हाईकोर्ट
अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त, सुरेश राठौर के खिलाफ दो FIR रद्द, दो पर जांच जारी
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज चार FIR में से दो रद्द की, जबकि दो अन्य मामलों में जांच जारी रखने की अनुमति दी।अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को जघन्य अपराध से जोड़कर उसकी छवि खराब करने का प्रयास गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।जस्टिस राकेश थपलियाल ने मामले की सुनवाई के दौरान सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो और ऑडियो सामग्री के प्रतिलेखों का अवलोकन किया।अदालत ने कहा कि बिना किसी ठोस आधार के किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से...
10 साल बाद मद्रास हाईकोर्ट ने बदला चुनाव नतीजा, DMK नेता अप्पावु को घोषित किया विजेता
मद्रास हाईकोर्ट ने 2016-2021 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के राधापुरम विधानसभा क्षेत्र का परिणाम बदलते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और DMK नेता अप्पावु को विजेता घोषित कर दिया। अदालत ने पाया कि डाक मतपत्रों (Postal Ballots) की पुनर्गणना के बाद अप्पावु ने AIADMK उम्मीदवार आई.एस. इनबादुरई को 103 वोटों से हराया था।जस्टिस जी. जयचंद्रन ने मामले के निस्तारण में हुई लगभग 10 वर्ष की देरी पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि चुनाव याचिकाओं के त्वरित निपटारे के लिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में दिए गए प्रावधानों का...
पेनल्टी के आधार पर पुरानी रिक्तियों के लिए पदोन्नति नहीं रोकी जा सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी की पदोन्नति पर विचार करते समय पिछले सात वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की गणना संबंधित पद की रिक्ति उत्पन्न होने की तिथि से की जाएगी, न कि उस घटना की तिथि से जिसके आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू की गई हो।जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ ने कहा कि किसी कर्मचारी पर लगाई गई दंडात्मक कार्रवाई (Penalty) का प्रभाव पदोन्नति पर पड़ सकता है, लेकिन यह प्रभाव केवल उन पदोन्नतियों पर लागू होगा जो दंड आदेश जारी होने के बाद दी जानी हैं। जिन पदोन्नतियों के लिए रिक्तियां दंड...
News24 के पत्रकार पर 'सामाजिक शांति भंग' करने का आरोप: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई गिरफ्तारी पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को News24 रिपोर्टर शाहनवाज़ को गिरफ़्तारी से अंतरिम राहत दी। उन पर मुरादाबाद में FIR दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप था कि उन्होंने X (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो रीपोस्ट करके नगर निगम की आलोचना की थी।जस्टिस विक्रम डी. चौहान और जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला की बेंच ने निर्देश दिया कि जब तक मामले की अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक पत्रकार के ख़िलाफ़ कोई सख़्त कार्रवाई न की जाए, बशर्ते वह जांच में सहयोग करें।बेंच ने एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट को इस मामले में निर्देश प्राप्त करने के...
दो साल बाद बिना किसी धोखाधड़ी सबूत के भवन निर्माण की अनुमति रद्द नहीं कर सकता निगम: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर नगर निगम द्वारा जारी भवन निर्माण अनुमति निरस्तीकरण और ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) नोटिस को रद्द करते हुए कहा कि एक बार सक्षम प्राधिकारी द्वारा वैध रूप से भवन निर्माण की अनुमति दिए जाने और उसके आधार पर निर्माण कार्य हो जाने के बाद, धोखाधड़ी या तथ्य छिपाने का कोई प्रमाण न होने पर अनुमति वापस नहीं ली जा सकती।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की पीठ ने कहा कि बिना किसी धोखाधड़ी के सबूत के, नागरिक द्वारा भारी निवेश कर निर्माण किए जाने के बाद अनुमति रद्द करना मनमाना, अनुचित और संविधान के...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने टीबी स्क्रीनिंग गाइडलाइंस को सही ठहराया, कहा- रेडियोग्राफ़र एसोसिएशन की निजी आशंकाएं प्रशासनिक नतीजों की जगह नहीं ले सकतीं
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'कम्युनिटी में टीबी स्क्रीनिंग के लिए अल्ट्रापोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे डिवाइस (HHXray) के इंस्टॉलेशन और ऑपरेशन से जुड़ी गाइडलाइंस' को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि रेडियोग्राफ़र एसोसिएशन की रेडिएशन के खतरों को लेकर आशंकाएं और अनौपचारिक प्रयोग, औपचारिक प्रशासनिक नतीजों की जगह नहीं ले सकते।याचिकाकर्ता एसोसिएशन 'प्रगतिशील रेडियोग्राफ़र संघ' (जो राज्य भर के सरकारी रेडियोग्राफ़र और एक्स-रे टेक्नीशियन का प्रतिनिधित्व करता है) ने टीबी स्क्रीनिंग के लिए अल्ट्रापोर्टेबल हैंडहेल्ड...
