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दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट में जज द्वारा मध्यस्थता पर उठे सवालों वाली जनहित याचिका निपटाई, याचिकाकर्ता को समिति के पास जाने का निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट में जजों द्वारा स्वयं मध्यस्थता करने और बाद में उसी मामले की सुनवाई करने की प्रथा को लेकर दायर जनहित याचिका का निपटारा किया।हाईकोर्ट ने कहा कि इस विषय पर उचित होगा कि याचिकाकर्ता संबंधित जजों की समिति के समक्ष अपनी बात रखे।चीफ जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता फैमिली कोर्ट्स से जुड़े मामलों को देखने वाली समिति के समक्ष प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करे। अदालत ने यह भी कहा कि समिति याचिकाकर्ता के सुझावों पर शीघ्रता से...
धर्म परिवर्तन के बाद कब मिल सकता है SC दर्जा? सुप्रीम कोर्ट ने तय किए सख्त मानदंड
एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अनुसूचित जाति (SC) का व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में परिवर्तित होता है, तो वह तुरंत अनुसूचित जाति का दर्जा खो देता है।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ऐसा व्यक्ति पुनः हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में वापस आता है, तो उसे SC दर्जा दोबारा पाने के लिए निम्नलिखित शर्तों को साबित करना होगा:यह स्पष्ट प्रमाण होना चाहिए कि व्यक्ति मूल रूप से संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के तहत अधिसूचित जाति से संबंधित...
बच्चे की कस्टडी पिता के पास हो तो हैबियस कॉर्पस याचिका नहीं चलेगी: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि जब बच्चा अपने प्राकृतिक अभिभावक (नेचुरल गार्जियन) के पास हो और उसके जीवन या सुरक्षा को कोई तात्कालिक खतरा न हो तो ऐसे मामलों में हैबियस कॉर्पस याचिका सुनवाई योग्य नहीं होती।जस्टिस सुमीत गोयल ने यह फैसला एक मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उसने अपनी 9 वर्षीय बेटी की कस्टडी पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।पूरा मामलामां ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी को पिता और उसके परिवार ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है। उसने कहा कि मां होने...
विदेश में रह रहे आरोपी को भगोड़ा घोषित करना गलत: हाईकोर्ट ने प्रोक्लेमेशन आदेश और LOC रद्द की
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में ऑस्ट्रेलिया में रह रहे एक व्यक्ति के खिलाफ जारी प्रोक्लेमेशन आदेश और लुकआउट सर्कुलर (LOC) रद्द किया।अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ने विदेश में रह रहे आरोपी को समन भेजने का कोई ठोस प्रयास ही नहीं किया।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा,“जब जांच एजेंसी को पता था कि आरोपी ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है, तब भी वहां उसके पते पर समन या वारंट भेजने की कोई कोशिश नहीं की गई। विदेश मंत्रालय या अन्य वैधानिक माध्यमों से भी सेवा कराने का प्रयास नहीं हुआ।”हाईकोर्ट ने पाया कि दंड...
AI से बने नकली फ़ैसलों का हवाला देने का ख़तरा सिर्फ़ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में फैला हुआ: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि AI (आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस) से बने असल में मौजूद न होने वाले फ़ैसलों का हवाला देने का चलन एक "ख़तरा" बन गया, जो न सिर्फ़ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में तेज़ी से फैल रहा है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सावधान रहने की चेतावनी दी।ये टिप्पणियां जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने एक कंपनी के डायरेक्टर की तरफ़ से दायर स्पेशल लीव पिटीशन (विशेष अनुमति याचिका) पर सुनवाई करते हुए कीं। इस याचिका में डायरेक्टर ने बॉम्बे हाईकोर्ट की उन टिप्पणियों को हटाने की...
गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकालना अपने आप में नौकरी पर वापस रखने या पिछले वेतन का हकदार नहीं बनाता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ किया कि अगर यह पाया जाता है कि किसी को गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाला गया तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे अपने आप ही नौकरी पर वापस रखने या पिछले वेतन का हक मिल जाएगा।जस्टिस शैल जैन ने इसलिए प्रोप्राइटरशिप फर्म द्वारा गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को नौकरी पर वापस रखने और पिछले वेतन देने से मना किया। उन्होंने इसके लिए काफी समय बीत जाने का हवाला दिया, खासकर तब जब कई कर्मचारी पहले ही रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंच चुके थे और उन्होंने अपनी कानूनी...
बाद में दी गई पर्यावरण मंज़ूरी से, जो प्रोजेक्ट्स मंज़ूर नहीं हैं, वे भी राज्य के दखल तक चलते रहते हैं: सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चिंता जताई कि अगर बाद में पर्यावरण मंज़ूरी देने की इजाज़त दी जाती है तो पर्यावरण के लिए नुकसानदेह प्रोजेक्ट्स, राज्य के दखल तक चलते रहेंगे।कोर्ट ने कहा कि इसके विपरीत, अगर पहले से पर्यावरण मंज़ूरी लेना ज़रूरी माना जाए तो अधिकारियों की यह ज़िम्मेदारी होगी कि वे बिना मंज़ूरी के की जा रही किसी भी गतिविधि को रोकें।जस्टिस बागची ने कहा,“जब कानून बनते हैं तो वे सबके लिए एक जैसे होते हैं। हालांकि, उन्हें लागू एक जैसा नहीं किया जाता। अगर ओएम (ऑफिस मेमोरेंडम) में कहा गया कि इसे...
'देशभक्ति ज़बरदस्ती नहीं हो सकती': वंदे मातरम विवाद पर संजय हेगड़े ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, CJI ने पूछा- 'क्या राष्ट्रगान के लिए भी नहीं?'
स्कूलों में राष्ट्रगीत-वंदे मातरम गाने के संबंध में MHA के सर्कुलर की आलोचना करते हुए सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े ने आज सुप्रीम कोर्ट के सामने व्यक्तिगत अंतरात्मा की रक्षा के महत्व पर ज़ोर दिया और तर्क दिया कि "देशभक्ति ज़बरदस्ती नहीं हो सकती"।इस संबंध में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने सीनियर वकील से सवाल किया कि क्या यही तर्क राष्ट्रगान के संदर्भ में भी लागू होता है।हेगड़े ने जवाब दिया, "देशभक्ति अपने आप में ज़बरदस्ती नहीं हो सकती। अगर संविधान का कोई मतलब है, जहां तक किसी व्यक्ति का...
बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों के कारण प्रॉपर्टी डील्स में समय-सीमा का पालन ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट ने 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' का आदेश देने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बिक्री के एक कथित समझौते के 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' (समझौते को लागू करने) का आदेश देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की कि प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के कारण प्रॉपर्टी के लेन-देन में समय-सीमा का पालन करना बहुत ज़रूरी हो जाता है।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीज़न बेंच ने कहा,"दिल्ली जैसे बड़े शहरों में, जहां प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार और काफ़ी तेज़ी से बढ़ती रहती हैं, प्रॉपर्टी से जुड़े लेन-देन की व्यावसायिक सच्चाई यह है कि समझौते की शर्तों को पूरा करने में समय की...
शराब का कारोबार मौलिक अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डिस्टिलरी के लाइसेंस सस्पेंड करने का फैसले सही ठहराया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोम डिस्टिलरीज़ के कई लाइसेंस सस्पेंड करने के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि शराब का कारोबार कोई मौलिक अधिकार नहीं है और यह सख्त कानूनी नियमों के अधीन है।जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने कहा:"पहली बात तो यह कि शराब का कारोबार कोई मौलिक अधिकार नहीं है। दूसरी बात यह कि जब आनुपातिकता (Proportionality) की कसौटी पर इसे परखा जाता है तो उस आधार पर भी अथॉरिटी का फैसला एक्साइज एक्ट और उसके तहत बनाए गए नियमों के दायरे में है, इसलिए इसमें कोई गलती नहीं निकाली जा...
