राज�थान हाईकोट

राजस्थान हाइकोर्ट का निर्देश: वित्तीय संकट का बहाना बनाकर कर्मचारी के वैध बकाये नहीं रोके जा सकते
राजस्थान हाइकोर्ट का निर्देश: वित्तीय संकट का बहाना बनाकर कर्मचारी के वैध बकाये नहीं रोके जा सकते

राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सड़क परिवहन निगम की वित्तीय कठिनाइयां किसी कर्मचारी के वैध बकाये को रोकने का आधार नहीं बन सकतीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी श्रमिक के वैधानिक अधिकारों से केवल इस आधार पर वंचित नहीं किया जा सकता कि निगम के पास पर्याप्त धनराशि नहीं है।जस्टिस अशोक कुमार जैन की पीठ रिटायर कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने लगभग 13 वर्षों तक साप्ताहिक अवकाश के बदले देय राशि का भुगतान न होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया।अदालत ने कहा कि यदि...

93 वर्षीय महिला का DNA टेस्ट कराने का आदेश, संपत्ति विवाद में बेटी की मातृत्व जांच जरूरी: राजस्थान हाइकोर्ट
93 वर्षीय महिला का DNA टेस्ट कराने का आदेश, संपत्ति विवाद में बेटी की मातृत्व जांच जरूरी: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने एक बेहद असाधारण और भावनात्मक मामले में 93 वर्षीय महिला का DNA टेस्ट कराने का आदेश दिया ताकि यह तय किया जा सके कि संपत्ति में हिस्सा मांगने वाली याचिकाकर्ता वास्तव में उसकी बेटी है या नहीं। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून में पितृत्व को लेकर तो अनुमान की व्यवस्था है लेकिन मातृत्व को लेकर कोई वैधानिक अनुमान नहीं है।जस्टिस बिपिन गुप्ता की पीठ ने इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर बताते हुए कहा कि यह शायद दुर्लभतम मामलों में से एक है, जहां कोई मां किसी बच्चे को अपना मानने से इनकार कर रही...

गलत तरीके से अनिवार्य रिटायरमेंट पर भेजे गए कर्मचारी को पूरा बकाया वेतन मिलेगा: नो वर्क, नो पे दलील पर राजस्थान हाइकोर्ट सख्त
गलत तरीके से अनिवार्य रिटायरमेंट पर भेजे गए कर्मचारी को पूरा बकाया वेतन मिलेगा: नो वर्क, नो पे दलील पर राजस्थान हाइकोर्ट सख्त

राजस्थान हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए उस कर्मचारी को अनिवार्य रिटायरमेंट की अवधि का पूरा वेतन और भत्ते देने का आदेश दिया, जिसे बिना ठोस आधार के सेवा से बाहर कर दिया गया था। कोर्ट ने साफ कहा कि जब कर्मचारी को काम करने से ही रोका गया हो तो उस पर नो वर्क, नो पे का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता।जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकल पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनाया, जिसमें एक सरकारी कर्मचारी ने वेतन न दिए जाने को चुनौती दी थी। कर्मचारी को वर्ष 2006 में अनिवार्य रिटायरमेंट दी गई थी। बाद...

सरकारी कर्मचारी डिसिप्लिनरी जांच को रोकने के लिए इस्तीफ़ा देकर नौकरी नहीं छोड़ सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी सही ठहराई
सरकारी कर्मचारी डिसिप्लिनरी जांच को रोकने के लिए इस्तीफ़ा देकर नौकरी नहीं छोड़ सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी सही ठहराई

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक RAS अधिकारी की याचिका खारिज की, जिसमें राज्य द्वारा उसका इस्तीफ़ा खारिज किए जाने और नौकरी से निकालने की सज़ा लगाने के आदेश को चुनौती दी गई। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के व्यवहार को देखते हुए, राज्य के कामों में कोई कानूनी कमी नहीं थी।जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि सिर्फ़ इस्तीफ़ा देने से कर्मचारी के पक्ष में कोई निहित या ऑटोमैटिक अधिकार नहीं बन जाता, खासकर तब जब राज्य कर्मचारी के ख़िलाफ़ डिपार्टमेंटल कार्रवाई शुरू करने पर विचार कर रहा हो।कहा गया,“किसी सरकारी...

