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ट्विशा शर्मा दहेज मृत्यु मामला: सास को मिली अग्रिम जमानत रद्द कराने हाईकोर्ट पहुंचे मृतका के पिता
ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े दहेज उत्पीड़न मामले में उसके पिता नवनीधि शर्मा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मृतका की सास गिरीबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती दी।33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु, धारा 85 के तहत क्रूरता और धारा 3(5) के तहत समान आशय के आरोपों में FIR दर्ज की गई। इसके अलावा दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं 3 और 4 के तहत भी मामला दर्ज किया गया।ट्विशा के...
ट्विशा शर्मा दहेज मृत्यु मामला: आरोपी वकील-पति समार्थ सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए किया मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख
ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े दहेज उत्पीड़न मामले में आरोपी वकील समार्थ सिंह ने अग्रिम जमानत के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। समार्थ सिंह के खिलाफ पत्नी को प्रताड़ित करने और दहेज उत्पीड़न के आरोपों में FIR दर्ज की गई।यह याचिका ऐसे समय दायर की गई जब भोपाल की सेशन कोर्ट ने सोमवार को उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की थी। अदालत ने कहा था कि FIR और व्हाट्सऐप चैट्स के अवलोकन से प्रथम दृष्टया मुख्य आरोप समार्थ सिंह के खिलाफ दिखाई देते हैं।हाईकोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार,...
UAPA | दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश मामले में हाईकोर्ट ने सलीम मलिक को दी ज़मानत
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश के मामले में आरोपी सलीम मलिक को ज़मानत दी।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की डिवीज़न बेंच ने मलिक के वकील और दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए सरकारी वकील की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया।इसके साथ ही बेंच ने सह-आरोपी अतहर खान की ज़मानत याचिका पर सुनवाई के लिए सोमवार का दिन भी तय किया।मलिक की अपील पर फरवरी में नोटिस जारी किया गया। उन्होंने 29 जनवरी को ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें...
अलकनंदा-भागीरथी बेसिन में नए जलविद्युत प्रोजेक्ट्स के खिलाफ केंद्र, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा
उत्तराखंड में वर्ष 2013 की भीषण बाढ़ त्रासदी से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक महत्वपूर्ण हलफनामा दाखिल कर कहा है कि गंगा नदी के ऊपरी बेसिन क्षेत्र में अब कोई नया जलविद्युत परियोजना (Hydro Electric Project) शुरू नहीं किया जाना चाहिए। केंद्र ने केवल सात मौजूदा या प्रगति पर चल रही परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की अनुमति देने का समर्थन किया है।केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि अलकनंदा और भागीरथी नदी बेसिन के ऊपरी क्षेत्रों की पारिस्थितिकी अत्यंत संवेदनशील और आपदा-प्रवण है। ऐसे...
सिर्फ 'श्री' नाम समान होने पर श्रीलंकाई नागरिक को ठहराया आरोपी: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की UAPA के तहत दोषसिद्धि
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम [UAPA] के तहत दोषी ठहराए गए एक श्रीलंकाई नागरिक की सजा रद्द कर दी। अदालत ने पाया कि आरोपी की पहचान गलत तरीके से एक फरार मुख्य आरोपी के रूप में कर दी गई थी, केवल इसलिए क्योंकि दोनों के नाम में “श्री” शब्द समान था।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ और ट्रायल कोर्ट के फैसलों को रद्द करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी की पहचान विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित...
'फ्रेंडली लोन' अपने आपमें NI Act की धारा 138 के तहत कानूनी रूप से लागू करने योग्य कर्ज़ नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में दो आरोपियों को बरी करने का फैसला सही ठहराते हुए कहा कि पक्षों के बीच "दोस्ताना लेन-देन" अपने आप में Negotiable Instruments Act (NI Act) की धारा 138 के तहत कानूनी रूप से लागू करने योग्य कर्ज़ नहीं बन जाता।जस्टिस राजेश कुमार की एकल पीठ शिकायतकर्ता द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें जमशेदपुर के न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी द्वारा 28.07.2008 को Complaint C-1 Case No. 807 of 2007 में दिए गए फैसले को चुनौती दी गई।शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने...
जुर्माना न भरने पर जेल की सज़ा, बकाया रकम के अनुपात में होनी चाहिए: NI Act मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में दोषी की सज़ा घटाकर उतनी की, जितनी वह पहले ही काट चुका है, जबकि शिकायतकर्ता को दी जाने वाली मुआवज़े की रकम बढ़ा दी। कोर्ट ने इस सिद्धांत पर ज़ोर दिया कि जब पैसे के बकाया का भुगतान न करने पर जेल की सज़ा दी जाती है तो "आज़ादी की कीमत भी अनुपात में होनी चाहिए।"जस्टिस अनूप चितकारा ने कहा,"आपराधिक न्यायशास्त्र में एक मुख्य सैद्धांतिक चिंता के तौर पर जो मूल सिद्धांत उभरा है, वह यह है कि जुर्माना/मुआवज़े की रकम न भरने के कारण जेल में बंद होने से अपनी...
