ताज़ा खबरे
शिकायतकर्ता द्वारा दायर क्रिमिनल रिवीजन उसकी मौत पर खत्म नहीं होता, दूसरे पीड़ित इसे जारी रख सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक क्रिमिनल रिवीजन याचिका रिवीजन करने वाले की मौत पर अपने आप खत्म नहीं होती, खासकर तब जब रिवीजन किसी आरोपी ने नहीं बल्कि किसी शिकायतकर्ता या पीड़ित ने दायर किया हो। कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे मामलों में रिवीजन कोर्ट के पास विवादित आदेश की वैधता और सही होने की जांच जारी रखने का अधिकार है। वह न्याय के लिए किसी पीड़ित को कोर्ट की मदद करने की इजाज़त दे सकता है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा पारित दो आदेशों को रद्द कर दिया, जिसमें...
उत्तराखंड में वन भूमि कब्जे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त — हजारों एकड़ जंगल पर अवैध कब्जे के दौरान राज्य बना रहा मूक दर्शक
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर वन भूमि पर कथित अवैध कब्जे के मामले में राज्य सरकार और उसके अधिकारियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वे इस पूरे प्रकरण में “मूक दर्शक” बने रहे। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए इसकी परिधि बढ़ाकर स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) के रूप में आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।यह मामला चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ के समक्ष आया। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया यह टिप्पणी की कि हजारों एकड़ वन भूमि को निजी व्यक्तियों...
HIV पॉजिटिव होने के आधार पर कर्मचारी की सेवा समाप्त करना मनमाना और गैरकानूनी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी को केवल HIV पॉजिटिव होने के आधार पर सेवा से हटाना न केवल मनमाना है, बल्कि कानून के भी खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि मानव प्रतिरक्षा अपूर्णता विषाणु एवं उपार्जित प्रतिरक्षा अपूर्णता सिंड्रोम (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017 में निर्धारित सुरक्षा उपायों का पालन किए बिना की गई ऐसी कार्रवाई अवैध है।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के एक कांस्टेबल को सेवा से हटाए जाने का आदेश रद्द करते...
अरावली पुनर्वर्गीकरण और संवैधानिक पर्यावरणवाद: एक कानूनी आलोचना
अरावली पहाड़ियों को फिर से परिभाषित करनानवंबर 2025 में, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने औपचारिक रूप से अरावली पहाड़ियों की एक समान परिभाषा को स्वीकार कर लिया, जैसा कि केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुशंसित था। इस परिभाषा के अनुसार, आसपास के इलाके से 100 मीटर की न्यूनतम सापेक्ष राहत प्रदर्शित करने वाले केवल भू-रूप "अरावली पहाड़ियों" के रूप में योग्य हैं। यह न्यायिक समर्थन पर्यावरण शासन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो भारत की सबसे प्राचीन और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील पर्वत...
लोकतंत्र और अकादमिक अनुशासन में संतुलन ज़रूरी: छात्र संघ चुनावों पर राजस्थान हाईकोर्ट के भविष्यगत दिशा-निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि छात्र लोकतंत्र और अकादमिक अनुशासन एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं बल्कि दोनों का संतुलन ही उच्च शिक्षा संस्थानों की मजबूती का आधार है। कोर्ट ने 2025-26 के लिए छात्र संघ चुनाव न कराए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया, लेकिन साथ ही भविष्य के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए।जस्टिस समीर जैन ने कहा कि याचिकाकर्ता छात्रों के पास इस मामले में लोकस स्टैंडी नहीं है...
1995 धोखाधड़ी मामले में NCP नेता माणिकराव कोकाटे की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई आंशिक रोक, विधायक पद से अयोग्यता पर फिलहाल राहत
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) अजित पवार गुट) के सीनियर नेता माणिकराव कोकाटे को बड़ी राहत देते हुए वर्ष 1995 के एक धोखाधड़ी मामले में उनकी दोषसिद्धि पर आंशिक रूप से रोक लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस रोक का प्रभाव केवल इतना होगा कि कोकाटे को विधायक के रूप में अयोग्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि यह आदेश उन्हें किसी लाभ के पद पर बने रहने का अधिकार नहीं देगा।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने यह आदेश...
