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वायरल वीडियो प्रकरण: परिवीक्षाधीन DHJS जज की सेवा समाप्ति बरकरार, दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा- कार्रवाई न दंडात्मक, न ही कलंककारी
वायरल वीडियो प्रकरण: परिवीक्षाधीन DHJS जज की सेवा समाप्ति बरकरार, दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा- कार्रवाई न दंडात्मक, न ही कलंककारी

दिल्ली हाइकोर्ट ने वायरल कोर्टरूम वीडियो के बाद दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा (DHJS) के परिवीक्षाधीन न्यायिक अधिकारी की सेवा समाप्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। हाइकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कार्रवाई अधिकारी की समग्र अनुपयुक्तता के आकलन पर आधारित साधारण सेवा समाप्ति है और इसे न तो दंडात्मक कहा जा सकता है और न ही कलंककारी।जस्टिस अनिल क्षेतरपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने 10 अक्टूबर, 2024 की अधिसूचना और 14 अक्टूबर, 2024 के परिणामी आदेश को वैध ठहराया, जिनके माध्यम से परिवीक्षा...

शौचालय की सुविधा अनुच्छेद 21 के तहत बुनियादी मानव अधिकार: बॉम्बे हाइकोर्ट ने मुंबई की झुग्गी बस्तियों में स्वच्छता सुधार के निर्देश दिए
शौचालय की सुविधा अनुच्छेद 21 के तहत बुनियादी मानव अधिकार: बॉम्बे हाइकोर्ट ने मुंबई की झुग्गी बस्तियों में स्वच्छता सुधार के निर्देश दिए

बॉम्बे हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पर्याप्त स्वच्छता और शौचालय की सुविधा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। यह अधिकार झुग्गी बस्तियों में रहने वाले नागरिकों को भी समान रूप से प्राप्त है, भले ही वे झुग्गियां नगर निगम की भूमि पर अतिक्रमण कर बनाई गई हों। हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार जब बड़ी आबादी किसी क्षेत्र में निवास करती है तो नगर निगम अपने वैधानिक और संवैधानिक दायित्वों से मुंह नहीं मोड़ सकता।जस्टिस जी. एस. कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की...

लापरवाह और निराधार आरोप: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने वकील के कहने पर NBW जारी होने के दावे पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
लापरवाह और निराधार आरोप: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने वकील के कहने पर NBW जारी होने के दावे पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने ट्रायल जज पर बेहद गंभीर और निराधार आरोप लगाने वाले दो अभियुक्तों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनकी ट्रांसफर याचिका खारिज की। साथ ही उन पर 1 लाख रुपये का भारी जुर्माना (कॉस्ट) लगाया। हाइकोर्ट ने कहा कि यह दावा पूरी तरह लापरवाह, आधारहीन और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।जस्टिस समीत गोपाल की एकल पीठ ने यह आदेश उन अभियुक्तों के खिलाफ पारित किया, जिन्होंने आरोप लगाया कि ट्रायल कोर्ट ने शिकायतकर्ता के भाई जो कि एक वकील है, उनके कहने पर उनके खिलाफ गैर-जमानती...

नाबालिग पीड़िता की पीड़ा से आंख नहीं मूंद सकता कोर्ट: बॉम्बे हाइकोर्ट ने 83 वर्षीय बलात्कार दोषी की सज़ा घटाने से इनकार किया
नाबालिग पीड़िता की पीड़ा से आंख नहीं मूंद सकता कोर्ट: बॉम्बे हाइकोर्ट ने 83 वर्षीय बलात्कार दोषी की सज़ा घटाने से इनकार किया

बॉम्बे हाइकोर्ट (गोवा बेंच) ने एक अहम फैसले में 83 वर्षीय व्यक्ति की सज़ा कम करने से इनकार करते हुए स्पष्ट कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों में आरोपी की उम्र को सहानुभूति का आधार नहीं बनाया जा सकता। हाइकोर्ट ने कहा कि अदालत पीड़िता की उम्र और उसके साथ हुए अत्याचार की अनदेखी करते हुए नेल्सन की आंख नहीं फेर सकती।जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की एकल पीठ ने 63 पन्नों के विस्तृत आदेश में 2012 के मामले में 9 वर्षीय बच्ची के यौन शोषण के दोषी मार्टिन सोआरेस की 10 साल की कठोर कारावास की सज़ा को बरकरार रखा। कोर्ट ने...

