हाईकोर्ट

पूरी तरह बेतुका: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने टाइगर कॉरिडोर में सीमित रास्तों पर उठाए सवाल, अधिकारियों को किया तलब
पूरी तरह बेतुका: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने टाइगर कॉरिडोर में सीमित रास्तों पर उठाए सवाल, अधिकारियों को किया तलब

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने NH-46 के चौड़ीकरण परियोजना में टाइगर कॉरिडोर के लिए प्रस्तावित सीमित वन्यजीव मार्गों पर कड़ा सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह बेतुका करार दिया।कोर्ट ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के सीनियर अधिकारियों को तलब कर विस्तृत जवाब मांगा।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने पाया कि 16 किलोमीटर लंबे महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर में केवल लगभग 1.2 से 1.5 किलोमीटर हिस्से में ही पशुओं के लिए मार्ग प्रस्तावित किया गया, जबकि पहले से बना एक...

लखनऊ में अवैध वकील चैंबर हटेंगे: हाइकोर्ट का सख्त आदेश, बिना नोटिस भी हो सकती है कार्रवाई
लखनऊ में अवैध वकील चैंबर हटेंगे: हाइकोर्ट का सख्त आदेश, बिना नोटिस भी हो सकती है कार्रवाई

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने लखनऊ स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय (पुराना हाइकोर्ट परिसर) के आसपास वकीलों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमण पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस राजीव भारती की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि सार्वजनिक भूमि, फुटपाथ या सरकारी जमीन पर किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए पहले से नोटिस देना अनिवार्य नहीं है।अदालत ने कहा, “कानून का शासन बनाए रखने के लिए ऐसे अतिक्रमणों को तुरंत हटाया जाना चाहिए।” हालांकि लखनऊ नगर निगम ने...

Hindu Marriage Act के तहत जनजातियों को बहुविवाह की खुली छूट नहीं: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट का स्पष्ट फैसला
Hindu Marriage Act के तहत जनजातियों को बहुविवाह की खुली छूट नहीं: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट का स्पष्ट फैसला

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) की धारा 2(2) के तहत अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट का मतलब यह नहीं है कि वे बिना किसी परंपरा के बहुविवाह को उचित ठहरा सकें।जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने कहा कि यह प्रावधान केवल जनजातीय परंपराओं और मान्यताओं की रक्षा के लिए है, न कि बहुविवाह जैसे प्रथाओं को मनमाने ढंग से अपनाने की अनुमति देने के लिए।मामला मुन्नी बाई द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें उसने अपने पति की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार...

यूनिवर्सिटी में असहमति दबाना नहीं, विचारों को बढ़ावा देना जरूरी: दिल्ली हाइकोर्ट की अहम टिप्पणी
यूनिवर्सिटी में असहमति दबाना नहीं, विचारों को बढ़ावा देना जरूरी: दिल्ली हाइकोर्ट की अहम टिप्पणी

दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि यूनिवर्सिटी का काम स्टूडेंट्स की आवाज दबाना नहीं बल्कि स्वतंत्र सोच और अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए किसी स्टूडेंट के विचारों को नहीं रोका जा सकता क्योंकि वे प्रबंधन की सोच से मेल नहीं खाते।जस्टिस जस्मीत सिंह ने कहा कि यूनिवर्सिटी केवल पढ़ाई का स्थान नहीं बल्कि ऐसा मंच है, जहां स्टूडेंट्स को स्वतंत्र सोच, सवाल पूछने और आलोचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए।अदालत ने कहा,“शांतिपूर्ण विरोध और असहमति विश्वविद्यालय जीवन का...

रिटायरमेंट के बाद उत्पीड़न: रिटायरमेंट लाभों को अवैध रूप से रोकना
रिटायरमेंट के बाद उत्पीड़न: रिटायरमेंट लाभों को अवैध रूप से रोकना

एक वकील अक्सर सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों द्वारा दायर सेवा मामलों का सामना करता है जो उनके पेंशन लाभों को जारी करने की मांग करते हैं। ये मामले एक आवर्ती और परेशान करने वाले पैटर्न को प्रकट करते हैं - सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर किया जाता है क्योंकि उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी या अन्य सेवानिवृत्ति लाभों को या तो रोक दिया जाता है या प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अनावश्यक रूप से देरी की जाती है।पेंशन और ग्रेच्युटी केवल वित्तीय लाभ नहीं हैं; वे एक सेवानिवृत्त कर्मचारी...

