हाईकोर्ट

महिलाएं पारिवारिक जीवन का केंद्र, जमानत के मामलों में उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रज्वल रेवन्ना की मां को अग्रिम जमानत देते हुए कहा
महिलाएं पारिवारिक जीवन का केंद्र, जमानत के मामलों में उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए: कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रज्वल रेवन्ना की मां को अग्रिम जमानत देते हुए कहा

कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रज्वल रेवन्ना की मां भवानी रेवन्ना को अग्रिम जमानत देते हुए कहा, "हमारे सामाजिक ढांचे में महिलाएं पारिवारिक जीवन का केंद्र हैं; उनका विस्थापन, भले ही थोड़े समय के लिए हो, आमतौर पर आश्रितों को परेशान करता है। इसके अलावा, वे भावनात्मक रूप से परिवार से जुड़ी होती हैं। इसलिए जांच एजेंसियों को उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने के मामले में बहुत सावधान रहना चाहिए।"जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित की एकल पीठ ने अग्रिम जमानत देते हुए कहा,"महिलाएं अपने स्वभाव से ही जमानत, नियमित या अग्रिम...

शिक्षक राष्ट्र का भाग्य गढ़ते हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं: कर्नाटक हाईकोर्ट
शिक्षक राष्ट्र का भाग्य गढ़ते हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक शिक्षिका द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया है और राज्य उच्च शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वह संस्थान में पूर्णकालिक व्याख्याता के रूप में उसके आमेलन के प्रबंधन के आदेश को प्रभावी करे। जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित और जस्टिस रामचंद्र डी हुड्डार की खंडपीठ ने विजयलक्ष्मी एच एस द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया और कहा कि “आमेलन से शिक्षकों को सेवा की अनुकूल परिस्थितियां प्राप्त होंगी और बदले में उनके कर्तव्यों के निर्वहन में उनकी रुचि बढ़ेगी। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि...

मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना असंज्ञेय अपराध की जांच अवैध; बाद में दी गई अनुमति महत्वहीन: इलाहाबाद हाईकोर्ट
मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना असंज्ञेय अपराध की जांच अवैध; बाद में दी गई अनुमति महत्वहीन: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सक्षम मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना पुलिस द्वारा असंज्ञेय अपराध की जांच करना अवैध है और मजिस्ट्रेट द्वारा बाद में दी गई अनुमति इस अवैधता को ठीक नहीं कर सकती। सीआरपीसी की धारा 155 की उपधारा (2) के तहत प्रावधान का हवाला देते हुए जस्टिस शमीम अहमद की पीठ ने कहा कि असंज्ञेय अपराध की जांच के लिए न्यायालय से अनुमति मांगना अनिवार्य प्रकृति का है और यदि ऐसी अनुमति नहीं ली जाती है, तो केवल मजिस्ट्रेट द्वारा आरोप पत्र स्वीकार कर लेना और अपराध का संज्ञान ले लेना...

1982 हत्याकांड | दोषपूर्ण जांच, ‌अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही में विरोधाभास: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा
1982 हत्याकांड | 'दोषपूर्ण' जांच, ‌अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही में 'विरोधाभास': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 1982 के एक हत्या के मामले में तीन आरोपियों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया कि मामले में दोषपूर्ण जांच ने पूरे अभियोजन मामले को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। जस्टिस राजीव गुप्ता और जस्टिस शिव शंकर प्रसाद की पीठ ने पी.डब्लू.-1 और पी.डब्लू.-2 की गवाही में कई विरोधाभासों को भी नोट किया, जो न्यायालय के अनुसार, पूरे अभियोजन मामले की उत्पत्ति के बारे में एक "बड़ा सवाल" उठाते हैं।न्यायालय ने आरोपियों [नागेंद्र सिंह, सहदेव सिंह और अशोक @ रंजीत] को बरी...