दैनिक मज़दूरों की हकीकत पर राजस्थान हाइकोर्ट की सख़्त टिप्पणी, 26 दिन के वेतन फ़ॉर्मूले को बताया अव्यावहारिक
दैनिक मज़दूरों की हकीकत पर राजस्थान हाइकोर्ट की सख़्त टिप्पणी, 26 दिन के वेतन फ़ॉर्मूले को बताया अव्यावहारिक

दैनिक मज़दूरी पर काम करने वाले श्रमिकों की ज़मीनी स्थिति को स्वीकार करते हुए राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि यह मान लेना पूरी तरह गलत है कि हर दैनिक मज़दूर को सप्ताह में एक दिन का सवेतन अवकाश मिलता है। कोर्ट ने साफ़ कहा कि ऐसे मज़दूर बिना वेतन छुट्टी लेने की स्थिति में नहीं होते। इसलिए उनकी मज़दूरी की गणना 26 दिन के बजाय 30 दिन के आधार पर होनी चाहिए।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि दैनिक मज़दूरों की वास्तविक परिस्थितियों को नज़रअंदाज़ कर बनाए गए सरकारी फ़ॉर्मूले में सुधार...

रेलवे एक्सीडेंट क्लेम में प्रिजम्पशन क्लेम करने वाले के पक्ष में, टिकट न मिलना जानलेवा नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
रेलवे एक्सीडेंट क्लेम में प्रिजम्पशन क्लेम करने वाले के पक्ष में, टिकट न मिलना जानलेवा नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल का ऑर्डर रद्द किया, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने बेटे की मौत के संबंध में फाइल किया गया क्लेम खारिज किया था। कोर्ट ने कहा कि जब भी रेलवे परिसर या किसी रेलवे ट्रैक के अंदर कोई अनहोनी होती है तो प्रिजम्पशन रेलवे अधिकारियों के खिलाफ होता है, जब तक कि कोई सबूत जमा न किया जाए, जो कुछ और बताता हो।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच एक मां की पिटीशन पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने अपने बेटे की मौत के संबंध में फाइल किए गए क्लेम को खारिज करने को चुनौती दी थी, जो...

पीड़िता का बलात्कारी के साथ जाना असामान्य व्यवहार: राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO केस में पूर्व सरपंच को बरी किया
'पीड़िता का बलात्कारी के साथ जाना असामान्य व्यवहार': राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO केस में पूर्व सरपंच को बरी किया

एक पूर्व सरपंच के खिलाफ POCSO मामले में सज़ा रद्द करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यह बहुत ही असंभव है कि एक नाबालिग लड़की के साथ रेप होने के बाद वह अपनी मर्ज़ी से आरोपी के साथ दूसरी जगह जाए।इसके अलावा, पीड़िता की उम्र पर शक जताते हुए जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की डिवीज़न बेंच ने कहा कि स्कूल सर्टिफिकेट भले ही ज़रूरी हो, लेकिन जब सरकारी दस्तावेज़ों में विरोधाभासी जानकारी हो, तो सबसे पहले एडमिशन रिकॉर्ड को ही निर्णायक माना जाएगा।कोर्ट 17 साल की लड़की के साथ कथित यौन...

अंतरिम भरण-पोषण से केवल तात्कालिक राहत, अधिकार तय नहीं होते: राजस्थान हाइकोर्ट ने 40 हजार की अंतरिम राशि बढ़ाने से किया इनकार
अंतरिम भरण-पोषण से केवल तात्कालिक राहत, अधिकार तय नहीं होते: राजस्थान हाइकोर्ट ने 40 हजार की अंतरिम राशि बढ़ाने से किया इनकार

राजस्थान हाइकोर्ट ने अंतरिम भरण-पोषण की राशि बढ़ाने की मांग खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अंतरिम भरण-पोषण का उद्देश्य कार्यवाही के दौरान पीड़ित पक्ष को आर्थिक तंगी से बचाना होता है न कि पत्नी के अधिकार या भरण-पोषण की अंतिम राशि का निर्धारण करना।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने कहा कि अंतरिम भरण-पोषण एक अस्थायी और विवेकाधीन राहत है, जिसे बिना विस्तृत सुनवाई या साक्ष्य के आधार पर दिया जाता है। यह न तो पत्नी के अधिकारों का अंतिम फैसला है और न ही पति की आय में उसके किसी हिस्से को मान्यता देता है।अदालत ने...

क्रिश्चियन मैरिज एक्ट के तहत हुई शादियों को रजिस्टर करने के लिए राज्य अधिकारी बाध्य, राजस्थान 2009 का कानून कोई बाधा नहीं: हाईकोर्ट
क्रिश्चियन मैरिज एक्ट के तहत हुई शादियों को रजिस्टर करने के लिए राज्य अधिकारी बाध्य, राजस्थान 2009 का कानून कोई बाधा नहीं: हाईकोर्ट

पिछले हफ्ते दिए गए एक महत्वपूर्ण आदेश में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इंडियन क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, 1872 (ICM Act) के अनुसार हुई सभी ईसाई शादियों को अनिवार्य रूप से स्वीकार करें, रिकॉर्ड करें और रजिस्टर करें, जिनके संबंध में एक्ट के तहत सर्टिफिकेट जारी किया गया।अपने विस्तृत आदेश में जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संगीता शर्मा की बेंच ने ICM Act 1872 और राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2009 (RCMR Act) के बीच संबंधों को लेकर राज्य में फैली मौजूदा...

