राज�थान हाईकोट

राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 के आदेश के बावजूद निपटाए गए मामले को फिर से उठाने पर जुर्माना लगाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने 2013 के आदेश के बावजूद निपटाए गए मामले को फिर से उठाने पर जुर्माना लगाया

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जो प्रतिवादियों को दिया जाना है। 2013 में पहले ही निपटाए जा चुके एक मामले को अदालत के फैसले को लागू करने के बजाय बार-बार चुनौती देने पर प्रतिवादियों को यह जुर्माना देना होगा।जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ, 2013 के पूर्व निपटाए गए आदेश के आधार पर 2023 में पारित सिंगल जज के आदेश के विरुद्ध दायर अंतर-न्यायालयीय अपील पर सुनवाई कर रही थी।प्रतिवादी 1985 में शारीरिक शिक्षा शिक्षक के रूप में नियुक्त हुआ था,...

मिसिंग व्यक्तियों के मामलों में जांच से असंतुष्ट होने पर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका सामान्य तौर पर नहीं दायर की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
मिसिंग व्यक्तियों के मामलों में जांच से असंतुष्ट होने पर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका सामान्य तौर पर नहीं दायर की जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि किसी लापता व्यक्ति के मामले में यह याचिका सिर्फ इसलिए नहीं दी जा सकती कि जांच की स्थिति जाननी हो या जांच के तरीके से संतुष्ट न हों।न्यायालय ने बताया कि बन्दी प्रत्यक्षीकरण की शक्ति बढ़ी है, लेकिन इसके लिए कोई सख्त नियम नहीं है। यदि किसी को जांच की निगरानी या प्रभावी जांच के निर्देश चाहिए, तो इसके लिए आपराधिक प्रक्रिया कानून में वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं, और ऐसे मामलों को सक्षम अदालत देखेगी। यह याचिका...

राजस्थान सरकार ने ट्रांसजेंडर को OBC श्रेणी में रखने के फैसले का हाईकोर्ट में किया बचाव, कहा - आरक्षण नीति कार्यपालिका का विषय
राजस्थान सरकार ने ट्रांसजेंडर को OBC श्रेणी में रखने के फैसले का हाईकोर्ट में किया बचाव, कहा - आरक्षण नीति कार्यपालिका का विषय

राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने हाई कोर्ट में अपने उस सर्कुलर का बचाव किया, जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के रूप में वर्गीकृत किया गया, बजाय इसके कि उन्हें क्षैतिज आरक्षण (Horizontal Reservation) दिया जाए।जनवरी, 2023 के इस सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में सरकार ने कहा कि नीति-निर्माण का क्षेत्र, जिसमें आरक्षण नीति भी शामिल है। इसकी सीमा तथा संरचना कार्यपालिका और विधायी क्षमता का विषय है।सरकार ने तर्क दिया कि वैधानिक ढांचे का उल्लंघन...

फीस जमा करने में एक दिन की देरी पर 5 लाख किए जब्त, राजस्थान हाईकोर्ट ने काउंसलिंग बोर्ड को लगाई फटकार
फीस जमा करने में एक दिन की देरी पर 5 लाख किए जब्त, राजस्थान हाईकोर्ट ने काउंसलिंग बोर्ड को लगाई फटकार

राजस्थान हाई कोर्ट ने एक सफल NEET उम्मीदवार को बड़ी राहत देते हुए काउंसलिंग बोर्ड के कठोर फ़ैसले को पलट दिया। उम्मीदवार को फीस जमा करने में केवल एक दिन की देरी के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया, जिसके बाद बोर्ड ने उसकी 5 लाख की ज़मानत राशि भी जब्त कर ली थी। कोर्ट ने इस जब्ती को अन्यायपूर्ण रूप से धनी होने का स्पष्ट मामला बताते हुए बोर्ड को फटकार लगाई।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने राय दी कि केवल प्रक्रियात्मक अनियमितताओं या देरी के कारण जिन्हें माफ़ किया जा सकता है, मेधावी उम्मीदवारों के सपनों को नहीं...

साक्ष्य के अभाव में मौत की सज़ा पर हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, आरोपी को किया बरी
साक्ष्य के अभाव में मौत की सज़ा पर हाईकोर्ट ने जताई हैरानी, आरोपी को किया बरी

राजस्थान हाईकोर्ट ने चौंकाने वाले फैसले में दो भाई-बहनों की हत्या और बहन के साथ कथित बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया।कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत द्वारा दिए गए मृत्युदंड के फैसले पर गहरा आश्चर्य व्यक्त करते हुए राज्य द्वारा दायर मृत्युदंड संदर्भ को भी अस्वीकार कर दिया।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस अनूप सिंघी की खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह अविश्वसनीय है कि जिस मामले में न्यायालय को अभियोजन पक्ष के दावे का समर्थन करने वाले साक्ष्य का कोई निशान नहीं मिल रहा है,...

