हाईकोर्ट

स्वतंत्र इच्छा, अल्लाह के एक होने और मुहम्मद के उसका पैगम्बर होने का यकीन करने पर ही इस्लाम में परिवर्तित हुआ जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
स्वतंत्र इच्छा, 'अल्लाह' के एक होने और 'मुहम्मद' के उसका पैगम्बर होने का यकीन करने पर ही इस्लाम में परिवर्तित हुआ जा सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा इस्लाम में धर्म परिवर्तन तभी वैध माना जा सकता है, जब वह वयस्क हो, स्वस्थ दिमाग वाला हो और अपनी स्वतंत्र इच्छा से तथा "ईश्वर (अल्लाह) की एकता" और "मुहम्मद के पैगम्बर चरित्र" में अपने विश्वास और आस्था के कारण इस्लाम धर्म अपनाता हो।न्यायालय ने आगे कहा कि कोई भी धार्मिक परिवर्तन तभी वैध माना जाता है, जब मूल धर्म के सिद्धांतों के स्थान पर किसी नए धर्म के सिद्धांतों में "हृदय परिवर्तन" और "ईमानदारी से विश्वास" हो।जस्टिस मंजू रानी चौहान की पीठ ने कहा कि...

राजस्थान हाईकोर्ट ने COVID-19 के दौरान प्राइवेट स्कूल को बिना प्रक्रिया के बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को बहाल करने का आदेश दिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने COVID-19 के दौरान प्राइवेट स्कूल को बिना प्रक्रिया के बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को बहाल करने का आदेश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने भारतीय विद्या भवन शैक्षणिक ट्रस्ट द्वारा संचालित भारतीय विद्या भवन विद्याश्रम स्कूल के हॉस्टल-मेस कर्मचारियों को बहाल करने का निर्देश दिया, जिन्हें निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना बर्खास्त कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि हॉस्टल मेस बंद करने का निर्णय पद को समाप्त करने के समान नहीं है।ऐसा करते समय न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षणिक संस्थान अधिनियम, 1989 की धारा 18 के अनुसार प्रक्रिया लागू है, जिसका वर्तमान मामले में पालन नहीं किया गया, क्योंकि...

अनुबंध के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर बताना और शिकायत करना कि टैक्स अधिकारियों ने ऐसे आंकड़ों के आधार पर अपना निर्णय लिया, राज्य के साथ धोखाधड़ी: कर्नाटक हाईकोर्ट
अनुबंध के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर बताना और शिकायत करना कि टैक्स अधिकारियों ने ऐसे आंकड़ों के आधार पर अपना निर्णय लिया, राज्य के साथ धोखाधड़ी: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि अनुबंध के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर बताना और शिकायत करना कि कर अधिकारियों ने ऐसे आंकड़ों के आधार पर अपना निर्णय लिया है, राज्य के साथ धोखाधड़ी है।जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित और जस्टिस रामचंद्र डी. हुद्दार की खंडपीठ ने कहा,"बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए आंकड़ों के आधार पर अनुबंध की उच्च राशि का दावा करना और उसके बाद शिकायत करना कि कर अधिकारियों ने ऐसे आंकड़ों के आधार पर अपना निर्णय लिया है, वस्तुतः राज्य के साथ दो तरह से धोखाधड़ी है। ऐसे करदाता को इस न्यायालय से किसी तरह की राहत नहीं...

गैरकानूनी धर्म परिवर्तन गंभीर अपराध, न्यायालय पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर कार्यवाही रद्द नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
गैरकानूनी धर्म परिवर्तन गंभीर अपराध, न्यायालय पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर कार्यवाही रद्द नहीं कर सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि गैरकानूनी धर्म परिवर्तन गंभीर अपराध है और न्यायालय पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर कार्यवाही रद्द नहीं कर सकता।न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि बलात्कार के अपराध के संबंध में कोई भी समझौता, जो किसी महिला के सम्मान के खिलाफ हो, जो उसके जीवन की जड़ को हिलाकर रख दे और उसके सर्वोच्च सम्मान को गंभीर आघात पहुंचाए, उसके सम्मान और गरिमा दोनों को ठेस पहुंचाए, न्यायालय को “स्वीकार्य नहीं” है।जस्टिस मंजू रानी चौहान की पीठ ने तौफीक अहमद द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) की...

कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग का विस्तार करने के लिए पर्याप्त तैयारी जरूरी, सर्वव्यापी निर्देश न्यायिक प्रक्रिया की सुरक्षा को कमजोर कर सकते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट
कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग का विस्तार करने के लिए पर्याप्त तैयारी जरूरी, सर्वव्यापी निर्देश न्यायिक प्रक्रिया की सुरक्षा को कमजोर कर सकते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग के विस्तार के लिए पर्याप्त तैयारी आवश्यक है। इस संबंध में व्यापक निर्देश जारी करने से न्यायिक प्रक्रियाओं की गुणवत्ता, गोपनीयता और सुरक्षा को नुकसान पहुंच सकता है। जस्टिस सचिन दत्ता ने समन्वय पीठ के फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली हाईकोर्ट, प्रशासनिक पक्ष से, अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू करने या उसका विस्तार करने की पहल से जुड़ी तार्किक और अवसंरचनात्मक चुनौतियों को दूर करने में सक्रिय रूप से...

Sec. 125 CrPC | इद्दत अवधि के बावजूद यदि तलाकशुदा मुस्लिम महिला स्वयं का पालन-पोषण करने में असमर्थ हो, तो उसे भरण-पोषण का अधिकार: पटना हाईकोर्ट
Sec. 125 CrPC | इद्दत अवधि के बावजूद यदि तलाकशुदा मुस्लिम महिला स्वयं का पालन-पोषण करने में असमर्थ हो, तो उसे भरण-पोषण का अधिकार: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने अपने हालिया फैसले में दोहराया है कि यदि किसी मुस्लिम महिला के पूर्व पति ने इद्दत अवधि के दौरान या उसके बाद उसके जीवनयापन के लिए उचित प्रावधान नहीं किया है, तो वह Cr.PC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने की हकदार होगी, भले ही उसे तलाक दिया जा चुका हो।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 की उपस्थिति Cr.PC की धारा 125 के तहत उपलब्ध कानूनी उपचारों को समाप्त नहीं करती।सुप्रीम कोर्ट के इस विषय पर पूर्व निर्णयों का हवाला देते...

पूर्व एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह के कार्यकाल में लड़ी गईं पंजाब सरकार की कानूनी लड़ाइयां
पूर्व एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह के कार्यकाल में लड़ी गईं पंजाब सरकार की कानूनी लड़ाइयां

ऐमन जे चिस्तीपूर्व महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह के 18 महीने के कार्यकाल के दौरान, पंजाब सरकार ने न्यायालय में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम और चुनौतियों का सामना किया। किसानों के विरोध से लेकर चुनावों में सत्ताधारी पार्टी द्वारा सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों तक, सिंह ने राज्य की कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूर्व महाधिवक्ता के कार्यकाल के दौरान कानूनी घटनाक्रम और आगे आने वाली चुनौतियों पर एक नज़र डालते हैं। चुनावहाल के दिनों में पंजाब के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण मुद्दों में से एक पंचायत चुनाव था,...

पहली पत्नी से साबित पारंपरिक तलाक के बिना धोखे से साथ रहना बलात्कार के समान: तेलंगाना हाईकोर्ट
पहली पत्नी से साबित पारंपरिक तलाक के बिना धोखे से साथ रहना बलात्कार के समान: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक मामले में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि यदि बिना पहली पत्नी से सिद्ध पारंपरिक तलाक के धोखे पर आधारित सहवास किया जाता है, तो यह बलात्कार के समान है। जस्टिस मौसुमी भट्टाचार्य और जस्टिस बी.आर. मधुसूदन राव की खंडपीठ ने कहा, "1955 अधिनियम की धारा 5(i) को धारा 11 के साथ पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि यदि पति पहले से विवाहित है, तो उसकी दूसरी शादी प्रारंभ से ही शून्य होती है और उसे कानून में कोई मान्यता प्राप्त नहीं होती। चूंकि प्रतिवादी को यह ज्ञात था कि उसकी पहली पत्नी जीवित...

अन्य सह-आरोपियों को फंसाने वाले अभियुक्त द्वारा दिए गए बयान को जांच में सुराग के रूप में लिया जा सकता है, साक्ष्य अधिनियम की धारा 30 के तहत स्वीकार्य: एपी हाईकोर्ट
अन्य सह-आरोपियों को फंसाने वाले अभियुक्त द्वारा दिए गए बयान को जांच में 'सुराग' के रूप में लिया जा सकता है, साक्ष्य अधिनियम की धारा 30 के तहत स्वीकार्य: एपी हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने माना है कि पूछताछ के दौरान अभियुक्त द्वारा दिए गए इकबालिया बयानों पर विचार किया जा सकता है या अन्य सह-अभियुक्तों से जुड़ने के लिए उन पर गौर किया जा सकता है और जांच में सुराग प्रदान करने के लिए इस तरह के प्रकटीकरण बयान पर विचार किया जा सकता है। जस्टिस टी मल्लिकार्जुन राव ने आगे कहा कि इस तरह का बयान भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 30 के तहत स्वीकार्य है। धारा 30 में साबित इकबालिया बयान पर विचार करने का प्रावधान है, जो इसे करने वाले व्यक्ति और उसी अपराध के लिए संयुक्त रूप...

