हाईकोर्ट
POSH Act पर अहम फैसला: ICC रिपोर्ट के आधार पर ही सजा दे सकता है नियोक्ता, अलग जांच जरूरी नहीं- बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामलों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि नियोक्ता आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की रिपोर्ट के आधार पर ही कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। इसके लिए अलग से विभागीय जांच या चार्जशीट जरूरी नहीं है।जस्टिस आर आई छागला और जस्टिस अद्वैत एम सेठना की खंडपीठ ने यह फैसला IIT Bombay के एक प्रोफेसर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उन्होंने यौन उत्पीड़न के आरोप साबित होने के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को चुनौती दी थी।हाईकोर्ट ने स्पष्ट...
यूपी में 4995 धरोहरें बदहाल: हाईकोर्ट ने केंद्र-राज्य से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में हजारों ऐतिहासिक धरोहरों की खराब स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए केंद्र और राज्य सरकार समेत कई एजेंसियों को नोटिस जारी किया।अदालत में दायर जनहित याचिका में दावा किया गया कि प्रदेश की 4995 प्राचीन इमारतें और स्मारक “खस्ताहाल हैं और पूरी तरह खत्म होने के कगार पर हैं।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, संस्कृति, पर्यटन और आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालयों तथा राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण से 8...
गोपनीय जानकारी लीक करना बदनामी नहीं, सिर्फ अनुबंध उल्लंघन हो सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी द्वारा कंपनी की गोपनीय जानकारी उजागर करने का आरोप, भले ही सही मान लिया जाए तो वह अधिकतम अनुबंध का उल्लंघन हो सकता है, लेकिन उसे अपने आप बदनामी (मानहानि) नहीं माना जा सकता।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने पुस्तक कंपनी की अपील खारिज करते हुए यह फैसला दिया। कंपनी ने अपने पूर्व कर्मचारी पर 10 लाख रुपये हर्जाने की मांग करते हुए मानहानि का मुकदमा दायर किया था।पूरा मामलाकंपनी का आरोप था कि पूर्व कर्मचारी ने प्रतिस्पर्धी कंपनियों से संपर्क कर उनके व्यापार और...
संभल हिंसा मामला: पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR के आदेश पर हाईकोर्ट 21 अप्रैल तक बढ़ाई रोक
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने नवंबर 2024 के संभल हिंसा मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश पर लगी अंतरिम रोक को 21 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया।जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने यह आदेश पूर्व संभल क्षेत्राधिकारी अनुज कुमार चौधरी और तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। दोनों अधिकारियों ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उनके खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया।अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा। साथ ही...
BNSS की धारा 223 पर बड़ा सवाल: 'संज्ञान' के चरण को लेकर दिल्ली हाइकोर्ट ने मामला बड़ी पीठ को भेजा
दिल्ली हाइकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत संज्ञान लेने के चरण को लेकर उत्पन्न कानूनी अस्पष्टता पर महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मामले को बड़ी पीठ को सौंप दिया।जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने पाया कि इस प्रावधान की व्याख्या को लेकर विभिन्न हाईकोर्टों के फैसलों और सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों में संभावित टकराव नजर आ रहा है।BNSS की धारा 223 के तहत मजिस्ट्रेट को शिकायत मिलने पर संज्ञान लेते समय शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान शपथ पर दर्ज करने होते हैं। साथ ही इसके...
1984 कानपुर दंगों पर हाइकोर्ट सख्त: नरसंहार बताकर केस रद्द करने से किया इनकार
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने 1984 के कानपुर सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में बड़ा फैसला देते हुए आरोपियों की याचिकाएं खारिज की। साथ ही आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का आदेश दिया। अदालत ने इन घटनाओं को नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया।जस्टिस अनिश कुमार गुप्ता की पीठ ने 9 आरोपियों द्वारा दायर 7 याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि केवल देरी या मूल रिकॉर्ड के अभाव के आधार पर मुकदमा समाप्त नहीं किया जा सकता।अदालत ने कहा,“यह घटनाएं देशभर में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख समुदाय...
थानों में CCTV नियमों के उल्लंघन पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस थानों और जांच यूनिट्स में CCTV कैमरों की अनिवार्य व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन न होने के आरोप पर केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने नोटिस जारी करते हुए संबंधित पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी। मामलायाचिका में आरोप लगाया गया कि गिरफ्तारी और हिरासत में पूछताछ के दौरान CCTV कैमरों की व्यवस्था नहीं थी, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे...
