हाईकोर्ट

'हिस्ट्री-शीटर' होने से आरोपी के अनुच्छेद 21 के अधिकार कम नहीं हो जाते: कस्टोडियल डेथ केस में हाईकोर्ट का 3 पुलिसकर्मियों को जमानत से इनकार
उड़ीसा हाईकोर्ट ने बुधवार (14 अक्टूबर) को तीन पुलिसकर्मियों की जमानत याचिका खारिज की। इन पर आरोप है कि 2017 में उन्होंने एक व्यक्ति (जो आदतन अपराधी था) का सड़क पर पीछा किया और उसके साथ मारपीट की, जिसके कारण वह अपनी मोटरसाइकिल से गिर गया और उसकी मौत हो गई। [2026 लाइव लॉ (ओरी) 118]जस्टिस वी. नरसिंह की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि किसी आरोपी को केवल इसलिए उसके संवैधानिक संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह एक "हिस्ट्री-शीटर" (आदतन अपराधी) है।पीठ ने टिप्पणी की, "मृतक को 'हिस्ट्री-शीटर'...

अनुकंपा नियुक्ति में निचला पद स्वीकार करने के बाद उच्च पद का दावा नहीं किया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) के तहत दिए गए किसी निचले पद को स्वीकार कर लेता है तो वह बाद में किसी उच्च पद पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता।जस्टिस बिपिन गुप्ता की पीठ ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता ने 2013 में अनुकंपा नियुक्ति के तहत एक पद स्वीकार किया और उस पर 2 साल तक काम भी किया। इसके बाद 2015 में उसने एक उच्च पद पर नियुक्ति की मांग करते हुए यह याचिका दायर की।याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने शुरुआत में 'असिस्टेंट...

सुप्रीम कोर्ट को SIR को सही ठहराने वाले अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए: जस्टिस अभय ओक
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय ओक ने कहा कि यह प्रक्रिया ऐसे मतदाताओं के नाम हटाने की अनुमति देती है, जिन्होंने केवल 'प्री-फिल्ड एन्यूमरेशन फॉर्म' (पहले से भरे हुए डेटा फॉर्म) जमा नहीं किए।मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने बताया कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच द्वारा दिए गए मई 2026 के फैसले में, 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' (Representation of the People Act, 1950) की धारा 21(3) के तहत सभी निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में एक...

इस्तीफे से खाली हुए पदों को वेटिंग लिस्ट से नहीं भरा जा सकता, इसके लिए नई भर्ती प्रक्रिया जरूरी: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरियों में अगर कोई उम्मीदवार जॉइन नहीं करता है या बाद में इस्तीफा दे देता है तो खाली हुए पदों को 'नई रिक्तियां' (Fresh Vacancies) माना जाएगा। इन पदों को भरने के लिए एक नई भर्ती प्रक्रिया अपनानी होगी, न कि पुरानी भर्ती प्रक्रिया के तहत बनी रिज़र्व या वेटिंग लिस्ट का इस्तेमाल करके।चीफ जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने कहा कि किसी भर्ती प्रक्रिया की रिज़र्व या वेटिंग लिस्ट में शामिल होने मात्र से कोई उम्मीदवार इन खाली पदों पर...

विशेष परिस्थितियों के बिना पिता 'हेबियस कॉर्पस' याचिका के जरिए बच्चे की कस्टडी नहीं मांग सकते: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पिता की वह याचिका खारिज की, जिसमें उसने 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका के जरिए अपनी पत्नी से अपने चार साल के बेटे की कस्टडी मांगी थी।कोर्ट ने कहा कि बच्चे का अपनी सगी माँ के पास रहना गैर-कानूनी नहीं माना जा सकता। साथ ही कोर्ट को ऐसी कोई विशेष परिस्थिति नहीं मिली, जिसके आधार पर बच्चे की कस्टडी बदली जाए।जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस सुभेन्दु सामंत की खंडपीठ ने कहा,"इस मामले में ऐसी कोई असाधारण या विशेष परिस्थिति सामने नहीं आई है, जो 'हेबियस कॉर्पस' याचिका...