केरल संयुक्त परिवार उन्मूलन अधिनियम क्या हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के विपरीत है? सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच
केरल संयुक्त परिवार उन्मूलन अधिनियम क्या हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के विपरीत है? सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (6 फरवरी) को केरल हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर चार हफ़्ते में जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया, जिसमें कहा गया कि केरल संयुक्त हिंदू परिवार प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1975, हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के विपरीत है।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने इस मामले पर विचार किया। हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की अंतरिम प्रार्थना पर भी नोटिस जारी किया गया।विपरीत होने की घोषणा के बाद हाईकोर्ट ने कहा था कि 20 दिसंबर, 2004 (जिस...

सेकेंडरी सबूत पेश करने की शर्तें साबित न होने तक दस्तावेज़ की फोटोकॉपी सबूत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सेकेंडरी सबूत पेश करने की शर्तें साबित न होने तक दस्तावेज़ की फोटोकॉपी सबूत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फोटोकॉपी किए गए पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर की गई बिक्री यह देखते हुए रद्द की कि किसी दस्तावेज़ की फोटोकॉपी, जो सेकेंडरी सबूत है, तब तक सबूत नहीं है जब तक कि वह एविडेंस एक्ट की धारा 65 में बताई गई शर्तों के तहत न आती हो।एविडेंस एक्ट की धारा 65 सेकेंडरी सबूत (कॉपी, मौखिक बयान) पेश करने की अनुमति देती है, जब मूल दस्तावेज़ धारा 64 के तहत पेश नहीं किया जा सकता। यह तब लागू होता है, जब मूल दस्तावेज़/सबूत खो गया हो, नष्ट हो गया हो, विरोधी पक्ष के कब्ज़े में हो, या एक सार्वजनिक दस्तावेज़...

सुप्रीम कोर्ट ने खुद को सुप्रीम कोर्ट वकील बताकर बिल्डरों से ठगी करने की आरोपी महिला को दी जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने खुद को सुप्रीम कोर्ट वकील बताकर बिल्डरों से ठगी करने की आरोपी महिला को दी जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने खुद को सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली वकील बताकर कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने की आरोपी लगभग 60 वर्षीय महिला को जमानत दी। कोर्ट ने बॉम्बे हाइकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें महिला की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी गई।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने पूनम चरणदास खन्ना की विशेष अनुमति याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि लंबे समय से न्यायिक हिरासत में रहने और मुकदमे की धीमी गति को देखते हुए जमानत का मामला बनता है।आरोपी महिला के खिलाफ मुंबई के...

PMLA | अटैचमेंट की पुष्टि के खिलाफ अपील लंबित हो तो संपत्ति जब्ती का आदेश नहीं दे सकती स्पेशल कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट
PMLA | अटैचमेंट की पुष्टि के खिलाफ अपील लंबित हो तो संपत्ति जब्ती का आदेश नहीं दे सकती स्पेशल कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 8 की व्याख्या करते हुए एक अहम फैसला दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि PMLA की धारा 8(3) के तहत अटैचमेंट की पुष्टि के खिलाफ अपील अपीलीय अधिकरण में लंबित है तो स्पेशल कोर्ट धारा 8(7) के तहत संपत्ति की जब्ती की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ा सकती।जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि जैसे ही धारा 8(3) के आदेश को धारा 26 के तहत चुनौती दी जाती है, धारा 8(7) की कार्यवाही पर एक निहित रोक लग जाती है।कोर्ट ने अपने फैसले में...

