राज�थान हाईकोट
'बेटी पढ़ाओ' अभियान के बावजूद बेटियों की पढ़ाई की अनदेखी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक व्यक्ति की तबादला स्थगित करने की अर्जी खारिज कर दी गई थी। याचिकाकर्ता ने अपनी बेटी की कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा को देखते हुए मार्च 2026 तक वर्तमान पदस्थापन स्थल पर बने रहने की मांग की थी।जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने कहा कि जब केंद्र और राज्य सरकारें “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान चला रही हैं, तब उनके अधिकारी बेटियों की वास्तविक ज़रूरतों के प्रति पूरी तरह उदासीन हैं। कोर्ट...
समय पर नगर निकाय चुनाव न कराना लोकतंत्र के खिलाफ: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग को लगाई फटकार
राजस्थान हाईकोर्ट ने शहरी निकायों में समय पर चुनाव न कराने पर राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि यह देरी संविधान में निहित लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करती है।जस्टिस अनुप कुमार धाण्ड की एकल पीठ ने उन याचिकाओं को खारिज करते हुए टिप्पणी की, जो पूर्व सरपंचों द्वारा दायर की गई थीं। इन सरपंचों को उनकी पंचायतों के नगरपालिकाओं में विलय के बाद चेयरपर्सन नियुक्त किया गया था। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग और सरकार ने पांच वर्ष की निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले...
डमी स्कूलों पर राजस्थान हाई कोर्ट का कड़ा रुख, SIT गठित करने का निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने डमी स्कूलों पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह शिक्षा प्रणाली के लिए एक अभिशाप है। ये स्कूल स्टूडेंट को नीट (NEET) और जेईई (JEE) जैसी एडमिशन परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग सेंटरों में जाने की अनुमति देते हैं, जबकि कक्षा 9वीं से 12वीं तक उनकी नियमित उपस्थिति को फर्जी तरीके से दर्शाते हैं।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने राज्य और सभी शिक्षा बोर्डों को निर्देश दिया कि वे अचानक निरीक्षण के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करें।कोर्ट ने इस समस्या से निपटने के लिए कई अहम निर्देश जारी...
सरकारी फाइल में की गई टिप्पणी का कोई कानूनी महत्व नहीं, निलंबन रद्द नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकारी अधिकारियों द्वारा फाइलों में की गई टिप्पणियां या टिपण्णी केवल उनके बीच का आंतरिक पत्राचार है, इसका कोई कानूनी महत्व नहीं होता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसे एक प्रधान ने अपने निलंबन आदेश के खिलाफ दायर किया था। याचिकाकर्ता को राजस्थान पंचायती राज अधिनियम की धारा 38 के तहत निलंबित किया गया था। यह निलंबन 2017 में उसके सरपंच कार्यकाल के दौरान हुई एक घटना से संबंधित आरोप पत्र के बाद किया गया था।याचिकाकर्ता का तर्क था कि उस पर...
जिस फैसले के आधार पर नौकरी मिली, वह रद्द होने पर नियुक्ति भी रद्द: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि अगर किसी व्यक्ति को अदालत के एक फैसले के आधार पर नौकरी मिलती है और बाद में वह फैसला रद्द हो जाता है तो उसकी नियुक्ति भी बरकरार नहीं रह सकती।जस्टिस रेखा बोराना याचिका पर सुनवाई कर रही थीं, जिसमें याचिकाकर्ता की नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता को यादवेंद्र शांडिल्य बनाम राज्य मामले में दिए गए फैसले के आधार पर भर्ती प्रक्रिया में बोनस अंक और बाद में नौकरी मिली थी।कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब...