UPSC में ऑटिज्म व मानसिक बीमारियों वाले अभ्यर्थियों को आरक्षण से बाहर करने पर हाईकोर्ट सख्त, केंद्र से जवाब तलब
दिल्ली हाईकोर्ट ने सिविल सेवा परीक्षा में ऑटिज्म, बौद्धिक दिव्यांगता, विशेष सीखने की अक्षमता और मानसिक बीमारी से पीड़ित अभ्यर्थियों को आरक्षण से बाहर रखने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और संघ लोक सेवा आयोग से जवाब मांगा।चीफ जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से जवाब एक सक्षम अधिकारी द्वारा दाखिल किया जाए और इसमें संबंधित सभी विभागों से...
अधिकारों की लड़ाई में पीछे की ओर ले जाता ट्रांसजेंडर पर मार्च बिल
13 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 ट्रांसजेंडरों के अधिकारों से कहीं आगे के मुद्दे उठाता। इसकी शुरुआत में ही संविधान की सर्वोच्चता और संवैधानिक प्रावधानों की अंतिम व्याख्या करने वाले के रूप में सुप्रीम कोर्ट की गरिमा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल हैं—सामान्य तौर पर भी, और नागरिकों के अधिकारों के संबंध में भी।यह विधेयक न केवल ट्रांसजेंडरों और LGBTQ+ समुदाय के उन अधिकारों को कमज़ोर करने की कोशिश करता है, जिनकी अब तक अदालतों और...
बार निकायों में 30% महिला प्रतिनिधित्व आदेश का पालन न करने के कारण रीवा जिला बार एसोसिएशन के चुनाव पर रोक
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (25 मार्च) को अंतरिम आदेश में रीवा जिला बार एसोसिएशन को अगले आदेश तक चुनाव कराने से रोक दिया। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के उस फैसले का पालन न करने का हवाला दिया, जिसमें बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति में 30% महिलाओं के लिए आरक्षण अनिवार्य किया गया।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने निर्देश दिया:"उक्त चुनाव के लिए मतदान 25/3/2026 को होना निर्धारित है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी अनिवार्य निर्देशों को ध्यान में रखते हुए - यह सुनिश्चित करने...
नया ट्रांसजेंडर विधेयक भारत को ट्रांसजेंडर अधिकारों की लड़ाई में पीछे धकेलता है
पिछले हफ्ते ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 [2019 अधिनियम] में संशोधन के लिए लोकसभा में एक विधेयक पेश किया गया था। संशोधन विधेयक के वस्तुओं और कारणों के विवरण के सीधे पढ़ने से ऐसा प्रतीत होता है कि संशोधन को पेश करने के दो प्राथमिक कारण हैं।सबसे पहले, अधिनियम के तहत "ट्रांसजेंडर व्यक्तियों" की परिभाषा को कड़ा करना और दूसरा, 2019 अधिनियम के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ अपराधों को दंडित करने की योजना को रद्द करना, और इसके स्थान पर उन अपराधों को पेश करना जो 2019...
ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम और 2026 के संशोधन विधेयक का विश्लेषण
ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम और 2026 संशोधन विधेयक के संदर्भ में विधायी परिवर्तन और संवैधानिक सुरक्षा महत्वपूर्ण हैं। भारत में ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए संघर्ष लंबे समय से रहा है, जो प्रणालीगत भेदभाव और बहिष्कार से चिह्नित है। ऐतिहासिक रूप से, कानूनी प्रणाली ने ट्रांसजेंडर पहचान को अपराधी बना दिया, एक ऐसा रुख जो हाल ही में और कुछ हिचकिचाहट के साथ मान्यता की ओर स्थानांतरित हो गया है।ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 को काफी हद तक प्रगतिशील अदालत के फैसलों को कानून में लाने...
सोशल मीडिया फ़ोटो पर आधारित Arms Act का केस टिकने लायक नहीं, कब्ज़े का कोई सबूत नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने FIR रद्द की
पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि Arms Act की धारा 25(1-B)(a) और 29(B) के तहत मुक़दमा तब तक नहीं चलाया जा सकता, जब तक कि गैर-कानूनी कब्ज़ा, हथियारों की सुपुर्दगी, या ज़रूरी अपराधिक इरादा जैसे ज़रूरी तत्व मौजूद न हों। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है कि यह मुक़दमा राजनीतिक रंजिश की पृष्ठभूमि में शुरू किया गया, क्योंकि याचिकाकर्ता एक राजनीतिक हस्ती हैं और विपक्षी राजनीतिक दल के सदस्य हैं।जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह बजरंग दास और एक अन्य व्यक्ति द्वारा CrPC की धारा 482 के तहत दायर एक...
