हाईकोर्ट

सरकारी स्कूल टीचर के तौर पर भर्ती के लिए ज़रूरी बैचलर डिग्री न होने पर मास्टर डिग्री वाले उम्मीदवार योग्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
सरकारी स्कूल टीचर के तौर पर भर्ती के लिए ज़रूरी बैचलर डिग्री न होने पर मास्टर डिग्री वाले उम्मीदवार योग्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मास्टर डिग्री होने से कोई उम्मीदवार अपने आप उस पद के लिए योग्य नहीं हो जाता, जिसके लिए उसी विषय में बैचलर डिग्री की ज़रूरत हो। [2026 LiveLaw (Del) 660]जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस विनोद कुमार की डिवीज़न बेंच ने CAT का आदेश रद्द किया, जिसमें दिल्ली सरकारी स्कूलों में कुछ उम्मीदवारों को डोमेस्टिक साइंस टीचर (TGT) के तौर पर नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।कोर्ट ने कहा कि जिन उम्मीदवारों के पास होम साइंस में मास्टर डिग्री के साथ-साथ साधारण BA (पास) डिग्री है, उन्हें...

खुद को रिपोर्टर कहने वालों की गैर-जिम्मेदाराना पत्रकारिता के लिए प्रेस की आज़ादी ढाल नहीं बन सकती: दिल्ली हाईकोर्ट ने मीडिया रेगुलेशन की ज़रूरत बताई
'खुद को रिपोर्टर कहने वालों' की गैर-जिम्मेदाराना पत्रकारिता के लिए प्रेस की आज़ादी ढाल नहीं बन सकती: दिल्ली हाईकोर्ट ने मीडिया रेगुलेशन की ज़रूरत बताई

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि प्रेस की आज़ादी लोकतंत्र का एक ज़रूरी स्तंभ है, लेकिन इसका इस्तेमाल गैर-जिम्मेदाराना पत्रकारिता, डराने-धमकाने या ऐसी सामग्री फैलाने के लिए ढाल के तौर पर नहीं किया जा सकता जो कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करे।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि सोशल मीडिया के बढ़ते चलन के साथ अब मोबाइल फोन और माइक्रोफोन वाला कोई भी व्यक्ति खुद को "रिपोर्टर" बता सकता है, जबकि अक्सर उनके पास न तो पत्रकारिता की ट्रेनिंग होती है, न ही नैतिक समझ या जवाबदेही।कोर्ट ने कहा,"अब समय आ गया कि...

शरजील इमाम ने दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश वाले मामले में ज़मानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया, कल सुनवाई
शरजील इमाम ने दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश वाले मामले में ज़मानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया, कल सुनवाई

शरजील इमाम ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में बड़ी साज़िश के आरोप वाले मामले (UAPA के तहत) में ज़मानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में अर्ज़ी दी।इस मामले की सुनवाई कल (शुक्रवार) जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच करेगी।इमाम ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें 4 जुलाई को उनकी ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी गई।ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि गुलफिशा फातिमा और सैयद इफ्तिखार अंद्राबी के मामले का फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट की एक बड़ी बेंच को भेजा जा चुका है, इसलिए जब तक...

PDS कॉन्ट्रैक्टर पर कालाबाज़ारी के लिए अनाज डायवर्ट करने का आरोप: ट्रायल का इंतज़ार किए बिना ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है- पटना हाईकोर्ट
PDS कॉन्ट्रैक्टर पर कालाबाज़ारी के लिए अनाज डायवर्ट करने का आरोप: ट्रायल का इंतज़ार किए बिना ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है- पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत अनाज के ट्रांसपोर्टेशन के लिए नियुक्त कॉन्ट्रैक्टर को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है और उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म किया जा सकता है, भले ही कालाबाज़ारी के लिए अनाज डायवर्ट करने के आरोपों से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही का नतीजा अभी न आया हो। कोर्ट ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी कार्रवाई आपराधिक दायित्व से अलग है और इसे स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है, अगर कॉन्ट्रैक्टर का व्यवहार कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के मुताबिक नहीं पाया जाता है।जस्टिस सुधीर...

