एमपी मेडिकल एडमिशन नियम 2018 | PG अभ्यर्थी ने NRI कोटा को स्ट्रे वैकेंसी राउंड तक बढ़ाने की मांग को लेकर खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
Amir Ahmad
26 Feb 2026 4:19 PM IST

PG मेडिकल कोर्स में NRI कोटा के तहत एडमिशन चाहने वाले एक अभ्यर्थी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एम.पी. मेडिकल एजुकेशन एडमिशन रूल्स, 2018 के नियम 14(2) की वैधता को चुनौती दी।
याचिका विशेष रूप से उस प्रावधान के खिलाफ है, जिसके तहत तीसरे काउंसलिंग राउंड के बाद रिक्त NRI सीटों को अन्य श्रेणी में परिवर्तित करने की अनुमति दी गई।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि ऐसी सीटों को स्ट्रे वैकेंसी राउंड तक NRI अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया।
अदालत ने निर्देश दिया,
“अंतरिम उपाय के रूप में यह निर्देशित किया जाता है कि यदि कोई अन्य विधिक बाधा न हो तो प्रतिवादी एम.पी. मेडिकल एजुकेशन एडमिशन रूल्स, 2018 के नियम 14(2) का पालन करेंगे। मामले को 25.02.2026 को सूचीबद्ध किया जाए।”
PG मेडिकल कोर्स में प्रवेश एम.पी. मेडिकल एजुकेशन एडमिशन रूल्स, 2018 के तहत संचालित होता है, जिसे 19 जून 2019 की अधिसूचना के माध्यम से संशोधित किया गया। इसी संशोधन के जरिए नियम 14(2) जोड़ा गया।
याचिका के अनुसार अनुसूची-2 के तहत NRI कोटा को अन्य उप-श्रेणियों के साथ एक उप-श्रेणी के रूप में मान्यता दी गई। नियम 14(2) में प्रावधान है कि यदि किसी उप-श्रेणी के उम्मीदवार काउंसलिंग राउंड के बाद उपलब्ध नहीं होते हैं तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत सीटें संबंधित श्रेणी में उपलब्ध कराई जाएंगी।
हालांकि नियम 14(2) के तहत NRI की रिक्त सीटों को बिना पात्र NRI अभ्यर्थियों को पूर्ण अवसर दिए सीधे अनारक्षित श्रेणी में परिवर्तित कर दिया जाता है।
याचिकाकर्ता ने इसे मनमाना और भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि अन्य उप-श्रेणियों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता।
याचिका में यह भी कहा गया कि अखिल भारतीय काउंसलिंग और अन्य राज्यों की काउंसलिंग प्रक्रियाओं में सीट परिवर्तन तभी किया जाता है जब संबंधित श्रेणी के पात्र अभ्यर्थी पूरी तरह समाप्त हो जाएं और वह भी निर्धारित कन्वर्जन एल्गोरिद्म के अनुसार।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि नियम 14(2) संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है और प्रत्यक्ष रूप से मनमाना है। जब NRI कोटा को उप-श्रेणी के रूप में मान्यता दी गई तो उसके साथ अलग और प्रतिकूल कन्वर्जन व्यवस्था लागू नहीं की जा सकती।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपने तर्कों को अंतरिम राहत तक सीमित रखते हुए अनुरोध किया कि स्ट्रे वैकेंसी राउंड तक NRI सीटों को अनारक्षित श्रेणी में परिवर्तित न किया जाए।
काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने को ध्यान में रखते हुए अदालत ने राज्य से निर्देश प्राप्त करने को कहा और अंतरिम रूप से नियम 14(2) के पालन का निर्देश दिया, बशर्ते कोई अन्य कानूनी बाधा न हो।
मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी, 2026 को निर्धारित की गई।

