हाईकोर्ट

आरोप वाला गिरफ़्तारी मेमो अनुच्छेद 22(1) की गिरफ़्तारी के आधार बताने की शर्त को पूरा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
आरोप वाला गिरफ़्तारी मेमो अनुच्छेद 22(1) की गिरफ़्तारी के आधार बताने की शर्त को पूरा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ़्तार व्यक्ति को गिरफ़्तारी के आधार बताने की संवैधानिक शर्त तब पूरी मानी जाती है, जब गिरफ़्तारी मेमो, जिसमें गिरफ़्तारी का आधार बनाने वाले ज़रूरी तथ्यात्मक आरोप शामिल हों, आरोपी को दे दिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि इसका मकसद आरोपों के सार की सही जानकारी देना है, न कि गिरफ़्तारी मेमो से अलग कोई दूसरा दस्तावेज़ देना। इसी आधार पर कोर्ट ने गिरफ़्तारी और उसके बाद की रिमांड को कानूनी तौर पर सही ठहराया।जस्टिस आशीष नैथानी ने 09.10.2024 के...

पश्चिम बंगाल चुनाव: हाईकोर्ट में केवल केंद्रीय व PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइज़र बनाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई
पश्चिम बंगाल चुनाव: हाईकोर्ट में केवल केंद्रीय व PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइज़र बनाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार (30 अप्रैल) को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना के लिए केवल केंद्र सरकार और PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइज़र नियुक्त करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई की।याचिका में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के उस मेमो को चुनौती दी गई है, जिसमें हर काउंटिंग टेबल पर कम से कम एक केंद्रीय कर्मचारी की नियुक्ति अनिवार्य की गई है।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने Representation of the People Act, 1951 का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह का आदेश जारी करना...

वसुंधरा राजे के फर्जी पत्र विवाद को लेकर पुलिस पर तीन लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखने का आरोप, हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश
वसुंधरा राजे के 'फर्जी पत्र' विवाद को लेकर पुलिस पर तीन लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखने का आरोप, हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को मजिस्ट्रेट कोर्ट को निर्देश दिया कि वह उन तीन लोगों के बयान दर्ज करे, जिन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें बिना कोर्ट में पेश किए लगभग दो दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखा। इन लोगों पर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से जुड़ा कथित पत्र फैलाने का आरोप है, जिसमें विभिन्न मुद्दों पर BJP के रुख की आलोचना की गई।राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश किए गए विरोधाभासी बयानों को संज्ञान में लेते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: महिला ऑपरेटर से पुलिसकर्मियों की सांस सूंघवाना “चौंकाने वाला”
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: महिला ऑपरेटर से पुलिसकर्मियों की सांस सूंघवाना “चौंकाने वाला”

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (29 अप्रैल) को एक पुलिस इंस्पेक्टर के आचरण पर कड़ी नाराज़गी जताई, जिस पर आरोप है कि उसने डायल-100 कंट्रोल रूम में निजी महिला कॉल ऑपरेटर से नशे में संदिग्ध पुरुष पुलिसकर्मियों की सांस चेक करवाई।चीफ़ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा—“क्या यह एक अधिकारी के लिए उचित है? क्या वह खुद जांच नहीं कर सकता था? एक महिला कर्मचारी को पुरुष पुलिसकर्मियों की सांस सूंघने के लिए क्यों बुलाया गया?”यह मामला 19 फरवरी 2026 के...

हरभजन सिंह पंजाब में नहीं रह रहे हैं: राज्य सरकार ने उनकी सुरक्षा हटाने को चुनौती देने वाली याचिका पर कहा
हरभजन सिंह पंजाब में नहीं रह रहे हैं: राज्य सरकार ने उनकी सुरक्षा हटाने को चुनौती देने वाली याचिका पर कहा

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका पूर्व क्रिकेटर और अब सांसद (MP) बने हरभजन सिंह ने दायर की थी। इसमें उन्होंने अपनी सुरक्षा हटाए जाने को चुनौती दी और आरोप लगाया कि यह राजनीतिक बदले की भावना से किया गया और इसमें सही प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।इस याचिका में 25 अप्रैल, 2026 का आदेश रद्द करने की मांग की गई। इस आदेश के तहत सिंह की सुरक्षा कथित तौर पर बिना किसी नए खतरे के आकलन, बिना किसी नोटिस या सुनवाई का मौका दिए हटा दी गई थी।पंजाब के एडवोकेट जनरल...

झूठी जानकारी देकर जनहित याचिका दायर करने पर वकील पर 25 हजार रुपये का जुर्माना, इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त
झूठी जानकारी देकर जनहित याचिका दायर करने पर वकील पर 25 हजार रुपये का जुर्माना, इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सड़क अतिक्रमण के खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वाले वकील पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने अपने शपथपत्र में गलत जानकारी दी और अपने विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों को छिपाया। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने कहा कि यह याचिका न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है और ऐसे मामलों में लागत लगाना आवश्यक है ताकि निजी स्वार्थ के लिए जनहित याचिका का सहारा लेने वालों को हतोत्साहित किया जा सके।याचिकाकर्ता पेशे से एडवोकेट है।...

