Deoghar Airport Case : सुप्रीम कोर्ट ने BJP सांसदों के खिलाफ FIR खारिज करने की पुष्टि की

Shahadat

21 Jan 2025 11:50 AM IST

  • Deoghar Airport Case : सुप्रीम कोर्ट ने BJP सांसदों के खिलाफ FIR खारिज करने की पुष्टि की

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (21 जनवरी) को झारखंड राज्य द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया, जिसमें झारखंड हाईकोर्ट द्वारा भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसदों निशिकांत दुबे और मनोज तिवारी और 2022 देवघर एयरपोर्ट की घटना से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज FIR खारिज करने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

    हालांकि, कोर्ट ने झारखंड राज्य को जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री को चार सप्ताह के भीतर एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 के तहत अधिकृत अधिकारी को भेजने की स्वतंत्रता दी और ऐसे अधिकारी को कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया कि क्या एयरक्राफ्ट एक्ट के तहत शिकायत दर्ज करने की आवश्यकता है।

    जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने 18 दिसंबर, 2024 को फैसला सुरक्षित रखा और फैसला सुनाया।

    आरोप

    सितंबर 2022 में दर्ज की गई FIR में प्रतिवादियों पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) अधिकारियों को निजी विमान को उड़ान भरने की अनुमति देने के लिए धमकाने और मजबूर करने का आरोप लगाया गया, जो कथित तौर पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है। FIR में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 336, धारा 447 और धारा 448 के साथ-साथ विमान अधिनियम, 1934 की धारा 10 और 11ए का भी इस्तेमाल किया गया।

    हाईकोर्ट का निर्णय

    झारखंड हाईकोर्ट ने इस आधार पर FIR खारिज की कि इसमें विमान अधिनियम के तहत आवश्यक शिकायत या मंजूरी का अभाव था। हाईकोर्ट ने माना कि विमान अधिनियम को प्राथमिकता दी गई, जिससे आईपीसी प्रावधानों को लागू करने से रोका जा सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कार्यवाही

    राज्य ने तर्क दिया कि विमान अधिनियम की धारा 10 और 11ए के तहत जांच के लिए पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी। न्यायालय ने कहा कि विमान अधिनियम के तहत अपराधों का संज्ञान केवल शिकायत दर्ज करने पर ही लिया जा सकता है।

    जस्टिस ओक ने इस मामले में कुछ आईपीसी प्रावधानों, विशेष रूप से धारा 336 और धारा 447 की प्रयोज्यता पर सवाल उठाया, जिसमें स्पष्ट सबूतों की कमी का हवाला दिया गया कि जीवन खतरे में था या आपराधिक अतिक्रमण हुआ था।

    सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्णय में संभावित संशोधन का संकेत दिया, जिसमें जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्रियों को नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) को प्रस्तुत करने की अनुमति दी गई। इससे DGCA यह आकलन करने में सक्षम होगा कि विमान अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज की जा सकती है या नहीं।

    जस्टिस ओक ने स्पष्ट किया कि जबकि सुप्रीम कोर्ट विमान अधिनियम के तहत FIR रद्द करने के हाईकोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करेगा, यह DGCA को शिकायत दर्ज करने की संभावना निर्धारित करने के लिए एकत्रित साक्ष्य का उपयोग करने की अनुमति देगा।

    केस टाइटल- झारखंड राज्य बनाम निशिकांत दुबे

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