हाईकोर्ट

2014 में ही समाप्त हो चुका था 5% मुस्लिम आरक्षण, कोई कोटा खत्म नहीं किया गया: महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट से कहा
2014 में ही समाप्त हो चुका था 5% मुस्लिम आरक्षण, कोई कोटा खत्म नहीं किया गया: महाराष्ट्र सरकार ने हाईकोर्ट से कहा

महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि वर्ष 2014 में मुस्लिम समुदाय को दिया गया 5 प्रतिशत आरक्षण उसी वर्ष दिसंबर में समाप्त हो गया था। इसलिए फरवरी 2026 के सरकारी प्रस्ताव द्वारा किसी भी मौजूदा आरक्षण को समाप्त नहीं किया गया।जस्टिस रियाज़ छागला और जस्टिस अद्वैत सेठना की खंडपीठ वकील एजाज़ नक़वी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।याचिका में 17 फरवरी 2026 के उस सरकारी प्रस्ताव को चुनौती दी गई, जिसके जरिए राज्य ने 2014 के मुस्लिम आरक्षण संबंधी प्रावधान वापस लिए थे।राज्य सरकार ने सामाजिक...

पूर्ण बरी होने या निलंबन पूरी तरह अनुचित पाए जाने पर ही मिलेगा निलंबन अवधि का पूरा वेतन: झारखंड हाईकोर्ट
पूर्ण बरी होने या निलंबन पूरी तरह अनुचित पाए जाने पर ही मिलेगा निलंबन अवधि का पूरा वेतन: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी निलंबित कर्मचारी को बिना पूर्ण दोषमुक्ति के सेवा में बहाल किया जाता है अथवा निलंबन को पूरी तरह अनुचित नहीं ठहराया जाता तो वह निलंबन अवधि के लिए पूर्ण वेतन और निर्वाह भत्ता के अंतर की मांग नहीं कर सकता। ऐसे मामलों में कर्मचारी को केवल उतना ही वेतन और भत्ता मिलेगा, जितना सक्षम प्राधिकारी उचित समझे।जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने यह निर्णय देते हुए कर्मचारी की अपील खारिज की और एकलपीठ का आदेश बरकरार रखा।मामले के अनुसार कर्मचारी...

अधीनस्थ अधिकारी द्वारा आदेश की सूचना देना वैधानिक शक्ति का प्रत्यायोजन नहीं: पटना हाईकोर्ट ने बंदी स्थानांतरण अवधि-विस्तार बरकरार रखा
अधीनस्थ अधिकारी द्वारा आदेश की सूचना देना वैधानिक शक्ति का प्रत्यायोजन नहीं: पटना हाईकोर्ट ने बंदी स्थानांतरण अवधि-विस्तार बरकरार रखा

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अधीनस्थ अधिकारी द्वारा सक्षम प्राधिकारी के आदेश का केवल संप्रेषण करना वैधानिक शक्ति का प्रत्यायोजन नहीं माना जा सकता।इसी आधार पर अदालत ने एक बंदी के जेल स्थानांतरण की अवधि बढ़ाने का आदेश वैध ठहराते हुए चुनौती खारिज की।जस्टिस आलोक कुमार पांडे की एकलपीठ उस आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 30 अक्तूबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत बिहार के सहायक महानिरीक्षक (कारा) ने याचिकाकर्ता के आदर्श केंद्रीय कारा, बेउर, पटना से विशेष केंद्रीय कारा, भागलपुर...

बिना अवैध सरकारी लाभ से स्पष्ट संबंध के धन प्राप्ति को रिश्वत नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
बिना अवैध सरकारी लाभ से स्पष्ट संबंध के धन प्राप्ति को रिश्वत नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी लोकसेवक द्वारा धन प्राप्त करना मात्र, भले ही उसका संतोषजनक स्पष्टीकरण न दिया गया हो, तब तक रिश्वत नहीं माना जा सकता जब तक यह स्पष्ट रूप से सिद्ध न हो जाए कि वह राशि किसी अवैध सरकारी लाभ या पक्षपात के बदले दी गई थी।जस्टिस संजीव नरूला ने यह टिप्पणी करते हुए केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) के एक अधिकारी को सेवा से हटाने का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर भ्रष्टाचार का आरोप टिकाऊ नहीं है।याचिकाकर्ता केंद्रीय भंडारण...

