हाईकोर्ट

सह-दोषी का पैरोल पर होना, फरलो में रुकावट नहीं: बेटी के स्कूल एडमिशन के लिए आजीवन कारावास काट रहे दोषी को राहत
सह-दोषी का पैरोल पर होना, फरलो में रुकावट नहीं: बेटी के स्कूल एडमिशन के लिए आजीवन कारावास काट रहे दोषी को राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि सिर्फ़ इसलिए कि कोई सह-दोषी पहले से ही पैरोल पर बाहर है, यह किसी दूसरे दोषी को फरलो देने से मना करने का आधार नहीं हो सकता। इसलिए कोर्ट ने आजीवन कारावास काट रहे एक दोषी को रिहा करने का निर्देश दिया, ताकि वह अपनी बेटी के स्कूल एडमिशन में मदद कर सके।जस्टिस मनोज जैन ने यह आदेश आजीवन कारावास काट रहे दोषी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। इस दोषी को दो हफ़्ते की फरलो मंज़ूर की गई, लेकिन जेल अधिकारियों ने उसे इस आधार पर रिहा नहीं किया कि उसका सह-दोषी पहले से ही...

रामगंगा-सरयू संगम क्षेत्र में खनन पर सख्ती, हाईकोर्ट ने भारी मशीनों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाई
रामगंगा-सरयू संगम क्षेत्र में खनन पर सख्ती, हाईकोर्ट ने भारी मशीनों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाई

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रामगंगा-सरयू नदी संगम क्षेत्र में खनन कार्यों के दौरान भारी मशीनों के इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश दिया।अदालत ने प्रशासन को सुनिश्चित करने को कहा कि संबंधित खनन क्षेत्रों में किसी भी पट्टाधारक द्वारा भारी मशीनों का उपयोग न किया जाए।जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ पिथौरागढ़ निवासी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।याचिका में आरोप लगाया गया कि खनन पट्टाधारक नियमों के विपरीत पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनों का उपयोग कर रहे...

लॉरेंस ऑफ पंजाब विवाद: रिलीज रोकने के निर्देश पर Zee की याचिका, पंजाब-केन्द्र से जवाब तलब
लॉरेंस ऑफ पंजाब विवाद: रिलीज रोकने के निर्देश पर Zee की याचिका, पंजाब-केन्द्र से जवाब तलब

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने OTT मंच Zee5 पर प्रस्तावित सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब की रिलीज रोकने संबंधी निर्देशों को चुनौती देने वाली Zee एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड की याचिका पर पंजाब सरकार और केन्द्र सरकार से जवाब मांगा।जस्टिस जगमोहन बंसल ने मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और दोनों सरकारों से जवाब दाखिल करने को कहा।अब मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।याचिका में Zee एंटरटेनमेंट ने 23 और 24 अप्रैल 2026 को जारी उन पत्रों को चुनौती दी, जिनमें उसे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन पर...

भरण-पोषण मामले के लिए पत्नी RTI से नहीं मांग सकती पति की आयकर जानकारी: दिल्ली हाईकोर्ट
भरण-पोषण मामले के लिए पत्नी RTI से नहीं मांग सकती पति की आयकर जानकारी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवाद या भरण-पोषण दावे के समर्थन में पत्नी, सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) के तहत पति की आयकर संबंधी जानकारी प्राप्त नहीं कर सकती।जस्टिस पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि पति की आयकर जानकारी निजी सूचना है। इसका प्रकटीकरण RTI Act के “वृहत्तर लोकहित” अपवाद के अंतर्गत नहीं आता।अदालत ने यह टिप्पणी केंद्रीय सूचना आयोग का आदेश रद्द करते हुए की, जिसमें आयकर विभाग को पति की शुद्ध करयोग्य आय संबंधी विवरण पत्नी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।पति ने केंद्रीय सूचना...

NCLT इलाहाबाद में याचिकाओं की जांच केवल स्थानीय रजिस्ट्री करेगी: हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल बेंच का संयुक्त स्क्रूटनी आदेश स्थगित किया
NCLT इलाहाबाद में याचिकाओं की जांच केवल स्थानीय रजिस्ट्री करेगी: हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल बेंच का 'संयुक्त स्क्रूटनी' आदेश स्थगित किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NCLT प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली के उस आदेश/अधिसूचना पर रोक लगा दी है, जिसमें NCLT इलाहाबाद में दायर याचिकाओं एवं आवेदनों की संयुक्त जांच (स्क्रूटनी) इलाहाबाद और प्रिंसिपल बेंच दोनों द्वारा किए जाने का प्रावधान किया गया।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने केंद्र सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय देते हुए अंतरिम आदेश पारित किया कि फिलहाल NCLT इलाहाबाद में दायर याचिकाओं/आवेदनों की जांच केवल NCLT इलाहाबाद की रजिस्ट्री ही करेगी।यह...

शादी तय होने पर दुष्कर्म आरोपी को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- विवाह तक न हो कठोर कार्रवाई
शादी तय होने पर दुष्कर्म आरोपी को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- विवाह तक न हो कठोर कार्रवाई

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक दुष्कर्म आरोपी को अंतरिम राहत देते हुए उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई, जबकि उसकी अग्रिम जमानत याचिका निचली अदालत में लंबित है।अदालत ने यह राहत इस आधार पर दी कि आरोपी का विवाह 4 मई, 2026 को निर्धारित है।जस्टिस अश्विन भोबे ने आदेश पारित करते हुए जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि आरोपी की लंबित अग्रिम जमानत याचिका पर विशेष अदालत द्वारा निर्णय होने तक उसके विरुद्ध कोई कठोर कदम न उठाया जाए। अदालत ने कहा कि आरोपी और उसके परिवार द्वारा विवाह की सभी तैयारियां की जा चुकी हैं, और यह एक...

