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साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 के सर्टिफिकेट के बिना कॉल डिटेल रिकॉर्ड मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के एक मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी किया। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को सबूत के तौर पर तब तक नहीं माना जा सकता, जब तक उनके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act) की धारा 65-B के तहत अनिवार्य सर्टिफिकेट न हो।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा,"...साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B [BSA की धारा 63] के तहत सर्टिफिकेट को अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर पाया। साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B [BSA की धारा 63]...
5 साल की बच्ची से दुष्कर्म-हत्या मामले में दोषी की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में 5 वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए अतुल निहाले की फांसी की सजा पर फिलहाल रोक लगाई। अदालत ने मामले की पूरी सुनवाई के लिए रिकॉर्ड तलब करते हुए कई अतिरिक्त रिपोर्टें भी मांगी।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की पीठ ने यह आदेश उस अपील पर दिया, जिसमें दोषी ने मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। हाइकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा बरकरार रखते हुए कहा था कि इस...
सिर्फ ₹1 मुआवज़े पर संपत्ति अधिग्रहण मनमाना: सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक लाइब्रेरी अधिग्रहण वाला बिहार कानून रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (10 मार्च) को बिहार के उस कानून को रद्द कर दिया, जिसके तहत राज्य सरकार को एक ऐतिहासिक पुस्तकालय को केवल एक रुपये के प्रतीकात्मक मुआवज़े पर अपने नियंत्रण में लेने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रावधान “जब्ती जैसा (confiscatory)” है और संविधान की कसौटी पर खरा नहीं उतरता।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत राज्य कानून के आधार पर संपत्ति से वंचित कर सकता है, लेकिन ऐसा कानून न्यायसंगत, निष्पक्ष और तर्कसंगत...
NCERT चैप्टर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 'शरारती तत्वों' के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कक्षा 8 की एनसीईआरटी सामाजिक विज्ञान की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले अध्याय को लेकर सोशल मीडिया पर की गई गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों पर कड़ी नाराज़गी जताई।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उन वेबसाइट्स और उनके संचालकों की पहचान करे, जिन्होंने इस विवाद से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री प्रकाशित की है, ताकि उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।चीफ़ जस्टिस ने आदेश देते हुए कहा,“कुछ...
परिवार ने कभी साथ नहीं छोड़ा: सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के माता-पिता की सराहना की, कहा- सच्चा प्रेम सबसे कठिन समय में साथ निभाना
सुप्रीम कोर्ट ने देश के पहले निष्क्रिय इच्छामृत्यु मामले में 13 वर्षों से स्थायी वनस्पति अवस्था में पड़े हरीश राणा के जीवनरक्षक उपचार हटाने की अनुमति देते हुए उनके माता-पिता और परिवार की संवेदनशीलता व समर्पण की सराहना की। अदालत ने कहा कि सच्चा प्रेम वही है जो जीवन के सबसे कठिन और दुखद समय में भी साथ निभाए।जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने हरीश राणा के जीवनरक्षक उपचार हटाने की अनुमति दी। हरीश वर्ष 2012 में एक इमारत से गिरने के बाद गंभीर मस्तिष्क चोट का शिकार हो गए और...
उत्तम नगर होली विवाद: तोड़फोड़ के खिलाफ याचिका में पुलिस सुरक्षा की मांग नहीं जोड़ी जा सकती, हाइकोर्ट ने कहा- नई याचिका दायर करें
दिल्ली हाइकोर्ट ने उत्तम नगर होली विवाद मामले में आरोपियों के परिजनों को सलाह दी कि वे प्रस्तावित तोड़फोड़ कार्रवाई के खिलाफ बेहतर और अलग याचिका दायर करें। अदालत ने कहा कि संपत्ति को गिराए जाने से रोकने की मांग और पुलिस सुरक्षा की मांग को एक ही याचिका में नहीं जोड़ा जा सकता।जस्टिस अमित बंसल की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि दोनों मांगें अलग-अलग कारणों से जुड़ी हैं और इन्हें एक साथ नहीं सुना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह केवल उस प्रार्थना पर विचार कर सकती है, जिसमें नगर निगम द्वारा...
