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सर्जरी से पहले गर्भावस्था शुरू होने के कारण नसबंदी के बाद पैदा हुए बच्चे के लिए कोई मुआवज़ा नहीं: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें नसबंदी की प्रक्रिया फेल होने के आरोप पर मेडिकल लापरवाही के लिए मुआवज़ा देने से इनकार कर दिया गया। कोर्ट ने माना कि महिला की गर्भावस्था सर्जरी से पहले ही शुरू हो गई। [2026 LiveLaw (MP) 378]जस्टिस आशीष श्रोती की बेंच ने इस बात पर ज़ोर दिया:"इसलिए ट्रायल कोर्ट ने मामले के तथ्यों और सबूतों को सही ढंग से समझा और माना कि वादी (महिला) 04.07.2004 को हुए ऑपरेशन से पहले ही गर्भवती हो गई। इस प्रकार, यह आरोप साबित नहीं होता कि ऑपरेशन फेल...

असली क्वालिफिकेशन के आधार पर मिली नियुक्ति को सिर्फ़ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी नहीं दी गई: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि असली क्वालिफिकेशन के आधार पर मिली नियुक्ति को सिर्फ़ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि नियुक्त व्यक्ति ने अपनी पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी नहीं दी थी, जबकि उस बात का उसकी योग्यता या चयन पर कोई असर नहीं है।कोर्ट ने कहा कि ऐसी जानकारी न देने पर नियुक्ति तभी रद्द की जा सकती है, जब जानकारी न देने और नियुक्ति मिलने के बीच कोई साफ़ और सीधा संबंध हो।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,"असली क्वालिफिकेशन के आधार पर मिली नियुक्ति को सिर्फ़ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि...

FDR में रखे मुआवज़े को जारी करने से मना करने से पहले MACT को दावेदार की ज़रूरत पर विचार करना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) फिक्स्ड डिपॉज़िट में रखे मुआवज़े को जारी करने की मांग वाली अर्जियों को बिना सोचे-समझे खारिज नहीं कर सकते। उन्हें यह तय करने से पहले कि रकम जारी की जानी चाहिए या नहीं, दावेदारों की वास्तविक ज़रूरतों पर विचार करना चाहिए।जस्टिस अनीश दयाल ने कहा कि MACT के अधिकार क्षेत्र में यह नहीं आता कि वे उस दावेदार द्वारा बताए गए कारणों की "गहराई से जांच" करें जो पहले से ही कोर्ट द्वारा मंज़ूर और कन्फर्म किए गए मुआवज़े को जारी करने की मांग कर...

विभागीय जांच में गलत काम का ठोस सबूत नहीं, अखबार की बिना पुष्टि वाली रिपोर्ट: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय कार्यवाही में गलत काम (Misconduct) का ठोस सबूत अखबार की ऐसी रिपोर्ट नहीं हो सकती, जिसकी पुष्टि न हुई हो, खासकर तब जब उसी समय के सरकारी रिकॉर्ड उस रिपोर्ट के उलट बात कहते हों।जस्टिस कुमार मनीष की सिंगल जज बेंच पंकज कुमार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पंकज कुमार ने गया के सरकारी ITI महकार में प्रिंसिपल-सह-सेंटर सुपरिटेंडेंट के तौर पर तैनाती के दौरान उन पर चली विभागीय कार्यवाही और दी गई सज़ा को चुनौती दी थी।जुलाई 2018 में हुए ऑल-इंडिया ट्रेड टेस्ट (AITT) से पहले...

सुप्रीम कोर्ट परिसर में व्यक्ति के साथ मारपीट करने और उसका वीडियो फैलाने का मामला: हाईकोर्ट ने आरोपियों को जारी समन आदेश बरकरार रखा
दिल्ली हाईकोर्ट ने उन दो लोगों के खिलाफ समन रद्द करने से इनकार किया, जिन पर सुप्रीम कोर्ट परिसर में एक व्यक्ति के साथ मारपीट और बदसलूकी करने और बाद में इस घटना का वीडियो इंस्टाग्राम पर फैलाने का आरोप है।जस्टिस मधु जैन को आदेश में कोई स्पष्ट गैर-कानूनी बात, मनमानी या कोर्ट की प्रक्रिया का दुरुपयोग नहीं मिला, जिसके कारण आदेश में दखल देने की ज़रूरत हो। इसलिए उन्होंने दोनों आरोपियों की याचिका खारिज की।यह घटना 30 जनवरी को हुई। शिकायत के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में शिकायतकर्ता के...

