इलाहाबाद हाईकोट
वीज़ा फर्जीवाड़ा केस: भारत-चीन तनाव और प्रत्यर्पण संधि न होने के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चीनी नागरिक की जमानत खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक चीनी नागरिक श्युए फ़ेई उर्फ़ कोई की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी को रिहा करना भारत-चीन संबंधों और देश की आर्थिक सुरक्षा को देखते हुए “गंभीर जोखिम” होगा। आरोपी वीज़ा फर्जीवाड़ा, फर्जी दस्तावेज़ बनाने, अवैध निवास और आर्थिक अपराधों में शामिल होने के आरोपों का सामना कर रहा है।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने कहा कि अदालत सबूत अधिनियम की धारा 57(11) के तहत भारत और चीन के शत्रुतापूर्ण संबंधों को अनदेखा नहीं कर सकती। अदालत ने यह भी रेखांकित किया...
टेंडर विवादों में आहत अहंकार और कारोबारी प्रतिद्वंद्विता पर आधारित याचिकाएं अदालतों पर बोझ: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया में असफल रहे पक्षों की काल्पनिक शिकायतें, आहत अहंकार और कारोबारी प्रतिद्वंद्विता के कारण दायर याचिकाएं न्यायिक हस्तक्षेप का आधार नहीं बन सकतीं।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस मंजिवे शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि संविदात्मक मामलों में न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित है और केवल गंभीर एवं स्पष्ट अवैधानिकता ही हस्तक्षेप का कारण हो सकती है।मामले में हाईकोर्ट के जजों के लिए प्रयागराज और लखनऊ में आवास निर्माण हेतु 143 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला...
अगर सच है तो समाज को चौंकाने वाली गवाही: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1971 के युद्ध में शहीद हुए सैनिक की विधवा को ज़मीन अलॉट करने में 51 साल की देरी पर चिंता जताई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को 1971 के युद्ध में शहीद हुए सैनिक की विधवा की हालत पर गहरी चिंता जताई। विधवा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसे 5 बीघा ज़मीन मिलनी चाहिए थी लेकिन उसे सिर्फ़ 2.5 बीघा ज़मीन दी गई और वह 1974 से अपने हक के लिए संघर्ष कर रही है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने टिप्पणी की कि अगर उसकी याचिका में किए गए दावे सही हैं, तो यह स्थिति पूरे समाज की हालत की एक चौंकाने वाली गवाही है।बेंच ने यह कहा,"यह एक ऐसा मामला है, जहां 1971 के युद्ध में शहीद...
BNSS | नॉन-कॉग्निजेबल अपराध में पुलिस रिपोर्ट को 'शिकायत' माना जाता है, ऐसे मामलों में समन से पहले आरोपी की बात सुनी जानी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि नॉन-कॉग्निजेबल अपराध के लिए फाइल की गई पुलिस रिपोर्ट (चार्जशीट) को मजिस्ट्रेट द्वारा 'शिकायत' माना जाना चाहिए, न कि पुलिस केस/स्टेट केस के तौर पर। यह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के सेक्शन 2(1)(h) के एक्सप्लेनेशन के अनुसार है।कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे मामलों में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट आरोपी को सुनवाई का मौका दिए बिना समन जारी नहीं कर सकता, जैसा कि BNSS की धारा 223(1) के पहले प्रोविज़ो के तहत ज़रूरी है।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी की बेंच ने शाहजहांपुर...
बिना वजह बताए GST रजिस्ट्रेशन निरस्त नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि GST रजिस्ट्रेशन कैंसिल करते समय अधिकारियों को वजह बताते हुए ऑर्डर पास करने होंगे। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो ऑर्डर कानून की नज़र में मान्य नहीं होगा।जस्टिस पीयूष अग्रवाल ने कहा,"जब याचिकाकर्ता को बिना किसी सही नोटिस दिए या सुनवाई का कोई मौका दिए बिना कैंसलेशन ऑर्डर पास किया गया तो यह खुद ही नेचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन है।"याचिकाकर्ता एक रियल एस्टेट कंपनी है। उसको रिटर्न जमा न करने पर GST कैंसलेशन के लिए शो-कॉज नोटिस जारी किया गया था।...
