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'आनंदमठ' के 'धार्मिक युद्ध गीत' से राष्ट्रीय गीत को बदला गया: सुप्रीम कोर्ट में पूर्व IAS अधिकारी की याचिका
एक पूर्व IAS अधिकारी ने केंद्र सरकार के 28 जनवरी और 9 जुलाई, 2026 के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इन आदेशों में कुछ खास मौकों पर 'वंदे मातरम' के छह पदों (स्टैंजा) वाले संस्करण को गाने और बजाने के लिए कहा गया। उन्होंने तर्क दिया कि छह पदों वाले इस संस्करण को राष्ट्रीय गीत के रूप में लागू करना, भारत को एक 'धार्मिक-सांप्रदायिक ईश्वरवादी राज्य' में बदलने की कोशिश है।यह याचिका केरल के पूर्व IAS अधिकारी बालकृष्णन सत्यभामा मावोजि ने दायर की, जो अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। उन्होंने...

पक्की कानूनी सहमति होने से पहले सार्वजनिक संपत्ति की कीमत बढ़ाने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण नीलामी पर फिर से विचार कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी सार्वजनिक संपत्ति के मामले में, पक्की कानूनी सहमति (बाइंडिंग कॉन्ट्रैक्ट) होने से पहले, उसकी कीमत अधिकतम करने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण नीलामी पर फिर से विचार कर सकता है।इसके साथ ही कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का वह फैसला रद्द किया, जिसमें चंडीगढ़ प्रशासन के उस निर्णय को खारिज कर दिया गया था, जिसके तहत बेदी अस्पताल की ₹12.58 करोड़ की बोली (नर्सिंग होम साइट के लिए) को रद्द कर दिया गया था।कोर्ट ने माना कि अलॉटमेंट लेटर जारी होने और कन्वेयंस डीड (संपत्ति...

विवादित व्हाट्सएप मैसेज के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में व्यक्ति को बरी किया
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि जिन व्हाट्सएप मैसेज के जरिए उसे अपराध से जोड़ने का दावा किया गया था, वे उसकी सजा को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि मैसेज भेजने वाले व्यक्ति ने इसे भेजने से इनकार कर दिया और अभियोजन पक्ष के गवाहों ने भी घटना के बारे में अभियोजन पक्ष के दावों का समर्थन नहीं किया।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। इसमें आरोपी को अन्य बातों के अलावा, अभियोजन...

ट्रायल से पहले की हिरासत को 'बिना ट्रायल के सजा' में नहीं बदला जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल से पहले की लंबी हिरासत को 'बिना ट्रायल के सजा' में नहीं बदला जा सकता। कोर्ट ने दोहराया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत विचाराधीन कैदी (अंडरट्रायल) को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जल्द ट्रायल का अधिकार है। वित्तीय गड़बड़ी के गंभीर आरोपों वाले मामलों में भी इस अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने महेश चंद्र जोशी (पूर्व कांग्रेस मंत्री) और मुकेश पाठक को नियमित जमानत देते समय यह टिप्पणी की। इन दोनों पर राजस्थान में 'जल जीवन मिशन'...

पुलिस जब मजिस्ट्रेट बन जाए: 'स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट' का अजीबोगरीब मामला
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरभ दास और आशुतोष रांका की हिरासत से जुड़ी कार्यवाही ने ऐसी अजीबोगरीब बात सामने ला दी, जिसके बारे में शायद कानूनी हलकों के बाहर बहुत कम लोग जानते हैं या चर्चा करते हैं - वह यह कि पुलिस अधिकारी 'स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट' (विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट) के रूप में काम करते हैं।दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 70 के तहत जारी एक अधिसूचना के जरिए दिल्ली पुलिस कमिश्नर, अतिरिक्त कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर और असिस्टेंट कमिश्नर को 'एग्जीक्यूटिव...

BNSS में लोक सेवकों के लिए सुरक्षा उपायों का विस्तार: FIR दर्ज करने के न्यायिक आदेश से पहले मिलेगी सुरक्षा- पिनाराई विजयन केस में सुप्रीम कोर्ट ने किया स्पष्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (21 अक्टूबर) को कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(4) के तहत लोक सेवकों को मिलने वाले सुरक्षा उपायों का दायरा बढ़ाया गया। इसके तहत मजिस्ट्रेट द्वारा उनके खिलाफ जांच का आदेश देने से पहले उन्हें सुरक्षा मिलती है। यह CrPC की पुरानी धारा 156(3) से अलग है।जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और अन्य याचिकाकर्ताओं को CMRL-एक्सलॉजिक (Exalogic) मामले में FIR दर्ज करने के...