LPG सिलेंडर की कमी से दिल्ली हाइकोर्ट वकीलों की कैंटीन प्रभावित, मेन कोर्स परोसा जाना बंद
दिल्ली हाइकोर्ट परिसर में स्थित वकीलों की कैंटीन में LPG गैस सिलेंडर की कमी के कारण मुख्य भोजन (मेन कोर्स) परोसना अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। कैंटीन प्रबंधन ने बुधवार को जारी एक सूचना में इसकी जानकारी दी।11 मार्च को जारी नोटिस में कहा गया कि फिलहाल LPG सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण पकाकर तैयार किए जाने वाले भोजन बनाना संभव नहीं है।नोटिस में कहा गया, “वर्तमान में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण हमें खेद है कि हम वकीलों की कैंटीन में मेन कोर्स तैयार कर परोसने में असमर्थ हैं।” ...
सरकारी आंकड़ों में COVID वैक्सीन के बाद कुछ मौतों का जिक्र; राज्य जिम्मेदारी से नहीं बच सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब कोई टीकाकरण कार्यक्रम राज्य द्वारा संचालित सार्वजनिक स्वास्थ्य पहल के रूप में चलाया जाता है, तो सरकार उन परिवारों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती जो टीकाकरण के बाद मौत या गंभीर दुष्प्रभावों का आरोप लगाते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी आंकड़े स्वयं यह स्वीकार करते हैं कि कोविड-19 टीकाकरण के बाद कुछ मौतें हुई हैं, इसलिए प्रभावित परिवारों को बिना किसी राहत व्यवस्था के नहीं छोड़ा जा सकता।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के...
जवाहर नवोदय विद्यालय योजना दो-भाषा नीति के खिलाफ: तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) योजना राज्य की दो-भाषा नीति के साथ असंगत है, इसलिए इसे वर्तमान स्वरूप में राज्य में लागू नहीं किया जा सकता।राज्य सरकार ने अदालत में दायर अपने हलफनामे में कहा कि नवोदय विद्यालय योजना तीन-भाषा फार्मूले पर आधारित है, जबकि तमिलनाडु में दो-भाषा नीति लागू है। इस कारण यदि JNV योजना को वर्तमान रूप में लागू किया जाता है तो तमिलनाडु तमिल लर्निंग एक्ट, 2006 के प्रावधानों से विचलन होगा, जो कानूनन स्वीकार्य नहीं है।राज्य का पक्षहलफनामे...
NCERT किताब विवाद: न्यायिक भ्रष्टाचार अध्याय पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी, जुड़े लोगों को परियोजनाओं से बाहर किया
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कक्षा 8 की एनसीईआरटी सामाजिक विज्ञान की किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' से जुड़े अध्याय को फिर से लिखे जाने पर गहरी नाराज़गी जताई। अदालत ने कहा कि वह इस बात से “व्यथित” (disturbed) है कि उसके कड़े आपत्ति जताने के बाद भी एनसीईआरटी ने इस अध्याय को संशोधित रूप में दोबारा पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टीस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने यह भी कहा कि बिना विशेषज्ञ समिति की मंजूरी के पुनर्लिखित अध्याय प्रकाशित...
सदस्यों का अलग-अलग राज्यों में होना काफी नहीं, उद्देश्य से तय होगी मल्टी-स्टेट सहकारी संस्था की पहचान: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी सहकारी समिति का मल्टी-स्टेट स्वरूप केवल इस आधार पर तय नहीं किया जा सकता कि उसके सदस्य अलग-अलग राज्यों में रहते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह दर्जा समिति के उद्देश्यों से तय होगा, न कि केवल सदस्यों के भौगोलिक फैलाव से।जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने उत्तराखंड हाइकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें एक राज्य की सहकारी समिति को सिर्फ इसलिए मल्टी-स्टेट सहकारी समिति माना गया था क्योंकि उसके सदस्य दो राज्यों में फैले हुए...
