इलाहाबाद हाईकोट
सिर्फ़ संसद ही एससी लिस्ट में बदलाव कर सकती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निषाद और केवट को 'माझवार' जाति का पर्यायवाची मानने की याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को याचिका खारिज की। इस याचिका में निषाद, कश्यप, केवट, मल्लाह और बिंद समुदायों को 'माझवार' जाति का पर्यायवाची या सामान्य नाम मानने का निर्देश देने की मांग की गई। माझवार जाति उत्तर प्रदेश में पहले से ही अधिसूचित अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) है।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि न तो राज्य सरकारों और न ही अदालतों के पास मौजूदा अनुसूचित जाति की लिस्ट में बदलाव करने, उसमें फेरबदल करने या उनके लिए 'पर्यायवाची' तय करने का अधिकार...
पंचनामा रिपोर्ट पर गवाह के हस्ताक्षर न होने से उसकी गवाही खारिज नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1998 के एक चर्चित हत्या मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर किसी प्रत्यक्षदर्शी गवाह की गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता कि उसके हस्ताक्षर पंचनामा रिपोर्ट या अन्य पुलिस दस्तावेजों पर नहीं हैं।जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस अजय कुमार-द्वितीय की खंडपीठ ने कहा कि कानून में कहीं भी यह अनिवार्य नहीं है कि पंचनामा रिपोर्ट में FIR का विवरण, आरोपियों के नाम, प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के नाम या उनके बयानों का सार दर्ज...
9 साल जेल में बिताने के बाद रेप आरोपी को राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 8 साल की पीड़िता के बयान में विरोधाभास का हवाला देते हुए किया बरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति को बरी किया, जिसने 8 साल की बच्ची के साथ रेप और POCSO Act के तहत अपराध करने के आरोप में 9 साल से ज़्यादा जेल में बिताए।नाबालिग पीड़िता के बयान में विरोधाभास और बदलाव, उसके पिता के व्यवहार और मामले की पुष्टि करने वाले मेडिकल सबूतों की कमी को देखते हुए जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की बेंच ने ट्रायल कोर्ट के 2019 के उस फैसले को रद्द किया, जिसमें आरोपी को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।बेंच ने अपने फैसले में कहा,"पुष्टि करने वाले ठोस...
राम मंदिर चंदा चोरी विवाद: जांच की मांग वाली याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई से हाईकोर्ट का इनकार
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और कीमती वस्तुओं के कथित गबन के आरोपों की जांच की मांग करने वाली दो जनहित याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया।जस्टिस पंकज भाटिया और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की अवकाशकालीन खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि मामले में तत्काल सुनवाई की कोई विशेष आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार पहले ही जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर चुकी है।पहली जनहित याचिका वकील मोहित अशोक ने दायर की। इसमें मंदिर में प्राप्त नकद, सोना और...
CrPC की धारा 200 और 202 के तहत मौखिक बयान प्रोटेस्ट पिटीशन में ज़रूरी बातों की कमी को पूरा नहीं कर सकते, जिससे आरोप पर शक पैदा होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
CrPC की धारा 200 और 202 के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा की जाने वाली जांच के दायरे पर एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रोटेस्ट पिटीशन में छूटी हुई ज़रूरी बातें आमतौर पर बाद में शिकायतकर्ता और गवाहों के मौखिक बयानों से नहीं जोड़ी जा सकतीं।बेंच ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा जांच/पूछताछ के दौरान पहली बार ऐसी बातें सामने लाना एक बड़ा बदलाव माना जाता है और इससे आरोप की सच्चाई पर "गंभीर संदेह" पैदा होता है।जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने हत्या के मामले में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन...
हालातों की पूरी कड़ी के बिना सिर्फ़ 'आखिरी बार साथ देखे जाने' के आधार पर सज़ा नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1986 के मर्डर केस में आरोपी को बरी किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 1986 के मर्डर केस में उम्रकैद की सज़ा पाए एक व्यक्ति (अपील करने वाले अकेले जीवित व्यक्ति) को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि "आखिरी बार साथ देखे जाने" की थ्योरी "बहुत कमज़ोर सबूत" है और सिर्फ़ इसके आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने कहा कि अदालतों को यह पक्का करना चाहिए कि 'हालात से जुड़े सबूत' (circumstantial evidence) और घटनाओं की कड़ी इस तरह पूरी हो कि वे सिर्फ़ आरोपी के दोषी होने की ओर इशारा करें, और आरोपी के...
प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य से अपराध साबित हो जाए तो मकसद का महत्व कम हो जाता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी अपराध की घटना प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की विश्वसनीय गवाही से साबित हो जाती है तो केवल इस आधार पर अभियोजन का मामला खारिज नहीं किया जा सकता कि अपराध का मकसद सिद्ध नहीं हुआ या उसके बारे में कुछ संदेह है।जस्टिस रजनीश कुमार और जस्टिस जफीर अहमद की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए वर्ष 2015 में बाराबंकी में एक प्रमुख आश्रम प्रमुख की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए हरेराम चौधरी की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी। अभियोजन के अनुसार, घटना 15 और 16 मई 2015 की...
