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S.35L Central Excise Act | एक्साइज़ेबिलिटी के सवाल पर अपील का फ़ैसला सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट कर सकता है, हाईकोर्ट नहीं: एससी
S.35L Central Excise Act | एक्साइज़ेबिलिटी के सवाल पर अपील का फ़ैसला सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट कर सकता है, हाईकोर्ट नहीं: एससी

सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि सामान की एक्साइज़ेबिलिटी से जुड़े विवाद उसके खास अपीलीय अधिकार क्षेत्र में आते हैं और सेंट्रल एक्साइज़ एक्ट, 1944 की धारा 35G के तहत हाईकोर्ट उनका फ़ैसला नहीं कर सकते।कोर्ट ने फ़ैसला दिया,"एक्साइज़ ड्यूटी की दर या असेसमेंट के मकसद से सामान की कीमत से जुड़े किसी भी सवाल के निर्धारण के संबंध में अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा पारित आदेश के खिलाफ़ अपील इस कोर्ट में की जा सकती है, हाईकोर्ट में नहीं। हालांकि, यह रोक ड्यूटी की दर या सामान की कीमत से जुड़े हर सवाल पर लागू नहीं...

थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप जलाने की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की हिंदू धर्म परिषद की याचिका
थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप जलाने की मांग: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की हिंदू धर्म परिषद की याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी के शीर्ष पर दीप जलाने की अनुमति मांगने वाली हिंदू धर्म परिषद की याचिका खारिज कर दी गई थी। हालांकि, अदालत ने हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई ₹50,000 की लागत को अत्यधिक मानते हुए उसे घटाकर ₹5,000 कर दिया।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि वह हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने के पक्ष में नहीं है, लेकिन मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को...

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों माना कि ऑनलाइन गेमिंग पर रोक लगाने वाले राज्यों के कानून पब्लिक ऑर्डर के दायरे में आते हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों माना कि ऑनलाइन गेमिंग पर रोक लगाने वाले राज्यों के कानून 'पब्लिक ऑर्डर' के दायरे में आते हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची II की प्रविष्टि 1 के तहत 'सार्वजनिक व्यवस्था' (Public Order) के तत्वों की व्याख्या की और यह फैसला सुनाया कि राज्य ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए की गतिविधियों को विनियमित करने और उन पर रोक लगाने के लिए सार्वजनिक व्यवस्था पर अपनी विधायी शक्ति का उपयोग कर सकते हैं।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए यह माना कि संवैधानिक अभिव्यक्ति "सार्वजनिक व्यवस्था" केवल दंगों, हिंसा या राज्य की...

MBBS Stipend Dispute : सुप्रीम कोर्ट में NMC ने बताया: सिर्फ़ 7 मेडिकल कॉलेज इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड नहीं दे रहे हैं
MBBS Stipend Dispute : सुप्रीम कोर्ट में NMC ने बताया: सिर्फ़ 7 मेडिकल कॉलेज इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड नहीं दे रहे हैं

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सिर्फ़ सात मेडिकल कॉलेज ऐसे पाए गए, जो इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट या सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड (भत्ता) नहीं दे रहे हैं और उनके ख़िलाफ़ रेगुलेटरी कार्रवाई पहले ही शुरू की जा चुकी है।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच देश भर के मेडिकल इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों को स्टाइपेंड के भुगतान से जुड़ी याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रही थी।सुनवाई के दौरान, NMC की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट गौरव शर्मा ने मेडिकल कॉलेजों...

2003 में ग्रामीण टेलीफ़ोन एक्सचेंज से CDR न मिलना कोई बड़ी बात नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने अपहरण मामले में सज़ा सही ठहराई
2003 में ग्रामीण टेलीफ़ोन एक्सचेंज से CDR न मिलना कोई बड़ी बात नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने अपहरण मामले में सज़ा सही ठहराई

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि अगर ठोस मौखिक सबूत मज़बूत, भरोसेमंद और पूरी तरह से बेदाग हों तो कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) पेश न करना अभियोजन पक्ष के मामले के लिए घातक नहीं होगा।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने दो लोगों की सज़ा को सही ठहराया। इन पर 2003 में दर्ज FIR के सिलसिले में IPC की धारा 346A के तहत फिरौती के लिए अपहरण करने का आरोप था।अपील करने वाले आरोपियों ने दलील दी कि फिरौती की मांग से जुड़ा CDR पेश न करना अभियोजन पक्ष के मामले के लिए घातक साबित होगा। उन्होंने...