स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव असंवैधानिक या अवैध तरीकों से दूषित हो जाए तो अदालत हस्तक्षेप कर सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हालांकि संवैधानिक अदालतें आमतौर पर चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं देतीं, लेकिन जब यह सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करना जरूरी हो कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव असंवैधानिक या अवैध तरीकों से दूषित न हों, तो उनके हाथ बंधे नहीं होते।कोर्ट ने यह टिप्पणी आंध्र प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी युवाजन श्रमिक रायतू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) को अंतरिम राहत देते हुए की। पार्टी ने आरोप लगाया कि हिंसा और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण उसके उम्मीदवारों को शहरी स्थानीय निकाय चुनावों...

मेडिकल रिपोर्ट में 75.5% दिव्यांगता, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने माना 100% कार्यात्मक दिव्यांगता; मुआवजा ₹77.84 लाख किया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति जीवनभर दूसरों पर निर्भर रहने और अटेंडेंट की सहायता लेने के लिए मजबूर है, तो उसे 100% कार्यात्मक दिव्यांगता से पीड़ित माना जा सकता है, भले ही मेडिकल बोर्ड ने उसकी शारीरिक दिव्यांगता का प्रतिशत इससे कम आंका हो।जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने मोटर दुर्घटना के एक मामले में यह टिप्पणी करते हुए पीड़ित सुनील कुमार का मुआवजा ₹36.22 लाख से बढ़ाकर ₹77.84 लाख कर दिया।क्या है पूरा मामला?यह मामला 22 अक्टूबर 2016 को केरल में त्रिशूर-कोडकारा...

आंध्र प्रदेश निकाय चुनाव: नामांकन की समयसीमा बढ़ाने पर कल तक फैसला ले चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (APSEC) को निर्देश दिया कि वह उन क्षेत्रों में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन की समयसीमा बढ़ाने की मांग पर गुरुवार तक फैसला करे, जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर पाए। यह निर्देश वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की याचिका पर दिया गया।जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष खंडपीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग याचिकाकर्ता पार्टी और उसके उम्मीदवारों की ओर से दिए गए प्रतिवेदनों तथा वीडियो...

BREAKING| सुप्रीम कोर्ट ने 'एक्सलॉजिक' मामले में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ FIR की जांच पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और दामाद मोहम्मद रियाज़ (जो पूर्व मंत्री हैं) केरल हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच के सामने अपील दायर कर सकते हैं। वे सिंगल बेंच के उस आदेश को चुनौती दे सकते हैं, जिसमें CMRL-एक्सलॉजिक पे-ऑफ मामले में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। यह निर्देश प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा केरल पुलिस को दी गई जानकारी के आधार पर दिया गया था।डिवीज़न बेंच का यह मानना गलत था कि उनके पास अपील दायर करने का अधिकार (locus standi) नहीं...

अतिरिक्त भुगतान की वसूली रोकने वाले पुराने फैसलों में 'कॉन्ट्रैक्ट एक्ट' की धारा 72 पर विचार नहीं किया गया: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि अतिरिक्त भुगतान की वसूली से जुड़े मामलों में अब तक आए किसी भी फैसले में 'इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट, 1872' की धारा 72 के लागू होने पर कोई चर्चा नहीं की गई।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने यह टिप्पणी उन शिक्षकों की अपील खारिज करते हुए की, जिनके 'एकेडमिक ग्रेड पे' (Academic Grade Pay) लाभ वापस ले लिए गए, क्योंकि ये लाभ गलती से दिए गए। यह मामला अपीलकर्ताओं (शिक्षकों) को 'एकेडमिक ग्रेड पे' दिए जाने से जुड़ा है। उन्हें ये वित्तीय लाभ अक्टूबर 2009 के...

पुरुषों-महिलाओं के लिए शिक्षण पदों की रिक्तियां अलग-अलग क्यों निकाली जाती हैं? सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर उम्मीदवार की याचिका पर दिल्ली सरकार से पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने पुरुष और महिला उम्मीदवारों के लिए शिक्षण रिक्तियों को अलग-अलग अधिसूचित करने के औचित्य पर सवाल उठाया। कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा है कि लिंग के आधार पर इस तरह के बंटवारे का कानूनी आधार क्या है और सरकारी नौकरियों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कैसे शामिल किया जाएगा।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने यह सवाल तब उठाए, जब वे जेन कौशिक और प्रवीण सिंह द्वारा दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी कर रहे थे। इन याचिकाओं में दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) द्वारा...

रिश्वत मांगने के मामले में PC Act की धारा 17A लागू नहीं होती, क्योंकि इसका सरकारी कर्तव्यों से कोई लेना-देना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act), 1988 की धारा 17A, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ किसी जांच या पूछताछ से पहले पूर्व अनुमति लेना जरूरी होता है, वह रिश्वत मांगने के मामलों में लागू नहीं होगी। ऐसा इसलिए है, क्योंकि रिश्वत मांगना सरकारी कर्तव्यों के पालन से जुड़ा हुआ काम नहीं है।जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि यह प्रावधान केवल तब लागू होता है, जब कथित अपराध किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा अपने आधिकारिक कार्यों या...

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए अंतरिम मुआवजे की योजना का प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 'पीड़ितों के लिए मुआवजा (अंतरिम राहत) योजना, 2026' (Compensation to Victims (Interim Relief) Scheme, 2026) का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया। यह योजना 'मोटर वाहन अधिनियम, 1988' की धारा 164A के तहत बनाई गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ित अपने अंतरिम मुआवजे के अधिकार के बारे में जान सकें।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने केंद्र से यह स्पष्ट करने को भी कहा कि क्या इस योजना में बिना बीमा...

चुनाव में गलत हलफनामा देने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ RP Act की धारा 125A के तहत निजी शिकायत दर्ज करा सकते हैं मतदाता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम नागरिक, चुने गए उम्मीदवारों के खिलाफ 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' (Representation of the People Act, 1951) की धारा 125A के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसमें यह आरोप लगाया जा सकता है कि उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी दी है या कोई जानकारी छिपाई है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा कि ऐसी शिकायतों पर 'दंड प्रक्रिया संहिता, 1973' (CrPC) की धारा 195(1) के तहत लगी पाबंदियां लागू नहीं होतीं। धारा 195(1) के तहत कुछ खास...

'संपत्ति सौंपना आपराधिक विश्वासघात का मुख्य आधार': सुप्रीम कोर्ट ने टेलीफोन विभाग के कैशियर को बरी करने के फैसले को बहाल रखा
सुप्रीम कोर्ट ने टेलीफोन विभाग के कैशियर-सह-काउंटर क्लर्क को बरी करने के फैसले को बहाल रखा। यह मामला भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 409 (अब भारतीय न्याय संहिता, 2023/BNS की धारा 316(5)) के तहत दर्ज किया गया।कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी को संपत्ति सौंपी गई, या उसने उसका गबन किया, या उसकी मंशा बेईमान थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को बरी करने के फैसले को पलटने में हाई कोर्ट से गलती हुई। जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल एस....

तथ्य या कानून की मामूली गलती दिखाने मात्र से 'लेटर्स पेटेंट बेंच' सिंगल बेंच के फैसले में दखल नहीं दे सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच अपनी 'लेटर्स पेटेंट' अधिकारिता (Jurisdiction) का इस्तेमाल करते हुए रिट अधिकारिता के तहत दिए गए सिंगल जज के फैसले में केवल इसलिए दखल नहीं दे सकती, क्योंकि उसका मामले को देखने का नजरिया अलग है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने कहा,"तथ्य या कानून की कोई मामूली गलती दिखाने मात्र से 'लेटर्स पेटेंट बेंच' को रिट कोर्ट के फैसले में दखल देने का अधिकार नहीं है। अगर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट कोर्ट का फैसला न्याय,...

'जघन्य अपराधों के लिए गिरफ्तार लोगों की तुलना में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को कम सुरक्षा मिलती है': सीनियर एडवोकेट रेबेका जॉन
सीनियर एडवोकेट रेबेका जॉन ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे की आलोचना की। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों को वे सुरक्षा उपाय भी नहीं मिलते, जो हत्या और बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के लिए गिरफ्तार किए गए लोगों को मिलते हैं।मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में 'लाइवलॉ' (LiveLaw) से बातचीत करते हुए रेबेका जॉन ने कहा कि 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता'...

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: 'मानव तस्करी विरोधी इकाइयों' को पुलिस स्टेशन का दर्जा देने के लिए अधिसूचना जारी करें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे कानून के अनुसार उचित अधिसूचना जारी करके 'मानव तस्करी विरोधी इकाइयों' (ATHUs) को पुलिस स्टेशन का दर्जा दें। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि मानव तस्करी से निपटने के लिए उसकी 'पीड़ित सुरक्षा योजना' (Victim Protection Plan) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यह कदम उठाना जरूरी है।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह विभागों को इस निर्देश को जल्द-से-जल्द लागू करने का...

बच्चों को 'सेफ'-'अनसेफ' टच के बारे में सिखाया जाना चाहिए; शिक्षकों को 'ग्रूमिंग' और दुर्व्यवहार की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से सेक्स एजुकेशन और डिजिटल सुरक्षा पाठ्यक्रम के तहत उनके शरीर, 'सेफ' (सुरक्षित) और 'अनसेफ' (असुरक्षित) टच के बीच के अंतर, और 'सहमति' (Consent) के महत्व के बारे में शुरुआती स्तर से ही सिखाया जाना चाहिए।कोर्ट ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को यह भी निर्देश दिया कि वे हर क्लासरूम, हॉस्टल, लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब में बाल सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित करें। साथ ही शिक्षकों और अन्य स्टाफ को 'ग्रूमिंग' (बच्चों को बहला-फुसलाकर गलत काम...
