हाईकोर्ट
गैर-कानूनी हिरासत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया 25 हज़ार का मुआवजा, कहा- पुलिस को लगता है कि उनके गलत कामों पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पुलिस अधिकारी लगातार नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, यह सोचकर कि उनके गलत कामों पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा। उन्हें लगता है कि हज़ारों उल्लंघनों में से शायद ही कोई नागरिक अपने अधिकारों को लागू करवाने और उन्हें जवाबदेह ठहराने के लिए आगे आएगा।इस कड़ी टिप्पणी के साथ जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने एक व्यक्ति को 25,000 रुपये का अंतरिम मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जिसे सिर्फ़ एक घरेलू झगड़े के कारण 24 घंटे तक पुलिस हिरासत (लॉकअप) में...
एडवोकेट्स एक्ट और नेताओं का वकालत में लौटना
14 मई, 2026 को ममता बनर्जी वकील का गाउन और सफ़ेद बैंड पहनकर कलकत्ता हाई कोर्ट पहुँचीं और पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़ी एक PIL पर बहस की। दिन खत्म होने तक, बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को पत्र लिखकर उनके एनरोलमेंट स्टेटस, मुख्यमंत्री के तौर पर उनके 15 साल के कार्यकाल के दौरान उनकी प्रैक्टिस हिस्ट्री और क्या उन्होंने कभी अपना प्रैक्टिस लाइसेंस औपचारिक रूप से सस्पेंड और फिर दोबारा शुरू किया, इस बारे में रिकॉर्ड मांगे। BCI ने यह भी साफ़ किया कि उस समय वे इस...
छुआछूत को गैर-कानूनी मानने वाले संविधान में तमाशबीन बने रहने की कोई जगह नहीं
हाल ही में जब सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि किसी निजी घर के अंदर जाति-आधारित दुर्व्यवहार के मामले में अगर "सार्वजनिक रूप से" (public view) ऐसा नहीं हुआ है तो उस पर SC/ST (अत्याचार निवारण) Act, 1989 की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) लागू नहीं होंगी, तो यह फैसला कानूनी तौर पर सीधा-सादा लगा। कोर्ट एक कानूनी ज़रूरत की व्याख्या कर रहा था। वह पहले के फैसलों (precedent) को लागू कर रहा था। वह इस बात पर ज़ोर दे रहा था कि आपराधिक कानून तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक अपराध के बुनियादी तत्व मौजूद न हों।फिर भी 'गुंजन...
पैगंबर मोहम्मद के नाम पर भीड़ को उकसाया: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा के 'मुख्य साज़िशकर्ता' की ज़मानत अर्ज़ी खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सितंबर 2025 की बरेली हिंसा के मामले में इत्तेफ़ाक मिल्लत काउंसिल (IMC) के अध्यक्ष तौकीर रज़ा खान की ज़मानत अर्ज़ी खारिज की।खान पर लगे आरोपों पर विचार करते हुए कोर्ट ने कहा कि खान "मुख्य साज़िशकर्ता" हैं, जिन्होंने पैगंबर मोहम्मद के नाम पर एक उग्र भीड़ को भड़काया। उन्हें अच्छी तरह पता था कि भीड़ आगज़नी, दंगा और पुलिसकर्मियों पर हमले कर सकती है और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकती है।जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने टिप्पणी की,"भारत जैसे लोकतांत्रिक...
खान सर के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची पत्रकार अंजना ओम कश्यप, दायर किया मानहानि मामला
पत्रकार अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क ने एग्जाम कोचिंग टीचर फैसल खान (खान सर) के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया।यह मुकदमा "स्टार टीचर्स" पर उनकी कवरेज के संबंध में पत्रकार के खिलाफ खान सर की कथित मानहानिकारक टिप्पणियों को लेकर दायर किया गया।कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क ने "स्टार टीचर्स" पर उनकी कवरेज के संबंध में खान सर द्वारा की गई "बिकाऊ पत्रकार", "चाटुकार", "दलाली", "फेक न्यूज़ की दुकान" जैसी कथित मानहानिकारक टिप्पणियों को हटाने की मांग की।इस मामले की सुनवाई कल...
पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UP Police की जांच की क्वालिटी पर सवाल उठाए, ACS (होम) को लगाई फटकार
एक और कड़े आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कड़ी आलोचना की। इस बार कोर्ट ने राज्य में आपराधिक जांच की 'क्वालिटी' पर ही सवाल उठाए और नाराजगी जताई।कोर्ट ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) और सीनियर IAS अधिकारी संजय प्रसाद पर भी "बिना गंभीरता वाला, पूरी तरह से लापरवाही भरा हलफनामा" दाखिल करने के लिए कड़ी नाराजगी जताई।उल्लेखनीय है कि जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने पाया कि प्रसाद का व्यवहार पहली नज़र में यह दिखाता है कि उन्हें कोर्ट के आदेशों की "कोई...
शुरुआती जांच या समस्यापूर्ण अनुमान: किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 15
साल 2023 में कानून का उल्लंघन करने के आरोप में पकड़े गए 79% किशोर 16 से 18 साल की उम्र के थे। कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों में यह उम्र का दायरा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि बच्चों का आपराधिक न्याय प्रणाली से संपर्क बढ़ने का समाज पर व्यापक असर पड़ता है। साथ ही किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 में कानूनी तौर पर एक अलग श्रेणी बनाई गई, जिसमें 16-18 साल की उम्र के किशोरों को एक अलग वर्ग माना गया।भारतीय किशोर न्याय कानून व्यवस्था में एक अहम बदलाव किशोर न्याय...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्यों कहा- 'विहान कुमार' और अन्य मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने 'बाढ़ के दरवाजे' खोल दिए और 'अराजक स्थिति' पैदा की?
एक अहम टिप्पणी में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि गैर-कानूनी गिरफ्तारियों पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया विहान कुमार (2025) का फैसला ने आरोपी व्यक्तियों के लिए अपनी हिरासत या रिमांड के आदेशों को चुनौती देने का एक "नया सिलसिला" (यानी 'पेंडोरा बॉक्स') शुरू कर दिया है, और वे ऐसा 'काफी देर से' भी कर सकते हैं।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की बेंच ने कहा कि इन फैसलों ने एक 'अराजक स्थिति' पैदा कर दी है, क्योंकि ये आरोपी को जांच या ट्रायल के किसी भी चरण में अपने मौलिक अधिकारों का...
लेबलिंग की गलती से शराब की बोतलों पर गलत बैच नंबर होने पर एक्साइज़ एक्ट के तहत अवैध ट्रांसपोर्ट का आरोप नहीं लगाया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) के अवैध ट्रांसपोर्ट के आरोपी शराब बॉटलिंग यूनिट के मालिक के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की। कोर्ट ने कहा कि वैध परमिट के तहत 400 केस (पेटियों) का ट्रांसपोर्ट केवल इसलिए हिमाचल प्रदेश एक्साइज़ एक्ट की धारा 39 के तहत मुकदमा चलाने का आधार नहीं बन सकता कि लेबलिंग की गलती के कारण कुछ बोतलों पर गलत बैच नंबर थे।जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा:"IMFL के 400 बॉक्स वैध परमिट के तहत ट्रांसपोर्ट किए जा रहे थे और कुछ बोतलें अलग-अलग बैच की पाई गईं - हालांकि वे...
'बच्चों को प्रतिबंधित दवा लिखी': कोल्ड्रिफ़ कफ सिरप से हुई मौतों के मामले में आरोपी डॉक्टर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने किया ज़मानत देने से इनकार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक डॉक्टर को ज़मानत देने से इनकार किया, जिस पर मिलावटी कफ सिरप से कई बच्चों की मौत के मामले में केस दर्ज किया गया था।जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की बेंच ने कहा,"आवेदक बच्चों के डॉक्टर (बाल रोग विशेषज्ञ) हैं। उन्होंने 4 साल से कम उम्र के बच्चों को एक निश्चित डोज़ वाला कंपाउंड (दवा) लिखा, जिस पर सरकार ने 18.12.2023 को जारी सर्कुलर के ज़रिए प्रतिबंध लगा दिया था। इसके कारण कई मासूम बच्चों की मौत हो गई और इस कफ सिरप से बड़े पैमाने पर लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा।"बेंच ने...
