इलाहाबाद हाईकोट

पतंग उड़ाने के पीक सीज़न के दौरान चाइनीज़ मांझे के खिलाफ़ मशीनरी एक्टिवेट करने के लिए राज्य सरकार बाध्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पतंग उड़ाने के पीक सीज़न के दौरान 'चाइनीज़ मांझे' के खिलाफ़ मशीनरी एक्टिवेट करने के लिए राज्य सरकार बाध्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते कहा कि राज्य सरकार हाईकोर्ट द्वारा पहले से जारी निर्देशों का पालन करने और यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है कि जब पतंग उड़ाने का सीज़न अपने चरम पर हो तो मशीनरी को एक्टिवेट किया जाए ताकि चाइनीज़ मांझे का निर्माण, इस्तेमाल और बिक्री न हो, जिससे इंसानों और पक्षियों की जान को खतरा न हो।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की बेंच ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें जौनपुर ज़िले में सिंथेटिक पतंग के धागे पर रोक...

राज्य बिना मान्यता वाले मदरसे को बंद नहीं कर सकता, लेकिन सरकारी ग्रांट देने से मना कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
राज्य बिना मान्यता वाले मदरसे को बंद नहीं कर सकता, लेकिन सरकारी ग्रांट देने से मना कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो डिस्ट्रिक्ट माइनॉरिटी वेलफेयर ऑफिसर को उत्तर प्रदेश राज्य में बिना मान्यता वाले मदरसे को बंद करने का अधिकार दे।याचिकाकर्ता मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रज़ा की मैनेजमेंट कमेटी ने श्रावस्ती के डिस्ट्रिक्ट माइनॉरिटी वेलफेयर ऑफिसर के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसमें याचिकाकर्ता मदरसे को बिना मान्यता प्राप्त होने के कारण बंद करने का आदेश दिया गया।याचिकाकर्ता के वकील ने उत्तर प्रदेश गैर-सरकारी अरबी और फारसी मदरसा मान्यता,...

POCSO Act | चोट की रिपोर्ट न होने पर पीड़ित को मुआवज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
POCSO Act | चोट की रिपोर्ट न होने पर पीड़ित को मुआवज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष नियम, 2015 के तहत मुआवज़ा तब दिया जाना चाहिए, जब FIR में प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफ़ेंसेस एक्ट, 2012 (POCSO Act) की धारा 4 के तहत अपराध का ज़िक्र हो। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि चोट की रिपोर्ट में किसी चोट का ज़िक्र नहीं है, मुआवज़ा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस शेखर बी. सर्राफ और जस्टिस मनजीव शुक्ला की बेंच ने कहा,“इस स्कीम के तहत पेनिट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट की शिकार को मुआवज़ा इसलिए नहीं दिया...

परीक्षा में बैठने का अधिकार जीवन के अधिकार के समान: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पोर्टल की गड़बड़ी के कारण छूटी स्टूडेंट के लिए विशेष परीक्षा का आदेश दिया
परीक्षा में बैठने का अधिकार जीवन के अधिकार के समान: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पोर्टल की गड़बड़ी के कारण छूटी स्टूडेंट के लिए विशेष परीक्षा का आदेश दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि परीक्षा में बैठने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार के समान है।यह कहते हुए कि किसी स्टूडेंट का भविष्य "तकनीकी खामियों" या प्रशासनिक सुस्ती के कारण खतरे में नहीं डाला जा सकता, जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने प्रयागराज स्थित यूनिवर्सिटी को B.Sc. की स्टूडेंट के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया, जिसे एडमिट कार्ड नहीं दिया गया, क्योंकि यूनिवर्सिटी पोर्टल उसके एडमिशन रिकॉर्ड को अपडेट नहीं कर पाया।संक्षेप में मामलाराज्जू...

झूठी FIR दर्ज कराने वालों पर पुलिस के लिए मुकदमा चलाना अनिवार्य, पालन न करने पर IOs को अवमानना ​​का सामना करना पड़ेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
झूठी FIR दर्ज कराने वालों पर पुलिस के लिए मुकदमा चलाना अनिवार्य, पालन न करने पर IOs को अवमानना ​​का सामना करना पड़ेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट

एक महत्वपूर्ण आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य की पुलिस मशीनरी को सख्त निर्देश दिया कि वे उन व्यक्तियों/सूचना देने वालों के खिलाफ अनिवार्य रूप से मुकदमा शुरू करें, जो झूठी या दुर्भावनापूर्ण फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराते हैं।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की बेंच ने कहा कि अगर जांच में पता चलता है कि FIR झूठी जानकारी पर आधारित थी तो IO "कानूनी रूप से बाध्य" है कि वह BNSS की धारा 215(1)(a) (CrPC की धारा 195(1)(a) के बराबर) के तहत सूचना देने वाले के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज करे।कोर्ट ने...

