राज�थान हाईकोट
FIR दर्ज किए बिना भी मजिस्ट्रेट ले सकते हैं पुलिस की मदद: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया अधिकार क्षेत्र
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट किसी शिकायत पर सीधे FIR दर्ज कराने का आदेश दिए बिना भी पुलिस या अन्य सक्षम अधिकारी से जांच करा सकते हैं। अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 225 के तहत यह जांच केवल मजिस्ट्रेट की सहायता के लिए होती है, न कि पूर्ण पुलिस जांच का विकल्प।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि धारा 225 के अंतर्गत की जाने वाली जांच सीमित और प्रारंभिक प्रकृति की होती है, जिसका उद्देश्य यह तय करना होता है कि आरोपी के खिलाफ आगे कार्यवाही के लिए पर्याप्त...
Section 311 CrPC | कोर्ट अहम गवाह को बुला सकता है, भले ही प्रॉसिक्यूशन न बुलाए: राजस्थान हाईकोर्ट
CrPC की धारा 311 के तहत दायर अर्जी मंज़ूर करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि प्रॉसिक्यूशन ने किसी अहम गवाह का ज़िक्र नहीं किया, यह आरोपी को ऐसे गवाह को बुलाने का मौका देने से मना करने का आधार नहीं हो सकता, जब उसका बयान केस में सही फ़ैसले के लिए ज़रूरी और प्रासंगिक लगे।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ज़िला कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसने याचिकाकर्ता-आरोपी की CrPC की धारा 311 के तहत दायर अर्जी खारिज की थी। इस अर्जी में उस डॉक्टर को...
दूसरे राज्य का आरक्षण यहां लागू नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- हर राज्य की सामाजिक स्थिति अलग
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक राज्य में मिलने वाला आरक्षण लाभ दूसरे राज्य में लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि विभिन्न राज्यों के पिछड़े वर्गों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं।जस्टिस संजीत पुरोहित की पीठ ने यह टिप्पणी NEE-PG सीट आवंटन में आरक्षण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की।अदालत ने कहा,“अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का निर्धारण प्रत्येक राज्य की अपनी सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के आधार पर होता है। यह मान लेना कि सभी राज्यों के...
NDPS मामलों में बरामदगी व गिरफ्तारी मेमो की सच्चाई ट्रायल में ही तय होगी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि NDPS मामलों में बरामदगी और गिरफ्तारी मेमो की सत्यता, विश्वसनीयता और प्रमाणिकता का परीक्षण ट्रायल के दौरान ही किया जा सकता है, न कि रिट याचिका में।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका खारिज की, जिसमें आरोपी ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को रद्द करने की मांग की थी।याचिकाकर्ता का कहना था कि उसे उसके घर से उठाया गया और बाद में उस स्थान पर ले जाकर फंसाया गया, जहां से कथित तौर पर मादक पदार्थ बरामद दिखाया गया। उसने पूरे मामले को झूठा और मनगढ़ंत...
एड-हॉक के आधार पर दावा खारिज नहीं किया जा सकता: 28 साल की सेवा के बाद कर्मचारी को पक्का करने पर विचार करे सरकार- राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक कर्मचारी को राहत दी, जिसने 28 साल से ज़्यादा समय तक सेवा देने के बावजूद, सरकार द्वारा उसे पक्का करने पर विचार न किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की थी। सरकार का तर्क था कि उसकी शुरुआती नियुक्ति किसी स्वीकृत पद पर नहीं, बल्कि एड-हॉक (अस्थायी) आधार पर की गई।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने पाया कि राज्य सरकार का यह तर्क कि याचिकाकर्ता को किसी स्वीकृत पद पर नहीं, बल्कि केवल काम के बढ़ते बोझ को संभालने के लिए रखा गया था, लेबर कोर्ट द्वारा पहले ही खारिज किया जा चुका था। लेबर कोर्ट ने...
लोक सेवकों पर FIR का आदेश यूं ही नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- पहले कानूनी सुरक्षा प्रावधानों का पालन जरूरी
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि मजिस्ट्रेट बिना विचार किए या यांत्रिक तरीके से लोक सेवकों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकते। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(2) के तहत निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों का पालन अनिवार्य है।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए स्पेशल कोर्ट द्वारा पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश रद्द किया और मामले को पुनः विचार के लिए ट्रायल कोर्ट को भेज दिया।अदालत ने कहा कि धारा...
भरण-पोषण मामले में पत्नी की नौकरी का रिकॉर्ड मंगा सकता है पति: राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि पति भरण-पोषण के दावे का विरोध करने के लिए पत्नी के रोजगार और आय से जुड़े दस्तावेज अदालत के माध्यम से मंगा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे दस्तावेज निष्पक्ष सुनवाई के लिए जरूरी होते हैं।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें पति की ओर से दायर आवेदन खारिज कर दिया गया था।मामले में पत्नी ने भरण-पोषण की मांग की थी। सुनवाई के दौरान पति को जानकारी मिली कि पत्नी प्राइवेट हॉस्पिटल में नर्स के रूप...