हाईकोर्ट ने बैलेट पेपर से छेड़छाड़ के आरोपों के बावजूद दिल्ली बार काउंसिल के लिए नए चुनाव कराने का आदेश देने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के लिए नए चुनाव कराने का आदेश देने से इनकार किया। कोर्ट का मानना है कि गिनती के दौरान छेड़छाड़ किए गए बैलेट पेपर मिलने से पूरी चुनाव प्रक्रिया खराब नहीं हुई, इसलिए दोबारा चुनाव कराने की ज़रूरत नहीं है। कोर्ट ने हाई-पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमेटी (HPESC) के फैसले को सही ठहराया। कमेटी ने निर्देश दिया था कि बैलेट पेपर से छेड़छाड़ की घटना सामने आने के बाद दूसरी पसंद के वोटों की गिनती के चरण से गिनती फिर से शुरू की जाए।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस...
POCSO Case: राजस्थान हाईकोर्ट ने पीड़िता की उम्र से जुड़े दस्तावेज़ मंगाने की आरोपी की अर्ज़ी को आंशिक रूप से दी मंज़ूरी
राजस्थान हाईकोर्ट ने POCSO मामले के आरोपी की उस अर्ज़ी को आंशिक रूप से मंज़ूरी दी, जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उसकी CrPC की धारा 91 की अर्ज़ी खारिज की गई थती। इस अर्ज़ी में पीड़िता की उम्र तय करने के लिए कम्युनिटी हेल्थ सेंटर द्वारा जारी उसके एडमिशन टिकट को पेश करने की मांग की गई।ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए अर्ज़ी खारिज की थी कि आरोपी द्वारा पीड़िता की उम्र के संबंध में जिरह (Cross-Examination) पहले ही पूरी की जा चुकी है।CrPC की धारा 91 (दस्तावेज़ या अन्य चीज़...
Custodial Death | गुवाहाटी हाईकोर्ट ने दिया बिज़नेसमैन की विधवा को ₹25 लाख का मुआवज़ा, कहा- पुलिस वालों के ख़िलाफ़ चल रहा ट्रायल कोई रुकावट नहीं
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने इस हफ़्ते की शुरुआत में असम सरकार को बिज़नेसमैन की विधवा को ₹20 लाख का अतिरिक्त मुआवज़ा देने का निर्देश दिया। अंतरिम राहत के तौर पर पहले ही ₹5 लाख दिए जा चुके थे। यह मुआवज़ा उस बिज़नेसमैन की मौत के लिए दिया गया, जिसे 2020 में पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर अगवा किया, बेरहमी से प्रताड़ित किया और मार डाला।पब्लिक लॉ रेमेडी (सार्वजनिक कानून के तहत उपाय) के तहत मुआवज़ा देते हुए जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस शमीमा जहान की बेंच ने कस्टडी में हिंसा की बर्बर घटनाओं पर कड़ी आपत्ति...
'सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना ज़रूरी': अवध बार एसोसिएशन जुलाई में होने वाली AGM में महिलाओं के लिए 30% कोटा पर करेगा फ़ैसला
अवध बार एसोसिएशन (OBA) ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि वह बार एसोसिएशन में पदाधिकारियों या कार्यकारी सदस्यों के तौर पर महिलाओं के लिए 30% आरक्षण अनिवार्य करने वाले सुप्रीम कोर्ट के 2025 के निर्देश का पालन करने के लिए बाध्य है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच के सामने पेश होते हुए एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि किन खास पदों को आरक्षित किया जाएगा, इस पर अंतिम फ़ैसला जुलाई 2026 में होने वाली आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में लिया जाएगा।मामले को 13 जुलाई के लिए सूचीबद्ध...
ठोस सबूत के बिना आरोपी को पूरे दिन पुलिस स्टेशन में नहीं बिठाया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया हत्या की जांच की निगरानी का निर्देश
हत्या की FIR रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने दौसा के पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया कि वह 5 साल से ज़्यादा समय से लंबित जांच की निगरानी करें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि आरोपियों को पूछताछ के बहाने बेवजह परेशान न किया जाए, जब तक कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत न हो।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने कहा कि जांच अधिकारी को आरोपी को पुलिस स्टेशन बुलाने और उन्हें सुबह से शाम तक वहीं रहने के लिए मजबूर करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती, जब तक कि उनके खिलाफ किसी ठोस सबूत की...