Right to be Forgotten पर टकराव: इंडियन कानून ने लेख हटाने के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
कानूनी सर्च इंजन इंडियन कानून ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसे एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूरी तरह बरी किए गए व्यक्ति से जुड़ी खबरें और यूआरएल हटाने का निर्देश दिया गया। ट्रायल कोर्ट ने यह आदेश आरोपी के 'राइट टू बी फॉरगॉटन' यानी भुला दिए जाने के अधिकार को स्वीकार करते हुए पारित किया।इस मामले में जस्टिस अनिश दयाल ने इंडियन कानून की अपील पर नोटिस जारी किया। इंडियन कानून की ओर से अधिवक्ता अपार गुप्ता और नमन कुमार पेश हुए जबकि सीनियर एडवोकेट...
गैंगस्टर एक्ट के नाम पर चयनात्मक कार्रवाई से कानून का राज कमजोर: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं असामाजिक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत जांच और अभियोजन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि चयनात्मक जांच और चयनात्मक अभियोजन कानून के शासन के विरुद्ध है और इससे शासन व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर होता है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि प्रभावशाली और संगठित अपराध से जुड़े लोग जमानत की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन करते हैं और अदालतों में बार-बार स्थगन लिया जाता है, जबकि अभियोजन तंत्र उन्हें प्रभावी ढंग से चुनौती देने में विफल रहता है।जस्टिस...
एकल अभिभावक की देखभाल क्षमता को लैंगिक नजरिए से आंकना अनुचित: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट के समक्ष लंबित मामलों का निपटारा करते समय किसी एकल अभिभावक की देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों और चुनौतियों का आकलन लैंगिक दृष्टिकोण से करना न तो उचित है और न ही कानूनी रूप से स्वीकार्य। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे की देखभाल की भूमिका चाहे मां निभाए या पिता उससे जुड़ी भावनात्मक, मानसिक और भौतिक जिम्मेदारियां समान होती हैं और केवल इस आधार पर कि देखभालकर्ता पिता है उसके प्रयासों को कमतर नहीं आंका जा सकता।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह टिप्पणी ऐसे मामले में की,...
प्रशासन की कानून से अनभिज्ञता अदालतों पर बोझ बढ़ा रही है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बार सरकारी प्राधिकरण कानून की स्थिति से अनभिज्ञ रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप अदालतों में अनावश्यक मुकदमों की बाढ़ आ जाती है और कोर्ट का रोस्टर अवरुद्ध हो जाता है। अदालत ने कहा कि इस तरह की लापरवाही न केवल न्यायिक समय की बर्बादी है बल्कि आम नागरिकों को भी अनावश्यक रूप से मुकदमेबाजी के लिए मजबूर करती है।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें एक अशिक्षित याचिकाकर्ता ने अपनी ही संविदात्मक अनुकंपा नियुक्ति को चुनौती देते हुए...
राष्ट्रपति के संदर्भ पर फैसले के बाद अनुत्तरित सवाल
तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल में निर्णय दिए गए अधिकांश कानूनी मुद्दों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2025 के राष्ट्रपति संदर्भ पर अपनी सलाहकारी राय में फिर से देखा गया था। अनुच्छेद 143 के तहत कार्य करने वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने एक ऐसी राय दी जिसमें पूर्ववर्ती मूल्य है, जिसने कुछ हद तक तमिलनाडु राज्य में निर्धारित कानून को खारिज कर दिया। हालांकि, एक सलाहकारी राय के रूप में, यह उस मामले में डिवीजन बेंच द्वारा जारी अंतिम निर्णय या ऑपरेटिव निर्देशों को नहीं बदलता है।दोनों के बीच तुलना से...
