हाईकोर्ट
आवेदन संख्या और उपस्थिति का उल्लेख अनिवार्य: दिल्ली हाइकोर्ट ने जिला कोर्ट्स को जारी किए दिशा-निर्देश
दिल्ली हाइकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी की सभी जिला कोर्ट्स को विस्तृत प्रैक्टिस दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा कि प्रत्येक न्यायिक आदेश में यह स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए कि किन आवेदन पर फैसला किया गया और पक्षकार या उनके वकील पेश हुए थे या नहीं।कोर्ट ने जिला कोर्ट्स के कई आदेशों में बुनियादी विवरणों की कमी पर गंभीर चिंता जताई।जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि उनके समक्ष बार-बार ऐसे मामले आ रहे हैं, जिनमें लंबित कार्यवाहियों के दौरान दायर अंतरिम और अन्य आवेदनों पर...
अध-कचरी याचिका: दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज की, लगाया 25,000 का जुर्माना
दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने इसे अध-कचरी याचिका करार दिया।कोर्ट ने कहा कि यह याचिका तीन साल की अत्यधिक देरी से दाखिल की गई और इसमें पूरा रिकॉर्ड तक संलग्न नहीं किया गया। हाइकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए 25,000 का जुर्माना भी लगाया।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने आदेश दिया कि यह राशि नई दिल्ली स्थित एम्स के पुअर पेशेंट्स फंड में जमा कराई जाए।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह लागत उस अधिकारी से वसूली जाएगी,...
परीक्षा की निष्पक्षता में मानसिक शांति भी शामिल: दिल्ली हाइकोर्ट ने बायोमेट्रिक गड़बड़ी से प्रभावित JEE अभ्यर्थी को दोबारा परीक्षा देने की अनुमति दी
दिल्ली हाइकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की निष्पक्षता केवल परीक्षा कक्ष में प्रवेश देने तक सीमित नहीं होती बल्कि यह भी जरूरी है कि अभ्यर्थी को ऐसे प्रक्रियात्मक झटकों का सामना न करना पड़े जो उसकी मानसिक शांति और एकाग्रता को भंग कर दें।इसी आधार पर हाइकोर्ट ने JEE 2026 की मुख्य परीक्षा (सेशन-I) में बायोमेट्रिक गड़बड़ी से प्रभावित अभ्यर्थी को दोबारा परीक्षा देने की अनुमति दी।मामले की सुनवाई जस्टिस जस्मीत सिंह ने की।याचिकाकर्ता श्लोक भारद्वाज परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचे...
समझौते के आधार पर अग्रिम ज़मानत लेकर बाद में मुकरना न्यायालय के विश्वास का उल्लंघन: हाईकोर्ट ने 2022 की ज़मानत आदेश वापस लिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि कोई भी अभियुक्त केवल समझौते (कम्प्रोमाइज़) के आधार पर अग्रिम ज़मानत हासिल कर, बाद में न्यायालय के समक्ष दिए गए गंभीर आश्वासनों से मुकर नहीं सकता। ऐसा आचरण न्यायिक उदारता के दुरुपयोग और न्यायालयीय विश्वास के उल्लंघन के समान है। जस्टिस सुमीत गोयल ने 2022 में दी गई अग्रिम ज़मानत को वापस लेते हुए यह टिप्पणी की।न्यायालय ने कहा कि वह एक चिंताजनक प्रवृत्ति का संज्ञान ले रहा है, जिसमें अभियुक्त “आपसी समझौते” को एक रणनीतिक हथकंडे की तरह इस्तेमाल कर...
सहमति से विवाह करने वाले वयस्कों को सामाजिक मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने वाले सहमति से विवाह करने वाले वयस्कों को समाज या माता-पिता की मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं है और न ही कोई व्यक्ति या संस्था उनके इस निर्णय में दख़ल दे सकती है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि सहमति से विवाह करने का निर्णय पूरी तरह पवित्र है और ऐसे निर्णय को सम्मान दिया जाना चाहिए, विशेषकर तब जब दोनों व्यक्ति वयस्क हों और उन्हें अपने जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त हो।अदालत ने दोहराया कि विवाह करने का अधिकार मानवीय स्वतंत्रता का...
