हाईकोर्ट
महाराष्ट्र SC/ST आयोग के सदस्यों की नियुक्ति की गई: राज्य ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति की मांग करने वाली जनहित याचिका का निपटारा किया, जिसमें कहा गया कि राज्य सरकार ने सदस्यों की नियुक्ति की है।जस्टिस अराधे और जस्टिस आरिफ एस. डॉक्टर की खंडपीठ ने राज्य के हलफनामे पर गौर किया, जिसमें संकेत दिया गया कि 16 सितंबर 2024 के सरकारी संकल्प (जीआर) के माध्यम से आयोग में अध्यक्ष और 2 सदस्यों की नियुक्ति की गई। हलफनामे में कहा गया कि आयोग अभी कार्यरत है।आयोग का गठन 01 मार्च 2020 को...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को उत्तर प्रदेश-हरियाणा सीमा पर विवादित स्थलों पर सीमा स्तंभ निर्माण के लिए धनराशि जारी करने का निर्देश दिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार को यूपी-हरियाणा सीमा पर विवादित स्थलों पर सीमा स्तंभ लगाने के लिए धनराशि जारी करने का निर्देश दिया है। जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस विकास सूरी ने कहा, "इस संबंध में वित्तीय अनुदान तत्काल जारी किया जाए, ताकि आज से तीन सप्ताह की अवधि के भीतर हरियाणा और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों में सीमा स्तंभ लगाने का काम चार सप्ताह की अवधि के भीतर पूरा हो जाए।"अदालत दोनों राज्यों के किसानों के बीच संभावित विवादों को रोकने के लिए यूपी-हरियाणा सीमा पर...
'X' Posts Case | 'पुलिस ने नरसिंहानंद के खिलाफ कार्रवाई की; जुबैर ने नैरेटिव बनाया, लोगों को भड़काने की कोशिश की': इलाहाबाद हाईकोर्ट में बोली यूपी सरकार
ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की याचिका का विरोध करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में कहा कि राज्य पुलिस ने नरसिंहानंद के खिलाफ़ कार्रवाई की थी और अदालतों ने ही उन्हें ज़मानत दी।उक्त याचिकिा में मोहम्मद जुबैन ने यति नरसिंहानंद के 'अपमानजनक' भाषण पर उनके कथित 'X' पोस्ट (पूर्व में ट्विटर) पर यूपी पुलिस की FIR के खिलाफ़ याचिका दायर की।एडिशन एडवोकेट जनरल मनीष गोयल के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा कि जुबैर ने अपने X पोस्ट के ज़रिए नैरेटिव बनाया और लोगों को भड़काने की कोशिश की।...
सीमा शुल्क विभाग को जब्त संपत्ति के निपटान के बारे में पक्षकारों को ईमेल और मोबाइल दोनों माध्यमों से सूचित करना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि सीमा शुल्क विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हिरासत में ली गई या जब्त की गई संपत्ति के निपटान की सूचना संबंधित पक्ष को ईमेल और मोबाइल नंबर दोनों के माध्यम से दी जाए। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस धर्मेश शर्मा की खंडपीठ ने तर्क दिया कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि संपत्ति के कब्जे के खिलाफ न्यायालय या न्यायाधिकरण में सफल होने वाले पक्ष को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।यह अवलोकन एक ऐसे मामले से निपटने के दौरान किया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता- एक रूसी नागरिक से...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने ईडी को पीएमएलए के तहत मामले की जांच के लिए आधार डेटाबेस तक पहुंच की अनुमति दी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया है और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को निर्देश दिया है कि वह धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामले की जांच करते समय ईडी को 21 व्यक्तियों के आधार डेटाबेस की जांच करने की अनुमति दे, जिसमें पहचान संबंधी जानकारी या प्रमाणीकरण रिकॉर्ड शामिल हैं। एकल न्यायाधीश जस्टिस हेमंत चंदनगौदर ने याचिका को स्वीकार करते हुए कहा, "धन शोधन के अपराध की जांच वैध राज्य हित है और याचिकाकर्ता को पीएमएलए के तहत अपराध की जांच...
