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“सरकार अपनी ही नीति के विरुद्ध कार्य नहीं कर सकती” : सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तियों के नाम पर राजस्थान के गांवों का नामकरण किया रद्द
“सरकार अपनी ही नीति के विरुद्ध कार्य नहीं कर सकती” : सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तियों के नाम पर राजस्थान के गांवों का नामकरण किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए यह स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार ने अपनी ही बाध्यकारी नीति (binding policy) का उल्लंघन किया है, जब उसने नए बनाए गए राजस्व गांवों के नाम निजी व्यक्तियों के नाम पर रखे। कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के सिंगल जज के आदेश को बहाल करते हुए ऐसे नामकरण को रद्द कर दिया।मामले की पृष्ठभूमियह विवाद राजस्थान के बाड़मेर जिले के सोहड़ा गांव से जुड़ा है। राज्य सरकार ने 31 दिसंबर 2020 को राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 16 के तहत एक अधिसूचना जारी कर...

एकल बोली के आधार पर ई-नीलामी रद्द नहीं कर सकता राजस्थान हाउसिंग बोर्ड: हाईकोर्ट
एकल बोली के आधार पर ई-नीलामी रद्द नहीं कर सकता राजस्थान हाउसिंग बोर्ड: हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि केवल इस आधार पर कि किसी ई-नीलामी में एक ही बोलीदाता शामिल हुआ राजस्थान हाउसिंग बोर्ड नीलामी को रद्द नहीं कर सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि जब बोलीदाता ने सभी निर्धारित शर्तों का विधिवत पालन किया हो तब प्रतिस्पर्धा की कमी या एकल बोली को नीलामी रद्द करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।जस्टिस नूपुर भाटी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थीं जिसमें याचिकाकर्ता ने राजस्थान हाउसिंग बोर्ड द्वारा आयोजित ई-नीलामी में एक व्यावसायिक भूखंड के लिए सबसे ऊंची बोली लगाई...

हुक या क्रुक से जीतने वाला सामान्य पक्षकार नहीं है सरकार: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की आक्रामक मुकदमेबाजी पर कड़ी फटकार, 1 लाख का जुर्माना
हुक या क्रुक से जीतने वाला सामान्य पक्षकार नहीं है सरकार: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की आक्रामक मुकदमेबाजी पर कड़ी फटकार, 1 लाख का जुर्माना

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की आक्रामक और गैर-जिम्मेदाराना मुकदमेबाजी पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि सरकार कोई साधारण वादी नहीं है, जो अपने ही नागरिक के खिलाफ किसी भी तरह से मामला जीतने की कोशिश करे।अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य का दायित्व न्यायपूर्ण आचरण का है न कि तकनीकी दांव-पेंच अपनाकर कमजोर पक्ष पर अनुचित बढ़त हासिल करने का।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ एक सिविल रिव्यू याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के खिलाफ...

हाईकोर्ट ने कोलकाता में मेसी इवेंट में हुई गड़बड़ी की जांच में दखल देने से किया इनकार, कहा- SIT और जांच पैनल काम जारी रख सकते हैं
हाईकोर्ट ने कोलकाता में मेसी इवेंट में हुई गड़बड़ी की जांच में दखल देने से किया इनकार, कहा- SIT और जांच पैनल काम जारी रख सकते हैं

कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को 13 दिसंबर, 2025 को सॉल्ट लेक स्टेडियम में लियोनेल मेसी के कार्यक्रम में हुई अफरा-तफरी से जुड़ी तीन PIL पर अंतरिम राहत देने से इनकार किया। शुभेंदु अधिकारी सहित याचिकाकर्ताओं ने टिकटों की कालाबाजारी, सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और राजनीतिक संरक्षण का आरोप लगाते हुए जांच को किसी स्वतंत्र/केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की मांग की थी।एक्टिंग चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की बेंच ने कहा कि राज्य द्वारा नियुक्त जांच समिति प्रथम दृष्टया वैध है, यह देखते हुए कि एक...

