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30 जून को रिटायरमेंट, 1 जुलाई के सालाना इंक्रीमेंट में रुकावट नहीं- दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीज़न बेंच ने फैसला सुनाया कि 30 जून को रिटायर होने वाला सरकारी कर्मचारी 1 जुलाई को मिलने वाले इंक्रीमेंट का हकदार है, क्योंकि यह इंक्रीमेंट रिटायरमेंट से पहले पूरी की गई सेवा के साल के लिए अर्जित किया जाता है। इसे सिर्फ इसलिए नकारा नहीं जा सकता कि यह रिटायरमेंट के बाद देय होता है।पृष्ठभूमि के तथ्यकर्मचारी (प्रतिवादी) नॉर्दर्न रेलवे, नई दिल्ली में A.F.A. के तौर पर काम कर रहा था। वह 30 जून 2021 को सेवा से रिटायर हो गया। उसका सालाना...
बालीग बेटों की कमाने की क्षमता पत्नी के 'स्वतंत्र' और स्थायी गुज़ारा भत्ता के अधिकार को खत्म नहीं करती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि तलाकशुदा पत्नी का स्थायी गुज़ारा भत्ता पाने का अधिकार एक 'स्वतंत्र' और 'अलग' अधिकार है, जिसे सिर्फ़ इसलिए कम या खत्म नहीं किया जा सकता कि उसके बेटे बालीग हैं और कमाते हैं।यह साफ़ करते हुए कि ये बातें ज़्यादा से ज़्यादा गुज़ारा भत्ते की रकम पर असर डाल सकती हैं, लेकिन पत्नी के बुनियादी अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं, कोर्ट ने कहा:"...बेटों का बालीग होना और उनकी कमाने की क्षमता, भले ही कानूनी तौर पर मायने रखती हो, लेकिन हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25...
'ग्राम रोज़गार सेवक' का पद 'महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम' के तहत कोई 'वेतनभोगी पद' या 'लाभ का पद' नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि 'ग्राम रोज़गार सेवक' का पद 'महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1958' के तहत कोई "वेतनभोगी पद" या "लाभ का पद" नहीं माना जाएगा। इसलिए इस पद पर काम करने वाले चुने हुए सदस्य को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ग्राम पंचायत का कोई भी चुना हुआ सदस्य, जो अपने पद पर रहते हुए 'ग्राम रोज़गार सेवक' के तौर पर भी काम करता है, उसे 'महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1958' की धारा 14(1)(f) या (g) के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस अजीत बी. कडेथंकर एक रिट...
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान SI चयन परीक्षा पर आदेश में बदलाव के लिए गुड फ्राइडे को की विशेष सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुड फ्राइडे (शुक्रवार) को एक विशेष सुनवाई में अपने गुरुवार के आदेश में बदलाव किया। गुरुवार के आदेश में याचिकाकर्ता और इसी तरह के अन्य उम्मीदवारों को राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर पुलिस/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा 2025 में बैठने की अनुमति दी गई थी। यह परीक्षा 5 अप्रैल को होनी है। कोर्ट ने अब यह लाभ केवल मौजूदा याचिकाकर्ता सूरज मल मीणा तक ही सीमित कर दिया।संक्षेप में मामला याचिकाकर्ता सूरज लाल मीणा ने 2021 की अधिसूचना के तहत सब-इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया था।...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने टिकट परीक्षक को परेशान करने के आरोपी रेलवे सतर्कता अधिकारियों के खिलाफ FIR रद्द की
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे सतर्कता अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की। इन अधिकारियों पर कथित तौर पर एक टिकट परीक्षक को परेशान करने और उसके साथ जाति-आधारित अपमानजनक व्यवहार करने का आरोप था। कोर्ट ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि यह मामला किस तरह से शुरू किया गया था।कोर्ट ने टिप्पणी की कि FIR दर्ज करने की प्रक्रिया को देखते हुए "यह उचित आशंका पैदा होती है कि इस प्रक्रिया पर बाहरी बातों का प्रभाव था।" यह आशंका विशेष रूप से इसलिए उठती है, क्योंकि शिकायत पर कार्रवाई उस समय के रीवा के...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सहकारी समितियों के कर्मचारियों के लिए सरकारी कर्मचारियों के बराबर रिटायरमेंट लाभ अनिवार्य करने वाला 1997 का नियम रद्द किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि 1997 के सेवा नियम, जो सहकारी समितियों के कर्मचारियों के लिए सरकारी कर्मचारियों के बराबर रिटायरमेंट लाभ अनिवार्य करते हैं, मूल कानून के अधिकार क्षेत्र से बाहर (ultra vires) हैं और उन्हें लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार के पास अपनी नियम बनाने की शक्ति को आगे रजिस्ट्रार को सौंपने का कोई अधिकार नहीं था। इस तरह का उप-प्रतिनिधित्व (Sub-Delegation) न तो स्पष्ट रूप से और न ही संबंधित अधिनियम के तहत निहित रूप से अनुमत था।जस्टिस...