'एक हाईकोर्ट जज को सुप्रीम कोर्ट के तेज़ी से निपटाने के निर्देश वाले केस की सुनवाई के लिए रात 7 बजे तक बैठना पड़ा': CJI सूर्यकांत
इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक मामले की जल्द सुनवाई की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि वह हाई कोर्ट के जजों पर उनके काम के बोझ को ध्यान में रखे बिना समय-सीमा तय करके उन पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाल सकता।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय समय-सीमा के भीतर एक मामले की सुनवाई करने के लिए नियमित मामलों के बाद रात 7:10 बजे तक बैठना पड़ा। आखिरकार उन्होंने आदेश पारित करने को टाल दिया, यह लिखते हुए...
ईद से पहले बंगाल सरकार के पशु वध प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार (21 मई) को उन याचिकाओं के एक समूह पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिनमें पश्चिम बंगाल सरकार की उस हालिया अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जो ईद-उल-अज़हा से पहले पशुओं के वध को नियंत्रित करती है।याचिकाकर्ताओं में TMC सांसद महुआ मोइत्रा भी शामिल हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इन प्रतिबंधों का धार्मिक रीति-रिवाजों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा। यह तब हुआ जब राज्य सरकार ने यह स्पष्ट किया कि केवल 14 वर्ष से अधिक उम्र के या स्थायी रूप से विकलांग पशु ही वध के लिए...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन अधिनियम के तहत शिकायत में रिलायंस बायो एनर्जी को दी अंतरिम राहत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021' के तहत दायर एक शिकायत मामले में रिलायंस बायो एनर्जी को अंतरिम राहत दी।रिलायंस बायो एनर्जी, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की एक सहायक कंपनी है, जो कृषि अपशिष्ट (पराली) का उपयोग करके पूरे भारत में कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट स्थापित करने की प्रक्रिया में है।एक फ्लाइंग स्क्वाड द्वारा निरीक्षण किए जाने के बाद रामपुर, जिला-हापुड़ के चिताउली गांव में स्थित एक यूनिट के संबंध में अधिनियम की धारा...
Sedition | आरोपी को कोई आपत्ति न हो तो कोर्ट IPC की धारा 124A से जुड़े ट्रायल/अपील आगे बढ़ा सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को साफ़ किया कि अगर आरोपी को कोई आपत्ति न हो तो कोर्ट राजद्रोह (IPC की धारा 124A) के अपराध से जुड़े ट्रायल या अपील आगे बढ़ा सकते हैं।कोर्ट ने साफ़ किया कि मई 2022 में SG Vombatkere केस में दिया गया उसका आदेश, जिसमें पुराने राजद्रोह कानून को रोकते हुए IPC की धारा 124A से जुड़े सभी ट्रायल और कार्यवाही पर भी रोक लगा दी गई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने ऐसे आरोपी के मामले में यह आदेश दिया, जो 17 साल से जेल में है...
अमित शाह पर 'आपत्तिजनक टिप्पणी' मामले में अभिषेक बनर्जी को राहत, हाईकोर्ट ने लगाई पुलिस कार्रवाई पर रोक
कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार (21 मई) को अंतरिम आदेश में पुलिस को निर्देश दिया कि वह TMC नेता अभिषेक बनर्जी के खिलाफ 31 जुलाई तक कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न करे। अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई, जिसमें आरोप है कि उन्होंने एक चुनावी रैली के दौरान गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं।दोनों पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने अंतरिम आदेश सुनाते हुए कहा:"दलीलों पर विचार करने और कथित अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अदालत का मानना...
हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस को वर्चुअल सुनवाई के के लिए न्यायिक निर्देश जारी करना उचित नहीं': CJI सूर्यकांत
'सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को याचिका पर सुनवाई करने में अनिच्छा ज़ाहिर की। इस याचिका में ईंधन की खपत कम करने के उपाय के तौर पर दिल्ली की सभी अदालतों में वर्चुअल सुनवाई की अनुमति देने के निर्देश मांगे गए थे।जब एक वकील ने याचिका को तुरंत लिस्ट करने के लिए मौखिक रूप से ज़िक्र किया तो चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसे न्यायिक पक्ष पर लिया जाए। CJI ने यह भी बताया कि उन्होंने पहले ही हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस से वर्चुअल सुनवाई की अनुमति देने का अनुरोध किया।"शायद...