साहयोग पोर्टल और आईटी नियमों के 2025 संशोधन को लेकर बॉम्बे हाइकोर्ट में चुनौती
प्रसिद्ध स्टैंड-अप कॉमेडियन और व्यंग्यकार कुणाल कामरा ने सोशल मीडिया कंटेंट को ब्लॉक करने से जुड़े साहयोग पोर्टल और सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में किए गए 2025 के संशोधन को बॉम्बे हाइकोर्ट में चुनौती दी।कामरा ने आईटी नियम 2021 के नियम 3(1)(d) में किए गए बदलाव को असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गंभीर असर डालता है।कामरा की याचिका में दलील दी गई कि साहयोग पोर्टल के ज़रिये कंटेंट हटाने या ब्लॉक करने की जो व्यवस्था बनाई गई, वह IT Act की धारा 69A में तय कानूनी प्रक्रिया और...
2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के 'बड़ी साज़िश' मामले में जमानत याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े 'बड़ी साज़िश' मामले में दो आरोपियों—अथर खान और सलीम मलिक—द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर नोटिस जारी किया।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने जमानत याचिकाओं पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और दो सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।सलीम मलिक की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोप सह-आरोपी मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद के समान हैं, जिन्हें हाल...
सिर्फ़ इसलिए राहत नहीं रोकी जा सकती कि अधिकारी कोर्ट नहीं आया: राजस्थान हाईकोर्ट ने अपमानजनक टिप्पणियां रद्द कीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा न सिर्फ़ याचिकाकर्ता पुलिस अधिकारी, बल्कि एक दूसरे अधिकारी के खिलाफ़ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की राहत दी, जो राहत के लिए कोर्ट नहीं आया।जस्टिस अनिल कुमार उपमन की बेंच ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि दूसरा अधिकारी कोर्ट नहीं आया, यह नहीं कहा जा सकता कि उसके खिलाफ़ की गई प्रतिकूल टिप्पणियां सही थीं। समानता के सिद्धांत के आधार पर यह माना गया कि जब कोई खास कार्रवाई कानूनी रूप से गलत पाई जाती है तो एक पक्ष को दिया गया फ़ायदा उसी तरह की स्थिति वाले दूसरे...
पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के पास पुलिस की रिक्वेस्ट के बिना पुलिस रिमांड मांगने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
यह मानते हुए कि एक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के पास CrPC की धारा 167 के तहत पुलिस रिमांड मांगने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है, जब तक कि ऐसी रिक्वेस्ट इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी से न आए, जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पुलिस कस्टडी पुलिस द्वारा बताई गई जांच की ज़रूरत पर आधारित होनी चाहिए, न कि प्रॉसिक्यूशन के विवेक पर।जस्टिस संजय परिहार ने राज्य द्वारा दायर क्रिमिनल रिवीजन खारिज करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि एक बार चार्जशीट दायर हो जाने के बाद इसका मतलब यह होता है कि कस्टडी में...
गलत आरोप से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जड़ पर चोट: राजस्थान हाईकोर्ट ने CRPF कांस्टेबल को बहाल किया
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि चार्जशीट का फॉर्म भले ही उसके सब्सटेंस पर भारी पड़ता हो, लेकिन जब उसकी नींव ही गलत आरोप पर आधारित हो तो राज्य बाद में जांच के नतीजे के हिसाब से आरोप को हल्का या दोबारा इंटरप्रेट नहीं कर सकता।याचिकाकर्ता-कांस्टेबल का सस्पेंशन रद्द करते हुए जस्टिस आनंद शर्मा की बेंच ने कहा कि अनुशासनात्मक अथॉरिटी को सज़ा देने से पहले दुर्व्यवहार को सही ढंग से क्लासिफाई करना होगा, नहीं तो पूरी कार्रवाई मनमानी हो जाएगी।कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें याचिकाकर्ता के सस्पेंशन के...
