हाईकोर्ट

CPC के ऑर्डर 33 नियम 9 के तहत निधन व्यक्ति के तौर पर मुकदमा करने की अनुमति वापस नहीं ली जाती, तब तक वादी को कोर्ट फीस देने की ज़रूरत नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट
CPC के ऑर्डर 33 नियम 9 के तहत 'निधन व्यक्ति' के तौर पर मुकदमा करने की अनुमति वापस नहीं ली जाती, तब तक वादी को कोर्ट फीस देने की ज़रूरत नहीं: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक 'निधन व्यक्ति' (indigent person) के तौर पर मुकदमा करने की अनुमति, जो वादी को दी गई, उसे पहले सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर 33 नियम 9 के अनुसार वापस नहीं लिया जाता, तब तक केवल कोर्ट फीस जमा करने की मांग वाली अर्ज़ी के आधार पर वादी को कोर्ट फीस जमा करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।कोर्ट ने पाया कि प्रतिवादियों ने वादी को 'निधन व्यक्ति' के तौर पर मुकदमा करने की अनुमति वापस लेने की मांग नहीं की, बल्कि बाकी सबूत दर्ज करने से पहले कोर्ट फीस जमा करने का...

हरेन पांड्या मर्डर केस में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सज़ा कम करने की अर्ज़ी पर 6 महीने के अंदर फ़ैसला करे राज्य: गुजरात हाईकोर्ट
हरेन पांड्या मर्डर केस में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सज़ा कम करने की अर्ज़ी पर 6 महीने के अंदर फ़ैसला करे राज्य: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह मोहम्मद असगर अली की सज़ा कम करने की अर्ज़ी पर छह महीने के अंदर फ़ैसला ले। असगर अली को राज्य के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।जस्टिस एमआर मेंगडे ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में पेश की गई जेल की रिपोर्ट से पता चलता है कि याचिकाकर्ता की सज़ा कम करने के मामले पर विचार करने की प्रक्रिया चल रही है। सलाहकार समिति की राय मिल गई है और इसे जल्द ही संबंधित अधिकारी के सामने पेश किया जाएगा।कोर्ट ने...

फोरम कन्वेनियंस का सिद्धांत CAT के उन नियमों को नहीं बदल सकता, जो अधिकार क्षेत्र तय करने के लिए आवेदक की जगह को प्राथमिकता देते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
'फोरम कन्वेनियंस' का सिद्धांत CAT के उन नियमों को नहीं बदल सकता, जो अधिकार क्षेत्र तय करने के लिए आवेदक की जगह को प्राथमिकता देते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें सर्विस से जुड़े विवाद को एर्नाकुलम बेंच से दिल्ली की प्रिंसिपल बेंच में ट्रांसफर करने से इनकार कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि 'फोरम कन्वेनियंस' का सिद्धांत CAT (प्रक्रिया) नियमों के तहत बनी कानूनी व्यवस्था को नहीं बदल सकता, जो आवेदक की पोस्टिंग की जगह को प्राथमिकता देती है।जस्टिस सी. हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ला की डिवीजन बेंच ने कहा कि सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (प्रक्रिया) नियम, 1987 के नियम...

कांग्रेस MLA के BJP में शामिल होने का कोई सबूत नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दल-बदल की कार्यवाही में तेज़ी लाने से इनकार किया
कांग्रेस MLA के BJP में शामिल होने का कोई सबूत नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दल-बदल की कार्यवाही में तेज़ी लाने से इनकार किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस MLA उमंग सिंघार की याचिका खारिज की। उन्होंने स्पीकर के पास एक अर्ज़ी दी थी, जिसमें बीना निर्वाचन क्षेत्र की MLA निर्मला सप्रे को दल-बदल के आधार पर अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। [2026 LiveLaw (MP) 234]एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीज़न बेंच ने सप्रे (प्रतिवादी नंबर 4) की दलीलों पर ध्यान दिया। सप्रे ने कहा था कि न तो उन्होंने INC से इस्तीफ़ा दिया है और न ही BJP में शामिल हुई हैं, और उन्हें हाईकोर्ट और विधानसभा स्पीकर के सामने एक...