बच्चे की कस्टडी आर्थिक रूप से सक्षम होने का दावा कर दी, तो पूरा भरण-पोषण पिता पर नहीं डाला जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बच्चे की कस्टडी आर्थिक रूप से सक्षम होने का दावा कर दी, तो पूरा भरण-पोषण पिता पर नहीं डाला जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई कामकाजी मां अपनी आर्थिक क्षमता का दावा करते हुए नाबालिग बच्चे की कस्टडी प्राप्त करती है तो बाद में वह बच्चे के भरण-पोषण का पूरा वित्तीय बोझ केवल पिता पर नहीं डाल सकती। यदि मां भी पर्याप्त आय अर्जित कर रही है, तो बच्चे के खर्च दोनों माता-पिता अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार वहन करेंगे।जस्टिस लक्ष्मी कांत शुक्ला ने यह टिप्पणी करते हुए एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज की। याचिका में फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें महिला...

अपील बहाल करते हुए अनोखा निर्देश: वृद्धाश्रम जाकर बुजुर्गों के साथ एक घंटा बिताएं, रिपोर्ट भी दें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
अपील बहाल करते हुए अनोखा निर्देश: वृद्धाश्रम जाकर बुजुर्गों के साथ एक घंटा बिताएं, रिपोर्ट भी दें: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक रिट अपील बहाल करते हुए आवेदक को अनोखा निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि वह जबलपुर के तिलवारा वृद्धाश्रम जाकर वहां के बुजुर्गों के साथ एक घंटा बिताएं और 15 दिनों के भीतर अपने अनुभव, वृद्धाश्रम की स्थिति तथा सुझावों सहित रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि यह मामला "सामाजिक लेखा-परीक्षण" की अवधारणा को परखने का अवसर है और वर्तमान समय में इसकी अत्यंत आवश्यकता है।मामला उस रिट अपील से जुड़ा था जिसे 18 जुलाई 2025 को पारित एक...

अंतरिम आदेश के लिए नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर की रिपोर्ट से किसी पक्ष के अधिकार तय नहीं होते: राजस्थान हाईकोर्ट
अंतरिम आदेश के लिए नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर की रिपोर्ट से किसी पक्ष के अधिकार तय नहीं होते: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 39 नियम 7 के तहत नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर का उद्देश्य किसी पक्ष के लिए साक्ष्य जुटाना नहीं, बल्कि अदालत को विवादित संपत्ति की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन उपलब्ध कराना है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कमिश्नर की रिपोर्ट से किसी भी पक्ष का कोई मौलिक (Substantive) अधिकार न तो बनता है और न ही समाप्त होता है।जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा आदेश 39 नियम 7 CPC के तहत स्थानीय निरीक्षण...

सहयोग पोर्टल और सामग्री हटाने के नियमों को चुनौती: बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र से 29 जुलाई तक मांगा जवाब
सहयोग पोर्टल और सामग्री हटाने के नियमों को चुनौती: बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्र से 29 जुलाई तक मांगा जवाब

बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा की याचिका पर केंद्र सरकार को 29 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। याचिका में 'सहयोग पोर्टल' और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 3(1)(डी) में वर्ष 2025 में किए गए संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई। कामरा का दावा है कि यह व्यवस्था पर्याप्त कानूनी सुरक्षा के बिना ऑनलाइन सामग्री हटाने का रास्ता खोलती है।एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र गूगे और जस्टिस गौतम अंखाड़ की खंडपीठ ने मामले की...

10 साल की बच्ची का हाथ पकड़कर शादी का प्रस्ताव देना मात्र से धारा 354 लागू नहीं होगी, गलत मंशा साबित होना जरूरी: झारखंड हाईकोर्ट
10 साल की बच्ची का हाथ पकड़कर शादी का प्रस्ताव देना मात्र से धारा 354 लागू नहीं होगी, गलत मंशा साबित होना जरूरी: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति 10 वर्षीय बच्ची का हाथ पकड़कर उससे शादी का प्रस्ताव देता है, लेकिन उसके पीछे कोई यौन या अशोभनीय मंशा साबित नहीं होती, तो मात्र इस आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करना) का अपराध नहीं बनता।जस्टिस राजेश कुमार की सिंगल बेंच ने आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए धारा 354 के तहत दोषी ठहराए गए आरोपी को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के अपने बयान से ही इस अपराध के आवश्यक तत्व साबित नहीं होते।यह अपील सरायकेला-खरसावां के विशेष अदालत...

