इलाहाबाद हाईकोट
UP Goonda Act: सिर्फ दो मुकदमों से किसी को गुंडा नहीं कहा जा सकता- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल एक या दो आपराधिक मामलों के आधार पर किसी व्यक्ति को 'गुंडा' घोषित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसा करना व्यक्ति और उसके परिवार की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचाता है।जस्टिस संदीप जैन की एकल पीठ ने यह टिप्पणी याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें छह महीने के बाहरीकरण आदेश को चुनौती दी गई। यह आदेश बुलंदशहर के एडिशनल जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) द्वारा पारित किया गया, जिसे मेरठ मंडल के आयुक्त ने भी बरकरार रखा था।प्रशासन ने...
NCLT आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, इलाहाबाद में दाखिल मामलों की जांच अब वहीं होगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NCLT के प्रधान पीठ नई दिल्ली के उस आदेश पर आंशिक रोक लगाई, जिसमें इलाहाबाद पीठ में दाखिल याचिकाओं और आवेदनों की संयुक्त जांच का निर्देश दिया गया था।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने केंद्र सरकार के वकील द्वारा निर्देश लेने के लिए चार सप्ताह का समय मांगे जाने के बीच यह स्पष्ट किया कि इलाहाबाद में दाखिल याचिकाओं की जांच केवल वहीं की रजिस्ट्री द्वारा की जाएगी।यह मामला कंपनी लॉ बार एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में 27...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने थारू समुदाय को दी राहत, कहा- वन अधिकार अधिनियम मौजूदा अधिकारों को मान्यता देता है, पिछले अदालती आदेशों को रद्द करता है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अधिकारी वन अधिकार अधिनियम, 2006 के लागू होने से पहले जारी किए गए अदालती आदेशों पर आँख मूंदकर भरोसा करके जंगल में रहने वालों के मौजूदा कानूनी अधिकारों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने इस तरह लखीमपुर की ज़िला स्तरीय समिति द्वारा 2021 में पारित आदेश रद्द किया। इस आदेश में समिति ने 'थारू' समुदाय के 107 सदस्यों के वन अधिकारों - विशेष रूप से अपनी आजीविका के लिए छोटे वन उत्पादों को इकट्ठा करने और उनका उपयोग...
गौवध 'जीवन की सामान्य गति' को बाधित करता है, स्वतः ही हिंसक प्रतिक्रियाएं भड़काती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NSA के तहत हिरासत को सही ठहराया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), 1980 के तहत व्यक्ति की हिरासत को सही ठहराया। इस व्यक्ति पर 2025 में होली के समय के आसपास जंगल में एक गाय और दो बछड़ों की हत्या करने का आरोप है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि गाय की हत्या स्वतः ही तीव्र भावनाएं और हिंसक प्रतिक्रियाएं भड़काती है, क्योंकि इससे समाज के एक बड़े वर्ग की धार्मिक भावनाओं को स्पष्ट रूप से ठेस पहुंचती है।कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे कृत्य के समाज में तत्काल और व्यापक परिणाम...
अगर आप पत्नी और बच्चों का खर्च नहीं उठा सकते तो शादी ही न करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खराब आर्थिक हालत का हवाला देकर पति की अर्जी खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि जो पुरुष यह महसूस करते हैं कि अगर शादीशुदा ज़िंदगी में खटास आ जाए तो वे पत्नी और बच्चों का खर्च नहीं उठा पाएंगे, उन्हें तो शुरू में शादी ही नहीं करनी चाहिए।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की बेंच ने आगे कहा कि कोई भी पुरुष अपनी पत्नी के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी से बचने के लिए अपनी खराब आर्थिक हालत का बहाना नहीं बना सकता।हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया,"एक बार जब कोई पुरुष किसी महिला से शादी कर लेता है तो कानून के तहत उसका भरण-पोषण करना उसकी...
राहुल गांधी नागरिकता विवाद: 'अदालत की छवि धूमिल'- सोशल मीडिया पोस्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार, जज ने खुद को किया अलग
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के जस्टिस सुभाष विद्यार्थी ने सोमवार को भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर द्वारा दायर उस याचिका की सुनवाई से खुद को अलग (recuse) कर लिया, जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित ब्रिटिश नागरिकता को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। यह निर्णय तब आया जब अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा सोशल मीडिया और मीडिया में दिए गए बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई, जिन्हें अदालत ने अपनी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया।सुनवाई के दौरान जस्टिस विद्यार्थी ने मौखिक रूप से...