करिश्मा कपूर के बच्चों को अंतरिम राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रिया कपूर को संजय कपूर की संपत्ति हस्तांतरित करने से रोका
करिश्मा कपूर के बच्चों को अंतरिम राहत: दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रिया कपूर को संजय कपूर की संपत्ति हस्तांतरित करने से रोका

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर को उनकी संपत्तियों के हस्तांतरण या निस्तारण से रोकते हुए करिश्मा कपूर के बच्चों समायरा कपूर और उनके भाई को अंतरिम राहत प्रदान की।जस्टिस ज्योति सिंह ने कहा कि कथित वसीयत को लेकर वादियों तथा संजय कपूर की माता रानी कपूर द्वारा संदिग्ध परिस्थितियों का उल्लेख किया गया और इन संदेहों को दूर करने का दायित्व प्रिया कपूर पर है, जिसका परीक्षण मुकदमे के दौरान होगा।अदालत ने कहा कि जब तक वाद लंबित है तब तक दिवंगत की संपत्ति संरक्षित रखी जानी...

तलाक वाद में मुद्दे तय किए बिना निर्णय देना केवल अनुमान आधारित आकलन: पटना हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया
तलाक वाद में मुद्दे तय किए बिना निर्णय देना केवल अनुमान आधारित आकलन: पटना हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13 के तहत तलाक संबंधी वाद में यदि ट्रायल कोर्ट स्पष्ट मुद्दे तय किए बिना निर्णय देता है तो ऐसा निर्णय विधिसम्मत नहीं माना जा सकता और वह केवल “अनुमान आधारित आकलन” बनकर रह जाता है।जस्टिस नानी टैगिया और जस्टिस आलोक कुमार पांडे की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए मुजफ्फरपुर फैमिली कोर्ट द्वारा पति की तलाक याचिका खारिज करने का आदेश रद्द किया। निर्णय जस्टिस आलोक कुमार पांडे ने लिखा।पति ने क्रूरता, परित्याग और व्यभिचार के आधार पर विवाह विच्छेद की...

पंचायत चुनाव 2026: OBC आयोग गठन में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार से मांगी स्पष्ट समयसीमा
पंचायत चुनाव 2026: OBC आयोग गठन में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार से मांगी स्पष्ट समयसीमा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026 के लिए समर्पित अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग के गठन में देरी पर राज्य सरकार से कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि आयोग का गठन आखिर कब तक किया जाएगा।जस्टिस सौरभ लवानिया की पीठ ने पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें आयोग गठन की स्पष्ट समयसीमा बतानी होगी।मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।अदालत अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने दायर किया। याचिका में...

अंतरराष्ट्रीय अभिरक्षा विवाद में हेबियस कॉर्पस याचिका सुनने से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार, पिता को NCPCR जाने का निर्देश
अंतरराष्ट्रीय अभिरक्षा विवाद में हेबियस कॉर्पस याचिका सुनने से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार, पिता को NCPCR जाने का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक पिता द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई से इनकार किया, जिसमें उसने अमेरिका में अपनी पूर्व पत्नी के साथ रह रहे नाबालिग पुत्र को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की मांग की थी।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के समक्ष जाने का निर्देश दिया यह कहते हुए कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय अभिरक्षा विवादों के समाधान के लिए आयोग के पास विशेष मध्यस्थता तंत्र उपलब्ध है।अदालत ने कहा,“NCPCR ऐसे मामलों से व्यापक रूप से...

हिंदू विवाह अधिनियम | धारा 13B में अलग रहना का मतलब सिर्फ अलग घर में रहना नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते खत्म होना: पटना हाईकोर्ट
हिंदू विवाह अधिनियम | धारा 13B में 'अलग रहना' का मतलब सिर्फ अलग घर में रहना नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते खत्म होना: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि Hindu Marriage Act, 1955 की धारा 13B के तहत “अलग रहना” (living separately) का अर्थ केवल शारीरिक दूरी नहीं, बल्कि वैवाहिक दायित्वों का पूर्ण रूप से समाप्त होना है। कोर्ट ने उस मामले में आपसी सहमति से तलाक की याचिका खारिज करने के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पक्षकारों ने वैधानिक अवधि के भीतर वैवाहिक संबंध फिर से स्थापित कर लिए थे।जस्टिस नानी तागिया और जस्टिस आलोक कुमार पांडेय की खंडपीठ यह अपील सुन रही थी, जो 6 जून 2023 को शियोहर फैमिली कोर्ट द्वारा पारित आदेश के...

