इलाहाबाद हाईकोट
लिव-इन संबंध पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी—विवाहित पुरुष और वयस्क महिला साथ रहें तो अपराध नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई विवाहित पुरुष किसी वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन संबंध में रहता है, तो यह किसी भी प्रकार का अपराध नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून और नैतिकता को अलग-अलग रखा जाना चाहिए और सामाजिक धारणा अदालत के फैसलों को प्रभावित नहीं कर सकती।जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस करून सक्सेना की खंडपीठ यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान कर रही थी, जिसमें एक लिव-इन कपल ने महिला के परिवार से मिल रही धमकियों के खिलाफ सुरक्षा की...
अनुच्छेद 226 के तहत आपराधिक कोर्ट के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी आपराधिक अदालत द्वारा पारित न्यायिक आदेश को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल कर चुनौती नहीं दी जा सकती।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें लखनऊ के स्पेशल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (कस्टम) द्वारा फरवरी 2026 में पारित आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी।सुनवाई के दौरान राज्य ने याचिका की सुनवाई योग्य होने पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई और नीता सिंह बनाम राज्य, 2024 के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि...
किसी एक धर्म को 'एकमात्र सच्चा धर्म' बताना गलत, इससे दूसरे धर्मों का अपमान होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने IPC की धारा 295A के तहत दर्ज केस रद्द करने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि धर्मनिरपेक्ष भारत में किसी भी व्यक्ति के लिए यह दावा करना 'गलत' है कि कोई विशेष धर्म ही "एकमात्र सच्चा धर्म" है, क्योंकि ऐसा करने का मतलब है कि वह दूसरे धर्मों का 'अपमान' कर रहा है, और पहली नज़र में इस पर IPC की धारा 295A लागू होती है।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की बेंच ने यह टिप्पणी रेवरेंड फादर विनीत विंसेंट परेरा द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए की। परेरा पर IPC की धारा 295A [जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिसका उद्देश्य किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक...
यूपी में 80% लापता लोग खोजे गए: नई रिपोर्ट पर हाईकोर्ट, पहले का 'चौंकाने वाला' आंकड़ा गलत तरीके से पेश हुआ
इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश पुलिस ने ताजा आंकड़े पेश करते हुए दावा किया कि 1 जनवरी 2024 से 17 मार्च 2026 के बीच राज्य में 1,19,070 लोग लापता हुए, जिनमें से 95,061 (करीब 80%) को खोज लिया गया।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफीर अहमद की खंडपीठ इस मामले में स्वतः संज्ञान जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।अदालत ने नए आंकड़ों पर गौर करते हुए कहा कि पहले जो आंकड़े पेश किए गए, वे सही तरीके से अदालत तक नहीं पहुंचे थे।खंडपीठ ने टिप्पणी की, “प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि 29.01.2026 के...
पिता-बेटी को 'सच्चाई जानने का अधिकार': भरण-पोषण विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने DNA टेस्ट का दिया आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक नाबालिग बच्ची को धारा 125 CrPC के तहत भरण-पोषण (maintenance) देने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि पहले बच्ची की वास्तविक पितृत्व (biological parentage) की पुष्टि के लिए DNA टेस्ट कराया जाना आवश्यक है।जस्टिस मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में पिता और बेटी दोनों को जैविक सच्चाई जानने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि वास्तविक पिता की पहचान स्पष्ट नहीं होगी, तो...
POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज प्रयागराज POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अग्रिम जमानत दे दी है।इससे पहले 27 फरवरी को जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया था और निर्देश दिया था कि अंतिम फैसला होने तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य की गिरफ्तारी न की जाए।गौरतलब है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन पर आरोप है कि प्रयागराज में आयोजित हालिया माघ मेला के दौरान...
यूपी में 4995 धरोहरें बदहाल: हाईकोर्ट ने केंद्र-राज्य से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में हजारों ऐतिहासिक धरोहरों की खराब स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य सरकार समेत कई एजेंसियों को नोटिस जारी किया।अदालत में दायर जनहित याचिका में दावा किया गया कि प्रदेश की 4995 प्राचीन इमारतें और स्मारक “खस्ताहाल हैं और पूरी तरह खत्म होने के कगार पर हैं।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, संस्कृति, पर्यटन और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालयों तथा राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण से 8...
संभल हिंसा मामला: पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR के आदेश पर हाईकोर्ट 21 अप्रैल तक बढ़ाई रोक
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने नवंबर 2024 के संभल हिंसा मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश पर लगी अंतरिम रोक को 21 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया।जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने यह आदेश पूर्व संभल क्षेत्राधिकारी अनुज कुमार चौधरी और तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दोनों अधिकारियों ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया।अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। साथ ही...