'बीमारी की पर्ची' विवाद में वकील को राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹20K का जुर्माना माफ किया, माफी के बाद प्रतिकूल टिप्पणियां हटाईं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक वकील के ख़िलाफ़ पहले की गई अपनी प्रतिकूल टिप्पणियां हटा दीं। इस वकील ने उसी दिन किसी दूसरी कोर्ट में अन्य मामले में पेश होते हुए इस कोर्ट में 'बीमारी की पर्ची' भेजकर कोर्ट को धोखा देने की कोशिश की थी।वकील द्वारा दी गई बिना शर्त मौखिक माफी स्वीकार करते हुए जस्टिस गौतम चौधरी की बेंच ने 24 मार्च, 2026 को पारित आदेश में वकील पर लगाए गए ₹20,000/- के जुर्माने को भी माफ किया।हाईकोर्ट के 17 अप्रैल के आदेश में कहा गया,"वर्तमान संशोधन आवेदन के समर्थन में दायर हलफनामे...
'रेडियो' की मांग पर उत्पीड़न का कोई सबूत नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1982 के आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पति को बरी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 1982 के अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि यह साबित नहीं हो पाया कि पति ने पीड़ित पत्नी को रेडियो की मांग को लेकर किसी भी तरह से परेशान किया, जिसके कारण कथित तौर पर उसने आत्महत्या कर ली थी।जस्टिस संजीव कुमार की पीठ ने अपने 18-पृष्ठ के फैसले के मुख्य भाग में यह टिप्पणी की,"...अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है कि अपीलकर्ता ने मृतक को किसी भी तरह से परेशान किया और घटना से ठीक पहले उसने कोई ऐसा...
किसी संस्था या ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने से पहले कारण और सामग्री के साथ नोटिस देना जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी संस्था या ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने से पहले केवल शो कॉज नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस नोटिस में ब्लैकलिस्टिंग के लिए आवश्यक कारण और संबंधित सामग्री (grounds and materials) का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभ्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि“ब्लैकलिस्टिंग आदेश से पहले शो कॉज नोटिस देना जरूरी शर्त है, लेकिन इसके साथ ही उस नोटिस में प्रस्तावित कार्रवाई के आधार और सामग्री का उल्लेख भी अनिवार्य है।”मामले में याचिकाकर्ता ने...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस्ती के SP से मांगा जवाब, कानून की समझ पर उठाए सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को बस्ती के पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. यशवीर सिंह के हलफनामे पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा। एसपी ने अपने हलफनामे में कहा था कि कुछ अग्रिम जमानत (anticipatory bail) याचिकाएं मजिस्ट्रेट अदालत में लंबित हैं, जिस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा,“यदि किसी जिले के एसपी को यह नहीं पता कि मजिस्ट्रेट के पास अग्रिम जमानत पर सुनवाई का अधिकार नहीं है, तो उनके कानून के बुनियादी ज्ञान पर सवाल उठता है।”कोर्ट ने...
Land Acquisition Act, 1894 | रेफरेंस कोर्ट कलेक्टर का अवार्ड रद्द नहीं कर सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत रेफरेंस कोर्ट को कलेक्टर द्वारा दिए गए मुआवजे का अवार्ड रद्द करने या कलेक्टर द्वारा नए सिरे से निर्धारण किए जाने का आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा केवल एक अपीलीय कोर्ट ही कर सकती है।यह देखते हुए कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 अपने आप में एक पूर्ण संहिता है, जस्टिस संदीप जैन ने कहा,“भूमि अधिग्रहण अधिनियम में केवल यह उल्लेख है कि यदि भूमि मालिक कलेक्टर द्वारा दिए गए मुआवजे की राशि से संतुष्ट नहीं है तो वह...
क्या संभावित आरोपी को सुने जाने का अधिकार है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR का निर्देश देने वाले आदेश पर लगाई रोक
एक अहम घटनाक्रम में इलाहाबाद हाई कोर्ट (लखनऊ बेंच) ने BJP कार्यकर्ता की याचिका पर अपना अंतिम आदेश रोक दिया। इस याचिका में लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। यह मांग उन दावों के संबंध में की गई कि राहुल गांधी एक ब्रिटिश नागरिक हैं।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने उस फैसले के अमल को प्रभावी रूप से टाल दिया, जो शुक्रवार को ओपन कोर्ट में पहले ही सुनाया जा चुका था। उस फैसले में गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया। बेंच ने इस आदेश को...
राजस्थान हाईकोर्ट ने कथित अवैध नियुक्ति के बावजूद बहाली सही ठहराई, बताया यह कारण
राजस्थान हाईकोर्ट ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी की बहाली को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। इस कर्मचारी पर आरोप था कि उसकी नियुक्ति अवैध रूप से की गई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित कर्मचारी की सेवा समाप्त करने के लिए औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक था, जिसका पालन नहीं किया गया।जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण की पीठ ग्राम पंचायत थाटेड के सरपंच द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में लेबर कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें प्रतिवादी...
ब्रिटिश नागरिकता विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का दिया आदेश
एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने आज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने और जांच करने का निर्देश दिया। यह आदेश एक भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ता की याचिका के संबंध में दिया गया, जिसमें राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता का आरोप लगाया गया।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की बेंच ने इस तरह लखनऊ कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने से इनकार किया गया था।गौरतलब है कि इस साल जनवरी में लखनऊ की ACJM अदालत ने गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय...
