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कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी और आनंद बोस से मानहानि मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाने को कहा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी और आनंद बोस से मानहानि मामले को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाने को कहा

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस द्वारा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी को लेकर दायर मानहानि मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्ण राव की पीठ ने पक्षों को सौहार्दपूर्ण ढंग से विवाद को निपटाने का सुझाव दिया, क्योंकि राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच हाईकोर्ट के समक्ष कानूनी लड़ाई वांछनीय नहीं होगी।पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की,"राज्यपाल और मुख्यमंत्री का न्यायालय के समक्ष लड़ना, यह ठीक नहीं है। न्यायालय को केवल वादियों के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए।"पीठ ने...

अर्नब गोस्वामी को राजस्थान हाईकोर्ट से मिली राहत, Hate Speech के आरोप वाली FIR में दंडात्मक कदम नहीं उठाने का आदेश
अर्नब गोस्वामी को राजस्थान हाईकोर्ट से मिली राहत, 'Hate Speech' के आरोप वाली FIR में दंडात्मक कदम नहीं उठाने का आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने अंतरिम आदेश में निर्देश दिया कि मीडिया हाउस रिपब्लिक के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी के खिलाफ रिपब्लिक भारत द्वारा मंदिर के विध्वंस पर एक रिपोर्ट के संबंध में उनके खिलाफ दर्ज "हेट स्पीच" वाली FIR में कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।ऐसा करते हुए न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि "भड़काऊ इरादे या प्रभाव से रहित सार्वजनिक हित की घटना की मात्र रिपोर्टिंग" को आईपीसी की धारा 153ए के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।संदर्भ के लिए, धारा 153ए उन कृत्यों को दंडित करती है,...

दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक याचिका में पत्नी के जवाब दाखिल करने के अधिकार को बंद करने वाला आदेश रद्द किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक याचिका में पत्नी के जवाब दाखिल करने के अधिकार को बंद करने वाला आदेश रद्द किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक मामलों से निपटने के दौरान फैमिली कोर्ट को सामान्य दीवानी कार्यवाही से अलग दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा,"परिवार से संबंधित विवादों से निपटने के दौरान न्यायालयों को सामान्य दीवानी कार्यवाही से बिल्कुल अलग दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।"न्यायालय एक पत्नी की याचिका पर विचार कर रहा था, जिसमें फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें जवाब दाखिल करने या लिखित बयान देने के उसके अधिकार को बंद कर दिया गया था।न्यायालय ने उक्त आदेश को वापस लेने के लिए...

पटना हाईकोर्ट ने हनी सिंह के गाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर आदेश पारित करने से किया इनकार
पटना हाईकोर्ट ने हनी सिंह के गाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर आदेश पारित करने से किया इनकार

पटना हाईकोर्ट ने मशहूर गायक यो यो हनी सिंह के नवीनतम चार्टबस्टर गाने मैनियाक में कथित अश्लीलता के खिलाफ एक्ट्रेस नीतू चंद्रा द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की।एक्ट्रेस ने गाने को हटाने सहित हनी सिंह के नए गाने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।मामले पर आदेश पारित करने के लिए तारीख तय की गई। हालांकि शुरू में एक्टिंग चीफ जस्टिस आशुतोष कुमार और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ कोई आदेश पारित करने के लिए इच्छुक नहीं थी बल्कि उन्होंने कहा कि मामला जनहित के...

झारखंड हाईकोर्ट ने नाबालिगों की तस्करी मामले में जांच के लिए UIDAI को आधार विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, कहा- प्रक्रियात्मक कानून न्याय में बाधा नहीं डाल सकता
झारखंड हाईकोर्ट ने नाबालिगों की तस्करी मामले में जांच के लिए UIDAI को आधार विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, कहा- प्रक्रियात्मक कानून न्याय में बाधा नहीं डाल सकता

झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को तस्करी के शिकार नाबालिगों के आधार कार्ड का विवरण सीलबंद लिफाफे में जांच एजेंसी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने यूआईडीएआई को तस्करी के शिकार नाबालिगों के आधार कार्ड का विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इस आदेश में आधार अधिनियम, 2016 की धारा 33(1) के तहत उसकी आपत्ति को खारिज कर दिया गया है। धारा 33(1) के अनुसार, आधार कार्ड का विवरण जांच एजेंसी...