जांच करें कि क्या मुंबई की सड़कों पर बांग्लादेशी प्रवासी फेरी लगा रहे हैं, कानून के अनुसार कार्रवाई करें: हाईकोर्ट ने BMC और पुलिस को निर्देश दिया
जांच करें कि क्या मुंबई की सड़कों पर बांग्लादेशी प्रवासी फेरी लगा रहे हैं, कानून के अनुसार कार्रवाई करें: हाईकोर्ट ने BMC और पुलिस को निर्देश दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार (23 मार्च) को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और मुंबई पुलिस को आदेश दिया कि वे शहर की सड़कों पर फेरी लगाने वाले सभी लोगों की पहचान का 'पूरी तरह' से सत्यापन करें। साथ ही यह भी जांच करें कि क्या इनमें कोई 'बांग्लादेशी' या अन्य 'प्रवासी' शामिल हैं जो फेरी लगाने के काम में लगे हैं। यदि ऐसे लोग मिलते हैं, तो अधिकारियों को उनके खिलाफ 'उचित' कार्रवाई करने का आदेश दिया गया।जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाटा की खंडपीठ ने महाराष्ट्र हॉकर संघ (फेरीवालों का एक संगठन) द्वारा उनके समक्ष...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद की राम नवमी रैली की अर्जी मंज़ूर की, प्रतिभागियों की संख्या 500 तक सीमित की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद की राम नवमी रैली की अर्जी मंज़ूर की, प्रतिभागियों की संख्या 500 तक सीमित की

कलकत्ता हाईकोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद को 26 मार्च, 2026 को हावड़ा में राम नवमी रैली आयोजित करने की अनुमति दी। कोर्ट ने उन्हें पिछले साल वाले ही रास्ते का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी है, लेकिन साथ ही सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई शर्तें भी लगाईं।जस्टिस सौगत भट्टाचार्य विश्व हिंदू परिषद द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें पुलिस अधिकारियों को रैली में मदद करने के निर्देश देने की मांग की गई।याचिकाकर्ताओं ने 4 अप्रैल, 2025 के एक पिछले बेंच के आदेश का हवाला दिया, जिसमें कुछ...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़मानत मिलने के बाद अपील की सुनवाई टालने की मुक़दमेबाज़ों की आपत्तिजनक चाल पर नाराज़गी जताई, कहा- बेंच या बार को दोष न दें
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़मानत मिलने के बाद अपील की सुनवाई टालने की मुक़दमेबाज़ों की 'आपत्तिजनक' चाल पर नाराज़गी जताई, कहा- बेंच या बार को दोष न दें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक अपीलों में ज़मानत हासिल करने और उसके बाद अपने वकीलों को अंतिम सुनवाई के लिए पेश न होने का निर्देश देने की मुक़दमेबाज़ों की "आपत्तिजनक प्रवृत्ति" की कड़ी आलोचना और निंदा की।कोर्ट ने टिप्पणी की कि सेमिनारों में जब अदालतों में देरी के कारणों पर बहस होती है तो मुक़दमेबाज़ों की भूमिका को ज़्यादातर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। मुक़दमेबाज़ को बार और बेंच के हाथों में एक बेबस इंसान के तौर पर देखा जाता है। हालाँकि, असल में ऐसा नहीं है।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस विनय कुमार...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किया नया रोस्टर, जस्टिस श्रीधरन अब सुनेंगे पारिवारिक अपीलें और सीनियर सिटीजन एक्ट से जुड़े मामले
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी किया नया रोस्टर, जस्टिस श्रीधरन अब सुनेंगे पारिवारिक अपीलें और सीनियर सिटीजन एक्ट से जुड़े मामले

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते बेंचों के गठन/रोस्टर की नई अधिसूचना जारी की, जो आज (सोमवार) से लागू हो गई। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली के आदेश पर 19 मार्च को पारित प्रशासनिक आदेश में कई डिवीजनों और सिंगल जज बेंचों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए।यह अधिसूचना पिछले रोस्टर की जगह लेती है, जो 5 जनवरी, 2026 से लागू था।नए अधिसूचित रोस्टर में जस्टिस अतुल श्रीधरन, जस्टिस विवेक सरन के साथ बैठकर वर्ष 2021 से आगे की फैमिली कोर्ट की अपीलें सुनेंगे। साथ ही माता-पिता और सीनियर सिटीजन के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम से...

