इलाहाबाद हाईकोट

पार्टी की सदस्यता छोड़ने पर विधायक की अयोग्यता सिर्फ विधानसभा सदस्यता तक, लोकसभा चुनाव लड़ने पर रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई विधायक स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ देता है और इसके कारण संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य हो जाता है, तो यह अयोग्यता केवल उस सदन की सदस्यता तक सीमित रहती है, जिसका वह उस समय सदस्य था। ऐसी अयोग्यता उसे संसद का चुनाव लड़ने से नहीं रोकती।जस्टिस राज बीर सिंह ने यह टिप्पणी 78-भदोही लोकसभा सीट से निर्वाचित डॉ. विनोद कुमार बिंद के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए की।निचली सदन की सदस्यता पर ही लागू होगी अयोग्यताकोर्ट ने...

डेजर्टेशन के आधार पर तलाक मिलने से पत्नी का भरण-पोषण का अधिकार खत्म नहीं होता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि किसी महिला को पति से डेजर्टेशन यानी परित्याग के आधार पर तलाक मिला हो, तब भी वह सीआरपीसी की धारा 125 के तहत पूर्व पति से भरण-पोषण मांग सकती है। इसके लिए शर्त है कि उसने दोबारा शादी न की हो और वह स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम न हो।जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने सुल्तानपुर फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली महिला की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की। फैमिली कोर्ट ने महिला के भरण-पोषण का दावा खारिज किया...

निजामुद्दीन मरकज जाने पर दर्ज केस रद्द: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- अनुमान और आशंका के आधार पर आरोपी बनाया गया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने COVID-19 महामारी के दौरान दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन मरकज में धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के आरोप में दो लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की पूरी कार्यवाही रद्द की। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपियों को कोरोना संक्रमण की आशंका के आधार पर दर्ज कराए गए मामले में अनुमान और धारणा के आधार पर झूठा फंसाया गया।जस्टिस डॉ. गौतम चौधरी ने फैजान और एक अन्य आरोपी की ओर से दाखिल भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत याचिका स्वीकार करते हुए जौनपुर के अपर मुख्य न्यायिक...

अतिरिक्त जमीन की बिक्री एक बार शून्य घोषित हो गई तो रद्दीकरण कानून से दोबारा वैध नहीं हो सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि शहरी भूमि सीमा एवं विनियमन अधिनियम, 1976 के तहत अतिरिक्त घोषित जमीन की ऐसी बिक्री, जिसे कानून के तहत शून्य माना गया हो, शहरी भूमि सीमा एवं विनियमन निरसन अधिनियम, 1999 के लागू होने से दोबारा वैध नहीं हो सकती।कोर्ट ने कहा कि 1976 के कानून के तहत जिस समय जमीन का हस्तांतरण हुआ, उस समय यदि वह कानूनन शून्य था तो 1999 का निरसन कानून उस बिक्री को दोबारा जीवित नहीं कर सकता। जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने कहा कि 1976 के अधिनियम...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 दिन की गैर-कानूनी हिरासत के लिए ₹50,000 का मुआवज़ा दिया, गलती मानने के लिए पुलिस की तारीफ़ की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते राज्य सरकार को एक व्यक्ति को ₹50,000 का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। इस व्यक्ति को संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से पहले 15 अगस्त से 19 अगस्त, 2026 तक गैर-कानूनी रूप से पुलिस हिरासत में रखा गया।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने कमलेश कुमार की 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर यह आदेश दिया। कुमार ने आरोप लगाया कि 15 अगस्त को दो हथियारबंद पुलिसकर्मियों ने उन्हें उनकी मेडिकल शॉप से गैर-कानूनी तरीके से उठाया था।संक्षेप में...

कोऑपरेटिव सोसाइटी के बंटवारे से डेलीगेट्स का दर्जा खत्म, पुराना नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर बनाए रखने से योग्यता बरकरार नहीं रहती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब यूपी कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ एक्ट, 1965 की धारा 126 के तहत किसी कोऑपरेटिव सोसाइटी का बंटवारा होता है तो मूल सोसाइटी भी एक नई कॉर्पोरेट बॉडी बन जाती है, भले ही उसे अपना पुराना नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर बनाए रखने की इजाज़त दी गई हो।कोर्ट ने कहा कि ऐसे बंटवारे के बाद मूल सोसाइटी के डेलीगेट्स, यूपी कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ रूल्स, 1968 के नियम 87(ix) के तहत डेलीगेट नहीं रह जाते और नियम 453(1)(h) के तहत डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक की मैनेजमेंट कमिटी के सदस्य के तौर पर बने नहीं रह...

बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के कब्ज़ा देने का आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाज़ियाबाद के गुलमोहर ग्रीन्स के निरीक्षण का आदेश दिया
हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाज़ियाबाद के गुलमोहर ग्रीन्स के निरीक्षण और वहां की असल स्थिति की जांच के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए। यहां बिल्डर ने गाज़ियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी से कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिए बिना ही फ्लैट का कब्ज़ा दे दिया।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की बेंच ने वकील संजय कुमार ओम और प्रखर कुमार श्रीवास्तव को एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया। उन्हें साइट पर जाकर प्रोजेक्ट की स्थिति और फ्लैट मालिकों के पास फ्लैट के कब्ज़े के बारे में सही जानकारी देने को कहा...

