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'मानव स्वास्थ्य से ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं': बॉम्बे हाईकोर्ट ने कबूतरों की बीट के दुष्प्रभावों की चर्चा की ; 'कबूतरखानों' को गिराने पर रोक जारी रहेगी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (24 जुलाई ) को मुंबई में कबूतरखानों को गिराने के बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के फैसले के पक्ष और विपक्ष में दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने सुनवाई के दरमियान कहा कि अगर कबूतरों के प्रजनन और उन्हें कबूतरखानों में इकट्ठा करने से कोई खतरा है या ऐसे खतरे की संभावना है तो यह निश्चित रूप से गंभीर सामाजिक चिंता का विषय है।जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने कबूतरों और कबूतरों की बीट से मनुष्यों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का संज्ञान लिया, जो...
शिकायतकर्ता की कैद विलंब माफी का वैध कारण: J&K&L हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता का जेल में बिताया गया समय अपील दायर करने में देरी को माफ़ करने का एक वैध कारण है, भले ही उसका प्रतिनिधित्व करने के लिए एक विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी नियुक्त की गई हो। जस्टिस संजय धर ने यह टिप्पणी चेक बाउंस की शिकायतों को बहाल करने की मांग वाली दो आपराधिक अपीलों को स्वीकार करते हुए की, जिन्हें पहले अभियोजन न होने के कारण खारिज कर दिया गया था।विलंब माफी के आवेदनों को स्वीकार करते हुए जस्टिस संजय धर ने कहा,"एक बार यह स्थापित हो जाने के बाद कि...
सहमति की उम्र 18 वर्ष ही रहनी चाहिए; किशोर संबंधों के मामलों में न्यायिक विवेक का प्रयोग किया जा सकता है: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
सुप्रीम कोर्ट में यौन अपराधों के मामले में भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली की प्रतिक्रिया में सुधार के संबंध में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें दी गई लिखित दलील में यूनियन ऑफ इंडिया ने भारतीय कानून के तहत सहमति की वैधानिक आयु 18 वर्ष से कम करने के किसी भी कदम का विरोध किया है। केंद्र ने न्यायमित्र सीनिय एडवोकेट इंदिरा जयसिंह के उस सुझाव का भी विरोध किया जिसमें न्यायालय ने 16 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों के बीच सहमति से यौन गतिविधियों को POCSO अधिनियम और संबंधित कानूनों के दायरे से बाहर रखने...
बलिया एसपी ने खेद व्यक्त किया, सुधारात्मक कदम उठाए; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा अदालत आदेश को FIR मानने का अध्याय बंद किया
हाईकोर्ट के आदेश की हूबहू नकल करके लिखित FIR दर्ज करने से जुड़े विवाद का पटाक्षेप करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 जुलाई को अपने पूर्व निर्देशों का पर्याप्त अनुपालन पाया और मामले के इस हिस्से को स्थगित करने का फैसला किया।बता दें, मामला एक स्कूल कर्मचारी की नियुक्ति में कथित हेराफेरी और मूल सेवा पुस्तिका के संदिग्ध गायब होने से संबंधित था। बलिया पुलिस ने कानून के अनुसार कार्यवाही करने के बजाय सीधे तौर पर अदालत के 29 मई के आदेश को ही लिखित प्राथमिकी मान लिया।इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने 3 जुलाई...
स्टूडेंट्स के कल्याण के लिए दिशानिर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने घोषणा की, कहा- मानसिक स्वास्थ्य अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग
स्टूडेंट्स के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य का अधिकार जीवन और सम्मान के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21) का एक अभिन्न अंग है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जीवन के अधिकार से अविभाज्य है। साथ ही उन्होंने कोचिंग सेंटरों और शैक्षणिक संस्थानों की विषाक्त रैंक और परिणाम संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आलोचना की।न्यायालय ने कहा,"शिक्षा का उद्देश्य शिक्षार्थी को मुक्त करना है, न...
