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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुरक्षित और सुलभ फुटपाथों के लिए दिशानिर्देश बनाने का आखिरी मौका दिया
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सुरक्षित और सुलभ फुटपाथों के लिए दिशानिर्देश बनाने का आखिरी मौका दिया

14 मई के आदेश के अनुसरण में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को पैदल चलने वालों के अधिकारों की रक्षा के लिए नियम बनाने का "एक आखिरी मौका" दिया, जिसमें दिव्यांगजनों के लिए फुटपाथों को सुलभ बनाना भी शामिल है।जस्टिस अभय एस. ओक और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की खंडपीठ ने मई में कहा था कि फुटपाथ का उपयोग करने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का एक अनिवार्य पहलू है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ के समक्ष सीनियर एडवोकेट और एमिक्स क्यूरी गौरव...

अवैध मंजूरी के कारण भ्रष्टाचार के आरोपी लोक सेवक को सेवामुक्त करने से मंजूरी मिलने के बाद दूसरे मुकदमे पर रोक नहीं लगती: बॉम्बे हाईकोर्ट
अवैध मंजूरी के कारण भ्रष्टाचार के आरोपी लोक सेवक को सेवामुक्त करने से मंजूरी मिलने के बाद दूसरे मुकदमे पर रोक नहीं लगती: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी लोक सेवक के विरुद्ध भ्रष्टाचार के लिए सक्षम प्राधिकारी से वैध मंजूरी के बिना अभियोजन शुरू किया जाता है तो पूरा मुकदमा ही अमान्य हो जाता है यदि बाद में वैध मंजूरी प्राप्त कर ली जाती है तो नए मुकदमे पर रोक नहीं लगती। न्यायालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस तरह से सेवामुक्त करने से समाज में गलत संदेश जाएगा।जस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के एडीशनल सेशन जज द्वारा प्रतिवादी के पक्ष में पारित सेवामुक्ति आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थीं। प्रतिवादी पर...

अगर इतना काम है तो ब्रीफ स्वीकार न करें:  हाईकोर्ट  ने सुनवाई में गैरहाज़िरी पर सरकारी वकील को KDA पैनल से हटाने का दिया आदेश
अगर इतना काम है तो ब्रीफ स्वीकार न करें: हाईकोर्ट ने सुनवाई में गैरहाज़िरी पर सरकारी वकील को KDA पैनल से हटाने का दिया आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) के एक पैनल वकील को कोर्ट में उपस्थित न होने और मामले को अपने जूनियर को सौंपने के कारण पैनल से हटाने का निर्देश दिया।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ राजस्व मामले की सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने पाया कि संबंधित वकील ने प्रतिवादी नंबर 1 से 3 की ओर से नोटिस स्वीकार किया था लेकिन सुनवाई के दौरान स्वयं उपस्थित नहीं हुए और उनकी जगह उनका जूनियर वकील कोर्ट में मौजूद था।इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की,"वे कोर्ट में उपस्थित नहीं हैं और उनके...

दिल्ली हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन नहीं पा सकें अन्य राज्यों के रिटायर जज, सुप्रीम कोर्ट ने नियम को चुनौती देने वाली याचिका की खारिज
दिल्ली हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन नहीं पा सकें अन्य राज्यों के रिटायर जज, सुप्रीम कोर्ट ने नियम को चुनौती देने वाली याचिका की खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के नियम को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें अन्य राज्यों के रिटायर जजों को दिल्ली में सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन के लिए आवेदन करने से रोका गया था।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली विजय प्रताप सिंह द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका खारिज की, जिसमें संबंधित नियम बरकरार रखा गया था।यह चुनौती दिल्ली हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट डेजिग्नेशन के नियम, 2024 के नियम 9बी को लेकर...

PM Modi पर शशि थरूर की बिच्छू वाली टिप्पणी का मानहानि मामला सुप्रीम कोर्ट ने किया बंद, कहा- इतना भावुक क्यों हो रहे हैं?
PM Modi पर शशि थरूर की 'बिच्छू' वाली टिप्पणी का मानहानि मामला सुप्रीम कोर्ट ने किया बंद, कहा- 'इतना भावुक क्यों हो रहे हैं?'

सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में की गई "शिवलिंग पर बैठे बिच्छू" वाली टिप्पणी को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर के खिलाफ आपराधिक मानहानि की शिकायत की कार्यवाही बंद कर दी जानी चाहिए।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। थरूर के वकील ने स्थगन की मांग की, जबकि शिकायतकर्ता (BJP नेता राजीव बब्बर) के वकील ने गैर-विविध दिन पर सुनवाई की मांग की।इस पर जस्टिस सुंदरेश ने मौखिक रूप से कहा:"कौन सा गैर-विविध दिन?...

इंडियन लॉ एजुकेशन में इंटर्नशिप: वास्तविक शिक्षा या रिज्यूम की कसौटी?
इंडियन लॉ एजुकेशन में इंटर्नशिप: वास्तविक शिक्षा या रिज्यूम की कसौटी?

भारत में, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने कानून की डिग्री प्राप्त करने के लिए इंटर्नशिप का अनिवार्य प्रावधान किया है। अनिवार्य इंटर्नशिप शुरू करने का मुख्य उद्देश्य विधि छात्रों को अदालतों, गैर-सरकारी संगठनों, लॉ फर्मों और विधि अभ्यास के विभिन्न पहलुओं में फील्डवर्क का अनुभव प्रदान करना है, जिससे छात्रों को अपना करियर चुनने और कक्षा के बाहर अपने ज्ञान को बढ़ाने और उसे वास्तविक दुनिया के व्यावहारिक ज्ञान में लाने में मदद मिलती है। लेकिन आजकल, यह सवाल उठता है- क्या इंटर्नशिप वास्तव में कानूनी...

NDPS Act | इस धारणा पर कि बल्ड सैंपल में हेरोइन की मौजूदगी हो सकती है, किसी व्यक्ति को हिरासत में रखना उचित नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ज़मानत दी
NDPS Act | इस धारणा पर कि बल्ड सैंपल में हेरोइन की मौजूदगी हो सकती है, किसी व्यक्ति को हिरासत में रखना उचित नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ज़मानत दी

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल इस धारणा पर हिरासत में नहीं रखा जा सकता कि फोरेंसिक साइंस लैब में भेजे गए ब्लड सैंपल में हेरोइन के अंश पाए जा सकते हैं या कोई आपत्तिजनक पदार्थ पाया जा सकता है।राज्य सरकार के इस तर्क को खारिज करते हुए कि पुलिस द्वारा फोरेंसिक लैब में भेजे गए ब्लड सैंपल में हेरोइन की मौजूदगी का संकेत मिलने की संभावना है, जस्टिस राकेश कैंथला ने टिप्पणी की,"किसी व्यक्ति को इस धारणा के आधार पर हिरासत में नहीं रखा जा सकता कि उसके खिलाफ कोई आपत्तिजनक पदार्थ पाया...

जब भी कोई नई अदालत स्थापित होती है, वकील विरोध करते हैं, अदालतें सिर्फ़ वकीलों के लिए नहीं, मुक़दमों के लिए होती हैं: सुप्रीम कोर्ट
'जब भी कोई नई अदालत स्थापित होती है, वकील विरोध करते हैं, अदालतें सिर्फ़ वकीलों के लिए नहीं, मुक़दमों के लिए होती हैं': सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश में कोर्ट शिफ्टिंग को चुनौती देने वालक याचिका खारिज करते हुए वकीलों द्वारा नई अदालतों की स्थापना का विरोध करने की प्रवृत्ति पर मौखिक टिप्पणी की।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मछलीपट्टनम बार एसोसिएशन द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया गया, जिसमें मछलीपट्टनम के छठे एडिशनल ज़िला एवं सेशन कोर्ट को मछलीपट्टनम से अवनीगड्डा...

गद्दा एक बुनियादी ज़रूरत: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी हॉस्टल में बिस्तर की अपर्याप्त व्यवस्था पर चिंता जताई, स्टेटस रिपोर्ट मांगी
गद्दा एक बुनियादी ज़रूरत: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी हॉस्टल में बिस्तर की अपर्याप्त व्यवस्था पर चिंता जताई, स्टेटस रिपोर्ट मांगी

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी हॉस्टल में रहने वाले स्टूडेंट्स को उपलब्ध कराए गए बिस्तर की अनुचित स्थिति पर निराशा व्यक्त की, जहां उन्हें गद्दे की बजाय धारी पर सोने के लिए मजबूर किया जाता है।यह देखते हुए कि बच्चों को बिना गद्दे के सोने देना राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है, चीफ जस्टिस धीरज सिंह ठाकुर और जस्टिस रवि चीमालापति की खंडपीठ ने टिप्पणी की,"दिशानिर्देशों के अनुसार, बच्चे के प्रवेश के समय एक गद्दा और उसके बाद हर साल एक गद्दा उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है। यह...