राजस्थान शतरंज संघ के चुनावों पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई
राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान शतरंज संघ, जयपुर के सदस्यों के चुनावों पर 23 सितंबर तक रोक लगाई।यह निर्णय संघ के निवर्तमान सचिव अशोक कुमार भार्गव द्वारा दायर एक याचिका के बाद आया।दावा किया गया कि राजस्थान सहकारी समिति अधिनियम 2001 की धारा 23 के तहत संघ के अध्यक्ष के खिलाफ एक जांच लंबित है। इसलिए जहां तक चुनाव कराने का संबंध है, वहां 'निषेधात्मक आदेश' हैं।हालांकि, भार्गव का दावा है कि इस आदेश के बावजूद, बीकानेर में चुनाव कराने के लिए समाचार पत्र में प्रकाशन किया गया। उन्होंने एक अभ्यावेदन भी...
राजस्थान हाईकोर्ट का अहम कदम: केस से जुड़ी सभी जानकारी के लिए आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल बनाने पर नोटिस जारी
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में हाईकोर्ट के लिए एक आधिकारिक व्हाट्सएप चैनल बनाने की मांग की गई ताकि केस लिस्ट, ई-फाइलिंग विवरण, आदेश/निर्णय आदि से संबंधित सभी जानकारी एक ही जगह पर मिल सके।जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने प्रैक्टिसिंग वकील द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया।याचिकाकर्ता ने बताया कि 2023 से हाईकोर्ट ने टेलीग्राम चैनल पर केस लिस्ट अपलोड करना शुरू कर दिया था। इसके अलावा, कोर्ट की ई-कोर्ट्स वेबसाइट...
दुकानदार किसी क्षेत्र पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकते: राजस्थान हाईकोर्ट ने नई उचित मूल्य की दुकानें खोलने के खिलाफ याचिकाएं खारिज कीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा एक ही क्षेत्र में नई उचित मूल्य की दुकानें (Fair Price Shops- FPS) खोलने के प्रस्ताव को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा दुकान मालिक किसी क्षेत्र पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकते।जस्टिस सुनील बेनिवाल की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि नई FPS खोलना सरकार का नीतिगत निर्णय है। फिर जो लोग 20 साल से FPS चला रहे हैं, वे किसी क्षेत्र पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकते।अदालत ने आगे कहा कि कुछ FPS में 500 से कम राशन कार्ड धारक हैं, जबकि...
बैंक अकाउंट फ्रीज़ करने से पहले सतर्क रहें: DGP ने जारी की गाइडलाइन, राजस्थान हाईकोर्ट को राज्य सरकार ने दी जानकारी
राजस्थान हाईकोर्ट में यह सवाल उठने पर कि क्या केवल पुलिस (जांच एजेंसी) के पत्र के आधार पर बिना CrPC की धारा 102 की प्रक्रिया अपनाए किसी का बैंक खाता फ्रीज़ किया जा सकता है राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अब इस संबंध में दिशानिर्देश तैयार कर दिए गए।राज्य ने जानकारी दी कि DGP (साइबर क्राइम) ने 09 मई, 2025 को छह बिंदुओं वाली गाइडलाइन जारी की, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सभी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस और एसीपी को आदेश दिया गया कि वे जांच एजेंसियों को बैंक...
स्वस्थ पति पत्नी के भरण-पोषण से नहीं बच सकता: राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने भरण-पोषण के मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि सक्षम और स्वस्थ पति से यह उम्मीद की जाती है कि वह अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त कमाई कर सकता है। कोई पति यह दलील नहीं दे सकता कि वह अपने परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है।यह टिप्पणी जस्टिस संजय कुमार व्यास ने भरण-पोषण की राशि बढ़ाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की। फैमिली कोर्ट ने याचिकाकर्ता पत्नी को प्रतिमाह 4,000 रुपये का भरण-पोषण देने का आदेश दिया, जिसे बढ़ाने के लिए उसने हाई कोर्ट में...