UP Revenue Code 2006: हाईकोर्ट ने कृषि भूमि में महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों पर राज्य के बेहद अधूरे हलफनामे पर फटकार लगाई
UP Revenue Code 2006: हाईकोर्ट ने कृषि भूमि में महिलाओं के उत्तराधिकार अधिकारों पर राज्य के 'बेहद अधूरे' हलफनामे पर फटकार लगाई

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार पर यूपी-रेवेन्यू कोड, 2006 (UP Revenue Code 2006) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर टालमटोल वाले और "बेहद अधूरे" जवाब के लिए कड़ी फटकार लगाई।5 याचिकाएं 2006 के कोड की धारा 108, 109 और 110 को चुनौती देती हैं, यह तर्क देते हुए कि ये प्रावधान कृषि भूमि के उत्तराधिकार में महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं।12 जनवरी, 2026 के एक कड़े आदेश में जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने राज्य के जवाबी हलफनामे पर...

स्थायी कार्यात्मक दिव्यांगता वाला नाबालिग कुशल श्रमिक के रूप में मुआवजे का हकदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
स्थायी कार्यात्मक दिव्यांगता वाला नाबालिग 'कुशल श्रमिक' के रूप में मुआवजे का हकदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि दुर्घटना के बाद 100% स्थायी कार्यात्मक दिव्यांगता से पीड़ित बेरोज़गार नाबालिग को भी मोटर वाहन अधिनियम के तहत “कुशल श्रमिक (Skilled Workman)” के रूप में मुआवजा दिया जाना चाहिए।जस्टिस संदीप जैन ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा दिए गए मुआवजे को बढ़ाने संबंधी अपील पर सुनवाई करते हुए कहा—“भले ही यह मान लिया जाए कि दुर्घटना के समय दावा करने वाला केवल 16 वर्ष का था और किसी भी प्रकार की आय अर्जित नहीं कर रहा था, फिर भी उसे कुशल...

वसीयत के आधार पर नहीं मिल सकती अनुकंपा नियुक्ति, मृतक पर निर्भरता ही निर्णायक: इलाहाबाद हाइकोर्ट
वसीयत के आधार पर नहीं मिल सकती अनुकंपा नियुक्ति, मृतक पर निर्भरता ही निर्णायक: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का लाभ मृत सरकारी कर्मचारी की वसीयत (विल) के आधार पर नहीं दिया जा सकता।हाइकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश मृतक आश्रित नियम, 1974 के तहत अनुकंपा नियुक्ति का आधार केवल यह होता है कि आवेदक मृतक कर्मचारी पर वास्तव में निर्भर था या नहीं, न कि यह कि वसीयत किसके पक्ष में बनाई गई।जस्टिस मनीष माथुर ने अपने फैसले में कहा कि नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत मृतक की वसीयत के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता तय की जाए।उन्होंने कहा कि पंजीकृत...

क्या DM के बिना गैंग चार्ट मंजूर कर सकती है पुलिस? कमिश्नरेट सिस्टम में असीमित विवेकाधिकार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, ACS को तलब किया
क्या DM के बिना गैंग चार्ट मंजूर कर सकती है पुलिस? कमिश्नरेट सिस्टम में 'असीमित विवेकाधिकार' पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, ACS को तलब किया

उत्तर प्रदेश में यूपी गैंगस्टर्स एवं असामाजिक गतिविधि (निवारण) अधिनियम, 1986 के क्रियान्वयन को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए अपर मुख्य सचिव (गृह) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।जस्टिस विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने गृह विभाग के शीर्ष अधिकारी को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली वाले जिलों में गैंग चार्ट को स्वीकृति देने से पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को संयुक्त बैठक से बाहर क्यों रखा गया, जबकि गैर-कमिश्नरेट जिलों में यह अनिवार्य है।कोर्ट ने तीखी...

