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जालसाजी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी विधायक जयकुमार गोर को ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने और जमानत के लिए आवेदन करने को कहा

Shahadat
13 July 2022 8:33 AM GMT
जालसाजी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी विधायक जयकुमार गोर को ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने और जमानत के लिए आवेदन करने को कहा
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक जयकुमार गोरे को निर्देश दिया कि वह ट्रायल कोर्ट में आत्मसर्पण करे और जमानत के लिए आवेदन करे। विधायक गोरे पर मृत व्यक्ति के नाम पर कथित रूप से जाली दस्तावेज बनाने का आरोप लगाया गया है।

सीजेआई एनवी रमाना, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने यह निर्देश राज्य के वकील द्वारा सूचित किए जाने के बाद जारी किया कि मामले में चार्जशीट पहले ही दायर की जा चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत से यह भी कहा कि वह इस न्यायालय या हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों से प्रभावित हुए बिना कानून के अनुसार विधायक की जमानत याचिका पर विचार करे।

अदालत ने अपने आदेश में कहा,

"यह राज्य के वकील द्वारा प्रस्तुत किया गया है कि आरोप पत्र पहले ही दायर किया जा चुका है। आरोपी को ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने और नियमित जमानत दाखिल करने का निर्देश दिया जाता है, जिसे इस अदालत या हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों से अप्रभावित कानून के अनुसार शीघ्रता से माना जाएगा।"

मामला महाराष्ट्र के मयानी गांव में जमीन के संबंध में फर्जी दस्तावेज तैयार करने से संबंधित है, जिसे महादेव पिराजी भिसे की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है।

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 193, 199, 200, 419, 420, 423, 205, 209, 467, 426, 465, 468, 471 r/w 34 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (एससी और एसटी अधिनियम 1989) की धारा 3 (1) (ए) और 3 (1) (जी) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए दहीवाड़ी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की गई थी।

विधायक ने अपनी अग्रिम जमानत खारिज करने के बॉम्बे हाईकोर्टके आदेश का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस वी जी बिष्ट की पीठ ने गोर को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने को खारिज कर दिया था, लेकिन उसे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए गिरफ्तारी से दो सप्ताह का अंतरिम संरक्षण दिया था।

जस्टिस सीटी रविकुमार और जस्टिस सुशांशु धूलिया की अवकाश पीठ ने 23 जून को हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा को एक जुलाई, 2022 तक बढ़ा दिया था।

महाराष्ट्र राज्य के वकील राहुल चिटनिस ने कहा कि मामले में आरोप पत्र पहले ही दायर किया जा चुका है।

इस तथ्य पर जोर देते हुए कि विधायक जांच के दौरान सहयोग कर रहा है, सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने पीठ से आग्रह किया कि वह 23 जून को दी गई अंतरिम सुरक्षा को बढ़ाने पर विचार करे।

लूथरा ने कहा,

"मैंने जांच के दौरान सहयोग किया है। आरोप पत्र दायर किया गया है। सहयोग करने के बाद दिए गए अंतरिम आदेश की पुष्टि करने पर विचार कर सकते हैं।"

हालांकि इस मौके पर पीठ ने विधायक को आत्मसमर्पण करने और निचली अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन करने को कहा।

सीजेआई ने कहा,

"अगर चार्जशीट दाखिल हो गई है तो आत्मसमर्पण कर दें। नियमित जमानत के लिए आवेदन करें।"

केस टाइटल: जयकुमार गोर बनाम महाराष्ट्र राज्य

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