1981 हत्या मामला: 12 लोगों पर एक साथ गोली चलाने का आरोप, लेकिन शव पर मिलीं सिर्फ 3 गोली की चोटें, हाईकोर्ट ने 3 दोषियों को किया बरी
1981 हत्या मामला: 12 लोगों पर एक साथ गोली चलाने का आरोप, लेकिन शव पर मिलीं सिर्फ 3 गोली की चोटें, हाईकोर्ट ने 3 दोषियों को किया बरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 1981 के चर्चित हत्या मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन जीवित अपीलकर्ताओं को सभी आरोपों से बरी किया। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन का दावा था कि 12 आरोपियों ने एक साथ मृतक पर गोलियां चलाई थीं जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर केवल तीन प्रवेश घाव और एक निकास घाव मिला। कोर्ट ने इसे अभियोजन के प्रत्यक्षदर्शी बयान और चिकित्सकीय साक्ष्य के बीच गंभीर विरोधाभास मानते हुए दोषसिद्धि को टिकाऊ नहीं माना।जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने वर्ष 1984...

1956 से पहले हिंदू कानून में बेटी को गोद लेने की मान्यता नहीं थी, इसलिए संपत्ति पर दावा नहीं बनता: गुजरात हाईकोर्ट
1956 से पहले हिंदू कानून में बेटी को गोद लेने की मान्यता नहीं थी, इसलिए संपत्ति पर दावा नहीं बनता: गुजरात हाईकोर्ट

गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 लागू होने से पहले प्राचीन हिंदू कानून में केवल पुत्र को गोद लेने की मान्यता थी। इसलिए उस दौर में किसी बेटी को गोद लिया गया माना नहीं जा सकता और वह दत्तक पिता की संपत्ति पर उत्तराधिकार का दावा नहीं कर सकती।जस्टिस जे. सी. दोशी ने एक महिला की अपील खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। महिला ने अपने दत्तक पिता की अचल संपत्तियों पर स्वामित्व का दावा किया था, जिसे ट्रायल कोर्ट पहले ही खारिज कर चुकी थी।महिला का कहना था कि उसके जैविक पिता...

नियमों में शामिल दिव्यांगता पर ही मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति, अदालत नई श्रेणी नहीं जोड़ सकती: राजस्थान हाईकोर्ट
नियमों में शामिल दिव्यांगता पर ही मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति, अदालत नई श्रेणी नहीं जोड़ सकती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने 75 प्रतिशत दिव्यांगता से ग्रस्त एक सरकारी कर्मचारी के बेटे को अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार करने के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति केवल उन्हीं दिव्यांगताओं के मामलों में दी जा सकती है, जिन्हें नियमों में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया। अदालत कानून में नई श्रेणी नहीं जोड़ सकती।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने कहा कि कल्याणकारी कानूनों की उदार व्याख्या की जा सकती है, लेकिन अदालत विधायिका द्वारा जानबूझकर बाहर रखी गई श्रेणियों को...

