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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में रिहायशी इलाकों को कमर्शियल ज़ोन में बदलने के बड़े पैमाने पर हो रहे मामलों की जांच के आदेश दिए
एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में बिल्डिंग बाय-लॉ के बड़े पैमाने पर हो रहे उल्लंघन और रिहायशी इलाकों को कमर्शियल इस्तेमाल के लिए बिना इजाज़त बदलने के मामलों का गंभीरता से संज्ञान लिया।कोर्ट ने कहा,"हमारे सामने ऐसे मामले भी आ रहे हैं, जिनमें रिहायशी कॉलोनियों को रिहायशी इमारतों और ज़मीनों का कमर्शियल मकसद से बिना इजाज़त इस्तेमाल करके कमर्शियल इलाकों में बदला जा रहा है। ऐसी हरकतें न सिर्फ कानून और जनहित के खिलाफ हैं, बल्कि उन असली निवासियों के लिए भी बड़ी परेशानी और नुकसान का सबब...
एपस्टीन फाइल्स केस: हरदीप पुरी की बेटी के मानहानि केस में रोक के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा एक्टिविस्ट
रायपुर के सोशल एक्टिविस्ट कुणाल शुक्ला ने दिल्ली हाईकोर्ट में रोक लगाने वाले आदेश को चुनौती दी। इस आदेश में उन्हें और कई अन्य लोगों को उन पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया गया, जिनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को अमेरिकी फाइनेंसर और बच्चों के यौन शोषण के दोषी जेफरी एपस्टीन से जोड़ा गया।इस मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीज़न बेंच करेगी।इसे "मुकदमे से पहले का एकतरफ़ा रोक आदेश" बताते हुए शुक्ला ने अपनी अपील में कहा कि उन्होंने जो जानकारी...
पार्टियां सिंगल जज के सामने यह मान लेने के बाद कि मामला किसी बाध्यकारी मिसाल के दायरे में आता है, इंट्रा-कोर्ट अपील में उन मुद्दों को दोबारा नहीं उठा सकतीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि एक बार जब पार्टियाँ सिंगल जज के सामने यह मान लेती हैं कि कोई मुद्दा किसी बाध्यकारी मिसाल से पहले ही तय हो चुका है तो वे बाद में इंट्रा-कोर्ट अपील में उसी मुद्दे को दोबारा नहीं उठा सकतीं; कोर्ट ने इस बात को दोहराया कि किसी फैसले में दर्ज बयान पार्टियों पर बाध्यकारी होते हैं।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की डिवीज़न बेंच CWJC नंबर 14725/2023 में एक सिंगल जज द्वारा 08.04.2024 को पारित आदेश को चुनौती देने वाली लेटर्स पेटेंट अपील पर सुनवाई कर रही...
'उचित सहायता नहीं मिल रही': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी पैनल वाले वकीलों द्वारा दी जा रही अपर्याप्त सहायता पर चिंता जताई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार के पैनल में शामिल वकीलों द्वारा दी जा रही अपर्याप्त सहायता पर चिंता व्यक्त की।U.P. Minor Minerals (Concession) Rules, 1963 के तहत बिना किसी कारण बताओ नोटिस के वसूली से जुड़े एक मामले में, जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस देवेंद्र सिंह-I की बेंच ने यह टिप्पणी की:“हम एडवोकेट जनरल-सह-राज्य विधि अधिकारी के कार्यालय में मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। इसका कारण यह है कि कार्यालय का कामकाज इतने निचले स्तर पर पहुंच गया है कि अदालतों को उचित सहायता...
S. 35 BNSS | पेशी का नोटिस फिजिकली ही दिया जाना चाहिए, WhatsApp या ईमेल मान्य तरीके नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि धारा 35(3) पुलिस को यह अधिकार नहीं देती कि वह WhatsApp या ईमेल के ज़रिए गिरफ्तारी से पहले का नोटिस या FIR की कॉपी भेजे। कोर्ट ने साफ किया कि गिरफ्तारी से पहले के चरण में नोटिस को फिजिकली (व्यक्तिगत रूप से) देना अनिवार्य है, जैसा कि विधायिका का इरादा था।जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की सिंगल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर भरोसा करते हुए यह माना कि BNSS की धारा 35 [CrPC की धारा 41A] के तहत नोटिस का इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा जाना अमान्य है, जैसा कि...
BREAKING| ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, कहा - स्व-पहचान को हटाना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई। याचिका में तर्क दिया गया कि हालिया संशोधनों ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिंग की स्व-निर्धारण के मौलिक अधिकार को छीन लिया।संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दो ट्रांसजेंडर महिलाओं - लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और ज़ैनब जावेद पटेल - ने दायर की है। पहली याचिकाकर्ता किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर, भरतनाट्यम नृत्यांगना, लेखिका, सोशल एक्टिविस्ट और...