कोई भी माता-पिता अपने बच्चे को घातक नुकसान नहीं पहुंचाएगा: राजस्थान हाईकोर्ट ने पिता की हत्या की सज़ा गैर-इरादतन हत्या में बदली
कोई भी माता-पिता अपने बच्चे को घातक नुकसान नहीं पहुंचाएगा: राजस्थान हाईकोर्ट ने पिता की हत्या की सज़ा गैर-इरादतन हत्या में बदली

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में एक पिता की हत्या की सज़ा गैर-इरादतन हत्या में बदल दी। पिता को तेज धार वाले औजार से अपने बेटे की गर्दन पर वार करके उसे घातक रूप से घायल करने का दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने आजीवन कारावास की सज़ा को घटाकर सात साल की जेल की।जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने अभियोजन पक्ष के गवाहों जिनमें अपीलकर्ता की पत्नी और बेटी भी शामिल थीं, की गवाही पर विचार किया। इन गवाहों ने दावा किया कि अपीलकर्ता एक क्रोधी स्वभाव का व्यक्ति है और उसमें...

राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहरे दंड के आधार पर रिटायर कर्मचारी के खिलाफ़ दूसरी चार्जशीट रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट ने 'दोहरे दंड' के आधार पर रिटायर कर्मचारी के खिलाफ़ दूसरी चार्जशीट रद्द की

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में रिटायर सरकारी कर्मचारी के खिलाफ़ समान आरोपों पर जारी की गई दूसरी चार्जशीट रद्द की। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 20(2) के तहत डबल जियोपार्डी (दोहरा दंड) के सिद्धांत का उल्लंघन माना।जस्टिस अनूप कुमार ढंड की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता के ख़िलाफ़ पहले भी इन्हीं आरोपों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई, जिसे 1991 में बंद कर दिया गया। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के स्पेशल कोर्ट की अदालत से उन्हें 2000 में बरी भी कर दिया...

कोमा में गए कर्मचारी को दो साल से वेतन न देना अमानवीय, अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: राजस्थान हाईकोर्ट ने 7 दिन में बकाया देने का आदेश दिया
कोमा में गए कर्मचारी को दो साल से वेतन न देना अमानवीय, अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: राजस्थान हाईकोर्ट ने 7 दिन में बकाया देने का आदेश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस बेरुखी पर कड़ी नाराज़गी जताई, जिसमें एक सरकारी कर्मचारी, जो 2023 से कोमा में है, उसको दो साल से वेतन नहीं दिया जा रहा और उसके इलाज के बिलों की अदायगी भी नहीं की गई। अदालत ने इसे अमानवीय मनमाना और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया।जस्टिस रवि चिरानिया की पीठ ने कहा कि राज्य का यह रवैया न केवल संवेदनहीन है बल्कि कानून द्वारा स्थापित सिद्धांतों के भी विपरीत है। अदालत ने बिना राज्य का जवाब मांगे सीधे निर्देश दिया कि कर्मचारी के वेतन और चिकित्सीय...

Section 336(2) Municipalities Act | ट्रांसफर ऑर्डर के लिए अधिकारी की सहमति आवश्यक नहीं, प्रतिनियुक्ति से भिन्न: राजस्थान हाईकोर्ट
Section 336(2) Municipalities Act | ट्रांसफर ऑर्डर के लिए अधिकारी की सहमति आवश्यक नहीं, प्रतिनियुक्ति से भिन्न: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 336(2) के अंतर्गत ट्रांसफर ऑर्डर प्रतिनियुक्ति के माध्यम से ट्रांसफर नहीं माना जा सकता, क्योंकि इस प्रावधान में अधिकारी की सहमति का प्रावधान नहीं है, जो प्रतिनियुक्ति के लिए आवश्यक है।अदालत ने कहा कि धारा 336(2) के अंतर्गत आदेश जारी होने के बाद अधिकारी/कर्मचारी के पास स्थानांतरित स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता।बता दें, धारा 336 किसी अधिकारी या सरकारी कर्मचारी के नगर पालिका से दूसरी नगर पालिका में...

राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला: पति की गैरमौजूदगी में मां द्वारा नोटिस ठुकराने के आधार पर पत्नी को दिया गया एकतरफा तलाक अमान्य
राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला: पति की गैरमौजूदगी में मां द्वारा नोटिस ठुकराने के आधार पर पत्नी को दिया गया एकतरफा तलाक अमान्य

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर न्यायालय का नोटिस स्वयं संबंधित व्यक्ति या उसके अधिकृत प्रतिनिधि के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा ठुकराया जाता है तो उसे कानूनी रूप से वैध अस्वीकार नहीं माना जा सकता।हाईकोर्ट की यह टिप्पणी उस मामले में आई, जिसमें फैमिली कोर्ट ने पत्नी को यह मानते हुए एकपक्षीय तलाक (एक्स-पार्टी डिवोर्स) दे दिया कि पति को भेजा गया नोटिस उसकी मां ने ठुकरा दिया था।जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ पति की अपील पर सुनवाई कर रही थी। पति ने...

राजस्थान हाईकोर्ट ने फोरम शॉपिंग के लिए वादियों की कड़ी आलोचना की, ₹1 लाख का जुर्माना लगाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने "फोरम शॉपिंग" के लिए वादियों की कड़ी आलोचना की, ₹1 लाख का जुर्माना लगाया

"फोरम शॉपिंग" की प्रथा को गंभीरता से लेते हुए और इसे बेहद बदनाम बताते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने इसके लिए कई याचिकाकर्ताओं पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया।अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें कुछ संस्थानों ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 से आगे के लिए बी.एससी. नर्सिंग कोर्स में काउंसलिंग के लिए पात्र संस्थानों की सूची में अपना नाम शामिल करने की मांग की।जस्टिस समीर जैन फोरम शॉपिंग के एक जैसे मुद्दे पर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे, जिनमें क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र न्यायालय की जयपुर पीठ के समक्ष होने...

स्टूडेंट आत्महत्याएं मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र से मेंटल हेल्थकेयर के लिए उठाए गए कदमों पर जानकारी मांगी
स्टूडेंट आत्महत्याएं मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र से मेंटल हेल्थकेयर के लिए उठाए गए कदमों पर जानकारी मांगी

राजस्थान हाईकोर्ट ने केंद्र, राज्य, यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग (UGC) और CBI को मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता उपलब्ध कराने और सभी स्तरों पर मनोवैज्ञानिक रखरखाव और मानसिक स्वास्थ्य विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 10 से 30 वर्ष की आयु के स्टूडेंट्स में आत्महत्या की प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला गया। याचिका में दावा किया गया कि इसके बावजूद, शैक्षणिक...

वैक्सीनेटर नर्स नहीं, काम और जिम्मेदारियाँ अलग: राजस्थान हाईकोर्ट ने नियुक्ति की याचिका खारिज की
वैक्सीनेटर नर्स नहीं, काम और जिम्मेदारियाँ अलग: राजस्थान हाईकोर्ट ने नियुक्ति की याचिका खारिज की

राजस्थान हाईकोर्ट ने उन उम्मीदवारों की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने नर्स ग्रेड-II पद पर नियुक्ति का दावा अपने टीकाकरण (Vaccinator) के अनुभव के आधार पर किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों पद अलग-अलग हैं और इनके कार्य व जिम्मेदारियाँ भिन्न हैं।याचिकाकर्ताओं ने नर्स ग्रेड-II की भर्ती में बोनस अंक देने की मांग की थी। यह बोनस अंक उन अभ्यर्थियों को दिए जाते हैं जिनके पास विज्ञापित पद के समान प्रकृति के कार्य का अनुभव प्रमाणपत्र होता है। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उसके पास मुख्य चिकित्सा एवं...

पूर्व चीफ जस्टिस की पेंशन याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा-दोहरी पेंशन का कोई कानूनी आधार नहीं
पूर्व चीफ जस्टिस की पेंशन याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने कहा-दोहरी पेंशन का कोई कानूनी आधार नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस फरजंद अली के नेतृत्व वाली खण्डपीठ ने झारखण्ड हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस प्रकाश टाटिया द्वारा राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद की पेंशन के लिए दायर याचिका खारिज की।जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस सिंघी की खण्डपीठ ने रिपोर्टेबल जजमेंट में स्पष्ट किया कि राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को अलग से पेंशन का अधिकार नहीं है, यदि वह पहले से उच्च संवैधानिक पद से पेंशन प्राप्त कर रहे हों।जस्टिस टाटिया ने राज्य सरकार द्वारा पेंशन लाभ से वंचित करने के आदेशों को चुनौती...

