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दिल्ली दंगों के मामले में कोर्ट ने चार लोगों को बरी किया, कहा - पुलिस के गवाहों पर भरोसा करना खतरनाक
दिल्ली दंगों के मामले में कोर्ट ने चार लोगों को बरी किया, कहा - पुलिस के गवाहों पर भरोसा करना "खतरनाक"

दिल्ली कोर्ट ने कल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में चार लोगों को बरी किया। यह मामला कथित तौर पर एक ऑटो-रिक्शा जलाने और एक दुकान में तोड़फोड़ करने से जुड़ा था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस गवाहों की गवाही पर भरोसा करना "खतरनाक" होगा।कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज परवीन सिंह ने कहा कि दो पुलिस गवाह, जिनकी गवाही पर अभियोजन पक्ष का मामला काफी हद तक टिका था, "विश्वसनीय गवाह नहीं थे" और उनकी बात जांच रिकॉर्ड से ही "गलत साबित" हो गई।कोर्ट ने कहा,"मेरी उपरोक्त चर्चा को देखते...

POSH Act के तहत संस्थान के निदेशक के खिलाफ भी आंतरिक शिकायत समिति कर सकती है जांच : केरल हाईकोर्ट
POSH Act के तहत संस्थान के निदेशक के खिलाफ भी आंतरिक शिकायत समिति कर सकती है जांच : केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि यदि किसी संस्थान का निदेशक उसके प्रशासन और प्रबंधन पर पूर्ण नियंत्रण नहीं रखता और वह कार्यकारी समिति द्वारा नियुक्त कर्मचारी की श्रेणी में आता है तो उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति कर सकती है।जस्टिस अनिल के. नरेंद्रन और जस्टिस मुरली कृष्ण एस. की खंडपीठ उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी गई।मामला इंटीग्रेटेड रूरल टेक्नोलॉजी सेंटर के निदेशक से जुड़ा है। संस्थान की एक महिला...

फर्जी विश्वविद्यालयों पर सख्ती जरूरी, भविष्य में AI संस्थानों का भी खतरा : दिल्ली हाईकोर्ट
फर्जी विश्वविद्यालयों पर सख्ती जरूरी, भविष्य में AI संस्थानों का भी खतरा : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने देशभर में तेजी से बढ़ रहे फर्जी उच्च शिक्षण संस्थानों पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, दिल्ली सरकार और अन्य संबंधित प्राधिकरणों से पूछा कि ऐसे संस्थानों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देशभर में फर्जी विश्वविद्यालयों के बढ़ते जाल और नियामक संस्थाओं की कथित विफलता का मुद्दा उठाया गया।अदालत ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से कहा कि वह शिक्षा...

ब्लैकलिस्टिंग पर अंतरिम राहत मिलने से टेंडर में पूरी जानकारी छिपाने का अधिकार नहीं मिलता : दिल्ली हाईकोर्ट
ब्लैकलिस्टिंग पर अंतरिम राहत मिलने से टेंडर में पूरी जानकारी छिपाने का अधिकार नहीं मिलता : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी कंपनी को ब्लैकलिस्टिंग आदेश पर अंतरिम राहत मिल जाने का यह मतलब नहीं है कि वह टेंडर प्रक्रिया में उससे जुड़ी जानकारी छिपा सकती है।अदालत ने स्पष्ट किया कि बोलीदाता पर सभी तथ्यों का स्पष्ट और ईमानदार खुलासा करने की जिम्मेदारी बनी रहती है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एम/एस वेलोसिस सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज की।कंपनी ने नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर सर्विसेज इंकॉरपोरेटेड द्वारा जारी निविदा में तकनीकी रूप से...