BNS | सोसाइटी गेट, स्कूल बस स्टॉप पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने से रोकना गलत रोक नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट
BNS | सोसाइटी गेट, स्कूल बस स्टॉप पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने से रोकना 'गलत रोक' नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते फैसला सुनाया कि अगर कोई व्यक्ति हाउसिंग सोसायटी की ज़रूरी जगहों जैसे एंट्री/एग्जिट पॉइंट, स्कूल बस स्टॉप वगैरह पर आवारा कुत्तों को खाना खिला रहा है, जो 'तय जगहें' नहीं हैं, उसे दूसरे सोसाइटी मेंबर खाना खिलाने से रोकते हैं तो वह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126 (गलत रोक) के तहत शिकायत दर्ज नहीं कर सकता।जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे और जस्टिस संदेश पाटिल की डिवीजन बेंच ने पुणे के हिंजेवाड़ी इलाके की सोसाइटी के रहने वाले अयप्पा स्वामी के खिलाफ दर्ज फर्स्ट इंफॉर्मेशन...

Mumbai Air Pollution: बुलेट ट्रेन, मेट्रो लाइन 2B, नई हाईकोर्ट साइट प्रदूषण फैलाने वालों में शामिल- हाईकोर्ट
Mumbai Air Pollution: बुलेट ट्रेन, मेट्रो लाइन 2B, नई हाईकोर्ट साइट प्रदूषण फैलाने वालों में शामिल- हाईकोर्ट

मुंबई और नवी मुंबई में कई कंस्ट्रक्शन साइट्स पर हवा प्रदूषण रोकने के दिशानिर्देशों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन होने की जानकारी मिलने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को मौखिक रूप से नागरिक अधिकारियों से ऐसे सभी उल्लंघन करने वालों को 'काम रोकने के नोटिस' जारी करने को कहा, जिसमें बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट, मेट्रो 2B लाइन, प्रस्तावित नई हाईकोर्ट बिल्डिंग वगैरा की कंस्ट्रक्शन साइट्स शामिल हैं।चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की डिवीजन बेंच को हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त चार सदस्यीय कमेटी द्वारा...

हत्या सामाजिक बदला नहीं थी, दोषी 60 साल से ज़्यादा उम्र का: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सिर काटने के मामले में मौत की सज़ा कम की
'हत्या सामाजिक बदला नहीं थी, दोषी 60 साल से ज़्यादा उम्र का': पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सिर काटने के मामले में मौत की सज़ा कम की

यह देखते हुए कि हत्या परिवार की संपत्ति के विवाद से पैदा हुई निजी दुश्मनी के कारण हुई थी, न कि "सामाजिक बदले" के कारण, साथ ही दोषी 60 साल से ज़्यादा उम्र का है और उसका हिंसक व्यवहार का कोई इतिहास नहीं है, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने छोटे भाई की हत्या और सिर काटने के दोषी एक व्यक्ति की मौत की सज़ा कम कर दी है।भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 और 201 के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए कोर्ट ने पाया कि यह मामला मौत की सज़ा के लिए "दुर्लभ से दुर्लभतम" श्रेणी में नहीं आता है। इसके बजाय दोषी को...

मीडिया फर्मों से एडवरटाइजिंग एजेंसी को मिलने वाले परफॉर्मेंस इंसेंटिव पर टैक्स नहीं लगेगा: दिल्ली हाईकोर्ट
मीडिया फर्मों से एडवरटाइजिंग एजेंसी को मिलने वाले परफॉर्मेंस इंसेंटिव पर टैक्स नहीं लगेगा: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ किया कि बेंचमार्क टारगेट हासिल करने के लिए मीडिया फर्मों से एडवरटाइजिंग एजेंसी को मिलने वाले इंसेंटिव पर सर्विस टैक्स नहीं लगेगा।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की डिवीजन बेंच ने कहा,“एक एडवरटाइजिंग एजेंसी मुख्य रूप से अपने क्लाइंट्स की ओर से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर स्लॉट बुक करती है और प्रिंट मीडिया में जगह बुक करती है। एडवरटाइजिंग प्लान पर मीडिया हाउस के साथ एडवरटाइजिंग एजेंसी की मदद से बातचीत की जाती है। आखिर में क्लाइंट्स द्वारा अप्रूव किया जाता है।...

सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स, लखनऊ इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट के तहत इंडस्ट्री नहीं: हाईकोर्ट
सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स, लखनऊ इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट के तहत 'इंडस्ट्री' नहीं: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स, लखनऊ, इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 की धारा 2(j) के तहत इंडस्ट्री नहीं है। बता दें, उक्त प्लांट्स काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च, नई दिल्ली का हिस्सा/संस्थान है।1947 के एक्ट के तहत 'इंडस्ट्री' की परिभाषा इस प्रकार है:"2(j) "इंडस्ट्री" का मतलब कोई भी बिजनेस, ट्रेड, काम, मैन्युफैक्चरर या मालिकों का पेशा है। इसमें कर्मचारियों का कोई भी पेशा, सर्विस, रोजगार, हस्तशिल्प, या इंडस्ट्री का काम या...

अजमेर शरीफ दरगाह पर प्रधानमंत्री द्वारा चादर चढ़ाने की परंपरा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
अजमेर शरीफ दरगाह पर प्रधानमंत्री द्वारा 'चादर' चढ़ाने की परंपरा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें इस्लामी विद्वान और सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और/या अजमेर शरीफ दरगाह को केंद्र सरकार व उसकी संस्थाओं द्वारा दिए जा रहे राज्य-प्रायोजित औपचारिक सम्मान और प्रतीकात्मक मान्यता को चुनौती दी गई है।याचिका में यह भी मांग की गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाने की परंपरा पर रोक लगाई जाए। यह मामला आज चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष उल्लेख किया गया, लेकिन अदालत ने तत्काल सुनवाई से...

विदेश यात्रा का अधिकार: जमानत शर्त का उल्लंघन होने पर पासपोर्ट ज़ब्ती का आदेश राजस्थान हाईकोर्ट ने किया रद्द
विदेश यात्रा का अधिकार: जमानत शर्त का उल्लंघन होने पर पासपोर्ट ज़ब्ती का आदेश राजस्थान हाईकोर्ट ने किया रद्द

राजस्थान हाईकोर्ट ने विदेश यात्रा की अनुमति लिए बिना देश छोड़ने के कारण बेल शर्तों के उल्लंघन पर पासपोर्ट ज़ब्त किए गए एक आरोपी को राहत दी। न्यायालय ने कहा कि ऐसे हालात में पासपोर्ट को लगातार ज़ब्त रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा।जस्टिस अनूप कुमार ढांढ की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता का कृत्य अनुचित था और यह अदालत के आदेश की अवहेलना के समान है। कोर्ट ने टिप्पणी की, “अदालत के आदेशों की अवहेलना कानून के शासन की नींव पर प्रहार...

जमानत याचिका और कानून की संवैधानिक वैधता को एक साथ चुनौती देने वाली पैकेज याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जमानत याचिका और कानून की संवैधानिक वैधता को एक साथ चुनौती देने वाली 'पैकेज याचिका' पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने आज जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उन याचिकाओं की कड़ी आलोचना की, जिनमें आरोपी एक ही याचिका में जमानत की मांग के साथ-साथ किसी कानून की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती देता है, ताकि निचली अदालतों को दरकिनार कर सीधे शीर्ष अदालत का रुख किया जा सके।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ Supreme Court में यह टिप्पणी उस याचिका पर की गई, जो प्रधुमनसिंह प्रविनसिंह राठौड़ द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग के साथ-साथ गुजरात...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोऑपरेटिव सोसाइटी चुनाव विवाद में आर्बिट्रेटर के आदेशों पर सिंगल जज के स्टे पर सुनाया खंडित फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोऑपरेटिव सोसाइटी चुनाव विवाद में आर्बिट्रेटर के आदेशों पर सिंगल जज के स्टे पर सुनाया खंडित फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की एक डिवीजन बेंच ने सिंगल जज के एक आदेश को चुनौती देने के खिलाफ खंडित फैसला सुनाया, जिसमें सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट, जो एक आर्बिट्रेटर के तौर पर काम कर रहे है, उनके आदेश पर रोक लगा दी गई थी। इस आदेश से उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव सोसाइटी एक्ट 1965 के तहत बहुजन निर्बल वर्ग सहकारी गृह निर्माण समिति लिमिटेड (याचिकाकर्ता) के चुनाव परिणाम पर रोक लगा दी गई।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार की बेंच इस मामले से निपटने में सिंगल जज के अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल पर सहमत नहीं...