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- गवाहों के बयानों में मामूली विरोधाभास के आधार पर पूरे अभियोजन पक्ष को खारिज नहीं किया जा सकता
राजस्थान हाईकोर्ट ने लगभग 30 वर्ष पुराने मारपीट के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए अधीनस्थ अदालत द्वारा आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को आंशिक रूप से पलट दिया। जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने आरोपी मंगलाल को गंभीर चोट पहुंचाने के अपराध में दोषी ठहराया। हालांकि, घटना वर्ष 1996 की होने और लगभग तीन दशक बीत जाने को ध्यान में रखते हुए उसे कारावास की सजा देने के बजाय सदाचार परिवीक्षा का लाभ प्रदान किया। अदालत ने घायल को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया।राज्य बनाम मंगलाल प्रकरण में राज्य...

न्यायिक समीक्षा के सीमित आधार और 20 साल की देरी: हाईकोर्ट ने अंबेडकर नगर निर्वाचन क्षेत्र के परिसीमन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (जिसमें अलापुर निर्वाचन क्षेत्र को अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित करना भी शामिल है) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की।बेंच ने कहा कि याचिका न्यायिक हस्तक्षेप के लिए आधार स्थापित करने में विफल रही और इसे परिसीमन आदेश पारित होने के लगभग दो दशक बाद दायर किया गया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग द्वारा पारित आदेश की न्यायिक समीक्षा केवल दो सीमित...

अडानी मानहानि केस: पत्रकार रवि नायर की अतिरिक्त सबूत पेश करने की अर्ज़ी पर सुनवाई से हाईकोर्ट जज ने खुद को अलग किया
गुजरात हाईकोर्ट के जज जस्टिस एस.वी. पिंटो ने मंगलवार (13 अक्टूबर) को पत्रकार रवि नायर की उस अर्ज़ी पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें उन्होंने सेशंस कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने अडानी एंटरप्राइजेज़ लिमिटेड द्वारा दायर मानहानि केस से जुड़े अतिरिक्त सबूत रिकॉर्ड पर लाने की उनकी अर्ज़ी को खारिज कर दिया था।अडानी एंटरप्राइजेज़ लिमिटेड ने आपराधिक मानहानि का केस दायर करते हुए आरोप लगाया कि रवि नायर ने ऐसे कई ट्वीट प्रकाशित और प्रसारित किए जिनमें झूठे और मानहानि करने वाले बयान है, जिनका...

जनगणना 2027: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जनगणना ड्यूटी के लिए प्राइवेट स्कूलों के टीचरों की जानकारी मांगने वाले आदेशों पर रोक लगाई
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अधिकारियों द्वारा जारी उन दो आदेशों पर रोक लगाई, जिनमें जनगणना 2027 की ड्यूटी के लिए प्राइवेट और सरकारी स्कूलों के टीचरों की जानकारी मांगी गई। यह रोक सिर्फ़ प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले (unaided) स्कूलों पर लागू होती है।जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस की याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया। कोर्ट ने नोटिस जारी किया और आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक, 1 सितंबर 2026 और 7 सितंबर 2026 के आदेश "प्राइवेट बिना सरकारी मदद वाले स्कूलों के मामले में...

बिहार पेंशन नियमों के तहत रिटायरमेंट के बाद 4 साल से पुरानी गड़बड़ी के लिए विभागीय कार्यवाही पर रोक: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी के रिटायरमेंट के बाद विभागीय कार्यवाही शुरू की जाती है तो बिहार पेंशन नियमों का नियम 43(b) ऐसी कार्यवाही शुरू करने से रोकता है, अगर वह घटना कार्यवाही शुरू होने से चार साल से ज़्यादा पहले हुई हो।जस्टिस कुमार मनीष की सिंगल जज बेंच उमेश कुमार वर्मा की रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने अपने खिलाफ शुरू की गई विभागीय कार्यवाही, बाद में उसे बिहार पेंशन नियमों के नियम 43(b) के तहत बदलने, जांच की कार्यवाही और उनकी पेंशन से 75% कटौती के आदेश को...