कार्यस्थल पर कर्मचारियों को सांता क्लॉज की टोपी पहनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कार्यस्थल पर कर्मचारियों को सांता क्लॉज की लाल टोपी पहनने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की जबरदस्ती अलग-अलग धर्म और आस्था रखने वाले लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था और विश्वास का पालन करने की स्वतंत्रता है।जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव ने यह टिप्पणी विक्रम सिंह उर्फ विश्व विक्रम सिंह की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई करते हुए की। अर्जी में उन्होंने आगरा के सदर बाजार थाने में दर्ज FIR से जुड़ी...

अंतरधार्मिक समलैंगिक जोड़े को शांतिपूर्ण लिव-इन में साथ रहने का मौलिक अधिकार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अंतरधार्मिक समलैंगिक जोड़े को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शांतिपूर्ण तरीके से लिव-इन संबंध में साथ रहने का मौलिक अधिकार है। परिवार के सदस्य, रिश्तेदार या समाज का कोई अन्य व्यक्ति उनके साथ रहने के फैसले में कानूनी तौर पर हस्तक्षेप नहीं कर सकता, न ही उन्हें धमका या परेशान कर सकता है।जस्टिस डॉ. गौतम चौधरी ने यह आदेश समलैंगिक जोड़े की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि साथ रहने के फैसले को लेकर उन्हें निजी पक्षों और परिवार के सदस्यों की ओर...

आर्य समाज मंदिर का विवाह प्रमाणपत्र अकेले हिंदू विवाह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आर्य समाज मंदिर की ओर से जारी विवाह प्रमाणपत्र पेश कर यह साबित नहीं किया जा सकता कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध विवाह संपन्न हुआ था। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैध हिंदू विवाह के लिए कानून में निर्धारित आवश्यक हिंदू रीति-रिवाज और रस्में पूरी होना जरूरी है।जस्टिस राजीव सिंह ने यह टिप्पणी सशस्त्र सीमा बल के अधिकारी रोहित पांडेय की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। अधिकारी को वैवाहिक स्थिति के संबंध में गलत घोषणा करने के आरोप में सेवा से हटा दिया गया। हाईकोर्ट ने...

बिना शपथपत्र Class-I अधिकारी के खिलाफ शिकायत पर Vigilance Inquiry नहीं हो सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य के Class-I/Group-A अधिकारी के खिलाफ ऐसी शिकायत, जो अनिवार्य शपथपत्र (Affidavit) के साथ दाखिल नहीं की गई हो, उसके आधार पर Vigilance Inquiry शुरू नहीं की जा सकती, खासकर तब जब मामले को State Vigilance Committee के समक्ष मंजूरी के लिए नहीं रखा गया हो।जस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने एक IAS अधिकारी के खिलाफ शुरू की गई Vigilance Inquiry को रद्द करते हुए कहा कि संबंधित सरकारी आदेशों का उद्देश्य ईमानदार अधिकारियों को फर्जी और झूठी शिकायतों के आधार पर प्रताड़ित होने से...

ऑनलाइन सर्च करने वालों को फोन कर OTP से सहमति लेने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणी
ऑनलाइन किसी सेवा या जानकारी की तलाश करने वाले लोगों से संपर्क कर उन्हें सेवाएं देने और फिर OTP या वेब लिंक के जरिए सहमति हासिल करने की प्रक्रिया पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां सार्वजनिक रूप से हो रही हैं और इनका असर आम लोगों पर पड़ता है। इसलिए ऐसे मामलों पर केवल संबंधित विवाद के तथ्यों के आधार पर नहीं बल्कि व्यापक दृष्टिकोण से भी विचार किए जाने की जरूरत है।यह टिप्पणी जस्टिस प्रकाश पड़िया और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने विदेश में पढ़ाई करने की...

NEET-UG 2026 | चार मेडिकल कॉलेजों में राज्य सरकार का बढ़ाया गया आरक्षण प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में SC उम्मीदवारों के लिए बढ़ाए गए आरक्षण पर रोक लगाई। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का 1 सितंबर 2026 का आदेश प्रथमदृष्टया हाईकोर्ट के पहले के निर्देशों और राज्य सरकार की अपनी ओर से दी गई प्रतिबद्धता के विपरीत है और यह अदालत की अवमानना के दायरे में आता है।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले अदालत के समक्ष आश्वासन दिया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण उत्तर प्रदेश...

पासपोर्ट मिलने से विदेश जाने का स्वतः अधिकार नहीं, पुलिस कोर्ट से पासपोर्ट सरेंडर कराने की मांग कर सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के पास पासपोर्ट होने का मतलब यह नहीं है कि उसे विदेश जाने का स्वतः अधिकार मिल जाता है। यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं और उसके विदेश जाने की आशंका है तो पुलिस या अभियोजन एजेंसी अदालत का रुख कर पासपोर्ट जमा कराने की मांग कर सकती है, ताकि उसे देश छोड़ने से रोका जा सके।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि पासपोर्ट मिलना अपने आप में दूसरे देश की सीमा पार करने का अधिकार नहीं देता। विदेश यात्रा के लिए संबंधित देश...