समान आरोपों में सह-आरोपी डिस्चार्ज हो चुके हों तो एक आरोपी पर अकेले मुकदमा नहीं चल सकता : सुप्रीम कोर्ट
समान आरोपों में सह-आरोपी डिस्चार्ज हो चुके हों तो एक आरोपी पर अकेले मुकदमा नहीं चल सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि समान परिस्थितियों वाले सह-आरोपियों (Co-Accused) को पहले ही डिस्चार्ज किया जा चुका है, तो केवल एक आरोपी के खिलाफ मुकदमा जारी नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य अन्य आरोपियों की तुलना में अधिक मजबूत न हों। अदालत ने कहा कि समान आरोपों वाले व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार किया जाना आपराधिक न्यायशास्त्र (Criminal Jurisprudence) का मूल सिद्धांत है।जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ओडिशा के एक Forest Range...

असहमति की आवाज़ को कट्टर और असहिष्णु समूहों से बचाना जरूरी : जस्टिस उज्जल भुइयां
असहमति की आवाज़ को कट्टर और असहिष्णु समूहों से बचाना जरूरी : जस्टिस उज्जल भुइयां

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति के अधिकार की रक्षा होना बेहद जरूरी है और असहमति रखने वालों को राज्य तथा गैर-राज्य दोनों प्रकार के दमनकारी और कट्टरपंथी समूहों से संरक्षण मिलना चाहिए।जस्टिस भुइयां इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ द्वारा आयोजित स्मृति निर्मला देवी बाम अंतरराष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कानून हमें अलग-अलग विचारों और मतों के साथ संवाद करना सिखाता है और भारतीय संविधान भी इसी भावना को स्वीकार करता...

सरकारी कानूनी पैनलों में महिला वकीलों को 30 प्रतिशत आरक्षण की मांग: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को नोटिस
सरकारी कानूनी पैनलों में महिला वकीलों को 30 प्रतिशत आरक्षण की मांग: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कानूनी पैनलों में महिला वकीलों के लिए कम-से-कम 30 प्रतिशत आरक्षण की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और सभी राज्यों को नोटिस जारी किया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह आदेश पारित किया। अदालत सीनियर एडवोकेट विकास सिंह की दलीलें सुन रही थी, जो याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए।यह जनहित याचिका लाडली फाउंडेशन ट्रस्ट ने दायर की। याचिका में मांग की गई कि सभी हाइकोर्ट पैनलों, सरकारी विधि अधिकारियों के पदों...

आदेश में सभी दलीलों का उल्लेख न होने से जज को पक्षपाती नहीं कहा जा सकता : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
आदेश में सभी दलीलों का उल्लेख न होने से जज को पक्षपाती नहीं कहा जा सकता : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने न्यायिक पक्षपात की आशंका जताते हुए दायर स्थानांतरण आवेदन खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर किसी जज को पक्षपाती नहीं कहा जा सकता कि अदालत के आदेश में किसी पक्ष की कुछ दलीलों का उल्लेख नहीं किया गया।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने कहा कि अदालत हर उस दलील को आदेश में दर्ज करने के लिए बाध्य नहीं होती, जिसका विवाद के मूल मुद्दों से सीधा संबंध न हो।अदालत ने कहा,“न्यायिक आदेशों में केवल महत्वपूर्ण तथ्यों, लागू कानून और उन तर्कों का उल्लेख आवश्यक होता है, जिनका विवाद के निपटारे...

धुरंधर में सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी दिखाने के आरोप पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और CBFC को फैसला लेने का निर्देश
'धुरंधर' में सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी दिखाने के आरोप पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और CBFC को फैसला लेने का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' को लेकर उठाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को फैसला लेने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित प्राधिकरणों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।याचिका दीपक कुमार ने दायर की थी जो राष्ट्रीय राजधानी में सशस्त्र सीमा बल में हेड कांस्टेबल (संचार) के पद पर तैनात हैं।दीपक कुमार ने अदालत...