भवन निर्माण कार्य विनियमन अधिनियम | अनुमति प्राप्त करने में धोखाधड़ी साबित होने पर शिकायतकर्ता का अधिकार क्षेत्र (Locus) अप्रासंगिक: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि भवन निर्माण कार्य विनियमन अधिनियम, 1958 की धारा 7-A के तहत कार्यवाही के उद्देश्य से शिकायतकर्ता का अधिकार क्षेत्र (locus) अप्रासंगिक है, जब प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हो कि अधिनियम के तहत विकास की अनुमति धोखाधड़ी और गलत बयानी से प्राप्त की गई थी।भवन निर्माण कार्य विनियमन अधिनियम, 1958 की धारा 7-A में यह प्रावधान है कि यदि विकास की अनुमति धोखाधड़ी से प्राप्त की गई हो तो निर्धारित प्राधिकारी द्वारा लिखित रूप में कारण दर्ज करने के बाद उस अनुमति को रद्द किया जा...
हरियाणा में कोर्ट की अनुमति के बिना पेड़ काटने पर हाईकोर्ट ने लगाई अस्थायी रोक
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अधिकारियों द्वारा ज़ीरकपुर-पंचकूला बाईपास के लिए काटे जाने वाले पेड़ों के बदले वनीकरण के लिए ज़मीन की उपलब्धता के बारे में कोर्ट के सवाल का जवाब न देने पर नाराज़गी ज़ाहिर की। कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की निष्क्रियता से पता चलता है कि वे पर्यावरण संबंधी चिंताओं को लेकर गंभीर नहीं हैं और इस पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने की ज़रूरत है।चीफ़ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की डिवीज़न बेंच ज़ीरकपुर-पंचकूला बाईपास के निर्माण के लिए लगभग 5000 पेड़ों को काटे जाने के...
Land Revenue Code | सीमांकन की कार्यवाही से अप्रत्यक्ष लाभ लेने का मात्र आरोप आपराधिक षड्यंत्र नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता के तहत सीमांकन की कार्यवाही से अप्रत्यक्ष लाभ लेने का मात्र आरोप ठोस सबूतों के अभाव में आपराधिक षड्यंत्र का निष्कर्ष निकालने का आधार नहीं बन सकता।जस्टिस बीपी शर्मा की पीठ ने FIR दर्ज करने का निर्देश देने वाले ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द किया। पीठ ने टिप्पणी की कि यह आदेश यांत्रिक रूप से पारित किया गया था, क्योंकि 'मेंस रिया' (अपराधिक इरादे) का आवश्यक तत्व प्रदर्शित नहीं किया गया।पीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया:"इसके अलावा, यह कोर्ट...