मद्रास हाईकोर्ट ने अवैध समुद्री रेत खनन की सीबीआई जांच के आदेश दिए, कहा- 'राजनीतिक सांठगांठ' से इनकार नहीं किया जा सकता
मद्रास हाईकोर्ट ने समुद्र तट की रेत के बड़े पैमाने पर अवैध खनन की सीबीआई जांच का आदेश दिया है, जिससे तमिलनाडु राज्य के खजाने को 5,832 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। जस्टिस एसएम सुब्रमण्यम और जस्टिस एम जोतिरामन की खंडपीठ ने कहा कि मुद्दे के तथ्य - खनन पट्टे/अनुमोदन प्रदान करना, खनन पट्टे में मोनाजाइट को अवैध रूप से शामिल करने की अनुमति देना, कुशल निगरानी की कमी, मनमाना रॉयल्टी निपटान, उचित कार्रवाई शुरू न करना आदि से पता चलता है कि राजनीतिक, कार्यकारी और निजी खनन कंपनियों के बीच मिलीभगत,...
UCC को चुनौती | उत्तराखंड हाईकोर्ट ने लिव इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन को चुनौती देने पर कहा- आप बिना शादी किए निर्लज्जता से साथ रहते हैं, आपकी किस निजता का उल्लंघन होता है?
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य में लागू किए गए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के विशिष्ट प्रावधानों, विशेष रूप से लिव-इन संबंधों के अनिवार्य पंजीकरण को दी गई चुनौती पर सुनवाई की। प्रावधान के खिलाफ रिट याचिका एक 23 वर्षीय व्यक्ति ने दायर की है। सुनवाई के दरमियान मौखिक रूप से टिप्पणी की कि राज्य सरकार लिव-इन रिलेशनशिप पर प्रतिबंध नहीं लगा रही, बल्कि केवल उन्हें पंजीकृत करने का प्रावधान कर रही है, जो कि ऐसे संबंधों की घोषणा के बराबर नहीं है।चीफ जस्टिस जी नरेंदर ने कहा, "राज्य ने यह नहीं कहा है कि आप...
शिक्षित वादी को मुकदमेबाजी पर नजर रखनी चाहिए, वकील के फीस चेक पर हस्ताक्षर करने मात्र से उसका कर्तव्य समाप्त नहीं हो जाता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि शिक्षित वादी को अपने मुकदमेबाजी पर नजर रखनी चाहिए और वकील के फीस चेक पर हस्ताक्षर करने मात्र से उसका कर्तव्य समाप्त नहीं हो जाता।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि न्यायालय को वादी की सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक स्थिति को ध्यान में रखना चाहिए।कोर्ट ने कहा,“शिक्षित शहरी वादी इस नियम के समान संरक्षण का दावा नहीं कर सकता, जैसा कि अशिक्षित देहाती वादी को दिया जाता है, क्योंकि जहां अशिक्षित वादी पूरी तरह से अपने वकील पर निर्भर करता है और अपने मुकदमेबाजी पर नजर रखने में...
चाइल्ड केयर लीव विशेषाधिकार अवकाश के समान, न कि अप्रतिबंधित अधिकार: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा- राज्य को अधिकतम 120 दिनों की छुट्टी देने का अधिकार नहीं
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि चाइल्ड केयर लीव विशेषाधिकार प्राप्त अवकाश के समान है। इसलिए बाद की तरह हीइसे अप्रतिबंधित अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता है। यदि प्रशासनिक विवेकाधिकार की आवश्यकता हो तो इसे 120 दिनों तक के लिए स्वीकृत किया जा सकता है, लेकिन इसे इतनी अवधि के लिए देने का कोई अधिकार नहीं है।जस्टिस अरुण मोंगा की पीठ महिला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो बीकानेर के महारानी सुदर्शन महिला महाविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थी और उसने अपने 2 वर्षीय...
एक मुद्दे पर कारण बताओ नोटिस को रद्द करने का मतलब यह नहीं कि अन्य मांगों पर निर्णय नहीं लिया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मुद्दे पर उच्च प्राधिकारी द्वारा कारण बताओ नोटिस को खारिज कर दिया जाता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि शो कॉज नोटिस में उठाए गए अन्य मुद्दों पर निर्णय नहीं लिया जा सकता है। यह अवलोकन जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस धर्मेश शर्मा की पीठ ने एक ऐसे मामले में किया, जहां शो कॉज नोटिस को हाईकोर्ट की एक अन्य खंडपीठ द्वारा खारिज कर दिया गया था, जहां तक सामग्री की मुफ्त आपूर्ति पर शुल्क से संबंधित मुद्दे का संबंध था। हालांकि, सीईएसटीएटी ने पूरे शो कॉज नोटिस को...