'संविधान के बजाय शासकों के प्रति वफादारी, कानून के शासन को परेशानी माना जाता है': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी नौकरशाही की कड़ी आलोचना की
इस हफ़्ते जारी अपने तीसरे ऐसे आदेश में, जिसमें उत्तर प्रदेश की नौकरशाही के हालात पर कड़ी टिप्पणियां की गईं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर राज्य के प्रशासनिक तंत्र की तीखी आलोचना की।अपने 31 पन्नों के आदेश में जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने कहा कि उत्तर प्रदेश ऐतिहासिक रूप से राजनेताओं और नौकरशाहों की "सामंती मानसिकता" से चलता रहा है। इसने लंबे समय से संवैधानिक शासन को जनसेवा के बजाय व्यक्तिगत प्रभुत्व का साधन बना दिया है।कोर्ट ने कहा कि राज्य का प्रशासनिक तंत्र लगातार सरकारों के दौर में गहरे...
'एनकाउंटर में हत्याएं, चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई': हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस को टारगेटेड कार्रवाई के लिए फटकारा, गैंगस्टर एक्ट के गलत इस्तेमाल पर उठाए सवाल
एक सिविल विवाद को लेकर परिवार के 3 सदस्यों के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश पुलिस को 'उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1986' (UAPA) के टारगेटेड इस्तेमाल के लिए कड़ी फटकार लगाई।जस्टिस विनोद दिवाकर की बेंच ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि कैसे एनकाउंटर में हत्याएं और 'असुविधाजनक' माने जाने वाले लोगों के खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई समय-समय पर कोर्ट के ध्यान में आती रही हैं।इस मामले में पुलिस की मनमानी का सबसे बड़ा...
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की आर्द्रभूमि के लिए खतरों पर स्वतः संज्ञान लिया, तुरंत सुरक्षा उपाय करने के आदेश दिए
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य भर में वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) को प्रदूषण, अतिक्रमण, सीवेज बहाव, पानी के फैलाव में कमी और संरक्षण के अपर्याप्त उपायों आदि से होने वाले खतरों पर स्वतः संज्ञान लिया।संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अधिकार, अनुच्छेद 48A और 51(A)(g) के तहत कर्तव्यों और 'पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन' (सार्वजनिक विश्वास सिद्धांत) पर जोर देते हुए डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस रेखा बोराना की डिवीजन बेंच ने कहा कि राजस्थान में वेटलैंड्स के संरक्षण और टिकाऊ प्रबंधन के लिए व्यापक जनहित में...
ज़्यादातर लोग बहुत देर होने से पहले वसीयत क्यों नहीं लिखते: विरासत की प्लानिंग क्यों ज़रूरी है?
ज़िम्मेदारियां, परिवार में गलतफहमियां, बचत और प्रॉपर्टी होने के बावजूद, बहुत से लोग बिना कोई कानूनी रूप से मान्य वसीयत छोड़े ही दुनिया से चले जाते हैं। तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। यह देरी इसलिए होती है, क्योंकि लोग अपनी मौत के बारे में बात करने में असहज महसूस करते हैं और डरते हैं। लोगों को हमेशा लगता है कि उनके पास अभी बहुत समय है और वे अपनी मौत और वसीयत के बारे में बात करने को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। हालांकि, असल में वे बिना वसीयत के मरने के नतीजों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। दुर्भाग्य से...
एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट मालिकाना हक के विवाद का फैसला किए बिना गांव के रास्ते से रुकावट हटाने का आदेश दे सकते हैं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कल्पा के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें गांव वालों द्वारा दशकों से इस्तेमाल किए जा रहे रास्ते से रुकावट हटाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने केवल क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) की धारा 147 के तहत इस्तेमाल के मौजूदा अधिकार की रक्षा की थी, न कि मालिकाना हक के किसी सवाल पर फैसला सुनाया था।कोर्ट ने कहा कि हालांकि मालिकाना हक के विवादों का फैसला केवल सिविल कोर्ट ही कर सकता है, लेकिन एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को रुकावटें हटाने...


