क्राइम सीन का री-एक्टमेंट हर स्थिति में 'खुद के खिलाफ गवाही देने के अधिकार' का उल्लंघन नहीं करेगा: सुप्रीम कोर्ट
यह देखते हुए कि जघन्य अपराधों की जांच में 'अपराध स्थल के री-एक्टमेंट' की तकनीक को काफी अहमियत मिल रही है, सुप्रीम कोर्ट ने इस तकनीक के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अपराध स्थल के री-एक्टमेंट को सिर्फ इसलिए असंवैधानिक बताकर पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसमें आरोपी भी शामिल होता है।कोर्ट ने साफ किया कि अपराध स्थल के री-एक्टमेंट में आरोपी की भागीदारी संविधान के अनुच्छेद 20(3) (खुद के खिलाफ गवाही देने के मौलिक अधिकार) का उल्लंघन तभी मानी जाएगी, जब इसके ज़रिए आरोपी को अपनी...
दिल्ली बार काउंसिल चुनाव: मतगणना पर रोक हटाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- मामले में गंभीर मुद्दे
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल चुनावों की मतगणना जारी रखने की अनुमति देने से इनकार किया।अदालत ने कहा कि मामले में गंभीर मुद्दे शामिल हैं और फिलहाल पहले पारित रोक संबंधी आदेश में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने मौखिक अनुरोध करते हुए कहा कि मतगणना की प्रक्रिया जारी रहने दी जाए, भले ही अंतिम परिणाम घोषित न किए जाएं।इस पर चीफ जस्टिस ने कहा,“हम इसकी अनुमति नहीं देंगे। मामले में गंभीर मुद्दे हैं। आप...
देश का पेट भरने वाले किसान को आपदा में अकेला नहीं छोड़ा जा सकता: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने वाले किसानों को केवल प्रक्रियात्मक कारणों के आधार पर मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता।अदालत ने टिप्पणी की कि देश का पेट भरने वाले किसान को संकट के समय अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ फसल क्षति से जुड़े मुआवजे के मामले पर सुनवाई कर रही थी।सुनवाई के दौरान बिहार कृषि विभाग के निदेशक, मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी और साहेबगंज के प्रखंड विकास पदाधिकारी वीडियो...
राजनीतिक आलोचना पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने राघव चड्ढा की याचिका पर सुरक्षित रखा फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा सांसद राघव चड्ढा की उस याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित मानहानिकारक सामग्री हटाने की मांग की थी।चड्ढा का आरोप है कि कुछ पोस्टों में यह दिखाने की कोशिश की गई कि उन्होंने पैसों के लिए खुद को बेच दिया। जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन का नहीं बल्कि एक राजनीतिक निर्णय की आलोचना का प्रतीत होता है।अदालत ने कहा,“दूसरे मामलों से अलग यहां...
BNSS और NDPS मामलों में संज्ञान से पहले आरोपी की सुनवाई जरूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) लागू होने के बाद NDPS Act के तहत दायर शिकायतों में विशेष अदालत आरोपी को सुने बिना संज्ञान नहीं ले सकती।जस्टिस बृजराज सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए लखनऊ स्थित NDPS विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी को सुनवाई का अवसर दिए बिना संज्ञान लिया गया था।मामले में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि 1 जुलाई 2024 से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू होने के बाद धारा 223(1) के पहले प्रावधान के तहत...
पुस्तकालयाध्यक्षों के खाली पद शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर संकट: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने बिहार के विश्वविद्यालयों में लाइब्रेरियन, डिप्टी लाइब्रेरियन और असिस्टेंट लाइब्रेरियन के बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों पर गंभीर चिंता जताई है।अदालत ने कहा कि पुस्तकालयाध्यक्षों की अनुपस्थिति से विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है और पुस्तकालयों का संचालन लगभग ठप हो चुका है। चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार की खंडपीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही थी।अदालत ने शुरुआत में ही कहा कि पुस्तकालय किसी भी शैक्षणिक संस्थान का जीवंत और केंद्रीय...
द्वितीय अपील में हाईकोर्ट 'तीसरी तथ्य जांच अदालत' नहीं बन सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 100 के तहत द्वितीय अपील की सुनवाई करते समय हाइकोर्ट तथ्यों की तीसरी अदालत की तरह काम नहीं कर सकता। केवल इस आधार पर कि रिकॉर्ड से कोई दूसरा दृष्टिकोण संभव है, अदालत दोबारा साक्ष्यों का मूल्यांकन या तथ्यों की नई जांच नहीं कर सकती।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि निचली अदालतों द्वारा दिए गए तथ्यात्मक निष्कर्षों को सही मानने की कानूनी मान्यता होती है। इनमें हस्तक्षेप केवल तभी किया जा सकता है जब वे स्पष्ट रूप से मनमाने, कानून के विपरीत या...




