1984 कानपुर दंगों पर हाइकोर्ट सख्त: नरसंहार बताकर केस रद्द करने से किया इनकार
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने 1984 के कानपुर सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला देते हुए आरोपियों की याचिकाएं खारिज की। साथ ही आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का आदेश दिया। अदालत ने इन घटनाओं को नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया।जस्टिस अनिश कुमार गुप्ता की पीठ ने 9 आरोपियों द्वारा दायर 7 याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि केवल देरी या मूल रिकॉर्ड के अभाव के आधार पर मुकदमा समाप्त नहीं किया जा सकता।अदालत ने कहा,“यह घटनाएं देशभर में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख समुदाय...
बकाया न चुकाने पर सिविल जेल भेजने से पति की मासिक भरण-पोषण देने की ज़िम्मेदारी खत्म नहीं होती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि किसी व्यक्ति को उसकी पत्नी या बच्चों को भरण-पोषण (Maintenance) न देने के कारण सिविल जेल भेजने से उसकी आगे का मासिक भरण-पोषण का बकाया चुकाने की कानूनी ज़िम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की बेंच ने साफ किया कि CrPC की धारा 300 के तहत 'डबल जिओपार्डी' (दोहरी सज़ा) का सिद्धांत, 'घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005' के तहत भरण-पोषण के आदेशों को लागू करने के मामले में बिल्कुल भी लागू नहीं होता।बेंच ने आगे कहा कि भरण-पोषण से जुड़ी...
नोटिस न मिलने से ट्रांसफर आदेश स्वतः अवैध नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 24 के तहत मुकदमे के ट्रांसफर से पहले नोटिस जारी न करना अपने आप में आदेश को अवैध नहीं बनाता, जब तक यह साबित न हो कि इससे संबंधित पक्ष को वास्तविक नुकसान (प्रेजुडिस) हुआ है।जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यदि किसी मामले को सक्षम अदालत में विधिसम्मत तरीके से ट्रांसफर कर दिया गया और इससे किसी पक्ष को नुकसान नहीं हुआ तो केवल तकनीकी आधार पर आदेश रद्द नहीं किया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया,“नोटिस का अभाव...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़मानत मिलने के बाद अपील की सुनवाई टालने की मुक़दमेबाज़ों की 'आपत्तिजनक' चाल पर नाराज़गी जताई, कहा- बेंच या बार को दोष न दें
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक अपीलों में ज़मानत हासिल करने और उसके बाद अपने वकीलों को अंतिम सुनवाई के लिए पेश न होने का निर्देश देने की मुक़दमेबाज़ों की "आपत्तिजनक प्रवृत्ति" की कड़ी आलोचना और निंदा की।कोर्ट ने टिप्पणी की कि सेमिनारों में जब अदालतों में देरी के कारणों पर बहस होती है तो मुक़दमेबाज़ों की भूमिका को ज़्यादातर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। मुक़दमेबाज़ को बार और बेंच के हाथों में एक बेबस इंसान के तौर पर देखा जाता है। हालाँकि, असल में ऐसा नहीं है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किया नया रोस्टर, जस्टिस श्रीधरन अब सुनेंगे पारिवारिक अपीलें और सीनियर सिटीजन एक्ट से जुड़े मामले
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते बेंचों के गठन/रोस्टर की नई अधिसूचना जारी की, जो आज (सोमवार) से लागू हो गई। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली के आदेश पर 19 मार्च को पारित प्रशासनिक आदेश में कई डिवीजनों और सिंगल जज बेंचों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए।यह अधिसूचना पिछले रोस्टर की जगह लेती है, जो 5 जनवरी, 2026 से लागू था।नए अधिसूचित रोस्टर में जस्टिस अतुल श्रीधरन, जस्टिस विवेक सरन के साथ बैठकर वर्ष 2021 से आगे की फैमिली कोर्ट की अपीलें सुनेंगे। साथ ही माता-पिता और सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम से...
देरी की माफ़ी के लिए दी गई सफ़ाई की विश्वसनीयता पहले जांची जानी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि देरी की माफ़ी पर विचार करते समय कोर्ट को सबसे पहले उस पक्ष द्वारा दी गई सफ़ाई की विश्वसनीयता (Bona Fides) की जांच करनी चाहिए, जो ऐसी माफ़ी चाहता है।एक शादी को अमान्य घोषित करने वाले फ़ैसले के ख़िलाफ़ 654 दिनों की देरी से दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की बेंच ने कहा,“कोर्ट का यह फ़र्ज़ है कि वह सबसे पहले उस पक्ष द्वारा दी गई सफ़ाई की विश्वसनीयता की जांच करे, जो माफ़ी चाहता है। केवल तभी, जब मुक़दमा लड़ने वाले पक्ष...