POCSO मामलों में गवाहों पर दबाव रोकने के लिए रोज़ाना गवाही दर्ज हो: दिल्ली हाइकोर्ट का ट्रायल कोर्ट्स को निर्देश
POCSO मामलों में गवाहों पर दबाव रोकने के लिए रोज़ाना गवाही दर्ज हो: दिल्ली हाइकोर्ट का ट्रायल कोर्ट्स को निर्देश

दिल्ली हाइकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी की सभी ट्रायल अदालतों को निर्देश दिया कि POCSO मामलों में जिन गवाहों की गवाही शुरू हो चुकी है उनकी गवाही बिना अंतराल के रोज़ाना दर्ज की जाए ताकि गवाहों पर दबाव डालने की संभावना को रोका जा सके।जस्टिस गिरीश काथपालिया ने कहा कि ऐसे मामलों में ट्रायल यथासंभव दिन-प्रतिदिन चलाया जाना चाहिए विशेष रूप से तब, जब गवाह बयान दे रहा हो।हाइकोर्ट ने अपने आदेश में कहा,“निर्देश दिया जाता है कि इस निर्णय की प्रति दिल्ली के सभी प्रिंसिपल जिला एंड सेशन जजों को भेजी जाए ताकि इसे...

ट्रायल कोर्ट में 2863 जजों की भर्ती पर हाइकोर्ट ने मांगा ब्लूप्रिंट, कहा- तेज़ न्याय के लक्ष्य के लिए त्वरित कदम ज़रूरी
ट्रायल कोर्ट में 2863 जजों की भर्ती पर हाइकोर्ट ने मांगा ब्लूप्रिंट, कहा- तेज़ न्याय के लक्ष्य के लिए त्वरित कदम ज़रूरी

बॉम्बे हाइकोर्ट ने महाराष्ट्र की निचली न्यायपालिका में हाल ही में स्वीकृत 2863 नए पदों पर न्यायिक अधिकारियों की भर्ती को लेकर हाइकोर्ट प्रशासन से एक स्पष्ट ब्लूप्रिंट प्रस्तुत करने को कहा। कोर्ट ने जोर देते हुए कहा कि नागरिकों को समय पर न्याय दिलाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य सरकार और हाइकोर्ट दोनों को प्रशासनिक स्तर पर तेज़ी से कदम उठाने होंगे।जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस सारंग कोतवाल की खंडपीठ ने 28 जनवरी को पारित अपने आदेश में कहा,“हम इस बात को लेकर सतर्क हैं कि न्यायिक अधिकारियों...

पंजाब मानसिक स्वास्थ्य नियमों को जल्द मंजूरी दे केंद्र सरकार: हाइकोर्ट
पंजाब मानसिक स्वास्थ्य नियमों को जल्द मंजूरी दे केंद्र सरकार: हाइकोर्ट

पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि पंजाब मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों को यथाशीघ्र मंजूरी दी जाए। कोर्ट ने कहा कि यह प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर पूरी की जानी चाहिए और अधिमानतः छह सप्ताह की अवधि के भीतर इसे अंतिम रूप दिया जाए। हाइकोर्ट ने यह भी अपेक्षा जताई कि पंजाब सरकार इस पूरी प्रक्रिया में केंद्र सरकार को सक्रिय सहयोग प्रदान करे।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ चंडीगढ़ स्थित पुष्पांजलि ट्रस्ट द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर...

POCSO जांचें चाइल्ड-फ्रेंडली होनी चाहिए, जांचकर्ताओं को संवेदनशील बनाएं ताकि बिना किसी शक के सच सामने आए: गुवाहाटी हाईकोर्ट
POCSO जांचें चाइल्ड-फ्रेंडली होनी चाहिए, जांचकर्ताओं को संवेदनशील बनाएं ताकि 'बिना किसी शक के सच सामने आए': गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण एक्ट (POCSO Act) के तहत जांच संवेदनशीलता और चाइल्ड-फ्रेंडली प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करते हुए की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि काउंसलिंग सपोर्ट न देना, सपोर्ट पर्सन नियुक्त न करना और साफ़, विशिष्ट बयान रिकॉर्ड न करना न्याय के मकसद को ही खत्म कर सकता है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि खराब या लापरवाही से की गई जांच न केवल आरोपी के साथ अन्याय करती है, बल्कि ऐसे मामलों में भी बरी होने का कारण बन सकती है जहां अपराध हुआ हो।जस्टिस...