मजिस्ट्रेट द्वारा केस भेजे बिना सेशंस कोर्ट ड्रग्स एंड कॉस्मैटिक्स एक्ट के तहत अपराधों का संज्ञान नहीं ले सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि सेशंस कोर्ट ड्रग्स एंड कॉस्मैटिक्स एक्ट के तहत अपराधों का सीधा संज्ञान तब तक नहीं ले सकता, जब तक कि मैजिस्ट्रेट द्वारा केस उसे न भेजा जाए, जैसा कि CrPC की धारा 193 के तहत ज़रूरी है। कोर्ट ने पाया कि एक्ट में ऐसी कोई स्पष्ट व्यवस्था न होने के कारण, जो सीधे संज्ञान की अनुमति देती हो, CrPC के तहत वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।जस्टिस एन.जी. जमादार एक फार्मास्युटिकल फर्म और उसके पार्टनर्स द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें ड्रग्स एंड...
अनुच्छेद 25 में धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश मांगने का अधिकार शामिल नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार में यह मांग करने का अधिकार शामिल नहीं है कि राज्य किसी धार्मिक अवसर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करे। साथ ही कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एक विकासशील राष्ट्र के तौर पर भारत को उत्पादकता और काम की निरंतरता को प्राथमिकता देनी चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने 'ऑल इंडिया शिरोमणि सिंह सभा' द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) खारिज की। इस याचिका में गुरु गोबिंद सिंह की जयंती (प्रकाश पर्व) को...
संसद ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन विधेयक पारित किया, जेंडर के स्वयं-निर्धारण का अधिकार हटाना उद्देश्य
संसद ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया।राज्यसभा ने बुधवार को इस विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया; लोकसभा ने इसे मंगलवार को ही मंजूरी दे दी थी। DMK सांसद तिरुचि शिवा द्वारा विधेयक को एक प्रवर समिति (select committee) के पास भेजने के लिए पेश किया गया प्रस्ताव खारिज किया गया।इस विधेयक में प्रस्तावित विवादास्पद संशोधन यह है कि यह जेंडर के स्वयं-निर्धारण के अधिकार को छीन लेता है। यह विधेयक "स्वयं-अनुभूत लिंग पहचान" वाले व्यक्तियों को "ट्रांसजेंडर व्यक्ति"...
कैंसलेशन रिपोर्ट स्वीकार करने के बाद मजिस्ट्रेट 'फंक्टस ऑफिसियो' हो जाते हैं, पुलिस की चूकों की जांच नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि एक बार जब कोई मजिस्ट्रेट पुलिस द्वारा दायर की गई कैंसलेशन या 'अनट्रेस्ड' (लापता) रिपोर्ट को स्वीकार कर लेता है तो अदालत 'फंक्टस ऑफिसियो' (अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर) हो जाती है। उसके बाद जांच में कथित चूकों की जांच करने या पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश देने के लिए आगे नहीं बढ़ सकती।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने इस प्रकार पुलिस अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह को स्वीकार किया। इन याचिकाओं में पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल...
"इच्छित उपयोग" पर आधारित एक्साइज ड्यूटी छूट की अधिसूचनाओं की व्याख्या करदाता के पक्ष में उदारतापूर्वक की जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि "उपयोग" या "इच्छित उपयोग" पर आधारित एक्साइज छूट की अधिसूचनाओं की व्याख्या करदाता के पक्ष में उदारतापूर्वक की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह माना कि एक बार जब माल का उपयोग उसके इच्छित उद्देश्य के लिए कर लिया जाता है तो इस बात से कि उसका एक हिस्सा संयोगवश अन्य गतिविधियों के लिए भी उपयोग में आ गया है, करदाता छूट का दावा करने के अधिकार से वंचित नहीं हो जाता।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के खिलाफ एक्साइज...
बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर न करने के आदेश का पालन नहीं हो रहा: सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों में कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया
अदालती रिकॉर्ड में बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर होने पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि वे सभी लंबित मामलों में IPC की धारा 228-A के तहत वैधानिक रोक का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। इन मामलों में वे मामले भी शामिल हैं जो 'निपुण सक्सेना बनाम भारत संघ' मामले में 2018 के फैसले से पहले शुरू हुए थे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पीड़िता की पहचान उजागर न करने का आदेश कानून में लंबे समय से चली आ रही स्थिति है, फिर भी इसका लगातार पालन नहीं किया गया।कोर्ट...
डिफेंस सिक्योरिटी कोर के जवान दूसरी पेंशन के हकदार, एक साल तक की कमी माफ की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च को फैसला सुनाया कि डिफेंस सिक्योरिटी कोर (DSC) के जो जवान पहले से ही सेना में अपनी पिछली सेवा के लिए पेंशन ले रहे हैं, वे DSC में अपनी बाद की सेवा के लिए दूसरी सर्विस पेंशन पाने के हकदार हैं। साथ ही पेंशन नियमों के अनुसार, क्वालिफाइंग सर्विस में एक साल तक की कमी को माफ किया जा सकता है। कोर्ट ने साफ किया कि दूसरी पेंशन देने पर कोई कानूनी रोक नहीं है, सिर्फ इसलिए कि वह व्यक्ति पहले से ही अपनी पहली सेवा अवधि के लिए पेंशन ले रहा है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की...
दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय होने से पहले मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने का फ़ैसला सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय होने से पहले (प्री-चार्ज स्टेज) मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने के फ़ैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि जहां तथ्यों की ज़रूरत हो, वहां ट्रायल शुरू होने से पहले मंज़ूरी की वैधता की जाँच करने से अदालतों को रोका नहीं जा सकता।जस्टिस अमित महाजन ने इस तरह राज्य सरकार की याचिका खारिज की, जिसमें स्पेशल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें आरोपी को CrPC की धारा 311 के तहत मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने की इजाज़त दी गई ताकि उसके मुक़दमे के लिए...
अनिवार्य बैंक गारंटी की वैधता का पालन न करना टेंडर बिड खारिज करने का उचित आधार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक रिट याचिका खारिज की, जिसमें एक ठेकेदार को एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) के निर्माण से जुड़ी सरकारी टेंडर प्रक्रिया से अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती दी गई।M/s रामशरण सिंह प्रोजेक्ट्स LLP (याचिकाकर्ता 1)— जो सिविल निर्माण कार्यों में लगी है, ने WAPCOS लिमिटेड (प्रतिवादी 1), जो भारत सरकार का एक उपक्रम है, द्वारा जारी एक ई-मेल की वैधता को चुनौती दी थी। इस ई-मेल के ज़रिए कांकेर में EMRS के निर्माण के लिए 'टेंडर आमंत्रित करने की सूचना' (NIT) के जवाब में याचिकाकर्ता 1 द्वारा...
विज्ञापन से कम मात्रा में उत्पाद देना 'दोष' और अनुचित व्यापार व्यवहार: उपभोक्ता आयोग
कोल्लम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विज्ञापन में बताए गए वजन से कम मात्रा में सामान देना “दोष” (defect) है और यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन तथा अनुचित व्यापार व्यवहार (unfair trade practice) माना जाएगा।आयोग, जिसकी अध्यक्षता श्रीमती एस.के. श्रीला (अध्यक्ष) और श्री स्टैनली हेरोल्ड (सदस्य) कर रहे थे, ने पाया कि विक्रेता लक्ष्मी एंटरप्राइजेज ने कम वजन वाले बीन बैग ग्रेन्स की आपूर्ति की, जिसके लिए उसे जिम्मेदार ठहराया गया और...




















