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क्लाइंट की स्पष्ट अनुमति के बिना समझौता नहीं कर सकता वकील, केवल पक्षकारों के हस्ताक्षर वाला समझौता ही वैध: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मुवक्किल (Client) की स्पष्ट अनुमति के बिना कोई भी अधिवक्ता उसकी ओर से समझौता (Compromise) नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 23 नियम 3 के तहत समझौता डिक्री तभी वैध होगी, जब समझौता लिखित हो और उस पर संबंधित पक्षकारों के हस्ताक्षर हों।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी पैतृक संपत्ति के बंटवारे से जुड़े एक मामले में की। मामला 1989 में दायर विभाजन वाद से संबंधित था, जिसमें 1994 में कथित समझौते...
जमानत खारिज होने के बाद भी लगातार गिरफ्तारी के खिलाफ Habeas Corpus याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार
सुप्रीम कोर्ट इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर विचार करेगा कि क्या किसी व्यक्ति की लगातार गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका, उसकी जमानत याचिका खारिज होने के बाद भी सुनवाई योग्य हो सकती है।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने हाजी अब्दुल रज्जाक की याचिका पर नोटिस जारी किया। रज्जाक का दावा है कि वह अगस्त 2021 से हिरासत में है और गिरफ्तारी के लिखित आधार (Grounds of Arrest) उसे कभी उपलब्ध नहीं कराए गए, जबकि कानून ऐसा करना...
नगर निकाय चुनावों पर 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' लागू नहीं होता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' (RPA) के तहत सज़ा वाले प्रावधान नगर निकाय चुनावों पर लागू नहीं होते। कोर्ट ने साफ़ किया कि अगर स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवार झूठा हलफ़नामा (affidavit) दाखिल करने के आरोपी हैं, तो उन पर 'भारतीय दंड संहिता' (IPC) के तहत मुक़दमा चलाया जा सकता है, बशर्ते संबंधित नगर निकाय क़ानून में सज़ा का कोई प्रावधान न हो।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने चंद्रिकाबेन किशोर डाफडा की अपील पर फ़ैसला सुनाते हुए यह बात कही।...
जिन मामलों की सुनवाई सिर्फ़ सेशंस कोर्ट में हो सकती है, उनमें मजिस्ट्रेट को प्रॉसिक्यूशन के सबूत रिकॉर्ड करने की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 जुलाई) को कहा कि अगर किसी शिकायत वाले मामले में ऐसा अपराध शामिल है, जिसकी सुनवाई सिर्फ़ सेशंस कोर्ट में हो सकती है तो मजिस्ट्रेट को उस मामले को सेशंस कोर्ट भेजने से पहले CrPC, 1973 की धारा 244 के तहत आरोप तय होने से पहले के सबूत (pre-charge evidence) रिकॉर्ड करने की ज़रूरत नहीं है। कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फ़ैसला रद्द किया, जिसमें ऐसा करने का निर्देश दिया गया।कोर्ट ने 'सुपरिटेंडेंट एंड रिमेंब्रंसर ऑफ़ लीगल अफेयर्स बनाम आशुतोष घोष, (1979) 4 SCC 381' मामले...
'गौ-रक्षकों' को सज़ा सुनाने वाली जज के बचाव में आया SCAORA, धमकियों की निंदा की
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने बुधवार को मध्य प्रदेश की एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज सुश्री तबस्सुम खान के खिलाफ धमकियों और सोशल मीडिया पर चलाए गए टारगेटेड कैंपेन की कड़ी निंदा की। एसोसिएशन ने कहा कि अदालती आदेशों को अपील वाली अदालतों में चुनौती दी जानी चाहिए, न कि जजों को डरा-धमकाकर या उनकी बदनामी करके।जज को सांप्रदायिक हमलों का सामना करना पड़ा था, जब उन्होंने 2022 में एक ट्रक ड्राइवर की लिंचिंग के मामले में सात 'गौ-रक्षकों' को उम्रकैद की सज़ा सुनाई।एसोसिएशन ने कहा...
S. 465 CrPC | अगर मजिस्ट्रेट के पास अधिकार क्षेत्र है तो गलत प्रावधान के तहत संज्ञान लेना सुधारा जा सकने वाला दोष: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 जुलाई) को कहा कि किसी गलत कानूनी प्रावधान के तहत अपराध का संज्ञान लेने में मजिस्ट्रेट की गलती एक ऐसी कमी है, जिसे सुधारा जा सकता है। इस गलती के आधार पर संज्ञान लेने के आदेश को रद्द नहीं किया जा सकता, बशर्ते मजिस्ट्रेट के पास उस मामले को देखने का अधिकार क्षेत्र हो।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा,"कानून की स्थापित स्थिति यह है कि गलत धारा के तहत संज्ञान लेने में हुई गलती असल में एक सुधारा जा सकने वाला दोष है, बशर्ते जिस अदालत ने...
