हाईकोर्ट

पेंशन व रिटायरमेंट लाभ न देने पर सख्ती, झारखंड हाईकोर्ट ने परिवहन अधिकारी का वेतन रोका
पेंशन व रिटायरमेंट लाभ न देने पर सख्ती, झारखंड हाईकोर्ट ने परिवहन अधिकारी का वेतन रोका

झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में पलामू के जिला परिवहन पदाधिकारी का वेतन रोकने का निर्देश दिया। अदालत ने यह सख्त कदम इसलिए उठाया, क्योंकि रिटायर कर्मचारी को अब तक पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ नहीं दिए गए।जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका उस आदेश से जुड़ी थी, जिसमें 23 अक्टूबर 2024 को अदालत ने रिटायर लिपिक को पेंशन, सभी रिटायरमेंट लाभ, 6 प्रतिशत ब्याज और 50 हजार रुपये खर्च देने का निर्देश दिया था।याचिकाकर्ता 31 मार्च 2011 को रिटायर हुए, लेकिन विभाग...

बाइपोलर डिसऑर्डर मात्र से नहीं मिलेगा स्थानांतरण में छूट, बेंचमार्क दिव्यांगता जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
बाइपोलर डिसऑर्डर मात्र से नहीं मिलेगा स्थानांतरण में छूट, बेंचमार्क दिव्यांगता जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय विद्यालय संगठन की एक शिक्षिका के स्थानांतरण को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि केवल बाइपोलर डिसऑर्डर होने से मेडिकल आधार पर छूट नहीं मिल सकती, जब तक कि बेंचमार्क दिव्यांगता का प्रमाण न हो।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज की। अधिकरण ने भी शिक्षिका के दिल्ली से बाबूगढ़ छावनी स्थित केंद्रीय विद्यालय में स्थानांतरण में हस्तक्षेप करने से इनकार किया।याचिकाकर्ता जो केंद्रीय विद्यालय संगठन...

22 बार सुनवाई के बावजूद आदेश की अवहेलना, एमपी हाईकोर्ट ने अधिकारियों को दो माह की सजा सुनाई
22 बार सुनवाई के बावजूद आदेश की अवहेलना, एमपी हाईकोर्ट ने अधिकारियों को दो माह की सजा सुनाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश का बार-बार पालन न करने पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराते हुए दो माह की साधारण कारावास की सजा सुनाई।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मामला 22 बार सूचीबद्ध हुआ फिर भी आदेश का पालन नहीं किया गया।जस्टिस प्रणय वर्मा की पीठ ने कहा,“याचिका 22वीं बार सूचीबद्ध हुई और अब तक आदेश का पालन नहीं किया गया। 06.02.2026 के आदेश के अनुसार प्रतिवादी अवमानना के दोषी है। उन्हें दो माह के साधारण कारावास की सजा दी जाती है।”हालांकि, अदालत...

डंकी रूट से मानव तस्करी मामले में आरोपियों को राहत नहीं, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत से किया इनकार
डंकी रूट से मानव तस्करी मामले में आरोपियों को राहत नहीं, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत से किया इनकार

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने डंकी रूट के जरिए अवैध तरीके से लोगों को विदेश भेजने वाले मानव तस्करी गिरोह से जुड़े आरोपियों को नियमित जमानत देने से इनकार किया।अदालत ने कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर है। इसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव हैं। इसलिए आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती।जस्टिस गुरविंदर सिंह गिल और जस्टिस रमेश कुमारी की पीठ आरोपियों की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष जज (NIA) द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी गई थी।मामले में आरोप है कि आरोपी लोगों को कानूनी तरीके से विदेश...

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट में जज द्वारा मध्यस्थता पर उठे सवालों वाली जनहित याचिका निपटाई, याचिकाकर्ता को समिति के पास जाने का निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट में जज द्वारा मध्यस्थता पर उठे सवालों वाली जनहित याचिका निपटाई, याचिकाकर्ता को समिति के पास जाने का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट में जजों द्वारा स्वयं मध्यस्थता करने और बाद में उसी मामले की सुनवाई करने की प्रथा को लेकर दायर जनहित याचिका का निपटारा किया।हाईकोर्ट ने कहा कि इस विषय पर उचित होगा कि याचिकाकर्ता संबंधित जजों की समिति के समक्ष अपनी बात रखे।चीफ जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता फैमिली कोर्ट्स से जुड़े मामलों को देखने वाली समिति के समक्ष प्रतिनिधित्व प्रस्तुत करे। अदालत ने यह भी कहा कि समिति याचिकाकर्ता के सुझावों पर शीघ्रता से...