स्क्रैपयार्ड में हुए धमाके के बाद हुई मौत के मामले में 'गैर-इरादतन हत्या' का आरोप लगाने के लिए सिर्फ़ स्क्रैपयार्ड के मालिक से जुड़ाव काफ़ी नहीं: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ दर्ज FIR रद्द की। उस व्यक्ति पर स्क्रैपयार्ड में हुए धमाके के मामले में 'गैर-इरादतन हत्या' का आरोप है; इस धमाके में दो लोगों की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हो गए। [2026 LiveLaw (MP) 415]ऐसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी का स्क्रैपयार्ड के मालिक से सिर्फ़ जुड़ाव या संबंध होना, या उस जगह पर आरोपी की मौजूदगी (जहाँ उसने कथित तौर पर निर्देश दिए थे) 'गैर-इरादतन हत्या' का आरोप लगाने के लिए काफ़ी नहीं है, जब तक कि इस बात का कोई सबूत न हो कि वह धमाके के लिए...

जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती
इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के प्रमुख उदय भानु चिब ने दिल्ली पुलिस के उस फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसके तहत जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगह के तौर पर डी-नोटिफाई कर दिया गया।इसी तरह की एक याचिका वकील स्वाति मलिक ने सुप्रीम कोर्ट में भी दायर की।चिब ने यह अर्ज़ी अपनी उस लंबित याचिका के तहत दायर की, जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति के अनुरोध पर फिर से विचार करने की मांग की गई। इस याचिका में मांग की गई कि सुरक्षा, ट्रैफिक और...

आवेदन पर देरी से फैसला लेने की सजा विधवा को क्यों? आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने आवेदन की तारीख से पेंशन का बकाया देने का दिया आदेश
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने विधवा पेंशन से जुड़े अहम मामले में कहा कि प्रशासनिक देरी या सरकार के नीतिगत फैसले के कारण किसी पात्र महिला को पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा लाभार्थी को नहीं भुगतना चाहिए। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एक विधवा को उसके आवेदन की तारीख से पेंशन का बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया।जस्टिस के. श्रीनिवास रेड्डी की सिंगल बेंच ने यह फैसला उस महिला की याचिका पर सुनाया, जिसके पति दिव्यांग थे और पेंशन प्राप्त करते थे। 14 जुलाई 2023 को पति की...

दिल्ली हाईकोर्ट का अहम फैसला: अदालत परिसर के बाहर भी बनाया जा सकता है वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए 'कोर्ट पॉइंट'
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायिक कार्यवाही करने के लिए निर्धारित 'कोर्ट पॉइंट' का अदालत परिसर के भीतर होना जरूरी नहीं है। अदालत के निर्देश पर किसी अन्य स्थान को भी कोर्ट पॉइंट के रूप में निर्धारित किया जा सकता है।जस्टिस तेजस करिया ने यह टिप्पणी गेम्सॉफ्ट कॉरपोरेशन की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए की। कंपनी ने अमेरिका के फ्लोरिडा में रहने वाले अपने दो गवाहों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिरह कराने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया। इसके लिए दिल्ली...

फर्जी दस्तावेज दाखिल करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाया 25 हजार रुपये का जुर्माना, याचिका वापस लेने की अनुमति देने से इनकार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों के साथ रिट याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता को कार्यवाही के परिणामों से बचने के लिए याचिका वापस लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा,“याचिकाकर्ता द्वारा पहले मौका आजमाने और सफल नहीं होने पर रिट याचिका वापस लेने की मांग करने की पूरी प्रक्रिया की यह कोर्ट निंदा करती है। इस...

