हाईकोर्ट

बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन ने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

शुक्रवार को बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने एक्ट्रेस के वकील, एडवोकेट प्रवीण आनंद से कहा कि वे पर्सनैलिटी राइट्स के मुद्दे पर संबंधित फैसलों और अन्य रिसर्च सामग्री का एक संकलन कोर्ट में पेश करें।शुरुआत में ही कोर्ट ने वकील आनंद से पूछा कि पर्सनैलिटी राइट्स के दायरे में क्या-क्या चीजें आती हैं।आनंद ने जवाब दिया कि पर्सनैलिटी राइट्स में किसी व्यक्ति की आवाज़, चेहरा, छवि, या उनके...

14 साल से अलग रहना, पत्नी और बेटे के प्रति पति की बेरुखी क्रूरता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने तलाक बरकरार रखी

कलकत्ता हाईकोर्ट ने महिला को क्रूरता के आधार पर दिए गए तलाक का आदेश बरकरार रखा।अदालत ने कहा कि 14 साल से अधिक समय तक पति-पत्नी का अलग रहना और पति का अपनी पत्नी व बेटे के प्रति उदासीन रवैया यह दर्शाता है कि उनके वैवाहिक संबंध इस हद तक बिगड़ चुके हैं कि अब उनका साथ रहना संभव नहीं है। जस्टिस मधुरेश प्रसाद और जस्टिस पार्थ प्रतिम रॉय की खंडपीठ ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत विवाह का पूरी तरह टूट जाना अपने आप में तलाक का स्वतंत्र आधार नहीं है। हालांकि, यदि वैवाहिक संबंध लंबे समय से...

वैध अनुमति के बिना फैक्ट्री चलाना अपराध, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बिना कारण बताओ नोटिस दिए तत्काल बंद करा सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि वैध अनुमति के बिना फैक्ट्री चलाना अपराध है और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए तत्काल फैक्ट्री बंद करने का आदेश दे सकता है। ऐसी स्थिति में कारण बताओ नोटिस जारी करना अनिवार्य नहीं है, क्योंकि अवैध रूप से फैक्ट्री चलाने वाले संचालक को नोटिस न दिए जाने से उसके किसी कानूनी अधिकार का उल्लंघन नहीं होता।इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने एक स्टील फैक्ट्री की याचिका खारिज की, जिसमें बिना कारण बताओ नोटिस दिए फैक्ट्री बंद करने के आदेश को...

लव जिहाद का आरोप रिकॉर्ड से साबित नहीं, लेकिन आरोपी पुलिस कांस्टेबल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से कलकत्ता हाईकोर्ट का इनकार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि एक महिला को इस्लाम में धर्मांतरित करने के किसी प्रयास का रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से खुलासा नहीं होता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले को 'लव जिहाद' के रूप में पेश करने का आरोप उपलब्ध सामग्री से समर्थित नहीं है और इस शब्द को किसी कानून के तहत परिभाषित नहीं किया गया है।जस्टिस अजय कुमार गुप्ता ने पुलिस कांस्टेबल और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ धोखाधड़ी, गलत पहचान बताने, मारपीट, गलत तरीके से बंधक बनाने और सहमति के बिना यौन संबंध बनाने के आरोपों से जुड़ी आपराधिक...

बरी होने के खिलाफ सेशंस कोर्ट में अपील के लिए हाईकोर्ट की अनुमति जरूरी नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 की धारा 378(1)(a) के तहत किसी आरोपी को बरी किए जाने के खिलाफ सेशंस कोर्ट में दायर अपील के लिए हाईकोर्ट की अनुमति लेना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 378 में संशोधन से केवल अपील का मंच बदला है, अपील करने का मूल अधिकार प्रभावित नहीं हुआ है।जस्टिस रणजीतसिंह राजा भोंसले तीन आरोपियों की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। याचिका में पुणे सेशंस कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें राज्य सरकार की ओर से बरी...

समान काम के लिए समान वेतन का दावा करने वाले संविदा कर्मचारियों को काम की समानता साबित करनी होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि संविदा कर्मचारी समान काम के लिए समान वेतन का दावा कर सकते हैं, बशर्ते वे यह साबित करें कि वे नियमित रूप से नियुक्त कर्मचारियों के समान काम कर रहे थे। हालांकि, काम की प्रकृति, गुणवत्ता, जिम्मेदारियों और संवेदनशीलता में समानता साबित करने का दायित्व कर्मचारियों पर ही होगा।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), झांसी के संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन और भत्ते देने के श्रम आयुक्त के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा...

