इलाहाबाद हाईकोट

Noida Bus Fire Kills 9 | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया, स्लीपर बस परमिट और सुरक्षा जांच पर जानकारी मांगी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा/ग्रेटर नोएडा इलाके में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत का स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से राज्य में चलने वाली स्लीपर बसों के परमिट, सुरक्षा मानकों और निरीक्षण के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की बेंच ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अन्य बातों के अलावा, पिछले 2 वर्षों में जारी स्लीपर-बस परमिट का विवरण, ऐसे परमिट देने से पहले जांचे गए मानक, यूपी में किए गए निरीक्षण और इसी तरह की...

Sultanpur Bar Election | हाईकोर्ट ने बैलेट बॉक्स 'लूटने' के बाद 'ब्लैक शीप' की पहचान के लिए दिया जांच का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुल्तानपुर के ज़िला जज को निर्देश दिया कि वह सुल्तानपुर बार एसोसिएशन चुनाव की गिनती के दौरान बैलेट बॉक्स लूटने में शामिल वकीलों की पहचान करने के लिए जांच करें। इस घटना ने चुनाव प्रक्रिया में बाधा डाली थी।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने ज़िला जज को निर्देश दिया कि वह CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध सबूतों की जांच करें और उन लोगों या वकीलों की पहचान करें, जो इस घटना में शामिल हो सकते हैं।कोर्ट ने सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) को भी निर्देश दिया कि वह इस घटना के...

'बेहद अफ़सोसनाक': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने MBBS के लिए PwBD योग्यता को लेकर बार-बार हो रहे मुकदमों पर चिंता जताई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'राइट्स ऑफ़ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज़ एक्ट, 2016' की धारा 57 के तहत पहले से सर्टिफ़ाइड विकलांगता के प्रतिशत को, MBBS कोर्स में बेंचमार्क विकलांगता वाले लोगों के एडमिशन के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन की गाइडलाइंस के तहत बने मेडिकल असेसमेंट बोर्ड द्वारा दोबारा तय नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा कि बोर्ड का काम सिर्फ़ कैंडिडेट की कोर्स करने की क्षमता (फ़ंक्शनल कॉम्पिटेंसी) का आकलन करना है, और विकलांगता को दोबारा मापना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।इस एक्ट की धारा 56 उचित सरकार...

बिना सूचना के कार्रवाई न करने पर पुलिस अधिकारी को लापरवाही का दोषी नहीं ठहरा सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी पुलिस अधिकारी को केवल इसलिए लापरवाह नहीं ठहराया जा सकता कि उसने कार्रवाई नहीं की, जबकि उसके पास कार्रवाई की जरूरत बताने वाली कोई सूचना या खुफिया जानकारी ही उपलब्ध नहीं थी।जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने कहा,“पुलिस सूचना के आधार पर कार्रवाई करती है। कार्रवाई के लिए सूचना का अभाव होने पर कार्रवाई न करना लापरवाही नहीं कहा जा सकता।” कोर्ट ने यह टिप्पणी उस पुलिस अधिकारी की याचिका मंजूर करते हुए की, जिसे बाद में विस्फोटक जमा किए जाने और उससे...

PNB में नौकरी का अनुभव सरकारी कार्यालय का अनुभव नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में हासिल किया गया कार्य अनुभव किसी भर्ती विज्ञापन में निर्धारित 'सरकारी कार्यालय' के अनुभव के बराबर नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत किसी संस्था का 'राज्य' की परिभाषा में आना मात्र इस आधार पर उसे 'सरकारी कार्यालय' नहीं बना देता।जस्टिस दिनेश पाठक की पीठ ने यह टिप्पणी सत्य प्रकाश की याचिका खारिज करते हुए की। सत्य प्रकाश ने उच्च शिक्षा विभाग में रजिस्ट्रार के पद के लिए अपनी उम्मीदवारी खारिज किए जाने को चुनौती...

जब्त वाहन पुलिस छापेमारी के लिए थाने से निकाला, तीन दिन बाद हादसे में महिला की मौत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने DGP को जांच के आदेश दिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आबकारी मामले में जब्त किए गए वाहन को पुलिस हिरासत से निकालकर छापेमारी में इस्तेमाल किए जाने और इसके कुछ दिन बाद जानलेवा हादसे में शामिल होने की परिस्थितियों की स्वतंत्र और गोपनीय जांच का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के DGP को आठ सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।जस्टिस अनिल कुमार की पीठ ने कहा कि जब्त वाहन को पुलिस हिरासत से बाहर निकालने और उसके बाद हुए हादसे की परिस्थितियां गंभीर सवाल खड़े करती हैं। हालांकि अदालत ने वाहन की...

अपनी गलती के कारण अंतिम चरण में टेंडर रद्द नहीं कर सकती सरकार, EPBG की राशि बढ़ाकर गलती सुधारी जा सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि टेंडर जारी करने वाली सरकारी अथॉरिटी अपनी ही गलती के कारण अंतिम चरण में पहुंच चुके टेंडर रद्द नहीं कर सकती। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि परफॉर्मेंस बैंक गारंटी (ePBG) सफल बोलीदाता की पात्रता या उसकी रैंकिंग तय करने वाली शर्त नहीं है। इसलिए टेंडर दस्तावेज में ePBG की राशि गलत दर्ज हो जाने की स्थिति में उसे ठीक किया जा सकता है और इसके लिए पूरी निविदा प्रक्रिया दोबारा शुरू करना जरूरी नहीं है।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि अपनी ही गलती...