पिंक सिटी या सिंक सिटी? हाईकोर्ट ने जयपुर में सड़कों की दयनीय स्थिति पर स्वतः संज्ञान लिया
पिंक सिटी या सिंक सिटी? हाईकोर्ट ने जयपुर में सड़कों की 'दयनीय' स्थिति पर स्वतः संज्ञान लिया

जयपुर में सार्वजनिक सड़कों की दयनीय स्थिति का विवरण देने वाली मीडिया रिपोर्टों पर संज्ञान लेते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला शुरू किया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अपनी समृद्ध विरासत के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध 'पिंक सिटी', अपनी अवसंरचनात्मक समस्याओं के कारण ढहते हुए 'सिंक सिटी' में न बदल जाए।जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की पीठ ने कहा कि बुनियादी नागरिक अवसंरचना, विशेष रूप से विरासत परिसरों में बनाए रखने में विफलता न केवल अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(डी) के तहत...

तलाक की कार्यवाही में पत्नी द्वारा पति पर नपुंसकता का आरोप लगाना मानहानि नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
तलाक की कार्यवाही में पत्नी द्वारा पति पर नपुंसकता का आरोप लगाना मानहानि नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महिला, उसके भाई और पिता के खिलाफ मानहानि का मामला खारिज करते हुए कहा कि तलाक की याचिका या FIR में पत्नी द्वारा अपने पति को 'नपुंसक' बताना मानहानि नहीं माना जाएगा।जस्टिस श्रीराम मोदक की एकल पीठ ने कहा कि पत्नी द्वारा यह आरोप लगाना कि उसका पति नपुंसक है और इससे उसे मानसिक क्रूरता हुई है, उचित है।जज ने 17 जुलाई को पारित आदेश में कहा,"हिंदू विवाह याचिका में नपुंसकता के आरोप अत्यंत प्रासंगिक हैं। अर्थात्, जब पत्नी यह आरोप लगाती है कि नपुंसकता के कारण पत्नी को मानसिक...

पति का दोस्त उसका रिश्तेदार नहीं, उस पर IPC की धारा 498ए के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
पति का दोस्त उसका रिश्तेदार नहीं, उस पर IPC की धारा 498ए के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज FIR खारिज करते हुए फैसला दिया कि पति का पुरुष मित्र उसका रिश्तेदार नहीं है। इसलिए उस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।जस्टिस अनिल पानसरे और जस्टिस महेंद्र नेर्लिकर की खंडपीठ ने कहा कि उनके समक्ष प्रस्तुत आवेदकों में से एक पति का दोस्त है, जिसका नाम शिकायतकर्ता पत्नी ने अपने पति और उसके माता-पिता के खिलाफ दर्ज FIR में दर्ज किया।जजों ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें...

बिजनेसमैन विकास गर्ग मामले में ZEE Media को हाईकोर्ट का आदेश, कहा- मानहानिकारक वीडियो पर उनका जवाब ब्रॉडकास्ट करे चैनल
बिजनेसमैन विकास गर्ग मामले में ZEE Media को हाईकोर्ट का आदेश, कहा- मानहानिकारक वीडियो पर उनका जवाब ब्रॉडकास्ट करे चैनल

दिल्ली हाईकोर्ट ने ZEE Media और ज़ी बिज़नेस चैनलों के मालिक और संचालक ज़ी मीडिया कॉर्पोरेशन को उनके खिलाफ चैनलों द्वारा प्रसारित कथित मानहानिकारक वीडियो पर व्यवसायी विकास गर्ग की प्रतिक्रिया प्रसारित करने का आदेश दिया।जस्टिस अमित बंसल ने गर्ग द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया, जो वर्तमान में कथित महादेव सट्टेबाजी ऐप मामले में ED की जांच के दायरे में हैं।ZEE Media ने अपने खंड "2025 का सबसे बड़ा नटवरलाल" में उनके बारे में खबर प्रकाशित की थी।गर्ग के अनुसार, उनके लिए "नटवरलाल" शब्द का प्रयोग...