मुकदमे में मुद्दे तय होने के 18 साल बाद शुरुआती मुद्दा नहीं उठाया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि किसी मुकदमे में, ट्रायल के दौरान मुद्दे तय होने के 18 साल बाद कोई शुरुआती मुद्दा नहीं उठाया जा सकता।जस्टिस मनीष कुमार निगम ने फैसला दिया,“मुकदमे की स्वीकार्यता (Maintainability) के संबंध में दलील पहली बार में ही प्लीडिंग (लिखित बयान) में उठाई जानी चाहिए; तभी ट्रायल कोर्ट ऐसी दलील पर, ऑर्डर XIV नियम 2 CPC के तहत शुरुआती मुद्दे के तौर पर उसके गुण-दोष के आधार पर फैसला दे सकता है।”वादी-प्रतिवादियों ने 2006 में एक मुकदमा दायर किया, जिसमें 21.05.1988 को राम आसरे...
लंबे समय तक आउटसोर्सिंग से भर्ती टालना अनुचित: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने राज्य को लगाई फटकार
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सरकारी संस्थानों द्वारा नियमित नियुक्तियों को दरकिनार कर लंबे समय तक आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों से काम लेने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने इसे शोषण और अन्याय को बढ़ावा देने वाला बताया।जस्टिस विक्रम डी चौहान की पीठ ने बरेली नगर निगम को निर्देश दिया कि 13 वर्षों से आउटसोर्स आधार पर काम कर रहे कंप्यूटर ऑपरेटर के नियमितीकरण पर पुनर्विचार किया जाए।कोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी से लंबे समय तक लगातार काम लिया जाता है और उसका कार्य विभाग के लिए आवश्यक और स्थायी...
पति की मृत्यु के बाद एक्स-पार्टी तलाक रद्द नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाइकोर्ट का अहम फैसला
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पति या पत्नी की मृत्यु के बाद एक्स-पार्टी तलाक के डिक्री को रद्द नहीं किया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मुकदमा आगे नहीं बढ़ सकता और इसे पुनर्जीवित करना कानूनन संभव नहीं है।जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने यह निर्णय देते हुए फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें 30 साल पुराने तलाक को बहाल कर दिया गया था।मामले में पहली पत्नी का विवाह 1991 में एक्स-पार्टी डिक्री के जरिए समाप्त हो गया। इसके बाद पति ने...
जमीन आवंटन के बाद भी खत्म नहीं होती SDM की जिम्मेदारी: इलाहाबाद हाइकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि जमीन का आवंटन करने के बाद भी उपजिलाधिकारी (SDM) की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती बल्कि उन्हें आवंटी के कब्जे की सुरक्षा तब तक करनी होती है, जब तक जमीन का स्वामित्व राज्य के पास रहता है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 65 के तहत SDM को यह अधिकार और कर्तव्य है कि वह अवैध कब्जे को हटाकर आवंटी को जमीन पर कब्जा दिलाएं और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करें।अदालत ने कहा कि यदि SDM की भूमिका...
नाबालिग से छेड़छाड़ के बाद आत्महत्या का मामला: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने POCSO आरोपी की जमानत रद्द की
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने गंभीर मामले में POCSO आरोपी की जमानत रद्द की, जिस पर आरोप है कि जमानत पर छूटने के बाद उसने नाबालिग पीड़िता को फिर से परेशान किया, जिसके चलते उसने आत्महत्या कर ली।जस्टिस बृज राज सिंह की पीठ ने पाया कि आरोपी ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया और मिली स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया। अदालत ने उसे दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।मामले में पीड़िता के पिता ने अदालत का रुख करते हुए आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग की थी।आरोप है कि आरोपी पहले से ही नाबालिग के साथ...
एटा में मिली जैन प्रतिमा को प्रयागराज के सेंट्रल म्यूजियम में सुरक्षित रखने का निर्देश, विशेषज्ञ समिति गठित करने को कहा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एटा में मिली एक प्राचीन जैन प्रतिमा को प्रयागराज के सेंट्रल म्यूजियम में सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। साथ ही, कोर्ट ने प्रतिमा के स्वरूप, प्रकृति और उससे जुड़े जैन समुदाय के संप्रदाय (दिगंबर या श्वेतांबर) की पहचान तय करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने को कहा है।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि प्रतिमा ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसे 9वीं-10वीं शताब्दी का बताया जा रहा है। साथ ही, जैन समुदाय के दिगंबर और श्वेतांबर संप्रदायों के...


