S.482 CrPC | न्यायालयों का कर्तव्य है कि वे आपराधिक मामलों में दुर्भावनापूर्ण इरादे की जांच करने के लिए समग्र परिस्थितियों की जांच करें: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
S.482 CrPC | न्यायालयों का कर्तव्य है कि वे आपराधिक मामलों में दुर्भावनापूर्ण इरादे की जांच करने के लिए समग्र परिस्थितियों की जांच करें: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने माना कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत अपनी अंतर्निहित शक्ति का प्रयोग करते हुए न्यायालय का कर्तव्य है कि वह FIR या शिकायत में केवल आरोपों से परे जाकर यह निर्धारित करने के लिए उपस्थित परिस्थितियों का आकलन करे कि क्या आपराधिक कार्यवाही दुर्भावनापूर्ण तरीके से शुरू की गई है।जस्टिस संजय धर ने इस बात पर जोर दिया कि यदि ऐसा प्रतीत होता है कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए हथियार के रूप में किया जा रहा है तो न्यायालय को न्यायिक...

A&C Act  की धारा 11 के तहत दायर की गई पिछली याचिका को बिना शर्त वापस लेने से उसी कारण से अगली याचिका पर रोक लगती है: दिल्ली हाईकोर्ट
A&C Act की धारा 11 के तहत दायर की गई पिछली याचिका को बिना शर्त वापस लेने से उसी कारण से अगली याचिका पर रोक लगती है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने कहा कि यदि मध्यस्थ की नियुक्ति के लिए याचिका को नई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता के बिना वापस ले लिया जाता है तो CPC के आदेश 23 नियम 1(4) के आवेदन से, उसी कारण से अगली याचिका पर रोक लग जाएगी।तथ्ययाचिकाकर्ता और प्रतिवादी नंबर 1 के बीच अनुबंध, स्टाफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बिल्डिंग और अन्य सहायक कार्यों के निर्माण से संबंधित था, जिसकी कुल अनुबंध कीमत 13.57 करोड़ रुपये है। प्रतिवादी नंबर 2 को प्रतिवादी नंबर 1 द्वारा परियोजना प्रबंधन सलाहकार (PMC) के...

कस्टम डिपार्टमेंट वैधानिक तरीके से जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का डेटा क्लोन कर सकता है, उपकरणों को रखने की जरूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
कस्टम डिपार्टमेंट वैधानिक तरीके से जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का डेटा क्लोन कर सकता है, उपकरणों को रखने की जरूरत नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने सीमा शुल्क विभाग से कहा है कि वह तस्करी और अधिनियम के तहत अन्य उल्लंघनों में कथित रूप से शामिल व्यक्तियों के जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से आवश्यक डेटा को क्लोन करे, न कि अभियोजन के दौरान ऐसे उपकरणों को अपने पास रखे। ज‌स्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह की प्रथा न केवल यह सुनिश्चित करेगी कि जब्त किए गए उपकरण पुराने हो जाने के कारण विभाग डेटा न खोए, बल्कि यह डेटा को जांच अधिकारियों के लिए आसानी से सुलभ भी बनाएगा।कोर्ट ने कहा, "प्रतिवादी...

राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकूल न्यायालय आदेशों के बावजूद शैक्षणिक मानदंडों का हवाला देते हुए सरकारी कर्मचारी के नियमितीकरण को वापस लेने का आदेश दिया, 2 लाख का जुर्माना लगाया
राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकूल न्यायालय आदेशों के बावजूद शैक्षणिक मानदंडों का हवाला देते हुए सरकारी कर्मचारी के नियमितीकरण को वापस लेने का आदेश दिया, 2 लाख का जुर्माना लगाया

राजस्थान हाईकोर्ट ने शैक्षणिक योग्यता पूरी न करने के कारण एक सरकारी कर्मचारी के नियमितीकरण को वापस लेने के आदेश रद्द कर दिया, यह देखते हुए कि यह आदेश न केवल न्यायालय की खंडपीठ के स्पष्ट निर्देशों के विरुद्ध था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था, बल्कि न्यायिक मिसालों का भी उल्लंघन करता है।ऐसा करते हुए न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता की योग्यता का मुद्दा मुकदमे के पहले दौर के दौरान नहीं उठाया गया। न्यायालय ने आगे कहा कि मुकदमे के पहले चरणों के दौरान इस मुद्दे को उठाने में विफलता योग्यता...