नाबालिग से दुष्कर्म मामलों में जमानत सुनवाई पीड़ित की गैरहाजिरी में भी हो सकती है, यदि उसे नोटिस दिया गया हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 483(2) की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया। अदालत ने कहा कि नाबालिग से दुष्कर्म जैसे मामलों में जमानत अर्जी पर सुनवाई केवल इसलिए नहीं रोकी जा सकती, क्योंकि पीड़ित या शिकायतकर्ता अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, बशर्ते उसे सुनवाई की सूचना विधिवत दे दी गई हो।जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की एकलपीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य शिकायतकर्ता को सुनवाई का अवसर देना है। इसके बाद अदालत में उपस्थित होना या न होना उसकी अपनी इच्छा पर निर्भर करता...
पत्नी को जिंदा जलाकर दरवाजा बाहर से बंद करना हत्या की मंशा का स्पष्ट प्रमाण: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरकरार रखी दोषसिद्धि
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर ऐसी चोट पहुंचाई हो जो स्वाभाविक रूप से मृत्यु का कारण बन सकती है, तो केवल इस आधार पर हत्या का अपराध कम नहीं हो जाता कि पीड़ित की मौत कुछ दिनों बाद संक्रमण (सेप्टीसीमिया) के कारण हुई।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने आठ माह की गर्भवती पत्नी को मिट्टी का तेल डालकर जिंदा जलाने वाले पति की हत्या के मामले में दोषसिद्धि को बरकरार रखा।हालांकि, अदालत ने सुधारात्मक न्याय के सिद्धांत को ध्यान में...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहुंचा अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी का मामला, याचिका में CBI जांच की मांग
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान के फंड (जिसमें पैसे, सोना और चांदी शामिल हैं) की कथित "हेराफेरी" की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से स्वतंत्र, विश्वसनीय और तय समय-सीमा के भीतर जांच कराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई।वकील मोहित अशोक द्वारा दायर इस याचिका में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खातों का व्यापक "स्पेशल फ़ोरेंसिक ऑडिट" कराने की भी मांग की गई।राष्ट्रीय दैनिक 'दैनिक...
वकीलों की 8 दिन की हड़ताल अवैध और अनुचित, बार पदाधिकारियों को अवमानना नोटिस: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के विरोध में स्थानीय वकीलों द्वारा की गई 8 दिन की हड़ताल को "अवैध और अनुचित" करार दिया है। कोर्ट ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ भड़काऊ वीडियो प्रसारित करने तथा वकीलों में प्लास्टिक की लाठियां बांटने की घटनाओं पर भी कड़ी नाराजगी जताई।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ और लखनऊ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की...
हाईस्कूल पास नहीं होने पर सेवा पुस्तिका में दर्ज जन्मतिथि ही मानी जाएगी सही: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी कर्मचारी ने सरकारी सेवा में प्रवेश के समय हाईस्कूल या समकक्ष परीक्षा पास नहीं की थी, तो उसकी सेवा पुस्तिका (Service Book) में दर्ज जन्मतिथि ही सभी उद्देश्यों के लिए सही मानी जाएगी।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने उत्तर प्रदेश भर्ती सेवा (जन्मतिथि निर्धारण) नियमावली, 1974 के नियम 2 का हवाला देते हुए कहा कि सेवा में नियुक्ति के समय दर्ज जन्मतिथि को ही सही माना जाएगा और बाद में उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता।मामला हरदुआगंज थर्मल पावर प्लांट, अलीगढ़ में कार्यरत एक...
'प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट में चौंकाने वाले मामले': हाईकोर्ट ने BNSS के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन की शक्तियों के गलत इस्तेमाल पर उठाए सवाल
BNSS के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन के प्रावधानों के गलत इस्तेमाल पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि प्रयागराज और गाजियाबाद जैसे जिलों में पुलिस कमिश्नरों को दी गई मजिस्ट्रेट वाली शक्तियों का "पूरी तरह से गलत इस्तेमाल" हो रहा है।इस स्थिति को "चौंकाने वाला" बताते हुए जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने यूपी सरकार को आदेश दिया कि वह एक व्यक्ति को ₹2,00,000 का मुआवजा दे। इस व्यक्ति को शांति भंग करने के कथित आरोप में BNSS के प्रिवेंटिव डिटेंशन प्रावधानों...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी कीं गाइडलाइंस: गैर-कानूनी प्रिवेंटिव डिटेंशन के लिए मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों से वसूला जाएगा मुआवज़ा
एक अहम फ़ैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह उन नागरिकों को ₹25,000 प्रति दिन का मुआवज़ा दे, जिन्हें BNSS के तहत शांति भंग करने के आरोप में प्रिवेंटिव डिटेंशन के प्रावधानों के तहत 24 घंटे से ज़्यादा समय तक गैर-कानूनी रूप से हिरासत में रखा गया।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने आगे निर्देश दिया कि यह मुआवज़ा सीधे दोषी मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारियों की सैलरी से वसूला जाना चाहिए।इसके अलावा, बेंच ने आदेश दिया कि जो मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी इस चूक के...