S. 482 CrPC | FIR रद्द करने से मना करते हुए हाईकोर्ट को 'गिरफ्तारी नहीं' की सुरक्षा नहीं देनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें FIR रद्द करने से इनकार किया था। साथ ही जांच पूरी करने के लिए एक तय समय सीमा तय की गई थी और आरोपी को संज्ञान लिए जाने तक गिरफ्तारी से सुरक्षा दी गई थी।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने नीहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड बनाम महाराष्ट्र राज्य, (2021) 19 SCC 401 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि FIR रद्द करने की याचिका खारिज करते समय "गिरफ्तारी नहीं" या "कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं" के आदेश देना, बिना सख्त...
दिल्ली हाईकोर्ट ने यौन अपराधों में पीड़ित मुआवजे के दुरुपयोग पर चिंता जताई, प्रभावी कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश जारी किए
दिल्ली हाईकोर्ट ने यौन अपराधों के मामलों में कुछ पीड़ितों को मिले मुआवजे के दुरुपयोग पर चिंता जताई और पीड़ित मुआवजा तंत्र के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश जारी किए।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि FIR दर्ज होने के बाद पीड़ित को अंतरिम मुआवजा दिया जाता है, लेकिन बाद में पीड़ित अपने आरोपों से पीछे हट सकती है, समझौता कर सकती है, या FIR या कार्यवाही रद्द करने की मांग कर सकती है।कोर्ट ने कहा,"ऐसी स्थितियों में अक्सर यह पाया जाता है कि पहले से दिया गया अंतरिम मुआवजा न तो पीड़ित द्वारा वापस...
NCR राज्यों में क्षेत्राधिकार की कमियों का फायदा उठा रहे हैं हार्डकोर अपराधी: सुप्रीम कोर्ट ने उठाया मुद्दा
दिल्ली-NCR में क्षेत्राधिकार की कमियों पर गंभीर चिंता जताते हुए, जो संगठित अपराधियों को आपराधिक न्याय प्रणाली का फायदा उठाने की अनुमति देती हैं, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक प्रभावी कानूनी तंत्र की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया ताकि अंतर-राज्य जटिलताओं को दूर किया जा सके, जो केंद्रीय दंड कानूनों के तहत गंभीर अपराधों में अक्सर मुकदमों में बाधा डालती हैं।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ केंद्रीय दंड कानूनों के तहत मुकदमों के लिए विशेष अदालतों के गठन से...
CrPC की धारा 311 की शक्ति का इस्तेमाल कम ही किया जाना चाहिए, सिर्फ़ तभी जब सच जानने के लिए सबूत बहुत ज़रूरी हों: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें प्रॉसिक्यूशन को CrPC की धारा 311 के तहत 11 साल की लड़की को दोबारा बुलाने की इजाज़त दी गई। कोर्ट ने कहा कि इस प्रावधान का इस्तेमाल कम ही किया जाना चाहिए और सिर्फ़ तभी जब सच का पता लगाने के लिए सबूत बहुत ज़रूरी हों।यह देखते हुए कि यह एप्लीकेशन 21 गवाहों की जांच के बाद और ट्रायल के आखिरी स्टेज में बिना किसी देरी की वजह बताए दायर की गई, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस ए.जी. मसीह की बेंच ने पाया कि प्रॉसिक्यूशन यह साबित करने में नाकाम रहा कि...
यूपी पुलिस ने धर्मांतरण मामले में FIR और चार्जशीट में यूपी कानून की जगह गलती से छत्तीसगढ़ कानून लगाया: हाईकोर्ट ने कार्रवाई के निर्देश दिए
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में यूपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए, जिन्होंने गलती से यूपी गैर-कानूनी धर्मांतरण निषेध अधिनियम, 2021 की जगह छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 के तहत FIR दर्ज की और उसके बाद चार्जशीट दाखिल की।जस्टिस राजीव सिंह की बेंच ने न सिर्फ सीतापुर के पुलिस अधीक्षक (SP) को चार्जशीट वापस कर दी, बल्कि संबंधित कोर्ट द्वारा पारित संज्ञान आदेश को भी रद्द कर दिया।संक्षेप में मामला2022 में सीतापुर के धर्मांतरण मामले में नैमिश गुप्ता की शिकायत पर...