बिना सभी प्रयास किए किसी को 'फरार' घोषित नहीं किया जा सकता: हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की जल्दबाजी पर जताई आपत्ति
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी को फरार घोषित करने से पहले उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सभी उचित और प्रभावी कदम उठाना जरूरी है। बिना ऐसा किए सीधे कठोर कार्रवाई करना कानून के अनुरूप नहीं है।जस्टिस फरजंद अली की सिंगल बेंच ने यह फैसला एक चेक बाउंस मामले में दिया, जिसमें याचिकाकर्ता को अनियमित रूप से पेश होने और जमानत की शर्तों का पालन न करने के कारण ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए उसे फरार घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी।हाईकोर्ट...
बिना लाइसेंस के या दो सवारी के साथ बाइक चलाने पर तब तक 'सहयोगी लापरवाही' नहीं मानी जाएगी, जब तक उसका सीधा संबंध दुर्घटना से न हो: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिना वैध लाइसेंस के और दो सवारी (पिलियन राइडर्स) के साथ मोटरसाइकिल चलाना भले ही मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन हो, लेकिन ये काम अपने आप में दुर्घटना में मृतक की 'सहयोगी लापरवाही' (Contributory Negligence) मानने का आधार नहीं हो सकते, जब तक कि इस बारे में कोई खास निष्कर्ष न हो।जस्टिस संदीप तनेजा ने आगे कहा कि चूंकि मृतक एक नाई था, इसलिए उसकी मासिक आय की गणना 'कुशल श्रमिक' (Skilled Worker) के न्यूनतम वेतन के आधार पर की जानी चाहिए, न कि एक 'अकुशल श्रमिक' (Unskilled...
झूठे दावे पर फटकार: हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका की खारिज, लगाया 5 हजार का जुर्माना
राजस्थान हाईकोर्ट ने भ्रामक और गलत जानकारी के आधार पर दायर की गई अवमानना याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया।अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस रवि चिरानिया ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ने अदालत के पूर्व आदेश को गलत तरीके से प्रस्तुत किया।याचिकाकर्ता का दावा था कि समन्वय पीठ ने राजस्व मंडल के पंजीयक को उसे शिक्षा विभाग से राजस्व विभाग में स्थानांतरित करने का निर्देश...
खाप पंचायतों पर सख्त रुख: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य को दिया नीति बनाने का निर्देश, कहा- सामाजिक बहिष्कार मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
राजस्थान हाईकोर्ट ने खाप पंचायतों द्वारा जारी फरमानों और सामाजिक बहिष्कार की प्रथा पर गंभीर चिंता जताते हुए राज्य सरकार को व्यापक नीति और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन हैं।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि खाप पंचायतें किसी भी प्रकार की वैधानिक संस्था नहीं हैं। फिर भी वे खुद को समानांतर सत्ता केंद्र के रूप में स्थापित कर चुकी हैं और लोगों के निजी जीवन में दखल देकर गैरकानूनी आदेश जारी करती...
वकील की गैरहाजिरी में अधूरी क्रॉस एग्जामिनेशन नहीं चलेगी: राजस्थान हाईकोर्ट ने गवाह को दोबारा बुलाने की दी अनुमति
राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि आरोपी को प्रभावी जिरह (क्रॉस-एग्जामिनेशन) के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता खासकर तब जब उसके वकील की अनुपस्थिति के कारण जिरह ठीक से नहीं हो पाई हो।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने एक हत्या के आरोपी को राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें प्रत्यक्षदर्शी गवाह को दोबारा बुलाने की मांग खारिज की गई थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को अत्यधिक तकनीकी करार दिया।अदालत ने कहा,“किसी सामान्य व्यक्ति से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह एक प्रशिक्षित...
बराबरी वालों में ही हो प्रतिस्पर्धा: राजस्थान हाईकोर्ट ने होमगार्ड भर्ती पर दिया अहम फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने होमगार्ड भर्ती से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा हमेशा समान स्तर के उम्मीदवारों के बीच ही होनी चाहिए न कि अनुभवी और नए उम्मीदवारों को एक साथ खड़ा किया जाए।जस्टिस मुनुरी लक्ष्मण ने यह फैसला उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया, जिनमें होमगार्ड विभाग के स्वयंसेवकों ने अपनी कथित मौखिक सेवामुक्ति को चुनौती दी थी।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे पहले से होमगार्ड विभाग में स्वयंसेवक के रूप में कार्य कर चुके हैं और उन्हें नए भर्ती प्रक्रिया में...
'चौंकाने वाला': राजस्थान हाईकोर्ट ने तकनीकी आधार पर नाबालिग रेप पीड़िता के मुआवज़े का दावा खारिज करने पर लगाई कड़ी फटकार
आश्चर्य और हैरानी जताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) का आदेश रद्द किया, जिसमें नाबालिग रेप पीड़िता के अंतरिम मुआवज़े का आवेदन खारिज कर दिया गया था, और उससे SHO/मजिस्ट्रेट से ज़रूरी सर्टिफिकेट लाने को कहा गया।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने माना कि राजस्थान पीड़ित मुआवज़ा योजना 2011 (योजना) का पालन प्रतिवादी द्वारा उसकी मूल भावना और अक्षरशः नहीं किया गया। कोर्ट ने राय दी कि आवेदन खारिज करने के बजाय DLSA को संबंधित अधिकारी से ज़रूरी सर्टिफिकेट भेजने के लिए कहना...