केरल हाईकोर्ट ने CMRL भुगतान मामले में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, बेटी वीना को नोटिस जारी किया
केरल हाईकोर्ट ने CMRL भुगतान मामले में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, बेटी वीना को नोटिस जारी किया

केरल हाईकोर्ट ने आज विधायक मैथ्यू ए कुझालनादन द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, बेटी वीना थाईकांडियिल और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया, जिसमें कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL) और वीना की कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस के बीच कथित अवैध वित्तीय लेन-देन की सतर्कता जांच की मांग करने वाली उनकी शिकायत को खारिज किए जाने के खिलाफ़ याचिका दायर की गई।विशेष न्यायाधीश (सतर्कता) ने 06 मई को शिकायत को खारिज किया था।जस्टिस के. बाबू ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार को सार्वजनिक रोजगार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए 1% आरक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार को सार्वजनिक रोजगार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए 1% आरक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट के NALSA दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य में सार्वजनिक रोजगार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए 1% आरक्षण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।जस्टिस राजशेखर मंथा की एकल पीठ ने कहा,“यह न्यायालय नोट करता है कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ एवं अन्य (2014) के अनुच्छेद 135 (3) के अनुसार राज्य में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अभी तक आरक्षण नहीं दिया गया। उन परिस्थितियों में यह न्यायालय पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव को राज्य में सभी...

भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम | बॉम्बे हाईकोर्ट की बड़ी पीठ यह तय करेगी कि क्या धारा 263 के अंतर्गत न आने वाले मामलों में वसीयत का प्रोबेट रद्द किया जा सकता है
भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम | बॉम्बे हाईकोर्ट की बड़ी पीठ यह तय करेगी कि क्या धारा 263 के अंतर्गत न आने वाले मामलों में वसीयत का प्रोबेट रद्द किया जा सकता है

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक बड़ी पीठ को यह प्रश्न भेजा कि क्या भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 263 के स्पष्टीकरण, जो उन आधारों से संबंधित हैं जिन पर वसीयत के प्रोबेट को “उचित कारण” के लिए रद्द या निरस्त किया जा सकता है, विस्तृत हैं या केवल उदाहरणात्मक हैं। जस्टिस मनीष पिताले ने निम्नलिखित प्रश्नों को बड़ी पीठ को भेजा – “(I) क्या भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 263 के स्पष्टीकरण (ए) से (ई) प्रोबेट या प्रशासन के पत्रों के अनुदान को रद्द या निरस्त करने के लिए “उचित कारण” के...

दिल्ली हाईकोर्ट ने आईएफएस महावीर सिंघवी की ओर से हिंदुस्तान टाइम्स के खिलाफ दायर मानहानि का मुकदमा खारिज किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने आईएफएस महावीर सिंघवी की ओर से हिंदुस्तान टाइम्स के खिलाफ दायर मानहानि का मुकदमा खारिज किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में 1999 बैच के आईएफएस महावीर सिंघवी द्वारा हिंदुस्तान टाइम्स अखबार के खिलाफ दायर दो मानहानि के मुकदमों को खारिज कर दिया। इन मुकदमों में 2002 में प्रकाशित दो समाचार रिपोर्टों को लेकर अंग्रेजी और हिंदी दोनों संस्करण शामिल थे। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने मुकदमों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों अखबारों में प्रकाशित लेख अपने आप में मानहानिकारक नहीं थे। न्यायालय ने कहा, "जनता के सूचना के अधिकार को मीडिया के सत्य रिपोर्टिंग के कर्तव्य और अपनी प्रतिष्ठा की सुरक्षा के व्यक्तिगत...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने असफल रिश्तों से उपजे बलात्कार के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के लिए जुर्माना लगाने के लिए सिस्टम की मांग की
बॉम्बे हाईकोर्ट ने असफल रिश्तों से उपजे बलात्कार के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के लिए जुर्माना लगाने के लिए सिस्टम की मांग की

इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि वयस्कों के बीच असफल रिश्तों से उपजे बलात्कार के मामले पुलिस और अदालतों दोनों का कीमती समय बर्बाद करते हैं, बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वाले व्यक्तियों पर भारी जुर्माना लगाने के लिए मजबूत सिस्टम की मांग की।जस्टिस पिताले ने मुंबई जैसे शहरी क्षेत्रों में ऐसे मामलों की बार-बार होने वाली प्रकृति पर प्रकाश डाला, जिससे कीमती समय की बर्बादी होती है जिसका उपयोग गंभीर अपराधों की जांच में किया जा सकता है।न्यायालय ने कहा,“समय बीतने के साथ...

गलत सजा आदेश के खिलाफ अपील न करने में राज्य की लापरवाही हाईकोर्ट को अपनी पुनर्विचार शक्तियों का प्रयोग करने से नहीं रोकती: सिक्किम हाईकोर्ट
गलत सजा आदेश के खिलाफ अपील न करने में राज्य की लापरवाही हाईकोर्ट को अपनी पुनर्विचार शक्तियों का प्रयोग करने से नहीं रोकती: सिक्किम हाईकोर्ट

सिक्किम हाईकोर्ट ने कहा कि वह दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 397 के तहत अपनी पुनर्विचार शक्ति का प्रयोग कर सकता है, जब ट्रायल कोर्ट ने किसी अपराध के लिए आरोपी को गलत तरीके से न्यूनतम निर्धारित सजा से कम की सजा सुनाई हो।जस्टिस मीनाक्षी मदन राय और जस्टिस भास्कर राज प्रधान की खंडपीठ ट्रायल कोर्ट द्वारा सामूहिक बलात्कार के लिए दोषी ठहराए जाने के खिलाफ आरोपियों/अपीलकर्ताओं की याचिका पर विचार कर रही थी। ट्रायल कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता 1860 (IPC) की धारा 376D के तहत सामूहिक बलात्कार के लिए...

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद तेलंगाना में नियमित रूप से निवारक निरोध लागू किया जाना खेदजनक: हाईकोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद तेलंगाना में नियमित रूप से निवारक निरोध लागू किया जाना खेदजनक: हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के कपड़ा व्यापारी के खिलाफ निरोध और उसके बाद की उद्घोषणा के आदेश को खारिज कर दिया, यह देखते हुए कि जिन दो मामलों के आधार पर निरोध आदेश पारित किया था, उनमें आरोपी को पहले ही जमानत दी जा चुकी है। यदि शर्तों का उल्लंघन किया जाता है तो राज्य जमानत रद्द करने की मांग करने के लिए स्वतंत्र है।जस्टिस के. लक्ष्मण और जस्टिस पी. श्री सुधा की खंडपीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा कि निरोध आदेश जारी करने का उद्देश्य अवैध गतिविधियों की पुनरावृत्ति को रोकना है।खंडपीठ ने यह भी बताया...

पुलिस को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि आरोपी पुलिस की इच्छानुसार जवाब देगा: कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपहरण मामले में प्रज्वल रेवन्ना की मां को अग्रिम जमानत दी
'पुलिस को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि आरोपी पुलिस की इच्छानुसार जवाब देगा': कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपहरण मामले में प्रज्वल रेवन्ना की मां को अग्रिम जमानत दी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रज्वल रेवन्ना की मां भवानी रेवन्ना को अग्रिम जमानत दी। उन पर महिला के अपहरण का आरोप है।जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित की एकल न्यायाधीश पीठ ने आदेश सुनाते हुए टिप्पणी की,"मैंने महिला को अनावश्यक या टालने योग्य हिरासत से बचाने में कदम आगे बढ़ाया है। हमारे सामाजिक ढांचे में वे परिवार का केंद्र हैं।"पीठ ने कहा कि हालांकि राज्य ने उनकी ओर से असहयोग का आरोप लगाया है, लेकिन भवानी रेवन्ना ने उनसे पूछे गए सभी 85 सवालों के जवाब दिए हैं।पीठ ने कहा,"पुलिस को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि आरोपी...