जमानत आदेश में कोई यात्रा प्रतिबंध नहीं: हाईकोर्ट ने डांसर सपना चौधरी को पासपोर्ट NOC देने का दिया निर्देश
जमानत आदेश में कोई यात्रा प्रतिबंध नहीं: हाईकोर्ट ने डांसर सपना चौधरी को पासपोर्ट NOC देने का दिया निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने पिछले हफ्ते ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें लोकप्रिय एक्ट्रेस-डांसर और स्टेज परफॉर्मर सपना चौधरी को उनके पासपोर्ट के रिन्यूअल के लिए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) देने से इनकार कर दिया गया।CrPC की धारा 482 के तहत दायर उनकी याचिका स्वीकार करते हुए जस्टिस पंकज भाटिया की बेंच ने ट्रायल कोर्ट को उन्हें रिन्यूअल के लिए NOC जारी करने का निर्देश दिया।कोर्ट ने कहा कि चौधरी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले में बेल ऑर्डर में देश छोड़ने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया...

रोहिंग्या फंडिंग सिंडिकेट | इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कथित मास्टरमाइंड को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, जांच अधिकारी के लापरवाह रवैये पर जताई कड़ी नाराज़गी
रोहिंग्या फंडिंग सिंडिकेट | इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कथित मास्टरमाइंड को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार, जांच अधिकारी के 'लापरवाह' रवैये पर जताई कड़ी नाराज़गी

इलाहाबाद हाइकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने शुक्रवार को ऐसे व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया, जिस पर बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अन्य कथित राष्ट्रविरोधी तत्वों को अवैध एवं अनधिकृत सहायता देकर भारत में बसाने तथा अशांति और वैमनस्य फैलाने के लिए सिंडिकेट का “मुख्य सरगना” होने का आरोप है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता के बावजूद आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए आवश्यक कदम न उठाने पर जांच एजेंसी, विशेषकर जांच अधिकारी (आईओ), के लापरवाह और...

पत्नी की ज़्यादा क्वालिफिकेशन गुज़ारा भत्ता में रुकावट नहीं, सालों तक घरेलू काम के बाद नौकरी पर लौटना मुश्किल: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पत्नी की ज़्यादा क्वालिफिकेशन गुज़ारा भत्ता में रुकावट नहीं, सालों तक घरेलू काम के बाद नौकरी पर लौटना मुश्किल: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी पत्नी को सिर्फ़ इसलिए CrPC की धारा 125 के तहत गुज़ारा भत्ता देने से मना नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह बहुत ज़्यादा पढ़ी-लिखी है या उसके पास वोकेशनल स्किल्स हैं, क्योंकि इससे यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि याचिकाकर्ता नंबर 1/पत्नी पैसे कमाने के लिए काम कर रही है।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने यह भी कहा कि पति का अपनी पत्नी का कानूनी तौर पर भरण-पोषण करने की ज़िम्मेदारी से बचने के लिए सिर्फ़ उसकी क्वालिफिकेशन पर निर्भर रहना गलत है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी...

S.48 UP Municipality Act | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगरपालिका अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया बताते हुए जारी किए दिशा-निर्देश
S.48 UP Municipality Act | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'नगरपालिका' अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया बताते हुए जारी किए दिशा-निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने खास प्रक्रिया के दिशा-निर्देश दिए , जिनका पालन राज्य सरकार को उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 48 के तहत नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष को हटाने से पहले करना होगा।कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ऐसा हटाना सिर्फ शुरुआती जांच और कारण बताओ नोटिस के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि आरोपों को तय करने और गवाहों से जिरह सहित एक "पूरी जांच" ज़रूरी है।जस्टिस शेखर बी. सर्राफ और जस्टिस मनजीव शुक्ला की बेंच ने निम्नलिखित सिद्धांत बताए, जिनका पालन राज्य को धारा 48(2-A) के...

एडवोकेट की अनुपस्थिति में आपराधिक अपील खारिज नहीं की जा सकती, एमिकस क्यूरी नियुक्त करना अनिवार्य: इलाहाबाद हाइकोर्ट
एडवोकेट की अनुपस्थिति में आपराधिक अपील खारिज नहीं की जा सकती, एमिकस क्यूरी नियुक्त करना अनिवार्य: इलाहाबाद हाइकोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि किसी आपराधिक अपील को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि अभियुक्त की ओर से वकील उपस्थित नहीं हुआ। हाइकोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में अपीलीय न्यायालय का कर्तव्य है कि वह अभियुक्त के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त करे और अपील का निर्णय मामले के गुण-दोष के आधार पर करे, न कि अनुपस्थिति के कारण।जस्टिस अब्दुल शाहिद की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि अभियुक्त के वकील की गैर-हाजिरी के कारण आपराधिक अपील को डिफॉल्ट में खारिज करना भारतीय नागरिक सुरक्षा...