13 साल से कोमा में पड़े युवक को सम्मानजनक मृत्यु की अनुमति: सुप्रीम कोर्ट ने जीवनरक्षक उपचार हटाने की दी इजाजत
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दी। अदालत ने 13 वर्षों से स्थायी वनस्पति अवस्था में पड़े 32 वर्षीय युवक के जीवनरक्षक उपचार हटाने की इजाजत दी।जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह आदेश युवक के पिता की उस याचिका पर दिया, जिसमें उन्होंने अपने बेटे के सभी जीवनरक्षक उपचार बंद करने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने कहा कि गरिमा के साथ मृत्यु भी व्यक्ति का मौलिक अधिकार है।अदालत ने अपने आदेश में...
यह दावा कि बेटी ने पढ़ाई बंद करने पर पिता पर बलात्कार का झूठा आरोप लगाया, 'दूर की कौड़ी': बॉम्बे हाईकोर्ट ने POCSO सजा बरकरार रखी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि लड़की अपने पिता पर बलात्कार जैसा गंभीर आरोप सिर्फ इस आशंका पर नहीं लगाएगी कि वह उसकी पढ़ाई बंद कर देगा और उसकी शादी कर देगा, जबकि उसने अपनी ही नाबालिग बेटी से बलात्कार के लिए दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति द्वारा उठाए गए गलत फंसाने का सिद्धांत खारिज किया।जस्टिस मनीष पिटाले और जस्टिस श्रीराम शिरसाट की खंडपीठ ने मुंबई के स्पेशल कोर्ट का 12 मार्च, 2020 का आदेश बरकरार रखा, जिसमें एक व्यक्ति को अपनी नाबालिग बेटी के साथ लगातार बलात्कार करने का दोषी ठहराया गया और उसे उसके शेष...
NCLAT का आदेश सिर्फ इसलिए अमान्य नहीं कि बेंच में तकनीकी सदस्यों की संख्या ज़्यादा है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के किसी आदेश को सिर्फ इसलिए गैर-कानूनी नहीं माना जा सकता कि मामले का फैसला करने वाली बेंच में तकनीकी सदस्यों की संख्या ज़्यादा थी। कोर्ट ने साफ किया कि ट्रिब्यूनल सिस्टम को नियंत्रित करने वाला मौजूदा कानूनी ढांचा यह ज़रूरी नहीं बनाता कि NCLAT बेंचों में न्यायिक सदस्यों की संख्या तकनीकी सदस्यों से ज़्यादा हो।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने भारती टेलीकॉम लिमिटेड द्वारा शुरू...
AG के तौर पर अपने कार्यकाल में बहुसंख्यकवाद को बढ़ते देखकर भी चुप रहे केके वेणुगोपाल: सुभाषिनी अली
CPI(M) की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने मंगलवार को पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की आलोचना करते हुए कहा कि जब 2017 से 2022 के बीच देश के शीर्ष कानून अधिकारी के तौर पर उनके कार्यकाल में "बहुसंख्यकवाद" बढ़ रहा था, तब वह चुप रहे।अली ने ये बातें नई दिल्ली में वेणुगोपाल की आत्मकथा 'द एक्सीडेंटल लॉयर' के विमोचन के मौके पर बोलते हुए कहीं।अली ने अपनी बात की शुरुआत यह कहकर की कि इस कार्यक्रम में बोलने के लिए मिले निमंत्रण से उन्हें शुरू में हैरानी हुई थी।उन्होंने कहा,"आज शाम के लिए...