कोई व्यक्ति लाभ पाने के लिए दो जाति पहचानों के बीच फेरबदल नहीं कर सकता, इससे व्यवस्था की पवित्रता कमज़ोर होती है: पटना हाईकोर्ट
'कोई व्यक्ति लाभ पाने के लिए दो जाति पहचानों के बीच फेरबदल नहीं कर सकता, इससे व्यवस्था की पवित्रता कमज़ोर होती है': पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी भी व्यक्ति को चुनावी लाभ पाने के लिए अपनी जाति पहचान के संबंध में विरोधाभासी रुख अपनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए आरक्षित सीट से चुने गए एक मुखिया को अयोग्य घोषित करने के लिए शुरू की गई कार्यवाही को सही ठहराया।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस शैलेंद्र सिंह की डिवीज़न बेंच 09.08.2023 को सिंगल जज द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ 'इंट्रा-कोर्ट अपील' (अदालत के भीतर की अपील) पर सुनवाई कर रही थी। उस फैसले में सिंगल जज ने अपीलकर्ता...

अनिल अंबानी ने Republic TV पर लगाया फिर से आपत्तिजनक प्रसारण करने का आरोप, हाईकोर्ट का संयम बरतने का निर्देश
अनिल अंबानी ने Republic TV पर लगाया फिर से आपत्तिजनक प्रसारण करने का आरोप, हाईकोर्ट का संयम बरतने का निर्देश

उद्योगपति अनिल अंबानी ने बुधवार (29 अप्रैल) को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि अदालत द्वारा Republic TV और उसके एडिटर-इन-चीफ़ अर्णब गोस्वामी से संयम बरतने के लिए कहने के बावजूद, चैनल पर उनके खिलाफ फिर से कुछ आपत्तिजनक प्रसारण किया गया।सिंगल-जज जस्टिस आरिफ डॉक्टर अंबानी द्वारा गोस्वामी और उनके चैनल के खिलाफ दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई कर रहे हैं।गौरतलब है कि पिछली दो सुनवाइयों में अदालत ने गोस्वामी को यह स्पष्ट किया कि हालांकि वह अंबानी के खिलाफ चल रही जांचों के बारे में रिपोर्टिंग करने से...

सार्वजनिक स्थान पर कॉफी पीना भी डर का कारण बन गया: अंतरधार्मिक जोड़ों की उत्पीड़न पर NHRC की चुप्पी पर हाईकोर्ट में तीखी टिप्पणी, बेंच में मतभेद
सार्वजनिक स्थान पर कॉफी पीना भी डर का कारण बन गया': अंतरधार्मिक जोड़ों की उत्पीड़न पर NHRC की चुप्पी पर हाईकोर्ट में तीखी टिप्पणी, बेंच में मतभेद

इलाहाबाद हाईकोर्ट में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की भूमिका को लेकर सुनवाई के दौरान खंडपीठ के दो जजों के बीच असामान्य मतभेद देखने को मिले।जस्टिस अतुल श्रीधरन ने NHRC की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अंतरधार्मिक संबंधों में रहने वाले लोगों के लिए सार्वजनिक स्थान पर साथ कॉफी पीना तक भय का कारण बन गया है, जबकि आयोग ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान नहीं लेता।हालांकि जस्टिस विवेक सारन ने इन व्यापक टिप्पणियों से असहमति जताई और कहा कि बिना सभी पक्षों को सुने इस प्रकार की प्रतिकूल...

थानों में बिना CCTV वाले हिस्सों में नहीं ले जाए जाएं आरोपी या शिकायतकर्ता: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, हिरासत हिंसा रोकने को बॉडी कैमरा अनिवार्य करने के निर्देश
थानों में बिना CCTV वाले हिस्सों में नहीं ले जाए जाएं आरोपी या शिकायतकर्ता: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, हिरासत हिंसा रोकने को बॉडी कैमरा अनिवार्य करने के निर्देश

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत में हिंसा के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि राज्य के किसी भी थाने में आरोपी या शिकायतकर्ता को ऐसे स्थान पर न ले जाया जाए जहां CCTV कैमरे न लगे हों।अदालत ने पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी कैमरा उपयोग की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया।जस्टिस सुभोध अभ्यंकर की एकलपीठ ने इंदौर पुलिस आयुक्तालय को निर्देश देते हुए कहा कि शौचालय और कपड़े बदलने के कक्ष जैसे अपवादों को छोड़कर थानों के सभी हिस्से निगरानी के दायरे में होने चाहिए।अदालत ने राज्य सरकार को यह भी...

