इलाहाबाद हाईकोट

एनकाउंटर में हत्याएं, चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई: हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को टारगेटेड कार्रवाई के लिए फटकारा, गैंगस्टर एक्ट के गलत इस्तेमाल पर उठाए सवाल
'एनकाउंटर में हत्याएं, चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई': हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को टारगेटेड कार्रवाई के लिए फटकारा, गैंगस्टर एक्ट के गलत इस्तेमाल पर उठाए सवाल

एक सिविल विवाद को लेकर परिवार के 3 सदस्यों के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश पुलिस को 'उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1986' (UAPA) के टारगेटेड इस्तेमाल के लिए कड़ी फटकार लगाई।जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि कैसे एनकाउंटर में हत्याएं और 'असुविधाजनक' माने जाने वाले लोगों के खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई समय-समय पर कोर्ट के ध्यान में आती रही हैं।इस मामले में पुलिस की मनमानी का सबसे बड़ा...

DNA जांच में खामियों पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- वैज्ञानिक साक्ष्य के अभाव में भारी मन से देनी पड़ी जमानत
DNA जांच में खामियों पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- वैज्ञानिक साक्ष्य के अभाव में भारी मन से देनी पड़ी जमानत

बलात्कार और हत्या के एक गंभीर मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए उत्तर प्रदेश की फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई।हाईकोर्ट ने कहा कि पर्याप्त वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध न होने के कारण उसे भारी मन और गहरे दर्द के साथ आरोपी को जमानत देनी पड़ रही है।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने कहा कि DNA प्रोफाइल तैयार न हो पाने के पीछे पुरानी मशीनें और FSL की अधूरी आधारभूत सुविधाएं प्रमुख कारण हैं।अदालत ने टिप्पणी की कि इसके लिए किसी और को नहीं, बल्कि...

News24 के पत्रकार पर सामाजिक शांति भंग करने का आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई गिरफ्तारी पर रोक
News24 के पत्रकार पर 'सामाजिक शांति भंग' करने का आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई गिरफ्तारी पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को News24 रिपोर्टर शाहनवाज़ को गिरफ़्तारी से अंतरिम राहत दी। उन पर मुरादाबाद में FIR दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप था कि उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो रीपोस्ट करके नगर निगम की आलोचना की थी।जस्टिस विक्रम डी. चौहान और जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला की बेंच ने निर्देश दिया कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक पत्रकार के ख़िलाफ़ कोई सख़्त कार्रवाई न की जाए, बशर्ते वह जांच में सहयोग करें।बेंच ने एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट को इस मामले में निर्देश प्राप्त करने के...

नाबालिग को जेल भेजने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुडिशियल ऑफिसर से मांगा जवाब, गिरफ्तारी करने वाले पुलिसकर्मियों को किया तलब
'नाबालिग' को जेल भेजने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुडिशियल ऑफिसर से मांगा जवाब, गिरफ्तारी करने वाले पुलिसकर्मियों को किया तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चोरी के आरोप में जेल भेजे गए नाबालिग को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया और उसकी हिरासत को पहली नज़र में 'गैर-कानूनी' करार दिया।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने संबंधित जुडिशियल मजिस्ट्रेट से पर्सनल हलफनामा भी मांगा, जिसमें नाबालिग की उम्र की पुष्टि किए बिना न्यायिक हिरासत की मंज़ूरी देने के लिए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया।कोर्ट ने गौर किया कि FIR दर्ज होने के समय 17 साल से कम उम्र के नाबालिग की उम्र को नज़रअंदाज़ करने के अलावा, मजिस्ट्रेट ने इस बात...

पुलिस सुधार पर हाईकोर्ट के निर्देशों को नहीं मानते IAS अधिकारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया कौटिल्य का ज़िक्र, मामला DoPT को भेजा
पुलिस सुधार पर हाईकोर्ट के निर्देशों को नहीं मानते IAS अधिकारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया कौटिल्य का ज़िक्र, मामला DoPT को भेजा

एक अनोखे आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को सीनियर IAS अधिकारी संजय प्रसाद के व्यवहार का मामला 'डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सनल एंड ट्रेनिंग' (DoPT) को भेजा, ताकि 'कैबिनेट की नियुक्ति समिति' (ACC) भविष्य की नियुक्तियों के लिए उनकी उपयुक्तता का आकलन कर सके।यह सख्त आदेश जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने दिया। उन्होंने UP सरकार में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) के तौर पर काम कर रहे प्रसाद की कोर्ट के अधिकार को कमज़ोर करने की जानबूझकर की गई कोशिश पर नाराज़गी जताई।फटकार लगाने के लिए कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों...

