इलाहाबाद हाईकोट

अधिकारी का नामित प्रतिनिधि चयन समिति में नहीं आया तो चयन रद्द नहीं होगा, इसी आधार पर वेतन भी नहीं रोका जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा चयन समिति में अपना नामित प्रतिनिधि नहीं भेजना चयन प्रक्रिया को अवैध नहीं बनाता। केवल इस आधार पर चयनित कर्मचारी का वेतन रोका नहीं जा सकता।जस्टिस इरशाद अली ने 1984 के उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल नियमों का हवाला देते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने चयनित कर्मचारी को वेतन देने का निर्देश देते हुए कहा कि यदि चयन समिति के बहुमत सदस्यों ने विधि के अनुसार निर्णय लिया है तो केवल अधिकारी के प्रतिनिधि की अनुपस्थिति से चयन अमान्य नहीं...

राज्य द्वारा वकीलों की फीस रोकना गलत, लेकिन 4.8 करोड़ की फीस वसूली के लिए रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से अपने मामलों की पैरवी करने वाले वकीलों की पेशेवर फीस का भुगतान नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। हालांकि करीब 4.8 करोड़ रुपये की फीस और उस पर ब्याज की मांग को लेकर दायर चार रिट याचिकाओं को अदालत ने सुनवाई योग्य नहीं माना।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की पीठ ने कहा कि वकील और मुवक्किल के बीच पेशेवर फीस का विवाद सामान्य तौर पर अदालत में नहीं पहुंचना चाहिए। ऐसे विवादों को आपसी बातचीत, मध्यस्थता या सुलह के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जाना...

FIR दर्ज होने से पुलिसकर्मी की विभागीय जांच नहीं रुकेगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ उसी घटना को लेकर FIR दर्ज होने मात्र से विभागीय जांच पर रोक नहीं लगती। आपराधिक मामला और विभागीय कार्रवाई अलग-अलग उद्देश्यों के लिए हैं और दोनों समानांतर चल सकते हैं।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की पीठ ने एक सब-इंस्पेक्टर की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। अधिकारी पर पुलिस हिरासत में मौजूद आरोपी बदन सिंह उर्फ बड्डो के फरार होने के मामले में लापरवाही का आरोप था।अधिकारी पांच पुलिसकर्मियों की एस्कॉर्ट टीम का प्रभारी...

हाईकोर्ट ने प्रयागराज में भारी जलभराव का स्वतः संज्ञान लिया, नागरिक सुविधाओं की विफलता पर शीर्ष अधिकारियों को तलब किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रयागराज में भारी जलभराव का स्वतः संज्ञान लिया और ज़िला व राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लगातार बारिश के बीच शहर के निचले इलाकों में जलभराव को रोकने के लिए समय पर कदम न उठाने की वजह बताएं।कोर्ट ने प्रयागराज के ज़िला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त को अपने सामने पेश होने और यह बताने का निर्देश दिया कि शहर, खासकर निचले इलाकों में जलभराव न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए पहले से उपाय क्यों नहीं किए गए।कोर्ट ने यूपी सरकार के शहरी विकास और योजना विभाग के सचिव...

S.21 NIA Act | चार्ज तय करने का आदेश अंतरिम नहीं, इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जा सकती है: दिल्ली हाई कोर्ट से अलग इलाहाबाद हाईकोर्ट की राय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी एक्ट, 2008 (NIA Act) के तहत स्पेशल कोर्ट द्वारा चार्ज तय करने का आदेश इंटरलोक्यूटरी (अंतरिम) आदेश नहीं है। इसलिए 2008 के एक्ट की धारा 21 के तहत हाई कोर्ट में अपील के ज़रिए इसे चुनौती दी जा सकती है।इस तरह जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने शाहिद यूसुफ बनाम NIA मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की राय से असहमति जताई। उस मामले में कहा गया कि चार्ज तय करने का आदेश प्रकृति में इंटरलोक्यूटरी होता है और 2008 के एक्ट की धारा 21 के तहत अपील में इसे चुनौती...

