मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

भोजशाला स्थल पर मंदिर होने का कोई 'ठोस सबूत' नहीं, नमाज़ की अनुमति देने वाला 1935 का नोटिफिकेशन वैध: मुस्लिम पक्ष की दलील
भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद विवाद पर चल रही सुनवाई में मुस्लिम समुदाय के याचिकाकर्ताओं में से एक, काज़ी ज़कुल्लाह ने दलील दी कि विवादित स्थल पर मंदिर होने का कोई ठोस सबूत नहीं है।याचिकाकर्ता ने आगे दलील दी कि धार के शासक द्वारा अगस्त 1935 में जारी किया गया वह 'ऐलान' (घोषणा), जिसमें इस स्थल पर नमाज़ पढ़ने का अधिकार दिया गया था, एक वैध दस्तावेज़ है; क्योंकि 1904 से 1951 के बीच की अवधि में इस स्मारक को सरकार या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 'संरक्षित स्थल' घोषित नहीं किया गया।यह विवाद...

सिर्फ़ कई FIR होना ही BNS के तहत 'संगठित अपराध' का आरोप लगाने के लिए काफ़ी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ सिर्फ़ कई मामले होना ही BNS की धारा 111(4) के तहत संगठित अपराध का आरोप लगाने के लिए काफ़ी नहीं है, क्योंकि "कुछ बुनियादी मापदंड" हैं, जिन्हें यह आरोप लगाने से पहले पूरा करना ज़रूरी है।जस्टिस गजेंद्र सिंह ऐसे मामले पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें कोर्ट ने पहले राज्य से यह बताने को कहा था कि इस मामले में धारा 111 (संगठित अपराध) कैसे लागू होती है।कोर्ट ने पाया कि राज्य ने धारा 111 लगाने को इस आधार पर सही ठहराया कि याचिकाकर्ता के ख़िलाफ़ अलग-अलग...

कानून में कोई स्पष्ट रोक न होने पर लिमिटेशन एक्ट के तहत देरी को माफ़ किया जा सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि जहां किसी कानून में देरी को माफ़ करने पर स्पष्ट रोक न हो, वहां अधिकारी आवेदन, अपील, पुनर्विचार या कानूनी उपाय का लाभ उठाने में हुई देरी को माफ़ करने के लिए लिमिटेशन एक्ट के प्रावधानों की मदद ले सकते हैं।कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि अधिकारी याचिकाकर्ता के ज़्यादा स्टांप ड्यूटी वापस पाने के दावे की खूबियों की जांच करने में नाकाम रहे और उन्होंने केवल देरी के आधार पर ही उसे खारिज किया।जस्टिस दीपक खोट की बेंच ने यह टिप्पणी की:"जिन मामलों में कानून या प्रक्रिया...

कृषि जोत पर सीमा अधिनियम | मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अथॉरिटी को 14 साल पुराने मामले पर फैसला करने का निर्देश दिया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सेटलमेंट कमिश्नर को निर्देश दिया कि वे एमपी कृषि जोत पर सीमा अधिनियम, 1960 के तहत कृषि सीमा तय करने से जुड़े 14 साल पुराने मामले का निपटारा तेज़ी से करें।ऐसा करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस तरह की कार्यवाही का लंबे समय तक लंबित रहना रिमांड के मूल मकसद को ही खत्म कर देता है और संबंधित पक्षों को बेवजह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की बेंच ने टिप्पणी की:"दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड की जांच करने के बाद इस कोर्ट ने पाया कि...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्वालियर की पहाड़ियों को अतिक्रमण और भू-माफिया द्वारा अवैध खुदाई से बचाने के लिए समिति बनाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्वालियर की पहाड़ियों को पर्यावरण के नुकसान और भू-माफिया द्वारा अवैध अतिक्रमण से बचाने के लिए ग्वालियर के ज़िला कलेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष समिति बनाने का निर्देश दिया।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की डिवीज़न बेंच द्वारा दिया गया यह निर्देश, मध्य प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1956 की धारा 5(54-a) और 130B के तहत बताए गए 'सोशल ऑडिट' (सामाजिक लेखा-परीक्षा) के सिद्धांत पर आधारित था।यह याचिका जंडेल सिंह यादव ने दायर की थी, जिसमें ग्वालियर में पहाड़ियों की बड़े...

"बदले की भावना": मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जुए के आरोपों पर IAS अधिकारी के फार्महाउस पर छापा मारने वाले पुलिसकर्मी का सस्पेंशन रद्द किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारी का सस्पेंशन रद्द किया। इस अधिकारी ने एक ऐसे फार्महाउस पर छापा मारा, जिसके बारे में आरोप है कि वह एक अवैध जुआ रैकेट में शामिल है। बाद में पता चला कि वह फार्महाउस एक सेवारत IAS अधिकारी का है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह सस्पेंशन प्रशासनिक ज़रूरत के बजाय मनमाना और बदले की भावना से प्रेरित था।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने टिप्पणी की:"सस्पेंशन का आदेश अगली ही सुबह तुरंत जारी करना, साथ ही बिना सोचे-समझे लिया गया यह स्पष्ट फैसला... और वैसी ही परिस्थितियों में...

भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद विवाद | ASI के रिकॉर्ड और शिलालेखों से पता चलता है कि वहां मंदिर था: हिंदू याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में कहा
भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद विवाद पर चल रही सुनवाई मे याचिकाकर्ताओं में से एक कुलदीप तिवारी ने दलील दी कि उस जगह पर मिले शिलालेखों से साफ तौर पर मंदिर के अवशेष होने की बात साबित होती है।यह विवाद भोजशाला से जुड़ा है, जो 11वीं सदी का एक स्मारक है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है। हिंदू इस जगह को वाग्देवी, यानी देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानते हैं, जबकि मुसलमान इसे कमल मौला मस्जिद मानते हैं। ASI द्वारा 2003 में किए गए एक समझौते के तहत, हिंदू इस परिसर में मंगलवार को पूजा...

धर्मांतरण मामले में आरोपी को राहत नहीं, एमपी हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कथित धर्मांतरण मामले में आरोपी हेमराज टेलर के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के नाबालिग बेटे के बयान समेत रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका की ओर संकेत करती है।जस्टिस संदीप एन भट्टी की पीठ ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में FIR के आधार पर चल रही कार्यवाही को कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं माना जा...

बिना किसी टिप्पणी या उकसावे के उर्दू शायरी शेयर करने से धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी नहीं बढ़ती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूल के टीचर के खिलाफ़ WhatsApp स्टेटस पर उर्दू शायरी शेयर करने के मामले में दर्ज FIR रद्द की। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी अतिरिक्त टिप्पणी या उकसाने के इरादे के कविता शेयर करना, BNS की धारा 353(2) के तहत दुश्मनी बढ़ाने या सार्वजनिक उपद्रव फैलाने का अपराध नहीं माना जाएगा।जस्टिस BP शर्मा की बेंच ने कहा:"याचिकाकर्ता द्वारा बिना किसी अतिरिक्त टिप्पणी या उकसाने के इरादे के कविता शेयर करने को दुश्मनी बढ़ाने या सार्वजनिक उपद्रव फैलाने के तौर पर नहीं देखा जा सकता। ऐसा...

सिर्फ कॉल डिटेल रिकॉर्ड से आपराधिक साजिश साबित नहीं होती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक साजिश का मामला नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब तक बातचीत की सामग्री या “साझा आपराधिक मंशा” का ठोस प्रमाण न हो, तब तक केवल बार-बार फोन कॉल होना साजिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने क्राइम ब्रांच में तैनात कांस्टेबल के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही और आरोपपत्र रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया।अदालत ने कहा,“बातचीत की सामग्री के अभाव में केवल...

दोहरे दंड के खिलाफ याचिका देरी के आधार पर खारिज नहीं की जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि 'दोहरे दंड' (double jeopardy) के सिद्धांत का हवाला देने वाली याचिकाओं को केवल देरी या सबूत पेश करने की ज़रूरत के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि दोहरे दंड से सुरक्षा एक संवैधानिक और मौलिक अधिकार है। इसे ट्रायल के दौरान किसी भी समय इस्तेमाल किया जा सकता है।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की बेंच ने यह टिप्पणी की:"जब ऐसी कोई याचिका, जिसमें दोहरे दंड के सिद्धांत का हवाला दिया गया हो, दायर की जाती है तो उसे न तो देरी के आधार पर और न ही इस आधार पर...

भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद विवाद: जैन समुदाय ने भी मांगा विवादित स्थल पर पूजा करने का अधिकार
भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद विवाद पर चल रही सुनवाई में जैन याचिकाकर्ताओं ने बुधवार (6 मई) को यह तर्क दिया कि विवादित स्थल की वास्तुकला की विशेषताएं माउंट आबू में स्थित दिलवाड़ा जैन मंदिरों से मिलती-जुलती हैं।यह विवाद भोजशाला से जुड़ा है, जो 11वीं सदी का एक स्मारक है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है। हिंदू इस स्थल को वाग्देवी, यानी देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम इसे कमल मौला मस्जिद मानते हैं। ASI द्वारा 2003 में किए गए एक समझौते के तहत हिंदू मंगलवार...

नाबालिग यदि स्वयं घर छोड़कर जाए तो साथ जाने मात्र से अपहरण नहीं बनता: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई नाबालिग अपनी इच्छा से घर छोड़कर जाती है और कोई वयस्क केवल उसके साथ जाता है तो मात्र इस आधार पर उसे वैध अभिभावक की अभिरक्षा से अपहरण का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस प्रदीप मित्तल की पीठ ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 361 के तहत ले जाना या बहलाकर साथ ले जाना सिद्ध करने के लिए आरोपी की ओर से कोई सक्रिय और सकारात्मक कृत्य होना आवश्यक है।अदालत ने कहा,“धारा 361 में प्रयुक्त 'ले जाना' शब्द का अर्थ है आरोपी द्वारा ऐसा स्वैच्छिक और जानबूझकर...