S.144 BNSS | विवादित वैवाहिक रिश्ते के लिए ट्रायल में सबूत की ज़रूरत: गुवाहाटी हाईकोर्ट ने गुज़ारा-भत्ता की कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि गुज़ारा-भत्ता (मेंटेनेंस) की कार्यवाही तब रद्द नहीं की जा सकती, जब पार्टियों के बीच कथित वैवाहिक रिश्ते की प्रकृति का पता लगाने के लिए ट्रायल में सबूत की ज़रूरत हो।जस्टिस संजीव कुमार शर्मा ने कहा,"हालांकि शादी की तारीखों और जगहों के बारे में अलग-अलग कार्यवाहियों में प्रतिवादी (रेस्पॉन्डेंट) के विरोधाभासी बयानों से शादी के तथ्य पर कुछ संदेह पैदा होता है, लेकिन यह स्थापित कानून है कि BNSS की धारा 144 के तहत कार्यवाही में पति-पत्नी जैसे रिश्ते को साबित करना ही काफी है और...

जजों के साथ बदसलूकी के लिए अवमानना का सामना कर रहे व्यक्ति के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को आदेश दिया कि वह उस व्यक्ति के खिलाफ इंटरपोल के ज़रिए 'रेड कॉर्नर नोटिस' जारी करे, जिस पर जजों को धमकाने और उनके खिलाफ अपमानजनक बातें कहने के आरोप में आपराधिक अवमानना की कार्यवाही चल रही है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीज़न बेंच ने यह आदेश तब दिया, जब उन्हें पता चला कि अवमानना के आरोपी - अदीश्वर सिंघल - का पता अभी नहीं चल पा रहा है, जबकि उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किए जा चुके हैं।यह आदेश 18 सितंबर को तब...

BCI परिसर में वकीलों पर हुए हालिया हमले की CBI जांच की याचिका पर सुनवाई की मंज़ूरी पर फ़ैसला करेगा दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस हफ़्ते उस याचिका पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें अगस्त के आखिर में बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) परिसर के अंदर और बाहर वकीलों पर हुए कथित हमले की CBI या किसी दूसरी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई।जस्टिस गिरीश कथपालिया कई वकीलों की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं, जिसमें FIR दर्ज करने और कथित घटना की स्वतंत्र जांच के निर्देश देने की मांग की गई।वकीलों ने BCI को उस समय की परिसर की CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने और सौंपने के निर्देश देने की भी मांग की।शुरुआत...

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 2018 के 'CM स्टिंग ऑपरेशन' मामले में नामजद व्यक्ति के खिलाफ FIR रद्द की, कहा- कोई दोषी ठहराने वाला सबूत नहीं मिला
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री को निशाना बनाने वाले कथित स्टिंग ऑपरेशन के सिलसिले में नामजद व्यक्ति के खिलाफ 2018 में दर्ज FIR रद्द की। कोर्ट ने कहा कि "याचिकाकर्ता को कथित अपराधों से जोड़ने वाली कोई शुरुआती सामग्री (prima facie material) न होने पर आपराधिक कार्यवाही की मुश्किलों और अनिश्चितता का सामना करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।"कोर्ट ने गौर किया कि FIR में केवल यह आरोप लगाया गया कि न्यूज़ चैनल के CEO ने शिकायतकर्ता को बताया कि याचिकाकर्ता तत्कालीन मुख्यमंत्री...

केंद्र ने कर्नाटक हाईकोर्ट से कहा: शादी को मान्यता मिले बिना सेम-सेक्स पार्टनर 'जीवनसाथी' के तौर पर टैक्स छूट का दावा नहीं कर सकते
केंद्र सरकार ने कर्नाटक हाईकोर्ट में सेम-सेक्स जोड़े की याचिका का विरोध किया। यह जोड़ा 'रिश्तेदार' से मिले तोहफ़ों पर इनकम टैक्स एक्ट के तहत छूट का लाभ उठाना चाहता था। सरकार का तर्क है कि 'जीवनसाथी' को मिलने वाला लाभ सेम-सेक्स पार्टनर को तब तक नहीं दिया जा सकता, जब तक उनके रिश्ते को कानूनी रूप से वैध शादी के तौर पर मान्यता न दी जाए।याचिकाकर्ताओं ने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 56(2)(x) के पांचवें प्रावधान (proviso) में 'जीवनसाथी' शब्द की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है, क्योंकि इसमें सेम-सेक्स...