व्यापक भ्रष्टाचार परेशान करने वाला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ DOB में 11 साल की हेरफेर के लिए FIR का आदेश दिया
'व्यापक भ्रष्टाचार परेशान करने वाला': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ DOB में 11 साल की 'हेरफेर' के लिए FIR का आदेश दिया

एक व्यक्ति द्वारा जन्मतिथि में हेरफेर से जुड़े कथित जालसाजी और धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वह उस व्यक्ति और संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करें।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की बेंच ने इस स्थिति को 'चौंकाने वाला' बताया और टिप्पणी की कि दस्तावेजों में हेरफेर की हद "व्यापक भ्रष्टाचार" का सीधा नतीजा है।संक्षेप में मामलायाचिकाकर्ता (शिव शंकर पाल) ने पासपोर्ट अथॉरिटी को अपने...

CCTV फुटेज सिर्फ 2 महीने रखने वाला यूपी डीजीपी का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की प्रथम दृष्टया अवमानना: हाईकोर्ट
CCTV फुटेज सिर्फ 2 महीने रखने वाला यूपी डीजीपी का आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की 'प्रथम दृष्टया अवमानना': हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा जारी उस परिपत्र पर गंभीर सवाल उठाए, जिसमें राज्य के सभी थानों में CCTV फुटेज केवल 2 से 2.5 महीने तक सुरक्षित रखने का प्रावधान किया गया है। अदालत ने इसे अत्यंत अजीब बताते हुए कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले Paramvir Singh Saini बनाम बलजीत सिंह (2020) के प्रथमदृष्टया अवमानना जैसा प्रतीत होता है, जिसमें कम से कम 6 महीने से 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस...

तबादला नीति केवल मार्गदर्शक, कानूनन लागू नहीं; राज्य को किसी कर्मचारी का तबादला करने का निर्देश नहीं दे सकती अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट
तबादला नीति केवल मार्गदर्शक, कानूनन लागू नहीं; राज्य को किसी कर्मचारी का तबादला करने का निर्देश नहीं दे सकती अदालत: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यह स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा जारी की गई तबादला नीति केवल मार्गदर्शन के लिए होती है। इसे अदालत के माध्यम से लागू नहीं कराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी का स्थानांतरण और पदस्थापना पूरी तरह से राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायालय राज्य को किसी विशेष कर्मचारी को किसी विशेष स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश नहीं दे सकता।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस मंजिव शुक्ला की खंडपीठ ने बुधवार को एक रिट याचिका खारिज करते हुए...

ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड साक्ष्य के आधार पर ही जोड़े जा सकते हैं अतिरिक्त आरोपी, केस डायरी सामग्री अप्रासंगिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
ट्रायल के दौरान रिकॉर्ड साक्ष्य के आधार पर ही जोड़े जा सकते हैं अतिरिक्त आरोपी, केस डायरी सामग्री अप्रासंगिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 319 के तहत किसी अतिरिक्त आरोपी को तलब करने का आधार केवल वही साक्ष्य हो सकता है, जो मुकदमे के दौरान न्यायालय के समक्ष रिकॉर्ड किया गया हो। चार्जशीट या केस डायरी में उपलब्ध सामग्री को साक्ष्य नहीं माना जा सकता। इनके आधार पर किसी व्यक्ति को अतिरिक्त आरोपी के रूप में समन नहीं किया जा सकता।यह टिप्पणी जस्टिस चवन प्रकाश की एकलपीठ ने दहेज मृत्यु के एक मामले में दाखिल आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की। याचिका के माध्यम से...

अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील निजी पक्ष की ओर से पेश हो सकता है या नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विधि सचिव से मांगी रिपोर्ट
अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील निजी पक्ष की ओर से पेश हो सकता है या नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विधि सचिव से मांगी रिपोर्ट

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण सवाल पर राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या अतिरिक्त मुख्य सरकारी वकील किसी ऐसे मामले में निजी पक्ष की ओर से पैरवी कर सकता है, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य स्वयं एक पक्षकार हो। इस संबंध में अदालत ने प्रमुख सचिव (विधि) एवं विधिक स्मरणकर्ता से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।जस्टिस दिवेश चंद्र समंत की एकल पीठ ने यह निर्देश उस समय दिया, जब वर्ष 2018 से लंबित एक आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हो रही थी। यह याचिका पत्नी द्वारा फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए...