इलाहाबाद हाईकोट

पेड़ काटने की अनुमति से इनकार से पहले सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पेड़ काटने की अनुमति से इनकार से पहले सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976 की धारा 5 के तहत यदि सक्षम प्राधिकारी किसी व्यक्ति के पेड़ काटने या हटाने के आवेदन को खारिज करना चाहता है, तो उससे पहले आवेदक को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने कहा कि धारा 5(2) स्पष्ट रूप से यह प्रावधान करती है कि बिना सुनवाई का अवसर दिए अनुमति को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि अधिकारी धारा 5(1) के तहत प्राप्त रिपोर्ट से...

पेपर लीक होने पर परीक्षा पूरी कराने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश
पेपर लीक होने पर परीक्षा पूरी कराने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का स्पष्ट आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए कहा कि यदि किसी परीक्षा में पेपर लीक हो जाए और उससे अभ्यर्थियों को लाभ मिलने की आशंका हो तो उम्मीदवार राज्य को परीक्षा प्रक्रिया पूरी कराने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि चयन का कोई अटूट अधिकार नहीं होता और यदि परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठ जाए तो उसे रद्द करना उचित है।कोर्ट ने कहा,“परीक्षा की निष्पक्षता सर्वोपरि है और किसी भी स्थिति में इससे समझौता नहीं किया जा सकता।”मामला उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा सहायक...

अनुशासनात्मक कार्रवाई की समय-सीमा कोर्ट खुद बढ़ा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला
अनुशासनात्मक कार्रवाई की समय-सीमा कोर्ट खुद बढ़ा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि गंभीर कदाचार के मामलों में सजा से बचने की स्थिति न बने, इसके लिए अदालत अपने आप (स्वतः संज्ञान लेते हुए) अनुशासनात्मक कार्यवाही की तय समय-सीमा बढ़ा सकती है।जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि यदि नियोक्ता समय बढ़ाने के लिए कोर्ट नहीं भी जाता है तब भी अदालत मामले की सुनवाई करते समय परिस्थितियों का आकलन कर सकती है और आवश्यक होने पर समय-सीमा बढ़ा सकती है।कोर्ट ने कहा,“ऐसे मामलों में जहां कार्यवाही तय समय में पूरी...

RTI Act के तहत जानकारी देने में जानबूझकर देरी या बाधा हो तभी लगेगा जुर्माना: इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
RTI Act के तहत जानकारी देने में जानबूझकर देरी या बाधा हो तभी लगेगा जुर्माना: इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार कानून (RTI Act) को लेकर एक अहम फैसला देते हुए कहा कि केवल देरी या कमी के आधार पर दंड नहीं लगाया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक यह साबित न हो कि सूचना देने में जानबूझकर बाधा डाली गई या दुर्भावना से देरी की गई तब तक दंड नहीं लगाया जा सकता।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कहा कि RTI Act, 2005 की धारा 20 के तहत दंड लगाने से पहले आयोग को यह संतोष करना जरूरी है कि संबंधित अधिकारी ने बिना उचित कारण के सूचना देने से इनकार किया, गलत...

रजिस्ट्रार, सब-रजिस्ट्रार कोर्ट नहीं, रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत कार्यवाही में लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
रजिस्ट्रार, सब-रजिस्ट्रार 'कोर्ट' नहीं, रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत कार्यवाही में लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्ट्रार और सब-रजिस्ट्रार 'कोर्ट' नहीं हैं। इसलिए रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत होने वाली कार्यवाहियों पर लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू नहीं होगी।जस्टिस इरशाद अली ने फैसला सुनाया:“रजिस्ट्रार, एडिशनल रजिस्ट्रार या सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय को 'कोर्ट' नहीं माना जा सकता। तदनुसार, रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत होने वाली कार्यवाही में लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 में निहित प्रावधान लागू नहीं होगा। लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 स्पष्ट रूप से समय सीमा (Limitation...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के हत्या के प्रयास के मामले में व्यक्ति की सज़ा बरकरार रखने के लिए पीड़ित पत्नी की गवाही पर भरोसा किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के हत्या के प्रयास के मामले में व्यक्ति की सज़ा बरकरार रखने के लिए पीड़ित पत्नी की गवाही पर भरोसा किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक व्यक्ति की सज़ा और 7 साल की कठोर कारावास बरकरार रखी। इस व्यक्ति ने फ़रवरी 1983 में अपने वैवाहिक घर के अंदर अपनी पत्नी को गोली मार दी थी, क्योंकि मोटरसाइकिल की दहेज की मांग पूरी नहीं हुई।1985 में पति द्वारा दायर की गई आपराधिक अपील खारिज करते हुए कोर्ट ने घायल पत्नी की गवाही पर बहुत ज़्यादा भरोसा किया और उसे एक "बेहतरीन गवाह" बताया, जिसकी गवाही पूरी तरह से भरोसेमंद थी।पति की सज़ा बरकरार रखने वाले अपने 16-पृष्ठ के आदेश में जस्टिस अब्दुल शाहिद की बेंच ने पत्नी की...

