दिए गए निर्देशों को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पटना हाईकोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेश को प्रोमोद कुमार सैनी और अन्य आरोपी द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका में खारिज कर दिया, जिसमें जमानत की कार्यवाही के लिए एक तीसरे पक्ष सहारा इंडिया समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को तलब किया गया था और उनसे निवेश वापस करने की योजना मांगी गई थी।जस्टिस एएम खानविलकर और ज‌स्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा,"मौजूदा मामले में हमने देखा है कि हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने के लिए आवेदन को लंबित रखा और तीसरे पक्ष को अदालत में पेश होने के निर्देश जारी...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
अगर आप हर दिन एक जनहित याचिका दायर करेंगे तो हमें एक विशेष अदालत का गठन करना होगा: सुप्रीम कोर्ट ने अश्विनी उपाध्याय से कहा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सीरियल पीआईएल वादी अश्विनी उपाध्याय द्वारा सभी स्कूलों में समान ड्रेस कोड की मांग वाली एक रिट याचिका के लिए तत्काल सूचीबद्ध करने के अनुरोध को ठुकरा दिया।उपाध्याय ने अपने बेटे द्वारा दायर याचिका का उल्लेख किया था] जिसमें इसे अगले सप्ताह हिजाब मामले के साथ सूचीबद्ध करने की मांग की गई थी। उपाध्याय की याचिका को सूचीबद्ध करने के मुद्दे पर अपनी अनिच्छा व्यक्त करते हुए, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमाना ने कहा, "मैंने आपको कई बार बताया है। यदि आप हर दिन एक जनहित याचिका दायर...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने यूएपीए मामले में जमानत बरकरार रखते हुए एनआईए से कहा- ऐसा लगता है कि आपको किसी व्यक्ति के न्यूज पेपर पढ़ने में भी दिक्कत है

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने यूएपीए (UAPA) मामले में आरोपी को दी गई जमानत के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए मौखिक रूप से टिप्पणी की,"जिस तरह से आप कर रहे हैं, ऐसा लगता है कि आपको किसी व्यक्ति के न्यूज पेपर पढ़ने में भी दिक्कत है।एनआईए ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा यूएपीए मामले में एक कंपनी के महाप्रबंधक को कथित तौर पर जबरन वसूली के लिए तृतीया प्रस्तुति समिति (टीपीसी) नामक एक माओवादी खंडित समूह के साथ संबद्ध होने के लिए जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का...

वकीलों को अदालत के अधिकारियों के तौर पर मुवक्किलों को सही सलाह देनी चाहिए  : सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली डिक्री के लिए कई कार्यवाही दायर करने की सलाह देने वाले वकीलों पर कार्यवाही की इच्छा जताई
"वकीलों को अदालत के अधिकारियों के तौर पर मुवक्किलों को सही सलाह देनी चाहिए ' : सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली डिक्री के लिए कई कार्यवाही दायर करने की सलाह देने वाले वकीलों पर कार्यवाही की इच्छा जताई

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उन एडवोकेट पर गंभीरता से विचार किया, जिन्होंने एक मामले में बेदखली को बरकरार रखने के इसके आदेश के बाद, विभिन्न अदालतों में इस आदेश को "पराजित" करने के लिए कई कार्यवाही दायर करने की सलाह दी थी। कोर्ट ने कहा कि "न्यायालय के अधिकारियों के रूप में उनकी मुवक्किलों को ठीक से सलाह देने की उच्च जिम्मेदारी है।जस्टिस एस के कौल और जस्टिस एम एम सुंदरेश की पीठ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक सिविल पुनरीक्षण में 7 मार्च, 2022 के फैसले के खिलाफ एक एसएलपी पर सुनवाई कर रही थी, जहां...

अटॉर्नी जनरल ने नूपुर शर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर सवाल उठाने वाले सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज और दो सीनियर एडवोकेट के खिलाफ अवमानना कार्रवाई के लिए मंजूरी देने से इनकार किया
अटॉर्नी जनरल ने नूपुर शर्मा मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर सवाल उठाने वाले सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज और दो सीनियर एडवोकेट के खिलाफ अवमानना कार्रवाई के लिए मंजूरी देने से इनकार किया

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल (K K Venugopal ने नूपुर शर्मा मामले (Nupur Sharma Case) में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की टिप्पणियों पर सवाल उठाने वाले सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज एसएन ढींगरा और सीनियर एडवोकेट अमन लेखी और के रामकुमार के खिलाफ अवमानना कार्रवाई के लिए मंजूरी देने से इनकार किया।एजी ने एडवोकेट सीआर जया स्किन द्वारा मांगी गई मंजूरी को अस्वीकार कर दिया, जिन्होंने आरोप लगाया कि टिप्पणियां प्रकृति में अवमानना थीं। एजी ने कहा कि व्यक्तियों द्वारा की गई टिप्पणियां "निष्पक्ष टिप्पणी" के दायरे...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
पीसी एक्ट- क्या रिश्वत की मांग के प्रत्यक्ष साक्ष्य के बिना लोक सेवक को दोषी ठहराया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने संदर्भ पर निर्णय तक अपील टाली

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत एक मामले में की गई अपील में सुनवाई स्थगित कर दी ताकि इस मुद्दे पर लंबित संदर्भ के निर्णय की प्रतीक्षा की जा सके कि क्या एक लोक सेवक को धारा 7 और धारा 13 (1) (d) सहपठित धारा 13(2) के तहत अवैध परितोषण की मांग के प्रत्यक्ष प्रमाण के अभाव में दोषी ठहराया जा सकता है।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ केरल राज्य द्वारा भ्रष्टाचार के एक मामले में एक आबकारी अधिकारी को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही...

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों के हाथों आदिवासियों की हत्या की जांच की मांग वाली याचिका खारिज की; याचिकाकर्ता पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों के हाथों आदिवासियों की हत्या की जांच की मांग वाली याचिका खारिज की; याचिकाकर्ता पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों के हाथों आदिवासियों की हत्या की जांच की मांग वाली साल 2009 में दाखिल याचिका खारिज किया। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने 2009 में एक हिमांशु कुमार और 12 अन्य द्वारा दायर याचिका पर फैसला सुनाया। बेंच ने 19 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।प्रथम याचिकाकर्ता हिमांशु कुमार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट विधिक सेवा समिति...