NDPS मामले में मथुरा SSP ने आरोपियों के खिलाफ CCTV में दिखाई फर्जी बारदमगी, हाईकोर्ट ने कहा- गंभीर मामला, किया तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के SSP को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। यह आदेश NDPS मामले के दो आरोपियों द्वारा पेश किए गए CCTV फुटेज के आधार पर दिया गया, जिससे कोर्ट को प्रथम दृष्टया लगा कि उनके खिलाफ "फर्जी बरामदगी" दिखाई गई।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की बेंच ने इस मामले को "बहुत गंभीर" बताया और SSP को निर्देश दिया कि वे आवेदकों द्वारा लगाए गए आरोपों का बिंदुवार (para-wise) जवाब दें।यह आदेश आरोपी पिंकू और नरेश शर्मा द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के...

कंबल-मच्छरदानी की बरामदगी से डकैती साबित नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 आरोपियों को बरी किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब 48 साल पुराने 1978 के डकैती मामले में दो आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि केवल एक कंबल और मच्छरदानी की कथित बरामदगी से आरोपियों का अपराध साबित नहीं होता, खासकर जब ये सामान बाजार में आम तौर पर उपलब्ध हों और उन पर कोई विशिष्ट पहचान चिह्न न हो।जस्टिस अब्दुल शाहिद की पीठ ने आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए कानपुर देहात के स्पेशल जज (DAA) द्वारा 1985 में सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया। दोनों आरोपियों को IPC की धारा 392 के तहत दोषी ठहराया गया था और पांच साल के कठोर कारावास के साथ...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर के लिए तय कीमत दिए बिना ज़मीन लेने पर यूपी सरकार को फटकार लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या में 'सुग्रीव किला' स्थित श्री ठाकुर राम जानकी जी की मूर्ति (देवता) की ज़मीन को श्री राम जन्मभूमि मंदिर के विकास के लिए बिना बिक्री मूल्य चुकाए अधिग्रहित करने पर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई।कोर्ट ने गौर किया कि राज्य सरकार एक तरफ तो देवता के मालिकाना हक पर सवाल उठा रही थी और दावा कर रही थी कि ज़मीन बेची ही नहीं जा सकती थी और दूसरी तरफ उसी ज़मीन पर कब्ज़ा भी बनाए हुए थी।यह टिप्पणी करते हुए कि याचिका में "भरोसा, झूठ और लालफीताशाही" का दिलचस्प मुद्दा उठाया गया,...

सिर्फ संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा करने से तीसरा पक्ष लघु वाद अदालत में जरूरी पक्षकार नहीं बन जाता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी संपत्ति पर स्वतंत्र मालिकाना हक का दावा कर देने मात्र से कोई तीसरा व्यक्ति लघु वाद अदालत में जरूरी या उचित पक्षकार नहीं बन जाता।अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे व्यक्ति को तभी पक्षकार बनाया जा सकता है, जब उसके मालिकाना हक का फैसला किए बिना वादी को मांगी गई राहत देने का निर्णय संभव न हो। जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पक्षकार जोड़ने की शक्ति का उद्देश्य सामने आए विवाद का प्रभावी और पूर्ण निपटारा करना है न कि किसी ऐसे स्वतंत्र विवाद को मुकदमे में शामिल...

राज्य से ठेके का बकाया लेने के लिए रिट याचिका तभी, जब रकम निर्विवाद रूप से स्वीकार हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य या उसकी संस्थाओं से ठेके के तहत बकाया रकम की वसूली के लिए दायर रिट याचिका तभी स्वीकार की जा सकती है, जब संबंधित बकाया रकम को राज्य की ओर से स्वीकार किया गया हो और उसके निर्धारण के लिए तथ्यों की विस्तृत जांच की जरूरत न हो। यदि पक्षकारों के बीच तथ्य गंभीर रूप से विवादित हों और उन्हें साक्ष्यों के आधार पर तय करना जरूरी हो तो हाईकोर्ट संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकता।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने...

बिना स्वीकृत पद और निर्धारित योग्यता के नियुक्त शिक्षक का वेतन सरकार से नहीं, प्रबंधन समिति से मिलेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना स्वीकृत पद और निर्धारित योग्यता के प्रबंधन समिति द्वारा नियुक्त शिक्षक राज्य से वेतन पाने का दावा नहीं कर सकता। ऐसे शिक्षक को अपने वेतन की मांग उसी प्रबंधन समिति से करनी होगी, जिसने उसकी नियुक्ति की थी।जस्टिस पंकज भाटिया की पीठ ने यह फैसला उस याचिका पर सुनाया, जिसमें याचिकाकर्ता ने वेतन भुगतान और नियमितीकरण की मांग की थी।अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि संबंधित शिक्षक की नियुक्ति शुरुआत से ही वैधानिक आवश्यकताओं के विपरीत थी। हालांकि उसे प्रबंधन समिति से वेतन...

17 साल पहले एम्प्लॉयर की गलती से दी गई ज़्यादा सैलरी रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले पैसे से नहीं वसूली जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि क्लास-III कर्मचारी को एम्प्लॉयर की अपनी गलत पे-फिक्सेशन (वेतन तय करने की प्रक्रिया) की वजह से दी गई ज़्यादा सैलरी, उसके रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले पैसे से नहीं वसूली जा सकती, अगर गलती 17 साल बाद सुधारी गई हो और यह साबित न हो कि कर्मचारी ने ऐसा जानबूझकर किया था।रिटायर्ड हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) के रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले पैसे से काटे गए 11,51,840 रुपये को 7% साधारण ब्याज के साथ वापस करने का आदेश देते हुए जस्टिस मनीष कुमार निगम ने कहा,“इस मामले में रेस्पॉन्डेंट्स...

कर्मचारी से यह साबित करने के लिए नहीं कहा जा सकता कि उसे खराब टिप्पणियों के बारे में कभी नहीं बताया गया, यह ज़िम्मेदारी विभाग की: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई कर्मचारी जो यह कहता है कि उसकी गोपनीय रिपोर्ट में दर्ज खराब टिप्पणियों (Adverse Remarks) के बारे में उसे कभी नहीं बताया गया, उससे इस नकारात्मक बात को साबित करने के लिए नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यह साबित करना विभाग का काम है कि वास्तव में जानकारी दी गईं।जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की बेंच ने कहा,“ऊपर दी गई बातों से पता चलता है कि ट्रिब्यूनल ने याचिकाकर्ता की ओर से यह साबित न कर पाने में कमी पाई कि उसे खराब टिप्पणियों के बारे में नहीं बताया...

Article 161 | समय से पहले रिहाई देने की गवर्नर की शक्ति का मनमाने ढंग से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत समय से पहले रिहाई देने की गवर्नर की शक्ति एक संप्रभु कार्यकारी शक्ति है, लेकिन इसका इस्तेमाल मनमाने ढंग से नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह लागू नियमों और सज़ा में छूट (रेमिशन) की नीति से नियंत्रित होती है।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की बेंच ने यह टिप्पणी तब की जब उन्होंने एक दोषी की समय से पहले रिहाई से इनकार करने वाला आदेश रद्द किया, जिसे 7 साल की कठोर कैद की सज़ा सुनाई गई थी।कोर्ट ने पाया कि समय से पहले रिहाई से...

प्रमोशन से पिछली खराब एंट्रीज़ खत्म नहीं होतीं, अनिवार्य रिटायरमेंट के लिए पूरा सर्विस रिकॉर्ड ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी के अनिवार्य रिटायरमेंट के मामले पर विचार करते समय, प्रमोशन से पहले मिली खराब एंट्रीज़ (Adverse Entries) प्रमोशन के बाद खत्म नहीं हो जातीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मूल्यांकन में पूरे सर्विस रिकॉर्ड को देखा जाना चाहिए और ईमानदारी से जुड़ी एक भी एंट्री कर्मचारी को अनिवार्य रूप से रिटायर करने के लिए काफ़ी हो सकती है।जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता ने कहा,“..स्थापित स्थिति यह है कि सरकारी कर्मचारी के अनिवार्य रिटायरमेंट के मामले पर विचार करने के लिए पूरे रिकॉर्ड को...

बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न की कथित घटनाओं के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस रिपोर्ट में खराब आने वाले स्कूल बस ड्राइवरों को लेकर चिंता जताई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जिन स्कूल वाहन ड्राइवरों की पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट खराब पाई गई, वे नाबालिग बच्चों की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा हैं। कोर्ट को यह भी बताया गया कि बार के सदस्यों ने सुझाव दिया था कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, जहां संभव हो, स्कूल वैन ड्राइवर महिलाएँ होनी चाहिए।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस बृज राज सिंह की बेंच उत्तर प्रदेश में शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान उन्हें बताया गया कि "मिशन भरोसा" के तहत...

सिर्फ़ बिज़नेस कॉम्पिटिशन की वजह से किसी दूसरे पेट्रोल पंप को मिली मंज़ूरी को चुनौती देने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी मौजूदा पेट्रोल पंप मालिक को किसी दूसरे पेट्रोल पंप को मिली मंज़ूरी या 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) को चुनौती देने का अधिकार नहीं है, सिर्फ़ इसलिए कि नए पेट्रोल पंप के खुलने से उसके बिज़नेस की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने बहराइच में मौजूद एक पेट्रोल पंप के मालिक की याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही। मालिक ने अपने पेट्रोल पंप के पास एक और पेट्रोल पंप खोलने के लिए दी गई मंज़ूरी और NOC को...

इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश: अवध बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए 30% आरक्षण; 2028 से रोटेशन के आधार पर अध्यक्ष का पद आरक्षित

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया कि अवध बार एसोसिएशन, हाईकोर्ट, लखनऊ की गवर्निंग/एग्जीक्यूटिव काउंसिल में 30% पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएं।हाईकोर्ट ने पद-वार आरक्षण और रोटेशन का शेड्यूल भी तय किया, जिसके तहत 2028 से हर 3 साल में अध्यक्ष का पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की बेंच ने अवध बार एसोसिएशन में महिला वकीलों के लिए आरक्षण से जुड़ी दो PIL याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत...

Zamindari Abolition Act | ज़मीन के दावों का फ़ैसला रेवेन्यू रिकॉर्ड की पूरी चेन के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी एंट्री के आधार पर: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यू.पी. ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 229B के तहत किसी दावे का फ़ैसला रेवेन्यू रिकॉर्ड की पूरी चेन के आधार पर किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि कई फ़सली वर्षों (कृषि वर्षों) की लगातार खतौनी एंट्रीज़ को नज़रअंदाज़ करके सिर्फ़ एक एंट्री के आधार पर कोई निष्कर्ष निकालना कानून की नज़र में गलत है और इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता।यू.पी. ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 229B, किसी व्यक्ति को - जो 'आसामी' (काश्तकार) होने या ज़मीन या...

जिस अलॉटी ने जानबूझकर कम एरिया की लीज़ ली, वह पूरे ज़ीरो पीरियड का फ़ायदा नहीं ले सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जिस डेवलपर ने उसे अलॉट की गई ज़मीन के एक छोटे और बिखरे हुए हिस्से की लीज़ ली—यह जानते हुए भी कि बाकी ज़मीन डेवलपमेंट अथॉरिटी के कब्ज़े में नहीं थी—वह पूरे 'ज़ीरो पीरियड' का फ़ायदा नहीं ले सकता, भले ही अथॉरिटी की ही गलती क्यों न हो।'ज़ीरो पीरियड' एक ऐसी छूट है, जो अटके हुए ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के अलॉटीज़ को समय-समय पर जारी सरकारी आदेशों के तहत दी जाती है। जिस अवधि को 'ज़ीरो' घोषित किया जाता है, उस दौरान ब्याज और पेनल्टी ब्याज नहीं लिया जाता और किश्तों को आगे बढ़ा...