न्यायिक आदेशों का पालन न करने पर यूपी के खाद्य विभाग के प्रधान सचिव के खिलाफ हाईकोर्ट ने शुरू की अवमानना की कार्यवाही
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार के खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव रणवीर प्रसाद के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया। यह आदेश इसलिए दिया गया क्योंकि उन्होंने तय समय में मध्यस्थता (Arbitration) शुरू करने के डिवीज़न बेंच के आदेश का पालन नहीं किया और यह भी कहा कि सरकारी आदेशों के कारण मध्यस्थता नहीं हो सकती।रणवीर प्रसाद के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश देते हुए जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने कहा,"इसके अलावा, प्रधान...

क्लेमंट की साक्षरता और आर्थिक स्थिति के आधार पर मुआवज़ा रोकने की ट्रिब्यूनल की इजाज़त देने वाले नियम आर्टिकल 14 का उल्लंघन करते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'रेलवे दुर्घटना और अप्रिय घटना (मुआवज़ा) नियम, 1990' के नियम 5.1 और 5.4.1(i) और (ii) - जो रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल को क्लेमंट की साक्षरता और आर्थिक स्थिति के आधार पर तय मुआवज़े का सिर्फ़ कुछ हिस्सा जारी करने और बाकी हिस्सा फिक्स्ड डिपॉज़िट में रखने की इजाज़त देते हैं - क्लेमंट्स के बीच भेदभाव करते हैं और भारत के संविधान के आर्टिकल 14 का उल्लंघन करते हैं।इन प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि जो क्लेमंट बालिग हैं और नियम 5.2 के दायरे में नहीं आते...

अनिवार्य आरक्षण शर्तों को नज़रअंदाज़ करके की गई शिक्षक की नियुक्ति को 'मान ली गई मंज़ूरी' के आधार पर वैध नहीं ठहराया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल (जूनियर हाई स्कूल) (शिक्षकों की भर्ती और सेवा की शर्तें) नियम, 1978' के नियम 10(5)(iii) के तहत 'मान ली गई मंज़ूरी' (Deemed Approval) के प्रावधान का इस्तेमाल उस शिक्षक की नियुक्ति को वैध बनाने के लिए नहीं किया जा सकता, जो पद से जुड़ी अनिवार्य आरक्षण शर्तों का पालन किए बिना की गई।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,“'मान ली गई मंज़ूरी' के प्रावधान का इस्तेमाल ऐसी नियुक्ति को वैध बनाने के लिए नहीं किया जा सकता, जो शुरू में ही भर्ती और...

असली क्वालिफिकेशन के आधार पर मिली नियुक्ति को सिर्फ़ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी नहीं दी गई: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि असली क्वालिफिकेशन के आधार पर मिली नियुक्ति को सिर्फ़ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि नियुक्त व्यक्ति ने अपनी पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी नहीं दी थी, जबकि उस बात का उसकी योग्यता या चयन पर कोई असर नहीं है।कोर्ट ने कहा कि ऐसी जानकारी न देने पर नियुक्ति तभी रद्द की जा सकती है, जब जानकारी न देने और नियुक्ति मिलने के बीच कोई साफ़ और सीधा संबंध हो।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,"असली क्वालिफिकेशन के आधार पर मिली नियुक्ति को सिर्फ़ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि...

आयुष मलिक धर्मांतरण केस: हाईकोर्ट द्वारा शामली पुलिस को फटकार लगाने का दावा करने वाली पोस्ट के लिए 6 लोगों पर केस दर्ज
शामली पुलिस ने छह सोशल-मीडिया यूज़र्स (जिनमें एक वकील भी शामिल है) के खिलाफ FIR दर्ज की। इन पर आरोप है कि इन्होंने "गुमराह करने वाली और बिना तथ्यों वाली" जानकारी फैलाई, जिसमें दावा किया गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान शामली पुलिस को फटकार लगाई। आयुष मलिक धर्म परिवर्तन से जुड़े एक मामले के केंद्र में हैं।गौरतलब है कि 16 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 वर्षीय मलिक को आज़ाद किया था। मलिक ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम अपनाया और आरोप...

किरायेदार-लैंडलॉर्ड विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बिक्री समझौते से अपने आप खत्म नहीं होती किरायेदारी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई किरायेदार अपने मकान मालिक से किराए की संपत्ति खरीदने का एग्रीमेंट टू सेल करता है, तो केवल समझौता हो जाने से किरायेदारी खत्म नहीं होती। साथ ही, किरायेदार की कब्जे की स्थिति अपने आप ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 53-A के तहत बिक्री समझौते के आंशिक पालन में कब्जा नहीं मानी जा सकती।जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि किरायेदार को यह साबित करना होगा कि समझौते के बाद पुरानी किरायेदारी स्पष्ट रूप से या निहित रूप से समाप्त (surrender) हो गई थी...