बिजली चोरी के मामलों में आदेश पारित करने से पहले अथॉरिटी को आरोपी के साथ प्रतिकूल सामग्री साझा करनी चाहिए: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिजली अधिनियम की धारा 135 के तहत बिजली की कथित चोरी के मामलों में मूल्यांकन करने वाली अथॉरिटी का यह कर्तव्य है कि वह मूल्यांकन आदेश पारित करने से पहले उपभोक्ता को प्रतिकूल सामग्री से अवगत कराए और सुनवाई का अवसर प्रदान करे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी भी नागरिक दायित्व का निर्धारण भले ही वह धारा 135 के तहत हो, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए किया जाना चाहिए और इसे किसी यांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से नहीं किया जा सकता।जस्टिस जगमोहन बंसल...
बकाया न चुकाने पर सिविल जेल भेजने से पति की मासिक भरण-पोषण देने की ज़िम्मेदारी खत्म नहीं होती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि किसी व्यक्ति को उसकी पत्नी या बच्चों को भरण-पोषण (Maintenance) न देने के कारण सिविल जेल भेजने से उसकी आगे का मासिक भरण-पोषण का बकाया चुकाने की कानूनी ज़िम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की बेंच ने साफ किया कि CrPC की धारा 300 के तहत 'डबल जिओपार्डी' (दोहरी सज़ा) का सिद्धांत, 'घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005' के तहत भरण-पोषण के आदेशों को लागू करने के मामले में बिल्कुल भी लागू नहीं होता।बेंच ने आगे कहा कि भरण-पोषण से जुड़ी...
ग्राम पंचायतों पर अंतरिम व्यवस्था: सरपंच रहेंगे प्रशासक, पर बड़े फैसलों पर रोक- बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में ग्राम पंचायतों से जुड़े एक अहम मामले में अंतरिम राहत देते हुए कहा कि कार्यकाल पूरा कर चुके सरपंच फिलहाल प्रशासक के रूप में काम कर सकते हैं, लेकिन वे कोई नीतिगत या बड़े वित्तीय फैसले नहीं ले सकेंगे।जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की खंडपीठ ने 18 मार्च को यह आदेश देते हुए राज्य सरकार के उस निर्णय पर रोक नहीं लगाई, जिसके तहत करीब 14,500 ग्राम पंचायतों में चुनाव होने तक मौजूदा या पूर्व सरपंचों को प्रशासक नियुक्त किया गया।अदालत ने कहा कि विशेष परिस्थितियों...
नोटिस न मिलने से ट्रांसफर आदेश स्वतः अवैध नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 24 के तहत मुकदमे के ट्रांसफर से पहले नोटिस जारी न करना अपने आप में आदेश को अवैध नहीं बनाता, जब तक यह साबित न हो कि इससे संबंधित पक्ष को वास्तविक नुकसान (प्रेजुडिस) हुआ है।जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि यदि किसी मामले को सक्षम अदालत में विधिसम्मत तरीके से ट्रांसफर कर दिया गया और इससे किसी पक्ष को नुकसान नहीं हुआ तो केवल तकनीकी आधार पर आदेश रद्द नहीं किया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया,“नोटिस का अभाव...
IPC की धारा 498A की हर सजा को नैतिक अधमता नहीं माना जा सकता: हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत हर दोषसिद्धि को स्वतः 'नैतिक अधमता' (मोरल टरपिट्यूड) का अपराध नहीं माना जा सकता।हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि हर मामला अपने तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।यह टिप्पणी जस्टिस संदीप मौदगिल ने एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें भारतीय स्टेट बैंक के एक पूर्व शाखा प्रबंधक को सेवा से हटा दिया गया था। बैंक ने यह कार्रवाई इस आधार पर की थी कि...
जजों की सुरक्षा पर सख्त रुख: दिल्ली हाइकोर्ट ने सरकार, पुलिस और गृह मंत्रालय की संयुक्त बैठक के दिए आदेश
दिल्ली हाइकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय को संयुक्त बैठक करने का निर्देश दिया।जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे की गंभीरता को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि जजों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था जरूरी है।यह आदेश न्यायिक सेवा संघ द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें जिला न्यायपालिका के जजों को व्यक्तिगत सुरक्षा...
प्रधानमंत्री पर पोस्ट मामले में यूट्यूबर को राहत, बॉम्बे हाइकोर्ट ने हलफनामा दाखिल करने की दी अनुमति
बॉम्बे हाइकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में आरोपी डॉक्टर और यूट्यूबर डॉ. संग्राम पाटिल को राहत देते हुए उन्हें हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी।जस्टिस अश्विन भोबे की एकल पीठ ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता विदेश (UK) लौटना चाहते हैं तो उन्हें यह आश्वासन देना होगा कि वे जांच में लगातार सहयोग करते रहेंगे। अदालत ने मुंबई पुलिस को निर्देश दिया कि इस अनुरोध पर शीघ्र निर्णय लिया जाए।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट ने दलील दी कि डॉ. पाटिल पहले से ही जांच...



