2012 कोर्ट हिंसा मामला: कर्नाटक हाईकोर्ट ने TV9 के खिलाफ केस किया रद्द, कहा—केबल टीवी एक्ट का डिक्रिमिनलाइजेशन पिछली तारीख से लागू
2012 कोर्ट हिंसा मामला: कर्नाटक हाईकोर्ट ने TV9 के खिलाफ केस किया रद्द, कहा—केबल टीवी एक्ट का डिक्रिमिनलाइजेशन पिछली तारीख से लागू

कर्नाटक हाईकोर्ट ने TV9 कर्नाटक प्राइवेट लिमिटेड और उसके पूर्व संवाददाताओं के खिलाफ 2012 सिटी सिविल कोर्ट परिसर हिंसा मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा कि केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के तहत अपराध को 2023 के संशोधन द्वारा डिक्रिमिनलाइज कर दिया गया है और इसका लाभ लंबित मामलों पर भी लागू होगा।जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने TV9 न्यूज चैनल और उसके संवाददाताओं द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए 2025 में CBI स्पेशल कोर्ट में दर्ज आपराधिक कार्यवाही को...

पंजाब के एंटी-सेक्रिलेज कानून को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की सुनवाई पर रोक, याचिकाकर्ता के आचरण पर हाईकोर्ट सख्त
पंजाब के एंटी-सेक्रिलेज कानून को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की सुनवाई पर रोक, याचिकाकर्ता के आचरण पर हाईकोर्ट सख्त

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के एंटी-सेक्रिलेज कानून को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर तत्काल कोई आदेश पारित करने से इनकार करते हुए कहा कि पहले यह देखा जाएगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के पूर्ववृत्त और तथ्यों को कथित रूप से छिपाने के आरोपों के मद्देनजर अदालत पहले याचिका की सुनवाई योग्यता पर विचार करेगी।मामला जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026” की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली...

26/11 मामले में बरी फहीम अंसारी को पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट देने से इनकार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुरक्षा चिंताओं को माना उचित
26/11 मामले में बरी फहीम अंसारी को पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट देने से इनकार, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुरक्षा चिंताओं को माना उचित

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में बरी किए गए फहीम अंसारी की वह याचिका खारिज की, जिसमें उसने ऑटो-रिक्शा चलाकर आजीविका कमाने के लिए अनिवार्य पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश मांगा था।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस रणजीतसिंह भोंसले की खंडपीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा व्यक्त चिंताओं को देखते हुए पुलिस द्वारा प्रमाणपत्र देने से इनकार करना उचित है।अदालत ने कहा,“मामले के तथ्यों और सुरक्षा कारणों को देखते हुए प्राधिकारियों द्वारा पुलिस...

नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले में दोषी शरद कालसकर को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत
नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले में दोषी शरद कालसकर को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की हत्या मामले में दोषी ठहराए गए शरद कालसकर को जमानत दी। अदालत ने उनकी अपील लंबित रहने तक उन्हें राहत प्रदान की।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस रणजीतसिंह भोंसले की खंडपीठ ने बुधवार को यह आदेश पारित करते हुए कालसकर को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का निर्देश दिया।सुनवाई के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जमानत आदेश पर चार सप्ताह की रोक लगाने की मांग की लेकिन हाईकोर्ट ने इसे अस्वीकार कर दिया।अदालत ने कहा,“जब हम पहले ही...

दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अदालत में तीन पर चली पोर्न सामग्री, वर्चुअल सुनवाई  हुई बाधित
दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अदालत में तीन पर चली पोर्न सामग्री, वर्चुअल सुनवाई हुई बाधित

दिल्ली हाइकोर्ट की वर्चुअल सुनवाई के दौरान बुधवार को उस समय कार्यवाही बाधित हो गई, जब अज्ञात यूजर ने ऑनलाइन मंच पर अश्लील सामग्री प्रसारित कर दी।यह घटना चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ के समक्ष हुई।जानकारी के अनुसार अदालत पूरक सूची के मामलों पर सुनवाई कर रही थी तभी एक अज्ञात व्यक्ति वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग मंच से जुड़ा और अपनी स्क्रीन शेयर कर अश्लील वीडियो चलाने लगा। अदालत के कर्मचारियों ने तत्काल वर्चुअल मंच बंद कर दिया।हालांकि, कुछ देर बाद जब सुनवाई दोबारा शुरू...

आतंकी हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा व सरकारी नौकरी देना नीतिगत विषय: दिल्ली हाईकोर्ट
आतंकी हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा व सरकारी नौकरी देना नीतिगत विषय: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में आतंकी हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा और सरकारी रोजगार लाभ देने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि यह सरकार का नीतिगत विषय है, जिस पर अदालत रिट क्षेत्राधिकार में निर्देश नहीं दे सकती।चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में की गई मांगें नीति निर्धारण के दायरे में आती हैं। ऐसे मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता।मामला साउथ एशियन फोरम फॉर पीपल अगेंस्ट टेरर द्वारा दायर जनहित...

सरदार सरोवर विस्थापितों की शिकायतें दूर करे सरकार: मेधा पाटकर की याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का निर्देश
सरदार सरोवर विस्थापितों की शिकायतें दूर करे सरकार: मेधा पाटकर की याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का निर्देश

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सरदार सरोवर बांध परियोजना से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और भूखंड आवंटन से जुड़ी शिकायतों पर राज्य सरकार को कार्रवाई करने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर द्वारा उठाए गए मुद्दों पर अतिरिक्त मुख्य सचिव गंभीरता से विचार करें और उनका समाधान सुनिश्चित करें।जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि 6 मार्च 2026 को प्रस्तुत शिकायतों पर निर्णय लेने से पहले यदि...

मदरसों की जांच का आदेश, लेकिन मॉब लिंचिंग पर स्वतः संज्ञान नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NHRC की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल
मदरसों की जांच का आदेश, लेकिन मॉब लिंचिंग पर स्वतः संज्ञान नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NHRC की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि आयोग उत्तर प्रदेश के मदरसों की जांच जैसे मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, जबकि मॉब लिंचिंग, भीड़ हिंसा और सतर्कतावादी हमलों जैसे गंभीर मामलों में स्वतः संज्ञान लेने के उदाहरण सामने नहीं आते।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया ने वर्ष 2025 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा उत्तर...

योग्य और कमाने में सक्षम पत्नी केवल पति पर बोझ डालने के लिए काम न करे तो भरण-पोषण नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
योग्य और कमाने में सक्षम पत्नी केवल पति पर बोझ डालने के लिए काम न करे तो भरण-पोषण नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई शिक्षित और कमाने में सक्षम पत्नी केवल पति पर आर्थिक बोझ डालने के उद्देश्य से काम करने से परहेज करती है तो अदालतें हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अंतरिम भरण-पोषण देने से इनकार कर सकती हैं।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक महिला द्वारा दायर प्रथम अपील खारिज करते हुए की। महिला पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं और उन्होंने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके अंतरिम भरण-पोषण का आवेदन...

सार्वजनिक व्यक्तियों पर हर सामग्री हटाने योग्य नहीं, केवल आपत्तिजनक होने पर ही रोक संभव: अर्जुन कपूर मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी
सार्वजनिक व्यक्तियों पर हर सामग्री हटाने योग्य नहीं, केवल आपत्तिजनक होने पर ही रोक संभव: अर्जुन कपूर मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्टर अर्जुन कपूर की पर्सनालिटी राइट्स याचिका पर सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के संबंध में प्रकाशित या प्रसारित हर सामग्री पर रोक नहीं लगाई जा सकती, जब तक वह मानहानिकारक या अपमानजनक न हो।अर्जुन कपूर ने अपनी छवि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित दुरुपयोग, डीपफेक और अश्लील सामग्री के खिलाफ व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाइकोर्ट का रुख किया।जस्टिस तुषार राव गेडेला ने मामले की सुनवाई करते हुए एक्टर की ओर से पेश...

कानूनी संशोधनों को पिछली तारीख से लागू करके लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारी के नियमितीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
कानूनी संशोधनों को पिछली तारीख से लागू करके लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारी के नियमितीकरण से इनकार नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि कानूनी संशोधनों को पिछली तारीख से लागू करके उस कर्मचारी के हासिल अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता, जो दशकों से लगातार सेवा कर रहा है।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने यह टिप्पणी की:"हालांकि, इस कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता 1989 में सेवा में आया था और 2016 का संशोधन लागू होने से काफी पहले ही उसने नियमितीकरण के लिए अपनी ज़रूरी सेवा अवधि पूरी कर ली थी। कानूनी संशोधनों को पिछली तारीख से लागू करके उस कर्मचारी के हासिल अधिकारों को खत्म नहीं किया जा सकता, जो...