ECI, CAG जैसी संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से, राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होकर काम करना चाहिए: जस्टिस बीवी नागरत्ना
सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस BV नागरत्ना ने शनिवार को इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) जैसी संवैधानिक संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए और लोकतांत्रिक शासन की गरिमा को बनाए रखने के लिए उन्हें राजनीतिक प्रभाव से दूर रहना चाहिए।पटना के चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में "अधिकारों से परे संवैधानिकता: संरचना क्यों मायने रखती है?" विषय पर आयोजित पहले डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मारक व्याख्यान में बोलते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि संविधान ने जानबूझकर...
केंद्र को राज्यों को अधीनस्थ नहीं समझना चाहिए, किसी राज्य के नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता: जस्टिस बी.वी. नागरत्ना
सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने शनिवार को इस बात पर ज़ोर दिया कि केंद्र-राज्य संबंध संवैधानिक शासन पर आधारित होने चाहिए और यह इस बात पर निर्भर नहीं कर सकता कि सत्ता में कौन-सी राजनीतिक पार्टी है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि किसी राज्य के नागरिकों के साथ विकास या शासन के मामलों में भेदभाव नहीं किया जा सकता।पटना के चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में "अधिकारों से परे संवैधानिकता: संरचना क्यों मायने रखती है?" विषय पर आयोजित पहले डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मारक व्याख्यान में बोलते हुए...
कानूनी सुधारों और प्रगति के बावजूद दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा जारी, पितृसत्ता अब भी हावी: सुप्रीम कोर्ट
यह देखते हुए कि दशकों के कानूनी सुधारों, कल्याणकारी योजनाओं और न्यायिक हस्तक्षेपों के बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराध अभी भी बड़े पैमाने पर जारी हैं, सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि घरेलू हिंसा और लिंग-आधारित अपराधों का लगातार बने रहना एक गहरी जड़ें जमा चुकी पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था को दर्शाता है।कोर्ट ने गौर किया कि जहां एक ओर भारत ने आर्थिक विकास, बेहतर साक्षरता और शिक्षा तथा कार्यबल में महिलाओं की अधिक भागीदारी देखी है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के खिलाफ हिंसा अभी भी व्यापक है, विशेष रूप से...
छोटी टाइपिंग गलती पर पेट्रोल पंप आवंटन रद्द करना गलत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने BPCL को फटकारा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि केवल टाइपिंग की मामूली गलती के आधार पर पेट्रोल पंप का आवंटन रद्द करना न सिर्फ अनुचित है बल्कि कानूनन भी गलत है।इसके साथ ही अदालत ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा किया गया आवंटन रद्द करने का फैसला निरस्त किया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा कि जब आवेदक ने लेटर ऑफ इंटेंट मिलने के बाद भारी निवेश कर दिया हो तब इस तरह का निर्णय पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।मामले के अनुसार भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन...
NBW पर IO को सस्पेंड करना भारी पड़ा: हाईकोर्ट ने बस्ती SP को दी अवमानना की चेतावनी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस्ती के पुलिस अधीक्षक द्वारा एक जांच अधिकारी को निलंबित किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना करार दिया।बता दें, यह मामला उस समय सामने आया, जब जांच अधिकारी ने आरोपियों की पेशी सुनिश्चित कराने के लिए गैर-जमानती वारंट प्राप्त किया था।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि एसपी द्वारा जारी निलंबन आदेश अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-2, बस्ती के आदेश की अवहेलना जैसा प्रतीत होता है। मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी के आवेदन पर...
LPG सिलेंडर कालाबाजारी मामला: दिल्ली कोर्ट ने अग्रिम जमानत ठुकराई, बढ़ती कीमतों के बीच अपराध को बताया गंभीर
दिल्ली कोर्ट ने LPG सिलेंडरों की कथित अवैध खरीद-फरोख्त और कालाबाजारी के मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया।अदालत ने कहा कि बढ़ती कीमतों और आम लोगों की बढ़ती निर्भरता के दौर में ऐसे अपराध और भी गंभीर हो जाते हैं।साकेत कोर्ट के एडिशनल सेशन जज विनोद कुमार गौतम ने आरोपी मुकेश कुमार की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। आरोपी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज है।अभियोजन के अनुसार, मामला LPG...
बर्न सुविधाओं के बिना स्वास्थ्य का अधिकार महज दिखावा: झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश, 120 दिन में हर जिले में बर्न यूनिट अनिवार्य
झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग अग्निकांड मामले की सुनवाई करते हुए राज्य में बर्न केयर सुविधाओं की कमी पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि यदि राज्य में आधुनिक बर्न उपचार सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिला स्वास्थ्य का अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह जाता है।चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो हजारीबाग में मिट्टी तेल से लगी आग की घटना से जुड़ी थी। इस हादसे में कई लोगों की मौत हुई थी और कई गंभीर रूप से झुलस...