पिता द्वारा बच्चे की कस्टडी ज़बरदस्ती लेना 'गैर-कानूनी हिरासत' नहीं, जब तक कि यह कोर्ट के आदेश का उल्लंघन न हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि एक पिता, जो एक हिंदू नाबालिग का स्वाभाविक अभिभावक होता है, पर यह आरोप नहीं लगाया जा सकता कि उसने किसी बच्चे को 'गैर-कानूनी हिरासत' में रखा है, भले ही उसने बच्चे की कस्टडी माँ से ज़बरदस्ती ले ली हो; बशर्ते कि उसका यह काम कोर्ट के किसी आदेश का उल्लंघन न हो।जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने इस आधार पर माँ की बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसके अलग रह रहे पति (प्रतिवादी)...
हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट का साक्ष्य मूल्य हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट का साक्ष्य मूल्य हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने फैसला दिया:“अनुशासनात्मक कार्यवाही में, जिस सवाल की जांच की जानी है, उसका मकसद यह पता लगाना होता है कि क्या कर्मचारी किसी ऐसे कदाचार का दोषी है, जिसके लिए उसे दंडित किया जाना चाहिए। सबूत का पैमाना संभावनाओं की प्रबलता पर आधारित होता है। यह हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा, जो कर्मचारी को दंडित करने के लिए पर्याप्त हों।...
जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के तहत जारी जन्म प्रमाण पत्र तब तक मान्य है, जब तक उसे रद्द न कर दिया जाए या उसमें जालसाज़ी साबित न हो जाए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के तहत जारी जन्म प्रमाण पत्र तब तक वैध और मान्य है, जब तक उसे रद्द न कर दिया जाए या उसमें जालसाज़ी साबित न हो जाए।कक्षा VI में दाखिले से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने कहा:“जब तक कोई दस्तावेज़, जो किसी वैधानिक प्रावधान के तहत जारी किया गया, या तो रद्द न कर दिया जाए या उसमें जालसाज़ी का कोई तत्व साबित न हो जाए, तब तक उसका संबंधित अधिकारियों पर बाध्यकारी प्रभाव रहेगा। संबंधित अधिकारियों के अधिकार...
UP Gangsters Act | 'कानून को छोटा समझते हैं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनिवार्य संयुक्त बैठक में शामिल न होने पर DM से स्पष्टीकरण मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में मिर्ज़ापुर के ज़िलाधिकारी (DM) पवन कुमार गंगवार को यूपी गैंगस्टर नियम, 2021 के तहत 'गैंग चार्ट' को मंज़ूरी देने के लिए ज़रूरी अनिवार्य संयुक्त बैठक में शामिल न होने पर कड़ी फटकार लगाई।उनकी अनुपस्थिति का गंभीर संज्ञान लेते हुए जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की पीठ ने टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया, अधिकारी "कानून को छोटा समझते हैं। इसकी बिल्कुल भी परवाह नहीं करते, जैसा कि अक्सर पढ़े-लिखे आम लोगों के साथ होता है।"कोर्ट ने अब इस मामले पर उनसे व्यक्तिगत...
'युवाओं का दूसरों पर धर्म थोपना परेशान करने वाला चलन है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया धर्मांतरण विरोधी FIR में स्कूली छात्रा को राहत देने से इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कक्षा 12 की दो छात्राओं के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार किया। इन छात्राओं पर यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपनी सहपाठी को बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया और उसे इस्लाम में धर्मांतरित करने की कोशिश की।अपने 11-पृष्ठ के आदेश में जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने युवाओं द्वारा दूसरों पर अपना धर्म/मान्यता 'थोपने' के 'परेशान करने वाले चलन' पर भी संज्ञान लिया। यह एक ऐसी प्रवृत्ति है, जिसे यूपी गैर-कानूनी धर्मांतरण निषेध...
Advocates Act | इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला: सिर्फ़ रजिस्टर्ड वकील ही कर सकते हैं वकालत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ तौर पर कहा कि कोई भी व्यक्ति, भले ही उसके पास पावर ऑफ़ अटॉर्नी हो, एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए मुक़दमे लड़ने वालों की ओर से और उनकी तरफ़ से एक वकील या अटॉर्नी के तौर पर अधिकार के तौर पर पेश होकर बहस नहीं कर सकता।एडवोकेट्स एक्ट 1961 की धारा 29 और 33 का ज़िक्र करते हुए जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने साफ़ तौर पर कहा कि सिर्फ़ "रजिस्टर्ड वकील" ही किसी दूसरे व्यक्ति की ओर से कोर्ट के सामने पेश होकर बहस कर सकते हैं।बेंच ने आगे कहा कि हालांकि कोई भी...


