पितृत्व विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख़्त रुख: DNA Test सामान्य प्रक्रिया नहीं, पति की याचिका खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि पितृत्व निर्धारण के लिए DNA Test का आदेश केवल इसलिए नहीं दिया जा सकता कि किसी पक्ष ने बच्चे के जन्म को लेकर संदेह जताया। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा आदेश तभी दिया जा सकता है जब यह साबित हो जाए कि संबंधित अवधि में पति–पत्नी के बीच सहवास का कोई अवसर ही नहीं था।जस्टिस चवन प्रकाश की सिंगल बेंच ने यह अवलोकन घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दर्ज मामले में पति द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर किया, जिसमें उसने अपनी पत्नी से जन्मे बच्चे को अवैध...
SC/ST Act केस को S14-A के तहत अपील में सीधे कंपाउंड किया जा सकता है; CrPC की धारा 482 का सहारा लेने की ज़रूरत नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा है कि शेड्यूल्ड कास्ट्स एंड द शेड्यूल्ड ट्राइब्स (प्रिवेंशन ऑफ़ एट्रोसिटीज़) एक्ट, 1989 (SC/ST Act) के तहत क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स को, 1989 एक्ट की धारा 14-A(1) के तहत फाइल की गई क्रिमिनल अपील में समझौते के आधार पर सीधे कंपाउंड और रद्द किया जा सकता है।जस्टिस शेखर कुमार यादव की बेंच ने कहा कि जब अपील का कानूनी उपाय मौजूद है तो समझौता करने के लिए CrPC की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट की अंदरूनी शक्तियों का अलग से सहारा लेने की कोई ज़रूरत नहीं है।ऐसा कहने के लिए जस्टिस...
'कम्युनल टेंशन बढ़ाने वाला एक भी काम पब्लिक ऑर्डर को खराब करता है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA डिटेंशन सही ठहराया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक आदमी को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट, 1980 (NSA) के तहत डिटेंशन को सही ठहराया, क्योंकि उसने कहा कि एक भी क्रिमिनल काम, अगर उससे कम्युनल टेंशन होता है। "ज़िंदगी की रफ़्तार बिगड़ जाती है", तो वह सिर्फ़ लॉ एंड ऑर्डर तोड़ने के बजाय पब्लिक ऑर्डर तोड़ने जैसा है।इस तरह जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने शोएब नाम के एक आदमी की हेबियस कॉर्पस रिट पिटीशन खारिज की, जिसने मऊ के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के दिए गए अपने डिटेंशन ऑर्डर को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में...
सहकारी बैंक अधिकारी भी 'लोक सेवक'; तकनीकी क्लीन-चिट FIR रोकने का आधार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा नियंत्रित या सहायता प्राप्त सहकारी बैंकों के कर्मचारी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत 'लोक सेवक' की श्रेणी में आते हैं, और इस आधार पर दर्ज की गई FIR वैध है।अदालत ने यह भी माना कि विभागीय जांच में दी गई मात्र 'तकनीकी दोषमुक्ति', जिसमें जांच अधिकारी ने यह कहा कि वह असंगत संपत्ति के आरोपों की जांच करने में सक्षम नहीं है, FIR दर्ज होने से रोकने का कानूनी आधार नहीं बन सकती। मामला उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक...
अंतरिम रोक लगाने वाली एप्लीकेशन में पास किए गए इंटरलोक्यूटरी ऑर्डर के खिलाफ रिवीजन मेंटेनेबल नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरिम रोक लगाने वाली एप्लीकेशन में पास किए गए इंटरलोक्यूटरी ऑर्डर के खिलाफ रिवीजन मेंटेनेबल नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इसे रिट ज्यूरिस्डिक्शन में चैलेंज किया जा सकता है।1985 में मृतक ने रेस्पोंडेंट नंबर 5 के फेवर में एक वसीयत लिखी थी। इसके बाद रेस्पोंडेंट नंबर 4 और याचिकाकर्ता के फेवर में क्रमशः दूसरी और तीसरी वसीयत लिखी गईं। वसीयत करने वाले की मौत के बाद रेस्पोंडेंट नंबर 5 ने याचिकाकर्ता के फेवर में लिखी गई वसीयत को छिपाकर रेवेन्यू रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा...
कहीं कुछ गड़बड़ है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 साल पुराने मामले में एक बुजुर्ग व्यक्ति के खिलाफ ट्रायल जज की 'सुस्ती' पर फटकार लगाई, कार्रवाई की चेतावनी दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते प्रयागराज की एक ट्रायल कोर्ट को 20 साल पुराने आपराधिक मामले को 'सुस्ती' से संभालने के लिए फटकार लगाई। साथ ही कहा कि कोर्ट के बार-बार टालने और पिछले 13 सालों से प्रॉसिक्यूशन द्वारा एक भी गवाह पेश न करने के कारण 73 साल के आरोपी को 'परेशान' किया गया।यह देखते हुए कि ट्रायल कोर्ट के कामकाज में कहीं कुछ गड़बड़ लग रहा है, जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने पीठासीन अधिकारी को सख्त अल्टीमेटम दिया कि वह एक महीने के अंदर ट्रायल पूरा करें नहीं तो अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी का गला घोंटने के लिए आदमी की सज़ा बरकरार रखी, कहा- मां के मुकरने के बावजूद आरोप साबित हुए
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने एक आदमी की सज़ा और उम्रकैद को बरकरार रखा, जिस पर अपनी 17 साल की बेटी की हत्या का आरोप था। उसे शक था कि उसकी बेटी का उसी इलाके के एक लड़के के साथ रिश्ता था।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस राजीव सिंह की बेंच ने कहा कि ट्रायल के दौरान पीड़िता की मां के मुकरने के बावजूद, हालात के सबूतों की चेन, जिसमें आरोपी-पिता का इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 106 के तहत मौत को समझाने में नाकाम रहना भी शामिल है, उन्होंने पक्के तौर पर उसके दोषी होने की ओर इशारा किया।इस तरह कोर्ट ने अपील...
ऊंचे पद पर काम करने वाला कर्मचारी बिना फॉर्मल प्रमोशन के भी उस पद की सैलरी पाने का हकदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि एक कर्मचारी जिसने ऊंचे पद पर ऑफिसिएटिंग कैपेसिटी में काम किया, भले ही वह रेगुलर प्रमोट न हुआ हो, वह उस समय के लिए उस ऊंचे पद के लिए मिलने वाली सैलरी पाने का हकदार है।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने कहा कि ऊंचे पद के लिए सैलरी न देना "कानून के खिलाफ और पब्लिक पॉलिसी के भी खिलाफ" होगा।हाईकोर्ट उमा कांत पांडे नामक व्यक्ति की रिट याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें उसने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT), इलाहाबाद बेंच के उस...
स्पष्टीकरण से असंतुष्ट: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कैंसर पीड़ित टीचर को ट्रांसफर न देने पर बेसिक शिक्षा सचिव को तलब किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते यूपी बेसिक शिक्षा बोर्ड के सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया, क्योंकि कोर्ट ने स्तन कैंसर से पीड़ित एक असिस्टेंट टीचर के ट्रांसफर अनुरोध को खारिज करने के अधिकारी के स्पष्टीकरण पर असंतोष व्यक्त किया।जस्टिस प्रकाश पाडिया की बेंच ने कहा कि वह सचिव (प्रतिवादी नंबर 4) द्वारा तकनीकी आधार पर याचिकाकर्ता के आवेदन को खारिज करने के औचित्य के लिए दायर व्यक्तिगत हलफनामे से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है।बता दें कि याचिकाकर्ता ने शाहजहांपुर से गाजियाबाद ट्रांसफर के...
'हर लेवल पर बेईमानी': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहली नज़र में उत्तर प्रदेश के बर्थ सर्टिफिकेट सिस्टम की 'आलोचना' क्यों कहा?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य के बर्थ सर्टिफिकेट जारी करने के सिस्टम की कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने यह आलोचना उस वक्त की, जब उसे पता चला कि एक याचिकाकर्ता ने दो अलग-अलग बर्थ सर्टिफिकेट बनवाए, जिनमें जन्म की तारीखें बिल्कुल अलग-अलग हैं।यह देखते हुए कि यह सिस्टम "हर लेवल पर मौजूद बेईमानी की हद" को दिखाता है, जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने मेडिकल और हेल्थ डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को यह सुझाव देने के लिए बुलाया कि एक व्यक्ति को सिर्फ़ एक ही बर्थ...
आरोपों में बदलाव की मांग करने का अधिकार न शिकायतकर्ता को, न आरोपी को; यह शक्ति केवल अदालत के पास: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि धारा 216 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत आरोपों में संशोधन या नया आरोप जोड़ने की शक्ति केवल न्यायालय के पास होती है। न तो शिकायतकर्ता और न ही आरोपी—किसी भी पक्ष को यह अधिकार नहीं है कि वे स्वयं आरोप जोड़ने/बदलने के लिए आवेदन कर सकें।जस्टिस अब्दुल शाहिद की एकलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए वाराणसी के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/FTC-II के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक शिकायतकर्ता के आवेदन पर ट्रायल के बाद के चरण में आरोपी के विरुद्ध POCSO Act के कठोर...
वकील को कोर्ट में धमकाया गया, वकालतनामा वापस लेने के लिए मजबूर किया गया? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट जज को आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया
वकील के साथ कोर्ट रूम के अंदर बुरा बर्ताव करने और उसे धमकाकर अपना वकालतनामा वापस लेने के लिए मजबूर करने के आरोपों पर गंभीर चिंता जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज, लखनऊ से आरोपों की जांच करने के लिए एक रिपोर्ट मांगी।जस्टिस सैयद कमर हसन रिज़वी की बेंच ने कहा कि अगर ऐसे आरोपों को उनके पहले के बयानों के आधार पर सही मान लिया जाता है तो वे "न्याय देने में रुकावट" पैदा करते हैं और "न्याय देने के सिस्टम को बदनाम" करते हैं।यह टिप्पणी तब आई जब बेंच देवी प्रसाद और अन्य...
सेस टैक्सेशन का ब्रैकेट तय करने के लिए इंडस्ट्री का मुख्य मकसद ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा कि किसी इंडस्ट्री के लिए सेस तय करते समय असेसिंग अथॉरिटी को इंडस्ट्री के मुख्य मकसद पर विचार करना चाहिए।जस्टिस इरशाद अली ने कहा,“इस मामले में जहां सवाल यह है कि क्या कोई खास इंडस्ट्री एक्ट के शेड्यूल I में शामिल इंडस्ट्री है तो आम तौर पर यह तय किया जाना चाहिए कि वह इंडस्ट्री मुख्य रूप से क्या बनाती है। हर इंडस्ट्री अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कई तरह के काम करती है, जिसके लिए कई अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं। कोई खास इंडस्ट्री टैक्सेशन के दायरे में आती है या...
125 CrPC मामलों में फैसले में 'निर्णय के बिंदु' लिखना ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य की सभी फैमिली कोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वे धारा 125 दं.प्र.सं. (CrPC) के तहत पारित होने वाले सभी अंतिम आदेशों में अनिवार्य रूप से 'निर्णय हेतु बिंदु' (points for determination) तय करें। कोर्ट ने कहा कि यह धारा 354(6) CrPC का स्पष्ट पालन है, जिसे हर फैमिली कोर्ट को अनिवार्य रूप से अपनाना होगा।जस्टिस मदन पाल सिंह की एकल पीठ ने यह निर्देश दिया और आदेश को सभी ज़िला जजों तथा सभी फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीशों को सख़्ती से पालन हेतु प्रसारित करने का निर्देश दिया। ...
नोरी जामा मस्जिद को अब और ध्वस्त नहीं किया जाएगा: हाईकोर्ट ने दर्ज किया यूपी सरकार का आश्वासन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फतेहपुर-नोरी जामा मस्जिद प्रबंध समिति की याचिका को इस आधार पर निस्तारित कर दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया कि धार्मिक संरचना पर अब किसी तरह की आगे की तोड़फोड़ आवश्यक नहीं है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि जब राज्य सरकार ने साफ शब्दों में यह स्थिति स्पष्ट कर दी तो याचिकाकर्ता के अधिकार विधिक प्रक्रिया के माध्यम से पर्याप्त रूप से संरक्षित रहेंगे। अदालत ने समिति को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 24 के तहत...