सिर्फ़ इसलिए राहत नहीं रोकी जा सकती कि अधिकारी कोर्ट नहीं आया: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपमानजनक टिप्पणियां रद्द कीं
सिर्फ़ इसलिए राहत नहीं रोकी जा सकती कि अधिकारी कोर्ट नहीं आया: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपमानजनक टिप्पणियां रद्द कीं

राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा न सिर्फ़ याचिकाकर्ता पुलिस अधिकारी, बल्कि एक दूसरे अधिकारी के खिलाफ़ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की राहत दी, जो राहत के लिए कोर्ट नहीं आया।जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि दूसरा अधिकारी कोर्ट नहीं आया, यह नहीं कहा जा सकता कि उसके खिलाफ़ की गई प्रतिकूल टिप्पणियां सही थीं। समानता के सिद्धांत के आधार पर यह माना गया कि जब कोई खास कार्रवाई कानूनी रूप से गलत पाई जाती है तो एक पक्ष को दिया गया फ़ायदा उसी तरह की स्थिति वाले दूसरे...

गलत आरोप से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जड़ पर चोट: राजस्थान हाईकोर्ट ने CRPF कांस्टेबल को बहाल किया
गलत आरोप से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जड़ पर चोट: राजस्थान हाईकोर्ट ने CRPF कांस्टेबल को बहाल किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि चार्जशीट का फॉर्म भले ही उसके सब्सटेंस पर भारी पड़ता हो, लेकिन जब उसकी नींव ही गलत आरोप पर आधारित हो तो राज्य बाद में जांच के नतीजे के हिसाब से आरोप को हल्का या दोबारा इंटरप्रेट नहीं कर सकता।याचिकाकर्ता-कांस्टेबल का सस्पेंशन रद्द करते हुए जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि अनुशासनात्मक अथॉरिटी को सज़ा देने से पहले दुर्व्यवहार को सही ढंग से क्लासिफाई करना होगा, नहीं तो पूरी कार्रवाई मनमानी हो जाएगी।कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें याचिकाकर्ता के सस्पेंशन के...

समन की कथित अस्वीकृति पर एकतरफा कार्यवाही से पहले प्रोसेस सर्वर की जांच अनिवार्य: राजस्थान हाइकोर्ट
समन की कथित अस्वीकृति पर एकतरफा कार्यवाही से पहले प्रोसेस सर्वर की जांच अनिवार्य: राजस्थान हाइकोर्ट

राजस्थान हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि समन की तामील रिपोर्ट को स्वीकार करना कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक गंभीर न्यायिक कार्य है। यदि समन की सेवा से संबंधित रिपोर्ट शपथ-पत्र पर नहीं है तो अदालत का दायित्व है कि वह प्रोसेस सर्वर की जांच करे। यहां तक कि यदि रिपोर्ट शपथ-पत्र पर भी हो, तब भी उसकी सत्यता परखने के लिए प्रोसेस सर्वर से पूछताछ करना अदालत के विवेकाधिकार में है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि समन जारी करने का उद्देश्य संबंधित पक्ष को उसके विरुद्ध चल रही कार्यवाही की जानकारी...

POCSO Act में किशोर स्वायत्तता की अनदेखी: राजस्थान हाइकोर्ट ने सहमति वाले युवा संबंधों को छूट देने पर सरकार से विचार करने को कहा
POCSO Act में 'किशोर स्वायत्तता' की अनदेखी: राजस्थान हाइकोर्ट ने सहमति वाले युवा संबंधों को छूट देने पर सरकार से विचार करने को कहा

राजस्थान हाइकोर्ट ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण से जुड़े POCSO कानून के मौजूदा प्रावधानों पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से इस कानून की व्यापक समीक्षा करने को कहा।हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह कानून बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया था लेकिन सहमति से बने किशोर और युवा संबंधों में इसका कठोर और यांत्रिक प्रयोग कानून को संरक्षण के बजाय दंड का माध्यम बना रहा है।जस्टिस अनिल कुमार उपमन की पीठ ने सुझाव दिया कि POCSO Act में ऐसा प्रावधान जोड़ा जाना चाहिए, जिसके अंतर्गत लगभग समान...

