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नॉन-कम्पीट फीस को इनकम टैक्स एक्ट की धारा 37(1) के तहत रेवेन्यू खर्च के तौर पर घटाया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
नॉन-कम्पीट फीस को इनकम टैक्स एक्ट की धारा 37(1) के तहत रेवेन्यू खर्च के तौर पर घटाया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नॉन-कम्पीट फीस का पेमेंट करने से किसी कैपिटल एसेट का अधिग्रहण नहीं होता या बिजनेस के प्रॉफिट कमाने के स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं होता। इसे इनकम टैक्स एक्ट, 1961 (Income Tax Act) की धारा 37(1) के तहत रेवेन्यू खर्च के तौर पर अनुमति दी जा सकती है।कोर्ट ने कहा,“इस तरह नॉन-कम्पीट फीस सिर्फ बिजनेस की प्रॉफिटेबिलिटी को बचाने या बढ़ाने की कोशिश करती है, जिससे बिजनेस को ज़्यादा कुशलता से और प्रॉफिट के साथ चलाने में मदद मिलती है। ऐसे पेमेंट से न तो कोई नई एसेट बनती है और न ही...

क्या आरोपी सेशंस कोर्ट जाए बिना नए सबूतों के आधार पर सीधे हाईकोर्ट में लगातार जमानत याचिका दायर कर सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जवाब
क्या आरोपी सेशंस कोर्ट जाए बिना नए सबूतों के आधार पर सीधे हाईकोर्ट में लगातार जमानत याचिका दायर कर सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि दूसरी जमानत याचिका, या लगातार जमानत याचिकाएं, हाईकोर्ट द्वारा ट्रायल के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों के आधार पर सुनी जा सकती हैं, भले ही ये सबूत सेशंस कोर्ट या हाईकोर्ट के पास तब उपलब्ध न हों जब पिछली जमानत याचिका खारिज की गई थी।हालांकि, जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने साफ किया कि सही मामलों में हाईकोर्ट आवेदक-आरोपी को नए सबूतों के आधार पर सेशंस कोर्ट के सामने लगातार जमानत याचिकाएं दायर करने का निर्देश दे सकता है।संक्षेप में मामलाकोर्ट ने साफ किया कि...

पटना हाईकोर्ट ने CBI बनाम मीर उस्मान मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद स्पीडी ट्रायल के लिए गाइडलाइंस जारी की
पटना हाईकोर्ट ने CBI बनाम मीर उस्मान मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद स्पीडी ट्रायल के लिए गाइडलाइंस जारी की

12 दिसंबर 2025 को जारी सर्कुलर में पटना हाईकोर्ट ने सभी ट्रायल कोर्ट को प्रशासनिक निर्देश जारी किए, जिनका मकसद सुनवाई को तेज़ी से पूरा करना है।यह सर्कुलर CBI बनाम मीर उस्मान मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पालन में जारी किया गया। इसमें साफ तौर पर SLP (Crl.) नंबर 969/2025 (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन बनाम मीर उस्मान @ आरा @ मीर उस्मान अली) में 22 सितंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पैराग्राफ 37 का ज़िक्र है, जिसमें कोर्ट ने हाईकोर्ट को ट्रायल कोर्ट्स के लिए उचित प्रशासनिक गाइडलाइंस...

[Bihar Excise Act] अगर सह-यात्री के पास शराब मिलती है तो मोटरसाइकिल मालिक के खिलाफ कोई अनुमान नहीं: पटना हाईकोर्ट
[Bihar Excise Act] अगर सह-यात्री के पास शराब मिलती है तो मोटरसाइकिल मालिक के खिलाफ कोई अनुमान नहीं: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जहां अवैध शराब सह-आरोपी व्यक्ति से बरामद की जाती है, न कि वाहन के किसी हिस्से से, तो यह नहीं कहा जा सकता कि मोटरसाइकिल का इस्तेमाल बिहार निषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम (Bihar Excise Act) के तहत अपराध करने में किया गया। नतीजतन, अधिनियम की धारा 32 के तहत वाहन के मालिक के खिलाफ कानूनी अनुमान तब तक नहीं लगाया जा सकता, जब तक अभियोजन पक्ष यह साबित न कर दे कि वाहन का इस्तेमाल कथित अपराध करने में किया गया।पटना हाईकोर्ट की जस्टिस जितेंद्र कुमार की सिंगल जज बेंच...

कोर्ट की छुट्टियों के दौरान ज़रूरी मामलों पर 22 दिसंबर को सुनवाई करेगी स्पेशल वेकेशन बेंच
कोर्ट की छुट्टियों के दौरान ज़रूरी मामलों पर 22 दिसंबर को सुनवाई करेगी स्पेशल वेकेशन बेंच

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) ने चल रही कोर्ट की छुट्टियों के दौरान ज़रूरी मामलों की सुनवाई के लिए एक स्पेशल वेकेशन बेंच बनाई।इस बेंच में सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची शामिल होंगे। यह बेंच सोमवार, 22 दिसंबर, 2025 को उन मामलों पर सुनवाई करेगी, जिन पर तुरंत न्यायिक विचार की ज़रूरत है।यह स्पेशल सुनवाई इसलिए तय की गई ताकि छुट्टियों के दौरान ज़रूरी मामलों को टाला न जाए और उन्हें समय पर न्यायिक ध्यान मिले।सुप्रीम कोर्ट 19 दिसंबर से 5 जनवरी तक सर्दियों की छुट्टियों पर है। शुक्रवार को जब कई...