सिर्फ़ गाली देना या जाति का नाम लेना SC/ST Act के तहत अपराध नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 (SC/ST Act) की धारा 3(1)(s) के तहत अपराध साबित होने के लिए यह काफ़ी नहीं कि आरोपी सिर्फ़ किसी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को गाली दे या सिर्फ़ जाति का नाम ले। कोर्ट ने साफ़ किया कि ज़रूरी शर्त यह है कि आरोपी किसी सार्वजनिक जगह पर, जहाँ लोग देख सकें, ऐसे सदस्य को "जाति के नाम से" गाली दे।जस्टिस राजेश सेखरी की बेंच ने टिप्पणी की,"...ऊपर कही गई बातों से यह साफ़ है कि...
सबूतों की समझ नहीं: पटना हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपियों को किया बरी, ट्रायल जज की ट्रेनिंग का दिया निर्देश
पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपियों को बरी करते हुए ट्रायल कोर्ट की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ट्रायल जज को आपराधिक मामलों में साक्ष्यों की प्रासंगिकता, स्वीकार्यता और वैधता की मूलभूत समझ तक नहीं थी।जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस चंद्र शेखर झा की खंडपीठ 22 जुलाई, 2019 के उस फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें शेखपुरा के एडिशनल सेशन जज ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (CrPC) की धारा 302/34 और शस्त्र अधिनियम की धारा...
दुर्घटना पीड़ित की मौत से खत्म नहीं होता मुआवजे का हक: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की कार्यवाही के दौरान मृत्यु हो जाने मात्र से उसका मुआवजा दावा खारिज नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में मृतक के कानूनी वारिस कम से कम संपत्ति को हुए नुकसान के आधार पर दावा आगे बढ़ा सकते हैं।जस्टिस दीपक गुप्ता ने यह फैसला उस अपील पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें मूल दावेदार के कानूनी प्रतिनिधियों ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 20 मार्च, 1999 के फैसले को चुनौती दी थी। अधिकरण ने यह कहते...
पे कमीशन के फ़ायदे अतिरिक्त शर्तें लगाकर नहीं रोके जा सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल को यह टिप्पणी की कि सेंट्रल पे कमीशन की सिफ़ारिशों की मनमानी व्याख्या करके किसी कर्मचारी को पे कमीशन के फ़ायदों से वंचित करने के लिए कोई अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जा सकती।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। यह मामला उन याचिकाकर्ताओं से जुड़ा था, जिन्होंने शुरू में बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन में जूनियर इंजीनियरिंग कैडर में नौकरी शुरू की थी। बाद में कैडर के विलय के बाद उन्हें 'जूनियर इंजीनियर' के तौर पर नया पदनाम दिया गया।लेवल 8 पर...
22 महीने की सजा पर हाईकोर्ट का हस्तक्षेप, भरण-पोषण न देने पर जेल भेजे गए पति की तत्काल रिहाई का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण राशि न देने के मामले में 22 महीने की सजा काट रहे व्यक्ति की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि इस तरह लंबी अवधि के लिए सिविल जेल में रखना कानून के अनुरूप नहीं है।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी ने यह राहत देते हुए स्पष्ट किया कि चूंकि व्यक्ति सिविल कारावास में है, इसलिए उसकी रिहाई के लिए जमानत बांड या जमानतदार की आवश्यकता नहीं है।मामले में पति (ताहिर उर्फ बबलू) को झांसी के फैमिली कोर्ट ने पत्नी को 22 महीने तक भरण-पोषण राशि न देने पर जेल भेज दिया था। वह 3 दिसंबर...
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर बिल पर की गई टिप्पणियां हटाईं, जारी किया संशोधित आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से जुड़े संशोधन कानून पर पहले की गई अपनी टिप्पणियों को हटाते हुए आदेश का संशोधित संस्करण जारी किया।जस्टिस अरुण मोंगा ने 30 मार्च के आदेश में ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के आत्म-पहचान के अधिकार को सीमित कर सकता है। हालांकि अब अदालत ने उन टिप्पणियों को हटाकर नया स्पष्टीकरण जारी किया।संशोधित आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि मूल फैसला उस समय लागू कानूनी स्थिति को...
केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे सम्मानसूचक शब्द क्यों नहीं, हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक FIR में केंद्रीय मंत्री के नाम के साथ सम्मानसूचक शब्द न लगाए जाने पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को हलफनामा दाखिल कर इस चूक का कारण बताने का निर्देश दिया।अदालत ने पाया कि FIR में एक स्थान पर केंद्रीय मंत्री का नाम बिना किसी सम्मानसूचक शब्द जैसे 'माननीय' या 'श्री' के सीधे लिखा गया।इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि भले ही शिकायतकर्ता ने मंत्री का उल्लेख इस...
सबरीमाला संदर्भ मामला: जैन संगठनों ने कहा—धार्मिक प्रथाओं में दखल न दे राज्य, आस्था के अनुयायी ही करें निर्णय
सुप्रीम कोर्ट में लंबित सबरीमाला संदर्भ मामले में विभिन्न जैन संगठनों ने महत्वपूर्ण दलीलें पेश करते हुए कहा है कि किसी भी धर्म की प्रथाओं के नियमन का अधिकार केवल उस धर्म के अनुयायियों के पास होना चाहिए। किसी अन्य धर्म के व्यक्ति को दूसरे धर्म की प्रथाओं को चुनौती देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।आवेदकों ने तर्क दिया कि संविधान के Article 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता में किसी धर्म को अपनी प्रथाओं को परिभाषित और संचालित करने की स्वायत्तता शामिल है। उन्होंने कहा कि कोई प्रथा धार्मिक है या...
यूपी की गन कल्चर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, आर्म्स लाइसेंस डेटा मांगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाज में बढ़ती “गन कल्चर” पर सख्त रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश में जारी किए गए हथियार लाइसेंसों का व्यापक डेटा मांगा है। जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने कहा कि बिना नियंत्रण के हथियारों की उपलब्धता समाज के लिए गंभीर खतरा बन रही है।अदालत ने टिप्पणी की कि कई लोग, खासकर राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले या संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति, लाइसेंसी हथियारों का इस्तेमाल “प्रभाव और दबदबा दिखाने” के लिए कर रहे हैं, जिससे समाज में डर का माहौल बनता है।कोर्ट ने सोशल मीडिया, खासकर...
WB SIR: जजों के घेराव के वक्त मुख्य सचिव से नहीं हो पाया था संपर्क: सुप्रीम कोर्ट ने जताई निराशा
पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों के घेराव पर प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह "बेहद निराश" है कि संकट के दौरान राज्य के मुख्य सचिव कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की पहुंच से बाहर रहे। कोर्ट ने यह भी कहा कि उन्होंने संचार को संभव बनाने के लिए WhatsApp सुविधा वाला कोई मोबाइल नंबर साझा नहीं किया था।कोर्ट राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) से संबंधित कार्य के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से जुड़े एक स्वतः संज्ञान...
आंशिक समझौते पर पूरी FIR रद्द करना गलत: राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश वापस लेकर जारी किए नए दिशा-निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि आंशिक समझौते के आधार पर पूरी FIR रद्द करना न्यायिक त्रुटि थी। अदालत ने अपने पहले के आदेश को आंशिक रूप से वापस लेते हुए स्पष्ट किया कि जांच बाकी आरोपियों के खिलाफ जारी रहेगी।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने यह भी कहा कि इस प्रकार की गलती को सुधारना रिव्यू (पुनर्विचार) नहीं बल्कि रिकॉल (आदेश वापस लेना) की श्रेणी में आता है।मामले में कुल 15 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज थी, लेकिन शिकायतकर्ता ने केवल दो आरोपियों के साथ समझौता किया। उन दो आरोपियों में से एक ने समझौते के...




