13 वर्षीय रेप पीड़िता की प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन के आदेश के बावजूद C-Section, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच के आदेश दिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 13 वर्षीय रेप पीड़िता की प्रेग्नेंसी टर्मिनेशन के अपने आदेश के बावजूद C-Section किए जाने के मामले में जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया संबंधित डॉक्टरों को आदेश का पालन न करने के लिए “जानबूझकर लापरवाही” का दोषी माना।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से जांच कर दो सप्ताह में सीलबंद रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।मेडिकल बोर्ड ने पीड़िता की गर्भावस्था करीब 29 सप्ताह 2...

पति के पर्सनल लोन की वसूली के लिए विधवा के खाते से ₹17.30 लाख काटना प्रथम दृष्टया गलत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने SBI को रिफंड का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एक विधवा के बैंक खाते से काटे गए ₹17,29,999 वापस करने का अंतरिम निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया कहा कि बैंक मृतक पति के पर्सनल लोन की बकाया राशि की वसूली के लिए विधवा को मिले लाइफ इंश्योरेंस के पैसे से रकम नहीं काट सकता।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ विधवा की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने SBI की कर्नलगंज शाखा, प्रयागराज में अपने सेविंग अकाउंट से की गई कटौती को चुनौती दी थी।पति की मौत के बाद...

'द वायर' के एडिटर को अमेरिका यात्रा की मिली अनुमति, हाईकोर्ट ने कहा- FIR पर सुनवाई अभी शुरू होना बाकी
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ खंडपीठ) ने आज 'द वायर' के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन को उनके निर्धारित कार्यक्रम के सिलसिले में अमेरिका के न्यूयॉर्क की यात्रा करने की अनुमति दी।वरदराजन 2020 की एक रिपोर्ट और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संबंधित ट्वीट से उत्पन्न आपराधिक मामलों में अग्रिम जमानत पर हैं।जस्टिस चंद्र धारी सिंह की पीठ ने अदालत के 15 मई, 2020 के अग्रिम जमानत आदेश के निर्देशानुसार अपना पासपोर्ट सरेंडर करने में विफल रहने के लिए वरदराजन की बिना शर्त और अयोग्य माफी स्वीकार कर ली और...

3 बच्चों की हत्या के मामले में मां और कथित प्रेमी बरी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- 8 वर्षीय बच्चे की गवाही में 'ट्यूटोरिंग' के संकेत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन बच्चों की हत्या के मामले में मौत की सजा पाने वाली मां प्रियंका और उसके कथित प्रेमी आशीष उर्फ डैनी को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष दोनों के खिलाफ अपराध को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए दोनों को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया, यदि वे किसी अन्य मामले में वांछित न हों।क्या था मामला?मामला औरैया का है, जहां 27 जून 2024 को सेंगुर नदी से तीन बच्चों—माधव...

सिर्फ मोबाइल की लोकेशन से साबित नहीं होती साथ मौजूदगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला और उसके कथित प्रेमी को हत्या के मामले में बरी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति की हत्या के मामले में दोषी ठहराई गई एक महिला और उसके कथित प्रेमी को बरी किया। हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की ऐसी पूरी कड़ी स्थापित करने में विफल रहा, जो दोनों आरोपियों को हत्या से जोड़ सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल मोबाइल फोन के कॉल विवरण के आधार पर यह साबित नहीं किया जा सकता कि दो लोग घटना के समय एक ही स्थान पर मौजूद थे।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट का 14 नवंबर 2025 का फैसला रद्द किया।...

सिर्फ 30 दिन की अग्रिम जमानत क्यों? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल जज से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों को महज 30 दिनों के लिए अग्रिम जमानत देने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाते हुए संबंधित पीठासीन अधिकारी से उचित स्पष्टीकरण मांगा। हाईकोर्ट ने कहा कि इतने कम समय के लिए सुरक्षा देने का कोई स्पष्ट कारण आदेश में दर्ज नहीं किया गया।जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच सुरेश यादव और दो अन्य की ओर से दाखिल BNSS की धारा 528 के तहत याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में आजमगढ़ की एडिशनल सेशंस कोर्ट नंबर-1 के 23 दिसंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई।ट्रायल कोर्ट ने तीनों...

तीन बच्चों की हत्या में मौत की सजा पाने वाली मां बरी, हाईकोर्ट ने 8 वर्षीय बच्चे की गवाही को माना 'ट्यूटर्ड'
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन बच्चों की हत्या के मामले में मौत की सजा पाने वाली मां प्रियंका और उसके कथित प्रेमी आशीष उर्फ दैनी को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष दोनों की दोषसिद्धि को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।कोर्ट ने विशेष रूप से 8 वर्षीय बाल गवाह सोनू की गवाही में ऐसे गंभीर विरोधाभास पाए, जिन्हें दूर नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि बच्चे की गवाही में स्पष्ट रूप से किसी के द्वारा सिखाए जाने के संकेत दिखाई देते हैं और केवल ऐसी गवाही के आधार पर दोषसिद्धि करना सुरक्षित नहीं...