खांसी की दवा वाले मामलों में NDPS Act का लगातार दुरुपयोग: पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जमानत मंजूर
पटना हाईकोर्ट ने खांसी की दवा से जुड़े मामलों में NDPS Act के इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि पुलिस इस कानून का लगातार दुरुपयोग कर रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि निर्धारित सीमा के भीतर कोडीन युक्त कफ सिरप के मामले NDPS Act के तहत नहीं बल्कि औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के अंतर्गत आते हैं।जस्टिस अशोक कुमार पांडेय जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ता को मानसी थाना कांड संख्या 218/2025 में आरोपी बनाया गया। प्रारंभ में मामला बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत दर्ज हुआ...
बीमारी का बहाना बनाकर दूसरी अदालत में पेश हुआ वकील, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया 20 हजार का जुर्माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अदालत को गुमराह करने की कोशिश करने वाले वकील पर सख्त रुख अपनाते हुए 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। वकील ने एक मामले में बीमारी का पर्चा भेजकर अनुपस्थित रहने की सूचना दी, जबकि उसी दिन वह दूसरी अदालत में पेश हो रहा था।जस्टिस गौतम चौधरी ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि संबंधित वकील ने न केवल बीमारी का गलत बहाना बनाया बल्कि यह भी नहीं बताया कि आवेदकों को पहले ही एक अन्य मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिल चुकी है।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा,“वकील का आचरण यह...
पीएम के खिलाफ कथित अपशब्द कहने पर हिमाचल कांग्रेस नेता के खिलाफ दर्ज FIR रद्द
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चुनावी रैली में प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में कांग्रेस नेता के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल अपशब्दों के इस्तेमाल से यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य या नफरत फैलाने की कोशिश की।जस्टिस संदीप शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई आरोप नहीं है, जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता ने प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए धर्म, जाति, समुदाय...
ऊंचे पद पर बैठे कर्मचारी को अपने जूनियर कर्मचारियों जैसी हल्की सज़ा नहीं मिल सकती: सुप्रीम कोर्ट ने बैंक मैनेजर की बर्खास्तगी बहाल की
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऊंचे पद पर बैठा कोई भी दोषी अधिकारी, उसी गलत काम के लिए अपने से नीचे के रैंक वाले कर्मचारियों जैसी सज़ा की मांग नहीं कर सकता।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने पंजाब एंड सिंध बैंक के सीनियर मैनेजर की नौकरी से बर्खास्तगी को सही ठहराया। इस मैनेजर ने अपने जूनियर बैंक अधिकारी और एक गनमैन के साथ मिलकर, ग्राहकों के पैसे का अपने निजी फायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया था।कोर्ट ने बैंक की अपील मान ली और दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें आरोपी की सज़ा...
30 जून को रिटायरमेंट, 1 जुलाई के सालाना इंक्रीमेंट में रुकावट नहीं- दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीज़न बेंच ने फैसला सुनाया कि 30 जून को रिटायर होने वाला सरकारी कर्मचारी 1 जुलाई को मिलने वाले इंक्रीमेंट का हकदार है, क्योंकि यह इंक्रीमेंट रिटायरमेंट से पहले पूरी की गई सेवा के साल के लिए अर्जित किया जाता है। इसे सिर्फ इसलिए नकारा नहीं जा सकता कि यह रिटायरमेंट के बाद देय होता है।पृष्ठभूमि के तथ्यकर्मचारी (प्रतिवादी) नॉर्दर्न रेलवे, नई दिल्ली में A.F.A. के तौर पर काम कर रहा था। वह 30 जून 2021 को सेवा से रिटायर हो गया। उसका सालाना...
बालीग बेटों की कमाने की क्षमता पत्नी के 'स्वतंत्र' और स्थायी गुज़ारा भत्ता के अधिकार को खत्म नहीं करती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि तलाकशुदा पत्नी का स्थायी गुज़ारा भत्ता पाने का अधिकार एक 'स्वतंत्र' और 'अलग' अधिकार है, जिसे सिर्फ़ इसलिए कम या खत्म नहीं किया जा सकता कि उसके बेटे बालीग हैं और कमाते हैं।यह साफ़ करते हुए कि ये बातें ज़्यादा से ज़्यादा गुज़ारा भत्ते की रकम पर असर डाल सकती हैं, लेकिन पत्नी के बुनियादी अधिकार को खत्म नहीं कर सकतीं, कोर्ट ने कहा:"...बेटों का बालीग होना और उनकी कमाने की क्षमता, भले ही कानूनी तौर पर मायने रखती हो, लेकिन हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25...
'ग्राम रोज़गार सेवक' का पद 'महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम' के तहत कोई 'वेतनभोगी पद' या 'लाभ का पद' नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि 'ग्राम रोज़गार सेवक' का पद 'महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1958' के तहत कोई "वेतनभोगी पद" या "लाभ का पद" नहीं माना जाएगा। इसलिए इस पद पर काम करने वाले चुने हुए सदस्य को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ग्राम पंचायत का कोई भी चुना हुआ सदस्य, जो अपने पद पर रहते हुए 'ग्राम रोज़गार सेवक' के तौर पर भी काम करता है, उसे 'महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1958' की धारा 14(1)(f) या (g) के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस अजीत बी. कडेथंकर एक रिट...




