पूरे उत्तर प्रदेश में कोई जुवेनाइल रिहैब इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- JJ Act 'बेकार', स्कूलों, शिक्षकों की भूमिका पर विचार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में स्थिति पर गहरी चिंता जताई, जब राज्य सरकार ने उसके सामने यह माना कि पूरे राज्य में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, (JJ Act) 2015 को लागू करने में इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी कमियां हैं।असल में उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि पूरे राज्य में JJ Act, 2015 और JJ रूल्स, 2016 के तहत बताए गए मान्यता प्राप्त संस्थानों, जैसे "फिट पर्सन," "ग्रुप फॉस्टर केयर संस्थान," "ग्रुप फॉस्टर केयर देने वाले," और "केस वर्कर" की उपलब्धता के बारे में कोई जानकारी नहीं है।बता दें, ये...
कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर दोबारा नौकरी पाने वाले पूर्व सैनिक सिविल पेंशन के हकदार नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
एक पूर्व सैनिक द्वारा अपनी सिविल दोबारा नौकरी के लिए पेंशन लाभ मांगने वाली रिट याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ़ लंबी सर्विस के आधार पर पेंशन का दावा नहीं किया जा सकता, जब तक कि अपॉइंटमेंट पक्का, स्थायी न हो और पेंशन देने वाले नियमों के तहत न आता हो।जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने कहा,"शुरू से ही याचिकाकर्ता को इस बात की जानकारी थी कि वह एक अस्थायी कर्मचारी है, जिसकी सेवाएं किसी भी समय खत्म की जा सकती हैं। इसलिए ऐसा कोई मौका नहीं आया, जहां उसे अपनी नौकरी की प्रकृति के आधार पर एक...
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2025 में क्लास XII पास करने वालों के लिए 'एडिशनल सब्जेक्ट' की सुविधा खत्म करने के CBSE का फैसला रद्द किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने CBSE के दो नोटिफिकेशन रद्द किया, जिसमें 2025 में क्लास XII पास करने वाले स्टूडेंट्स के लिए प्राइवेट कैंडिडेट के तौर पर "एडिशनल सब्जेक्ट" में बैठने की सुविधा वापस ले ली गई। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला मनमाना था, इसे पिछली तारीख से लागू किया गया और यह वैध उम्मीद के सिद्धांत का उल्लंघन करता है।जस्टिस जसमीत सिंह ने 2025 में क्लास XII बोर्ड परीक्षा पास करने वाले स्टूडेंट्स द्वारा दायर याचिकाओं के एक बैच को मंज़ूरी दी और कहा कि विवादित पॉलिसी में बदलाव बिना किसी उचित नोटिफिकेशन और बिना...
दिल्ली हाईकोर्ट ने SSC से प्रश्न पत्र और आंसर-की को फाइनल करने में सिस्टमैटिक तरीका अपनाने को कहा, गंभीर कमियों पर ध्यान दिलाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC) से भर्ती परीक्षाओं में प्रश्न पत्र और आंसर-की बनाने, जांचने और फाइनल करने में ज़्यादा सिस्टमैटिक और सख्त तरीका अपनाने को कहा।जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने कहा कि अस्पष्टताओं और आपत्तियों को दूर करने के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाने से न केवल परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि बेवजह के मुकदमों में भी काफी कमी आएगी।बेंच ने कहा कि SSC को भविष्य की सभी परीक्षाओं में ज़्यादा अकादमिक सख्ती और प्रशासनिक सावधानी बरतनी...
डिजिटल नॉमिनी बनाम कानूनी वारिस: मौत के बाद आपके डेटा का मालिक कौन होगा?
आज की दुनिया में, लगभग हर सेवा और बातचीत डिजिटल रूप से होती है। यह बदलाव उल्लेखनीय लाभ प्रदान करता है, लेकिन यह नई चुनौतियों को भी प्रस्तुत करता है।एक नए रेस्तरां मालिक पर विचार करें जो अवैध रूप से प्रतिद्वंद्वी के ग्राहक डेटाबेस तक पहुंचता है। भोजन करने वालों की प्राथमिकताओं, भोजन के समय और प्रतिक्रिया को सीखकर, मालिक उन ग्राहकों को व्यक्तिगत निमंत्रण के साथ लक्षित कर सकता है - अनिवार्य रूप से मूल रेस्तरां द्वारा निर्मित ट्रस्ट का अपहरण कर रहा है। यह सिर्फ एक विपणन रणनीति नहीं है; यह "डेटा...