नीलामी में संपत्ति बिकना मौजूदा किरायेदारों को बेदखल करने का आधार नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी संपत्ति की बिहार स्टेट फाइनेंशियल कॉरपोरेशन (BSFC) द्वारा नीलामी में बिक्री अपने आप वहां रह रहे किरायेदारों को बेदखल करने का आधार नहीं बन सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किरायेदारों की बेदखली केवल झारखंड बिल्डिंग (लीज, रेंट एंड एविक्शन) कंट्रोल एक्ट में निर्धारित आधारों के अनुसार ही की जा सकती है।जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ किरायेदारों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में BSFC द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती दी गई, जिसमें संपत्ति बिक जाने का हवाला देते हुए...

पत्तियां, बीज और घास जैसी सामग्री 'गांजा' की परिभाषा में नहीं आती: दिल्ली हाईकोर्ट ने दी जमानत
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केवल पत्तियों, बीज और घास जैसी सामग्री से बना पदार्थ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत 'गांजा' की परिभाषा में नहीं आता। कोर्ट ने 21.20 किलोग्राम कथित गांजा बरामदगी के मामले में आरोपी को नियमित जमानत दी।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पहली नजर में 21.20 किलोग्राम गांजे की कथित बरामदगी NDPS Act की धारा 37 के दायरे में आती प्रतीत हो सकती है लेकिन आरोपपत्र से पता चलता है कि बरामद सामग्री में केवल फूल या फल...

प्रदर्शनकारियों को देखकर मुस्कुराना या प्रदर्शन के समर्थन में नारे लगाना अनुशासनहीनता नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों को असहमति व्यक्त करने, प्रदर्शन करने या किसी प्रदर्शन के समर्थन में उत्साह जताने का महत्वपूर्ण अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि केवल प्रदर्शनकारियों को देखकर मुस्कुराना अनुशासनहीनता नहीं माना जा सकता।जस्टिस जस्मीत सिंह ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) द्वारा आठ छात्रों पर लगाए गए 19 हजार रुपये के जुर्माने पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई। छात्रों पर विश्वविद्यालय ने अनुशासनहीनता के आरोप में प्रत्येक पर जुर्माना लगाया था।छात्रों ने विश्वविद्यालय के चीफ...

BCI को अपने केस के बारे में मीडिया से बात करने वाले वकीलों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए: जस्टिस अभय ओक
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय ओका ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से उन वकीलों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा, जो चल रहे केस में अपनी दलीलों के बारे में मीडिया से बात करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा करना खुद का प्रचार करने जैसा हो सकता है और यह BCI के नियमों के तहत विज्ञापन और काम मांगने पर लगी रोक के दायरे में आ सकता है।'सेंटर फॉर डिस्कोर्स ऑन क्रिमिनल एंड कॉन्स्टिट्यूशनल ज्यूरिस्प्रूडेंस' द्वारा आयोजित "आपराधिक मुकदमों में नैतिकता, मीडिया द्वारा ट्रायल और बयानों की स्वीकार्यता पर चर्चा"...

बिलकिस बानो मामले के दोषी राधेश्याम शाह को हाईकोर्ट ने दी 7 दिन की पैरोल
गुजरात हाईकोर्ट ने 2002 के बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 11 दोषियों में से एक राधेश्याम शाह को सात दिन की पैरोल मंजूर की। जस्टिस संजीव जे. ठाकेर ने 17 सितंबर को शाह की याचिका आंशिक रूप से मंजूर करते हुए यह आदेश दिया।कोर्ट ने शाह को वास्तविक रिहाई की तारीख से सात दिनों के लिए पैरोल पर रिहा करने का निर्देश दिया। इसके लिए उसे संबंधित जेल प्राधिकरण की संतुष्टि के अनुसार 10 हजार रुपये का निजी मुचलका देना होगा। पैरोल की अवधि समाप्त होते ही उसे बिना किसी देरी के...