एक बार अल्पसंख्यक संस्थान घोषित होने के बाद संगठन हमेशा अपना अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार रखता है: कलकत्ता हाईकोर्ट
एक बार अल्पसंख्यक संस्थान घोषित होने के बाद संगठन हमेशा अपना अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार रखता है: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने माना कि एक बार किसी संगठन को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दे दिया जाता तो उसे अल्पसंख्यक संस्थान के रूप में मान्यता मिलती रहेगी। उससे यह अपेक्षा नहीं की जाएगी कि वह इस दर्जे को बरकरार रखने के लिए नियमित रूप से राज्य प्राधिकारियों से संपर्क करे।अल्पसंख्यक विद्यालय के दर्जे को चुनौती देने वाला मामला चीफ जस्टिस टीएस शिवगनम और जस्टिस सी. चटर्जी (दास) की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया जिसने रिट याचिका को खारिज कर दिया।खंडपीठ ने कहा,"अल्पसंख्यक हमेशा अल्पसंख्यक ही रहता है।"अदालत...

दिल्ली कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया, दिल्ली सरकार से रोजगार देने को कहा
दिल्ली कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया, दिल्ली सरकार से रोजगार देने को कहा

दिल्ली कोर्ट ने एसिड अटैक के तीन पीड़ितों को 20 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया, जिसमें दो लड़कियां भी शामिल हैं।अदालत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह लड़कियों में से एक को उसकी योग्यता और मेडिकल स्थिति के अनुसार रोजगार मुहैया कराए, जो अब बालिग और स्नातक हो चुकी है।तीस हजारी कोर्ट की एडिशनल सेशन जज (POCSO-6) अदिति गर्ग ने आरोपी राघव मुखिया को भारतीय दंड संहिता (IPS) की धारा 326A के तहत 10 साल की कठोर कारावास और 20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाते हुए यह आदेश पारित किया।यह घटना...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हेयर कलर ब्रांड STREAX के भ्रामक रूप से समान ट्रेडमार्क का उपयोग करने से कंपनी को कंपनी को रोका
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हेयर कलर ब्रांड STREAX के 'भ्रामक रूप से समान' ट्रेडमार्क का उपयोग करने से कंपनी को कंपनी को रोका

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (5 मार्च) को एक इकाई को ऐसे ट्रेडमार्क का उपयोग करने से रोक दिया] जो हेयर कलर ब्रांड - Streax (स्ट्रीक्स) से 'भ्रामक रूप से मिलता-जुलता' है। सिंगल जज जस्टिस मनीष पिटाले ने अपने आदेश में कहा कि वादी- हाइजीनिक रिसर्च इंस्टीट्यूट प्राइवेट लिमिटेड, जो ट्रेडमार्क 'स्ट्रीक्स' का मालिक है, ने सफलतापूर्वक यह तथ्य रिकॉर्ड पर लाया है कि वह 1 जुलाई, 2002 से इस ट्रेडमार्क का उपयोग कर रहा है, जबकि प्रतिवादी कंपनी का ट्रेडमार्क Streak Street (स्ट्रीक स्ट्रीट) 2018 में ही पंजीकृत...

वर्दीधारी व्यक्ति द्वारा अनाधिकृत रूप से ड्यूटी से अनुपस्थित रहना, अपनी मृत्यु की झूठी सूचना भेजना घोर कदाचार: राजस्थान हाईकोर्ट
वर्दीधारी व्यक्ति द्वारा अनाधिकृत रूप से ड्यूटी से अनुपस्थित रहना, अपनी मृत्यु की झूठी सूचना भेजना घोर कदाचार: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने CRPF कांस्टेबल की बर्खास्तगी को बरकरार रखा, जो अधिकारियों को कोई सूचना दिए बिना स्वीकृत अवकाश से 65 दिन अधिक समय तक जानबूझकर ड्यूटी से अनुपस्थित रहा और जब उसे ड्यूटी पर वापस आने के लिए नोटिस जारी किया गया तो उसने अपनी मृत्यु की गलत सूचना भेजी।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने अपने आदेश में कहा,"इस न्यायालय का यह सुविचारित मत है कि वर्दीधारी व्यक्ति को अधिक अनुशासन बनाए रखना चाहिए और अनधिकृत रूप से ड्यूटी से अनुपस्थित रहना कदाचार का सबसे गंभीर कृत्य है। अनुशासित बल से...