जेल की कोठरी में दिन में 21 घंटे बंद रखे जाने पर सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के तहत विचाराधीन कैदी की याचिका की खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने UAPA के आरोपी विजित विजयन द्वारा दायर याचिका खारिज की। इस याचिका में विजयन ने केरल की हाई-सिक्योरिटी जेल की कोठरी में कथित तौर पर दिन में 21 घंटे बंद रखे जाने का विरोध किया था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच विजयन की उस चुनौती पर सुनवाई कर रही थी, जो उसने केरल हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की थी। हाईकोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के उस निर्देश पर 2 महीने की रोक लगाई, जिसमें कहा गया कि कैदियों को कोठरियों में सिर्फ शाम के समय ही बंद किया जाए (जब तक कि कोई खास वजह न हो)।...
वादी ज़रूरी जानकारी छिपाकर 'साफ़ हाथों' से कोर्ट नहीं आता, उसे 'विशिष्ट पालन' का अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (10 मार्च) को 'विशिष्ट पालन' (Specific Performance) के लिए दायर एक मुकदमा खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि जो वादी ज़रूरी जानकारी छिपाकर 'साफ़ हाथों' (Unclean Hands) से कोर्ट नहीं आता, उसे 'विशिष्ट पालन' जैसी न्यायसंगत राहत पाने का अधिकार नहीं है।कोर्ट ने कहा,"विशिष्ट पालन के मुकदमे में पक्षकारों का आचरण बहुत मायने रखता है। इससे कोर्ट को सबूतों का मूल्यांकन करने में मदद मिलती है ताकि यह पता चल सके कि समझौते के समय पक्षकारों की नीयत (Bona Fides) कैसी थी। अगर कोर्ट के मन में...
S. 66 Companies Act | शेयर कैपिटल में कमी के लिए मूल्यांकन रिपोर्ट ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (10 मार्च) को फैसला सुनाया कि जब कोई कंपनी कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत शेयर पूंजी में कमी करती है तो मूल्यांकन रिपोर्ट प्राप्त करना या उसे प्रसारित करना कोई कानूनी ज़रूरत नहीं है, हालांकि कंपनियां सावधानी के तौर पर ऐसी रिपोर्ट प्राप्त कर सकती हैं।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने भारती टेलीकॉम लिमिटेड की शेयर पूंजी में कमी के खिलाफ अल्पसंख्यक शेयरधारकों द्वारा दायर अपीलों के ग्रुप को खारिज करते हुए कहा,"शेयर पूंजी में कमी एक विशेष प्रस्ताव और...
प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने परीक्षा घोटाले के मामले में MBBS स्टूडेंट का निष्कासन रद्द किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में आदेश रद्द किया, जिसमें पं. बी.डी. शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान यूनिवर्सिटी से एक MBBS स्टूडेंट को कथित परीक्षा घोटाले के सिलसिले में निष्कासित कर दिया गया था। कोर्ट ने यह माना कि यह सज़ा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना दी गई।ऐसा करते हुए कोर्ट ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को निर्देश दिया कि वे स्टूडेंट को अनुशासन बोर्ड की सिफारिशें उपलब्ध कराने और उसे व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के बाद इस मामले पर फिर से विचार करें।जस्टिस कुलदीप तिवारी ने...
कोर्ट्स, SC/ST समुदाय से पीड़ित होने के आधार पर ही BNSS की धारा 173(4) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए बाध्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि कोई स्पेशल कोर्ट या मजिस्ट्रेट, BNSS की धारा 173(4) के तहत दायर किसी आवेदन पर FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए अपने आप बाध्य नहीं है, सिर्फ इसलिए कि आवेदक अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित है।जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने आगे कहा कि कोर्ट को सबसे पहले अपने सामने रखे गए आरोपों का मूल्यांकन करना होगा और उसके बाद यह तय करना होगा कि पुलिस द्वारा जांच का निर्देश देना उचित है या मामले को शिकायत मामले के तौर पर आगे बढ़ाना।इन टिप्पणियों के साथ...



