Hindu Minority & Guardianship Act | सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग की संपत्ति के लिए अभिभावक द्वारा धारा 8 के तहत आवेदन पर सिद्धांतों को स्पष्ट किया
Hindu Minority & Guardianship Act | सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग की संपत्ति के लिए अभिभावक द्वारा धारा 8 के तहत आवेदन पर सिद्धांतों को स्पष्ट किया

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (3 जून) को फैसला सुनाया कि हिंदू अप्राप्तवयता और संरक्षकता अधिनियम, 1956 (HMGA) की धारा 8 के तहत प्राकृतिक अभिभावकों के उन आवेदनों की जांच करते समय, जिनमें वे नाबालिग की संपत्ति के प्रबंधन की मांग करते हैं, अदालतों को इस बात का यथार्थवादी मूल्यांकन करना चाहिए कि क्या प्रस्तावित लेनदेन से नाबालिग को "स्पष्ट लाभ" मिल रहा है; न कि ऐसे आवेदनों को तकनीकी या अनुमानित आधारों पर खारिज कर देना चाहिए।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकपम कोटिसवार सिंह की खंडपीठ ने टिप्पणी...

एशियन गेम्स के सिलेक्शन ट्रायल में विनेश फोगाट के शामिल होने की इजाज़त देने वाले आदेश के खिलाफ WFI की याचिका खारिज
एशियन गेम्स के सिलेक्शन ट्रायल में विनेश फोगाट के शामिल होने की इजाज़त देने वाले आदेश के खिलाफ WFI की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) की याचिका खारिज की, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें रेसलर विनेश फोगाट को एशियन गेम्स के सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लेने की इजाज़त दी गई थी। इस याचिका को यह देखते हुए खारिज किया गया कि सिलेक्शन ट्रायल पहले ही खत्म हो चुके हैं, इसलिए अब इस याचिका का कोई मतलब नहीं रह गया।पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार किया और विनेश को 30 मई को होने वाले सिलेक्शन ट्रायल में हिस्सा लेने की इजाज़त दी थी।...

कोई सार्वभौमिक नियम नहीं कि रिक्तियां उन्हीं नियमों के अनुसार भरी जानी चाहिए, जो रिक्तियां उत्पन्न होने के समय मौजूद थे: सुप्रीम कोर्ट
कोई सार्वभौमिक नियम नहीं कि रिक्तियां उन्हीं नियमों के अनुसार भरी जानी चाहिए, जो रिक्तियां उत्पन्न होने के समय मौजूद थे: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में यह फैसला दिया कि सरकारी कर्मचारियों के पास भर्ती नियमों के तहत पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का कोई निहित अधिकार नहीं होता, भले ही वे नियम रिक्तियाँ उत्पन्न होने के समय मौजूद रहे हों। इसके बजाय, लागू नियम वे होते हैं जो उस तारीख को प्रभावी होते हैं, जब पदोन्नति प्रक्रिया पर वास्तव में विचार किया जाता है।कोर्ट ने State of Odisha & Ors. v. Sreepati Ranjan Dash, 2026 LiveLaw (SC) 514 मामले में यह फैसला सुनाया था,"एक कर्मचारी के पास पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का...

सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को सुझाव: मासिक धर्म स्वच्छता के अधिकार को सार्थक और व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को सुझाव: मासिक धर्म स्वच्छता के अधिकार को 'सार्थक और व्यावहारिक' बनाया जाना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन पर अपने निर्देशों के कार्यान्वयन में कमियों को दूर करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि मासिक धर्म स्वच्छता को संविधान के अनुच्छेद 21 से उत्पन्न होने वाले एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है। इस अधिकार की केवल घोषणा करना ही काफी नहीं होगा, जब तक कि इसका ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन न हो।केंद्र को याचिकाकर्ता के वकील द्वारा बताई गई कमियों की जांच करने और उन्हें दूर करने का निर्देश देते हुए...

ज़्यादा क्वालिफिकेशन वाले व्यक्ति को कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए तय पद के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
ज़्यादा क्वालिफिकेशन वाले व्यक्ति को कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए तय पद के लिए उपयुक्त नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी ऐसी नौकरी के लिए अपनी ज़्यादा क्वालिफिकेशन छिपाना, जो खास तौर पर कम क्वालिफिकेशन वाले लोगों के लिए रिज़र्व है, असल में काबिल और हकदार उम्मीदवारों को नौकरी से वंचित करने जैसा है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा,"...जब कोई पद खास तौर पर कम क्वालिफिकेशन वाले उम्मीदवारों के लिए तय किया गया हो तो ज़्यादा क्वालिफिकेशन वाले किसी व्यक्ति को वह नौकरी पाने की इजाज़त देने का नतीजा यह होगा कि कोई असल में काबिल और हकदार उम्मीदवार उस मौके से वंचित...