राज्य के बाहर यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करने पर स्पोर्ट्स कोटे के तहत नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने दी उम्मीदवार को राहत
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक उम्मीदवार को राहत दी, जिसने "बेहतरीन खिलाड़ी" (आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्स पर्सन) कैटेगरी में टीचर के पद पर नियुक्ति की मांग की थी। पहले उसे यह लाभ देने से इनकार कर दिया गया था क्योंकि चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए जारी उसका सर्टिफिकेट हरियाणा का प्रतिनिधित्व करने के लिए था, न कि राजस्थान का।ऐसा करते हुए कोर्ट ने विज्ञापन का हवाला दिया और कहा कि ज़रूरी शर्त 'एसोसिएशन ऑफ़ इंडियन यूनिवर्सिटीज़' द्वारा मान्यता प्राप्त 'ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट' में किसी व्यक्तिगत या...
'नाबालिग' को जेल भेजने का मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुडिशियल ऑफिसर से मांगा जवाब, गिरफ्तारी करने वाले पुलिसकर्मियों को किया तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चोरी के आरोप में जेल भेजे गए नाबालिग को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया और उसकी हिरासत को पहली नज़र में 'गैर-कानूनी' करार दिया।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने संबंधित जुडिशियल मजिस्ट्रेट से पर्सनल हलफनामा भी मांगा, जिसमें नाबालिग की उम्र की पुष्टि किए बिना न्यायिक हिरासत की मंज़ूरी देने के लिए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया।कोर्ट ने गौर किया कि FIR दर्ज होने के समय 17 साल से कम उम्र के नाबालिग की उम्र को नज़रअंदाज़ करने के अलावा, मजिस्ट्रेट ने इस बात...
पुलिस सुधार पर हाईकोर्ट के निर्देशों को नहीं मानते IAS अधिकारी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया कौटिल्य का ज़िक्र, मामला DoPT को भेजा
एक अनोखे आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को सीनियर IAS अधिकारी संजय प्रसाद के व्यवहार का मामला 'डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सनल एंड ट्रेनिंग' (DoPT) को भेजा, ताकि 'कैबिनेट की नियुक्ति समिति' (ACC) भविष्य की नियुक्तियों के लिए उनकी उपयुक्तता का आकलन कर सके।यह सख्त आदेश जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने दिया। उन्होंने UP सरकार में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) के तौर पर काम कर रहे प्रसाद की कोर्ट के अधिकार को कमज़ोर करने की जानबूझकर की गई कोशिश पर नाराज़गी जताई।फटकार लगाने के लिए कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों...
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पर एक फ़ैसला
कुछ साल पहले केरल में मानसिक रूप से कमज़ोर आदिवासी युवक की लोगों के समूह द्वारा पीट-पीटकर हत्या (लिंचिंग) किए जाने की घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया था। हाल ही में, केरल हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना फ़ैसला सुनाया है। यह फ़ैसला दोषी ठहराए गए आरोपियों की अपील और साथ ही केरल राज्य और मृतक की माँ द्वारा दायर अपील पर आधारित है।यह फ़ैसला इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के बारे में अध्ययन के लिए एक दिलचस्प सामग्री प्रदान करता है। यह एक ऐसा मामला है, जहां अभियोजन पक्ष की सफलता काफ़ी हद तक मौखिक सबूतों के बजाय...
