हाईकोर्ट
केस ट्रांसफर से पहले हाईकोर्ट से मंज़ूरी मिलने के बावजूद सिविल कोर्ट टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन की नए सिरे से जांच कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि केस ट्रांसफर करने से पहले हाईकोर्ट द्वारा 'लेटर्स पेटेंट' के क्लॉज़ XII के तहत मंज़ूरी देने का मतलब यह नहीं है कि बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट, केस ट्रांसफर होने के बाद टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन के मुद्दे की नए सिरे से जांच नहीं कर सकता।कोर्ट ने कहा कि बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट एक्ट, 1948 की धारा 4A(2) के तहत सिटी सिविल कोर्ट को ट्रांसफर किए गए केस को ऐसे देखना होता है जैसे वह मूल रूप से उसी के सामने दायर किया गया हो। अगर उसे लगता है कि उसके पास टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन नहीं...
एमपी हाईकोर्ट ने कांग्रेस से जुड़े WhatsApp ग्रुप में AI-वीडियो फैलाने के मामले में 'हेबियस कॉर्पस' याचिकाओं को बंद किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'हेबियस कॉर्पस' याचिकाओं के एक समूह को बंद किया। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि तीन लोगों को पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया और बाद में राजस्थान पुलिस को सौंप दिया। उन पर कांग्रेस से जुड़े WhatsApp ग्रुप में एक न्यूज़ चैनल की पहचान का गलत इस्तेमाल करके AI से बदला हुआ (मैनिपुलेटेड) वीडियो फैलाने का आरोप है। [2026 LiveLaw (MP) 282]बता दें, राजस्थान पुलिस ने दावा किया कि एक न्यूज़ चैनल के क्राइम रिपोर्टर ने चैनल की पहचान का गलत इस्तेमाल करके AI से बदले गए...
POCSO | क्या कथित रक्तस्राव से पेनेट्रेशन का अनुमान लगाया जा सकता है, जब मेडिकल रिपोर्ट में कोई चोट नहीं दिखाई गई हो? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चोटों की अनुपस्थिति, अपने आप में बलात्कार या प्रवेशन यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज नहीं करती। हालांकि, कथित रक्तस्राव से प्रवेश का अनुमान अत्यधिक संदिग्ध हो जाता है जब एक समसामयिक मेडिकल रिपोर्ट संतोषजनक स्पष्टीकरण के बिना किसी भी शारीरिक चोट को पूरी तरह से खारिज कर देती है।जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने कहा कि हालांकि भरोसेमंद नेत्र संबंधी गवाही आम तौर पर चिकित्सा राय पर हावी होती है, लेकिन समसामयिक चिकित्सा निष्कर्षों को नजरअंदाज...
Krishna Janmabhoomi Dispute | साइट पर एंट्री और 'कार सेवा' पर रोक की मांग वाली याचिका: हाईकोर्ट ने DM और SSP से मांगी रिपोर्ट
श्री कृष्ण जन्मभूमि मालिकाना हक विवाद के चल रहे मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अर्ज़ी दी गई। इसमें अधिकारियों से मांग की गई कि वे किसी भी व्यक्ति या समूह को विवादित जगह पर मीटिंग करने, "कार सेवा" करने या कोई कार्यक्रम आयोजित करने से रोकें।यह अर्ज़ी आशुतोष महाराज ने वकील रीना एन. सिंह के ज़रिए दायर की। वह खुद को मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट (रजिस्टर्ड) का अध्यक्ष बताते हैं।अर्ज़ी में खास तौर पर राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की गई कि वे किसी भी व्यक्ति या समूह को...
तारीख पर तारीख आपराधिक न्याय व्यवस्था की पहचान नहीं बन सकती: 24 साल से लंबित अपहरण मुकदमे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 24 वर्षों से लंबित एक अपहरण के मुकदमे पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि तारीख पर तारीख आपराधिक न्याय व्यवस्था की पहचान नहीं बन सकती। अदालत ने कहा कि वर्षों तक बिना किसी सार्थक प्रगति के मुकदमा लंबित रहना न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष एवं शीघ्र सुनवाई के अधिकार के विपरीत है।जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने वर्ष 2001 के अपहरण के एक मामले में दो आरोपियों को अग्रिम जमानत देते हुए यह टिप्पणी की।अदालत ने कहा,"वर्षों तक कार्यवाही...
इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला: पुराने भूमि अधिग्रहण कानून के निरस्त होने के बाद जारी हुई अधिसूचना पर कार्रवाई अवैध
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत जारी अधिसूचना पर भले ही 1 जनवरी 2014 से पहले की तारीख अंकित हो, लेकिन उसका प्रकाशन 1 जनवरी 2014 के बाद हुआ है, तो ऐसी पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू से ही अवैध मानी जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुराने कानून के निरस्त होने के बाद उसके तहत नई अधिग्रहण कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती।जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि अधिसूचना पर लिखी तारीख का कोई कानूनी महत्व नहीं है। महत्वपूर्ण यह...