अग्रिम जमानत पर विचार करते समय अपराध की प्रकृति और गंभीरता को ध्यान में रखा गया: राजस्थान हाईकोर्ट ने पट्टों के जालसाजी के लिए राहत देने से इनकार किया
अग्रिम जमानत पर विचार करते समय अपराध की प्रकृति और गंभीरता को ध्यान में रखा गया: राजस्थान हाईकोर्ट ने पट्टों के जालसाजी के लिए राहत देने से इनकार किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने अजमेर विकास प्राधिकरण द्वारा कभी जारी नहीं किए गए पट्टों के जालसाजी के लिए पांच अलग-अलग एफआईआर के तहत आरोपित व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया और इन जाली पट्टों और दस्तावेजों को वितरित करने के लिए शिकायतकर्ताओं से लाखों रुपये लिए हैं।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा,“अग्रिम जमानत देने के लिए आवेदन पर विचार करते समय निस्संदेह न्यायालय को प्रासंगिक कारक के रूप में आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ध्यान में रखना होगा। हालांकि, साथ ही न्यायालय का यह कर्तव्य है कि वह...

दिव्यांगता अधिनियम के तहत आयुक्त किसी भी कर्मचारी के रिटायरमेंट पर रोक नहीं लगा सकते: राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया
दिव्यांगता अधिनियम के तहत आयुक्त किसी भी कर्मचारी के रिटायरमेंट पर रोक नहीं लगा सकते: राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया

राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस समीर जैन की पीठ ने दोहराया है कि दिव्यांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (Disabilities Act) के तहत आयुक्त को किसी कर्मचारी की सेवानिवृत्ति पर रोक लगाने के लिए अंतरिम निर्देश पारित करने का अधिकार नहीं है।न्यायालय राजस्थान लोक सेवा आयुक्त द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें दिव्यांगता अधिनियम के तहत आयुक्त द्वारा पारित आदेश इस आधार पर रद्द करने का निर्देश देने की मांग की गई कि आयुक्त के पास ऐसे आदेश पारित करने का कोई...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने टॉयलेट वाल पर मोबाइल नंबर लिखने के मामले में एफआईआर रद्द करने से किया इनकार, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने का है आरोप
कर्नाटक हाईकोर्ट ने टॉयलेट वाल पर मोबाइल नंबर लिखने के मामले में एफआईआर रद्द करने से किया इनकार, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने का है आरोप

कर्नाटक हाईकोर्ट ने व्यक्ति के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया। उक्त व्यक्ति ने कथित तौर पर बैंगलोर के मैजेस्टिक बस स्टैंड पर पुरुषों के टॉयलेट वाल पर विवाहित महिला का नंबर लिखकर उसे "कॉल गर्ल" कहा था। इसके बाद उसे कई नंबरों से अजीबो-गरीब समय पर अप्रत्याशित कॉल आने लगे, जिसमें उसकी जान को भी खतरा बताया गया।जस्टिस एम नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने अल्ला बक्शा पटेल द्वारा दायर याचिका खारिज किया और कहा,"आज के डिजिटल युग में किसी को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की ज़रूरत नहीं है,...

[NDPS Act] व्यक्ति की तलाशी लेने से पहले, आरोपी को मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी की उपस्थिति के अधिकार के बारे में सूचित किया जाना चाहिए: केरल हाईकोर्ट
[NDPS Act] व्यक्ति की तलाशी लेने से पहले, आरोपी को मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी की उपस्थिति के अधिकार के बारे में सूचित किया जाना चाहिए: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट की जस्टिस मैरी जोसेफ की सिंगल जज बेंच ने कहा है कि किसी व्यक्ति के शरीर की तलाशी लेने से पहले, उस व्यक्ति को उसके शरीर की तलाशी देखने के लिए मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी की उपस्थिति के अधिकार के बारे में सूचित किया जाना चाहिए।कोर्ट ने कहा कि जब तक उसे उसके अधिकार के बारे में सूचित नहीं किया जाता है, तब तक नारकोटिक्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (एनडीपीएस एक्ट) की धारा 50 के तहत औपचारिकताओं को पूरा नहीं माना जा सकता है। धारा 50 में यह प्रावधान है कि जब तक कि आपवादिक मामलों में...

कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही लंबित रहने के दौरान पेंशन लाभ और ग्रेच्युटी को रोका नहीं जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट
कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही लंबित रहने के दौरान पेंशन लाभ और ग्रेच्युटी को रोका नहीं जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट

जस्टिस एसएन पाठक की अध्यक्षता वाली झारखंड हाईकोर्ट की एकल न्यायाधीश पीठ ने शांति देवी बनाम झारखंड राज्य और अन्य के मामले में रिट याचिका पर फैसला करते हुए कहा कि कर्मचारियों के लिए पेंशन और ग्रेच्युटी लाभ को तब तक नहीं रोका जा सकता जब तक आपराधिक कार्यवाही चल रही हो।मामले की पृष्ठभूमि: शांति देवी को 1 नवंबर, 1984 को बीएनजे कॉलेज, सिसई, गुमला में व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। बाद में उन्हें 16 फरवरी, 2002 को राम लखन सिंह यादव कॉलेज, कोकर, रांची में स्थानांतरित कर दिया गया। 7...

[NI Act] यदि ब्याज का दावा चेक पर किया जाता है जिसमें ब्याज घटक शामिल नहीं है, तो यह कानूनी रूप से लागू करने योग्य ऋण नहीं रहेगा: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
[NI Act] यदि ब्याज का दावा चेक पर किया जाता है जिसमें ब्याज घटक शामिल नहीं है, तो यह कानूनी रूप से लागू करने योग्य ऋण नहीं रहेगा: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि ब्याज का दावा किसी चेक पर किया जाता है जिसमें समायोजन या राशि भरकर ब्याज घटक शामिल नहीं है, तो उक्त चेक कानूनी रूप से लागू करने योग्य ऋण या अन्य देयता नहीं रहता है।कोर्ट ने धारा 138 एनआई अधिनियम के तहत दर्ज शिकायत को रद्द कर दिया, जबकि यह नोट करते हुए कि चेक न तो किसी कानूनी रूप से लागू करने योग्य ऋण या किसी अन्य देयता का निर्वहन करने के लिए था "ब्याज भाग के लिए" बल्कि "वस्तुओं की खरीद के लिए देय राशि" के लिए था। इसलिए, एक बार शिकायतकर्ता...

अतिरिक्त वेतन वृद्धि का दावा सेवा मामलों में एक सतत आधार नहीं, देरी याचिका के मामले में कोई उपाय नहीं: मेघालय हाईकोर्ट
अतिरिक्त वेतन वृद्धि का दावा सेवा मामलों में एक सतत आधार नहीं, देरी याचिका के मामले में कोई उपाय नहीं: मेघालय हाईकोर्ट

मेघालय हाईकोर्ट ने माना है कि सेवा मामलों में अतिरिक्त वेतन वृद्धि का दावा एक सतत आधार नहीं है और इसलिए, याचिका दायर करने में लंबे विलंब के मामलों में, देरी और कमी के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती है।चीफ़ जस्टिस एस. वैद्यनाथन और जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगदोह की खंडपीठ एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपीलकर्ताओं/रिट याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर अपील पर विचार कर रही थी, जिसने देरी और कमी के आधार पर अतिरिक्त वेतन वृद्धि के लिए अपीलकर्ताओं के दावे को खारिज कर दिया था। अपीलकर्ता एक कॉलेज में सहायक और एसोसिएट...