हर जीवन अनमोल है: अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की रोजाना स्वास्थ्य जांच और जरूरत पड़ने पर इलाज सुनिश्चित करे सरकार:- हाईकोर्ट
हर जीवन अनमोल है: अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की रोजाना स्वास्थ्य जांच और जरूरत पड़ने पर इलाज सुनिश्चित करे सरकार:- हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि वांगचुक की रोजाना मेडिकल जांच कराई जाए और यदि उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए किसी भी तरह के चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता हो तो सरकार तत्काल आवश्यक इलाज उपलब्ध कराए।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि हर नागरिक का जीवन अनमोल है और उसे बचाने के...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी पुलिस स्टेशनों में CCTV के काम करने और फुटेज को सुरक्षित रखने की स्थिति की समीक्षा करने का निर्देश दिया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी पुलिस स्टेशनों में CCTV के काम करने और फुटेज को सुरक्षित रखने की स्थिति की समीक्षा करने का निर्देश दिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (15 जुलाई) को राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया। इस रिपोर्ट में यह बताना होगा कि क्या महाराष्ट्र के सभी पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरे काम कर रहे हैं और संबंधित पुलिस स्टेशन उनके डेटा को कितने समय तक सुरक्षित रखते हैं।एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की खंडपीठ ने DGP से 10 अगस्त को अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा।आदेश में कहा गया,"हम पुलिस महानिदेशक से कहते हैं कि वे परमवीर सिंह मामले में आए फैसले को ध्यान में रखते हुए...

1981 में पिता पर एसिड अटैक |ट्रायल जज के हत्या के आरोप को नज़रअंदाज़ करने और बेटे को सिर्फ़ 3 साल की सज़ा सुनाने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराज़गी
1981 में पिता पर एसिड अटैक |ट्रायल जज के हत्या के आरोप को नज़रअंदाज़ करने और बेटे को सिर्फ़ 3 साल की सज़ा सुनाने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराज़गी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को गोरखपुर की ट्रायल कोर्ट के फ़ैसले पर "गहरा दुख" जताया। इस फ़ैसले में एक व्यक्ति को IPC की धारा 326 के तहत दोषी ठहराया गया और अपने ही पिता पर एसिड डालकर उनकी जान लेने के लिए सिर्फ़ 3 साल की सज़ा सुनाई गई।जस्टिस संतोष राय की बेंच ने कहा,"...ट्रायल जज ने सबूतों को गलत तरीके से समझा और हत्या/गैर-इरादतन हत्या के अपराध से जुड़े तय सिद्धांतों को लागू करने में पूरी तरह नाकाम रहे। उन्होंने सिर्फ़ IPC की धारा 326 के तहत दोषी ठहराया और सिर्फ़ तीन साल की कठोर सज़ा सुनाई।" ...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹2,161 करोड़ के कथित शराब घोटाले से जुड़ी FIR में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त को ज़मानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹2,161 करोड़ के कथित शराब घोटाले से जुड़ी FIR में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त को ज़मानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ₹2,161 करोड़ के कथित छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़ी उत्तर प्रदेश की FIR में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को ज़मानत दी।जस्टिस विक्रम डी. चौहान ने कहा:"अगर आरोपी ज़मानत का हकदार है तो उसे सिर्फ़ आपराधिक इतिहास के आधार पर ज़मानत देने से मना नहीं किया जा सकता। आरोपी को ज़मानत देने से मना करने के लिए आपराधिक इतिहास के आधार पर कोई खास वजह नहीं बताई गई। इसलिए कोर्ट को यह सही नहीं लगता कि सिर्फ़ इस आधार पर कि उनका आपराधिक इतिहास रहा है, आवेदक को ज़मानत देने से मना...

पिता द्वारा ज़बरदस्ती ले जाए गए बच्चे को वापस पाने के लिए मजिस्ट्रेट BNSS के तहत तलाशी का प्रावधान लागू कर सकते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
पिता द्वारा ज़बरदस्ती ले जाए गए बच्चे को वापस पाने के लिए मजिस्ट्रेट BNSS के तहत तलाशी का प्रावधान लागू कर सकते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत तलाशी के प्रावधानों का इस्तेमाल करके उस बच्चे को वापस ला सकते हैं जिसे कथित तौर पर उसके पिता ने माँ की कस्टडी से ज़बरदस्ती ले लिया था।मालेगाँव में मजिस्ट्रेट के उन आदेशों को सही ठहराते हुए, जिनमें पुलिस को पिता के घर की तलाशी लेने और फिर तीन साल के बच्चे की कस्टडी माँ को सौंपने का निर्देश दिया गया, कोर्ट ने पाया कि सेशंस कोर्ट ने उन निर्देशों में दखल देकर गलती की थी।सिंगल-जज जस्टिस माधव जामदार ने मालेगाँव, नासिक की...