ये सड़कें किसकी हैं? सुप्रीम कोर्ट का स्वतः संज्ञान और शहरी सुरक्षा का सवाल
सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों के आसपास की बढ़ती चिंताओं का स्वतः संज्ञान लेने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एक प्रतिक्रियावादी कदम के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि एक रोजमर्रा की वास्तविकता के लिए एक संवैधानिक प्रतिक्रिया के रूप में समझा जाना चाहिए जो लंबे समय से प्रशासनिक रूप से अनसुलझा रहा है। अदालत का हस्तक्षेप ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक सुरक्षा, पशु कल्याण और शहरी शासन उन तरीकों से एक दूसरे को काटते हैं जो नारों के बजाय बारीकियों की मांग करते हैं। इस मुद्दे की जांच करने में,...
'CrPC की धारा 125 का मकसद महिला की पीड़ा और वित्तीय कठिनाई को कम करना है': झारखंड हाईकोर्ट ने भरण-पोषण मामले में देरी पर चिंता जताई
झारखंड हाईकोर्ट ने दोहराया कि CrPC की धारा 125 के तहत कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की होती है। इसका मकसद बेघर होने और गरीबी को रोकना है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी कानूनी तौर पर भरण-पोषण की हकदार है ताकि वह गरिमा के साथ और उसी तरह के जीवन स्तर के साथ रह सके जैसा कि वह अपने ससुराल में रहती थी। हालांकि, मौजूदा मामले के तथ्यों को देखते हुए, कोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए भरण-पोषण को बढ़ाने से इनकार किया।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल जज बेंच रांची की फैमिली कोर्ट का आदेश के खिलाफ पति और...
कस्टडी विवादों के कारण मां के उच्च शिक्षा और पर्सनल डेवलपमेंट के अधिकार को कम नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि एक मां का पर्सनल डेवलपमेंट, गरिमा और आज़ादी का अधिकार, जिसमें विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करना भी शामिल है, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक ज़रूरी हिस्सा है। इसे सिर्फ़ इसलिए कम नहीं किया जा सकता, क्योंकि कस्टडी और मुलाक़ात की कार्यवाही पेंडिंग है।जस्टिस सौरभ बनर्जी ने कहा कि यह तथ्य कि एक मां बच्चे की प्राइमरी केयरटेकर है और उसके पालन-पोषण के लिए ज़िम्मेदार है, उसे शिक्षा, पर्सनल ग्रोथ या खुद को आगे बढ़ाने के अधिकार को छोड़ने...
कथित जबरन धर्मांतरण मामले में पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी को जमानत, एमपी हाइकोर्ट का आदेश
मध्य प्रदेश हाइकोर्ट, इंदौर ने कथित जबरन धर्मांतरण के मामले में आरोपी पूर्व कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी को जमानत दी। अनवर कादरी अगस्त 2025 से न्यायिक हिरासत में थे। उन पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत अपराध दर्ज हैं।जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने यह आदेश पारित करते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के खिलाफ सीमित सामग्री ही सामने आती है, जबकि सह-आरोपी को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।आवेदक की ओर से दलील दी गई कि पीड़िता ने अपनी शिकायत में अनवर कादरी...
पुलिस कागजात की आपूर्ति निष्पक्ष सुनवाई का मूल तत्व: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने BNSS की धारा 230 के उल्लंघन पर आरोप निरस्त किए
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने यह कहते हुए एक आरोपी के खिलाफ तय किए गए आरोपों को रद्द कर दिया है कि आरोपी को पुलिस रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराना कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि निष्पक्ष सुनवाई का मूल तत्व है।अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 230 का पालन किए बिना की गई कार्यवाही निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई के सिद्धांत के विरुद्ध है।जस्टिस अवनीश सक्सेना की पीठ ने BNSS की धारा 528 के तहत दायर याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि BNSS की धारा 230 का अनुपालन अनिवार्य है। इसके...



