नेटफ्लिक्स-वार्नर ब्रदर्स मर्जर भारत के OTT मार्केट को कैसे बदल सकता है?
नेटफ्लिक्स-वार्नर ब्रदर्स मर्जर भारत के OTT मार्केट को कैसे बदल सकता है?

जब एक एकल मंच सामग्री के निर्माण और वितरण दोनों पर प्रभाव डालना शुरू कर देता है, तो कानून के प्रश्न अनिवार्य रूप से अनुसरण करते हैं। "इसलिए नेटफ्लिक्स के वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी के प्रस्तावित अधिग्रहण ने न केवल व्यावसायिक प्रभावों के कारण ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि यह निर्धारित करने में एक निर्णायक क्षण का प्रतिनिधित्व करता है कि प्रतिस्पर्धा कानून डिजिटल और रचनात्मक उद्योगों में इस तरह के अधिग्रहणों के साथ कैसे व्यवहार करेगा।" एक ही छतरी के नीचे व्यापक सामग्री पुस्तकालयों, उत्पादन क्षमता और...

बकाया बिक्री राशि जमा करने में मामूली देरी से विशिष्ट निष्पादन की डिक्री निष्प्रभावी नहीं होती: सुप्रीम कोर्ट
बकाया बिक्री राशि जमा करने में मामूली देरी से विशिष्ट निष्पादन की डिक्री निष्प्रभावी नहीं होती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि खरीदार समझौते को पूरा करने के लिए तैयार और इच्छुक बना रहता है तो बिक्री मूल्य की शेष राशि जमा करने में तय समय-सीमा से कुछ देरी मात्र से विशिष्ट निष्पादन (स्पेसिफिक परफॉर्मेंस) की डिक्री को निष्पादित न किए जाने योग्य नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने यह निर्णय देते हुए कहा कि असली कसौटी यह है कि क्या वादी का आचरण अनुबंध को पूरा करने से इनकार या उसे छोड़ने का संकेत देता है। अदालत ने अपने हालिया फैसले रामलाल बनाम जरनैल सिंह...

2007 अजमेर ब्लास्ट मामला: सुप्रीम कोर्ट ने देरी के बावजूद पीड़ित की अपील पर मेरिट के आधार पर फैसला करने को कहा
2007 अजमेर ब्लास्ट मामला: सुप्रीम कोर्ट ने देरी के बावजूद पीड़ित की अपील पर मेरिट के आधार पर फैसला करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने 2007 के अजमेर शरीफ दरगाह ब्लास्ट मामले में अहम आदेश देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट से कहा कि वह पीड़ित द्वारा दायर अपीलों पर देरी को नजरअंदाज करते हुए मामले के गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर फैसला करे। यह निर्देश उन अपीलों से संबंधित है, जिनमें कुछ आरोपियों को बरी किए जाने को चुनौती दी गई।जस्टिस एम. एम. सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने यह अंतरिम निर्देश अजमेर शरीफ दरगाह के खादिम और मामले के शिकायतकर्ता सैयद सरवर चिश्ती की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। सुप्रीम कोर्ट ने...

पति का माता-पिता को पैसे भेजना या खर्च का हिसाब मांगना क्रूरता नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने 498A का मामला किया रद्द
पति का माता-पिता को पैसे भेजना या खर्च का हिसाब मांगना 'क्रूरता' नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने 498A का मामला किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में आपराधिक कानून के दुरुपयोग पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए पति के खिलाफ दर्ज क्रूरता और दहेज उत्पीड़न का मामला रद्द किया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति द्वारा अपने माता-पिता और भाई को पैसे भेजना या पत्नी से घरेलू खर्चों का लेखा-जोखा रखने के लिए कहना अपने आप में न तो क्रूरता है और न ही इसे दहेज की मांग के रूप में देखा जा सकता है।जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने पति की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि ऐसे आरोपों के आधार पर आपराधिक...

MBBS सीट विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया हमदर्द को संबद्धता देने का आदेश रद्द किया
MBBS सीट विवाद: दिल्ली हाईकोर्ट ने जामिया हमदर्द को संबद्धता देने का आदेश रद्द किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने MBBS सीटों से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि निष्पादन न्यायालय (एग्जीक्यूटिंग कोर्ट) अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर न तो मध्यस्थता आदेश की व्याख्या कर सकता है और न ही किसी गैर-पक्षकार पर वैधानिक दायित्व थोप सकता है। अदालत ने जामिया हमदर्द डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी को 150 MBBS सीटों के लिए सहमति-पत्र (कंसेंट ऑफ एफिलिएशन) जारी करने के निर्देश को अवैध ठहराया।जस्टिस अनिल झेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने 17 दिसंबर को...