CrPC की धारा 482 याचिका NIA कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज से इनकार के खिलाफ स्वीकार्य नहीं, भले ही राज्य पुलिस ने शेड्यूल अपराध की जांच की हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
CrPC की धारा 482 याचिका NIA कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज से इनकार के खिलाफ स्वीकार्य नहीं, भले ही राज्य पुलिस ने शेड्यूल अपराध की जांच की हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) एक्ट के तहत एक स्पेशल कोर्ट द्वारा डिस्चार्ज से इनकार करने वाले आदेश के खिलाफ CrPC की धारा 482 या BNSS की धारा 528 के तहत दायर याचिका स्वीकार्य नहीं है, भले ही राज्य पुलिस ने शेड्यूल अपराध की जांच की हो।कोर्ट ने माना कि ऐसे आदेशों के खिलाफ उपाय NIA Act, 2008 की धारा 21(1) के तहत एक वैधानिक अपील दायर करना है।इस प्रकार, जस्टिस बृज राज सिंह की बेंच ने मोहम्मद फैजान और 2 अन्य द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने स्पेशल जज...

पश्चिमी यूपी में गैंग मौत के बिस्तर पर पड़े लोगों का इंश्योरेंस करवा रहा है, पुलिस सहयोग नहीं कर रही: HDFC Life ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बताया
पश्चिमी यूपी में 'गैंग' मौत के बिस्तर पर पड़े लोगों का इंश्योरेंस करवा रहा है, पुलिस सहयोग नहीं कर रही: HDFC Life ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बताया

HDFC Life Insurance Company ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक संगठित गैंग काम कर रहा है, जो उन लोगों के लिए जीवन बीमा पॉलिसी हासिल करने में कामयाब हो जाता है, जो पहले से ही मौत के बिस्तर पर पड़े हैं या जिनकी मौत हो चुकी है।कंपनी ने यह भी बताया कि शिकायतें मिलने के बावजूद, इनमें से ज़्यादातर मामलों में पुलिस निष्पक्ष जांच करके दोषियों को सज़ा दिलाने में सहयोग नहीं करती है।यह बात जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच के सामने रखी गई, जिसने हाल ही में बिचौलियों के ज़रिए...

कथित तौर पर 45 साल पहले हुई बिक्री विलेख के आधार पर म्यूटेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
कथित तौर पर 45 साल पहले हुई बिक्री विलेख के आधार पर म्यूटेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भले ही राजस्व रिकॉर्ड में म्यूटेशन (नाम परिवर्तन) के लिए कोई समय सीमा निर्धारित न हो, लेकिन कथित तौर पर 45 साल पहले हुई किसी बिक्री विलेख (Sale Deed) के आधार पर इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।जस्टिस चंद्र कुमार राय ने टिप्पणी की:"यह बताना महत्वपूर्ण है कि निजी प्रतिवादियों ने 45 साल से भी अधिक समय बाद म्यूटेशन के लिए आवेदन दायर किया। यह आवेदन उस सेल डीड के आधार पर किया गया, जिसके बारे में दावा है कि वह उनके पक्ष में निष्पादित किया गया। इसकी अनुमति नहीं दी जानी...

केवल एक ही वारिस हो और कोई प्रतिस्पर्धी दावा न हो, वहां उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए ज़मानत की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
केवल एक ही वारिस हो और कोई प्रतिस्पर्धी दावा न हो, वहां उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के लिए ज़मानत की आवश्यकता नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 375 के तहत उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने के लिए ज़मानत की शर्त हर मामले में बिना सोचे-समझे नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने कहा कि जिन मामलों में केवल एक ही वारिस हो, या किसी एक वारिस को प्रमाण पत्र जारी करने पर कोई आपत्ति न हो, वहां ऐसी शर्तें नहीं लगाई जानी चाहिए।भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 372 उन आवेदनों के बारे में बताती है, जो उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए ज़िला जज के समक्ष किए जा सकते हैं।...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी वकील के दफ़्तर में डिजिटल काम को बेहतर बनाने के लिए टेक-सेवी युवा वकीलों को रखने का सुझाव दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी वकील के दफ़्तर में डिजिटल काम को बेहतर बनाने के लिए टेक-सेवी युवा वकीलों को रखने का सुझाव दिया