बिना मेडिकल जरूरत बच्चे को अस्पताल में भर्ती रख सकते हैं? दिल्ली हाईकोर्ट करेगा जांच
दिल्ली हाईकोर्ट यह जांच करेगा कि कानून के उल्लंघन के आरोप में किशोर (Child in Conflict with Law) को बिना किसी मेडिकल जरूरत के मनोचिकित्सकीय जांच के लिए अस्पताल में भर्ती रहने के लिए मजबूर किया जा सकता है या नहीं। कोर्ट यह भी तय करेगा कि ऐसी जांच के दौरान क्या किशोर को उसके प्राकृतिक अभिभावक से अलग रखा जा सकता है।जस्टिस मधु जैन ने एक किशोर की याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिका में POCSO Act के स्पेशल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें किशोर को इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज...

आयुष मलिक धर्मांतरण केस: हाईकोर्ट द्वारा शामली पुलिस को फटकार लगाने का दावा करने वाली पोस्ट के लिए 6 लोगों पर केस दर्ज
शामली पुलिस ने छह सोशल-मीडिया यूज़र्स (जिनमें एक वकील भी शामिल है) के खिलाफ FIR दर्ज की। इन पर आरोप है कि इन्होंने "गुमराह करने वाली और बिना तथ्यों वाली" जानकारी फैलाई, जिसमें दावा किया गया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान शामली पुलिस को फटकार लगाई। आयुष मलिक धर्म परिवर्तन से जुड़े एक मामले के केंद्र में हैं।गौरतलब है कि 16 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 वर्षीय मलिक को आज़ाद किया था। मलिक ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम अपनाया और आरोप...

स्पेशल जज को POCSO अपराध न मिलने पर FIR की अर्जी मजिस्ट्रेट को भेजनी होगी या नहीं? दिल्ली हाईकोर्ट करेगा फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट यह तय करेगा कि जब किसी विशेष कानून के तहत गठित स्पेशल कोर्ट प्रथमदृष्टया यह पाती है कि उस कानून के तहत कोई अपराध नहीं बनता, तो क्या FIR दर्ज करने की मांग वाली BNSS की धारा 175(3) के तहत दायर अर्जी संबंधित मजिस्ट्रेट को भेजना जरूरी है या नहीं।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने दिल्ली और हरियाणा के कई पुलिस अधिकारियों की ओर से दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह कानूनी सवाल उठाया। याचिकाओं में POCSO Act के स्पेशल जज द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें संबंधित DCP को भारतीय न्याय...

BCI के अनुशासनात्मक आदेश को आपराधिक कार्यवाही में चुनौती नहीं दे सकते वकील: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अनुशासनात्मक आदेश को केवल एडवोकेट्स एक्ट (Advocate Act) की धारा 38 के तहत सुप्रीम कोर्ट में अपील के जरिए चुनौती दी जा सकती है। वकील आपराधिक कार्यवाही शुरू कराकर या हाईकोर्ट के पुनरीक्षण अधिकार क्षेत्र का सहारा लेकर BCI के अनुशासनात्मक आदेश को अप्रत्यक्ष रूप से चुनौती नहीं दे सकता।जस्टिस पुरुषैंद्र कुमार कौरव ने यह टिप्पणी वकील पी. बालासुब्रमणियन की याचिका खारिज करते हुए की। याचिका में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज-सह-स्पेशल जज (PC Act)...

केंद्र सरकार ने चार हाईकोर्ट में 14 न्यायिक अधिकारियों की जज और एडिशनल जज के रूप में की नियुक्ति
केंद्र सरकार ने शनिवार 19 सितंबर को दिल्ली, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख, झारखंड और कर्नाटक हाईकोर्ट में कुल 14 न्यायिक अधिकारियों की जज और एडिशनल जज के रूप में नियुक्ति की अधिसूचना जारी की। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर नियुक्तियों की जानकारी साझा की।राष्ट्रपति ने भारत के संविधान के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से परामर्श के बाद इन नियुक्तियों को मंजूरी दी।दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायिक अधिकारी निवेदिता अनिल शर्मा और निशा सहाय...