Right To Education | बच्चे के आधार कार्ड पर निवास वार्ड नंबर का न होना RTE Act के तहत एडमिशन अस्वीकार करने का आधार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के तहत प्राइवेट स्कूल में एडमिशन के लिए आवेदन अस्वीकार किए जाने वाले नाबालिग को राहत प्रदान करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21-ए के तहत किसी मौलिक अधिकार को केवल प्रक्रियात्मक आधार या तकनीकी कारणों से समाप्त या सीमित नहीं किया जा सकता।वर्तमान मामले में बच्चे का आवेदन इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया कि सत्यापन के लिए प्रस्तुत आधार कार्ड पर उसके निवास वार्ड का नंबर नहीं था।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि एक बार जब याचिकाकर्ता का लॉटरी...
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: न्यायिक डिक्री सिर्फ दिखावा नहीं, तकनीकी आधार पर राहत देने से इनकार नहीं कर सकता कोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सक्षम न्यायालय द्वारा पारित डिक्री को केवल कागज़ी दस्तावेज़ या दीवार पर टंगी शो-पीस बनाकर नहीं छोड़ा जा सकता। निष्पादन न्यायालय तकनीकी कारणों के आधार पर वास्तविक राहत से इनकार नहीं कर सकता।जस्टिस फ़र्ज़न्द अली ने कहा,“डिक्री का उद्देश्य महज़ कागज़ पर बने रहना नहीं है। इसे वास्तविकता में लागू किया जाना चाहिए ताकि सफल पक्षकार को वह संपूर्ण लाभ मिल सके, जो निर्णय और डिक्री में निहित है। अन्यथा, पूरा न्यायिक प्रक्रिया ही निरर्थक हो जाएगी।”मामला ऐसे समझौता आधारित...
बाजार में जनता के लिए बना मंदिर निजी नहीं, इसके आसपास मांस की दुकानों के संचालन पर प्रतिबंध लागू: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 269 सहपठित धारा 340 के तहत जारी 22 मार्च 2021 के मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के खंड 4 के अनुसार पूजा स्थलों के 50 मीटर के दायरे में स्थापित मांस की दुकानों के लाइसेंस रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा मंदिर के कुछ दुकानदारों की निजी संपत्ति होने के तर्क को खारिज किया। साथ ही कहा कि जब तक अन्यथा साबित न हो प्रत्येक मंदिर एक सार्वजनिक संपत्ति है चूंकि और विचाराधीन मंदिर एक खुले...
पहली बार 164 CrPC के बयान में लगाए गए बलात्कार के आरोप भी चार्ज फ्रेमिंग के दौरान नज़रअंदाज़ नहीं किए जा सकते :राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पीड़िता ने बलात्कार का आरोप पहली बार दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 164 के तहत दर्ज बयान में लगाया हो तो केवल इस आधार पर उस आरोप को चार्ज फ्रेमिंग (आरोप तय करने) के चरण पर ख़ारिज नहीं किया जा सकता।मामले की पृष्ठभूमिजस्टिस संदीप शाह की एकलपीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता ने सेशन कोर्ट द्वारा उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों ग़लत तरीके से प्रवेश, अवैध रूप से रोकना, चोट पहुचाना महिला की लज्जा भंग करना और बलात्कार को चुनौती दी थी।याचिकाकर्ता का कहना...
राजस्थान हाईकोर्ट ने 2021 उपनिरीक्षक भर्ती रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक, कहा- SIT रिपोर्ट बिना शपथपत्र के पेश की गई
राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार (8 सितंबर) को उस एकल पीठ के फैसले पर रोक लगाई, जिसमें 2021 की उपनिरीक्षक भर्ती को कथित अनियमितताओं के चलते रद्द कर दिया गया।चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने उन अपीलों पर सुनवाई की, जिनमें उपनिरीक्षक चयन और पूरे भर्ती प्रक्रिया रद्द किए जाने को चुनौती दी गई। अदालत ने पाया कि एकल पीठ ने जिन महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर भरोसा किया, वे संबंधित अधिकारियों के शपथपत्र से समर्थित नहीं थे।खंडपीठ ने विशेष रूप से उस SIT रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसे...