डिजिटल काम को बेहतर बनाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार को सरकारी वकील के दफ़्तर और हाईकोर्ट में जॉइंट डायरेक्टर, प्रॉसिक्यूशन के दफ़्तर में टेक-सेवी युवा वकीलों और नए लॉ ग्रेजुएट्स को मानद रिसर्च एसोसिएट के तौर पर रखना चाहिए।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने यह सुझाव दिया। बेंच ने कहा कि सरकारी वकील के दफ़्तर में डिजिटलीकरण के प्रयासों को तेज़ करना और कर्मचारियों की भारी कमी को तुरंत दूर करना समय की ज़रूरत है।कोर्ट असल में एक ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई कर रहा...

अधिकारियों की देरी, किसान कल्याण दावे को खारिज करने का आधार नहीं; लाभार्थी की दुर्दशा के प्रति उदासीनता अस्वीकार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अधिकारियों की देरी, किसान कल्याण दावे को खारिज करने का आधार नहीं; लाभार्थी की दुर्दशा के प्रति उदासीनता अस्वीकार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट

राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं के तहत एक मृत किसान के परिवार द्वारा मांगी गई वित्तीय सहायता से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण किसी कल्याणकारी योजना के तहत ऐसी सहायता पाने के लिए किसान की विधवा को बार-बार कोर्ट के चक्कर लगवाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने टिप्पणी की,“इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई, जिसमें किसी कल्याणकारी योजना के लाभार्थी की दुर्दशा के...

संपत्ति के मालिकाना हक/टाइटल विवादों को सुलझाने के लिए सीनियर सिटिज़न्स एक्ट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
संपत्ति के मालिकाना हक/टाइटल विवादों को सुलझाने के लिए सीनियर सिटिज़न्स एक्ट का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिर दोहराया कि 'माता-पिता और सीनियर सिटीजन का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' और उसके तहत बनाए गए नियमों का इस्तेमाल उन तीसरे पक्षों के बीच संपत्ति के टाइटल और मालिकाना हक के विवादों को सुलझाने के लिए नहीं किया जा सकता, जिनका सीनियर सिटीजन से कोई संबंध नहीं है।कोर्ट ने कहा कि यह एक्ट सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए है, जिसे उनकी संपत्ति के वारिसों को पूरा करना होता है; यह संपत्ति के टाइटल और मालिकाना हक का फैसला करने के लिए नहीं है। संपत्ति के टाइटल और मालिकाना...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने POCSO केस में बरी करने के फ़ैसले में पीड़ित की चोटों की रिपोर्ट पर चर्चा न करने के लिए ट्रायल जज से सफ़ाई मांगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने POCSO केस में बरी करने के फ़ैसले में पीड़ित की चोटों की रिपोर्ट पर चर्चा न करने के लिए ट्रायल जज से सफ़ाई मांगी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस हफ़्ते की शुरुआत में एक ट्रायल कोर्ट के जज के इस काम पर सख़्त नाराज़गी जताई कि उन्होंने POCSO Act के एक मामले में आरोपी को बरी करने वाले फ़ैसले में नाबालिग पीड़ित को लगी चोटों का ज़िक्र और उन पर चर्चा नहीं की।इस चूक को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने पीठासीन अधिकारी से पीड़ित से जुड़ी मेडिको-लीगल रिपोर्ट पर विचार न करने के बारे में सफ़ाई मांगी।जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस अजय कुमार-II की बेंच ने अपने आदेश में कहा,"हमें यह देखकर दुख हुआ कि ट्रायल जज ने अपने फ़ैसले में...