राजस्व गांवो का निर्माण विधायी नहीं, प्रशासनिक कार्य, मनमाना न हो तो हस्तक्षेप नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्व गांवो का निर्माण विधायी नहीं, प्रशासनिक कार्य, मनमाना न हो तो हस्तक्षेप नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने ग्राम सभा की बैठक बुलाए बिना नए राजस्व ग्रामों के निर्माण को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि किसी ग्राम का निर्माण या राजस्व ग्राम की सीमा में परिवर्तन ग्राम की विशिष्ट आवश्यकताओं पर निर्भर करता है। इसलिए यह अनिवार्य रूप से एक प्रशासनिक कार्य है।याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि नए राजस्व ग्रामों के निर्माण का प्रस्ताव पंचायती राज अधिनियम और नियमों के प्रावधानों के अनुसार ग्राम सभा की बैठक बुलाए बिना ही प्रस्तुत किया गया।इसके अलावा यह भी तर्क...

सिर्फ़ संदेह के आधार पर जनप्रतिनिधि को निलंबित करना जनता के हितों के विपरीत : राजस्थान हाईकोर्ट
सिर्फ़ संदेह के आधार पर जनप्रतिनिधि को निलंबित करना जनता के हितों के विपरीत : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने जैतारण नगरपालिका बोर्ड के चेयरमैन का निलंबन आदेश रद्द करते हुए कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि को बिना ठोस आरोप या प्रमाण के केवल संदेह या शिकायत के आधार पर निलंबित करना न केवल उसे चुनने वाली जनता की इच्छा के खिलाफ़ है, बल्कि उसके स्वयं के हितों को भी नुकसान पहुंचाता है।जस्टिस कुलदीप माथुर की सिंगल बेंच ने कहा कि जनप्रतिनिधि से अपेक्षा की जाती है कि वे शासकीय अधिकारियों की सलाह और रिपोर्ट के आधार पर कार्य करें। यदि कोई फ़ाइल अधिकारियों द्वारा जांच-परख कर रखी जाती है तो सामान्य...

ई-फाइलिंग पोर्टल पर गड़बड़ियों की शिकायत: राजस्थान हाईकोर्ट ने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाई
ई-फाइलिंग पोर्टल पर गड़बड़ियों की शिकायत: राजस्थान हाईकोर्ट ने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाई

राजस्थान हाईकोर्ट ने टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की समय-सीमा एक महीने बढ़ाई। राजस्थान हाईकोर्ट की जस्टिस (डॉ.) पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने आयकर अधिनियम, 1961 (Income Tax Act) की धारा 44AB के तहत समय-सीमा 30 सितंबर, 2025 से आगे एक (एक) महीने के लिए बढ़ाई।यह दलील दी गई कि पिछले वर्षों में, CBDT ने समान परिस्थितियों में लगातार ऐसे विस्तार दिए हैं। वर्तमान स्थिति में ऐसा करने से इनकार करना मनमाना, अनुचित और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 का उल्लंघन...

पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण केवल एक बार का लाभ, करियर उन्नति का साधन नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण केवल एक बार का लाभ, करियर उन्नति का साधन नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सरकारी नौकरियों में पूर्व सैनिकों को दिया जाने वाला आरक्षण एक बार का लाभ है, जिसका उद्देश्य केवल पुनर्नियोजन की सुविधा देना है। इसे करियर में बार-बार उन्नति पाने का साधन नहीं बनाया जा सकता।जस्टिस समीर जैन की पीठ ने पूर्व सैनिक की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने ग्राम विकास अधिकारी (VDO) के पद पर आरक्षण का लाभ लेकर नियुक्ति के बाद दोबारा जूनियर अकाउंटेंट पद पर उसी आरक्षण का दावा किया था।मामलायाचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वह अभी दो साल की...

पंचायत प्रधान की बहाली के आदेश पर अमल क्यों नहीं? राजस्थान हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
पंचायत प्रधान की बहाली के आदेश पर अमल क्यों नहीं? राजस्थान हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारियों से जवाब तलब किया कि उन्होंने पंचायत समिति उचैन के प्रधान की बहाली के अदालत के आदेश पर अब तक अमल क्यों नहीं किया और न ही आदेश को चुनौती दी।जस्टिस गणेश राम मीणा ने सख़्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या राज्य अधिकारी अदालत के आदेश पर बिना अमल किए लंबे समय तक बैठे रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को उनके कार्यकाल से वंचित रखना जबकि संवैधानिक अदालत उनके पक्ष में आदेश दे चुकी है, गंभीर मामला है और इसे सख्ती से निपटाया जाना चाहिए।मामला एक अवमानना...