बार-बार अग्रिम ज़मानत याचिकाएं दायर करना प्रक्रिया का दुरुपयोग, इससे मुक़दमेबाज़ी महज़ जुआ बनकर रह जाती है: सुप्रीम कोर्ट
बार-बार अग्रिम ज़मानत याचिकाएं दायर करना प्रक्रिया का दुरुपयोग, इससे मुक़दमेबाज़ी महज़ जुआ बनकर रह जाती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कम समय के अंतराल पर बार-बार अग्रिम ज़मानत याचिकाएं दायर करने की प्रथा पर नाराज़गी ज़ाहिर की। कोर्ट ने कहा कि अग्रिम ज़मानत का उपाय, जिसका मकसद किसी आरोपी की निजी आज़ादी को पहले से ही सुरक्षित रखना है, उसे महज़ एक जुआ बनाकर नहीं रखा जा सकता।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच द्वारा पारित आदेश रद्द किया। इस आदेश में प्रतिवादी-आरोपी को उसकी लगातार तीसरी याचिका पर अग्रिम ज़मानत दी गई थी। कोर्ट ने पाया कि पिछली दो अग्रिम...

कानूनी स्थिति जाने बिना FIR दर्ज कराने की याचिका दायर करना दुर्भाग्यपूर्ण : दिल्ली हाईकोर्ट
कानूनी स्थिति जाने बिना FIR दर्ज कराने की याचिका दायर करना दुर्भाग्यपूर्ण : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील की कड़ी आलोचना की। अदालत ने कहा कि स्थापित कानूनी स्थिति की जांच किए बिना ऐसी याचिका दायर करना दुर्भाग्यपूर्ण है।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने आशानंद सैनी द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में FIR दर्ज करने, जांच को पुलिस उपायुक्त (सतर्कता) की निगरानी में किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने और कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की मांग की गई।सुनवाई की...

मुस्लिम रीति से शादी करने वाली हिंदू महिला को अंतरिम भरण-पोषण का अधिकार: कलकत्ता हाईकोर्ट
मुस्लिम रीति से शादी करने वाली हिंदू महिला को अंतरिम भरण-पोषण का अधिकार: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि कोई हिंदू महिला इस्लाम धर्म अपनाकर मुस्लिम रीति-रिवाज से विवाह करती है तो केवल विवाह की वैधता पर सवाल उठाकर मुस्लिम पति भरण-पोषण देने से बच नहीं सकता। अदालत ने कहा कि जब तक सक्षम अदालत विवाह को शून्य घोषित नहीं करती, तब तक पत्नी और बच्चे को अंतरिम भरण-पोषण पाने का अधिकार रहेगा।जस्टिस चैताली चटर्जी दास ने महिला और उसके नाबालिग बेटे के पक्ष में पारित अंतरिम भरण-पोषण आदेश बहाल करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया विवाह और बच्चे के पितृत्व के प्रमाण होने...

अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR पर रोक हटाई गई, हाइकोर्ट का सेशन कोर्ट को नए सिरे से सुनवाई का निर्देश
अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR पर रोक हटाई गई, हाइकोर्ट का सेशन कोर्ट को नए सिरे से सुनवाई का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने टिप्पणीकार अभिजीत अय्यर मित्रा के खिलाफ FIR दर्ज करने के मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश पर लगी रोक रद्द की। यह मामला न्यूज़लॉन्ड्री की संपादकीय निदेशक मनीषा पांडे द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि अभिजीत अय्यर मित्रा ने सोशल मीडिया पर उनके और अन्य महिला कर्मचारियों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कीं।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए सेशन कोर्ट को वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि दोनों पक्षों को सुनने के बाद कारण सहित नया आदेश पारित किया...