सरकारी कर्मचारी प्रमाण-पत्र जमा करने के 5 साल बाद सेवा रिकॉर्ड में जन्मतिथि नहीं बदल सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने माना कि सरकारी कर्मचारी द्वारा घोषित जन्मतिथि और उसके बाद उपयुक्त प्राधिकारी द्वारा सेवा पुस्तिका या किसी अन्य रिकॉर्ड में दर्ज की गई जन्मतिथि में सरकार के आदेश के बिना किसी भी तरह का परिवर्तन नहीं किया जा सकता सिवाय लिपिकीय त्रुटि के।अदालत ने यह भी माना कि प्रशासनिक विभाग द्वारा कर्मचारी की जन्मतिथि में तब तक कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता, जब तक कि कर्मचारी ने पांच साल की अवधि के भीतर सरकार से संपर्क न किया हो और यह साबित न कर दिया हो कि ऐसी गलती वास्तविक और नेकनीयत...
अपीलकर्ता की मृत्यु के कारण पावर ऑफ अटॉर्नी निष्क्रिय हो जाती है, कानूनी प्रतिनिधि मामले को जारी रखने के लिए अनुमति न ले सकने पर कानूनी सहायता वकील की नियुक्ति नहीं की जा सकती: पी एंड एच हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि याचिका के लंबित रहने के दरमियान अपीलकर्ता की मृत्यु होने पर पावर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) निष्क्रिय हो जाती है, इसलिए यदि कानूनी प्रतिनिधि अपील जारी रखने के लिए न्यायालय से अनुमति लेने में विफल रहते हैं तो मृतक अपीलकर्ता की ओर से न्यायालय द्वारा कानूनी सहायता नियुक्त नहीं की जा सकती। ये टिप्पणियां दो अपीलों की सुनवाई के दरमियान की गईं, जिनमें जुर्माने के भुगतान पर रोक लगा दी गई थी और याचिका के लंबित रहने के दौरान अपीलकर्ताओं की मृत्यु हो गई।न्यायालय ने कहा कि...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने जाति प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए जिला समिति को किया निर्देशित
कर्नाटक हाईकोर्ट ने माना है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी के मामले में, जिसका जाति प्रमाण पत्र तहसीलदार-राज्य सरकार द्वारा जारी किया जाता है, यह जिला जाति सत्यापन समिति होगी जो ऐसे केंद्र सरकार के कर्मचारी या प्रस्तावित केंद्र सरकार कर्मचारी के प्रमाण पत्र को सत्यापित करने के लिए "सही प्राधिकारी" है।जस्टिस सूरज गोविंदराज ने 11 जनवरी, 2024 के आदेश को चुनौती देने वाली संगप्पा एम बागवाड़ी द्वारा दायर समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामले को जिला जाति सत्यापन समिति को नहीं भेजा जा सकता है, या...
पत्नी द्वारा बच्चों की हत्या को क्रूरता मानते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पति को तलाक की मंजूरी दी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत 'क्रूरता' के आधार पर एक ऐसे व्यक्ति से तलाक मंजूर कर लिया है जिसकी पत्नी को उनके बच्चों की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था।जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस हर्ष बंगर की खन्द्द्पेएथ ने कहा, 'प्रतिवादी को दोषी ठहराए जाने और हत्या के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा ने अपीलकर्ता के मन में मानसिक पीड़ा, पीड़ा और आशंका पैदा कर दी है कि प्रतिवादी के साथ रहना सुरक्षित नहीं है और यह स्पष्ट रूप से क्रूरता के समान है' अदालत...
India's Got Latent Row| यूट्यूबर आशीष चंचलानी ने FIR में अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया
यूट्यूबर आशीष चंचलानी ने इंडियाज गॉट लेटेंट के एक एपिसोड में कथित अश्लील और विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर गुवाहाटी पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज की गई FIR के संबंध में अग्रिम जमानत के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट का रुख किया।12 फरवरी को दर्ज की गई FIR में धारा- 79, 95, 294 और 296 BNS को आईटी अधिनियम, 2000 की धारा 67, सिनेमैटोग्राफ अधिनियम 1952 की धारा 4/7 को महिलाओं के अशिष्ट प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4/6 के साथ पढ़ा गया।आलोक बोरूआ की शिकायत पर दर्ज की गई FIR में आरोप लगाया गया कि...
