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समय सीमा बढ़ाने के लिए ट्रायल जज सीधे सुप्रीम कोर्ट को न लिखें: सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया निर्देश
समय सीमा बढ़ाने के लिए ट्रायल जज सीधे सुप्रीम कोर्ट को न लिखें: सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बार फिर उस प्रथा पर असंतोष जताया, जिसमें ट्रायल कोर्ट के जज सीधे सुप्रीम कोर्ट को पत्र भेजकर ट्रायल पूरी करने के लिए निर्धारित समय सीमा बढ़ाने का अनुरोध करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि ऐसी सभी संचार प्रक्रियाएँ हाईकोर्ट के माध्यम से ही भेजी जानी चाहिए।जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ को बताया गया कि ट्रायल कोर्ट के जज ने समय विस्तार मांगते हुए एक आवेदन दाखिल किया है, लेकिन उसमें आवश्यक विवरण नहीं दिए गए थे। इस पर जस्टिस महेश्वरी ने...

यूपी की ट्रायल अदालतें फैसले हिंदी या अंग्रेजी में लिख सकती हैं, लेकिन दोनों भाषाओं का मिश्रित जजमेंट नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
यूपी की ट्रायल अदालतें फैसले हिंदी या अंग्रेजी में लिख सकती हैं, लेकिन दोनों भाषाओं का मिश्रित जजमेंट नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की ट्रायल अदालतें अपने फैसले या तो पूरी तरह हिंदी में लिखें या पूरी तरह अंग्रेजी में, लेकिन दोनों भाषाओं को मिलाकर लिखा गया जजमेंट स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने आगरा की सत्र अदालत द्वारा दिए गए एक बरी करने के फैसले को “क्लासिक उदाहरण” बताते हुए इसकी प्रति मुख्य न्यायाधीश और पूरे राज्य के न्यायिक अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने पाया कि विवादित फैसला 54 पन्नों का था, जिसमें 63 पैराग्राफ अंग्रेजी में, 125 हिंदी में और 11 पैराग्राफ दोनों...

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: विज्ञापन टैक्स लगाने के लिए एडेन गार्डन्स सार्वजनिक स्थान नहीं
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: विज्ञापन टैक्स लगाने के लिए एडेन गार्डन्स 'सार्वजनिक स्थान' नहीं

सुप्रीम कोर्ट में आज एडेन गार्डन्स को लेकर एक दिलचस्प बहस हुई—क्या यह मशहूर क्रिकेट स्टेडियम “सार्वजनिक स्थान” माना जा सकता है? और क्या कोलकाता नगर निगम (KMC) यहां लगे विज्ञापनों पर टैक्स वसूल सकता है?KMC की ओर से सीनियर एडवोकेट जयदीप गुप्ता ने जोर देकर कहा कि एडेन गार्डन्स तो पूरी तरह “पब्लिक व्यू” में रहता है। “स्टेडियम का हर हिस्सा बाहर से दिखता है, मैच टीवी पर आते हैं, विज्ञापन लाखों लोग देखते हैं… तो यह सार्वजनिक स्थान ही हुआ,” उन्होंने कहा। लेकिन जजों को यह तर्क जम नहीं पाया। जस्टिस...

“राज्य के वकील कोर्ट में उपस्थित हों”: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की गृह सचिव को निर्देश दिया
“राज्य के वकील कोर्ट में उपस्थित हों”: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड की गृह सचिव को निर्देश दिया

झारखंड की गृह सचिव वंदना डाडेल गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुईं। कोर्ट ने उनकी मौजूदगी इसलिए तलब की थी क्योंकि नोटिस की सेवा पूरी होने के बावजूद झारखंड सरकार कई मामलों में लगातार गैर-हाज़िर रही। कोर्ट ने उनसे कहा कि राज्य के वकील सभी ऐसे मामलों में अनिवार्य रूप से उपस्थित हों।मुख्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार से कहा कि वह हाईकोर्ट द्वारा दो हत्या आरोपियों—अर्शद और शमशेर—को दिए गए anticipatory bail को चुनौती दे, क्योंकि हाईकोर्ट ने बिना मेरिट देखे यह...

कोविड वैक्सीन से मौतों पर क्षतिपूर्ति वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
कोविड वैक्सीन से मौतों पर क्षतिपूर्ति वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 वैक्सीन के कारण कथित मौतों पर क्षतिपूर्ति और स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं पर गुरुवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उनकी बेटियों की मौत वैक्सीन से हुई और सरकार प्रतिकूल प्रभावों का डेटा सार्वजनिक नहीं कर रही।रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन की याचिका के साथ केंद्र सरकार की वह अपील भी सुनी गई जिसमें केरल हाईकोर्ट के क्षतिपूर्ति नीति बनाने संबंधी अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई थी। सुनवाई में सीनियर एडवोकेट कॉलिन गोंसाल्विस ने बताया कि चार...