ईंधन बचत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा कदम, कार-पूलिंग और हाइब्रिड सुनवाई को बढ़ावा
ईंधन की खपत कम करने और संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज स्थित प्रधान पीठ और लखनऊ खंडपीठ के लिए कई मितव्ययिता (austerity) उपाय लागू किए हैं। ये कदम भारत के मुख्य न्यायाधीश के पत्र और केंद्र सरकार के कार्यालय ज्ञापन के अनुरूप उठाए गए हैं।नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्री अधिकारियों को कार-पूलिंग अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। साथ ही सभी श्रेणी के कर्मचारियों से भी वाहन साझा करने और जहां संभव हो, सार्वजनिक परिवहन का अधिकतम उपयोग करने को कहा गया...
हाईकोर्ट का यूपी सीएम से आग्रह- अब समय आ गया है कि बड़े अफ़सरों को आपराधिक रूप से ज़िम्मेदार ठहराया जाए; जानिए क्यों
बुधवार को दिए गए एक अहम आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वह इस बात को स्वीकार करें कि अब वह समय आ गया है, जब वरिष्ठ अफ़सरों और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को उनके विभागों या उनके अधीन काम करने वालों की चूकों के लिए जवाबदेह, और यहां तक कि आपराधिक रूप से भी ज़िम्मेदार ठहराया जाए।जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने कहा कि राज्य को "उच्च ज़िम्मेदारी" (Superior Responsibility) का सिद्धांत अपनाना चाहिए, जिसके तहत प्रशासनिक पदानुक्रम में वरिष्ठ अफ़सरों को जवाबदेह...
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों माना कि ऑनलाइन गेमिंग पर रोक लगाने वाले राज्यों के कानून 'पब्लिक ऑर्डर' के दायरे में आते हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची II की प्रविष्टि 1 के तहत 'सार्वजनिक व्यवस्था' (Public Order) के तत्वों की व्याख्या की और यह फैसला सुनाया कि राज्य ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए की गतिविधियों को विनियमित करने और उन पर रोक लगाने के लिए सार्वजनिक व्यवस्था पर अपनी विधायी शक्ति का उपयोग कर सकते हैं।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए यह माना कि संवैधानिक अभिव्यक्ति "सार्वजनिक व्यवस्था" केवल दंगों, हिंसा या राज्य की...
राजस्थान हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता के नार्को-टेस्ट से इनकार पर जताई हैरानी, हत्या की नई जांच के दिए आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में शिकायतकर्ता का नार्को-टेस्ट करने से संबंधित अधिकारी के इनकार पर हैरानी जताई – जबकि शिकायतकर्ता ने इसके लिए सहमति दी थी – और इनकार का आधार यह बताया गया कि वह हिंदी में पारंगत नहीं है।कोर्ट ने कहा कि इसके बजाय अधिकारियों को किसी ऐसे व्यक्ति को नियुक्त करना चाहिए, जो उस गवाह/संदिग्ध या पीड़ित की मातृभाषा से परिचित हो, जिसकी मौजूदगी में यह टेस्ट किया जा सके। कोर्ट ने आगे कहा कि जांच अधिकारी केवल इस आधार पर जांच बंद नहीं कर सकता कि अज्ञात आरोपी व्यक्ति नहीं मिल...
किशोर न्याय कानून के तहत अयोग्यता हटाना और 'नई शुरुआत' का सिद्धांत
सरकारी नौकरी या किसी सार्वजनिक पद के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों के लिए, किसी आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने या किसी लंबित आपराधिक कार्यवाही की जानकारी देना, नौकरी के आवेदन का एक सामान्य हिस्सा होता है। आम बोलचाल की भाषा में इसे 'चरित्र प्रमाण पत्र' के रूप में जाना जाता है। सरकार सहित सभी नियोक्ता, उम्मीदवार के चरित्र और पिछली पृष्ठभूमि की जाँच करते हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वह उम्मीदवार एक 'उपयुक्त व्यक्ति' है। एक संभावित नियोक्ता, उम्मीदवार की पिछली पृष्ठभूमि का मूल्यांकन...
