ताज़ा खबरे
बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर न करने के आदेश का पालन नहीं हो रहा: सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों में कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया
अदालती रिकॉर्ड में बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर होने पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे सभी लंबित मामलों में IPC की धारा 228-A के तहत वैधानिक रोक का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। इन मामलों में वे मामले भी शामिल हैं जो 'निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ' मामले में 2018 के फैसले से पहले शुरू हुए थे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पीड़िता की पहचान उजागर न करने का आदेश कानून में लंबे समय से चली आ रही स्थिति है, फिर भी इसका लगातार पालन नहीं किया गया।कोर्ट...
डिफेंस सिक्योरिटी कोर के जवान दूसरी पेंशन के हकदार, एक साल तक की कमी माफ की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को फैसला सुनाया कि डिफेंस सिक्योरिटी कोर (DSC) के जो जवान पहले से ही सेना में अपनी पिछली सेवा के लिए पेंशन ले रहे हैं, वे DSC में अपनी बाद की सेवा के लिए दूसरी सर्विस पेंशन पाने के हकदार हैं। साथ ही पेंशन नियमों के अनुसार, क्वालिफाइंग सर्विस में एक साल तक की कमी को माफ किया जा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि दूसरी पेंशन देने पर कोई कानूनी रोक नहीं है, सिर्फ इसलिए कि वह व्यक्ति पहले से ही अपनी पहली सेवा अवधि के लिए पेंशन ले रहा है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की...
दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय होने से पहले मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने का फ़ैसला सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय होने से पहले (प्री-चार्ज स्टेज) मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने के फ़ैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि जहां तथ्यों की ज़रूरत हो, वहां ट्रायल शुरू होने से पहले मंज़ूरी की वैधता की जाँच करने से अदालतों को रोका नहीं जा सकता।जस्टिस अमित महाजन ने इस तरह राज्य सरकार की याचिका खारिज की, जिसमें स्पेशल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें आरोपी को CrPC की धारा 311 के तहत मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने की इजाज़त दी गई ताकि उसके मुक़दमे के लिए...
अनिवार्य बैंक गारंटी की वैधता का पालन न करना टेंडर बिड खारिज करने का उचित आधार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक रिट याचिका खारिज की, जिसमें एक ठेकेदार को एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) के निर्माण से जुड़ी सरकारी टेंडर प्रक्रिया से अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती दी गई।M/s रामशरण सिंह प्रोजेक्ट्स LLP (याचिकाकर्ता 1)— जो सिविल निर्माण कार्यों में लगी है, ने WAPCOS लिमिटेड (प्रतिवादी 1), जो भारत सरकार का एक उपक्रम है, द्वारा जारी एक ई-मेल की वैधता को चुनौती दी थी। इस ई-मेल के ज़रिए कांकेर में EMRS के निर्माण के लिए 'टेंडर आमंत्रित करने की सूचना' (NIT) के जवाब में याचिकाकर्ता 1 द्वारा...
विज्ञापन से कम मात्रा में उत्पाद देना 'दोष' और अनुचित व्यापार व्यवहार: उपभोक्ता आयोग
कोल्लम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विज्ञापन में बताए गए वजन से कम मात्रा में सामान देना “दोष” (defect) है और यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन तथा अनुचित व्यापार व्यवहार (unfair trade practice) माना जाएगा।आयोग, जिसकी अध्यक्षता श्रीमती एस.के. श्रीला (अध्यक्ष) और श्री स्टैनली हेरोल्ड (सदस्य) कर रहे थे, ने पाया कि विक्रेता लक्ष्मी एंटरप्राइजेज ने कम वजन वाले बीन बैग ग्रेन्स की आपूर्ति की, जिसके लिए उसे जिम्मेदार ठहराया गया और...
कथित भूमि अतिक्रमण मामले में श्री श्री रविशंकर को राहत, हाईकोर्ट ने रद्द की FIR
कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार (25 मार्च) को बेंगलुरु में कथित भूमि अतिक्रमण मामले में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द (quash) कर दिया।जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियां अन्य आरोपियों या अन्य मंचों पर लंबित कार्यवाहियों पर लागू नहीं होंगी। विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है।यह फैसला उस याचिका पर आया, जिसमें आध्यात्मिक गुरु ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी थी। इससे पहले 13 जनवरी को कोर्ट ने उनके खिलाफ जांच पर रोक लगा दी...
उत्तम नगर होली हिंसा: तरुण के परिवार की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पुलिस से संपर्क की दी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं को दिल्ली पुलिस आयुक्त के समक्ष प्रतिनिधित्व देने की अनुमति दी, जिसमें होली के दौरान दिल्ली के उत्तम नगर में हुई हिंसक झड़प में मारे गए 27 वर्षीय तरुण बुटोलिया के परिवार को सुरक्षा देने की मांग की गई थी।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने यह आदेश हरि शंकर जैन, आशीष कुमार द्विवेदी, हरिनंदन सिंह और योगेश कुमार द्वारा दायर रिट याचिका पर पारित किया।कोर्ट ने CBI जांच की मांग को खारिज...
POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज प्रयागराज POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अग्रिम जमानत दे दी है।इससे पहले 27 फरवरी को जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया था और निर्देश दिया था कि अंतिम फैसला होने तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य की गिरफ्तारी न की जाए।गौरतलब है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन पर आरोप है कि प्रयागराज में आयोजित हालिया माघ मेला के दौरान...
गौतम गंभीर के पर्सनेलिटी राइट्स की रक्षा करेगा हाईकोर्ट, आपत्तिजनक सामग्री हटाने के संकेत
दिल्ली हाइकोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर के व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए अंतरिम आदेश पारित करेगा।जस्टिस ज्योति सिंह ने सुनवाई के दौरान संकेत दिए कि अदालत मेटा, गूगल और अमेज़न से जुड़े विक्रेताओं को कथित उल्लंघनकारी सामग्री हटाने का निर्देश दे सकती है।अदालत ने कहा कि वह इन मंचों को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के साथ-साथ अपलोड करने वालों की बुनियादी जानकारी (BCI) और आईपी लॉगिन विवरण उपलब्ध कराने का भी निर्देश देगी।सुनवाई के दौरान गंभीर की ओर से पेश...
मानव तस्करी मामले में सोनू पंजाबन बरी, पीड़िता की गवाही पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जताया संदेह
दिल्ली हाईकोर्ट ने मानव तस्करी और नाबालिग के यौन शोषण से जुड़े एक चर्चित मामले में गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन को बरी किया।अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा और पीड़िता की गवाही भरोसेमंद नहीं पाई गई।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने अपने फैसले में कहा कि केवल पीड़िता की गवाही के आधार पर दोषसिद्धि संभव है लेकिन वह गवाही उच्च स्तर की और पूरी तरह विश्वसनीय होनी चाहिए।अदालत ने कहा,“इस मामले में गवाह की गवाही में कई विरोधाभास हैं और यह भरोसा पैदा नहीं करती।”हाईकोर्ट ने पाया कि घटना के...
जज के खिलाफ FIR की मांग पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई, जिसने एक कार्यरत न्यायिक अधिकारी के खिलाफ कथित जालसाजी के आरोप में FIR दर्ज कराने की मांग की थी।चीफ जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी जज के खिलाफ सीधे अदालत में याचिका दाखिल कर FIR दर्ज नहीं कराई जा सकती।अदालत ने कहा,“यदि आप FIR दर्ज कराना चाहते हैं, तो पहले चीफ जस्टिस से प्रशासनिक स्तर पर अनुमति लेनी होगी। यह प्रक्रिया न्यायिक आदेश के जरिए पूरी नहीं हो सकती।” जस्टिस करिया ने भी स्पष्ट किया कि अनुमति...
POSH Act पर अहम फैसला: ICC रिपोर्ट के आधार पर ही सजा दे सकता है नियोक्ता, अलग जांच जरूरी नहीं- बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि नियोक्ता आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की रिपोर्ट के आधार पर ही कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। इसके लिए अलग से विभागीय जांच या चार्जशीट जरूरी नहीं है।जस्टिस आर आई छागला और जस्टिस अद्वैत एम सेठना की खंडपीठ ने यह फैसला IIT Bombay के एक प्रोफेसर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उन्होंने यौन उत्पीड़न के आरोप साबित होने के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को चुनौती दी थी।हाईकोर्ट ने स्पष्ट...
यूपी में 4995 धरोहरें बदहाल: हाईकोर्ट ने केंद्र-राज्य से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में हजारों ऐतिहासिक धरोहरों की खराब स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य सरकार समेत कई एजेंसियों को नोटिस जारी किया।अदालत में दायर जनहित याचिका में दावा किया गया कि प्रदेश की 4995 प्राचीन इमारतें और स्मारक “खस्ताहाल हैं और पूरी तरह खत्म होने के कगार पर हैं।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, संस्कृति, पर्यटन और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालयों तथा राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण से 8...
गोपनीय जानकारी लीक करना बदनामी नहीं, सिर्फ अनुबंध उल्लंघन हो सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी द्वारा कंपनी की गोपनीय जानकारी उजागर करने का आरोप, भले ही सही मान लिया जाए तो वह अधिकतम अनुबंध का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन उसे अपने आप बदनामी (मानहानि) नहीं माना जा सकता।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने पुस्तक कंपनी की अपील खारिज करते हुए यह फैसला दिया। कंपनी ने अपने पूर्व कर्मचारी पर 10 लाख रुपये हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया था।पूरा मामलाकंपनी का आरोप था कि पूर्व कर्मचारी ने प्रतिस्पर्धी कंपनियों से संपर्क कर उनके व्यापार और...