ईंधन बचत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा कदम, कार-पूलिंग और हाइब्रिड सुनवाई को बढ़ावा
ईंधन बचत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा कदम, कार-पूलिंग और हाइब्रिड सुनवाई को बढ़ावा

ईंधन की खपत कम करने और संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज स्थित प्रधान पीठ और लखनऊ खंडपीठ के लिए कई मितव्ययिता (austerity) उपाय लागू किए हैं। ये कदम भारत के मुख्य न्यायाधीश के पत्र और केंद्र सरकार के कार्यालय ज्ञापन के अनुरूप उठाए गए हैं।नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री अधिकारियों को कार-पूलिंग अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। साथ ही सभी श्रेणी के कर्मचारियों से भी वाहन साझा करने और जहां संभव हो, सार्वजनिक परिवहन का अधिकतम उपयोग करने को कहा गया...

हाईकोर्ट का यूपी सीएम से आग्रह- अब समय आ गया है कि बड़े अफ़सरों को आपराधिक रूप से ज़िम्मेदार ठहराया जाए; जानिए क्यों
हाईकोर्ट का यूपी सीएम से आग्रह- अब समय आ गया है कि बड़े अफ़सरों को आपराधिक रूप से ज़िम्मेदार ठहराया जाए; जानिए क्यों

बुधवार को दिए गए एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वह इस बात को स्वीकार करें कि अब वह समय आ गया है, जब वरिष्ठ अफ़सरों और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को उनके विभागों या उनके अधीन काम करने वालों की चूकों के लिए जवाबदेह, और यहां तक कि आपराधिक रूप से भी ज़िम्मेदार ठहराया जाए।जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने कहा कि राज्य को "उच्च ज़िम्मेदारी" (Superior Responsibility) का सिद्धांत अपनाना चाहिए, जिसके तहत प्रशासनिक पदानुक्रम में वरिष्ठ अफ़सरों को जवाबदेह...

बैंक गारंटी पर अपर्याप्त स्टाम्प ड्यूटी एक ठीक होने योग्य कमी, इस आधार पर बोली खारिज करना मनमाना: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बैंक गारंटी पर अपर्याप्त स्टाम्प ड्यूटी एक ठीक होने योग्य कमी, इस आधार पर बोली खारिज करना 'मनमाना': इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने पिछले हफ़्ते यह टिप्पणी की कि बैंक गारंटी पर स्टाम्प ड्यूटी में कमी महज़ एक 'चूक' और एक 'ठीक होने योग्य कमी' है, और इसका इस्तेमाल किसी बोली लगाने वाले को बाहर करने के लिए नहीं किया जा सकता।जस्टिस शेखर बी सराफ़ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने इसके परिणामस्वरूप प्रतिवादी (पूर्वोत्तर रेलवे) द्वारा तैयार की गई वित्तीय बोली की तालिका यह देखते हुए रद्द की कि उसने याचिकाकर्ता (M/S कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड) की तकनीकी बोली को इस 'कमज़ोर' आधार पर खारिज कर दिया...

भगवा ने मारा टिप्पणी पर अफसर को मिली राहत बरकरार: हाईकोर्ट ने खारिज की यूपी सरकार की याचिका
भगवा ने मारा' टिप्पणी पर अफसर को मिली राहत बरकरार: हाईकोर्ट ने खारिज की यूपी सरकार की याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2018 के कासगंज हिंसा प्रकरण से जुड़े कथित फेसबुक पोस्ट के मामले में उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ अधिकारी रश्मि वरुण को दी गई राहत बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की याचिका खारिज की। अदालत ने उस आदेश को सही ठहराया, जिसके तहत लोक सेवा अधिकरण ने अधिकारी पर लगाई गई विभागीय सजा रद्द की थी।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई केवल समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के आधार पर की गई, जबकि उन्होंने शुरू से ही उस खबर में उनके कथित बयान को गलत...

कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार, कर्नाटक हाईकोर्ट जाने की दी छूट
कॉकरोच जनता पार्टी' के खिलाफ जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार, कर्नाटक हाईकोर्ट जाने की दी छूट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके की गतिविधियों की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभदेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर कर्नाटक के बेंगलुरु के स्थायी निवासी हैं, इसलिए उन्हें सबसे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए था।अदालत ने यह भी पाया कि मामले का उत्तर प्रदेश से कोई प्रत्यक्ष और विशेष...

जनगणना कार्य में लगाई जा सकती है LIC कर्मचारियों की ड्यूटी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
जनगणना कार्य में लगाई जा सकती है LIC कर्मचारियों की ड्यूटी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के कर्मचारियों को जनगणना कार्य के लिए गणनाकर्ता और पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।अदालत ने LIC कर्मचारियों के संगठन द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि जनगणना अधिनियम और उससे संबंधित नियम प्रशासन को ऐसे कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार प्रदान करते हैं।जस्टिस दिनेश पाठक की पीठ ने यह निर्णय उत्तर मध्य क्षेत्र बीमा कर्मचारी संघ की उस याचिका पर सुनाया, जिसमें जनगणना कार्य के लिए LIC...

गिरफ़्तारी/रिमांड के ख़िलाफ़ हैबियस कॉर्पस याचिका एक बार संज्ञान लिए जाने तक स्वीकार्य नहीं, आरोपी को नियमित ज़मानत लेनी होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
गिरफ़्तारी/रिमांड के ख़िलाफ़ हैबियस कॉर्पस याचिका एक बार संज्ञान लिए जाने तक स्वीकार्य नहीं, आरोपी को नियमित ज़मानत लेनी होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

पिछले हफ्ते दिए गए एक अहम फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब कोई सक्षम अदालत चार्जशीट पर संज्ञान ले लेती है तो कोई आरोपी अपनी गिरफ्तारी की वैधता या CrPC की धारा 167(2)/BNSS की धारा 187(2) के तहत पारित शुरुआती रिमांड आदेश को चुनौती देने वाली हेबियस कॉर्पस याचिका दायर नहीं कर सकता।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने तर्क दिया कि शुरुआती रिमांड आदेश केवल जांच के चरण के दौरान ही प्रभावी रहता है, क्योंकि संज्ञान लिए जाने के बाद इसका महत्व स्वाभाविक रूप से समाप्त...

CrPC की धारा 319 के तहत आरोपी को समन करने से पहले दर्ज किए गए सबूतों के आधार पर सज़ा नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
CrPC की धारा 319 के तहत आरोपी को समन करने से पहले दर्ज किए गए सबूतों के आधार पर सज़ा नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह फ़ैसला दिया कि किसी आरोपी की गैर-मौजूदगी में दर्ज किए गए सबूत, जिन पर CrPC की धारा 319 के तहत उसे समन करने के लिए भरोसा किया जाता है, बाद में उसकी सज़ा का आधार नहीं बन सकते।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने 2008 के एक मामले में हत्या के एक आरोपी को बरी करते हुए यह टिप्पणी की।ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता को IPC की धारा 302 (धारा 149 के साथ), धारा 307 (धारा 149 के साथ), धारा 148 और धारा 506(2) के तहत दोषी ठहराया था। उसे आजीवन कारावास की...

लोक अदालतें तलाक़ नहीं दे सकतीं, उनके पास फ़ैसला सुनाने का अधिकार क्षेत्र नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
लोक अदालतें तलाक़ नहीं दे सकतीं, उनके पास फ़ैसला सुनाने का अधिकार क्षेत्र नहीं है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी लोक अदालत या ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के पास तलाक़ का आदेश देने की कोई कानूनी क्षमता या अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि यह अधिकार पूरी तरह से नियमित सिविल और फ़ैमिली कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है।अपने 11 पन्नों के आदेश में जस्टिस शेखर बी सराफ़ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने DLSA, उन्नाव की कड़ी आलोचना की। बेंच ने DLSA पर फ़ैमिली कोर्ट के तलाक़ देने के अधिकार पर 'कब्ज़ा करने' का आरोप लगाया। DLSA ने कुछ ऐसे 'अस्पष्ट'...

सिर्फ दीवानी विवाद लंबित होने से आपराधिक मुकदमा खत्म नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सिर्फ दीवानी विवाद लंबित होने से आपराधिक मुकदमा खत्म नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले के आरोप प्रथमदृष्टया आपराधिक अपराध का खुलासा करते हैं तो केवल इस आधार पर आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती कि पक्षकारों के बीच दीवानी विवाद भी लंबित है। अदालत ने कहा कि दीवानी और आपराधिक कार्यवाही साथ-साथ चल सकती हैं।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें कुछ आरोपियों ने ट्रायल कोर्ट द्वारा उनकी आरोपमुक्ति याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के इंडियन ऑयल...

इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार के बाद प्रयागराज ADM ने मुस्लिम व्यक्ति के अपनी मर्ज़ी से हिंदू धर्म अपनाने को दी मंज़ूरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार के बाद प्रयागराज ADM ने मुस्लिम व्यक्ति के 'अपनी मर्ज़ी से' हिंदू धर्म अपनाने को दी मंज़ूरी

इस महीने की शुरुआत में इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद प्रयागराज के अपर ज़िला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) ने औपचारिक रूप से मुस्लिम व्यक्ति के धर्म परिवर्तन के आवेदन को मंज़ूरी दी। इस व्यक्ति ने 2022 में अपनी मर्ज़ी से सनातन धर्म/हिंदू धर्म अपना लिया था।संबंधित अधिकारी द्वारा 14 मई को पारित आदेश का संज्ञान लेते हुए जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की डिवीज़न बेंच ने बुधवार को उस रिट याचिका का निपटारा किया, जिसे अनिल पंडित (पहले मोहम्मद अहसान) नामक व्यक्ति ने दायर किया था। अनिल पंडित...

किशोरावस्था की सजा पासपोर्ट जारी करने में बाधा नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने
किशोरावस्था की सजा पासपोर्ट जारी करने में बाधा नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'भूल जाने के अधिकार' और 'नई शुरुआत' सिद्धांत को माना अहम

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किशोरावस्था में दर्ज दोषसिद्धि किसी व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करने से रोकने का आधार नहीं बन सकती।अदालत ने कहा कि किशोर न्याय कानून का उद्देश्य ऐसे बच्चों को “नई शुरुआत” का अवसर देना है और उन्हें समाज में बिना किसी कलंक के दोबारा स्थापित करना है।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, लखनऊ के मार्च 2021 का आदेश रद्द किया, जिसमें मोहम्मद यूनुस अंसारी का पासपोर्ट आवेदन खारिज किया गया था।पासपोर्ट अधिकारी...

कॉकरोच जनता पार्टी पर NIA-ED जांच की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल
कॉकरोच जनता पार्टी पर NIA-ED जांच की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत डिपके के खिलाफ NIAऔर प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच कराने की मांग को लेकर एक आपराधिक जनहित याचिका दाखिल की गई।यह याचिका कर्नाटक भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने दायर की। याचिका में कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े सभी सोशल मीडिया अकाउंट, पेज, चैनल, समूह और प्रोफाइल को स्थायी रूप से बंद और ब्लॉक करने की मांग भी की गई।याचिका में आरोप लगाया गया कि यह सुनियोजित डिजिटल अभियान भारत के युवाओं को भड़काने, सार्वजनिक अव्यवस्था...

नोएडा मजदूर प्रदर्शन: गिरफ्तार पत्रकार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
नोएडा मजदूर प्रदर्शन: गिरफ्तार पत्रकार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा मजदूर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार पत्रकार सत्यम वर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया।जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस देवेंद्र सिंह-प्रथम की पीठ ने सत्यम वर्मा की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट एस.एफ.ए. नकवी तथा अधिवक्ता शाश्वत आनंद और अंकुर आजाद की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया।अदालत ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय दिया। साथ ही याचिकाकर्ता को उसके...

चार दीवारों के भीतर, सार्वजनिक शांति में कोई खलल नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित गोहत्या के मामले में NSA हिरासत क्यों रद्द की?
चार दीवारों के भीतर, सार्वजनिक शांति में कोई खलल नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित गोहत्या के मामले में NSA हिरासत क्यों रद्द की?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को गोहत्या के आरोपी दो लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (NSA) के तहत जारी हिरासत आदेश रद्द किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कथित घटना घर की चारदीवारी के भीतर हुई थी, न कि किसी सार्वजनिक स्थान पर।जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार-II की खंडपीठ ने इस प्रकार इशम उर्फ ​​इसम और समीर द्वारा दायर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिकाओं को स्वीकार किया और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल हिरासत से रिहा किया जाए।कोर्ट ने टिप्पणी की कि कथित घटना,...