झारखंड हाईकोर्ट ने पुरुष एसिड अटैक पीड़ितों के लिए मुआवज़ा स्कीम में बदलाव का सुझाव दिया, पीड़ित का मुआवज़ा बढ़ाकर ₹15 लाख किया
झारखंड हाईकोर्ट ने पुरुष एसिड अटैक पीड़ितों के लिए मुआवज़ा स्कीम में बदलाव का सुझाव दिया, पीड़ित का मुआवज़ा बढ़ाकर ₹15 लाख किया

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य को 'झारखंड पीड़ित मुआवज़ा स्कीम, 2016' के तहत पुरुष एसिड अटैक पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवज़े पर फिर से विचार करना चाहिए। कोर्ट ने 2019 की संशोधन स्कीम के तहत पुरुष और महिला पीड़ितों को मिलने वाले मुआवज़े में बड़े अंतर को देखते हुए यह बात कही।जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की डिवीज़न बेंच ने एसिड अटैक पीड़ित को मिलने वाले मुआवज़े को ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख करते हुए यह टिप्पणी की।कोर्ट एक सिंगल जज के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई...

POCSO Act के तहत समन जारी करना तब सही नहीं, जब शिकायत में लगाए गए आरोप, समन जारी करने से पहले के सबूतों में न हों: उत्तराखंड हाईकोर्ट
POCSO Act के तहत समन जारी करना तब सही नहीं, जब शिकायत में लगाए गए आरोप, समन जारी करने से पहले के सबूतों में न हों: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को सिर्फ़ शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर IPC की धारा 354A और POCSO Act की धारा 11/12 के तहत समन नहीं किया जा सकता, जब उन आरोपों की पुष्टि CrPC की धारा 200 और 202 के तहत दर्ज बयानों से न होती हो। कोर्ट ने कहा कि अगर शिकायतकर्ता और गवाहों के बयानों में कथित अपराधों के ज़रूरी तत्व मौजूद नहीं हैं तो उन प्रावधानों के तहत समन जारी करना सही नहीं होगा।जस्टिस सिद्धार्थ साह एक याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें IPC की धारा 323, 354A, 504 और 506 और POCSO Act की...

झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू में कस्टडी में हुई कथित मौत की न्यायिक जांच का आदेश दिया, BNSS की धारा 196(2) के तहत जांच करने को कहा
झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू में कस्टडी में हुई कथित मौत की न्यायिक जांच का आदेश दिया, BNSS की धारा 196(2) के तहत जांच करने को कहा

झारखंड हाईकोर्ट ने पलामू जिले में व्यक्ति की कस्टडी में हुई मौत और उस दौरान उसे दी गई यातना के आरोपों की न्यायिक जांच का आदेश दिया। कोर्ट 'डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सुरक्षा उपायों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाली अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई कर रहा था।जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की डिवीजन बेंच ने कहा कि अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने से पहले यह तय करना ज़रूरी है कि क्या किसी सरकारी अधिकारी ने 'डी.के. बसु' मामले में तय...

फैसले से पहले वैवाहिक अदालतों को सुलह की कोशिश करनी चाहिए, तलाक की याचिकाओं पर आम प्रक्रिया लागू नहीं होती: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
फैसले से पहले वैवाहिक अदालतों को सुलह की कोशिश करनी चाहिए, तलाक की याचिकाओं पर आम प्रक्रिया लागू नहीं होती: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत वैवाहिक याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली अदालतों को सबसे पहले सुलह की कोशिश करनी चाहिए, जैसा कि अधिनियम की धारा 23(2) और सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 32-A की भावना के तहत ज़रूरी है। वे आपसी समझौते की गुंजाइश तलाशे बिना जवाब या आपत्तियां दाखिल करने पर ज़ोर नहीं दे सकतीं।ये टिप्पणियां भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत सुपरवाइज़री अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की गईं। यह...

अपील लंबित रहते एक ही संपत्ति पर बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट सख्त, LDA की मंशा पर उठाए सवाल
अपील लंबित रहते एक ही संपत्ति पर बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट सख्त, LDA की मंशा पर उठाए सवाल

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अपील लंबित रहने के दौरान केवल एक संपत्ति पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने को लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को कड़ी फटकार लगाई।अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि प्राधिकरण की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण प्रतीत होती है और फिलहाल आगे की ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाई। जस्टिस पंकज भाटिया और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ कंचन सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में आरोप लगाया गया था कि एलडीए ने उनकी संपत्ति के खिलाफ चुनिंदा और भेदभावपूर्ण तरीके से ध्वस्तीकरण की...