रेप केस में केरल हाईकोर्ट की टिप्पणियां सुप्रीम कोर्ट ने हटाईं, MLA राहुल ममकूटाथिल को मिली अग्रिम जमानत बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केरल हाईकोर्ट द्वारा की गई उन टिप्पणियों को हटाने (expunge) का आदेश दिया, जो एक महिला द्वारा लगाए गए बलात्कार के आरोपों के मामले में की गई थीं। हालांकि, कोर्ट ने केरल के विधायक राहुल ममकूटाथिल को दी गई अग्रिम जमानत (anticipatory bail) में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।जस्टिस एम.एम. सुंदरश और जस्टिस एन.के. सिंह की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि वे हाईकोर्ट के अंतिम निष्कर्ष—अग्रिम जमानत देने—में दखल नहीं देंगे, लेकिन याचिकाकर्ता (पीड़िता) के संबंध में की गई कुछ...
संभल हिंसा मामला: पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR के आदेश पर हाईकोर्ट 21 अप्रैल तक बढ़ाई रोक
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने नवंबर 2024 के संभल हिंसा मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश पर लगी अंतरिम रोक को 21 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया।जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने यह आदेश पूर्व संभल क्षेत्राधिकारी अनुज कुमार चौधरी और तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दोनों अधिकारियों ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया।अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। साथ ही...
BNSS की धारा 223 पर बड़ा सवाल: 'संज्ञान' के चरण को लेकर दिल्ली हाइकोर्ट ने मामला बड़ी पीठ को भेजा
दिल्ली हाइकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत संज्ञान लेने के चरण को लेकर उत्पन्न कानूनी अस्पष्टता पर महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मामले को बड़ी पीठ को सौंप दिया।जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने पाया कि इस प्रावधान की व्याख्या को लेकर विभिन्न हाईकोर्टों के फैसलों और सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों में संभावित टकराव नजर आ रहा है।BNSS की धारा 223 के तहत मजिस्ट्रेट को शिकायत मिलने पर संज्ञान लेते समय शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान शपथ पर दर्ज करने होते हैं। साथ ही इसके...
1984 कानपुर दंगों पर हाइकोर्ट सख्त: नरसंहार बताकर केस रद्द करने से किया इनकार
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने 1984 के कानपुर सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला देते हुए आरोपियों की याचिकाएं खारिज की। साथ ही आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का आदेश दिया। अदालत ने इन घटनाओं को नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया।जस्टिस अनिश कुमार गुप्ता की पीठ ने 9 आरोपियों द्वारा दायर 7 याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि केवल देरी या मूल रिकॉर्ड के अभाव के आधार पर मुकदमा समाप्त नहीं किया जा सकता।अदालत ने कहा,“यह घटनाएं देशभर में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख समुदाय...
BREAKING | 'वंदे मातरम्' सर्कुलर के खिलाफ याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट बोला—न गाने पर कोई दंड नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी हालिया सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। यह सर्कुलर आधिकारिक कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के सभी अंतरे गाने से संबंधित है। कोर्ट ने कहा कि सर्कुलर में गीत गाना अनिवार्य नहीं किया गया है।कोर्ट ने यह भी नोट किया कि गीत न गाने पर कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है और याचिकाकर्ता द्वारा व्यक्त सामाजिक भेदभाव की आशंकाएं “अस्पष्ट” हैं। कोर्ट ने याचिका को “समय से पहले” (premature) बताते हुए खारिज...
80% से ज़्यादा महिला वकीलों को लगता है कि उनका पेशेवर सफ़र पुरुष साथियों के मुकाबले ज़्यादा मुश्किल: SCBA सर्वे
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के 2,604 महिला कानूनी पेशेवरों के राष्ट्रीय सर्वे में यह पाया गया कि 81.3% महिलाओं का मानना है कि उनका पेशेवर सफ़र पुरुष साथियों के मुकाबले ज़्यादा मुश्किल रहा है, जबकि 41.1% ने इसे "बहुत ज़्यादा मुश्किल" बताया है। रिपोर्ट में कहा गया कि 63.7% महिलाओं को किसी-न-किसी मोड़ पर यह पेशा हतोत्साहित करने वाला लगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने 22 मार्च को बेंगलुरु में आयोजित पहले एससीबीए सम्मेलन में रिपोर्ट जारी की।16.1% उत्तरदाताओं ने यौन उत्पीड़न का खुलासा किया,...




