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: दंगे के मामले में सम्मानजनक बरी होने की जानकारी छिपाने पर पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी बरकरार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दंगे और ईंट-पत्थर फेंकने के मामले में लाभ के संदेह (बेनिफिट ऑफ डाउट) के आधार पर बरी हुए पुलिस कांस्टेबल की सेवा से बर्खास्तगी को सही ठहराया। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने यह तथ्य छिपाया कि उसकी बरी होना सम्मानजनक (क्लीन) नहीं था। ऐसे व्यक्ति की पुलिस जैसे अनुशासित बल में नियुक्ति पुलिस की अनुशासन व्यवस्था और प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े करेगी।जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की आपराधिक मामले में संलिप्तता भले ही संदेहास्पद रही हो लेकिन उसके खिलाफ लगाए गए आरोप...
NEET पेपर लीक मामला: पटना हाईकोर्ट ने एक आरोपी को दी जमानत
पटना हाईकोर्ट ने NEET पेपर लीक मामले में एक आरोपी को जमानत दी। आरोपी का नाम FIR में नहीं है, बल्कि जांच के दौरान सामने आया। अदालत उस मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र हासिल कर उसे विभिन्न परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की कथित साजिश का आरोप है।जस्टिस अशोक कुमार पांडेय की एकल पीठ ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 406, 420, 414, 467, 468, 471, 120बी तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66(सी) के तहत दर्ज मामले में आरोपी की जमानत याचिका...
लिखित बयान दाखिल करने का अधिकार खत्म होने पर प्रतिवादी अपना साक्ष्य पेश नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी प्रतिवादी का लिखित बयान दाखिल करने का अधिकार समाप्त हो गया है, तो उसे अपने पक्ष में साक्ष्य पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि साक्ष्य केवल उन्हीं तथ्यों को सिद्ध करने के लिए दिया जा सकता है, जिनका उल्लेख पक्षकार ने अपनी दलीलों में किया हो। जब लिखित बयान ही नहीं है, तो उसके समर्थन में साक्ष्य देने का भी कोई आधार नहीं बनता।जस्टिस मनीष कुमार निगम ने कहा,"यदि कोई पक्षकार किसी महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख अपनी दलीलों में नहीं करता तो वह उस...
DHCBA ने फिलहाल वापस ली हड़ताल, चीफ जस्टिस और कानून मंत्री से बातचीत के बाद फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने जिला अदालतों की आर्थिक अधिकारिता 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में चल रही हड़ताल को फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया।यह निर्णय केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया।DHCBA ने अपने सदस्यों को जारी सूचना में बताया कि कार्यकारिणी समिति ने सर्वसम्मति से मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए हड़ताल को "फिलहाल के लिए स्थगित" करने का निर्णय...
निर्माता पर कार्रवाई से पहले निरीक्षण और जांच की प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी निर्माता के खिलाफ विधिक माप विज्ञान (पैकेज्ड वस्तु) नियम, 2011 के तहत कार्रवाई करने से पहले नियम 19 और 21 में निर्धारित निरीक्षण एवं परीक्षण की प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। इन नियमों की अनदेखी कर की गई कार्रवाई कानूनन टिकाऊ नहीं होगी।जस्टिस आलोक माथुर ने कहा,"नियम 19 और 21 में निर्धारित पूर्व शर्तें अनिवार्य हैं। इनका उद्देश्य निर्माता और विक्रेता दोनों के हितों की रक्षा करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक दोषी के खिलाफ ही कार्रवाई हो।" मामला...
₹6.33 करोड़ रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाजी इकबाल के खिलाफ जांच STF से SFIO को सौंपी, FIR रद्द करने से इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹6.33 करोड़ के कथित रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामले में पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाला के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए जांच उत्तर प्रदेश एसटीएफ (STF) से लेकर सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) को सौंपने का आदेश दिया है।जस्टिस चंद्रधारी सिंह और जस्टिस लक्ष्मीकांत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि जब आरोप स्पष्ट हों और प्रथम दृष्टया अपराध बनता हो, तब शुरुआती चरण में आपराधिक कार्यवाही को रोका नहीं जा सकता। अदालत ने कहा कि एफआईआर रद्द करने से शिकायतकर्ता के पास कोई...
हरभजन सिंह की सुरक्षा इसलिए नहीं हटाई गईकि उन्होंने AAP छोड़ी, उनके घर के बाहर 'गद्दार' कहकर विरोध करना कोई खतरा नहीं: हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस लेने के मामले में दखल देने से इनकार किया। कोर्ट का मानना है कि आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने के बाद उनके घर के बाहर विरोध-प्रदर्शन और उन्हें "गद्दार" बताने वाले पोस्टर लगाने से उनकी जान और आज़ादी को खतरा साबित नहीं होता।जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने कहा,"यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता की सुरक्षा अचानक पार्टी छोड़ने की वजह से हटाई गई। सुरक्षा हटाने का फैसला रिव्यू कमेटी ने बहुत पहले ही ले लिया था, जिसे नकारा नहीं गया। उनके घर...
फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के इस्तेमाल पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, याचिकाकर्ता और उसके वकील के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) में फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों के इस्तेमाल का प्रथम दृष्टया मामला पाए जाने पर याचिकाकर्ता और उसके अधिवक्ता के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट से रिकॉर्ड पर मौजूद हस्ताक्षरों में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं, जिससे जालसाजी और दस्तावेजों में हेरफेर की आशंका बनती है।चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कुशीनगर...
प्रेम विवाह में दहेज मांग का आरोप पहली नजर में मानना मुश्किल, कर्नाटक हाईकोर्ट ने पति को जमानत दी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि यदि विवाह प्रेम विवाह (लव मैरिज) है, तो शादी के समय और उसके बाद दहेज मांगे जाने के आरोप पहली नजर में स्वीकार करना कठिन हो जाता है। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने और दहेज प्रताड़ना के आरोपों में गिरफ्तार एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति को जमानत दे दी।जस्टिस एस. विश्वजीत शेट्टी की एकल पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि पति-पत्नी ने वर्ष 2023 में दोनों परिवारों की सहमति से प्रेम विवाह किया था। दोनों निजी कंपनियों में...
'हर शादी का अधूरा वादा रेप नहीं': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेप और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी को किया बरी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल शादी से इनकार कर देने या शादी का वादा पूरा न होने मात्र से किसी व्यक्ति को दुष्कर्म (धारा 376 IPC) और आत्महत्या के लिए उकसाने (धारा 306 IPC) का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने कहा कि यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी ने शुरुआत से ही शादी करने का इरादा नहीं रखा था और झूठा वादा केवल शारीरिक संबंध बनाने के लिए किया था।जस्टिस राजेंद्र कुमार वानी की पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि को रद्द करते हुए आरोपी को बरी कर...
वकालतनामे पर हस्ताक्षर विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक जांच के दिए आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर स्थित नेहरू विद्यापीठ इंटर कॉलेज के प्रबंधन से जुड़े मामले में विवादित वकालतनामे पर किए गए हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच कराने का आदेश दिया है। अदालत के समक्ष एक पक्षकार ने दावा किया कि उसने न तो वकालतनामे पर हस्ताक्षर किए और न ही संबंधित अधिवक्ता को अपनी ओर से पेश होने के लिए अधिकृत किया था।जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ के समक्ष यह विवाद पुनर्विचार याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ता शिव शंकर सिंह ने कहा कि उन्होंने संबंधित अधिवक्ता को कभी नियुक्त नहीं...
'सतलुज' को ओटीटी से हटाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का इनकार
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गायक और एक्टर दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलुज' को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले में उपयुक्त पक्षकार नहीं है।एक्टिंग चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि जब याचिकाकर्ता न तो फिल्म के निर्देशक हैं और न ही निर्माता, तो उन्हें यह याचिका दायर करने का अधिकार कैसे है।इस पर याचिकाकर्ता ने कहा,"हम याचिका वापस ले लेते हैं और इसे फिल्म के...
चुनाव याचिका में जाति प्रमाणपत्र की वैधता की जांच नहीं कर सकता चुनाव न्यायाधिकरण: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान चुनाव न्यायाधिकरण किसी जाति प्रमाणपत्र की वैधता की जांच नहीं कर सकता और न ही उसे फर्जी घोषित करने का अधिकार रखता है।जस्टिस नीरज तिवारी ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र की वैधता तय करने या उसे निरस्त करने का अधिकार केवल राज्य सरकार द्वारा गठित जिला, मंडलीय और राज्य स्तरीय जांच समितियों को है। चुनाव न्यायाधिकरण इस विषय पर निर्णय देने का अधिकार नहीं रखता।कोर्ट ने कहा,"अब यह पूरी तरह...
चार्जशीट दाखिल करने से पहले SHO स्वतंत्र विवेक का करें इस्तेमाल, महज 'पोस्ट ऑफिस' नहीं हैं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) केवल जांच अधिकारी (IO) द्वारा तैयार की गई चार्जशीट अदालत भेजने वाले "पोस्ट ऑफिस" नहीं हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और कानून के अनुरूप हुई है।जस्टिस अनूप कुमार ढंड की पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा SHO के खिलाफ लिए गए संज्ञान को बरकरार रखते हुए कहा कि चार्जशीट दाखिल करना महज औपचारिकता नहीं है। SHO को रिकॉर्ड और साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से परीक्षण करना अनिवार्य है।मामला क्या था?याचिकाकर्ता एक सड़क दुर्घटना में...




