दिल्ली हाईकोर्ट के खंडित फैसले के बाद अब तीसरे जज सुनेंगे सांसद इंजीनियर रशीद की याचिका
दिल्ली हाईकोर्ट के खंडित फैसले के बाद अब तीसरे जज सुनेंगे सांसद इंजीनियर रशीद की याचिका

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को यह स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर के सांसद इंजीनियर रशीद की उस याचिका पर 14 जनवरी को प्रारंभिक सुनवाई की जाएगी, जिसमें उन्होंने संसद में उपस्थिति के लिए दी गई कस्टडी पैरोल पर ट्रायल कोर्ट द्वारा लगाए गए भारी खर्च को चुनौती दी। जस्टिस रवींद्र दुडेज़ा के समक्ष इसलिए आया, क्योंकि याचिका पर सुनवाई कर रही दो-सदस्यीय पीठ इस मुद्दे पर विभाजित मत में थी।जस्टिस दुडेज़ा ने कहा कि वे पहले यह तय करने के लिए प्रारंभिक सुनवाई करेंगे कि अपील पर निर्णय वे स्वयं करेंगे या इसे बड़े पीठ...

क्या माफ़ी स्वीकार करना अवमानना ​​के दोष को दूर करने के लिए पर्याप्त है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बताया, सज़ा क्यों दी जा सकती है?
क्या माफ़ी स्वीकार करना अवमानना ​​के दोष को दूर करने के लिए पर्याप्त है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बताया, सज़ा क्यों दी जा सकती है?

न्यायालय अवमानना ​​अधिनियम 1971 की धारा 12 की व्याख्या करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अवमाननाकर्ता द्वारा की गई माफ़ी को न्यायालय स्वीकार तो कर सकता है लेकिन इससे अवमानना ​​स्वतः ही समाप्त नहीं हो जाती या अवमाननाकर्ता को दोषमुक्त नहीं कर देता।न्यायालय के विरुद्ध अपमानजनक आरोप लगाने के कारण आपराधिक अवमानना ​​का सामना कर रहे एक वकील की वापसी और माफ़ी की याचिका पर विचार करते हुए जस्टिस सिद्धार्थ की पीठ ने कहा कि माफ़ी स्वीकार करना दोषमुक्ति के समान नहीं है।पीठ ने आगे कहा कि अवमानना...

नाबालिग को बिना लाइसेंस वाहन चलाने देना बीमा पॉलिसी का मूल उल्लंघन: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
नाबालिग को बिना लाइसेंस वाहन चलाने देना बीमा पॉलिसी का मूल उल्लंघन: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि वाहन मालिक लापरवाही बरतते हुए किसी नाबालिग को बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने की अनुमति देता है या ऐसा होने देता है तो यह बीमा पॉलिसी की मूल शर्तों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।जस्टिस हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने कहा कि यह बड़ों का दायित्व है कि नाबालिगों को उन रास्तों पर जाने से रोका जाए, जो उनकी उम्र के अनुकूल नहीं हैं विशेष रूप से वाहन चलाने जैसे कार्य जिसके लिए परिपक्वता और कानूनी अनुमति दोनों आवश्यक हैं।यह टिप्पणी उस अपील की सुनवाई के दौरान की...

BREAKING | NCLAT सदस्य पर हाईकोर्ट जज द्वारा निर्णय प्रभावित करने के प्रयास का सनसनीखेज खुलासा, सुप्रीम कोर्ट ने मामला प्रशासनिक पक्ष में भेजा
BREAKING | NCLAT सदस्य पर हाईकोर्ट जज द्वारा निर्णय प्रभावित करने के प्रयास का सनसनीखेज खुलासा, सुप्रीम कोर्ट ने मामला प्रशासनिक पक्ष में भेजा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस गंभीर रिट याचिका को अपने प्रशासनिक पक्ष में निपटाने का निर्णय लिया, जिसमें NCLAT के न्यायिक सदस्य जस्टिस शरद कुमार शर्मा द्वारा किए गए उस अभूतपूर्व खुलासे की जांच की मांग की गई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें उच्च न्यायपालिका के अत्यंत सम्मानित सदस्य ने लंबित दिवाला अपील में अनुकूल आदेश देने के लिए संदेश भेजा था।जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि इस याचिका को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के समक्ष विचारार्थ प्रतिनिधित्व के रूप...

डिज़ाइन उल्लंघन पर पासिंग ऑफ़ के मुकदमों को बनाए रखने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कीं
डिज़ाइन उल्लंघन पर पासिंग ऑफ़ के मुकदमों को बनाए रखने के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कीं

सुप्रीम कोर्ट ने क्रॉक्स इंक. यूएसए द्वारा दायर पासिंग ऑफ़ मुकदमों की वैधता को चुनौती देने वाली बाटा इंडिया लिमिटेड और अन्य जूता निर्माताओं की याचिकाएं शुक्रवार को खारिज कर दीं। ये मुकदमे क्रॉक्स के रजिस्टर्ड डिज़ाइनों की कथित नकल और व्यापारिक स्वरूप (ट्रेड ड्रेस) की नकल के आधार पर दायर किए गए।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने 1 जुलाई को दिए दिल्ली हाईकोर्ट के डिवीज़न बेंच के उस फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया, जिसमें कहा गया था कि डिज़ाइंस एक्ट के तहत रजिस्टर्ड किसी डिज़ाइन...

क्रिमिनल ट्रायल के दौरान बिना अनुमति विदेश जाने पर भी पासपोर्ट नवीनीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
क्रिमिनल ट्रायल के दौरान बिना अनुमति विदेश जाने पर भी पासपोर्ट नवीनीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

आपराधिक मामले के लम्बित रहने पर भी दस वर्ष के लिए पासपोर्ट जारी करने के आदेश देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायालय की बिना अनुमति के आरोपी के विदेश जाने पर विचारण न्यायालय जमानत के संबंध में समुचित आदेश पारित कर सकता है, लेकिन पासपोर्ट नवीनीकरण से इनकार नहीं कर सकता।डीडवाना निवासी रहीस खान की ओर से एडवोकेट रजाक खान हैदर ने आपराधिक विविध याचिका दायर कर हाईकोर्ट में कहा कि उसके खिलाफ वर्ष 2019 में मारपीट के आरोप में आपराधिक प्रकरण संस्थित हुआ था, जिसका विचारण अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट,...

S.138 NI Act | चेक बाउंस मामलों के निपटारे के लिए लगने वाले खर्च पर दामोदर प्रभु फैसले में दिशानिर्देश बाध्यकारी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
S.138 NI Act | चेक बाउंस मामलों के निपटारे के लिए लगने वाले खर्च पर 'दामोदर प्रभु फैसले' में दिशानिर्देश बाध्यकारी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति पर बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा लगाया गया जुर्माना रद्द कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता को समझौते पर कोई आपत्ति नहीं थी और अपीलकर्ता राशि का भुगतान करने में असमर्थ था।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि दामोदर एस. प्रभु बनाम सैयद बाबालाल एच. फैसले में दिए गए दिशानिर्देश, जो NI Act में मामले के निपटारे के चरण के आधार पर जुर्माने लगाने का प्रावधान...

क्या दूरसंचार स्पेक्ट्रम लाइसेंस पर दिवालियेपन की कार्यवाही की जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
क्या दूरसंचार स्पेक्ट्रम लाइसेंस पर दिवालियेपन की कार्यवाही की जा सकती है? सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एयरसेल और रिलायंस कम्युनिकेशंस की दिवालियेपन कार्यवाही में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों के एक समूह पर फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायाधिकरण ने कहा था कि स्पेक्ट्रम, कॉर्पोरेट देनदार की अमूर्त संपत्ति होने के कारण, दिवालियेपन/परिसमापन कार्यवाही के अधीन किया जा सकता है।NCLAT ने आगे कहा कि स्पेक्ट्रम के उपयोग का अधिकार केवल सरकार को स्पेक्ट्रम से संबंधित बकाया चुकाने के बाद ही CIRP में हस्तांतरित किया जा सकता...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्सप्रेस पब्लिकेशन्स को दक्षिणी राज्यों के बाहर द न्यू इंडियन एक्सप्रेस टाइटल इस्तेमाल करने से रोका
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्सप्रेस पब्लिकेशन्स को दक्षिणी राज्यों के बाहर 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' टाइटल इस्तेमाल करने से रोका

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक्सप्रेस पब्लिकेशन्स (मदुरै) प्राइवेट लिमिटेड को उन दक्षिणी राज्यों के बाहर 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' टाइटल का उपयोग करने से रोक दिया, जिनके लिए उसे अधिकार दिए गए थे। न्यायालय ने कहा कि "इंडियन एक्सप्रेस" ट्रेडमार्क का स्वामित्व विशेष रूप से द इंडियन एक्सप्रेस (प्रा.) लिमिटेड के पास है।जस्टिस आर. आई. छागला की सिंगल बेंच ने 13 नवंबर, 2025 को इंडियन एक्सप्रेस द्वारा दायर अंतरिम आवेदन को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया।कोर्ट ने माना कि एक्सप्रेस पब्लिकेशन्स द्वारा निर्दिष्ट...

सुप्रीम कोर्ट ने बिलासपुर में ईसाई मिशन के ज़मीन पर कब्ज़ा करने के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने बिलासपुर में ईसाई मिशन के ज़मीन पर कब्ज़ा करने के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बिलासपुर में एक लीज़होल्ड संपत्ति पर ईसाई महिला मिशन बोर्ड (CWBM) के कब्ज़े पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देकर उसे अंतरिम राहत प्रदान की। मिशन ने छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा ज़मीन पर कब्ज़ा वापस लेने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ CWBM की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया, जिसमें उसे राहत देने से इनकार कर दिया गया।सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा...