हाईकोर्ट

डॉक्टरों से मारपीट मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिंदे सेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द की, डॉक्टरों से हड़ताल टालने की अपील
डॉक्टरों से मारपीट मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिंदे सेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द की, डॉक्टरों से हड़ताल टालने की अपील

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नगर निगम अस्पताल के तीन डॉक्टरों से मारपीट के मामले में शिंदे सेना के पार्षद रमेश म्हात्रे को निचली अदालत से मिली जमानत रद्द की।अदालत ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट ने आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड और घटना की गंभीरता पर पर्याप्त विचार नहीं किया। एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड़ की खंडपीठ ने कल्याण की मजिस्ट्रेट अदालत के जमानत आदेश पर स्वतः संज्ञान लेकर उसे स्थगित करते हुए रमेश म्हात्रे और उनके चार सहयोगियों की जमानत भी रद्द की।अदालत...

28 साल नौकरी कराने के बाद कर्मचारी को हटाना अनुचित, नियमित करें सेवा: एमपी हाईकोर्ट का राज्य सरकार को आदेश
28 साल नौकरी कराने के बाद कर्मचारी को हटाना अनुचित, नियमित करें सेवा: एमपी हाईकोर्ट का राज्य सरकार को आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने करीब 28 वर्ष की सेवा के बाद एक कर्मचारी की नियुक्ति यह कहते हुए समाप्त किए जाने का आदेश रद्द किया कि राज्य सरकार को उसे हटाने के बजाय प्रत्यक्ष भर्ती वाले उपयुक्त पद पर नियमित करना चाहिए था।अदालत ने कहा कि कर्मचारी ने नियुक्ति पाने के लिए न तो कोई धोखाधड़ी की और न ही कोई गलत जानकारी दी थी।जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारी की सेवाओं को प्रत्यक्ष भर्ती वाले उपयुक्त पद पर नियमित किया जाए। यदि वह पद कम वेतनमान वाला भी हो तब भी नियमों के...

विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र की पहचान, भूख हड़ताल करना अपराध नहीं: मद्रास हाईकोर्ट ने किसान पर दर्ज मुकदमा किया रद्द
विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र की पहचान, भूख हड़ताल करना अपराध नहीं: मद्रास हाईकोर्ट ने किसान पर दर्ज मुकदमा किया रद्द

मद्रास हाईकोर्ट ने किसान संगठन के नेता के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों के विरोध में भूख हड़ताल करने वाले एक किसान के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमा रद्द करते हुए कहा कि विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र की पहचान है और यह संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। केवल नारे लगाने या शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने को अपराध नहीं माना जा सकता।जस्टिस एम. निर्मल कुमार ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि प्रदर्शन के कारण आम जनता को कोई असुविधा हुई या यातायात बाधित हुआ।अदालत ने कहा,"सिर्फ नारे...

35 साल बाद मिला इंसाफ: करंट से महिला की मौत पर मुआवजा तीन गुना बढ़ाया, राजस्थान हाईकोर्ट ने बिजली विभाग को ठहराया जिम्मेदार
35 साल बाद मिला इंसाफ: करंट से महिला की मौत पर मुआवजा तीन गुना बढ़ाया, राजस्थान हाईकोर्ट ने बिजली विभाग को ठहराया जिम्मेदार

राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब 35 वर्ष पुराने करंट लगने से मौत के मामले में पीड़ित परिवार को बड़ी राहत देते हुए मुआवजे की राशि लगभग 40 हजार रुपये से बढ़ाकर करीब 1.20 लाख रुपये की।अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिजली जैसी खतरनाक वस्तु के प्रसारण से यदि किसी व्यक्ति की जान जाती है तो बिजली विभाग की पूर्ण जिम्मेदारी (सख्त दायित्व) बनती है और ऐसे मामलों में लापरवाही साबित करना भी आवश्यक नहीं है।जस्टिस संदीप तनेजा की पीठ ने माना कि दुर्घटना वाले स्थान की बिजली लाइन लंबे समय से मरम्मत के अभाव में खराब थी। साथ ही...

S.47 CPC | डिक्री में मुकदमे की प्रॉपर्टी के बारे में क्लर्क की गलती से हुई गलत जानकारी को एग्जीक्यूटिंग कोर्ट ठीक कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
S.47 CPC | डिक्री में मुकदमे की प्रॉपर्टी के बारे में क्लर्क की गलती से हुई गलत जानकारी को एग्जीक्यूटिंग कोर्ट ठीक कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि एग्जीक्यूटिंग कोर्ट, सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 47 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, डिक्री में मुकदमे की प्रॉपर्टी के बारे में क्लर्क की गलती या टाइपिंग की गलती से हुई गलत जानकारी को ठीक कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा सुधार सिर्फ़ उसी कोर्ट तक सीमित नहीं है जिसने डिक्री पास की थी।जस्टिस मनीष कुमार निगम ने कहा,“जहां डिक्री की शर्तें साफ़ और स्पष्ट हैं, वहां उन शर्तों को लागू किया जाना चाहिए। हालांकि, जहां डिक्री अस्पष्ट या उलझन भरी है, वहां...

सेशन जज के ट्रांसफर ऑर्डर को CrPC की धारा 482 के तहत चुनौती दी जा सकती है, धारा 407 के तहत नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सेशन जज के ट्रांसफर ऑर्डर को CrPC की धारा 482 के तहत चुनौती दी जा सकती है, धारा 407 के तहत नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई सेशन जज CrPC की धारा 408 के तहत किसी क्रिमिनल केस को ट्रांसफर करने की अर्ज़ी मंज़ूर करता है, तो उस आदेश से प्रभावित व्यक्ति CrPC की धारा 407 के तहत नई ट्रांसफर अर्ज़ी दाखिल करके उसे चुनौती नहीं दे सकता।कोर्ट ने कहा कि ट्रांसफर की मंज़ूरी देने वाले आदेश को केवल CrPC की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट में ही चुनौती दी जा सकती है।बता दें, CrPC की धारा 408 सेशन जज को अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर क्रिमिनल ट्रायल/अपील को ट्रांसफर करने का अधिकार देती है।धारा 407 हाईकोर्ट को...

एक ही गोत्र में शादी करने पर कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार का मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जोड़े को दी सुरक्षा
'एक ही गोत्र' में शादी करने पर कथित तौर पर सामाजिक बहिष्कार का मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जोड़े को दी सुरक्षा

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक ऐसे जोड़े को नोटिस जारी किया और अंतरिम सुरक्षा दी है, जिन्हें एक स्थानीय सामाजिक संगठन (संगठन) ने एक ही गोत्र (वंश) में शादी करने के कारण कथित तौर पर समाज से बहिष्कृत कर दिया।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने पुलिस को निर्देश दिया कि अगर जोड़े को परेशान किया जा रहा है, तो उन्हें सुरक्षा दी जाए।"प्रतिवादी संख्या 9 से 16 को P.F. के भुगतान पर 7 कामकाजी दिनों के भीतर नोटिस जारी किया जाए, जिसका जवाब 6 सप्ताह के भीतर आना चाहिए। राज्य के वकील को...

केस ट्रांसफर से पहले हाईकोर्ट से मंज़ूरी मिलने के बावजूद सिविल कोर्ट टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन की नए सिरे से जांच कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
केस ट्रांसफर से पहले हाईकोर्ट से मंज़ूरी मिलने के बावजूद सिविल कोर्ट टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन की नए सिरे से जांच कर सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि केस ट्रांसफर करने से पहले हाईकोर्ट द्वारा 'लेटर्स पेटेंट' के क्लॉज़ XII के तहत मंज़ूरी देने का मतलब यह नहीं है कि बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट, केस ट्रांसफर होने के बाद टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन के मुद्दे की नए सिरे से जांच नहीं कर सकता।कोर्ट ने कहा कि बॉम्बे सिटी सिविल कोर्ट एक्ट, 1948 की धारा 4A(2) के तहत सिटी सिविल कोर्ट को ट्रांसफर किए गए केस को ऐसे देखना होता है जैसे वह मूल रूप से उसी के सामने दायर किया गया हो। अगर उसे लगता है कि उसके पास टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन नहीं...

एमपी हाईकोर्ट ने कांग्रेस से जुड़े WhatsApp ग्रुप में AI-वीडियो फैलाने के मामले में हेबियस कॉर्पस याचिकाओं को बंद किया
एमपी हाईकोर्ट ने कांग्रेस से जुड़े WhatsApp ग्रुप में AI-वीडियो फैलाने के मामले में 'हेबियस कॉर्पस' याचिकाओं को बंद किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 'हेबियस कॉर्पस' याचिकाओं के एक समूह को बंद किया। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि तीन लोगों को पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया और बाद में राजस्थान पुलिस को सौंप दिया। उन पर कांग्रेस से जुड़े WhatsApp ग्रुप में एक न्यूज़ चैनल की पहचान का गलत इस्तेमाल करके AI से बदला हुआ (मैनिपुलेटेड) वीडियो फैलाने का आरोप है। [2026 LiveLaw (MP) 282]बता दें, राजस्थान पुलिस ने दावा किया कि एक न्यूज़ चैनल के क्राइम रिपोर्टर ने चैनल की पहचान का गलत इस्तेमाल करके AI से बदले गए...

POCSO | क्या कथित रक्तस्राव से पेनेट्रेशन का अनुमान लगाया जा सकता है, जब मेडिकल रिपोर्ट में कोई चोट नहीं दिखाई गई हो? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जवाब
POCSO | क्या कथित रक्तस्राव से पेनेट्रेशन का अनुमान लगाया जा सकता है, जब मेडिकल रिपोर्ट में कोई चोट नहीं दिखाई गई हो? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि चोटों की अनुपस्थिति, अपने आप में बलात्कार या प्रवेशन यौन उत्पीड़न के आरोपों को खारिज नहीं करती। हालांकि, कथित रक्तस्राव से प्रवेश का अनुमान अत्यधिक संदिग्ध हो जाता है जब एक समसामयिक मेडिकल रिपोर्ट संतोषजनक स्पष्टीकरण के बिना किसी भी शारीरिक चोट को पूरी तरह से खारिज कर देती है।जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की पीठ ने कहा कि हालांकि भरोसेमंद नेत्र संबंधी गवाही आम तौर पर चिकित्सा राय पर हावी होती है, लेकिन समसामयिक चिकित्सा निष्कर्षों को नजरअंदाज...

Krishna Janmabhoomi Dispute | साइट पर एंट्री और कार सेवा पर रोक की मांग वाली याचिका: हाईकोर्ट ने DM और SSP से मांगी रिपोर्ट
Krishna Janmabhoomi Dispute | साइट पर एंट्री और 'कार सेवा' पर रोक की मांग वाली याचिका: हाईकोर्ट ने DM और SSP से मांगी रिपोर्ट

श्री कृष्ण जन्मभूमि मालिकाना हक विवाद के चल रहे मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अर्ज़ी दी गई। इसमें अधिकारियों से मांग की गई कि वे किसी भी व्यक्ति या समूह को विवादित जगह पर मीटिंग करने, "कार सेवा" करने या कोई कार्यक्रम आयोजित करने से रोकें।यह अर्ज़ी आशुतोष महाराज ने वकील रीना एन. सिंह के ज़रिए दायर की। वह खुद को मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट (रजिस्टर्ड) का अध्यक्ष बताते हैं।अर्ज़ी में खास तौर पर राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की गई कि वे किसी भी व्यक्ति या समूह को...

तारीख पर तारीख आपराधिक न्याय व्यवस्था की पहचान नहीं बन सकती: 24 साल से लंबित अपहरण मुकदमे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
तारीख पर तारीख आपराधिक न्याय व्यवस्था की पहचान नहीं बन सकती: 24 साल से लंबित अपहरण मुकदमे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 24 वर्षों से लंबित एक अपहरण के मुकदमे पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि तारीख पर तारीख आपराधिक न्याय व्यवस्था की पहचान नहीं बन सकती। अदालत ने कहा कि वर्षों तक बिना किसी सार्थक प्रगति के मुकदमा लंबित रहना न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निष्पक्ष एवं शीघ्र सुनवाई के अधिकार के विपरीत है।जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने वर्ष 2001 के अपहरण के एक मामले में दो आरोपियों को अग्रिम जमानत देते हुए यह टिप्पणी की।अदालत ने कहा,"वर्षों तक कार्यवाही...

इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला: पुराने भूमि अधिग्रहण कानून के निरस्त होने के बाद जारी हुई अधिसूचना पर कार्रवाई अवैध
इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला: पुराने भूमि अधिग्रहण कानून के निरस्त होने के बाद जारी हुई अधिसूचना पर कार्रवाई अवैध

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत जारी अधिसूचना पर भले ही 1 जनवरी 2014 से पहले की तारीख अंकित हो, लेकिन उसका प्रकाशन 1 जनवरी 2014 के बाद हुआ है, तो ऐसी पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू से ही अवैध मानी जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुराने कानून के निरस्त होने के बाद उसके तहत नई अधिग्रहण कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती।जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि अधिसूचना पर लिखी तारीख का कोई कानूनी महत्व नहीं है। महत्वपूर्ण यह...

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: दंगे के मामले में सम्मानजनक बरी होने की जानकारी छिपाने पर पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी बरकरार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का फैसला: दंगे के मामले में सम्मानजनक बरी होने की जानकारी छिपाने पर पुलिस कांस्टेबल की बर्खास्तगी बरकरार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दंगे और ईंट-पत्थर फेंकने के मामले में लाभ के संदेह (बेनिफिट ऑफ डाउट) के आधार पर बरी हुए पुलिस कांस्टेबल की सेवा से बर्खास्तगी को सही ठहराया। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने यह तथ्य छिपाया कि उसकी बरी होना सम्मानजनक (क्लीन) नहीं था। ऐसे व्यक्ति की पुलिस जैसे अनुशासित बल में नियुक्ति पुलिस की अनुशासन व्यवस्था और प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े करेगी।जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की आपराधिक मामले में संलिप्तता भले ही संदेहास्पद रही हो लेकिन उसके खिलाफ लगाए गए आरोप...

लिखित बयान दाखिल करने का अधिकार खत्म होने पर प्रतिवादी अपना साक्ष्य पेश नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
लिखित बयान दाखिल करने का अधिकार खत्म होने पर प्रतिवादी अपना साक्ष्य पेश नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी प्रतिवादी का लिखित बयान दाखिल करने का अधिकार समाप्त हो गया है, तो उसे अपने पक्ष में साक्ष्य पेश करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि साक्ष्य केवल उन्हीं तथ्यों को सिद्ध करने के लिए दिया जा सकता है, जिनका उल्लेख पक्षकार ने अपनी दलीलों में किया हो। जब लिखित बयान ही नहीं है, तो उसके समर्थन में साक्ष्य देने का भी कोई आधार नहीं बनता।जस्टिस मनीष कुमार निगम ने कहा,"यदि कोई पक्षकार किसी महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख अपनी दलीलों में नहीं करता तो वह उस...

DHCBA ने फिलहाल वापस ली हड़ताल, चीफ जस्टिस और कानून मंत्री से बातचीत के बाद फैसला
DHCBA ने फिलहाल वापस ली हड़ताल, चीफ जस्टिस और कानून मंत्री से बातचीत के बाद फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने जिला अदालतों की आर्थिक अधिकारिता 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में चल रही हड़ताल को फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया।यह निर्णय केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया।DHCBA ने अपने सदस्यों को जारी सूचना में बताया कि कार्यकारिणी समिति ने सर्वसम्मति से मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए हड़ताल को "फिलहाल के लिए स्थगित" करने का निर्णय...

निर्माता पर कार्रवाई से पहले निरीक्षण और जांच की प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
निर्माता पर कार्रवाई से पहले निरीक्षण और जांच की प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी निर्माता के खिलाफ विधिक माप विज्ञान (पैकेज्ड वस्तु) नियम, 2011 के तहत कार्रवाई करने से पहले नियम 19 और 21 में निर्धारित निरीक्षण एवं परीक्षण की प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। इन नियमों की अनदेखी कर की गई कार्रवाई कानूनन टिकाऊ नहीं होगी।जस्टिस आलोक माथुर ने कहा,"नियम 19 और 21 में निर्धारित पूर्व शर्तें अनिवार्य हैं। इनका उद्देश्य निर्माता और विक्रेता दोनों के हितों की रक्षा करना तथा यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक दोषी के खिलाफ ही कार्रवाई हो।" मामला...