SCAORA ने सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले वकीलों की सहायता के लिए हेल्प डेस्क शुरू की
SCAORA ने सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले वकीलों की सहायता के लिए हेल्प डेस्क शुरू की

सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने अपने सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट में वकालत से संबंधित प्रक्रियात्मक और महत्वपूर्ण मामलों में सहायता करने के लिए एक हेल्प डेस्क शुरू की। हेल्प डेस्क पर अनुभवी AOR काम करेंगे, जो कई तरह के मुद्दों पर मार्गदर्शन कर सकते हैं, जिसमें फाइलिंग की समय-सीमा, केस की तैयारी और अदालती प्रक्रियाएं शामिल हैं।SCAORA के मानद सचिव मिस्टर निखिल जैन ने सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल को लिखे पत्र में जजों को नई पहल के शुभारंभ के बारे में बताया। जजों के बहुमूल्य...

आपराधिक कानून को डेटा और साक्ष्य के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत, उम्मीद है युवा वकील स्वेच्छा से इस क्षेत्र में शामिल होंगे: सीजेआई संजीव खन्ना
आपराधिक कानून को डेटा और साक्ष्य के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत, उम्मीद है युवा वकील स्वेच्छा से इस क्षेत्र में शामिल होंगे: सीजेआई संजीव खन्ना

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना ने गुरुवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कई युवा वकील आपराधिक कानून के क्षेत्र में अपने पहले करियर विकल्प के रूप में शामिल होंगे, न कि दूसरे विकल्प या मजबूरी के रूप में।सीजेआई ने कहा कि भले ही कई नए वकील आपराधिक प्रैक्टिस नहीं करना चाहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि जिला अदालतों में अधिकांश मुकदमे आपराधिक ही होते हैं।उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि आपराधिक कानून अविश्वसनीय रूप से विशाल है और हमारे कानूनी कार्यबल में इसका एक अलग स्थान है। यह सीधे व्यक्तिगत...

पड़ोसियों, रिश्तेदारों द्वारा उठाई गई आपत्तियां अपराधी की पैरोल से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकतीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
पड़ोसियों, रिश्तेदारों द्वारा उठाई गई आपत्तियां अपराधी की पैरोल से इनकार करने का एकमात्र आधार नहीं हो सकतीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि स्थानीय निवासियों या रिश्तेदारों द्वारा उठाई गई कोई भी आपत्ति पैरोल से इनकार करने का एकमात्र निर्णायक आधार नहीं हो सकती।जस्टिस रंजन शर्मा ने कहा,"स्थानीय निवासियों/रिश्तेदारों द्वारा उठाई गई कोई भी आपत्ति पैरोल से इनकार करने का एकमात्र निर्णायक आधार नहीं हो सकती। स्थानीय निवासियों/रिश्तेदारों द्वारा उठाई गई ऐसी आपत्ति को प्रासंगिक विचारों यानी सामग्री-इनपुट-रिपोर्ट-तथ्यों को पूरी तरह से दरकिनार करके "पूर्व-प्रभुत्व और अधिक महत्व" नहीं दिया जा सकता और...

पंजाब के गांवों की लड़कियां दूर स्थित स्कूलों के कारण पढ़ाई छोड़ रही हैं: हाईकोर्ट ने लड़कियों के स्कूलों पर राज्य सरकार से नया हलफनामा मांगा
पंजाब के गांवों की लड़कियां दूर स्थित स्कूलों के कारण पढ़ाई छोड़ रही हैं: हाईकोर्ट ने लड़कियों के स्कूलों पर राज्य सरकार से नया हलफनामा मांगा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के पटियाला-राजपुरा हाईवे पर स्कूल और बुनियादी ढांचे की अनुपलब्धता के कारण गांव की लड़कियों द्वारा स्कूल छोड़ने के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए पंजाब सरकार से नया हलफनामा मांगा।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमित गोयल की खंडपीठ ने कहा,"पंजाब राज्य द्वारा दायर जवाब अनिवार्य रूप से सह-शिक्षा स्कूलों से संबंधित है, लेकिन 25.07.2024 को मामले में संज्ञान लेते समय यह न्यायालय अनिवार्य रूप से मीडिया रिपोर्ट से परेशान है, जिसमें कहा गया कि लड़कियों के लिए विशेष रूप...

लाइव टीवी डिबेट के दौरान मनुस्मृति के पन्ने फाड़ना प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने RJD प्रवक्ता को राहत देने से किया इनकार
लाइव टीवी डिबेट के दौरान 'मनुस्मृति' के पन्ने फाड़ना प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने RJD प्रवक्ता को राहत देने से किया इनकार

यह देखते हुए कि लाइव टीवी डिबेट में 'मनुस्मृति' के पन्ने फाड़ना प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध है, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की प्रवक्ता और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की पीएचडी स्टूडेंट प्रियंका भारती के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार करते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।भारती पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 के तहत कथित तौर पर समाचार चैनलों इंडिया टीवी और टीवी9 भारतवर्ष द्वारा आयोजित लाइव डिबेट के दौरान मनुस्मृति के कुछ पन्ने फाड़ने का आरोप लगाया...

[अनुकंपा नियुक्ति] कर्मचारी की मृत्यु की तिथि पर लागू कानून, नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किए जाने की तिथि से परे लागू होगा: राजस्थान हाईकोर्ट
[अनुकंपा नियुक्ति] कर्मचारी की मृत्यु की तिथि पर लागू कानून, नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किए जाने की तिथि से परे लागू होगा: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक दशक पुराने मामले में याचिकाकर्ता को अनुकंपा नियुक्ति से राहत प्रदान करते हुए कहा कि ऐसी नियुक्ति को नियंत्रित करने वाली नीति संबंधित व्यक्ति की मृत्यु की तिथि पर लागू होनी चाहिए, न कि ऐसी नियुक्ति के लिए आवेदन प्रस्तुत किए जाने की तिथि पर।जस्टिस मुन्नूरी लक्ष्मण और जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी की खंडपीठ अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (AVVNL) द्वारा एकल जज के उस निर्णय के विरुद्ध दायर विशेष अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ताओं को अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्रतिवादी...

एससी कॉलेजियम ने जस्टिस जॉयमाला बागची को सुप्रीम कोर्ट जज बनाने का दिया प्रस्ताव; 2031 में बन सकते हैं सीजेआई
एससी कॉलेजियम ने जस्टिस जॉयमाला बागची को सुप्रीम कोर्ट जज बनाने का दिया प्रस्ताव; 2031 में बन सकते हैं सीजेआई

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस जॉयमाला बागची को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने का प्रस्ताव दिया।कॉलेजियम ने इस तथ्य पर विचार किया कि 18 जुलाई 2013 को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) के रूप में जस्टिस अल्तमस कबीर के रिटायर होने के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट से भारत का कोई चीफ जस्टिस नहीं आया।25 मई, 2031 को जस्टिस के.वी. विश्वनाथन के रिटायर होने पर जस्टिस जॉयमाला बागची 02 अक्टूबर, 2031 को अपनी रिटायर तक सीजेआई के रूप में पदभार ग्रहण करने की संभावना रखते हैं। जस्टिस जॉयमाला बागची के पास...

सुप्रीम ने सभी हाईकोर्ट को निष्पादन याचिकाओं का 6 महिने के भीतर निपटारा करने का आदेश दिया
सुप्रीम ने सभी हाईकोर्ट को निष्पादन याचिकाओं का 6 महिने के भीतर निपटारा करने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट को जिला न्यायपालिका में लंबित सभी निष्पादन याचिकाओं की जानकारी मंगाने का निर्देश दिया। न्यायालय ने यह निर्देश देते हुए देखा कि निष्पादन न्यायालय उपयुक्त आदेश पारित करने में तीन से चार वर्ष का समय ले रहे हैं, जिससे उस पूरी डिक्री का उद्देश्य विफल हो रहा है जो डिक्रीधारक के पक्ष में है।कोर्ट ने हाईकोर्ट को यह निर्देश दिया कि वे एक प्रशासनिक परिपत्र जारी करें, जिसमें निचली अदालतों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा जाए कि लंबित निष्पादन याचिकाओं का निपटारा छह महीने के...