प्रजनन स्वायत्तता और सरकारी लापरवाही: भारत में महिलाओं के शारीरिक अधिकारों का कानूनी विश्लेषण
इंडिया टुडे की हालिया खबरों में यह बताया गया कि मध्य प्रदेश के धार जिले के बाग स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में लगभग 173-180 आदिवासी महिलाओं का नसबंदी ऑपरेशन किया गया। इसके अलावा, मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं के इलाज के नाम पर महिलाओं के गर्भाशय को जबरन निकालने की घटनाएँ भी सामने आई हैं; ऐसा अक्सर इसलिए किया जाता है ताकि उन्हें काम से छुट्टी न देनी पड़े और वे लगातार काम करती रहें। ये घटनाएँ महिलाओं की सुरक्षा और स्वायत्तता के संबंध में सरकार और नियामक प्राधिकरणों पर गंभीर सवाल खड़े...
जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश: अवैध शराब मामले में आरोपी को बिना वेरिफाइड सबूतों के किया था गिरफ्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अलीराजपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे उस जांच अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू करें, जिसने अवैध शराब की ढुलाई के एक मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि यह गिरफ्तारी एक ट्रक बिक्री समझौते के आधार पर की गई थी, जिसकी जांच न तो नोटरी ने की थी और न ही गवाहों ने।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने टिप्पणी की कि जांच करना इसलिए ज़रूरी है, ताकि भविष्य की जांचों में ऐसी गलतियां दोबारा न हों।कोर्ट ने कहा: "संबंधित पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया जाता है कि वे इस मामले...
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: पिता की सहमति के बिना सिंगल मदर भी कर सकती है बच्चे के पासपोर्ट के लिए आवेदन, बशर्ते...
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक सिंगल मदर अपने नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट के लिए पिता की सहमति या हस्ताक्षर के बिना भी आवेदन करने की हकदार है, बशर्ते पासपोर्ट नियमों के तहत निर्धारित घोषणाएँ जमा की गई हों।पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत—विशेष रूप से पासपोर्ट आवेदन पत्र भरने के लिए दिशानिर्देशों के कॉलम 16 और पासपोर्ट मैनुअल/दिशानिर्देशों के क्लॉज़ 4.8 के तहत—एक सिंगल पेरेंट (एकल अभिभावक) निर्धारित हलफनामा/घोषणाएं जमा करके दूसरे अभिभावक की सहमति के बिना भी अपने नाबालिग बच्चे के पासपोर्ट के...
समय पर मुआवज़ा दिए बिना संपत्ति से वंचित करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: एनएच प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उस याचिका को मंज़ूरी दी, जिसमें नेशनल हाईवे के निर्माण के लिए ज़मीन अधिग्रहित की गई, लेकिन मुआवज़े की रकम जारी नहीं की गई। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि ज़मीन मालिकों को समय पर मुआवज़ा दिए बिना उनकी संपत्ति से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीज़न बेंच ने यह टिप्पणी की:"अधिग्रहित ज़मीन के लिए मुआवज़ा पाने का अधिकार सिर्फ़ एक कानूनी हक नहीं है, बल्कि अनुच्छेद 300-A से मिलने वाली एक संवैधानिक गारंटी है। समय पर मुआवज़ा...
बैंक गारंटी पर अपर्याप्त स्टाम्प ड्यूटी एक ठीक होने योग्य कमी, इस आधार पर बोली खारिज करना 'मनमाना': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने पिछले हफ़्ते यह टिप्पणी की कि बैंक गारंटी पर स्टाम्प ड्यूटी में कमी महज़ एक 'चूक' और एक 'ठीक होने योग्य कमी' है, और इसका इस्तेमाल किसी बोली लगाने वाले को बाहर करने के लिए नहीं किया जा सकता।जस्टिस शेखर बी सराफ़ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने इसके परिणामस्वरूप प्रतिवादी (पूर्वोत्तर रेलवे) द्वारा तैयार की गई वित्तीय बोली की तालिका यह देखते हुए रद्द की कि उसने याचिकाकर्ता (M/S कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड) की तकनीकी बोली को इस 'कमज़ोर' आधार पर खारिज कर दिया...




