गैर-कानूनी हिरासत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया 25 हज़ार का मुआवजा, कहा- पुलिस को लगता है कि उनके गलत कामों पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पुलिस अधिकारी लगातार नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, यह सोचकर कि उनके गलत कामों पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा। उन्हें लगता है कि हज़ारों उल्लंघनों में से शायद ही कोई नागरिक अपने अधिकारों को लागू करवाने और उन्हें जवाबदेह ठहराने के लिए आगे आएगा।इस कड़ी टिप्पणी के साथ जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने एक व्यक्ति को 25,000 रुपये का अंतरिम मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जिसे सिर्फ़ एक घरेलू झगड़े के कारण 24 घंटे तक पुलिस हिरासत (लॉकअप) में...
पैगंबर मोहम्मद के नाम पर भीड़ को उकसाया: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा के 'मुख्य साज़िशकर्ता' की ज़मानत अर्ज़ी खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सितंबर 2025 की बरेली हिंसा के मामले में इत्तेफ़ाक मिल्लत काउंसिल (IMC) के अध्यक्ष तौकीर रज़ा खान की ज़मानत अर्ज़ी खारिज की।खान पर लगे आरोपों पर विचार करते हुए कोर्ट ने कहा कि खान "मुख्य साज़िशकर्ता" हैं, जिन्होंने पैगंबर मोहम्मद के नाम पर एक उग्र भीड़ को भड़काया। उन्हें अच्छी तरह पता था कि भीड़ आगज़नी, दंगा और पुलिसकर्मियों पर हमले कर सकती है और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकती है।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने टिप्पणी की,"भारत जैसे लोकतांत्रिक...
पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UP Police की जांच की क्वालिटी पर सवाल उठाए, ACS (होम) को लगाई फटकार
एक और कड़े आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कड़ी आलोचना की। इस बार कोर्ट ने राज्य में आपराधिक जांच की 'क्वालिटी' पर ही सवाल उठाए और नाराजगी जताई।कोर्ट ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) और सीनियर IAS अधिकारी संजय प्रसाद पर भी "बिना गंभीरता वाला, पूरी तरह से लापरवाही भरा हलफनामा" दाखिल करने के लिए कड़ी नाराजगी जताई।उल्लेखनीय है कि जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने पाया कि प्रसाद का व्यवहार पहली नज़र में यह दिखाता है कि उन्हें कोर्ट के आदेशों की "कोई...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्यों कहा- 'विहान कुमार' और अन्य मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने 'बाढ़ के दरवाजे' खोल दिए और 'अराजक स्थिति' पैदा की?
एक अहम टिप्पणी में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि गैर-कानूनी गिरफ्तारियों पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया विहान कुमार (2025) का फैसला ने आरोपी व्यक्तियों के लिए अपनी हिरासत या रिमांड के आदेशों को चुनौती देने का एक "नया सिलसिला" (यानी 'पेंडोरा बॉक्स') शुरू कर दिया है, और वे ऐसा 'काफी देर से' भी कर सकते हैं।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने कहा कि इन फैसलों ने एक 'अराजक स्थिति' पैदा कर दी है, क्योंकि ये आरोपी को जांच या ट्रायल के किसी भी चरण में अपने मौलिक अधिकारों का...
'सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना ज़रूरी': अवध बार एसोसिएशन जुलाई में होने वाली AGM में महिलाओं के लिए 30% कोटा पर करेगा फ़ैसला
अवध बार एसोसिएशन (OBA) ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि वह बार एसोसिएशन में पदाधिकारियों या कार्यकारी सदस्यों के तौर पर महिलाओं के लिए 30% आरक्षण अनिवार्य करने वाले सुप्रीम कोर्ट के 2025 के निर्देश का पालन करने के लिए बाध्य है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच के सामने पेश होते हुए एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि किन खास पदों को आरक्षित किया जाएगा, इस पर अंतिम फ़ैसला जुलाई 2026 में होने वाली आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में लिया जाएगा।मामले को 13 जुलाई के लिए सूचीबद्ध...
'संविधान के बजाय शासकों के प्रति वफादारी, कानून के शासन को परेशानी माना जाता है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी नौकरशाही की कड़ी आलोचना की
इस हफ़्ते जारी अपने तीसरे ऐसे आदेश में, जिसमें उत्तर प्रदेश की नौकरशाही के हालात पर कड़ी टिप्पणियां की गईं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर राज्य के प्रशासनिक तंत्र की तीखी आलोचना की।अपने 31 पन्नों के आदेश में जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने कहा कि उत्तर प्रदेश ऐतिहासिक रूप से राजनेताओं और नौकरशाहों की "सामंती मानसिकता" से चलता रहा है। इसने लंबे समय से संवैधानिक शासन को जनसेवा के बजाय व्यक्तिगत प्रभुत्व का साधन बना दिया है।कोर्ट ने कहा कि राज्य का प्रशासनिक तंत्र लगातार सरकारों के दौर में गहरे...



