राजनीति से प्रेरित: सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता हासिल करने से पहले वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने पर FIR की याचिका का विरोध किया
'राजनीति से प्रेरित': सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता हासिल करने से पहले वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने पर FIR की याचिका का विरोध किया

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने दिल्ली कोर्ट में याचिका का विरोध किया, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई। उक्त आदेश में 1980 की चुनावी सूची में भारतीय नागरिकता मिलने से तीन साल पहले कथित तौर पर जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके अपना नाम जुड़वाने के लिए उनके खिलाफ FIR दर्ज करने से इनकार किया गया था।गांधी ने कहा कि यह याचिका राजनीतिक रूप से प्रेरित, पूरी तरह से गलत, तुच्छ और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।यह आपराधिक पुनरीक्षण याचिका विकास त्रिपाठी ने गांधी के खिलाफ आपराधिक...

2021 से नियुक्त सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के तीन-चौथाई जज ऊंची जातियों के: कानून मंत्रालय ने संसद में बताया
2021 से नियुक्त सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के तीन-चौथाई जज ऊंची जातियों के: कानून मंत्रालय ने संसद में बताया

केंद्रीय कानून मंत्रालय ने बुधवार को राज्यसभा सांसद पी. विल्सन के सवाल के लिखित जवाब में संसद को बताया कि 1 जनवरी, 2021 से 30 जनवरी, 2026 के बीच सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में नियुक्त लगभग तीन-चौथाई जज ऊंची जातियों के हैं।सरकार द्वारा साझा किए गए डेटा के अनुसार, इस अवधि के दौरान विभिन्न हाईकोर्ट में नियुक्त 593 जजों में से 157 अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या अल्पसंख्यक समुदायों से थे, जबकि बाकी नियुक्तियां सामान्य या उच्च जाति वर्ग से थीं। प्रतिशत के हिसाब से पिछले पांच सालों...

पूरी तरह से गलत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल जजों द्वारा आदेशों में सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम लिखने की प्रथा की निंदा की
'पूरी तरह से गलत': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रायल जजों द्वारा आदेशों में सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम लिखने की प्रथा की निंदा की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते ट्रायल कोर्ट के जजों द्वारा सुप्रीम कोर्ट के किसी फैसले का हवाला देते समय अपने आदेशों में सुप्रीम कोर्ट के जजों के नाम लिखने की प्रथा की निंदा की।कोर्ट ने इस सिस्टम को "पूरी तरह से गलत" बताया और कहा कि इसकी सराहना नहीं की जा सकती। इसने न्यायिक अधिकारियों को याद दिलाया कि उनके आदेशों में केवल हवाला, केस नंबर और संबंधित टेक्स्ट ही उद्धृत किया जाना चाहिए।जस्टिस समित गोपाल की बेंच ने अपने आदेश में कहा,"यह याद दिलाया जाता है कि फैसले का हवाला देते समय केवल उसका हवाला...

अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों के पास समीक्षा की शक्ति नहीं होती, जब तक कि कानून द्वारा उन्हें यह शक्ति न दी गई हो: सुप्रीम कोर्ट
अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों के पास समीक्षा की शक्ति नहीं होती, जब तक कि कानून द्वारा उन्हें यह शक्ति न दी गई हो: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (6 फरवरी) को कहा कि अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों को समीक्षा क्षेत्राधिकार का प्रयोग करने का अधिकार नहीं है, जब तक कि कानून द्वारा उन्हें ऐसा करने का अधिकार न दिया गया हो।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया, जिसमें राजस्व अधिकारी द्वारा समीक्षा क्षेत्राधिकार के प्रयोग को सही ठहराया गया। कोर्ट ने कहा कि राज्य मंत्री के निर्देशों के अनुसार, प्रतिवादी के पक्ष में विवादित भूमि का हस्तांतरण अस्वीकार्य था, खासकर तब जब...

