NCERT किताब विवाद पर स्वतः संज्ञान: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया की भूमिका की सराहना की

Amir Ahmad

26 Feb 2026 2:18 PM IST

  • NCERT किताब विवाद पर स्वतः संज्ञान: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया की भूमिका की सराहना की

    न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित अध्याय वाली NCERT की किताब पर स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया की सराहना करते हुए कहा कि समय पर रिपोर्टिंग न होती तो न्यायपालिका की साख को अपूरणीय क्षति हो सकती थी।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सुनवाई करते हुए विवादित अध्याय वाली NCERT किताब के प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। अदालत ने बाजार में उपलब्ध प्रतियों को जब्त कर सील करने का भी आदेश दिया। साथ ही शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा सचिव और NCERT के डायरेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया कि उनके विरुद्ध अवमानना कानून या अन्य उपयुक्त विधि के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।

    सुनवाई के दौरान एक एडवोकेट ने मीडिया को पुस्तक के आपत्तिजनक अंश प्रसारित करने से रोकने का अनुरोध किया। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि इस संबंध में आवश्यक निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि मीडिया संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में सकारात्मक भूमिका निभाता है।

    उन्होंने कहा,

    “कभी-कभी कुछ तथाकथित छोटे माध्यम इस प्रकार की चीजों में लिप्त हो जाते हैं लेकिन दूसरे पक्ष को भी देखिए। जिम्मेदार मीडिया ने ही इस विषय को सार्वजनिक किया। हम मीडिया के मित्रों के आभारी हैं। अधिकांश समय, विरले अपवादों को छोड़कर वे लोकतांत्रिक मूल्यों के एक स्तंभ के रूप में संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में महत्वपूर्ण, रचनात्मक और सकारात्मक भूमिका निभाते हैं। उनकी समय पर पहल न होती तो क्षति पूरी तरह अपूरणीय हो सकती थी।”

    इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुख्यधारा का मीडिया सामान्यतः जिम्मेदार होता है और समस्या प्रायः ऑनलाइन मंचों से उत्पन्न होती है। चीफ जस्टिस ने उत्तर दिया कि कभी-कभी संस्थान के बजाय व्यक्तियों को निशाना बनाया जाता है किंतु ऐसी बातों को अधिक महत्व नहीं देना चाहिए।

    उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष एक कार्यक्रम में चीफ जस्टिस ने कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों और स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए सभी क्षेत्रों, विशेषकर मीडिया में सतर्कता और नैतिक प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने असामाजिक मीडिया के दौर में पारस्परिक सहयोग खुले संवाद और साझा दृष्टि की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा था कि संस्थानों और व्यक्तियों को जवाबदेह ठहराना तथा नैतिक मानकों से समझौता न करना ही सच्ची पत्रकारिता और लोकतंत्र की मजबूती की आधारशिला है।

    चीफ जस्टिस ने मीडिया संगठनों और नियामक संस्थाओं से महिला पत्रकारों और संपादकों को डिजिटल उत्पीड़न तथा प्रतिष्ठा को क्षति से बचाने के लिए ठोस सुरक्षा उपाय अपनाने का भी आह्वान किया।

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