लंबे समय तक वैवाहिक अलगाव मानसिक क्रूरता माना जा सकता है; खत्म हो चुके रिश्ते को बनाए रखना ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
लंबे समय तक वैवाहिक अलगाव 'मानसिक क्रूरता' माना जा सकता है; खत्म हो चुके रिश्ते को बनाए रखना ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति को दी गई तलाक की डिक्री सही ठहराई। उस व्यक्ति की पत्नी पिछले 15 सालों से उससे अलग रह रही थी। कोर्ट ने कहा कि जब पति-पत्नी अलग-अलग पेशेवर और भौगोलिक रास्ते चुन लेते हैं और बिना दूरी कम करने की कोई कोशिश किए सालों तक एक-दूसरे से अलग रहते हैं तो वैवाहिक ढांचा ही खत्म माना जाता है।कोर्ट ने कहा,"ऐसी परिस्थितियों में अलगाव सिर्फ़ व्यक्तिगत द्वेष या एकतरफ़ा गलती का मामला नहीं रह जाता, बल्कि यह वैवाहिक बंधन को दोनों पक्षों द्वारा असल में छोड़ देने का रूप ले लेता...

हर मोबाइल फ़ोन एक वर्चुअल गैंबलिंग हाउस बन गया है, ऑनलाइन गेमिंग की लत सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा: सुप्रीम कोर्ट
हर मोबाइल फ़ोन एक 'वर्चुअल गैंबलिंग हाउस' बन गया है, ऑनलाइन गेमिंग की लत सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए का व्यापक प्रसार सार्वजनिक व्यवस्था, सार्वजनिक शांति और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि तकनीकी विकास ने हर मोबाइल फ़ोन को एक "वर्चुअल आम जुआ घर" में बदल दिया और सट्टेबाजी व जुए को पूरे समाज में ज़्यादा सामान्य और सुलभ बना दिया।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि राज्य संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची II की प्रविष्टि 1 के तहत "सार्वजनिक व्यवस्था" पर अपनी विधायी शक्ति...

दूसरी शिकायत में नए गंभीर आरोप जोड़ने से अभियोजन पर संदेह: सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द की
दूसरी शिकायत में नए गंभीर आरोप जोड़ने से अभियोजन पर संदेह: सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि दूसरी शिकायत में ऐसे महत्वपूर्ण आरोप जोड़े जाते हैं जो पहली शिकायत में मौजूद नहीं थे, तो इससे अभियोजन की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है और ऐसी स्थिति में आपराधिक कार्यवाही रद्द की जा सकती है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ एक भूमि विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। शिकायतकर्ता ने दूसरी शिकायत में पहली बार जबरन वसूली, धन की मांग और धमकी के आरोप लगाए थे, जबकि मई 2009 में दर्ज पहली शिकायत में ऐसे आरोप नहीं थे।अदालत ने पाया कि वर्ष 2000...

कौशल वाले खेलों पर सट्टेबाजी के लिए कोई संवैधानिक सुरक्षा नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने दांव वाले ऑनलाइन गेम्स पर रोक वाले कानूनों को सही ठहराया
'कौशल वाले खेलों पर सट्टेबाजी के लिए कोई संवैधानिक सुरक्षा नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने दांव वाले ऑनलाइन गेम्स पर रोक वाले कानूनों को सही ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में तमिलनाडु और कर्नाटक के उन कानूनों की संवैधानिक वैधता को सही ठहराया, जो खेलों पर ऑनलाइन सट्टेबाजी और दांव लगाने पर रोक लगाते हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य की विधायिकाएं सट्टेबाजी पर कानून बनाने में सक्षम हैं, भले ही वह खेल कौशल पर आधारित हो।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने फैसला सुनाया कि राज्यों के पास संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची II की प्रविष्टि 34 के तहत कौशल वाले खेलों पर सट्टेबाजी को विनियमित करने और उस पर रोक लगाने की शक्ति है। यह प्रविष्टि...

जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो नागरिक असहाय हो जाता है: सुप्रीम कोर्ट ने वसूली मामले में तीन पुलिसकर्मियों की अग्रिम जमानत रद्द की
जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो नागरिक असहाय हो जाता है: सुप्रीम कोर्ट ने वसूली मामले में तीन पुलिसकर्मियों की अग्रिम जमानत रद्द की

सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर एक जौहरी से जबरन वसूली के मामले में आरोपित तीन पुलिसकर्मियों को मिली अग्रिम जमानत रद्द की। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि जब कानून लागू करने वाले ही वसूली करने लगें तो नागरिकों के सामने गहरा संकट खड़ा हो जाता है।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने कहा,"जब कानून के रक्षक ही वसूली करने वाले बन जाएं, तब नागरिक संदेह और असमंजस में पड़ जाता है। विरोध करने पर तत्काल प्रतिशोध का खतरा होता है और उसके पास वर्दीधारी सत्ता के सामने चुपचाप झुक...

अरावली पहाड़ियों की परिभाषा का फिर से होगा आकलन: सुप्रीम कोर्ट ने गठित की उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति
अरावली पहाड़ियों की परिभाषा का फिर से होगा आकलन: सुप्रीम कोर्ट ने गठित की उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति

सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा और सीमांकन से जुड़े मुद्दों की व्यापक समीक्षा करने के लिए पांच सदस्यों वाली उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि दूरगामी पर्यावरणीय परिणामों वाले निर्णय विशेषज्ञों के मूल्यांकन के बिना नहीं लिए जाने चाहिए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI), जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा से संबंधित स्वतः संज्ञान (suo motu) कार्यवाही में यह आदेश पारित किया।...

जितना ज़्यादा जज अदालतों के जवाबदेही लागू करने के कर्तव्य को समझेंगे, हमारा देश उतना ही बेहतर होगा: सीनियर एडवोकेट एस. मुरलीधर
जितना ज़्यादा जज अदालतों के जवाबदेही लागू करने के कर्तव्य को समझेंगे, हमारा देश उतना ही बेहतर होगा: सीनियर एडवोकेट एस. मुरलीधर

सीनियर एडवोकेट और ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर ने कहा कि न्यायपालिका की जवाबदेही लागू करने की प्रतिबद्धता जितनी मज़बूत होगी, देश के लिए उतना ही बेहतर होगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि संवैधानिक अदालतें यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती हैं कि सत्ता में बैठे लोग नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब दें।2 जून को बेंगलुरु में एक किताब लॉन्च कार्यक्रम में बोलते हुए मुरलीधर ने कहा कि लोकतांत्रिक जवाबदेही न्यायपालिका की संस्थागत जवाबदेही पर बहुत ज़्यादा निर्भर करती...

जब देश पर ड्रग्स के व्यापार से खतरा हो तो व्यक्तिगत आज़ादी से ऊपर देश की संप्रभुता होती है: सुप्रीम कोर्ट
जब देश पर ड्रग्स के व्यापार से खतरा हो तो व्यक्तिगत आज़ादी से ऊपर देश की संप्रभुता होती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हेरोइन की तस्करी के एक मामले में आरोपी को दी गई रेगुलर ज़मानत रद्द की। कोर्ट ने कहा कि देश की संप्रभुता निजी आज़ादी से ऊपर होनी चाहिए, खासकर उन मामलों में जिनमें ड्रग्स की सप्लाई शामिल हो, क्योंकि इससे लोगों की सेहत और देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है।कोर्ट ने कहा,"अगर देश की संप्रभुता और निजी आज़ादी के बीच कोई टकराव होता है तो बिना किसी शक के, देश की संप्रभुता ही ऊपर मानी जाएगी। खासकर तब, जब देश के खिलाफ कोई जंग छेड़ी गई हो - चाहे वह ड्रग्स की सप्लाई के रूप...

शादी के बाद बेटी अपने मायके से रिश्ते नहीं तोड़ती, ऐसी लैंगिक रूढ़िवादिता संविधान के खिलाफ है: सुप्रीम कोर्ट
शादी के बाद बेटी अपने मायके से रिश्ते नहीं तोड़ती, ऐसी लैंगिक रूढ़िवादिता संविधान के खिलाफ है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मानना ​​कि शादीशुदा बेटी अपने माता-पिता के परिवार की सदस्य नहीं रहती, लैंगिक रूढ़िवादिता पर आधारित है और समानता के संवैधानिक सिद्धांत के अनुसार इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।यह टिप्पणी जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने एक ऐसे मामले में की, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादीशुदा बेटी को उसकी माँ की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति देने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि उत्तर प्रदेश सरकार के 2019 के एक आदेश के अनुसार, 'शादीशुदा बेटी' को परिवार की परिभाषा से...