'स्पष्ट त्रुटि': सेशंस कोर्ट ने पलटा चोरी के आरोपी को 'तर्कसंगत' रूप से बरी करने का फैसला, राजस्थान हाईकोर्ट ने आलोचना की
चोरी के मामले में आरोपी को बरी करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने यह दोहराया कि भले ही आरोप तय करने के चरण में विस्तृत आदेश देना अनिवार्य न हो, फिर भी आदेश में न्यायिक विवेक का सचेत प्रयोग झलकना चाहिए; यह आदेश न तो अस्पष्ट हो सकता है और न ही यांत्रिक।ऐसा करते हुए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सेशंस कोर्ट का वह आदेश, जिसने याचिकाकर्ताओं को बरी करने का फैसला रद्द किया था, स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण था; क्योंकि उसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दर्ज किए गए निष्कर्षों में किसी भी प्रकार की विकृति, अवैधता या कोई बड़ी...
6 मामलों में 'गंभीर आरोप': राजस्थान के ज्यूडिशियल ऑफिसर सस्पेंशन ऑर्डर के खिलाफ पहुंचे हाईकोर्ट
एक ज्यूडिशियल ऑफिसर ने अपने हालिया सस्पेंशन को चुनौती देने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जो उनके खिलाफ छह अलग-अलग मामलों में "गंभीर आरोपों" की शुरुआती जांच के बाद शुरू किया गया।ज्यूडिशियल ऑफिसर राजेंद्र साहू जालोर जिले के भीनमाल में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (ADJ) के तौर पर काम कर रहे थे। उनको पिछले महीने हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के आदेश पर सस्पेंड कर दिया गया।ऑफिशियल ऑर्डर के मुताबिक, यह एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन फेयर जांच सुनिश्चित करने और ऑफिसर को चल...
राजस्थान हाईकोर्ट ने कथित भ्रामक विज्ञापन को लेकर एक्टर सलमान खान के खिलाफ कार्यवाही पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक्टर सलमान खान के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, जयपुर II में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाई। यह मामला राजश्री पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन से जुड़ा है, जिसमें एक्टर ने अभिनय किया था।ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने DCDRC के 6 जनवरी के अंतरिम आदेश पर भी रोक लगाई। इस आदेश में उत्पाद बेचने वाली कंपनी और एक्टर को किसी भी तरह के भ्रामक प्रचार में शामिल होने से रोका गया था।कोर्ट ने राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (SCDRC) के 16 मार्च के आदेश पर भी रोक लगाई। इस आदेश में राज्य...
NEET-PG: राजस्थान हाईकोर्ट ने मैटरनिटी लीव पर मौजूद डॉक्टर को अंतरिम राहत दी, जॉइनिंग की डेडलाइन को लेकर होने वाली कार्रवाई पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने डॉक्टर को अंतरिम राहत दी। इस डॉक्टर को NEET PG पास करने के बाद कॉलेज अलॉट किया गया था, लेकिन बच्चे के जन्म के बाद पोस्ट-पार्टम (प्रसव के बाद की स्थिति) में होने के कारण कॉलेज में जॉइन करने की तारीख बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को दिया गया उनका आवेदन खारिज कर दिया गया।राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ़्ते का समय देते हुए जस्टिस अनूरूप सिंघी की बेंच ने याचिकाकर्ता को उनकी आधिकारिक तौर पर अलॉट की गई मैटरनिटी लीव जारी रखने की अनुमति दी, और राज्य सरकार को उनके खिलाफ कोई भी...
न्याय में देरी स्वीकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपीलों को रिट याचिका में बदला
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत पारित आदेशों के खिलाफ लंबित अपीलों को रिट याचिकाओं में परिवर्तित कर दिया। अदालत ने कहा कि न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए और तकनीकी बाधाओं के कारण मामलों को लंबित नहीं रखा जा सकता।जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने यह निर्णय उस समय लिया, जब इन अपीलों की ग्राह्यता को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट नहीं थी।मामले में फैमिली कोर्ट द्वारा धारा 24 के तहत दिए गए आदेशों के खिलाफ कई अपीलें दायर की गईं।...
'समन जारी करने के चरण में केवल प्रथम दृष्टया मामला होना ज़रूरी': राजस्थान हाईकोर्ट ने दहेज मृत्यु FIR में ससुराल वालों के खिलाफ संज्ञान लेने का आदेश सही ठहराया
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ट्रायल कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज की, जिसमें एक महिला के ससुराल वालों के खिलाफ IPC की धारा 498A के तहत संज्ञान लिया गया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि समन जारी करने के चरण में केवल प्रथम दृष्टया संतुष्टि होनी चाहिए और दहेज की मांग तथा ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित किए जाने के आरोप उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त थे।स्वीकृत तथ्यों के अनुसार, मृतका ने याचिकाकर्ताओं के बेटे से 08.02.2015 को शादी की थी और 24.03.2015 को उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर...