कोविड-19 से मौत पर मुआवजे का दावा अस्पताल की रिपोर्ट में तारीख की गड़बड़ी के आधार पर खारिज नहीं कर सकते: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि कोविड-19 से हुई मौत के मामले में अनुग्रह राशि (Ex-gratia Compensation) के वास्तविक दावे को केवल अस्पताल की प्रयोगशाला रिपोर्ट में दर्ज तारीख में विसंगति के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब अस्पताल स्वयं इस बात की पुष्टि कर चुका हो कि मृतक की कोविड-19 जांच रिपोर्ट पॉजिटिव थी।जस्टिस आलोक कुमार की एकल पीठ ने शांति देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपने पति राम भजन चौधरी की मृत्यु के बाद मुआवजे की मांग की...

कक्षा में अनुशासन के लिए छात्रा का हाथ खींचने पर शिक्षिका के खिलाफ आपराधिक मामला रद्द: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने पांचवीं कक्षा की एक छात्रा का हाथ खींचने और उसे चोट लगने के आरोप में शिक्षिका के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षिका का उद्देश्य छात्रा को परेशान करना या चोट पहुंचाना नहीं, बल्कि कक्षा में अनुशासन बनाए रखना था।जस्टिस जॉबिन सेबेस्टियन ने कहा कि केवल इसलिए किसी शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता कि उसने संस्थान में अनुशासन बनाए रखने के लिए सुधारात्मक उपाय के रूप में मामूली दंड दिया।'मामूली सुधारात्मक कार्रवाई के लिए शिक्षकों पर आपराधिक...

'जम्मू-कश्मीर जैसे आतंक प्रभावित क्षेत्र में मार्च निकाल सकते हैं, तो तमिलनाडु में अनुमति क्यों नहीं?' RSS मार्च पर मद्रास हाईकोर्ट की मौखिक टिप्पणी
मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार (14 अक्टूबर) को तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की रूट मार्च निकालने की अनुमति से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सवाल किया कि जब संगठन जम्मू-कश्मीर जैसे आतंक प्रभावित क्षेत्रों में भी मार्च निकाल सकता है, तो तमिलनाडु पुलिस उसे हर साल अनुमति देने से इनकार क्यों करती है।जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा,“अगर वे (RSS) जम्मू-कश्मीर जैसे आतंक प्रभावित क्षेत्र में मार्च निकाल सकते हैं, तो तमिलनाडु पुलिस उन्हें हर साल अनुमति देने से इनकार क्यों...

दिल्ली में पनीर के नाम पर नॉन-डेयरी उत्पादों की बिक्री का आरोप, हाईकोर्ट ने केंद्र, FSSAI और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में पनीर के नाम पर डेयरी एनालॉग्स (Dairy Analogues) और नॉन-डेयरी उत्पादों की कथित बिक्री पर खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रभावी अनुपालन की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर बुधवार को नोटिस जारी किया।कार्यवाहक चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांबरे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), दिल्ली सरकार और उसके खाद्य सुरक्षा विभाग से जवाब मांगा है।'रेस्तरां में पनीर ऑर्डर करने पर ग्राहक को असली डेयरी उत्पाद मिलने की उम्मीद होती...

राजस्थान हाईकोर्ट ने लीगल एड वकील के खिलाफ 'असंतोषजनक सेवा' संबंधी टिप्पणियां हटाईं, कहा- युवा वकील के करियर पर पड़ सकता है असर
राजस्थान हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा एक युवा लीगल एड डिफेंस काउंसिल की सेवाएं समाप्त करने के आदेश में की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटा दिया। इन टिप्पणियों में वकील की सेवाओं को लापरवाह और असंतोषजनक बताया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना किसी जांच के की गई ऐसी टिप्पणियां युवा वकील के भविष्य और करियर को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, कोर्ट ने उनकी सेवा समाप्ति का फैसला बरकरार रखा।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति लीगल एड डिफेंस काउंसिल स्कीम...