370 रुपये बिरयानी विवाद: स्टैंड-अप कॉमेडी और सोशल मीडिया के लिए नियामक ढांचा बनाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर स्टैंड-अप कॉमेडी, पॉडकास्ट, लाइव स्ट्रीमिंग मंचों और सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा की जाने वाली सामग्री के लिए व्यापक नियामक ढांचा तैयार करने की मांग की गई।याचिका में हाल के '370 रुपये बिरयानी' विवाद का हवाला देते हुए कहा गया कि डिजिटल मंचों पर सामग्री के तेजी से प्रसार को देखते हुए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत एडवोकेट विशाल तिवारी द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि 370 रुपये बिरयानी विवाद में किसी हास्य...
आर्टिकल 161 के तहत बनी सज़ा में छूट की पॉलिसी, CrPC के तहत बनी पॉलिसी से ज़्यादा अहम: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 जुलाई) को कहा कि संविधान के आर्टिकल 161 के तहत गवर्नर की संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राज्य सरकार द्वारा बनाई गई सज़ा में छूट की पॉलिसी को बाद में कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) की धारा 432 और 433 के तहत जारी की गई कानूनी छूट पॉलिसी से बदला या खत्म नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने माना कि राज्य की 2008 की कानूनी पॉलिसी के बावजूद हरियाणा की 2002 की छूट पॉलिसी लागू रही। साथ ही कोर्ट ने 'स्टेट ऑफ़ हरियाणा बनाम राज कुमार' मामले में अपने 2021 के फ़ैसले को 'पर...
S. 187(3) BNSS | आरोपी को चार्जशीट न देना डिफ़ॉल्ट ज़मानत का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (1 जुलाई) को कहा कि आरोपी को चार्जशीट की कॉपी न देना, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 187(3) के तहत डिफ़ॉल्ट ज़मानत का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को सही ठहराया, जिसमें आरोपी की डिफ़ॉल्ट ज़मानत की अर्ज़ी को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि उसे चार्जशीट की कॉपी नहीं दी गई।अपील करने वाले आरोपी को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा दर्ज मामले में गिरफ़्तार किया गया।...
E20 पेट्रोल नीति को 'प्रयोग' बताने वाली मीडिया रिपोर्टें गलत, सुप्रीम कोर्ट में ऐसा कोई बयान नहीं दिया: अटॉर्नी जनरल
भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सरकार की 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) योजना अभी "एक चल रहा प्रयोग" है और इसके प्रभाव अगले वर्ष तक स्पष्ट होंगे।कानून एवं न्याय मंत्रालय के माध्यम से जारी स्पष्टीकरण में अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने कहा कि ये रिपोर्टें पूरी तरह गलत हैं और सुप्रीम कोर्ट में की गई वास्तविक दलीलों से उनका कोई संबंध नहीं है। कार्यालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी चरण पर यह नहीं कहा...
गायों के वध पर रोक लगाने वाले आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची तमिलनाडु सरकार
तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसमें राज्य में गायों और बछड़ों के वध पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई।राज्य सरकार का तर्क है कि हाईकोर्ट का आदेश 'तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958' के खिलाफ है। यह कानून सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र के आधार पर 10 साल से अधिक उम्र की उन गायों के वध की अनुमति देता है, जो काम और प्रजनन के लिए अनुपयुक्त हैं। इस कानून के अलावा, अन्य लागू कानून जैसे 'पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960', 'पशु क्रूरता...
राम मंदिर चंदा घोटाला: आरोपियों की पैरवी पर रोक का अयोध्या बार एसोसिएशन का प्रस्ताव अवैध? सुप्रीम कोर्ट के कई फैसले उठाते हैं सवाल
अयोध्या के राम मंदिर के लिए प्राप्त दान राशि के कथित गबन मामले में उत्तर प्रदेश की फैजाबाद/अयोध्या बार एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित कर अपने सदस्यों को आरोपियों की ओर से अदालत में पेश होने से रोक दिया है। एसोसिएशन ने यह भी शर्त रखी है कि यदि कोई अधिवक्ता किसी आरोपी की पैरवी करना चाहता है तो उसे पहले एसोसिएशन से अनुमति लेनी होगी और प्रत्येक आरोपी के लिए ₹5 लाख एसोसिएशन के खाते में जमा कराने होंगे।हालांकि, यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के कई फैसलों के विपरीत माना जा रहा है।...