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की, अश्लील AI कंटेंट हटाने का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा की, अश्लील AI कंटेंट हटाने का आदेश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा करते हुए 'जॉन डो' (John Doe) आदेश पारित किया।जस्टिस ज्योति सिंह ने कई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन रिटेलर्स को उनके नाम, रूप, आवाज़ और पर्सनैलिटी से जुड़े अन्य गुणों का बिना इजाज़त इस्तेमाल करने से रोक दिया।कोर्ट ने यह आदेश सिन्हा द्वारा दायर अंतरिम रोक याचिका पर दिया, जो उन्होंने कई प्रतिवादियों (Defendants) के खिलाफ दायर अपने मुकदमे में दी थी। इन प्रतिवादियों में अमेरिका स्थित AI चैटबॉट...

देरी की माफ़ी के लिए दी गई सफ़ाई की विश्वसनीयता पहले जांची जानी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट
देरी की माफ़ी के लिए दी गई सफ़ाई की विश्वसनीयता पहले जांची जानी चाहिए: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि देरी की माफ़ी पर विचार करते समय कोर्ट को सबसे पहले उस पक्ष द्वारा दी गई सफ़ाई की विश्वसनीयता (Bona Fides) की जांच करनी चाहिए, जो ऐसी माफ़ी चाहता है।एक शादी को अमान्य घोषित करने वाले फ़ैसले के ख़िलाफ़ 654 दिनों की देरी से दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की बेंच ने कहा,“कोर्ट का यह फ़र्ज़ है कि वह सबसे पहले उस पक्ष द्वारा दी गई सफ़ाई की विश्वसनीयता की जांच करे, जो माफ़ी चाहता है। केवल तभी, जब मुक़दमा लड़ने वाले पक्ष...

साक्ष्यों में विरोधाभास, मेडिकल प्रमाण नहीं: पटना हाइकोर्ट ने POCSO मामले में दोषसिद्धि रद्द की
साक्ष्यों में विरोधाभास, मेडिकल प्रमाण नहीं: पटना हाइकोर्ट ने POCSO मामले में दोषसिद्धि रद्द की

पटना हाइकोर्ट ने अहम फैसले में अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दी गई सजा रद्द की।अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयानों में गंभीर विरोधाभास, मेडिकल साक्ष्य का अभाव और स्वतंत्र पुष्टि न होने के कारण अभियोजन का मामला विश्वसनीय नहीं ठहरता।जस्टिस बिबेक चौधुरी और जस्टिस डॉ. अंशुमान की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसे असंगत और अप्रमाणित साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रह सकती।अदालत ने माना कि यौन अपराध के मामलों में पीड़िता की गवाही महत्वपूर्ण होती है लेकिन इस मामले में उसके बयान...

लंबे समय तक आउटसोर्सिंग से भर्ती टालना अनुचित: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने राज्य को लगाई फटकार
लंबे समय तक आउटसोर्सिंग से भर्ती टालना अनुचित: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने राज्य को लगाई फटकार

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने सरकारी संस्थानों द्वारा नियमित नियुक्तियों को दरकिनार कर लंबे समय तक आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों से काम लेने की प्रवृत्ति पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने इसे शोषण और अन्याय को बढ़ावा देने वाला बताया।जस्टिस विक्रम डी चौहान की पीठ ने बरेली नगर निगम को निर्देश दिया कि 13 वर्षों से आउटसोर्स आधार पर काम कर रहे कंप्यूटर ऑपरेटर के नियमितीकरण पर पुनर्विचार किया जाए।कोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी से लंबे समय तक लगातार काम लिया जाता है और उसका कार्य विभाग के लिए आवश्यक और स्थायी...

पति की मृत्यु के बाद एक्स-पार्टी तलाक रद्द नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाइकोर्ट का अहम फैसला
पति की मृत्यु के बाद एक्स-पार्टी तलाक रद्द नहीं हो सकता: इलाहाबाद हाइकोर्ट का अहम फैसला

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पति या पत्नी की मृत्यु के बाद एक्स-पार्टी तलाक के डिक्री को रद्द नहीं किया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मुकदमा आगे नहीं बढ़ सकता और इसे पुनर्जीवित करना कानूनन संभव नहीं है।जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने यह निर्णय देते हुए फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें 30 साल पुराने तलाक को बहाल कर दिया गया था।मामले में पहली पत्नी का विवाह 1991 में एक्स-पार्टी डिक्री के जरिए समाप्त हो गया। इसके बाद पति ने...