अभियुक्त के प्रति कोई पूर्वाग्रह न उत्पन्न हुआ हो तो संज्ञान के बाद शिकायत में संशोधन किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि संज्ञान के बाद शिकायत में संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते कि अभियुक्त के प्रति कोई 'पूर्वाग्रह' न उत्पन्न हुआ हो और शिकायतकर्ता की क्रॉस एक्जामिनेशन का इंतज़ार किया जा रहा हो।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (IN Act) की धारा 138 के तहत शिकायत में संशोधन करने के शिकायतकर्ता के अनुरोध स्वीकार कर लिया। खंडपीठ ने कहा कि कोई जिरह पूरी नहीं हुई और "देसी घी (दूध उत्पाद)" को "दूध" में बदलने का सुधार टाइपोग्राफिकल...
दिल्ली सरकार की NCR में 10-15 साल पुराने डीजल/पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार की मांग
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने वाले 2018 के आदेश की पुनर्विचार की मांग की गई।याचिका में कहा गया कि वाहनों पर इस तरह का प्रतिबंध आवश्यक नहीं होगा, क्योंकि 2018 के बाद उत्सर्जन निगरानी के कड़े मानक और प्रदूषण परीक्षण का दायरा बढ़ा दिया गया। याचिका में केंद्र सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को आयु-आधारित प्रतिबंध के वास्तविक...
S. 156(3) CrPC| शिकायतकर्ता ने धारा 154(3) के तहत उपाय नहीं अपनाने पर मजिस्ट्रेट द्वारा FIR दर्ज करने का आदेश अमान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (25 जुलाई) को CrPC की धारा 156(3) के तहत पुलिस जांच का निर्देश देने वाला मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द करने से इनकार कर दिया, क्योंकि शिकायतकर्ता ने धारा 154(3) के तहत वैकल्पिक उपाय नहीं अपनाए थे।न्यायालय ने कहा कि पुलिस जाँच का निर्देश देने वाला मजिस्ट्रेट का आदेश अनियमित हो सकता है, लेकिन अगर शिकायत में संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है। मजिस्ट्रेट ने जांच का आदेश देने से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल किया है तो उसे अवैध नहीं कहा जा सकता। इसलिए आदेश में कोई त्रुटि नहीं...
BREAKING- S.138 NI Act | 20,000 रुपये से अधिक के नकद ऋण के लिए चेक अनादर का मामला वैध स्पष्टीकरण के बिना मान्य नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में एक निर्णय पारित किया, जिसमें कहा गया कि आयकर अधिनियम, 1961 (IT Act) का उल्लंघन करते हुए बीस हज़ार रुपये से अधिक के नकद लेनदेन से उत्पन्न ऋण को तब तक कानूनी रूप से प्रवर्तनीय ऋण नहीं माना जा सकता जब तक कि उसके लिए कोई वैध स्पष्टीकरण न हो।जस्टिस पी.वी. कुन्हीकृष्णन ने स्पष्ट किया कि फिर भी, परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 138 के तहत अपराध के आरोपी व्यक्ति को ऐसे लेनदेन को साक्ष्य के रूप में चुनौती देनी होगी और NI Act की धारा 139 के तहत अनुमान का खंडन करना...
बेंगलुरु दंगे | NEET UG 2025 | संविधान-प्रस्तावना: कोर्ट्स टुडे- 25.07.25
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विधानसभा सीटें बढ़ाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। केंद्रीय कानून मंत्री ने संसद में बताया कि संविधान की प्रस्तावना से 'समाजवादी' और 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द हटाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। बेंगलुरु दंगे (2020) मामले में तीन लोगों को दोषी ठहराते हुए NIA कोर्ट ने 7 साल की सजा सुनाई। NEET UG 2025 परीक्षा में बिजली गुल होने से प्रभावित छात्रों की पुनर्परीक्षा की मांग वाली याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कीं। पूरी जानकरी के लिए वीडियो देखें-
The Hindu Succession Act का क़ानून
यह अधिनियम निर्वसीयती मृत्यु होने पर हिंदुओं के उत्तराधिकार से संबंधित क़ानून को सहिंताबद्ध करता है। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 के संहिताबद्ध होने से हिंदुओं के संपत्ति के उत्तराधिकार के संबंध में बहुत आमूलचूल परिवर्तन हुए हैं।इस अधिनियम के प्रभावशील होने के पहले हिंदुओं में उत्तराधिकार से संबंधित विभिन्न विधियां भारत में प्रचलित थी। जहां संयुक्त संपत्ति थी वहां उत्तरजीविता का सिद्धांत लागू था और जहां अर्जित संपत्ति थी उस दशा में उत्तराधिकार लागू होता था। स्त्रीधन के उत्तराधिकार के संबंध में...