शौर्य चक्र सम्मानित बलविंदर सिंह संधू हत्याकांड: NIA मामले में आरोपी को जमानत देने से हाईकोर्ट का इनकार
शौर्य चक्र सम्मानित बलविंदर सिंह संधू हत्याकांड: NIA मामले में आरोपी को जमानत देने से हाईकोर्ट का इनकार

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शौर्य चक्र सम्मानित कॉमरेड बलविंदर सिंह संधू की हत्या से जुड़े NIA मामले में आरोपी गुरविंदर सिंह उर्फ बाबा की नियमित जमानत याचिका खारिज की।अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपी की आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता की ओर संकेत करती है। जस्टिस अर्चना पुरी और जस्टिस रमेश कुमारी की खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से यह प्रतीत होता है कि आरोपी का झुकाव आतंकवाद की ओर था।अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 43-डी(5) के कड़े...

पुराने कर्मचारियों को अदालत के आदेश से मिला अधिक ग्रेड पे, नए नियुक्त कर्मचारी समान लाभ नहीं मांग सकते: उत्तराखंड हाईकोर्ट
पुराने कर्मचारियों को अदालत के आदेश से मिला अधिक ग्रेड पे, नए नियुक्त कर्मचारी समान लाभ नहीं मांग सकते: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी विशेष कर्मचारी समूह को अदालत के आदेश के आधार पर दिया गया उच्च ग्रेड पे भविष्य में नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के लिए स्वतः कोई कानूनी या अर्जित अधिकार पैदा नहीं करता। केवल समान कार्य करने के आधार पर बाद में नियुक्त कर्मचारी उस लाभ की मांग नहीं कर सकते।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी स्वास्थ्य कार्यकर्ता (महिला) पद पर नियुक्त कई कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। ये कर्मचारी वर्ष 2016, 2018, 2022 और 2024 की भर्ती प्रक्रियाओं के...

बसवकल्याण हिंदू सम्मेलन को हाईकोर्ट की मंजूरी, लेकिन स्वामी अदृश्य कादेश्वर को भाषण देने पर रोक
बसवकल्याण हिंदू सम्मेलन को हाईकोर्ट की मंजूरी, लेकिन स्वामी अदृश्य कादेश्वर को भाषण देने पर रोक

कर्नाटक हाईकोर्ट ने 28 जून को प्रस्तावित बसवादी शिव शरण बृहत हिंदू समावेश कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी।हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम में आमंत्रित कनेरी मठ के स्वामी अदृश्य कादेश्वर किसी भी प्रकार का भाषण नहीं दे सकेंगे।कलबुर्गी खंडपीठ में सुनवाई कर रहे जस्टिस एस. आर. कृष्णकुमार ने बसवकल्याण तहसीलदार के 11 जून के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके जरिए कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार किया गया था।अदालत ने अपने आदेश में कहा कि स्वामी अदृश्य कादेश्वर कार्यक्रम में शारीरिक रूप से...

मानहानि मामले में अभिषेक बनर्जी को राहत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट पर लगाई रोक
मानहानि मामले में अभिषेक बनर्जी को राहत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट पर लगाई रोक

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को मानहानि मामले में बड़ी राहत देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट के अमल पर रोक लगा दी। साथ ही अदालत ने उनकी याचिका को पुनः बहाल कर मामले की मेरिट पर सुनवाई का रास्ता साफ कर दिया।जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की पीठ ने अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर बहाली आवेदन स्वीकार करते हुए कहा कि उनकी याचिका जिसे पहले अनुपस्थिति के कारण खारिज कर दिया गया था, अब मूल क्रमांक पर बहाल की जाती है और उसके गुण-दोष के आधार पर सुनवाई...

तकनीकी पात्रता पर विशेषज्ञ समिति के फैसले में अदालतें नहीं करेंगी दखल, जब तक दुर्भावना या स्पष्ट मनमानी साबित न हो: पटना हाईकोर्ट
तकनीकी पात्रता पर विशेषज्ञ समिति के फैसले में अदालतें नहीं करेंगी दखल, जब तक दुर्भावना या स्पष्ट मनमानी साबित न हो: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग करते समय अदालतें विशेषज्ञ निविदा समितियों द्वारा तय की गई तकनीकी पात्रता का नए सिरे से मूल्यांकन नहीं कर सकतीं।अदालत केवल तभी हस्तक्षेप कर सकती है जब निर्णय दुर्भावनापूर्ण, मनमाना या स्पष्ट रूप से विकृत और अवैध साबित हो। जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस रंजन कुमार झा की खंडपीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता संयुक्त उद्यम को तकनीकी रूप से सफल घोषित करने और उसकी...