बिना आरोप वाले लोगों के बैंक अकाउंट मनमाने तरीके से फ्रीज करना आर्टिकल 19(1)(g), 21 का उल्लंघन: दिल्ली हाईकोर्ट
बिना आरोप वाले लोगों के बैंक अकाउंट मनमाने तरीके से फ्रीज करना आर्टिकल 19(1)(g), 21 का उल्लंघन: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि बैंक अकाउंट को पूरी तरह और गलत तरीके से फ्रीज करना, खासकर जब अकाउंट होल्डर न तो आरोपी हो और न ही संदिग्ध, तो यह "पूरी तरह से मनमाना" है और भारत के संविधान के आर्टिकल 21 और 19(1)(g) का उल्लंघन करता है।जस्टिस पुरुशैन्द्र कुमार कौरव ने कहा,“बैंक अकाउंट को पूरी तरह या गलत तरीके से फ्रीज करना, खासकर जब अकाउंट होल्डर जांच के तहत अपराध में न तो आरोपी हो और न ही संदिग्ध, तो यह पूरी तरह से मनमाना है। भारत के संविधान के आर्टिकल 19(1)(g) और 21 के तहत मौलिक अधिकारों के खिलाफ है,...

हाईकोर्ट ने टेक्नीशियन पद के लिए BMRD डिग्री को शामिल न करने पर यूपी एक्स-रे नियमों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी की
हाईकोर्ट ने टेक्नीशियन पद के लिए BMRD डिग्री को शामिल न करने पर 'यूपी एक्स-रे नियमों' की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी की

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने पिछले हफ्ते एडवोकेट जनरल को याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उत्तर प्रदेश एक्स-रे टेक्नीशियन सेवा नियम, 1986 की वैधता को चुनौती दी गई, जो वर्तमान में डिग्री धारकों को एक्स-रे टेक्नीशियन के पद पर नियुक्ति से बाहर रखता है।मामले पर विचार के लिए पहली नज़र में मामला पाते हुए जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने मामले को 27 फरवरी के लिए सूचीबद्ध किया।संक्षेप में मामलायह रिट याचिका 4 उम्मीदवारों द्वारा दायर की गई, जिनके पास बैचलर ऑफ मेडिकल...

सुप्रीम कोर्ट ने SEZ के लिए अडानी पोर्ट्स को अलॉट की गई 108 हेक्टेयर गौचर ज़मीन की रिकवरी का आदेश रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने SEZ के लिए अडानी पोर्ट्स को अलॉट की गई 108 हेक्टेयर गौचर ज़मीन की रिकवरी का आदेश रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में गुजरात हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें राज्य को कच्छ में 108-22-35 हेक्टेयर ज़मीन वापस लेने का निर्देश दिया गया था, जिसे स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन के विकास के लिए अडानी पोर्ट्स को अलॉट किया गया।जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदुरकर की बेंच ने इस मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए गुजरात हाईकोर्ट को वापस भेज दिया।यह मामला 2011 में दायर एक PIL से शुरू हुआ, जिसमें कच्छ के गोयारसमा, नविनाल और लुनी गांवों में गौचर के लिए ग्राम पंचायतों को पहले अलॉट की गई ज़मीन को...

आर्टिकल 370 फिल्म को लेकर डायरेक्टर आदित्य धर के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही पर लगी रोक
'आर्टिकल 370' फिल्म को लेकर डायरेक्टर आदित्य धर के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही पर लगी रोक

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माता आदित्य धर और अन्य के खिलाफ फीचर फिल्म आर्टिकल 370 से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई।यह आदेश जस्टिस मोक्षा खजूरिया काज़मी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 528 के तहत दायर याचिका पर दिया, जिसमें आपराधिक शिकायत के साथ-साथ श्रीनगर के फॉरेस्ट मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत डायरेक्टर के खिलाफ प्री-कॉग्निजेंस समन जारी किए गए।यह कार्यवाही गुलाम मोहम्मद शाह द्वारा दायर आपराधिक...