बच्चे की कस्टडी पिता के पास हो तो हैबियस कॉर्पस याचिका नहीं चलेगी: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
बच्चे की कस्टडी पिता के पास हो तो हैबियस कॉर्पस याचिका नहीं चलेगी: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि जब बच्चा अपने प्राकृतिक अभिभावक (नेचुरल गार्जियन) के पास हो और उसके जीवन या सुरक्षा को कोई तात्कालिक खतरा न हो तो ऐसे मामलों में हैबियस कॉर्पस याचिका सुनवाई योग्य नहीं होती।जस्टिस सुमीत गोयल ने यह फैसला एक मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उसने अपनी 9 वर्षीय बेटी की कस्टडी पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।पूरा मामलामां ने आरोप लगाया कि उसकी बेटी को पिता और उसके परिवार ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है। उसने कहा कि मां होने...

विदेश में रह रहे आरोपी को भगोड़ा घोषित करना गलत: हाईकोर्ट ने प्रोक्लेमेशन आदेश और LOC रद्द की
विदेश में रह रहे आरोपी को भगोड़ा घोषित करना गलत: हाईकोर्ट ने प्रोक्लेमेशन आदेश और LOC रद्द की

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में ऑस्ट्रेलिया में रह रहे एक व्यक्ति के खिलाफ जारी प्रोक्लेमेशन आदेश और लुकआउट सर्कुलर (LOC) रद्द किया।अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ने विदेश में रह रहे आरोपी को समन भेजने का कोई ठोस प्रयास ही नहीं किया।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा,“जब जांच एजेंसी को पता था कि आरोपी ऑस्ट्रेलिया में रह रहा है, तब भी वहां उसके पते पर समन या वारंट भेजने की कोई कोशिश नहीं की गई। विदेश मंत्रालय या अन्य वैधानिक माध्यमों से भी सेवा कराने का प्रयास नहीं हुआ।”हाईकोर्ट ने पाया कि दंड...

गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकालना अपने आप में नौकरी पर वापस रखने या पिछले वेतन का हकदार नहीं बनाता: दिल्ली हाईकोर्ट
गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकालना अपने आप में नौकरी पर वापस रखने या पिछले वेतन का हकदार नहीं बनाता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ किया कि अगर यह पाया जाता है कि किसी को गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाला गया तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे अपने आप ही नौकरी पर वापस रखने या पिछले वेतन का हक मिल जाएगा।जस्टिस शैल जैन ने इसलिए प्रोप्राइटरशिप फर्म द्वारा गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को नौकरी पर वापस रखने और पिछले वेतन देने से मना किया। उन्होंने इसके लिए काफी समय बीत जाने का हवाला दिया, खासकर तब जब कई कर्मचारी पहले ही रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंच चुके थे और उन्होंने अपनी कानूनी...

बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों के कारण प्रॉपर्टी डील्स में समय-सीमा का पालन ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पेसिफिक परफॉर्मेंस का आदेश देने से इनकार किया
बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों के कारण प्रॉपर्टी डील्स में समय-सीमा का पालन ज़रूरी: दिल्ली हाईकोर्ट ने 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' का आदेश देने से इनकार किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने बिक्री के एक कथित समझौते के 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' (समझौते को लागू करने) का आदेश देने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की कि प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों के कारण प्रॉपर्टी के लेन-देन में समय-सीमा का पालन करना बहुत ज़रूरी हो जाता है।जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस रेनू भटनागर की डिवीज़न बेंच ने कहा,"दिल्ली जैसे बड़े शहरों में, जहां प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार और काफ़ी तेज़ी से बढ़ती रहती हैं, प्रॉपर्टी से जुड़े लेन-देन की व्यावसायिक सच्चाई यह है कि समझौते की शर्तों को पूरा करने में समय की...

शराब का कारोबार मौलिक अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डिस्टिलरी के लाइसेंस सस्पेंड करने का फैसले सही ठहराया
शराब का कारोबार मौलिक अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डिस्टिलरी के लाइसेंस सस्पेंड करने का फैसले सही ठहराया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सोम डिस्टिलरीज़ के कई लाइसेंस सस्पेंड करने के फैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि शराब का कारोबार कोई मौलिक अधिकार नहीं है और यह सख्त कानूनी नियमों के अधीन है।जस्टिस विवेक अग्रवाल की बेंच ने कहा:"पहली बात तो यह कि शराब का कारोबार कोई मौलिक अधिकार नहीं है। दूसरी बात यह कि जब आनुपातिकता (Proportionality) की कसौटी पर इसे परखा जाता है तो उस आधार पर भी अथॉरिटी का फैसला एक्साइज एक्ट और उसके तहत बनाए गए नियमों के दायरे में है, इसलिए इसमें कोई गलती नहीं निकाली जा...