फैमिली पेंशन का अधिकार सेवा नियमों से तय होगा, उत्तराधिकार कानून से नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 372 के तहत उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी करने की अर्जी पर सुनवाई करने वाली अदालत यह अंतिम रूप से तय नहीं कर सकती कि किसी मृत कर्मचारी की पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य रिटायरमेंट लाभ पाने का हकदार कौन है। ये अधिकार संबंधित सेवा नियमों से तय होते हैं और इन पर फैसला सक्षम प्राधिकारी को लागू नियमों के आधार पर करना होगा, न कि उत्तराधिकार के सामान्य कानून के आधार पर।जस्टिस अनिल कुमार-X ने स्पष्ट किया कि मृत व्यक्ति का कानूनी वारिस कौन...

स्वैच्छिक रिटायरमेंट की तारीख बढ़ाने का आवेदन नजरअंदाज नहीं कर सकते, रिटायरमेंट प्रभावी होने से पहले मांग करना जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी स्वैच्छिक रिटायरमेंट प्रभावी होने से पहले उसकी तारीख बढ़ाने का आवेदन देता है, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसा तब भी लागू होगा, जब संबंधित सेवा नियमों में रिटायरमेंट की तारीख बढ़ाने की स्पष्ट व्यवस्था न हो।चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस इंद्रजीत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 में स्वैच्छिक रिटायरमेंट की तारीख बढ़ाने की प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।लेकिन केवल इस आधार पर कर्मचारी को तारीख बढ़ाने का...

PMLA मामले में पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज की। अरोड़ा को उनकी पूर्व कंपनी से जुड़े करीब 100 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले के मामले में गिरफ्तार किया गया।जस्टिस कुलदीप तिवारी ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया। मामले में विस्तृत आदेश अभी जारी नहीं हुआ। संजीव अरोड़ा ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने गिरफ्तारी, गिरफ्तारी के...

आत्मरक्षा में इस्तेमाल बल का आकलन घटना के समय की परिस्थितियों के आधार पर होना चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि आत्मरक्षा में जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल किए जाने का आकलन किसी शांत और बाद के विश्लेषण के आधार पर नहीं, बल्कि उस समय व्यक्ति को दिखाई दे रहे तत्काल खतरे की परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।जस्टिस फरजंद अली की पीठ ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को हमलावर से गंभीर चोट या जान जाने का खतरा महसूस हो रहा था, तो उस भय और आशंका को आत्मरक्षा के दावे पर विचार करते समय प्रासंगिक माना जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि आत्मरक्षा की दलील का परीक्षण अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण...

दहेज की मांग साबित नहीं होने पर पति की 498A IPC के तहत दोषसिद्धि रद्द: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के एक मामले में पति की दोषसिद्धि और सजा रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब अतिरिक्त दहेज की मांग साबित नहीं हुई, तो मामले के तथ्यों में उससे जुड़ी कथित प्रताड़ना के आरोप को स्वतंत्र रूप से कायम नहीं रखा जा सकता। अदालत ने FIR दर्ज करने में हुई देरी का स्पष्टीकरण नहीं दिए जाने पर भी ध्यान दिया।जस्टिस सुभेंदु सामंत ने पति की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया।मामले के अनुसार, जुलाई 2002 में शादी के बाद पत्नी ने आरोप लगाया...

छह साल का बच्चा मां से दूर रहकर नहीं दे सकता समझदारी भरी पसंद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नानी नहीं, मां को सौंपी कस्टडी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कम उम्र के ऐसे बच्चे, जिसे लंबे समय तक उसकी मां से दूर रखा गया हो, की पसंद को अभिरक्षा तय करने का निर्णायक आधार नहीं बनाया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि छह साल का बच्चा अपने भावनात्मक और शारीरिक हितों को समझते हुए स्वतंत्र रूप से उचित निर्णय लेने में सक्षम नहीं होता। केवल इसलिए कि दादी ने बच्चे की देखभाल की है, उन्हें मां से बेहतर अभिरक्षा का अधिकार नहीं मिल जाता। जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने आगरा की फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द करते...

बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के शिक्षकों की नियुक्ति में UGC के विशेष नियम होंगे लागू, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया कुलाधिपति का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और प्रबंधन विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए निर्धारित विशेष शैक्षणिक योग्यताएं ही लागू होंगी। विश्वविद्यालय के सामान्य पात्रता नियमों के आधार पर इन विशेष योग्यताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट ने इस आधार पर लखनऊ विश्वविद्यालय में दो एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्तियां रद्द करने के कुलाधिपति का आदेश निरस्त किया। जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने डॉ. हिमांशु मोहन और डॉ. संगीता साहू की याचिकाओं को स्वीकार करते...