ज़मानती अपराध की आरोपी महिलाओं को 43 दिनों तक हिरासत में क्यों रखा गया?: राजस्थान हाईकोर्ट ने DGP को जांच का निर्देश दिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने दो महिलाओं पर दुःख और पीड़ा व्यक्त की, जिन्हें ज़मानती अपराधों में आरोपित होने के बावजूद 43 दिनों की न्यायिक हिरासत में रखा गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट और एडीजे ने उनकी ज़मानत याचिकाएं लापरवाही और यांत्रिक तरीके से खारिज कीं और अपने विवेक का सही ढंग से प्रयोग नहीं किया।जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने खेद व्यक्त करते हुए डीजीपी को निर्देश दिया कि वह ज़मानती प्रकृति के मामले में याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी के लिए संबंधित जांच अधिकारी से "स्पष्टीकरण" मांगें। तदनुसार, आगे की कार्रवाई करें।...
किशोरावस्था साबित करने का पैमाना कठोर सबूत नहीं, संदेह की स्थिति में आरोपी के पक्ष में झुके अदालतें: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी की जुवेनाइल (किशोर) होने की दलील पर सुनवाई के दौरान सबूत का पैमाना उतना कठोर नहीं होना चाहिए जितना कि किसी आपराधिक मुकदमे में “बियोंड रीज़नेबल डाउट” की कसौटी पर परखा जाता है। यदि दो दृष्टिकोण संभव हों तो सीमा-रेखा वाले मामलों में अदालत को आरोपी के पक्ष में झुकना चाहिए।जस्टिस संदीप शाह की एकल पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 की धारा 94 में जिन दस्तावेजों को प्राथमिकता दी गई, जैसे...
राजस्थान हाईकोर्ट ने 2012 से प्रैक्टिस कर रहे एक वकील की याचिका पर नोटिस जारी किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से उस मामले में जवाब मांगा, जिसमें 13 साल से प्रैक्टिस कर रहे वकील ने आरोप लगाया कि 2012 में अखिल भारतीय बार परीक्षा (AIBE) पास करने के बावजूद, निर्धारित समय सीमा के भीतर AIBE परीक्षा पास न करने के कारण उन्हें प्रैक्टिस सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया गया।याचिकाकर्ता का कहना था कि वह एक नियमित रूप से प्रैक्टिस करने वाले वकील और बार के सक्रिय सदस्य हैं। उन्हें अक्टूबर, 2012 में नामांकन प्रमाणपत्र जारी किया गया। उन्होंने 2012 में AIBE परीक्षा पास...
राजस्थान हाईकोर्ट ने डेंटल कॉलेज पर लगाई गई 7.5 लाख रुपये प्रति स्टूडेंट जुर्माने की कार्यवाही पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने एकल पीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें व्यास डेंटल कॉलेज पर शैक्षणिक सत्र 2018-19 और 2019-20 के दौरान डेंटल स्टूडेंट्स को अनियमित दाखिले देने के लिए प्रति स्टूडेंट 7.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।चीफ जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने कॉलेज की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।कॉलेज की ओर से दलील दी गई कि इतनी बड़ी और असंगत सजा बिना किसी पूर्व सूचना या प्रार्थना के दी गई, जबकि इसी मामले में राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS)...
कथित तौर पर जाली दस्तावेज जमा करने के आपराधिक मामले में बरी होने से सेवा के लिए पात्रता नहीं मिलती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान जाली दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के आरोप में याचिकाकर्ता की बर्खास्तगी को बरकरार रखा, जबकि संबंधित विभाग द्वारा दर्ज जालसाजी, मनगढ़ंत और धोखाधड़ी के एक आपराधिक मामले में याचिकाकर्ता को बरी कर दिया गया था। जस्टिस आनंद शर्मा ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि याचिकाकर्ता को बरी कर दिया गया था, यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि इस तरह की बरी किए जाने से याचिकाकर्ता को संबंधित पद पर रहने की पात्रता प्राप्त हो जाती है।"वैसे भी, सिर्फ़ इस तथ्य से कि याचिकाकर्ताओं को...
