मजिस्ट्रेट द्वारा केस भेजे बिना सेशंस कोर्ट ड्रग्स एंड कॉस्मैटिक्स एक्ट के तहत अपराधों का संज्ञान नहीं ले सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट
मजिस्ट्रेट द्वारा केस भेजे बिना सेशंस कोर्ट ड्रग्स एंड कॉस्मैटिक्स एक्ट के तहत अपराधों का संज्ञान नहीं ले सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि सेशंस कोर्ट ड्रग्स एंड कॉस्मैटिक्स एक्ट के तहत अपराधों का सीधा संज्ञान तब तक नहीं ले सकता, जब तक कि मैजिस्ट्रेट द्वारा केस उसे न भेजा जाए, जैसा कि CrPC की धारा 193 के तहत ज़रूरी है। कोर्ट ने पाया कि एक्ट में ऐसी कोई स्पष्ट व्यवस्था न होने के कारण, जो सीधे संज्ञान की अनुमति देती हो, CrPC के तहत वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।जस्टिस एन.जी. जमादार एक फार्मास्युटिकल फर्म और उसके पार्टनर्स द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें ड्रग्स एंड...

कैंसलेशन रिपोर्ट स्वीकार करने के बाद मजिस्ट्रेट फंक्टस ऑफिसियो हो जाते हैं, पुलिस की चूकों की जांच नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
कैंसलेशन रिपोर्ट स्वीकार करने के बाद मजिस्ट्रेट 'फंक्टस ऑफिसियो' हो जाते हैं, पुलिस की चूकों की जांच नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि एक बार जब कोई मजिस्ट्रेट पुलिस द्वारा दायर की गई कैंसलेशन या 'अनट्रेस्ड' (लापता) रिपोर्ट को स्वीकार कर लेता है तो अदालत 'फंक्टस ऑफिसियो' (अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर) हो जाती है। उसके बाद जांच में कथित चूकों की जांच करने या पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश देने के लिए आगे नहीं बढ़ सकती।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने इस प्रकार पुलिस अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह को स्वीकार किया। इन याचिकाओं में पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल...

दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय होने से पहले मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने का फ़ैसला सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय होने से पहले मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने का फ़ैसला सही ठहराया

दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में आरोप तय होने से पहले (प्री-चार्ज स्टेज) मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने के फ़ैसले को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि जहां तथ्यों की ज़रूरत हो, वहां ट्रायल शुरू होने से पहले मंज़ूरी की वैधता की जाँच करने से अदालतों को रोका नहीं जा सकता।जस्टिस अमित महाजन ने इस तरह राज्य सरकार की याचिका खारिज की, जिसमें स्पेशल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें आरोपी को CrPC की धारा 311 के तहत मंज़ूरी देने वाले अधिकारी को बुलाने की इजाज़त दी गई ताकि उसके मुक़दमे के लिए...

POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत
POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज प्रयागराज POCSO मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अग्रिम जमानत दे दी है।इससे पहले 27 फरवरी को जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया था और निर्देश दिया था कि अंतिम फैसला होने तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य की गिरफ्तारी न की जाए।गौरतलब है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन पर आरोप है कि प्रयागराज में आयोजित हालिया माघ मेला के दौरान...

गौतम गंभीर के पर्सनेलिटी राइट्स की रक्षा करेगा हाईकोर्ट, आपत्तिजनक सामग्री हटाने के संकेत
गौतम गंभीर के पर्सनेलिटी राइट्स की रक्षा करेगा हाईकोर्ट, आपत्तिजनक सामग्री हटाने के संकेत

दिल्ली हाइकोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर के व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए अंतरिम आदेश पारित करेगा।जस्टिस ज्योति सिंह ने सुनवाई के दौरान संकेत दिए कि अदालत मेटा, गूगल और अमेज़न से जुड़े विक्रेताओं को कथित उल्लंघनकारी सामग्री हटाने का निर्देश दे सकती है।अदालत ने कहा कि वह इन मंचों को आपत्तिजनक सामग्री हटाने के साथ-साथ अपलोड करने वालों की बुनियादी जानकारी (BCI) और आईपी लॉगिन विवरण उपलब्ध कराने का भी निर्देश देगी।सुनवाई के दौरान गंभीर की ओर से पेश...

मानव तस्करी मामले में सोनू पंजाबन बरी, पीड़िता की गवाही पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जताया संदेह
मानव तस्करी मामले में सोनू पंजाबन बरी, पीड़िता की गवाही पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जताया संदेह

दिल्ली हाईकोर्ट ने मानव तस्करी और नाबालिग के यौन शोषण से जुड़े एक चर्चित मामले में गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन को बरी किया।अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा और पीड़िता की गवाही भरोसेमंद नहीं पाई गई।जस्टिस चंद्रशेखरन सुधा ने अपने फैसले में कहा कि केवल पीड़िता की गवाही के आधार पर दोषसिद्धि संभव है लेकिन वह गवाही उच्च स्तर की और पूरी तरह विश्वसनीय होनी चाहिए।अदालत ने कहा,“इस मामले में गवाह की गवाही में कई विरोधाभास हैं और यह भरोसा पैदा नहीं करती।”हाईकोर्ट ने पाया कि घटना के...