सामान्य वर्ग के स्टूडेंट्स को भेदभाव की शिकायतों से बाहर रखने का आरोप: UGC के इक्विटी नियमों पर एससी की रोक के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट करेगा सर्कुलर की जांच
सामान्य वर्ग के स्टूडेंट्स को भेदभाव की शिकायतों से बाहर रखने का आरोप: UGC के इक्विटी नियमों पर एससी की रोक के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट करेगा सर्कुलर की जांच

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्टूडेंट शिकायत निवारण समिति को निर्देश दिया कि वह सामान्य वर्ग सहित सभी श्रेणियों के छात्रों से मिली भेदभाव की शिकायतों पर विचार करे।यह निर्देश याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 2 फरवरी को जारी सर्कुलर को चुनौती दी गई। इस सर्कुलर में सामान्य वर्ग के छात्रों को समिति के समक्ष भेदभाव के आधार पर विवाद उठाने से बाहर रखा गया।चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने निर्देश दिया:"स्टूडेंट शिकायत निवारण समिति, यदि प्राप्त होती है तो...

एक की मौत, दो ने काटी उम्रकैद: 14 साल बाद हाईकोर्ट ने हत्या के दोषियों को किया बरी, सबूत गढ़ने के आरोप में जांच अधिकारी के खिलाफ FIR का आदेश
एक की मौत, दो ने काटी उम्रकैद: 14 साल बाद हाईकोर्ट ने हत्या के दोषियों को किया बरी, सबूत गढ़ने के आरोप में जांच अधिकारी के खिलाफ FIR का आदेश

हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के चौदह साल बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आठ लोगों को बरी किया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला जांच अधिकारी द्वारा पेश किए गए मनगढ़ंत सबूतों पर आधारित था।इस बीच दोषियों में से एक की मौत हो गई, जबकि दो ने अपनी उम्रकैद की सज़ा पूरी की और रिहा हो गए।इस मामले के महत्व को देखते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र की डिवीज़न बेंच ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया कि वे उक्त जांच अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करें।कोर्ट ने निर्देश देते...

प्राइवेट ट्रस्ट के साथ सर्विस विवाद रिट अधिकार क्षेत्र के तहत सुनवाई योग्य नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
प्राइवेट ट्रस्ट के साथ सर्विस विवाद रिट अधिकार क्षेत्र के तहत सुनवाई योग्य नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 'द ट्रिब्यून ट्रस्ट' के कर्मचारी द्वारा दायर रिट याचिका खारिज की। कोर्ट ने माना कि किसी निजी संस्था के साथ पूरी तरह से संविदात्मक रोज़गार से उत्पन्न होने वाले सर्विस विवाद संविधान के अनुच्छेद 226/227 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र के दायरे में नहीं आते।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा,"प्रतिवादी-ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, जिसके अपने नियम हैं, जो उसके कर्मचारियों की सेवा के आंतरिक विनियमन के लिए बनाए गए हैं। इसके अलावा... किसी भी वैधानिक नियम के अभाव में...

इनका करने का अधिकार: - भारतीय बैंकिंग को निर्दोष अकाउंट-होल्डर्स की सुरक्षा के लिए सहमति की आवश्यकता क्यों है?
इनका करने का अधिकार: - भारतीय बैंकिंग को निर्दोष अकाउंट-होल्डर्स की सुरक्षा के लिए 'सहमति' की आवश्यकता क्यों है?

वर्तमान में, एक खाताधारक के पास अपने खाते में आने से पहले भुगतान को स्वीकार करने या अस्वीकार करने के लिए कोई कानूनी या तकनीकी एजेंसी नहीं है. आधुनिक भारतीय न्यायशास्त्र के परिदृश्य में, यूपीआई (एकीकृत भुगतान इंटरफेस) के तेजी से विकास को अक्सर वित्तीय समावेशन और डिजिटल दक्षता की जीत के रूप में सराहा जाता है। हालांकि, इस "लेन-देन में आसानी" की सतह के नीचे एक खतरनाक वैधानिक कमी है, जो इनबाउंड भुगतान के लिए सहमति तंत्र की अनुपस्थिति है। जबकि डिजिटल सोशल प्लेटफॉर्म अनुमति के आधार पर बनाए गए हैं,...

आरोप वाला गिरफ़्तारी मेमो अनुच्छेद 22(1) की गिरफ़्तारी के आधार बताने की शर्त को पूरा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट
आरोप वाला गिरफ़्तारी मेमो अनुच्छेद 22(1) की गिरफ़्तारी के आधार बताने की शर्त को पूरा करता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फ़ैसला दिया कि अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ़्तार व्यक्ति को गिरफ़्तारी के आधार बताने की संवैधानिक शर्त तब पूरी मानी जाती है, जब गिरफ़्तारी मेमो, जिसमें गिरफ़्तारी का आधार बनाने वाले ज़रूरी तथ्यात्मक आरोप शामिल हों, आरोपी को दे दिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि इसका मकसद आरोपों के सार की सही जानकारी देना है, न कि गिरफ़्तारी मेमो से अलग कोई दूसरा दस्तावेज़ देना। इसी आधार पर कोर्ट ने गिरफ़्तारी और उसके बाद की रिमांड को कानूनी तौर पर सही ठहराया।जस्टिस आशीष नैथानी ने 09.10.2024 के...