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भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 की धारा 70-72 : झूठी जानकारी के लिए दंड, नियम बनाने की शक्ति और सार्वजनिक सूचना देने का तरीका
भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 की धारा 70-72 : झूठी जानकारी के लिए दंड, नियम बनाने की शक्ति और सार्वजनिक सूचना देने का तरीका

भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के ये खंड फर्मों के पंजीकरण (Registration) से संबंधित अंतिम महत्वपूर्ण प्रावधानों पर प्रकाश डालते हैं। ये धाराएँ पंजीकरण प्रक्रिया में सत्यनिष्ठा (Integrity) बनाए रखने के लिए दंड का प्रावधान करती हैं, अधिनियम के प्रशासन (Administration) के लिए नियम बनाने की सरकार की शक्ति को परिभाषित करती हैं, और सार्वजनिक सूचना (Public Notice) देने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को निर्धारित करती हैं। ये प्रावधान समग्र रूप से यह सुनिश्चित करते हैं कि फर्मों का पंजीकरण और उनसे संबंधित...

भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 की धारा 63-67: फर्मों में परिवर्तनों का अभिलेखन, गलतियों का सुधार, और रिकॉर्ड का निरीक्षण
भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 की धारा 63-67: फर्मों में परिवर्तनों का अभिलेखन, गलतियों का सुधार, और रिकॉर्ड का निरीक्षण

भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के ये खंड पंजीकृत (Registered) फर्मों से संबंधित महत्वपूर्ण परिवर्तनों को आधिकारिक रूप से दर्ज करने, रजिस्ट्रार के पास उपलब्ध जानकारी में किसी भी गलती को सुधारने, और सार्वजनिक रिकॉर्ड के निरीक्षण (Inspection) व प्रतियों (Copies) के प्रावधानों को निर्धारित करते हैं। ये धाराएँ फर्मों के बारे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी की सटीकता, पारदर्शिता और पहुंच सुनिश्चित करती हैं, जो तीसरे पक्षों और फर्म के स्वयं के लिए महत्वपूर्ण है।धारा 63: फर्म में परिवर्तनों और विघटन...