महाकुंभ भगदड़: हाईकोर्ट ने कहा—मुआवजा दावों का फैसला 30 दिन में जिला प्रशासन करे, आयोग नहीं
महाकुंभ भगदड़: हाईकोर्ट ने कहा—मुआवजा दावों का फैसला 30 दिन में जिला प्रशासन करे, आयोग नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनवरी 2025 के महाकुंभ मेला भगदड़ मामले में स्पष्ट किया है कि पीड़ितों को अनुग्रह (ex gratia) मुआवजा देने के दावों का निपटारा राज्य द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग नहीं, बल्कि जिला प्रशासन और मेला प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा, और यह प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस सत्य वीर सिंह की खंडपीठ संजय कुमार शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 29 जनवरी 2025 (मौनी अमावस्या) को हुई भगदड़ में उनके रिश्तेदार की मौत पर मुआवजा मांगा गया था।अदालत ने...

पुलिस को नहीं मिला फरार दुष्कर्म आरोपी, लेकिन हाइकोर्ट में हलफनामा दाखिल करने पहुंचा; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराज़गी, CBI जांच पर विचार
पुलिस को नहीं मिला फरार दुष्कर्म आरोपी, लेकिन हाइकोर्ट में हलफनामा दाखिल करने पहुंचा; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराज़गी, CBI जांच पर विचार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कड़ी फटकार लगाई, जब यह सामने आया कि जिस सामूहिक दुष्कर्म आरोपी को पुलिस महीनों से फरार और अज्ञात स्थान पर बता रही है। वही आरोपी हाइकोर्ट की कार्यवाही में परोक्ष रूप से शामिल हो रहा था और हाल ही में हलफनामा दाखिल करने के लिए उसका आधिकारिक फोटोग्राफ भी न्यायालय परिसर में लिया गया।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह स्थिति चौंकाने वाली है और प्रथम दृष्टया जांच अधिकारी...

धुरंधर पटकथा विवाद: संतोष कुमार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को दिया आश्वासन, आदित्य धर के खिलाफ मानहानिकारक बयान नहीं देंगे
धुरंधर पटकथा विवाद: संतोष कुमार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को दिया आश्वासन, आदित्य धर के खिलाफ मानहानिकारक बयान नहीं देंगे

फिल्म धुरंधर की कथित पटकथा नकल विवाद में फिल्मकार संतोष कुमार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को आश्वासन दिया कि वह निर्देशक आदित्य धर के खिलाफ भविष्य में कोई मानहानिकारक बयान नहीं देंगे।जस्टिस आरिफ डॉक्टर के समक्ष सुनवाई के दौरान संतोष कुमार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल आदित्य धर के विरुद्ध उपलब्ध विधिक उपाय अपनाएंगे, लेकिन मीडिया में अब कोई अपमानजनक या मानहानिकारक टिप्पणी नहीं करेंगे।संतोष कुमार का दावा है कि फिल्म धुरंधर की पटकथा उनकी मूल रचना डी साहेबद की नकल है। इस संबंध में उन्होंने...

सह-दोषियों को एक साथ पैरोल/फरलो देने पर पूर्ण रोक नहीं, उपयुक्त मामलों में मिल सकती है राहत: दिल्ली हाईकोर्ट
सह-दोषियों को एक साथ पैरोल/फरलो देने पर पूर्ण रोक नहीं, उपयुक्त मामलों में मिल सकती है राहत: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सह-दोषियों को एक साथ पैरोल या फरलो दिए जाने पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।अदालत ने कहा कि उपयुक्त परिस्थितियों में सक्षम प्राधिकारी कड़ी जांच के बाद ऐसी राहत प्रदान कर सकता है।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र दुडेजा की खंडपीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें दिल्ली कारागार नियम, 2018 के नियम 1212 की टिप्पणी (2) और नियम 1224 की टिप्पणी (1) को चुनौती दी गई। इन प्रावधानों में कहा गया है कि सह-अभियुक्तों को एक साथ पैरोल या फरलो देना “सामान्यतः अनुमेय नहीं”...

भोजशाला विवाद: सरस्वती मंदिर तोड़े जाने का कोई ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं, यह केवल काल्पनिक कथा- मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट से कहा
भोजशाला विवाद: सरस्वती मंदिर तोड़े जाने का कोई ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं, यह केवल काल्पनिक कथा- मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट से कहा

भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद में मुस्लिम पक्ष ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को बताया कि भोजशाला परिसर में सरस्वती मंदिर तोड़े जाने का कोई ऐतिहासिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है और इस संबंध में प्रस्तुत दावा केवल काल्पनिक परिकल्पना है।मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष यह दलील दी।विवाद 11वीं शताब्दी के संरक्षित स्मारक भोजशाला से संबंधित है, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित किया गया। हिंदू पक्ष इस स्थल को देवी...