दुर्घटना में 5 माह या उससे अधिक के अजन्मे बच्चे की मृत्यु पर भी रेलवे मुआवजा देने का जिम्मेदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
दुर्घटना में 5 माह या उससे अधिक के अजन्मे बच्चे की मृत्यु पर भी रेलवे मुआवजा देने का जिम्मेदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह निर्णय दिया कि माँ के गर्भ में पाँच महीने या उससे अधिक आयु का अजन्मा बच्चा (भ्रूण) एक जीवित बच्चे के समान माना जाएगा और ऐसे भ्रूण की आकस्मिक मृत्यु के लिए रेलवे अलग से मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी होगा, जो माँ की मृत्यु के लिए दिए गए मुआवजे से पृथक होगा।जस्टिस प्रशांत कुमार की पीठ ने लखनऊ स्थित रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ दायर अपील को स्वीकार करते हुए भ्रूण की मृत्यु के लिए दावेदार को अतिरिक्त ₹8,00,000/- का मुआवजा प्रदान किया।यह उल्लेखनीय है कि ट्रिब्यूनल...

ब्रिटिश नागरिकता विवाद | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय के 2019 के राहुल गांधी को दिए नोटिस के रिकॉर्ड की जांच की, केंद्र को पक्षकार बनाने की अनुमति दी
ब्रिटिश नागरिकता विवाद | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गृह मंत्रालय के 2019 के राहुल गांधी को दिए नोटिस के रिकॉर्ड की जांच की, केंद्र को पक्षकार बनाने की अनुमति दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने गुरुवार को गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा पेश किए गए उन आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच की, जो 2019 में कांग्रेस (Congress) नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी को जारी किए गए एक नोटिस से संबंधित थे। इस नोटिस में उनकी नागरिकता के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया।ये रिकॉर्ड जस्टिस राजीव सिंह की बेंच के सामने 9 मार्च, 2026 के पिछले आदेश के पालन में रखे गए।पिछला आदेश भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर एक याचिका पर पारित किया गया।...

अगर पुलिस दबाव डाले तो अवमानना ​​का मामला भेजें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेटों को दी सलाह
अगर पुलिस 'दबाव डाले' तो अवमानना ​​का मामला भेजें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेटों को दी सलाह

हाल ही में दिए गए एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब मजिस्ट्रेट कुछ खास 'असुविधाजनक' मामलों की जांच के आदेश देते हैं तो कभी-कभी बड़े पुलिस अधिकारी उन पर 'दबाव डालने' की कोशिश करते हैं।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने मजिस्ट्रेटों को साफ तौर पर सलाह दी कि अगर उन्हें किसी पुलिस अधिकारी की तरफ से ऐसी कोई शर्मिंदगी या दबाव महसूस हो, तो वे कभी भी हाईकोर्ट में अवमानना ​​का मामला भेज सकते हैं।बेंच ने अपने आदेश में कहा,"मजिस्ट्रेट को ज़रूरी आदेश देने में हिचकिचाना...

अनुच्छेद 25 पूजा के लिए इकट्ठा होने के अधिकार की रक्षा करता है, निजी जगहों पर प्रार्थनाओं पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अनुच्छेद 25 पूजा के लिए इकट्ठा होने के अधिकार की रक्षा करता है, निजी जगहों पर प्रार्थनाओं पर कोई रोक नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 25 देश में हर धार्मिक संप्रदाय को पूजा के लिए इकट्ठा होने के अधिकार की रक्षा करता है, लेकिन यह प्रार्थना की आड़ में एक धर्म द्वारा दूसरे धर्म को उकसाने को कोई सुरक्षा नहीं देता।साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी व्यक्ति की निजी जगह पर की जाने वाली प्रार्थनाओं या धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर कोई रुकावट या रोक नहीं हो सकती, चाहे वह किसी भी धर्म या संप्रदाय का हो।ये टिप्पणियां जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच...

सरकारी स्कूल टीचर की नियुक्ति से पहले की दूसरी शादी दुराचार नहीं, बल्कि योग्यता की जड़ पर ही वार है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सरकारी स्कूल टीचर की नियुक्ति से पहले की दूसरी शादी दुराचार नहीं, बल्कि योग्यता की जड़ पर ही वार है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि कोई महिला, जिसने सरकारी स्कूल टीचर के तौर पर नियुक्त होने से पहले दूसरी शादी (Bigamous Marriage) की थी, उसे इस आधार पर यूपी सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली और यूपी सरकारी कर्मचारी (अनुशासन और अपील) नियमावली के तहत दुराचार के लिए दंडित नहीं किया जा सकता।हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि वह उम्मीदवार, जिसने 2009 में ऐसे व्यक्ति से शादी की, जिसकी पहली शादी अभी भी कायम थी, वह 'उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा शिक्षक सेवा नियमावली, 1981' के नियम 12 के तहत टीचर के तौर पर...