पूरी तरह से धार्मिक या स्वैच्छिक नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने धर्मार्थ ट्रस्ट को इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट के तहत इंडस्ट्री माना
पूरी तरह से धार्मिक या स्वैच्छिक नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने धर्मार्थ ट्रस्ट को इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट के तहत 'इंडस्ट्री' माना

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख के हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जम्मू-कश्मीर धर्मार्थ ट्रस्ट अपनी गतिविधियों के व्यवस्थित, संगठित और व्यावसायिक स्वरूप के कारण इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947 के तहत "इंडस्ट्री" की कानूनी परिभाषा को पूरा करता है।जस्टिस एम ए चौधरी ने फैसला सुनाया कि ट्रस्ट के संचालन को पूरी तरह से धार्मिक या आध्यात्मिक नहीं माना जा सकता है, जो निस्वार्थ और स्वैच्छिक तरीके से किए जाते हैं। इसलिए वे श्रम कानून सुरक्षा के अधीन हैं।यह फैसला धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा दायर रिट याचिका खारिज करते...

पति के परिवार वालों द्वारा यौन उत्पीड़न भी IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का एक रूप है, इसके लिए अलग ट्रायल की ज़रूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
पति के परिवार वालों द्वारा यौन उत्पीड़न भी IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का एक रूप है, इसके लिए अलग ट्रायल की ज़रूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पति के परिवार वालों द्वारा पत्नी पर किया गया यौन उत्पीड़न भी भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 498A के तहत क्रूरता का एक रूप है और इसके लिए अलग ट्रायल की ज़रूरत नहीं है।जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि अगर पत्नी ऐसे परिवार वालों के खिलाफ आरोप लगाती है तो यह धारा 498A में बताई गई शारीरिक क्रूरता का भी हिस्सा हो सकता है।कोर्ट ने साफ किया कि IPC की धारा 498A और 376 के तहत दोनों अपराध इस तरह से जुड़े होने चाहिए कि वे "एक ही लेन-देन बनाने के लिए एक साथ जुड़े हुए...

पासपोर्ट पहचान का भी ज़रिया, इसे जमा करने की ज़मानत की शर्त रूटीन तरीके से नहीं लगाई जा सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पासपोर्ट पहचान का भी ज़रिया, इसे जमा करने की ज़मानत की शर्त रूटीन तरीके से नहीं लगाई जा सकती: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट ज़मानत देते समय रूटीन तरीके से यह देखते हुए पासपोर्ट जमा करने की शर्त नहीं लगा सकते कि "पासपोर्ट न केवल यात्रा दस्तावेज़ के रूप में ज़रूरी है, बल्कि अन्य उद्देश्यों के लिए भी ज़रूरी है, खासकर पहचान के साधन के रूप में।"ज़मानत की शर्त को चुनौती देने वाली एक याचिका को मंज़ूर करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपने पासपोर्ट जमा करने का निर्देश देने वाली शर्त रद्द की। साथ ही यह भी अनिवार्य किया कि वे विदेश यात्रा करने से पहले ट्रायल कोर्ट से पहले अनुमति...

जमानत पर रहते हुए गवाह का मर्डर करने वाले आरोपी को हाईकोर्ट ने दी जमानत: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया आदेश, कहा- स्पष्ट रूप से गलत
जमानत पर रहते हुए गवाह का मर्डर करने वाले आरोपी को हाईकोर्ट ने दी जमानत: सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया आदेश, कहा- 'स्पष्ट रूप से गलत'

सुप्रीम कोर्ट ने मर्डर केस में आरोपी को ज़मानत देने वाले मद्रास हाईकोर्ट का आदेश यह देखते हुए रद्द कर दिया कि ज़मानत देने का आदेश गलत, मनमाना और बिना सोचे-समझे दिया गया।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के एक आदेश के खिलाफ अपील सुन रही थी, जिसने हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी को इस बात पर विचार किए बिना ज़मानत दी कि उन पर पहले ज़मानत पर रहते हुए एक मुख्य चश्मदीद गवाह की हत्या का भी आरोप है।यह मामला 24 फरवरी, 2020 की एक घटना से जुड़ा है, जब कथित तौर...