एथेनॉल आवंटन विवाद में सुप्रीम कोर्ट का यथास्थिति बनाए रखने का आदेश, कहा- फिलहाल नहीं होगा कोई बदलाव
सुप्रीम कोर्ट ने एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने भारत पेट्रोलियम निगम लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह अंतरिम आदेश पारित किया।भारत पेट्रोलियम निगम लिमिटेड की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कर्नाटक हाईकोर्ट के हालिया आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उसे लागू किया गया तो देश की 20 प्रतिशत एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल नीति प्रभावित हो सकती है।सुनवाई के दौरान पीठ ने...
बिहार कथित फर्जी मुठभेड़ मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, हाईकोर्ट जाने की दी छूट
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के भोजपुर में 28 वर्षीय भारत भूषण तिवारी की कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मामले में पटना हाईकोर्ट का रुख करने की छूट दी।जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा,"हम इस पर सुनवाई नहीं करेंगे। हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता देंगे। बेहतर होगा कि हाइकोर्ट जाएं क्योंकि वे ऐसे मामलों की बेहतर निगरानी करते हैं।"यह जनहित याचिका...
क्या मतदाता सूची से नाम हटने पर पासपोर्ट का नवीनीकरण रोका जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से स्थिति हुई स्पष्ट
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बाद पासपोर्ट नवीनीकरण रोके जाने का मामला सामने आने से नई कानूनी बहस छिड़ गई।सीनियर पत्रकार और पूर्व संपादक आर. राजगोपाल ने दावा किया कि मतदाता सूची से उनका नाम हटने के आधार पर पुलिस ने प्रतिकूल रिपोर्ट भेजी, जिसके कारण उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण की प्रक्रिया रोक दी गई। राजगोपाल के अनुसार, उनका नाम "तार्किक विसंगतियों" का हवाला देकर मतदाता सूची से हटाया गया।चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में इसी श्रेणी के तहत 27 लाख...
राम मंदिर चंदा विवाद: तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, अवकाश के बाद होगी याचिका पर सुनवाई
राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त दान राशि में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया।सोमवार को आंशिक कार्य दिवस के दौरान जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने से मना करते हुए कहा कि इसकी सुनवाई अदालत के दोबारा खुलने के बाद की जाएगी। याचिकाकर्ता ने स्वयं अदालत में पेश होकर मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि राम मंदिर के लिए मिले दान के कथित दुरुपयोग के आरोप बेहद गंभीर हैं और इस पर तत्काल सुनवाई आवश्यक...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (22 जून, 2026 से 26 जून, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।ज़िले से बाहर निकालने के आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने में हुई देरी को लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 के तहत माफ़ किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 के तहत ज़िले से बाहर निकालने (एक्सटर्नमेंट) के आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने में हुई देरी को लिमिटेशन एक्ट, 1963...
'बिना बराबरी के कानून सिर्फ़ ताकतवर पक्ष की संगठित इच्छा है': रूस में आयोजित कार्यक्रम में CJI सूर्य कांत
रूस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत ने कहा कि बराबरी के बिना कानून असल में ताकतवर पक्ष की संगठित इच्छा मात्र है।CJI 14वें सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल लीगल फोरम में बोल रहे थे। इसके प्लेनरी सेशन का विषय था "समान न्याय, समान कानून: अंतरराष्ट्रीय कानून की मानवीयता के पैमाने के रूप में पहुंच"।अपने भाषण की शुरुआत में CJI कांत ने सेंट पीटर्सबर्ग के बीचों-बीच स्थित फाल्कोनेट की 'ब्रॉन्ज़ हॉर्समैन' मूर्ति का ज़िक्र किया। उन्होंने इस मूर्ति की मज़बूत नींव ('थंडर स्टोन') और...
ज़िले से बाहर निकालने के आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने में हुई देरी को लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 के तहत माफ़ किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 के तहत ज़िले से बाहर निकालने (एक्सटर्नमेंट) के आदेश के ख़िलाफ़ अपील करने में हुई देरी को लिमिटेशन एक्ट, 1963 की धारा 5 के तहत माफ़ किया जा सकता है।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने कहा,"...जब तक कानून साफ़ तौर पर या ज़रूरी मतलब के ज़रिए लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 के लागू होने को रोकता नहीं है, तब तक अपीलीय अथॉरिटी (अधिनियम के तहत) के पास सही मामलों में देरी को माफ़ करने का अधिकार होना चाहिए।" बेंच ने छत्तीसगढ़...
200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जैकलीन फर्नांडिस ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ली याचिका
एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस ने 200 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोप तय किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका गुरुवार को वापस ली।इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया।जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमल्या बागची की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष जैकलीन की ओर से पेश वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।साथ ही कानून के तहत उपलब्ध अन्य उचित उपाय अपनाने की स्वतंत्रता देने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। यह...




