फडणवीस और शिंदे के खिलाफ बयान दिलाने की साजिश मामले में संजय पांडे को बड़ी राहत, हाइकोर्ट ने रद्द की FIR
फडणवीस और शिंदे के खिलाफ बयान दिलाने की साजिश मामले में संजय पांडे को बड़ी राहत, हाइकोर्ट ने रद्द की FIR

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक और मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त संजय पांडे तथा एक एडवोकेट के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की। इन दोनों पर आरोप था कि उन्होंने एक कारोबारी पर दबाव बनाकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ बयान दिलाने की कोशिश की थी।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस सुमन श्याम की विशेष खंडपीठ ने बुधवार को अदालत में यह आदेश सुनाया।खंडपीठ संजय पांडे, एडवोकेट शेखर जगताप और अन्य व्यक्तियों द्वारा दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।ठाणे और...

शैक्षणिक संस्थानों में आवारा कुत्तों को खिलाना है तो डॉग-बाइट की जिम्मेदारी भी लें : सुप्रीम कोर्ट
शैक्षणिक संस्थानों में आवारा कुत्तों को खिलाना है तो डॉग-बाइट की जिम्मेदारी भी लें : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि शैक्षणिक संस्थानों में पशु कल्याण समूह (Animal Welfare Groups) या छात्र संगठन तभी आवारा कुत्तों को खाना खिला सकते हैं या उनकी देखभाल कर सकते हैं, जब वे परिसर में किसी भी डॉग-बाइट या संबंधित नुकसान की कानूनी जिम्मेदारी लेने का औपचारिक हलफनामा (Affidavit) दें।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने कहा कि आवारा कुत्तों के अधिकारों और संरक्षण को मानव जीवन एवं...

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त : सभी हाईकोर्ट्स को निगरानी के निर्देश, लापरवाह अधिकारियों पर अवमानना कार्रवाई की चेतावनी
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त : सभी हाईकोर्ट्स को निगरानी के निर्देश, लापरवाह अधिकारियों पर अवमानना कार्रवाई की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशभर के सभी हाईकोर्ट्स को निर्देश दिया कि वे आवारा कुत्तों को स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों से हटाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन की निगरानी के लिए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) रिट याचिकाएं दर्ज करें। अदालत ने चेतावनी दी कि आदेशों का लगातार उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही (Contempt Proceedings) शुरू की जा सकती है।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने यह...

गोदनामे से ही वैध नहीं मानी जाएगी गोद लेने की प्रक्रिया, लेने-देने की रस्म जरूरी : राजस्थान हाईकोर्ट
गोदनामे से ही वैध नहीं मानी जाएगी गोद लेने की प्रक्रिया, 'लेने-देने' की रस्म जरूरी : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल गोदनामा तैयार कर लेने भर से किसी गोद लेने की प्रक्रिया को कानूनन वैध नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के तहत बच्चे को गोद देने और लेने की वास्तविक रस्म का होना अनिवार्य है और इसे महज औपचारिकता नहीं माना जा सकता।जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें निचली अदालत और अपीलीय अदालत द्वारा गोदनामे को अमान्य ठहराने के फैसले को चुनौती दी गई।मामले में महिला पक्ष ने कहा कि...

RTI Act के तहत जानकारी मिलने के बाद मूल दस्तावेज मांगने का अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
RTI Act के तहत जानकारी मिलने के बाद मूल दस्तावेज मांगने का अधिकार नहीं: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने एक RTI आवेदक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) उपलब्ध अभिलेखों की प्रतियां उपलब्ध करा देता है तब आवेदक मूल दस्तावेज देने की मांग नहीं कर सकता।जस्टिस हेमंत एम प्रच्छक ने अपने आदेश में कहा कि RTI Act के तहत लोक प्राधिकरण की जिम्मेदारी केवल उन दस्तावेजों और सूचनाओं को उपलब्ध कराने तक सीमित है, जो उसके पास उपलब्ध और सुलभ हैं।अदालत ने कहा,“जो दस्तावेज संबंधित प्राधिकरण के पास उपलब्ध थे, उनकी प्रतियां याचिकाकर्ता को पहले ही दी जा चुकी हैं। मूल...