कोर्ट ने सत्येंद्र जैन के घर से बरामदगी का दावा करने वाले भ्रामक पोस्ट के लिए ED की आलोचना की, कहा- निष्पक्ष होना ज़रूरी
कोर्ट ने सत्येंद्र जैन के घर से बरामदगी का दावा करने वाले भ्रामक पोस्ट के लिए ED की आलोचना की, कहा- निष्पक्ष होना ज़रूरी

दिल्ली कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अपने सोशल मीडिया हैंडल पर आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सत्येंद्र जैन के परिसरों की तलाशी के बारे में भ्रामक जानकारी पोस्ट करने के तरीके की आलोचना की।7 जून, 2022 को ED ने एक्स पर पोस्ट किया कि उसने "सत्येंद्र कुमार जैन और अन्य" के परिसरों की तलाशी ली और 2.85 करोड़ रुपये की नकदी और 1.80 किलोग्राम सोने के सिक्कों सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ ज़ब्त किए। हालांकि, ये बरामदगी वास्तव में जैन के घर से नहीं हुई थी।अदालत ने कहा कि ED के ट्वीट में जिस तरह से...

CrPC की धारा 156(3) के तहत हलफनामा न देना मजिस्ट्रेट के आदेश से पहले सुधारा जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
CrPC की धारा 156(3) के तहत हलफनामा न देना मजिस्ट्रेट के आदेश से पहले सुधारा जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई को पुनः पुष्टि की कि प्रियंका श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2015) मामले में निर्धारित प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय CrPC की धारा 156(3) के तहत शिकायतों के लिए अनिवार्य हैं, जिसके तहत शिकायतकर्ता को शिकायत की सत्यता की पुष्टि करते हुए और पूर्व मुकदमेबाजी के इतिहास का खुलासा करते हुए हलफनामा प्रस्तुत करना आवश्यक है।जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की खंडपीठ उस मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता ने उनके खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार...

सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को 2025-26 के लिए शिक्षा में 3% OBC आरक्षण प्रदान करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को 2025-26 के लिए शिक्षा में 3% OBC आरक्षण प्रदान करने का निर्देश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए शैक्षणिक सीटों में 3% OBC आरक्षण प्रदान करने का निर्देश दिया।केंद्र सरकार द्वारा न्यायालय को यह सूचित किए जाने के बाद कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में OBC आरक्षण प्रदान करने के लिए अधिनियम एक सप्ताह के भीतर अधिसूचित किया जाएगा, यह आदेश दिया गया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन तथा जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा चंडीगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज के MBBS में एडमिशन में OBC...

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों के कार्यकाल विस्तार की अनुमति देने वाले नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर BCI से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों के कार्यकाल विस्तार की अनुमति देने वाले नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर BCI से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और तमिलनाडु बार काउंसिल से रिट याचिका पर हलफनामा दाखिल करने को कहा, जिसमें BCI प्रमाणपत्र और अभ्यास स्थल (सत्यापन) नियम, 2015 के नियम 32 को रद्द करने की मांग की गई है। यह नियम BCI को एडवोकेट एक्ट 1961 के तहत निर्धारित वैधानिक सीमाओं से परे राज्य बार काउंसिल के सदस्यों का कार्यकाल बढ़ाने का अधिकार देता है।एडवोकेट एक्ट की धारा 8 के अनुसार, राज्य बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्य का वैधानिक कार्यकाल पांच वर्ष है। इसमें प्रावधान है कि यदि राज्य बार काउंसिल...

एक ही मुद्दे पर दीवानी मामला लंबित होने और आपराधिक तत्व अनुपस्थित होने पर आपराधिक मामला रद्द किया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
एक ही मुद्दे पर दीवानी मामला लंबित होने और आपराधिक तत्व अनुपस्थित होने पर आपराधिक मामला रद्द किया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि आपराधिक तत्व के अभाव में एक ही मुद्दे पर दीवानी और आपराधिक दोनों मामलों को जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि यह विधि प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा, जिसके लिए न्यायालय को आपराधिक कार्यवाही रद्द करने हेतु हस्तक्षेप करना होगा।न्यायालय ने कहा,“आपराधिक तत्व के अभाव में यदि दीवानी और आपराधिक दोनों मामलों को जारी रहने दिया जाता है तो यह निश्चित रूप से न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा, जिसे न्यायालयों ने हमेशा ऐसी किसी भी आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगाकर रोकने का...