दिल्ली हाईकोर्ट ने बिना किसी प्रतिबंध के रक्तदान के लिए 24 घंटे सेवा प्रदान करने की जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने बिना किसी प्रतिबंध के रक्तदान के लिए 24 घंटे सेवा प्रदान करने की जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने बिना किसी प्रतिबंध के रक्तदान (Blood Donation) के लिए 24 घंटे सेवा प्रदान करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया।चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के माध्यम से केंद्र से जवाब मांगा।इस मामले की सुनवाई 09 जुलाई को होगी।यह याचिका वकील विशाल अरुण मिश्रा ने दायर की, जिन्होंने तर्क दिया कि स्वैच्छिक रक्तदाताओं को रक्त बैंक के सीमित...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हिंदू संगठन को मालेगांव बम-विस्फोट की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को सम्मानित करने की अनुमति दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हिंदू संगठन को मालेगांव बम-विस्फोट की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को सम्मानित करने की अनुमति दी

यह देखते हुए कि आजादी के 78 साल बाद भारतीय आबादी समझदार और शिक्षित है, बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को हिंदू संगठन को "विराट हिंदू संत सम्मेलन" आयोजित करने और 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में मुख्य आरोपी दक्षिणपंथी उग्रवादी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को "हिंदू वीर पुरस्कार" प्रदान करने की अनुमति दी।जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस अश्विन भोबे की खंडपीठ ने हिंदू सकल समाज को 30 मार्च को नासिक जिले के मालेगांव में आयोजित होने वाले अपने समारोह को जारी रखने की अनुमति दी, जिस दिन राज्य "गुड़ी पड़वा" (मराठी...

NEET-UG | दिल्ली हाईकोर्ट ने काउंसलिंग से पहले एससी-बच्चों/महिलाओं की सीटों को सामान्य श्रेणी में बदलने के MCC के फैसले को वापस लेने के खिलाफ याचिका खारिज की
NEET-UG | दिल्ली हाईकोर्ट ने काउंसलिंग से पहले एससी-बच्चों/महिलाओं की सीटों को सामान्य श्रेणी में बदलने के MCC के फैसले को वापस लेने के खिलाफ याचिका खारिज की

एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश नहीं पा सके नीट-यूजी उम्मीदवार को राहत देने से इनकार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि तीसरे चरण की काउंसलिंग शुरू होने से पहले संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप आरक्षण पर कानूनी त्रुटि को ठीक करना अधिकारियों की ओर से प्रक्रियागत उल्लंघन या प्रशासनिक गलती नहीं माना जा सकता। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) और दिल्ली विश्वविद्यालय के उस निर्णय में कोई अवैधता नहीं पाते हुए, जिसमें अनुसूचित जाति-बालक/महिला (एससी-सीडब्ल्यू) सीटों को शुरू में अनारक्षित-बालक/महिला...

रिमांड के दौरान आरोपी को गिरफ्तारी के आधार पर सूचना देना वैध नहीं, पुलिस डायरी में समकालीन रिकॉर्ड जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट
रिमांड के दौरान आरोपी को गिरफ्तारी के आधार पर सूचना देना वैध नहीं, पुलिस डायरी में समकालीन रिकॉर्ड जरूरी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए गए रिमांड आवेदन के हिस्से के रूप में गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार पर सूचना देना कानून की आवश्यकताओं का अनुपालन नहीं है।जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि चूंकि गिरफ्तारी से पहले गिरफ्तारी के आधार मौजूद होने चाहिए, इसलिए पुलिस डायरी या अन्य दस्तावेज में गिरफ्तारी के आधार का समकालिक रिकॉर्ड होना चाहिए।यह देखते हुए कि जांच अधिकारी या गिरफ्तार करने वाले अधिकारी के लिए गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में न...

दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार और अश्लील तस्वीरें खींचने के आरोपी फिल्म डायरेक्टर को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार और अश्लील तस्वीरें खींचने के आरोपी फिल्म डायरेक्टर को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

बलात्कार के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले में अग्रिम जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा, जिसमें फिल्म डायरेक्टर ने कथित तौर पर पीड़िता को नायिका बनाने के बहाने बहला-फुसलाकर उसका यौन शोषण किया।जस्टिस गिरीश कठपालिया ने टिप्पणी की,"यह गिरफ्तारी के बाद याचिकाकर्ता द्वारा मांगी गई नियमित जमानत का मामला नहीं है। यह अग्रिम जमानत का मामला है, जो फिल्म डायरेक्टर द्वारा मांगा गया, जिसने कथित तौर पर एक छोटे शहर की लड़की के साथ यौन शोषण के कई कृत्य किए...