वकील की सुरक्षा के लिए कानून बनाना बेहद जरूरी, वकील पर हमले के आरोपी को बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने वकीलों की सुरक्षा के लिए व्यापक कानून बनाने की तत्काल जरूरत पर जोर दिया।हाईकोर्ट ने एक वकील पर हमला करने और उसे आपराधिक मुकदमे में पैरवी करने से रोकने की कोशिश करने के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस माधव जामदार ने नासिक जिले के निवासी किरण कहांडल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की। आरोप है कि किरण और उसके कुछ सहयोगियों ने एक वकील के साथ मारपीट की, उसके कार्यालय में तोड़फोड़ की और कंप्यूटर सहित अन्य सामान को नुकसान पहुंचाया। यह घटना इसलिए हुई,...

वकील के भरोसे बैठना काफी नहीं, मुकदमे की स्थिति जानना भी पक्षकार की जिम्मेदारी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पक्षकार अपने अदालत में पेश न होने की पूरी जिम्मेदारी वकील पर नहीं डाल सकते। वकील की कथित लापरवाही के बावजूद पक्षकारों को अपने मुकदमे की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और वकील से संपर्क नहीं होने पर अदालत से जानकारी लेने का प्रयास करना चाहिए।जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अदिति चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक अपील खारिज करते हुए की।अपीलकर्ता ने व्यावसायिक वसूली के मुकदमे में उसके खिलाफ पारित एकपक्षीय फैसले और डिक्री को रद्द करने की मांग की थी।हाईकोर्ट ने पाया कि अपीलकर्ता अपनी...

घटना के समय 2 दोषी थे नाबालिग: हत्या के मामले में सजा मिलने के 45 साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट को चला पता, मामला JJB को भेजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को 1980 के एक हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 2 लोगों की सजा रद्द की। कोर्ट ने पाया कि अपराध के समय वे नाबालिग थे। ट्रायल कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के लगभग 45 साल बाद यह बात सामने आई है।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने उनके दोषसिद्धि (Conviction) को तो बरकरार रखा, लेकिन सजा तय करने का मामला संबंधित किशोर न्याय बोर्ड (JJB) को सौंप दिया, ताकि कानून के अनुसार उन्हें उचित सजा दी जा सके।कोर्ट ने कहा कि यह घटना उस समय हुई, जब...

पहले की अपील वापस लेने के बाद उसी स्टाम्प ड्यूटी आदेश के खिलाफ दूसरी अपील स्वीकार्य नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 56(1-A) के तहत दायर कोई अपील इसलिए खारिज कर दी गई हो क्योंकि अपीलकर्ता ने उसे आगे न बढ़ाने का फैसला किया था, तो कलेक्टर के उसी आदेश के खिलाफ दोबारा अपील दायर नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसी अपील का कोई कानूनी अस्तित्व नहीं है, और इसके तहत राज्य की स्टाम्प निपटान योजना (स्टाम्प सेटलमेंट स्कीम) का लाभ भी नहीं लिया जा सकता।जस्टिस सैयद कमर हसन रिज़वी ने कहा,"यह स्पष्ट है कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 56(1-A) के तहत...

S. 125 CrPC | भरण-पोषण मामले में कथित व्यभिचारी को नोटिस भेजा जा सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चीफ जस्टिस से विचार करने का आग्रह किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को चीफ जस्टिस से आग्रह किया कि वह ऐसे व्यक्ति को नोटिस भेजने के लिए नियम बनाने पर विचार करें। कोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की कार्यवाही में, यदि किसी व्यक्ति का नाम लेकर उस पर व्यभिचार का आरोप लगाया जाता है, तो उसके खिलाफ कोई भी प्रतिकूल फैसला सुनाने से पहले उसे अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए।जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला की पीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति को विशेष रूप से व्यभिचारी ठहराने वाले न्यायिक फैसले के परिणाम केवल भरण-पोषण के दावे तक सीमित...

व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रति बहुत कम सम्मान: दिल्ली हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में पुलिस की खराब जांच पर कड़ी टिप्पणी की, जमानत दी

दिल्ली हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपी को जमानत देते हुए इस मामले में 'बेहद खराब जांच' करने के लिए दिल्ली पुलिस की आलोचना भी की।जस्टिस गिरीश कथपालिया ने इस बात पर सवाल उठाया कि अप्राकृतिक मौत की जानकारी मिलने के बावजूद FIR दर्ज करने में देरी क्यों हुई।कोर्ट ने गौर किया कि स्थानीय पुलिस को घटना की सूचना मिलने के तीन दिन से भी अधिक समय बाद FIR दर्ज की गई, जबकि FIR दर्ज होने के चार घंटे के भीतर ही पूरी जांच पूरी कर ली गई।कोर्ट ने कहा,"इससे पता चलता है कि स्थानीय पुलिस ने इस मामले में किसी व्यक्ति की...