Hindu Marriage Act की धारा 26 के प्रावधान
यह धारा वाद कालीन स्थिति में वाद के पक्षकार पति और पत्नीे में उत्पन्न होने वाली संतानों की अभिरक्षा के संबंध में प्रावधान करती है। यह धारा यह प्रावधान करती है कि कोर्ट वैध एवं अवैध संतानों की अभिरक्षा भरण पोषण व शिक्षा के संबंध में जहां तक संभव हो सके उनकी इच्छानुसार प्रावधान करने के लिए अंतरिम आदेश पारित कर सकता है। जहां ऐसा प्रावधान या तो अंतरिम आदेश के द्वारा अथवा डिक्री में किया जाता है तो इस प्रकार के मामलों में डिक्री के उपरांत भी अभिरक्षा भरण पोषण व शिक्षा के संबंध में आवेदन दिया जा सकता...
पैरोल या फर्लो पर रिहाई के दौरान दोषी को आत्मसमर्पण की तारीख का लिखित नोट दें: दिल्ली हाईकोर्ट ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी के जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि पैरोल या फर्लो पर रिहाई के समय दोषी की पावती लेने के बाद उसे आत्मसमर्पण की तारीख का लिखित नोट सौंप दिया जाए ताकि किसी भी तरह की अस्पष्टता न हो।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि कई मामलों में यह देखा गया कि अशिक्षा और अज्ञानता के कारण पैरोल या फर्लो पर रिहा किया गया दोषी समय पर आत्मसमर्पण नहीं कर पाता और देरी से आत्मसमर्पण करने पर उसे सजा हो जाती है।न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में जेल अधिकारियों को...
पंजाब पुलिस द्वारा कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ की CBI जांच की मांग वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता द्वारा वापस ली गई उस याचिका खारिज किया, जिसमें पंजाब पुलिस द्वारा कथित फ़र्ज़ी मुठभेड़ की सीबीआई जांच की मांग की गई थी।कथित तौर पर पुलिस दल वही था, जिस पर कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाथ और उनके बेटे पर हमला करने का आरोप था।जस्टिस संजय वशिष्ठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि याचिकाकर्ता का मृतक से कोई संबंध नहीं है और कहा कि वर्तमान याचिका दायर करने का उसके पास कोई अधिकार नहीं है।न्यायालय ने तदनुसार याचिकाकर्ता को सुझाव दिया कि या तो वह याचिका वापस ले ले...
NDPS Act | अदालत में उन याचिकाओं की बाढ़ आ गई है, जिनमें अभियुक्तों को दूसरों से बरामदगी के मामले में FIR में शामिल किया गया, हाईकोर्ट ने कानून के दुरुपयोग के संदेह में पंजाब से जवाब मांगा
ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिनमें अभियुक्तों से व्यक्तिगत रूप से कोई प्रतिबंधित पदार्थ बरामद नहीं होने के बावजूद FIR में शामिल किया गया, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंसेज एक्ट (NDPS Act) के संदिग्ध दुरुपयोग पर पंजाब सरकार से जवाब मांगा।अदालत ने व्यावसायिक मात्रा से संबंधित एक मादक पदार्थ मामले में अंतरिम-अग्रिम जमानत प्रदान की।जस्टिस संदीप मौदगिल ने कहा,"यह न्यायालय भी मानता है कि पिछले लगभग एक महीने से इसी तरह के कई मामले सामने आ रहे हैं,...