MV Act और वर्कमैन मुआवजा एक्ट के तहत दोहरा दावा नहीं चलेगा: राजस्थान हाइकोर्ट, बीमा कंपनी को राशि लौटाने का आदेश
MV Act और वर्कमैन मुआवजा एक्ट के तहत दोहरा दावा नहीं चलेगा: राजस्थान हाइकोर्ट, बीमा कंपनी को राशि लौटाने का आदेश

राजस्थान हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक ही दुर्घटना के लिए मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (MV Act) और वर्कमैन मुआवजा अधिनियम, 1923 (Workman Act) — दोनों के तहत मुआवजा दावा करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है। हाइकोर्ट ने कहा कि एक अधिनियम के तहत मुआवजा प्राप्त करने के बाद दूसरे अधिनियम के तहत दावा करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि एक मंच पर मिले मुआवजे को दूसरे मंच द्वारा समायोजित करने का तर्क भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अदालतों को...

पिछली छोटी सज़ाएं लगातार उत्कृष्ट सर्विस रिकॉर्ड पर भारी नहीं पड़ सकतीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने अनिवार्य रिटायरमेंट रद्द किया
पिछली छोटी सज़ाएं लगातार 'उत्कृष्ट' सर्विस रिकॉर्ड पर भारी नहीं पड़ सकतीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने अनिवार्य रिटायरमेंट रद्द किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने "अक्षमता" के आधार पर पुलिस इंस्पेक्टर का अनिवार्य रिटायरमेंट का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने इसे मनमाना और छोटी सज़ाओं पर चुनिंदा रूप से निर्भर बताया, जबकि उसके लगातार उत्कृष्ट सर्विस रिकॉर्ड को नज़रअंदाज़ किया गया, जिसमें "अच्छा" और "बहुत अच्छा" प्रदर्शन दिखाया गया।जस्टिस फरजंद अली की बेंच ने कहा कि राज्य राजस्थान सिविल सर्विसेज (पेंशन) नियम, 1996 ("नियम") के नियम 53(1) और कार्मिक विभाग (DoP) द्वारा 21 अप्रैल, 2000 को जारी सर्कुलर के तहत बाध्यकारी दिशानिर्देशों का पालन करने...

डिजिटल ठगी के खिलाफ देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान की जरूरत: राजस्थान हाइकोर्ट
डिजिटल ठगी के खिलाफ देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान की जरूरत: राजस्थान हाइकोर्ट

डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताते हुए राजस्थान हाइकोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया, टीवी और रेडियो के माध्यम से देशव्यापी जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि आम लोगों को ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जा सके।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने यह टिप्पणी दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। इन आरोपियों के खिलाफ कई साइबर शिकायतें दर्ज थीं और उनके बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया।मामले में...

मामूली विरोधाभास और शत्रुतापूर्ण गवाह दोषसिद्धि को प्रभावित नहीं करते: 33 साल पुराने मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने धारा 324 IPC की सज़ा बरकरार रखी
मामूली विरोधाभास और शत्रुतापूर्ण गवाह दोषसिद्धि को प्रभावित नहीं करते: 33 साल पुराने मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने धारा 324 IPC की सज़ा बरकरार रखी

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि गवाहों के बयान में मामूली विरोधाभास या कुछ अभियोजन गवाहों के शत्रुतापूर्ण हो जाने मात्र से अभियोजन का मामला कमजोर नहीं होता, यदि संपूर्ण साक्ष्य विश्वसनीय और संगत हो।जस्टिस अरुण मोंगा की पीठ ने यह टिप्पणी धारा 324 भारतीय दंड संहिता (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना) के तहत दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई करते हुए की।अपीलकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि अभियोजन के कुछ गवाह शत्रुतापूर्ण हो गए पीड़ित पक्ष के पारिवारिक गवाहों के बयानों में विरोधाभास है तथा...

हस्ताक्षर दिखाकर दस्तावेज़ छिपाकर क्रॉस-एग्जामिनेशन करना अस्वीकार्य, राजस्थान हाईकोर्ट ने पिजन होल थ्योरी पर लगाई समय-सीमा
हस्ताक्षर दिखाकर दस्तावेज़ छिपाकर क्रॉस-एग्जामिनेशन करना अस्वीकार्य, राजस्थान हाईकोर्ट ने 'पिजन होल थ्योरी' पर लगाई समय-सीमा

राजस्थान हाईकोर्ट जज जस्टिस संजीत पुरोहित की एकल पीठ ने संपत्ति विवाद से जुड़े एक पुराने सिविल मुकदमे में साक्ष्य कानून की महत्वपूर्ण व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट किया कि किसी गवाह से जिरह के दौरान दस्तावेज़ का केवल हस्ताक्षर वाला भाग दिखाकर शेष सामग्री छिपाना सामान्यतः स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने कहा कि ऐसी पद्धति भ्रामक हो सकती है और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों के विपरीत है।याचिकाकर्ता राजेश कुमार ने पाली स्थित मरुधर होटल से संबंधित संपत्ति को संयुक्त हिन्दू परिवार की संपत्ति बताते हुए...