Narsinghanand Case | क्या राज्य की कार्रवाई से किसी नागरिक का असंतुष्ट होना 'विध्वंसक' गतिविधि माना जा सकता है? : जुबैर की याचिका पर हाईकोर्ट ने पूछा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ़्तारी पर रोक को 18 फ़रवरी तक बढ़ा दिया। यह रोक यति नरसिंहानंद के 'अपमानजनक' भाषण पर उनके कथित X पोस्ट (पूर्व में ट्विटर) को लेकर उनके खिलाफ़ दर्ज की गई FIR के सिलसिले में लगाई गई।जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील से पूछा कि क्या राज्य की कार्रवाई से किसी नागरिक का असंतुष्ट होना धारा 152 BNS के तहत विध्वंसक गतिविधि माना जा सकता है।संदर्भ के लिए, यह...
राजस्व नियमों के तहत भूमि अनुदान समिति द्वारा की गई सिफारिश का पालन करना और प्रमाण पत्र जारी करना तहसीलदार का कर्तव्य: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार भूमि अनुदान समिति भूमि अनुदान के लिए सिफारिश जारी करती है तो तहसीलदार का कर्तव्य है कि वह इसे स्वीकार करे और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सगुवली चिट (अनुदान प्रमाण पत्र) जारी करने के लिए आगे बढ़े।जस्टिस सचिन शंकर मगदुम ने मुनियप्पा ए वी नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया, जिसने अपने पिता के पक्ष में किए गए अनुदान आदेश का संज्ञान लेते हुए तहसीलदार को विषय भूमि के संबंध में सगुवली चिट जारी करने का निर्देश देने के लिए अदालत का...
Deportation From USA | पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फर्जी ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ दायर याचिका पर निर्णय लेने का निर्देश दिया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारियों को फर्जी ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा पंजाब से संयुक्त राज्य अमेरिका में अवैध आव्रजन को रोकने के लिए पंजाब में आव्रजन जांच चौकी स्थापित करने की मांग करने वाली याचिका पर एक महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस हरमीत सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को उचित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन दायर करने की सिफारिश की। न्यायालय ने अधिकारियों को 30 दिनों में अभ्यावेदन पर स्पीकिंग ऑर्डर पारित करने और उसके...
वेतन आयोग के कामकाज में अदालत का हस्तक्षेप नहीं कर सकती: दिल्ली हाईकोर्ट ने वेतन समानता की याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस सी हरिशंकर और जस्टिस अजय दिगपॉल की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को सलाहकार (पोषण) और सलाहकार (होम्योपैथी) के समान वेतन नहीं दिया जा सकता। बेंच ने कहा कि चूंकि पद अलग-अलग थे, इसलिए यह उम्मीद नहीं की जा सकती है कि कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले कर्तव्यों की प्रकृति समान हो सकती है और इसलिए, याचिकाकर्ता को वेतनमान देना जो अन्य पदों के बराबर था, संभव नहीं होगा। खंडपीठ ने आगे फैसला सुनाया कि वेतन आयोग जैसे विशेषज्ञ निकायों के प्रांत के भीतर आने वाले मामलों में अदालतों...
ICC POSH अधिनियम के तहत किसी शिकायत पर तब तक कार्यवाही नहीं कर सकता, जब तक उसमें यौन उत्पीड़न का आरोप न हो: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने माना कि आंतरिक शिकायत समिति ऐसी शिकायतों पर कार्यवाही नहीं कर सकती, जिसमें लगाए गए आरोप कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH अधिनियम) की धारा 2(n) के तहत 'यौन उत्पीड़न' का गठन नहीं करते हैं। जस्टिस डीके सिंह ने कहा कि ऐसे मामलों में संज्ञान लेने के लिए अधिकार क्षेत्र मौजूद नहीं है।कोर्ट ने कहा,“जब शिकायत/आरोप POSH अधिनियम, 2013 की धारा 2(n) के तहत परिभाषित "यौन उत्पीड़न" का गठन नहीं करते हैं तो ऐसी शिकायत पर संज्ञान लेने और...

