दूसरे राज्य में जाने पर स्वतः नहीं मिलेगा अनुसूचित जाति का लाभ, भले वही जाति वहां भी सूचीबद्ध हो: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि कोई व्यक्ति यदि एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानांतरित होता है तो वह अपने साथ अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं ले जा सकता, भले ही उसकी जाति दोनों राज्यों में अनुसूचित जाति के रूप में मान्य हो।जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की पीठ ने कहा कि किसी जाति को किसी विशेष राज्य में अनुसूचित जाति का दर्जा वहां की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दिया जाता है जो दूसरे राज्य में समान हो यह आवश्यक नहीं है।अदालत ने कहा,“एक...

अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को अपनी पसंद का प्राचार्य चुनने का पूर्ण अधिकार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्यप्रदेश ने कहा है कि अल्पसंख्यक सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों (minority aided educational institutions) को अपने संस्थान का प्रमुख चुनने का संवैधानिक अधिकार है और इस अधिकार पर कोई भी प्रतिबंध संविधान के Article 30(1) का उल्लंघन होगा।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस आनंद सिंह बहारावत की खंडपीठ ने कहा कि यदि किसी अल्पसंख्यक संस्थान का प्रबंधन योग्य व्यक्ति को प्राचार्य या हेडमास्टर नियुक्त करने का फैसला करता है, तो अदालत उस निर्णय की उचितता या प्रक्रिया की जांच नहीं कर सकती।मामला S.S.L. Jain P.G....

ई-रिक्शा के रेगुलेशन और हाईवे पर उनके चलने पर रोक लगाने की मांग वाली PIL पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) पर नोटिस जारी किया, जिसमें राज्य में ई-रिक्शा के बिना किसी रेगुलेशन के चलने को लेकर चिंता जताई गई।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की डिवीज़न बेंच ने याचिका स्वीकार करने पर शुरुआती दलीलें सुनने के बाद निर्देश दिया:"प्रतिवादियों को सात कामकाजी दिनों के भीतर प्रोसेस फीस जमा करने पर नोटिस जारी किया जाए, जिसका जवाब चार हफ़्तों के भीतर देना होगा। इस बीच प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपना जवाब दाखिल करें।"याचिका में कहा गया कि भारत में...

जांच में खामियां होने पर भी अगर दुराचार स्वतंत्र रूप से साबित हो जाए तो सज़ा बरकरार रह सकती है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एमपी ग्रामीण बैंक में काम करने वाले ब्रांच मैनेजर को अनिवार्य रिटायरमेंट देने के अनुशासनात्मक अधिकारी का आदेश बरकरार रखा, भले ही उसके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक जांच में प्रक्रियागत खामियां पाई गईं।जस्टिस आशीष श्रोती की बेंच ने पाया कि प्रक्रियागत चूकों के कारण जांच में खामियां आ गई थीं, लेकिन वित्तीय दुराचार के स्वतंत्र सबूत अनिवार्य रिटायरमेंट की सज़ा बरकरार रखने के लिए काफी है।बेंच ने ज़ोर देकर कहा:"बैंक के एक सीनियर ऑफिसर होने के नाते याचिकाकर्ता से यह उम्मीद की जाती थी...

अनुकंपा नियुक्ति पैतृक संपत्ति नहीं, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र मांगना मनमाना: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति कोई पैतृक संपत्ति या उत्तराधिकार से मिलने वाला अधिकार नहीं है, इसलिए उसके लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र मांगना मनमाना और कानूनविहीन है।जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति मृत कर्मचारी के परिवार को अचानक आई आर्थिक कठिनाई से राहत देने के लिए नियोक्ता द्वारा दी जाने वाली रियायत है, न कि ऐसा अधिकार जो उत्तराधिकार के रूप में वारिसों में बंटे।अदालत ने कहा,“अनुकंपा नियुक्ति कोई पैतृक संपत्ति या संपत्ति संबंधी अधिकार नहीं है, जो...

भोजशाला विवाद में केंद्र का बड़ा दावा: नमाज़ की अनुमति वाला 1935 का नोटिफिकेशन वैध नहीं
भोजशाला मंदिर–कमाल मौला मस्जिद विवाद में केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को बताया कि वर्ष 1935 में धार रियासत द्वारा जारी वह अधिसूचना, जिसके आधार पर मुस्लिम पक्ष नमाज़ के अधिकार का दावा करता है विधिक रूप से वैध नहीं है।मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष हुई।केंद्र और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने दलील दी कि भोजशाला को वर्ष 1904 में ही संरक्षित स्मारक घोषित किया जा चुका है, इसलिए उसके बाद धार...

मृतकों के सम्मानजनक परिवहन के लिए मुफ्त शव वाहन हेल्पलाइन का प्रचार करे राज्य: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अपनी मुफ्त शव वाहन सेवा, 'मध्य प्रदेश मुक्ति वाहन योजना' का व्यापक प्रचार सुनिश्चित करे।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा यह देखते हुए किया कि राज्य सरकार ने पहले ही एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर स्थापित किया।खंडपीठ ने निर्देश दिया:"इस तथ्य को देखते हुए कि प्रतिवादी/राज्य प्राधिकरण ने याचिकाकर्ता द्वारा की गई प्रार्थना का पहले ही पालन किया, इस याचिका में अब और...