कर्मचारी से उन आरोपों को गलत साबित करने की उम्मीद नहीं की जा सकती, जिन्हें प्रबंधन साबित ही नहीं कर पाया: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच में सबसे पहले प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि वह कर्मचारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उन आरोपों के आधारभूत तथ्यों को साबित करे। कर्मचारी से ऐसे आरोपों को गलत साबित करने की अपेक्षा नहीं की जा सकती, जिन्हें प्रबंधन स्वयं साबित नहीं कर पाया।जस्टिस इरशाद अली ने पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारी की बर्खास्तगी का आदेश रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोप इस आधार पर बनाए गए कि वह बैंक में सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में काम कर रहा...

राज्य अपनाए तभी लागू होंगी ऋषि पाल सिंह मामले की गाइडलाइन, राजस्व अधिकारियों की जांच न होने मात्र से बेदखली आदेश रद्द नहीं होगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत होने वाली कार्यवाही में ऋषि पाल सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में बताई गई गाइडलाइन तब तक अनिवार्य नहीं हैं, जब तक राज्य सरकार उन्हें औपचारिक रूप से लागू नहीं करती। केवल इन गाइडलाइन का पालन न किए जाने के आधार पर बेदखली के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती।जस्टिस करुणेश सिंह पवार ने शाहबान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में समन्वय पीठ के फैसले पर भरोसा करते हुए कहा कि धारा 67 के तहत कार्यवाही उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित तौर पर नकली लॉ डिग्री के मामले में FIR का सामना कर रहे वकील को अग्रिम ज़मानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित तौर पर नकली लॉ डिग्री के मामले में FIR का सामना कर रहे वकील को अग्रिम ज़मानत दी। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इस बात से कि यूनिवर्सिटी से डिग्री 'बिना वेरिफ़ाई हुए' (Unverified) वापस आ गई, शुरुआती स्तर पर यह साबित नहीं होता कि दस्तावेज़ जाली है।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की बेंच ने यह आदेश गौरव ब्रजवासी द्वारा दायर अग्रिम ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए दिया। यह अर्ज़ी धोखाधड़ी और जालसाज़ी (BNS के तहत) के अपराधों के लिए दर्ज FIR के सिलसिले में दायर की गई।यह FIR तब दर्ज की गई...

Oudh Bar Elections | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिसर में पोस्टर लगाने, खाना बांटने और जुलूस निकालने पर लगाई रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवध बार एसोसिएशन के 2026-27 के चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को निर्देश दिया कि वे चुनाव के सिलसिले में हाई कोर्ट परिसर के अंदर पोस्टर या स्टिकर न लगाएं, जुलूस न निकालें और खाने-पीने की चीजें न बांटें।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने उम्मीदवारों को हाईकोर्ट परिसर के अंदर और कोर्ट परिसर के बाहर 100 मीटर के दायरे में बार के सदस्यों को हैंडबिल और पैम्फलेट बांटने से भी रोक दिया।ये निर्देश WPIL नंबर 177/2026 में पहले दिए गए आदेश में बदलाव की मांग करने वाली एक...

सब्सिडी पर PG मेडिकल पढ़ाई के बाद सरकारी सेवा बांड से नहीं बच सकते डॉक्टर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काउंसलिंग का मौका देने का दिया निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी संस्थान में रियायती दर पर पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल शिक्षा हासिल करने वाले डॉक्टर केवल इस आधार पर अनिवार्य सरकारी सेवा बांड से मुक्त नहीं हो सकते कि पढ़ाई पूरी होने के बाद सरकार ने उन्हें सेवा के लिए नियुक्ति देने में कुछ प्रशासनिक देरी की।हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अनिवार्य सरकारी सेवा के लिए निर्धारित काउंसलिंग में डॉक्टर को शामिल होने का अवसर देना जरूरी है। जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने संजय गांधी स्नातकोत्तर...

पुलिस भर्ती फॉर्म में लंबित मुकदमे की जानकारी न देना अपने आप में गलत घोषणा नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया चयन रद्द करने का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पुलिस भर्ती के आवेदन पत्र में अभ्यर्थी से केवल यह पूछा गया हो कि क्या उसे किसी अदालत ने दोषी ठहराया और लंबित आपराधिक मामले की जानकारी देने के लिए कोई अलग कॉलम या सवाल न हो, तो केवल लंबित मुकदमे का खुलासा नहीं करने के आधार पर अभ्यर्थी को गलत घोषणा करने वाला या जानबूझकर तथ्य छिपाने वाला नहीं माना जा सकता।जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी ने कहा कि अभ्यर्थी से किसी तथ्य का स्पष्ट रूप से खुलासा करने के लिए पूछा ही नहीं गया हो तो आवेदन के समय उस तथ्य की जानकारी न देना अपने आप...