विशेषज्ञ समिति के तकनीकी मूल्यांकन में अदालतें दखल नहीं दे सकतीं, जब तक दुर्भावना या स्पष्ट मनमानी साबित न हो: पटना हाईकोर्ट
विशेषज्ञ समिति के तकनीकी मूल्यांकन में अदालतें दखल नहीं दे सकतीं, जब तक दुर्भावना या स्पष्ट मनमानी साबित न हो: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत न्यायिक समीक्षा करते समय अदालतें विशेषज्ञ निविदा समितियों द्वारा किए गए तकनीकी पात्रता मूल्यांकन का दोबारा आकलन नहीं कर सकतीं। केवल तब हस्तक्षेप किया जा सकता है, जब निर्णय दुर्भावनापूर्ण, मनमाना या स्पष्ट रूप से विकृत एवं अवैध साबित हो।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस रंजन कुमार झा की खंडपीठ एक संयुक्त उद्यम द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की विभिन्न निविदाओं में...

पुराने सरकारी अभिलेख गायब होने भर से किसी को संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
पुराने सरकारी अभिलेख गायब होने भर से किसी को संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि केवल इस आधार पर किसी नागरिक को उसकी संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता कि पुराने सरकारी अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं या खो गए।अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था का नाम दशकों से सरकारी राजस्व अभिलेखों में दर्ज है, तो उसे अवैध बताने का भार राज्य पर है और इसे ठोस तथा विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करना होगा। जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने कहा,“केवल सरकारी अभिलेखों का गायब होना या उपलब्ध न होना किसी नागरिक को उसके संपत्ति...

दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग को 26 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति, खर्च उठाएगा एम्स: दिल्ली हाईकोर्ट
दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग को 26 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति, खर्च उठाएगा एम्स: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने 15 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को 26 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दी।अदालत ने कहा कि एम्स द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड ने नाबालिग को प्रक्रिया के लिए मेडिकल रूप से सक्षम बताया। अवकाशकालीन जस्टिस मिनी पुष्करणा ने बुधवार को यह आदेश पारित करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को गर्भावस्था समाप्त करने की पूरी प्रक्रिया का खर्च वहन करने का निर्देश दिया।याचिका नाबालिग की ओर से उसके पिता ने दायर की थी। याचिका में कहा गया कि नाबालिग और...

रेवेन्यू कोर्ट 1978 में ही सुना चुका है अंतिम फैसला: राजस्थान हाईकोर्ट ने ज़मीन विवाद की जांच के लिए पैनल बनाने पर राज्य की आलोचना की
रेवेन्यू कोर्ट 1978 में ही सुना चुका है अंतिम फैसला: राजस्थान हाईकोर्ट ने ज़मीन विवाद की जांच के लिए पैनल बनाने पर राज्य की आलोचना की

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक सिंगल जज के उस आदेश को रद्द किया, जो राज्य सरकार द्वारा गठित फैक्ट-फाइंडिंग कमीशन (तथ्यों की जांच करने वाले आयोग) की रिपोर्ट पर आधारित था। कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर 1978 में ही अंतिम फैसला हो चुका था, इसलिए उस रिपोर्ट पर भरोसा करना गलत था।एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बिपिन गुप्ता की डिवीजन बेंच ने संबंधित कमीशन बनाने के लिए सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जब बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने मामला खारिज कर दिया था, तो कमीशन के पास मामले की जांच करने का...

राजस्थान हाईकोर्ट ने क्रिप्टो होल्डिंग्स और डिजिटल वॉलेट की जानकारी देने की शर्त पर साइबर फ्रॉड के आरोपी को ज़मानत दी
राजस्थान हाईकोर्ट ने क्रिप्टो होल्डिंग्स और डिजिटल वॉलेट की जानकारी देने की शर्त पर साइबर फ्रॉड के आरोपी को ज़मानत दी

साइबर फ्रॉड के मामले में ज़मानत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने आवेदकों को जांच अधिकारी को पहले बताए बिना कोई नया सिम या फ़ोन लेने/इस्तेमाल करने; नया बैंक खाता खोलने; या कोई सोशल मीडिया अकाउंट, डोमेन नाम या वेबसाइट बनाने से रोक दिया।जस्टिस रवि चिरानिया की बेंच ने आरोपियों को VPN, TOR ब्राउज़र, प्रॉक्सी सर्वर या किसी भी तरह के गुमनाम नेटवर्क या पहचान छिपाने वाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल न करने का भी निर्देश दिया।इसके अलावा, कोर्ट ने आरोपियों से एक हलफनामा भी मांगा, जिसमें ये जानकारियां शामिल हों:1....