उच्च शिक्षण संस्थान अदला-बदली योग्य नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनावों में यूनिवर्सिटी के उपयोग पर ECI को जारी किए दिशा-निर्देश
उच्च शिक्षण संस्थान अदला-बदली योग्य नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनावों में यूनिवर्सिटी के उपयोग पर ECI को जारी किए दिशा-निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले यूनिवर्सिटी और कॉलेज फंजिबल यानी आसानी से बदले जा सकने वाले संसाधन नहीं हैं। अदालत ने निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिए कि जहां तक व्यावहारिक रूप से संभव हो आम चुनावों के दौरान यूनिवर्सिटी और कॉलेजों का उपयोग मतदान केंद्र, मतगणना स्थल या अन्य चुनावी उद्देश्यों के लिए न किया जाए।जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब अदालत के समक्ष शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए छात्रसंघ चुनाव न कराए जाने के कथित राज्य...

बाल तस्करी व नाबालिगों के यौन शोषण पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
बाल तस्करी व नाबालिगों के यौन शोषण पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

भारत में बाल तस्करी और व्यावसायिक यौन शोषण को एक “गंभीर और विचलित करने वाली वास्तविकता” बताते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 दिसंबर) को नाबालिग पीड़ितों की गवाही के मूल्यांकन को लेकर महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में पीड़िता की गवाही को मामूली विरोधाभासों या रूढ़िवादी सामाजिक धारणाओं के आधार पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस जोयमाल्य बागची की खंडपीठ ने यह दिशानिर्देश बेंगलुरु के एक व्यक्ति और उसकी पत्नी को नाबालिग लड़की की तस्करी और यौन...

लाइसेंस की अवधि खत्म होने के बाद नवीनीकरण पिछली तारीख से प्रभावी नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
लाइसेंस की अवधि खत्म होने के बाद नवीनीकरण पिछली तारीख से प्रभावी नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड (TSLPRB) की पात्रता शर्तों की व्याख्या को सही ठहराते हुए यह स्पष्ट किया है कि जिन अभ्यर्थियों का ड्राइविंग लाइसेंस समाप्त हो गया था और बाद में अंतराल के बाद नवीनीकृत किया गया, उन्हें यह नहीं माना जा सकता कि उन्होंने निर्धारित अवधि के लिए लाइसेंस “लगातार” धारण किया था, भले ही नवीनीकरण वैधानिक अवधि के भीतर ही क्यों न किया गया हो।न्यायालय ने कहा कि पुलिस और अग्निशमन सेवा में ड्राइवर पदों की भर्ती के लिए अभ्यर्थी के पास अधिसूचना की तिथि तक...

ट्रायल कोर्ट के रिन्यूअल की इजाज़त देने पर क्रिमिनल केस के पेंडिंग होने का हवाला देकर पासपोर्ट रिन्यूअल से इनकार नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
ट्रायल कोर्ट के रिन्यूअल की इजाज़त देने पर क्रिमिनल केस के पेंडिंग होने का हवाला देकर पासपोर्ट रिन्यूअल से इनकार नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही के पेंडिंग होने का इस्तेमाल पासपोर्ट के रिन्यूअल पर अनिश्चितकालीन रोक लगाने के लिए नहीं किया जा सकता, खासकर जब सक्षम आपराधिक अदालतों ने विदेश यात्रा पर नियंत्रण रखते हुए ऐसे रिन्यूअल की इजाज़त दी हो।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने बिजनेसमैन महेश कुमार अग्रवाल द्वारा दायर अपील मंज़ूर करते हुए विदेश मंत्रालय और क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, कोलकाता को उनका सामान्य पासपोर्ट दस साल की सामान्य अवधि के लिए फिर से जारी करने का निर्देश...

हाईकोर्ट को अपने प्रशासन में निष्पक्ष होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने स्टाफ के रेगुलराइजेशन में भेदभाव के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को फटकारा
हाईकोर्ट को अपने प्रशासन में निष्पक्ष होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट ने स्टाफ के रेगुलराइजेशन में भेदभाव के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 दिसंबर) को इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें कुछ कर्मचारियों की सेवाओं को रेगुलर करते समय समान स्थिति वाले कर्मचारियों की सेवाओं को रेगुलर नहीं किया गया। कोर्ट ने हाईकोर्ट को याद दिलाया कि उसे अपने प्रशासन में संवैधानिक नैतिकता को बनाए रखने की अपनी ड्यूटी निभानी चाहिए।जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए और उनके तुरंत रेगुलराइजेशन और पूरे सर्विस बेनिफिट्स देने का निर्देश देते हुए कहा,"हाईकोर्ट,...