प्रिंसिपल एम्प्लॉयर और कॉन्ट्रैक्टर के ज़रिए रखे गए मज़दूर के बीच कोई मालिक-कर्मचारी संबंध नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
जस्टिस रेनू भटनागर की बेंच वाली दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि कॉन्ट्रैक्टर के ज़रिए रखा गया मज़दूर प्रिंसिपल एम्प्लॉयर का कर्मचारी नहीं होता, अगर दावा करने वाला व्यक्ति विश्वसनीय सबूतों के साथ सीधा मालिक-कर्मचारी संबंध साबित करने में नाकाम रहता है।मामले के तथ्यमज़दूर 2001 से इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) में ड्राइववे सेल्स मैन (DSM) के तौर पर काम कर रहा था। उसे 2005 में नौकरी से निकाल दिया गया। उसने दावा किया कि उसकी सेवाएं इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट का पालन किए बिना गैर-कानूनी तरीके से...
पत्नी YouTube से करती है कमाई, उसे भरण-पोषण की ज़रूरत नहीं: हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें पत्नी का मेंटेनेंस का आवेदन सिर्फ़ इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि वह एक यूट्यूबर है और 'रील्स' से कमाती है।जस्टिस हरवीर सिंह की बेंच ने पाया कि फैमिली कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा कि पत्नी बिना किसी असल आकलन के अपना खर्च खुद उठा सकती है।कोर्ट ने आगे कहा कि जब तक पार्टियों की आय को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) या पे स्लिप जैसे दस्तावेज़ी सबूतों से तय नहीं किया जाता, तब तक भरण-पोषण की याचिका पर फैसला नहीं किया जा सकता।आगे कहा गया,"जब...
पति की मौत के बाद ससुराल वालों की मर्ज़ी पर दुल्हन के नाबालिग होने के कारण हिंदू शादी को अमान्य घोषित नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act) के तहत एक हिंदू शादी को ससुराल वालों की मर्ज़ी पर शादी के समय दुल्हन के नाबालिग होने का दावा करके बाद में अमान्य घोषित नहीं किया जा सकता।हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 5 का उप-खंड (iii) यह शर्त रखता है कि हिंदू शादी के लिए दूल्हे की उम्र 21 साल और दुल्हन की उम्र 18 साल होनी चाहिए। अधिनियम की धारा 11 अमान्य शादियों के बारे में बताती है, जहां धारा 5 के उप-खंड (i), (ii) और (iv) का उल्लंघन शादी को अमान्य घोषित...
फेन्सेडिल कफ सिरप की अवैध बिक्री के आरोप में गिरफ्तार किए गए विभोर राणा को मिली अंतरिम जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार (18 दिसंबर) को फेन्सेडिल कफ सिरप की कथित अवैध बिक्री के आरोप में बुक किए गए विभोर राणा को इस आधार पर अंतरिम जमानत दी कि FIR में उसका नाम नहीं था, उसका नाम केवल सह-आरोपियों के कबूलनामे में सामने आया और तलाशी के दौरान उससे कोई बरामदगी नहीं हुई।आवेदक कथित तौर पर अपने कर्मचारियों की बैंक ID और पासवर्ड का इस्तेमाल करके फेन्सेडिल कफ सिरप की अवैध बिक्री में शामिल है। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि आवेदक अन्य आरोपियों के साथ भारत के विभिन्न हिस्सों और यहां तक कि...



