क्या फैमिली कोर्ट को दत्तक-पत्र की वैधता तय करने का अधिकार है? पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट एक्ट के तहत स्थापित फैमिली कोर्ट को दत्तक-पत्र की वैधता तय करने का अधिकार नहीं है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा,"संसद ने अपनी विवेकाधिकार से फैमिली कोर्ट को दत्तक-पत्र से संबंधित मामलों पर निर्णय देने का अधिकार नहीं दिया, जबकि स्पष्ट रूप से उसने अन्य बातों के साथ-साथ उप-धारा (1) स्पष्टीकरण (छ) के तहत निर्दिष्ट मामलों में ऐसे न्यायालयों को अधिकार प्रदान किया, जो किसी व्यक्ति की संरक्षकता या किसी नाबालिग की अभिरक्षा...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने प्राइवेट स्कूलों को कमजोर वर्गों के स्टूडेंट्स के लिए सीटें आरक्षित करने की मांग वाली याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें "गुप्त उद्देश्य" से एक नियम को शामिल करने की CBI जांच की मांग की गई, जो कथित तौर पर निजी स्कूलों को कमजोर वर्गों के स्टूडेंट्स के लिए सीटें आरक्षित करने से छूट देता है।पंजाब सरकार ने पंजाब शिक्षा का अधिकार नियम, 2011 का नियम 7(4) लागू किया था, जिसके कारण पंजाब के कमजोर वर्गों और वंचित समूहों के बच्चों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के प्रावधान के अनुसार निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में एडमिशन नहीं मिल पा रहा...
प्रशासनिक निर्णयों में त्रुटि के लिए कठोरतम दंड नहीं दिया जाना चाहिए: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने रिटायरमेंट कर्मचारी की पूर्वव्यापी बर्खास्तगी रद्द की
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने रिटायरमेंट के बाद अधिकारी की पूर्वव्यापी बर्खास्तगी पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि दी गई सजा कथित चूक की प्रकृति के अनुरूप नहीं थी।याचिकाकर्ता जो लगभग तीन दशकों की बेदाग सेवा वाला एक बैंक अधिकारी था, को अस्थायी ओवरड्राफ्ट (TOD) स्वीकृत करने से संबंधित विभागीय जाँच के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।जस्टिस जावेद इकबाल वानी की पीठ ने कहा,"अनुशासन में निष्पक्षता होनी चाहिए, जो जानबूझकर या लापरवाही से किया गया कार्य नहीं बल्कि प्रशासनिक निर्णय में त्रुटि प्रतीत होता है,...
पत्नी के रंग और खाना बनाने की क्षमता पर तंज कसना उच्च स्तर की प्रताड़ना नहीं, आत्महत्या के लिए उकसावा या क्रूरता नहीं मानी जा सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में 27 साल पुराने मामले में एक व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि यदि कोई महिला आत्महत्या कर ले, तो उसके रंग-रूप या खाना बनाने की क्षमता को लेकर उसे ताना देना इस हद तक की प्रताड़ना नहीं मानी जा सकती कि उस पर धारा 498-A (दांपत्य प्रताड़ना) और धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) लगाई जाए।जस्टिस श्रीराम मोडक की एकल पीठ ने कहा कि अपीलकर्ता पति द्वारा अपनी पत्नी को उसके गहरे रंग को लेकर और ससुर द्वारा उसके भोजन पकाने के तरीके को लेकर ताने देना भले ही प्रताड़ना हो सकता है, लेकिन...
अदालतें दोषी ठहराने या बरी करने के लिए होती हैं, YouTube अदालतों का विकल्प नहीं हो सकता: क्राइम रिपोर्टर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि YouTube प्रस्तुतियाँ न्यायिक प्रक्रिया का स्थान नहीं ले सकतीं। इसके साथ ही कोर्ट ने केरल के एक पत्रकार की उनके वीडियो के लिए आलोचना की, जिसमें कथित तौर पर एक प्रमुख महिला राजनेता को निशाना बनाया गया था।पत्रकार ने दावा किया कि वीडियो का उद्देश्य सार्वजनिक चर्चा को प्रोत्साहित करना और भ्रष्टाचार से लड़ना था।जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ नंदकुमार टीपी की अग्रिम ज़मानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो अपने YouTube चैनल क्राइम ऑनलाइन पर अपलोड किए...



















